Posted on Leave a comment

Study Material IAS Exam- World after Second World war || History

Study Material IAS Exam- World after Second World war || History

Study Material IAS Exam- World after Second World war || History

World after Second World war

  • The world has been completely transformed during the years since the end of the Second World War in 1945.
  • A large number of nations in Asia and Africa which had been suffering under colonial rule emerged as independent nations.
  • The United States had emerged as the biggest power after the First World War.
  • The Soviet Union also emerged as a mighty power after the Second World War, in spite of the terrible devastation that she suffered during the war

Immediate Consequences of Second World War:

  • The first major declaration had been issued by Britain and USA in 1941.
  • It stated that Britain and the United States would not seek any territory.
  • Early in 1942 was issued, the United Nations Declaration.
  • This Declaration supported the one issued by Britain and USA earlier.

Yalta Conference

  • Early in 1945, when Germany was on the verge of defeat, the heads of the three big nations met at Yalta in the Soviet Union.
  • Here they agreed on a number of issues such as how to deal with Germany and the non-German territories which had been liberated from Germany.
  • The Yalta Conference also took the decision to set up a new organisation to replace the League of Nations.

Europe after the Second World War

  • Poland, Hungary, Romania, Bulgaria and Czechoslovakia had been liberated from German occupation by the Soviet armies.
  • By the end of 1948, the governments of all these countries were dominated by the Communist parties which was a significant development after the Second World War.

Study Material IAS

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया

  • वर्ष 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद के वर्षों में दुनिया पूरी तरह से बदल चुकी है |
  • एशिया तथा अफ्रीका में कई देशों का स्वतंत्र राष्ट्रों के रूप में उदय हुआ जो पहले औपनिवेशिक शासन से पीड़ित थे |
  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राज्य महाशक्ति के रूप में उभरा |
  • द्वितीय विश्व युद्ध में कई तबाहियों का सामना करने के बावजूद द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ भी एक शक्तिशाली ताकत के रूप में उभरा |

द्वितीय विश्व युद्ध के तात्कालिक परिणाम :

  • प्रथम प्रमुख घोषणा ब्रिटेन तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के द्वारा 1941 में जारी की गयी थी |
  • इसमें कहा गया था कि ब्रिटेन एवं संयुक्त राज्य किसी प्रदेश की माँग नहीं करेंगे |
  • 1942 के आरंभ में संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र जारी किया गया |
  • इस घोषणापत्र ने पूर्व में ब्रिटेन तथा संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा जारी किये गए घोषणापत्र का समर्थन किया |

याल्टा सम्मेलन :

  • 1945 के आरंभ में, जब जर्मनी हार के कगार पर था, तीन बड़े राष्ट्रों के प्रमुख सोवियत संघ के याल्टा में मिले |
  • यहाँ पर वे कई मुद्दों पर सहमत हुए जैसे कि जर्मनी से मुक्त कराये गए जर्मन एवं गैर-जर्मन क्षेत्रों का समाधान कैसे करना है |
  • याल्टा सम्मेलन में राष्ट्र संघ के स्थान पर एक नए संगठन की स्थापना का भी निर्णय लिया गया |

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप :

  • पोलैंड, हंगरी, रोमानिया, बुल्गारिया, तथा चेकोस्लोवाकिया को सोवियत संघ की सेनाओं द्वारा जर्मन कब्ज़े से मुक्त करवाया गया |
  • 1948 के अंत तक, इन सभी देशों की सरकारों पर साम्यवादी दल हावी थे जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की एक महत्वपूर्ण घटना थी |

Fall of Berlin wall in Germany:

  • The division of Germany had been a source of tension in Europe and a major factor in the Cold War.
  • East Berlin was the capital of East Germany (German Democratic Republic or GDR) while West Berlin which was located within the GDR territory was treated as a part of West Germany (Federal Republic of Germany or FRG).
  • In 1961, the GDR authorities built a wall between East and West Berlin .
  • The building of the wall became a further source of tension in Europe.

France and Italy: Rise of Communism:

France

  • In the first government formed in France after the war, the Communist Party of France was represented.
  • However, it quit the government in 1947 because of differences over economic policies and over the question of independence for the countries comprising IndoChina.

Italy:

  • In the Italian government, the Communist Party and the Socialist Party were an important force.
  • In 1946, monarchy was abolished and Italy became a republic.
  • In 1947 the Christian Democratic Party came to power and the Communist Party quit the government.

The Cold War

  • Since the end of the First World War, the United States had emerged as the strongest power in the world.
  • Her power was both in the spheres of economic and military strength.
  • After she acquired the atom bomb, the awareness of her power was further strengthened.
  • Next to the United States the mightiest power in the world after the Second World War was the Soviet Union.

जर्मनी में बर्लिन की दीवार का पतन :

  • जर्मनी का विभाजन यूरोप में तनाव तथा शीत युद्ध का मूल एवं प्रमुख कारण था |
  • पूर्वी बर्लिन पूर्वी जर्मनी ( जर्मन लोकतांत्रिक गणराज्य )  की राजधानी थी जबकि पश्चिमी बर्लिन   जो जर्मन लोकतांत्रिक गणराज्य के क्षेत्र में पड़ता था, उसे पश्चिमी जर्मनी (फ़ेडरल रिपब्लिक ऑफ़ जर्मनी )  का हिस्सा माना जाता था|
  • 1961 में, पूर्वी जर्मनी के प्राधिकरणों ने पूर्वी एवं पश्चिमी बर्लिन के बीच एक दीवार का निर्माण कर दिया |
  • इस दीवार का निर्माण यूरोप में तनाव का एक अन्य कारण बन गया |

फ्रांस एवं इटली : साम्यवाद का उदय :

फ्रांस

  • युद्ध के बाद फ्रांस में गठित पहली सरकार में फ्रांसीसी साम्यवादी पार्टी का प्रतिनिधित्व था |
  • हालाँकि, 1947 में आर्थिक नीतियों पर मतभेद  तथा इंडो-चाइना में शामिल देशों की स्वतंत्रता के मसले पर यह सरकार से बाहर हो गयी |

इटली :

  • इतालवी सरकार में, साम्यवादी दल तथा समाजवादी दल एक प्रमुख बल थे |
  • 1946 में , राजतंत्र का उन्मूलन कर दिया गया एवं इटली एक गणतंत्र बन गया |
  • 1947 में, इसाई प्रजातांत्रिक दल सत्ता में आया तथा साम्यवादी पार्टी ने सरकार का त्याग कर दिया |

शीत युद्ध :

  • प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से, संयुक्त राज्य का उदय दुनिया में महाशक्ति के रूप में हुआ |
  • वह आर्थिक एवं सैन्य दोनों क्षेत्रों में मजबूत था |
  • परमाणु बम प्राप्त करने के बाद, उसकी ताकत की अभिज्ञता और अधिक मजबूत हुई |
  • द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राज्य के बाद दूसरी महाशक्ति के रूप में सोवियत संघ उभरा |

MIlitary Blocs

NATO:

  • In 1949, North Atlantic Treaty Organization (NATO) was formed for defense against the Soviet Union.
  • The members of this alliance were the United States, Canada, Denmark, Norway, Iceland, Portugal, Britain, France, Belgium, Holland and Luxemburg.
  • Turkey, Greece, the Federal Republic of Germany and Spain became its members later.

SEATO

  • In 1954 Southeast Asia Treaty Organization (SEATO) was set up with the United States, Britain, France, Australia, New Zealand, Thailand, the Philippines and Pakistan as members.

Baghdad Pact

  • In 1955 the Baghdad Pact was brought into being.
  • It consisted of Britain, Turkey, Iraq, Pakistan and Iran.

WARSAW Pact

  • As against these Western and Western sponsored alliances, the Soviet Union and the socialist countries of Europe -Poland, Czechoslovakia, Hungary, Romania, Bulgaria and the German Democratic Republic formed the Warsaw Pact.
  • Under this pact, the Soviet Union stationed her troops in these countries.
  • However, the Soviet Union and the other members of the Warsaw Pact did not have any military bases in other parts of the world.

End of Cold War

  • In the 1970s and early 1980s, some beginnings were made to end Cold War.
  • Agreements were reached between the United States and the Soviet Union to eliminate some categories of carriers of nuclear weapons and to reduce the number of certain types of weapons installed in certain areas.

सैन्य गुट

नाटो :

  • 1949 में, सोवियत संघ के विरुद्ध रक्षा के लिए उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन का गठन किया गया  |
  • इस गठबंधन के सदस्यों में संयुक्त राज्य, कनाडा, डेनमार्क, नॉर्वे, आइसलैंड, पुर्तगाल, ब्रिटेन, फ्रांस, बेल्जियम, हॉलैंड, तथा लक्ज़मबर्ग शामिल थे |
  • तुर्की, ग्रीस तथा जर्मनी बाद में इसके सदस्य बन गए |

सीटो

  • 1954 में, दक्षिण एशिया संधि संगठन की स्थापना की गयी जिसके सदस्यों में संयुक्त राज्य, ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, थाईलैंड, फिलीपींस, तथा पाकिस्तान जैसे देश शामिल थे |

बग़दाद समझौता :

  • 1955 में, बग़दाद समझौता अस्तित्व में आया |
  • इसमें ब्रिटेन, तुर्की, इराक, पाकिस्तान तथा ईरान शामिल थे |

वारसा समझौता :

  • इन पश्चिमी देशों  एवं पश्चिम समर्थित गठबंधनों के खिलाफ सोवियत संघ तथा यूरोप के अन्य समाजवादी देश- पोलैंड, चेकोस्लोवाकिया, हंगरी, रोमानिया, बुल्गारिया, तथा जर्मन लोकतांत्रिक गणराज्य ने एक नए समझौते का निर्माण किया |
  • इस समझौते के तहत, सोवियत संघ ने अपने सैनिकों को इन देशों में तैनात कर दिया |
  • हालाँकि सोवियत संघ तथा वारसा समझौते के अन्य सदस्यों के पास विश्व के अन्य हिस्सों में सैन्य अड्डे नहीं थे |

शीत युद्ध का अंत :

  • 1970 के दशक तथा 1980 के दशक के आरंभ में, शीत युद्ध को समाप्त करने के लिए कुछ कदम उठाये गए |
  • संयुक्त राज्य तथा सोवियत संघ के बीच परमाणु हथियारों के वाहकों की कुछ श्रेणियों को समाप्त करने के लिए तथा कुछ क्षेत्रों में स्थापित किये गए निश्चित प्रकार के हथियारों को कम करने के लिए  कुछ समझौते हुए |

Join Frontier IAS Online Coaching Center to prepare for UPSC/HCS/RAS Civil Service comfortably at your home at your own pace/time.

HCS(Prelims+Mains+Interview)   HCS Prelims(Paper 1+Paper 2)

IAS+HCS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    

  RAS+IAS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    RAS(Prelims+Mains+Interview)     RAS Prelims     UPSC IAS Prelims      UPSC  IAS (Prelims+Mains+Interview)

Click Here to subscribe Our YouTube Channel

 

 

Posted on Leave a comment

IAS/HCS/PCS 2018 Study Notes || The Second World War || History

IAS/HCS/PCS 2018 Study Notes || The Second World War || History

IAS/HCS/PCS 2018 Study Notes || The Second World War || History

The Second World War

  • The Second World War, like the First, started in Europe and assumed the character of a world war.
  • In spite of the fact that Western countries had acquiesced in all the aggressions of Japan, Italy and Germany from the invasion of Manchuria to the annexation of Czechoslovakia, the fascist countries’ ambitions had not been satisfied.
  • The western policy of diverting the aggression of the fascist countries towards the Soviet Union had failed with the signing of the Soviet German Non-Aggression Pact.
  • Thus the war began in Europe between the fascist countries and the major West European Powers-Britain and France.
  • Within a few months it became a world war as it spread to more and more areas, ultimately involving almost every country in the world.

The invasion of Poland:

  • After the First World War, East Prussia had been separated from the rest of Germany.
  • The city of Danzig which separated East Prussia from the rest of Germany had been made a free city independent of German control.
  • Hitler had demanded the return of Danzig to Germany but Britain had refused to accept this demand.
  • On 1 September 1939 German armies marched into Poland.
  • On 3 September Britain and France declared war on Germany.
  • In 1940, the Baltic States of Latvia, Estonia and Lithuania which had become independent after the First World War were also occupied by the Soviet Union.
  • They along with Moldavia, became republics of USSR. In November 1939, the Soviet Union also went to war against Finland.

Conquest of Norway, Denmark, Holland, Belgium and France

  • Germany launched her invasion of Norway and Denmark on 9 April 1940 and within three weeks completed the conquest of these two countries.
  • In Norway, the German invaders were helped by Quisling, leader of Norway’s fascist party, who set up a puppet government in Norway under German occupation.
  • In early May began the invasion of Belgium and Holland which was completed before the end of May.
  • Soon the German armies marched into France and by 14 June 1940, the capital city of Paris had fallen into German hands almost without a fight.

Second World War

द्वितीय विश्व युद्ध

  • प्रथम विश्व युद्ध की तरह ही द्वितीय विश्व युद्ध भी यूरोप में शुरू हुआ तथा इसने विश्व युद्ध का स्वरुप धारण कर लिया |
  • इस तथ्य के बावजूद कि पश्चिमी देशों ने जापान, इटली एवं जर्मनी के सभी आक्रमणों,  मंचूरिया पर आक्रमण से लेकर चेकोस्लोवाकिया पर कब्ज़े तक, को चुपचाप स्वीकार कर लिया था, फासीवादी देशों की महत्वाकांक्षाएँ संतुष्ट नहीं हुईं |
  • फासीवादी देशों की आक्रामकता को सोवियत संघ की तरफ मोड़ने की पश्चिमी देशों की नीति सोवियत-जर्मन अनाक्रमण संधि पर हस्ताक्षर के साथ ही विफल हो गयी |
  • इस तरह यूरोप में फासीवादी देशों तथा प्रमुख पश्चिमी शक्तियों- ब्रिटेन एवं फ्रांस के बीच युद्ध शुरू हो गया |
  • कुछ ही महीनों के भीतर यह विश्व युद्ध बन गया क्योंकि इसका प्रसार अधिक एवं और अधिक क्षेत्रों में होता गया तथा अंततः दुनिया का लगभग हर देश इसमें शामिल हो गया |

पोलैंड पर आक्रमण :

  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद, पूर्वी प्रशिया को शेष जर्मनी से अलग कर दिया गया था |
  • दांजिग शहर जो पूर्वी प्रशिया को शेष जर्मनी से अलग करता था को जर्मन नियंत्रण से मुक्त एक स्वतंत्र शहर बना दिया  गया था |
  • हिटलर ने दांजिंग को जर्मनी को वापिस करने की माँग की थी किंतु ब्रिटेन ने इस माँग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया |
  • 1 सितम्बर 1939 को जर्मन सेनाएँ पोलैंड में घुस आयीं |
  • 3 सितम्बर को ब्रिटेन तथा फ्रांस ने जर्मनी के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा कर दी |
  • 1940 में, लातविया, तथा एस्तोनिया के बाल्टिक राज्यों पर भी सोवियत संघ ने कब्ज़ा कर लिया जो प्रथम विश्व युद्ध के बाद स्वतंत्र हो गए  थे |
  • वे मॉल्डोवा के साथ सोवियत संघ गणराज्य बन गए| नवम्बर 1939 में, सोवियत संघ फ़िनलैंड के खिलाफ भी युद्ध में चला गया |

नॉर्वे, डेनमार्क, हॉलैंड, बेल्जियम, तथा फ्रांस पर विजय :

  • जर्मनी ने नॉर्वे तथा डेनमार्क पर 9 अप्रैल 1940 को आक्रमण कर दिया तथा तीन हफ़्तों के भीतर वह इन दो देशों पर विजय प्राप्त करने में सफल रहा |
  • नॉर्वे में, नॉर्वे की फासीवादी पार्टी के नेता क्विस्लिंग ने जर्मन आक्रमणकारियों की मदद की, इसने जर्मन आधिपत्य के तहत नॉर्वे में एक कठपुतली सरकार की स्थापना की |
  • मई के आरंभ में , बेल्जियम तथा हॉलैंड पर आक्रमण शुरू हुआ जो मई के अंत के पहले पूर्ण हुआ |
  • जल्द ही जर्मन सेनाएँ फ़्रांस में प्रवेश कर गयीं तथा 14 जून 1940 तक, राजधानी पेरिस लगभग बिना लड़ाई किये ही जर्मनी के हाथों में आ चुका था |

German Invasion of Soviet Union:

  • Having conquered almost the entire Europe, except Britain, Germany attacked the Soviet Union, despite the Non-Aggression Pact, on 22 June 1941.
  • Hitler had always coveted the vast territory and resources of the Soviet Union.
  • Hitler had grossly underestimated the strength of the Soviet Union.
  • In the first phase of the war with the Soviet Union, Germany achieved significant victories.

Pearl Harbour: Entry of USA

  • In 1937, the Japanese had started another invasion of China.
  • Japan was one of the three members of the Anti Comintern Pact along with Germany and Italy.
  • In September 1940, these three countries had signed another pact which bound them together even more.
  • Japan recognized the leadership of Germany and Italy in the establishment of a new order in Europe” and Japan’s leadership was recognized for establishing a new order in Asia.
  • On 7 December 1941, the Japanese, without a declaration of war, conducted a massive raid on the American naval base at Pearl Harbor in Hawaii.

The Battle of Stalingrad:

  • In January 1942 the unity of the countries fighting against the fascist powers was cemented.
  • The representatives of 26 nations, including Britain, the United States and the Soviet Union, signed a declaration, known as the United Nations Declaration.
  • The signatories to this Declaration resolved to utilize all their resources to pursue the war until victory was achieved and to cooperate with one another against the common enemy, and promised not to have a separate peace treaty.

The Second Front:

  • The fascist countries began to suffer reverses in other areas also.
  • Japan had failed to capture Australia and Hawaii.

सोवियत संघ पर जर्मनी का आक्रमण :

  • ब्रिटेन के अलावा लगभग समूचा यूरोप जीत लेने के बाद, जर्मनी ने 22 जून 1941 को अनाक्रमण संधि होने के बावजूद सोवियत संघ पर आक्रमण कर दिया |
  • हिटलर की मंशा हमेशा से सोवियत संघ के विशाल प्रदेश तथा संसाधनों को पाने की रही थी |
  • हिटलर ने सोवियत संघ की ताकत को पूरी तरह कम करके आंका था |
  • सोवियत संघ के साथ युद्ध के प्रथम चरण में जर्मनी ने महत्वपूर्ण जीतें हासिल की |

पर्ल हार्बर : संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रवेश

  • 1937 में, जापानियों ने चीन पर एक और आक्रमण कर दिया |
  • जापान , जर्मनी और इटली के साथ ही कोमिंटर्न विरोधी समझौते के तीन सदस्यों में से एक था |
  • सितंबर 1940 में, इन तीन देशों ने एक अन्य संधि पर हस्ताक्षर किया जिसने उन्हें पहले की तुलना में और अधिक एकसाथ बाँध दिया |
  • जापान ने यूरोप में नयी व्यवस्था की स्थापना के लिए जर्मनी तथा इटली के नेतृत्व को स्वीकार कर लिया तथा एशिया में नयी व्यवस्था की स्थापना के लिए जापान के नेतृत्व को स्वीकार किया गया |
  • 7 दिसम्बर 1941 को, जापान ने बिना युद्ध की घोषणा के, हवाई के पर्ल हार्बर में अमेरिकी नौसेना के अड्डे पर  व्यापक हमला किया |

स्टालिनग्राद की लड़ाई :

  • जनवरी 1942 में, फासीवादी ताकतों के विरुद्ध लड़ रहे देशों की एकता मजबूत हुई |
  • ब्रिटेन, संयुक्त राज्य तथा सोवियत संघ समेत 26 राष्ट्रों के प्रतिनिधियों ने एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर की जिसे संयुक्त राज्य घोषणापत्र के नाम से जाना जाता है |
  • इस घोषणा के हस्ताक्षरकर्ताओं ने जबतक जीत हासिल ना हो जाए तबतक युद्ध जारी रखने के लिए अपने सभी संसाधनों के प्रयोग का तथा साझा दुश्मन के विरुद्ध एक दूसरे को सहयोग करने का संकल्प लिया तथा साथ ही वादा किया कि  पृथक शांति संधि नहीं अपनाएंगे |

द्वितीय मोर्चा :

  • फासीवादी देशों को अन्य क्षेत्रों में भी पराजय का सामना करना पड़ा |
  • जापान, ऑस्ट्रेलिया तथा हवाई पर कब्ज़ा करने में नाकाम हो गया |

End of the war in Europe:

  • After 6 June 1944, German armies had to face the forces of the Allies from three directions.
  • In Italy, the British and American troops were advancing.
  • Northern and western France and the city of Paris had been freed and the Allied troops were moving towards Belgium and Holland
  • The Soviet army from the east and other Allied troops from the west were closing on Germany.

Nuke attack on Japan:

  • After the defeat of Germany, the war in Asia continued for another three months.
  • Britain and USA had launched successful operations against Japan in the Pacific and in the Philippines and Burma.
  • In spite of serious reverses, however, the Japanese were still holding large parts of China.
  • On 6 August 1945, an atom bomb, the deadliest weapon developed during the war, was dropped on the Japanese city of Hiroshima.

The Damage caused by the war:

  • Inside Germany Jews were picked up and were exterminated.
  • The labour of the countries occupied by Germany was utilized and most horrible labour camps were started.
  • Prisoners were made to dig mass graves, were shot and then buried in those graves.
  • The kinds of tortures and brutalities that the fascists, particularly the German Nazis, perpetrated had no precedent nor did the mass scale on which they were practiced.
  • Over 50 million people perished in the Second World War.
  • Within a few years after the Second World War, some other countries also developed atomic weapons.
  • Also other nuclear weapons, thousands of times more destructive than the ones used against Japan, were developed which, if used, can completely destroy all human life on earth.

यूरोप में युद्ध का अंत :

  • 6 जून 1944 के बाद, जर्मन सेनाओं को मित्र राष्ट्रों की सेनाओं का तीन मोर्चों पर सामना करना पड़ा |
  • इटली में, ब्रितानी तथा अमेरिकी सैनिक हावी हो रहे  थे |
  • उत्तरी तथा पश्चिमी फ्रांस एवं पेरिस शहर को मुक्त करवा लिया गया था तथा मित्र राष्ट्रों के सैनिक अब हॉलैंड एवं बेल्जियम की तरफ बढ़ रहे थे |
  • पूर्व से सोवियत संघ तथा पश्चिम से मित्र राष्ट्रों की सेनाएँ जर्मनी से भिड़ रही थीं |

जापान पर परमाणु हमला :

  • जर्मनी की हार के बाद भी एशिया में युद्ध और तीन महीनों तक चलता रहा |
  • ब्रिटेन तथा जापान ने प्रशांत क्षेत्र तथा फिलीपींस एवं बर्मा में जापान के खिलाफ जंगी कार्रवाइयों को अंजाम दिया था |
  • गंभीर पराजयों के बावजूद, अभी भी चीन के विशाल क्षेत्र जापानियों के पास थे |
  • 6 अगस्त 1945 को, युद्ध के दौरान प्राणघातक हथियार, परमाणु बम को जापान के हिरोशिमा नगर पर गिराया गया |

युद्ध की वजह से हुई क्षति :

  • जर्मनी के भीतर यहूदियों को खोज-खोज कर उनका नामोनिशान मिटा दिया गया |
  • जर्मनी द्वारा अधिकृत देशों के श्रम का प्रयोग किया गया तथा सबसे भयानक श्रम शिविरों की शुरुआत की गयी |
  • बंदियों से सामूहिक कब्र खुदवाए गए , उन्हें गोली मारी गयी तथा फिर उन्हें उन्ही कब्रों में दफ़ना दिया गया |
  • फासीवादियों, विशेष रूप से नाज़ियों के द्वारा जिस तरह के कष्ट एवं यातनाएँ दी गयीं, वैसी यातनाएँ ना तो पहले कभी दी गयी थीं और ना ही इन कृत्यों को इतने बड़े पैमाने पर अंजाम दिया गया जितने बड़े पैमाने पर उन्होंने इसे अंजाम दिया |
  • द्वितीय विश्व युद्ध में 5 करोड़ से अधिक लोग मारे गए |
  • द्वितीय विश्व युद्ध के कुछ ही वर्षों के भीतर,  कुछ अन्य देशों ने भी परमाणु हथियारों को विकसित कर लिया |
  • साथ ही, जापान पर प्रयोग किये गए परमाणु हथियार की तुलना में हज़ारो गुना अधिक शक्तिशाली दूसरे परमाणु हथियारों का भी विकास हुआ, जिनका प्रयोग, यदि किया जाता है तो, पृथ्वी पर मानव जीवन को पूर्णतः समाप्त कर सकता है |

Join Frontier IAS Online Coaching Center to prepare for UPSC/HCS/RAS Civil Service comfortably at your home at your own pace/time.

HCS(Prelims+Mains+Interview)   HCS Prelims(Paper 1+Paper 2)

IAS+HCS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    

  RAS+IAS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    RAS(Prelims+Mains+Interview)     RAS Prelims     UPSC IAS Prelims      UPSC  IAS (Prelims+Mains+Interview)

Click Here to subscribe Our YouTube Channel

 

 

Posted on Leave a comment

History Study Material – IAS | UPSC | HCS | RAS Exam Preparation | 2018

History Study Material – IAS | UPSC | HCS | RAS Exam Preparation | 2018

History Study Material – IAS | UPSC | HCS | RAS Exam Preparation | 2018

World from 1919 to World War II

Nationalist movements in Asia and Africa

  • The period following the First World War saw the strengthening of the movements of the peoples of Asia and Africa for independence.
  • Many leaders of freedom movements in Asia and Africa had supported the war effort of the Allies in the hope that their countries would win freedom, or at least more rights after war was over.

India:

  • In India this was the period when the freedom movement became a mass movement under the leadership of Mahatma Gandhi.

Afghanistan:

  • The British government had waged many wars against Afghanistan in the nineteenth century.

Arab Countries:

  • There was an upsurge in Arab countries against Britain and France.
  • The had been asked by the Allies, during the First World War, to fight against their Ottoman rulers.
  • However, the end of the war did not result in the independence of Arab countries.
  • These countries had assumed additional importance after it was known that they had immense oil resources.

Turkey and Khilafat movement:

  • One of the most important events in the national awakening of the peoples after the First World War was the revolution in Turkey.
  • The disintegration of the Ottoman empire began in the nineteenth century and was completed after Turkey’s defeat in the First World War.
  • During this period, many nations which were formerly under the subjugation of the Ottoman empire had become free.

History Study Material

एशिया तथा अफ्रीका में राष्ट्रवादी आंदोलन :

  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद की इस अवधि में एशिया तथा अफ्रीका के लोगों के स्वतंत्रता आंदोलनों में मज़बूती देखी गयी |
  • एशिया तथा अफ्रीका के स्वतंत्रता संग्राम के कई नेताओं ने इस उम्मीद में  मित्र राष्ट्रों के द्वारा युद्ध के प्रयासों का समर्थन किया था कि युद्ध की समाप्ति के बाद उनके देशों को स्वतंत्रता मिल जाएगी या कम से कम उन्हें अधिक अधिकार मिल जायेंगे |

भारत :

  • भारत में यह अवधि वह अवधि थी जब स्वतंत्रता आंदोलन महात्मा गाँधी के नेतृत्व में  एक जन आंदोलन बन चुका था |

अफ़गानिस्तान :

  • उन्नीसवीं शताब्दी में ब्रितानी हुकुमत ने अफ़ग़ानिस्तान के विरुद्ध कई युद्ध छेड़ दिए थे |

अरब देश :

  • अरब देशों में ब्रिटेन तथा फ्रांस के विरुद्ध रोष था |
  • अरब देशवासियों से मित्र राष्ट्रों द्वारा ऑटोमन शासकों के विरुद्ध लड़ने को कहा गया था |
  • हालाँकि, युद्ध का अंत अरब देशों के लिए स्वतंत्रता का परिणाम लेकर नहीं आया |
  • यह जानने के बाद कि इन देशों में इन देशों में अत्यधिक तेल संसाधन है, इन देशों को अतिरिक्त महत्व दिया जाने लगा |

तुर्की तथा खिलाफ़त आंदोलन :

  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद लोगों की राष्ट्रीय जागृति की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक तुर्की में हुई  क्रांति थी।
  • ऑटोमन साम्राज्य का विघटन उन्नीसवीं शताब्दी में शुरू हुआ तथा प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की की हार के साथ ही यह पूर्ण हो गया |
  • इस अवधि के दौरान कई राष्ट्र जो पूर्व में ऑटोमन साम्राज्य के अधीन थे, स्वतंत्र हो गए |

Nationalist movements in Asia and Africa

China:

  • One of the most powerful movements in this period began in China.
  • In 1911, there was a revolution in China which resulted in the establishment of a republic.
  • However, power passed into the hands of corrupt governors called warlords.
  • The national movement in China aimed at the overthrow of foreign domination and the unification of China by ending the rule of the warlords.

Africa:

  • This period also saw the emergence of political and national consciousness in Africa.
  • Though the struggles for national independence in Africa gained momentum after the Second World War, the 1920s and the 1930s were a period when the first political associations were formed.

Beginning of Fascist aggression:

  • In the 1930s the fascist powers began their wars of conquest which ultimately led to the Second World War.
  • The major fascist countries were Italy and Germany.
  • They acquired an ally in the militarist regime which came to power in Japan.
  • These three countries started series of aggressions in Europe, Asia and Africa.
  • All of them claimed to have been fighting against communism and were united in 1937 under the Anti Comintern Pact. (Comintern is short for Communist International)
  • It also created a worldwide awareness of the danger that fascism posed to all countries and helped in building support for the victims of fascist aggression.
  • The leader of the Comintern at this time was Georgi Dimitrov, a Bulgarian Communist, who had been arrested along with German Communists, by the Nazis in 1933 after the Reichstag fire.
  • His courageous defence at the trial had won him worldwide admiration and he had been released.
  • Hitler had time and again declared that Germany had ambitions of conquering the vast   resources and territory of the Soviet Union.
  • Since the success of the Russian Revolution, the Western countries had been haunted by the danger of communism and they hoped that fascist countries would rid them of this danger.

एशिया तथा अफ्रीका में राष्ट्रवादी आंदोलन

चीन :

  • इस अवधि के सबसे शक्तिशाली आंदोलनों में से एक आन्दोलन चीन में शुरू हुआ |
  • 1911 में, चीन में एक क्रांति हुई जिसके परिणामस्वरूप वहां गणतंत्र की स्थापना हुई |
  • लेकिन, शक्तियाँ भ्रष्ट गवर्नरों के पास चली गयी जिन्हें वॉरलॉर्ड कहा जाता था |
  • चीन में राष्ट्रीय आन्दोलन का लक्ष्य विदेशी प्रभुत्व को समाप्त करना था तथा वॉरलॉर्ड्स के शासन का अंत करके चीन का एकीकरण करना था |

अफ्रीका :

  • इस अवधि में अफ्रीका में भी राजनीतिक एवं राष्ट्रीय जागृति देखी गयी |
  • हालाँकि अफ्रीका में स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्षों को गति द्वितीय विश्व युद्ध के बाद मिली, किंतु 1920 एवं 1930 का दशक वह समय था जब वहां राजनीतिक संगठनों का गठन हुआ |

फासीवादी आक्रमण की शुरुआत :

  • 1930 के दशक में, फासीवादी ताकतों ने देश विजय के उनके युद्ध को  शुरू कर दिया जो अंततः द्वितीय विश्व युद्ध की वजह बना |
  • इटली तथा जर्मनी प्रमुख फ़ासीवादी देश थे |
  • उन्हें जापान की सत्ता में आये सैन्यवादी शासन के रूप में एक सहयोगी प्राप्त हो गया |
  • इन तीन देशों ने यूरोप, एशिया तथा अफ्रीका में आक्रमणों की एक श्रृंखला की शुरुआत कर दी |
  • इन सभी ने दावा किया कि ये साम्यवाद के खिलाफ मुकाबला कर रहे हैं तथा ये तीनों कोमिंटर्न विरोधी संधि के तहत एकजुट हैं | (कोमिंटर्न शब्द कम्युनिस्ट इंटरनेशनल का संक्षिप्त रूप है )
  • इसने फासीवाद द्वारा सभी देशों पर उत्पन्न किये गए ख़तरे के प्रति विश्वव्यापी जागरूकता का निर्माण भी किया तथा यह नीति फासीवादी आक्रमण के पीड़ितों को सहारा दिलवाने में भी सहायक रही |
  • इस समय कोमिंटर्न के नेता एक बुल्गारियाई साम्यवादी  जॉर्जी दिमित्रोव थे, जिन्हें नाज़ियों के द्वारा राइश्टाग आग की घटना के बाद  जर्मन साम्यवादियों के साथ ही गिरफ़्तार कर लिया गया था |
  • सुनवाई में अपने साहसिक प्रतिवाद से उन्होंने पूरे विश्व की प्रशंसा को जीत लिया तथा उन्हें रिहा कर दिया गया |
  • हिटलर ने कई बार यह घोषणा की थी कि जर्मनी की महत्वाकांक्षा सोवियत संघ के विशाल प्रदेश तथा संसाधनों पर विजय प्राप्त करने की है |
  • रुसी क्रांति की सफलता के बाद से ही , पश्चिमी देश साम्यवाद के ख़तरे से भयभीत थे तथा उन्हें उम्मीद थी कि फ़ासीवादी देश उन्हें इस ख़तरे से मुक्ति दिला देंगे |

Nationalist movements in Asia and Africa

Japanese Invasion of China

  • One of the first major acts of aggression after the First World War was the Japanese invasion of China in 1931.
  • China, a member of the League of Nations, appealed to the League for sanctions against Japan to stop the aggression.
  • However, Britain and France, the leading countries in the League, were completely indifferent to the appeal and acquiesced in the aggression.

German militarization:

  • Germany had been admitted to the League of Nations some time after its formation but soon after Hitler came to power, she quit the League and undertook a massive programme of militarization.
  • According to the Treaty of Versailles, severe restrictions had been imposed on the military strength of Germany.
  • The beginning of German remilitarization in violation of the Treaty created a sense of insecurity in many countries, particularly France.

Italian Invasion of Ethiopia

  • In 1935, Italy invaded Ethiopia
  • On the appeal of Ethiopia, the League of Nations passed a resolution condemning Italy as an aggressor.

The Munich Pact:

  • While the Spanish Civil War was still going on, Hitler’s troops marched into Austria in March 1938 and occupied it.
  • Even though this was a violation of the peace treaties signed after the First World War, the Western powers did not protest against it.
  • The final act of appeasement of fascism by the Western powers was the Munich Pact.

एशिया तथा अफ्रीका में राष्ट्रवादी आंदोलन

चीन पर जापानी आक्रमण :

  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद प्रमुख आक्रामक कृत्यों में से एक कृत्य जापान द्वारा 1931 में चीन पर किया गया आक्रमण था |
  • चीन, जो राष्ट्र संघ का एक सदस्य था, ने संघ से जापान के विरुद्ध प्रतिबंधों की अपील की ताकि इस आक्रमण को रोका जा सके |
  • हालाँकि, ब्रिटेन तथा फ्रांस, जो संघ के अग्रणी देश थे, इस अपील के प्रति पूरी तरह उदासीन बने  रहे एवं इस आक्रमण को चुपचाप स्वीकार कर लिया |

जर्मन सैन्यीकरण :

  • जर्मनी को  राष्ट्रसंघ के निर्माण के कुछ समय बाद राष्टसंघ में शामिल किया गया था किंतु हिटलर के सत्ता में आने के बाद शीघ्र ही, उसने संघ छोड़ दिया तथा सैन्यीकरण के एक व्यापक कार्यक्रम की शुरुआत की |
  • वर्साय की संधि के अंतर्गत जर्मनी की सैन्य ताकत पर कठोर प्रतिबंध लगाए गए थे |  
  • संधि का उल्लंघन करके जर्मनी द्वारा सैन्यीकरण की पुनः शुरुआत ने कई देशों में, विशेष रूप से फ्रांस में,  असुरक्षा की भावना को जन्म दिया |

इथियोपिया पर इतालवी आक्रमण :

  • 1935 में इटली ने इथियोपिया पर आक्रमण कर दिया |
  • इथियोपिया की अपील पर राष्ट्रसंघ ने एक आक्रामक के रूप में इटली की निंदा का प्रस्ताव पारित किया |

म्यूनिख समझौता :

  • जब स्पेन का गृह युद्ध चल ही रहा था, तभी हिटलर के सैनिक मार्च 1938 में ऑस्ट्रिया में घुस आये तथा इसपर कब्ज़ा कर लिया |
  • भले ही यह घटना प्रथम विश्व युद्ध के बाद हस्ताक्षरित शांति संधियों का उल्लंघन थी, लेकिन फिर भी पश्चिमी ताकतों ने इसका विरोध नहीं किया|
  • पश्चिमी ताकतों द्वारा फासीवाद के तुष्टिकरण का किया गया अंतिम कार्य म्यूनिख समझौता था |

Join Frontier IAS Online Coaching Center to prepare for UPSC/HCS/RAS Civil Service comfortably at your home at your own pace/time.

HCS(Prelims+Mains+Interview)   HCS Prelims(Paper 1+Paper 2)

IAS+HCS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    

  RAS+IAS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    RAS(Prelims+Mains+Interview)     RAS Prelims     UPSC IAS Prelims      UPSC  IAS (Prelims+Mains+Interview)

Click Here to subscribe Our YouTube Channel

 

 

Posted on Leave a comment

UPSC IAS 2018 History – Online Notes || HCS Online Exam Preparation

UPSC IAS 2018 History – Online Notes || HCS Online Exam Preparation

UPSC IAS 2018 History – Online Notes || HCS Online Exam Preparation

World from 1919 to World War II

Fascism in Italy

  • A number of political movements which arose in Europe after the First World War are generally given the name ‘fascist’
  • The common features of these movements were their hostility to democracy and socialism, and the aim of establishing dictatorships.
  • They succeeded, in many countries of Europe, such as, Hungary, Italy, Poland, Portugal, Germany, Spain.
  • Their success in Italy and Germany had the most serious consequences.
  • The Italian government at the time was dominated by capitalists and landlords.
  • These sections began to support anti democratic movements which promised to save them from the danger of socialism as well as to satisfy their colonial aspirations.
  • The movement started by Mussolini was one such movement. His armed gangs were used by landlords and industrialists to organize violence against socialists and communists.
  • In 1926 all political parties except Mussolini’s party were banned.
  • The victory of fascism in Italy not only led to the destruction of democracy and the suppression of socialist movement, it also led to the preparation for war.
  • The victory of fascism in Italy was neither the result of a victory in elections nor of a popular uprising.

Nazism in Germany:

  • Within eleven years of the fascist capture of power in Italy, Nazism triumphed in Germany.
  • Nazism which was the German version of fascism was much more sinister than the original Italian version
  • The Nazis, under the leadership of Adolf Hitler, established the most barbarous dictatorship of modern times.
  • Germany had sought to satisfy her imperial ambitions through war but she had suffered defeat.
  • He glorified the use of force and brutality, and the rule by a great leader and ridiculed internationalism, peace and democracy.
  • He preached extreme hatred against the German Jews who were blamed not only for the defeat of Germany in the First World War but for all the ills of Germany.
  • The dreadful ideas of the Nazis found favour with the army, the industrialists, the big landowners and the anti republican politicians.
  • In 1929 occurred the most serious economic crisis which affected all the capitalist countries of the world.

UPSC IAS 2018 History

इटली में फासीवाद :

  • यूरोप में प्रथम विश्व युद्ध के बाद शुरू हुए कई आंदोलनों को आमतौर पर फासीवाद का नाम दिया गया है |
  • इन आंदोलनों की समान विशेषता लोकतंत्र एवं समाजवाद के विरुद्ध उनकी शत्रुता तथा तानाशाही व्यवस्था की स्थापना का लक्ष्य था |
  • यूरोप के कई देशों में उन्हें सफलता मिली, जैसे कि हंगरी, इटली, पोलैंड, पुर्तगाल, जर्मनी, स्पेन |
  • इटली एवं जर्मनी में उनकी सफलता के गंभीर परिणाम हुए |
  • उस समय की इतालवी सरकार पर पूंजीपति एवं भूस्वामी हावी थे |
  • इन वर्गों ने गैर-लोकतांत्रिक आंदोलनों का समर्थन करना शुरू कर दिया, जिन आंदोलनों ने उन्हें समाजवाद के ख़तरे से बचाने तथा साथ ही उनकी औपनिवेशिक महत्वाकांक्षाओं को भी संतुष्ट करने का आश्वासन दिया था |
  • मुसोलिनी द्वारा शुरू किया गया आंदोलन भी एक ऐसा ही आंदोलन था | उसके सशस्त्र गिरोहों का प्रयोग उद्योगपतियों तथा भूस्वामियों के द्वारा समाजवादियों तथा साम्यवादियों के विरुद्ध हिंसा का आयोजन करने के लिए किया जाता था |
  • 1926 में, मुसोलिनी की पार्टी को छोड़कर सभी राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगा दिया गया |
  • इटली में फासीवाद की जीत ना केवल लोकतंत्र के विनाश एवं समाजवादी आंदोलन के दमन की वजह बनी बल्कि यह युद्ध की तैयारियों की वजह भी बनी |
  • इटली में फासीवाद की जीत ना तो चुनावों में जीत का परिणाम थी और ना ही लोकप्रिय आंदोलन का|

जर्मनी में नाज़ीवाद :

  • इटली में सत्ता पर फासीवादियों के कब्ज़े के ग्यारह वर्षों के भीतर, जर्मनी में नाज़ीवाद की विजय हुई |
  • नाज़ीवाद, जो फासीवाद का जर्मन संस्करण था, वह वास्तविक इतालवी संस्करण से कहीं ज्यादा भयावह था |
  • एडोल्फ हिटलर के नेतृत्व में नाज़ियों ने आधुनिक काल की सबसे बर्बर तानाशाही व्यवस्था  की स्थापना की |
  • जर्मनी ने युद्ध के माध्यम से अपनी साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं को संतुष्ट करने का प्रयास किया था किंतु उसे हार का सामना करना पड़ा  |
  • उसने बल तथा निष्ठुरता के प्रयोग, तथा एक महान नेता द्वारा शासन  का महिमामंडन किया तथा अन्तर्राष्ट्रवाद, शांति, एवं लोकतंत्र का उपहास उड़ाया |
  • उसने जर्मन यहूदियों के खिलाफ अत्यधिक घृणा का प्रचार किया जिन्हें प्रथम विश्व युद्ध में ना केवल जर्मनी की हार का बल्कि जर्मनी की सभी बुराइयों का जिम्मेदार ठहराया गया था |
  • नाज़ियों के भयानक विचारों को सेना, उद्योगपतियों, बड़े भूस्वामियों, तथा अलोकतांत्रिक ताकतों का समर्थन मिला हुआ था |
  • 1929 में सबसे विकट आर्थिक मंदी आई जिसने दुनिया के सभी पूँजीवादी देशों को प्रभावित किया |

Developments in Britain and France:

  • The two major countries of Europe which did not succumb to fascist movements were Britain and France.
  • However, both these countries were faced with serious economic difficulties.
  • In 1921, there were 2 million unemployed persons in Britain.
  • In 1924, the first Labour Party government came to power. However, it did not remain in power for long.
  • In 1931, the National government comprising the Conservative, the Labour and the Liberal parties was formed.
  • Fascist movement rose its head and there was violence in the streets.
  • Ultimately, to meet the threat posed by fascist and other anti democratic forces, a government comprising Socialist, Radical Socialist and Communist parties was formed in 1936.
  • This is known as the Popular Front government and it lasted for about two years.

United States emerges as the Strongest power:

  • One of the most important features of the period after the First World War was the decline in the supremacy of Europe in the  world and the growing importance of the United States of America.
  • She had, in fact, emerged as the richest and the most powerful country in the world at the end of the war.
  • This was clear from the important role that she played during the framing of the peace treaties.
  • She had made tremendous industrial progress and was beginning to make heavy investments in Europe.
  • However, in spite of this progress, the United States was frequently beset with serious economic problems.
  • These problems were the result of the capitalist system.
  • The worldwide economic crisis began in 1929 was originated in USA.
  • The economies of the colonies of the European countries were also affected.
  • The Depression resulted in large scale unemployment, loss of production, poverty and starvation.
  • It continued throughout the 1930s even though after 1933, the economies of the affected countries began to recover.

ब्रिटेन तथा फ्रांस में घटित घटनाएँ :

  • फ्रांस तथा ब्रिटेन यूरोप के दो बड़े देश थे जो फासीवादी आंदोलनों के सामने नहीं झुके |
  • हालाँकि, इन दोनों देशों को गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ा |
  • 1921 में, ब्रिटेन में बेरोज़गार लोगों की संख्या 20 लाख थी |
  • 1924 में, लेबर पार्टी की पहली सरकार सत्ता में आई | हालाँकि यह लम्बे समय तक सत्ता में नहीं रह सकी |
  • 1931 में, राष्ट्रीय सरकार का गठन किया गया  जिसमें कंजर्वेटिव, लेबर तथा लिबरल पार्टियाँ शामिल थीं |
  • फासीवादी आंदोलन ने अपना सिर उठा लिया तथा सड़कों पर हिंसा होने लगी |
  • आखिरकार, फासीवादियों तथा अन्य अलोकतांत्रिक ताकतों द्वारा उत्पन्न खतरे से निपटने के लिए वर्ष 1936 में एक सरकार का गठन हुआ जिसमें समाजवादी, उग्र समाजवादी तथा साम्यवादी पार्टियाँ शामिल थीं |
  • इस सरकार को पॉपुलर फ्रंट गवर्नमेंट के नाम से जाना जाता है तथा यह सरकार 2 वर्षों तक चली |

संयुक्त राज्य का महाशक्ति के रूप में उदय :

  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद की अवधि की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक विशेषता यह थी कि विश्व में यूरोप की सर्वोच्चता का पतन हो गया था तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के महत्व में वृद्धि हुई थी |
  • यह , वास्तव में, युद्ध के अंत में विश्व के सबसे शक्तिशाली तथा धनी देश के रूप में उभरा था |
  • यह शांति संधियों को तय करने में उसके द्वारा निभायी गयी अहम भूमिका से स्पष्ट हो गया था |
  • इसने शानदार औद्योगिक प्रगति की थी तथा इसने यूरोप में भारी निवेश करना शुरू कर दिया था |
  • हालाँकि, इस प्रगति के बावजूद, संयुक्त राज्य गंभीर आर्थिक समस्याओं से लगातार घिरा रहा |
  • ये समस्याएँ पूँजीवादी व्यवस्था का परिणाम थीं |
  • 1929 में शुरू हुई विश्वव्यापी आर्थिक मंदी की उत्पत्ति संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई थी |
  • यूरोपीय देशों के उपनिवेशों की अर्थव्यवस्थाएँ भी प्रभावित हुईं |
  • इस मंदी का परिणाम बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी, उत्पादन में कमी, गरीबी तथा भुखमरी के रूप में हुआ |
  • यह 1930 के दशक तक जारी रही किन्तु 1933 के बाद, प्रभावित देशों की अर्थव्यवस्थाएँ पुरानी स्थिति में लौटने लगीं |

The Emergence of the Soviet Union:

  • The period after the First World War saw the emergence of the Soviet Union as a major power and she began to play a crucial role in world affairs.
  • Russia’s participation in the First World War and the long period of civil war and foreign intervention which followed the revolution had completely shattered the economy of the country.
  • There was a severe shortage of food. The production of industrial goods had fallen far below the pre-war level.
  • They were not allowed to sell it in the market.
  • These measures had created unrest among the peasants and other sections of society but were accepted because they were considered essential to defend the revolution.
  • After the civil war ended, these measures were withdrawn and in 1921, the New Economic Policy was introduced.
  • Major changes were introduced in agriculture.
  • The small landholdings or farms were considered not very productive. To increase production, it was considered essential to introduce tractors and other farm machinery. It was thought that this could be done only if the size of the farms was large.
  • The government pursued the policy of collectivization vigorously and by 1937 almost all cultivable land was brought under collective farms.
  • The rich peasants who opposed collectivization were severely dealt with.
  • The main centres of the revolution in 1917 were in Russia.
  • In the following years, the revolution spread to many other parts of the old Russian empire and the Bolshevik Party formed governments in the areas inhabited by non Russian nationalities.
  • After the death of Lenin in 1924 many serious differences arose within the ruling Communist Party the only political party which existed
  • There was also serious struggle for power between different groups and individual leaders. In this struggle, Stalin emerged victorious.
  • In 1927, Trotsky who had played an important role in the revolution and had organized the Red Army was expelled from the Communist Party.
  • However, the Western countries did not agree to the Soviet proposals. They continued to regard the Soviet Union as a danger to them and hoped that the fascist countries would destroy her.
  • Their hostility to the Soviet Union led to the appeasement of fascist powers paved the way for the Second World War.

सोवियत संघ का उदय :

  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद की अवधि में सोवियत संघ का उदय एक प्रमुख शक्ति के रूप में हुआ तथा वह वैश्विक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाने लगा |
  • प्रथम विश्व युद्ध में रूस की भागीदारी तथा लम्बे समय तक गृह युद्ध एवं विदेशी हस्तक्षेप के बाद हुई क्रांति ने इस देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया था |
  • भोजन की गंभीर कमी थी | औद्योगिक वस्तुओं का उत्पादन युद्ध-पूर्व स्तर से बहुत नीचे आ चुका था |
  • उन्हें इन उत्पादों को बाज़ार में बेचने की अनुमति नहीं दी गयी |
  • इन उपायों से किसानों तथा समाज के अन्य वर्गों में असंतोष का भाव उत्पन्न हुआ किंतु इन उपायों को स्वीकार कर लिया गया क्योंकि क्रांति की रक्षा करने के लिए इन्हें अनिवार्य माना गया था|
  • गृह युद्ध की समाप्ति के बाद, इन आदेशों को वापस ले लिया गया तथा नयी आर्थिक नीति प्रस्तुत की गयी |
  • कृषि में बड़े बदलाव लाये गए |
  • छोटी जोतों अथवा कृषि भूमियों को बहुत उत्पादक नहीं माना जाता था | उत्पादन बढ़ाने के लिए, ट्रैक्टर तथा अन्य कृषि मशीनों का प्रयोग अनिवार्य था | ऐसा माना गया कि यह तभी संभव है जब खेतों का आकार विशाल होता |
  • सरकार ने उत्साहपूर्वक समूहीकरण की नीति का अनुसरण किया तथा वर्ष 1937 तक, लगभग सभी कृषि योग्य भूमियों को सामूहिक खेतों के अंतर्गत शामिल किया जा चुका था |
  • समूहीकरण का विरोध करने वाले धनी किसानों से सख्ती से निपटा गया |
  • 1917 की क्रांति के मुख्य केंद्र रूस में थे |
  • आने वाले वर्षों में, यह क्रांति पुराने रुसी साम्राज्य के कई अन्य हिस्सों में भी फ़ैल गयी तथा बोल्शेविक पार्टी ने गैर-रुसी राष्ट्रीयताओं द्वारा अधिवासित क्षेत्रों में भी सरकार का गठन कर लिया|
  • 1924 में लेनिन की मृत्यु के बाद, एकमात्र मौजूदा पार्टी- सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी, के भीतर कई मतभेद उत्पन्न होने लगे |
  • विभिन्न समूहों तथा नेताओं के बीच भी सत्ता के लिए के लिए गंभीर संघर्ष हुआ | इस संघर्ष में, स्टालिन की जीत हुई |
  • 1927 में त्रोत्स्की, जिसने क्रांति मे अहम भूमिका निभायी थी तथा जिसने लाल सेना का गठन किया था, उसे कम्युनिस्ट पार्टी से बाहर निकाल दिया गया|
  • हालाँकि, पश्चिमी देश सोवियत संघ के प्रस्तावों पर सहमत नहीं हुए | वे अभी भी सोवियत संघ को अपने लिए एक ख़तरा मानते थे तथा उन्हें उम्मीद थी कि फासीवादी देश उसे नष्ट कर देंगे |
  • सोवियत संघ के प्रति उनकी शत्रुता फासीवादी ताक़तों के तुष्टिकरण की वजह बनी जिसने द्वितीय विश्व युद्ध का मार्ग प्रशस्त किया |  

Join Frontier IAS Online Coaching Center to prepare for UPSC/HCS/RAS Civil Service comfortably at your home at your own pace/time.

HCS(Prelims+Mains+Interview)   HCS Prelims(Paper 1+Paper 2)

IAS+HCS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    

  RAS+IAS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    RAS(Prelims+Mains+Interview)     RAS Prelims     UPSC IAS Prelims      UPSC  IAS (Prelims+Mains+Interview)

Click Here to subscribe Our YouTube Channel

 

 

Posted on Leave a comment

HCS Complete Study Notes (History) | Online Exam Preparation- IAS

HCS Complete Study Notes (History) | Online Exam Preparation- IAS

HCS Complete Study Notes (History) | Online Exam Preparation- IAS

Russian revolution and World from 1919 to World War II

Russian Revolution

  • Czar’s manifesto aroused the people and prepared them for revolution.
  • It drew soldiers and the peoples of non-Russian nationalities into close contact with the Russian revolutionaries.
  • Hoping to satisfy his imperial ambitions by annexing Constantinople and the Straits of the Dardanelles, the Czar took Russia into the First World War.
  • This proved fatal and brought about the final breakdown of the Russian autocracy.
  • Corruption in the state resulted in great suffering among the people. There was a shortage of bread.
  • The Russian army suffered heavy reverses. By February 1917, 600,000 soldiers had been killed in war.
  • The condition was ripe for a revolution.

Beginning of the Revolution:

  • Minor incidents usually ‘set off revolutions.
  • In the case of the Russian Revolution it was a demonstration by working-class women trying to purchase bread.
  • A general strike of workers followed, in which soldiers and others soon joined.
  • Soon the revolutionaries took Moscow, the Czar gave up his throne and the first Provisional Government was formed on 15 March.
  • The fall of the Czar is known as the February Revolution because, according to old Russian calendar, it occurred on 27 February 1917.
  • The fall of the Czar, however, marked only the beginning of the revolution.
  • As head of the Petrograd Soviet, he was one of the most outstanding leaders of the November uprising.
  • An All Russian Congress of Soviets met on the same day and assumed full political power.
  • This event which took place on 7 November is known as the October Revolution because of the corresponding date of the old Russian calendar, 25 October.
  • These first acts of the new government were hailed as the beginning of the era of socialism.
  • The October Revolution had been almost completely peaceful.
  • However, soon the new state was involved in a civil war.

HCS Complete Study Notes

रूस की क्रांति

  • जार के घोषणापत्र ने लोगों को भड़का दिया तथा उन्हें क्रांति के लिए तैयार कर दिया |
  • इसने सैनिकों तथा गैर-रुसी राष्ट्रवादियों को रुसी क्रांतिकारियों के साथ निकट संपर्क में आकर्षित किया |
  • कस्तुन्तुनिया (कांस्टेंटिनोपल ) तथा दार्दानेल्ज़ की जलसंधि पर कब्ज़ा करके अपनी साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं को संतुष्ट करने की उम्मीद में, जार ने रूस को प्रथम विश्व युद्ध में धकेल दिया |
  • यह कदम घातक सिद्ध हुआ तथा रुसी निरंकुश राजतंत्र का पतन लेकर आया |
  • देश में भ्रष्टाचार की वजह से लोगों को बहुत पीड़ा होती थी | देश में रोटी की कमी थी |
  • रुसी सेनाओं को भारी पराजयों का सामना करना पड़ा था | फरवरी 1917 तक, 600,000 सैनिक युद्ध में मारे जा चुके थे |
  • यह स्थिति क्रांति के लिए परिपक्व थी |

क्रांति की शुरुआत :

  • क्रांति अक्सर छोटी या मामूली घटनाओं से शुरू होती है |
  • रुसी क्रांति के मामले में, यह कामकाजी वर्ग की महिलाओं द्वारा एक प्रदर्शन था जो वे रोटी खरीदने के लिए कर रही थीं |
  • इसके बाद श्रमिकों की एक सामान्य हड़ताल हुई जिसमें शीघ्र ही सैनिक एवं अन्य लोग भी शामिल हो गए |
  • जल्द ही, क्रांतिकारियों ने मॉस्को पर अधिकार कर लिया, एवं जार ने अपनी गद्दी त्याग दी तथा प्रथम अस्थायी सरकार का गठन 15 मार्च को हुआ |
  • जार के पतन को फरवरी क्रांति के नाम से जाना जाता है क्योंकि पुराने रुसी कैलेंडर के अनुसार, यह घटना 27 फरवरी 1917 को हुई |
  • जार के पतन ने, हालाँकि, केवल क्रांति की शुरुआत को चिन्हित किया |
  • पेट्रोग्राद सोवियत के अध्यक्ष के रूप में, वह नवम्बर विद्रोह के सबसे उत्कृष्ट नेताओं में से एक था |
  • अखिल रुसी सोवियत कांग्रेस की बैठक उसी दिन हुई तथा पूर्ण राज-सत्ता ग्रहण कर लिया |
  • 7 नवंबर को घटित हुई इस घटना को पुराने रुसी कैलेंडर की इसी तारीख, 25 अक्टूबर के कारण   अक्टूबर क्रांति के नाम से जाना जाता है |
  • नयी सरकार के इन नए अधिनियमों का स्वागत समाजवाद के युग की शुरुआत के रूप में किया गया |
  • अक्टूबर क्रांति लगभग शांतिपूर्ण रही थी |
  • हालाँकि शीघ्र ही नया राष्ट्र गृहयुद्ध में उलझ गया |

Consequences of revolution:

  • The overthrow of autocracy and the destruction of the aristocracy and the power of the church were the first achievements of the Russian Revolution
  • The Czarist empire was transformed into a new state called the Union of Soviet Socialist Republics (U.S.S.R) for short Soviet Union.
  • The policies of the new state were to be directed to the realization of the old socialist ideal, ‘from each according to his capacity, to each according to his work’.
  • Economic planning by the state was adopted to build a technologically advanced economy at a fast rate and to eliminate glaring inequalities in society.
  • Work became an essential requirement for every person there was no unearned income to live on.
  • The right to work became a constitutional right and it became the duty of the state to provide employment to every individual.
  • After about 70 years of the revolution, the system collapsed and in 1991 the Soviet Union ceased to exist as a state.
  • In its impact on the world, the Russian Revolution had few parallels in history.
  • The ideas of socialism which the socialist movement had been advocating and which the Russian Revolution espoused were intended for universal application.
  • The Russian Revolution was the first successful revolution in history which proclaimed the building of a socialist society as its objective.

Comintern:

  • Soon after the revolution, the Communist International (also known as the Third International or Comintern) was formed for promoting revolutions on an international scale.
  • The split in the socialist movement was done at the time of the First World War
  • The left wing sections in many socialist parties now formed themselves into communist parties and they affiliated themselves to the Comintern.
  • However, the formation of communist parties in many countries of the world with the objective of bringing about revolution and following common policies was a major consequence of the Russian Revolution.
  • With the formation of the Comintern, the socialist movement was divided into two sections – socialist and communist.
  • There were many differences between them on the methods of bringing about socialism and about the concept of socialism itself.
  • Many problems which were considered national began to be looked upon as concerns of the world as a whole.
  • The universality and internationalism which were fundamental principles of socialist ideology from the beginning were totally opposed to imperialism.

क्रांति के परिणाम :

  • निरंकुश राजतंत्र तथा कुलीनतंत्र एवं चर्च की शक्तियों का विनाश इस रुसी क्रांति की प्रथम उपलब्धियाँ थीं |
  • जार के साम्राज्य को एक नए राज्य में परिवर्तित कर दिया गया जिसे छोटे सोवियत संघ के लिए  सोवियत समाजवादी गणतंत्रों का संघ कहा      गया|
  • नए राष्ट्र की नीतियाँ पुराने समाजवादी आदर्शों की प्राप्ति के लिए निर्दिष्ट थीं, अर्थात् – “हरेक से अपनी क्षमतानुसार, हरेक को उसके कार्यानुसार” |
  • राष्ट्र द्वारा आर्थिक नियोजन को अपनाया गया ताकि तीव्र गति से तकनीकी रूप से एक उन्नत अर्थव्यवस्था का निर्माण किया जा सके तथा समाज में अतिस्पष्ट असमानताओं को दूर किया जा सके  |
  • कार्य करना प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता बन गया क्योंकि गुज़ारा करने के लिए अब कोई अनर्जित आय नहीं थी |
  • कार्य करने का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार बन गया तथा प्रत्येक व्यक्ति को रोज़गार प्रदान करना राज्य का कर्त्तव्य हो गया |
  • क्रांति के करीब 70 वर्षों के बाद, यह व्यवस्था भंग हो गयी तथा वर्ष 1991 में सोवियत संघ का एक राष्ट्र के रूप में अस्तित्व समाप्त हो गया |
  • विश्व पर इसके प्रभाव में, इतिहास में रुसी क्रांति की कुछ समानताएं थीं |
  • समाजवाद की जिस विचारधारा की वकालत समाजवादी आंदोलन में की जा रही थी तथा जिसका समर्थन रुसी क्रांति में किया गया था, वह विचारधारा सर्वव्यापी प्रयोग के लिए अभिप्रेत थी |
  • रुसी क्रांति इतिहास की पहली सफल क्रांति थी जिसने अपने उद्देश्य के रूप में समाजवादी समाज के निर्माण की घोषणा की थी |

कम्युनिस्ट इंटरनेशनल (Comintern) :

  • क्रांति के बाद शीघ्र ही, कम्युनिस्ट इंटरनेशनल (जिसे तृतीय इंटरनेशनल या  Comintern के नाम से भी जाना जाता है ) का निर्माण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्रांतियों को प्रोत्साहित करने  के लिए किया गया था |
  • समाजवादी आन्दोलन में दरार प्रथम विश्व युद्ध के समय पड़ी थी |
  • कई समाजवादी दलों में वामपंथी वर्गों ने अपने आप को साम्यवादी दलों में शामिल कर लिया तथा उन्होंने खुद को कम्युनिस्ट इंटरनेशनल से सम्बद्ध कर लिया |
  • हालाँकि, क्रांति लाने तथा साझा नीतियों का पालन करने के उद्देश्य से विश्व के कई देशों में साम्यवादी दलों का गठन रुसी क्रांति का एक प्रमुख परिणाम था |
  • कम्युनिस्ट इंटरनेशनल के निर्माण के साथ ही समाजवादी आंदोलन दो वर्गों – समाजवादी तथा साम्यवादी, में विभाजित हो गया |
  • समाजवाद को लाने के तरीकों तथा स्वयं समाजवाद की अवधारणा को लेकर ही उनमें काफी मतभेद थे |
  • कई समस्याएँ जिन्हें राष्ट्रीय माना जाता था, उन्हें पूरे विश्व की समस्याओं के रूप में देखा जाने लगा |
  • अन्तर्राष्ट्रवाद तथा सार्वभौमिकता जो शुरुआत से ही समाजवादी विचारधारा के बुनियादी सिद्धांत थे, वे पूरी तरह से साम्राज्यवाद का विरोध करते थे |  

World between World war I and World war II:

  • Hardly twenty years had passed since the end of the First World War, when, in 1939, the Second World War broke out.
  • It was the most destructive war in history which affected the life of the people in every part of the globe.

Between the wars

  • The twenty years between the First and Second World Wars were a period of tremendous changes all over the world.
  • Many developments took place in Europe which paved the way for the outbreak of the Second World War.
  • A major economic crisis took place during this period which affected almost every part of the world
  • In Asia and Africa, the period saw an unprecedented awakening of the peoples which found its fulfilment after the Second World War.

Europe between the wars:

  • The misery caused by the First World War influenced the political developments in many countries.
  • Germany became a republic.
  • The proclamation of the republic did not satisfy the German revolutionaries who attempted another uprising in January 1919. The uprising was, however, suppressed.
  • However, within a few years in many countries of Europe, the socialist movements were defeated and dictatorial governments came to power.
  • These governments not only suppressed socialist movements but also destroyed democracy.
  • The emergence of dictatorial governments in Europe in this period had dangerous consequences not only for the peoples of Europe but for the whole world.

प्रथम एवं द्वितीय विश्व युद्ध के बीच दुनिया :

  • प्रथम विश्व युद्ध को समाप्त हुए मुश्किल से 20 वर्ष ही हुए थे कि वर्ष 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो गया |
  • यह इतिहास का सबसे विनाशकारी युद्ध था जिसने दुनिया के हर भाग में लोगों के जीवन को प्रभावित किया |

युद्धों के बीच

  • प्रथम एवं द्वितीय विश्व युद्ध के बीच के 20 वर्ष समूचे विश्व में महत्वपूर्ण बदलावों की अवधि थे |
  • यूरोप में कई ऐसी घटनाएँ घटित हुईं जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत का मार्ग तैयार किया|
  • इस अवधि के दौरान एक बड़ी आर्थिक मंदी आई जिसने विश्व के लगभग सभी भागों को प्रभावित किया |
  • एशिया तथा अफ्रीका में, इस अवधि में लोगों में अभूतपूर्व उत्तेजना देखी गयी जिसकी संतृप्ति द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुई |

युद्धों के बीच यूरोप :

  • प्रथम विश्व युद्ध की वजह से उत्पन्न विपत्तियों ने कई देशों के राजनीतिक विकास पर प्रभाव डाला |
  • जर्मनी एक गणतंत्र हो गया |
  • गणतांत्रिक होने की घोषणा जर्मन क्रांतिकारियों को संतुष्ट नहीं कर पायी जिन्होंने जनवरी 1919 में एक अन्य विद्रोह का प्रयास किया | हालाँकि, इस विद्रोह का दमन कर दिया गया |
  • हालाँकि, कुछ वर्षों के भीतर ही यूरोप के कई देशों में, समाजवादी आन्दोलनों को नाकाम कर दिया गया  तथा तानाशाह सरकारें सत्ता में आ गयीं |
  • इन सरकारों ने ना केवल समाजवादी आंदोलनों का दमन किया बल्कि लोकतंत्र को भी भंग कर दिया |
  • यूरोप में तानाशाही सरकारों का उदय ना केवल लोगों बल्कि पूरी दुनिया पर खतरनाक परिणामों को लेकर आया |

Join Frontier IAS Online Coaching Center to prepare for UPSC/HCS/RAS Civil Service comfortably at your home at your own pace/time.

HCS(Prelims+Mains+Interview)   HCS Prelims(Paper 1+Paper 2)

IAS+HCS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    

  RAS+IAS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    RAS(Prelims+Mains+Interview)     RAS Prelims     UPSC IAS Prelims      UPSC  IAS (Prelims+Mains+Interview)

Click Here to subscribe Our YouTube Channel

 

 

Posted on Leave a comment

UPSC IAS Exam Preparation | Study Material (History) for IAS | HCS | RAS

UPSC IAS Exam Preparation | Study Material (History) for IAS | HCS | RAS

UPSC IAS Exam Preparation | Study Material (History) for IAS | HCS | RAS

World War and Russian revolution

Peace treaties

  • The victorious powers or the Allies, met in a conference first in Versailles, a suburb of Paris, and later in Paris, between January and June 1919.
  • Though the number of countries represented at the conference was 27, the terms of the peace treaties were really decided by three countries-Britain, France and USA.
  • The defeated countries were not represented at the conference.
  • The victorious powers also excluded Russia from the conference.
  • The terms of the treaty were thus not the result of negotiations between the defeated and the victorious powers but were imposed on the defeated by the victors.
  • The main treaty was signed with Germany on 28 June 1919. It is called the Treaty of Versailles.
  • She was dispossessed of all her colonies which were taken over by the victors.
  • German colonies in SouthWest Africa and East Africa were given to Britain, Belgium, South Africa and Portugal.
  • China was aligned with the Allies during the war and was even represented at the Paris Conference.
  • But her areas under German possession of control were not restored to China instead they were given away to Japan.
  • Germany was also required to pay for the loss and damages suffered by the Allies during the war.
  • It was intended as a world organization of all independent states.
  • It aimed at the preservation of peace and security and peaceful settlement of international conflicts, and bound its members ‘ not to resort to war’
  • One of its important provisions was with regard to sanctions.
  • According to this provision, economic and military action would be taken against any country which committed aggression.
  • The League was never an effective organization.
  • In the 1930s when many countries resorted to aggression, the League was either ignored or defied.
  • An important feature of the peace treaties which indicates its nature was the decision with regard to the colonies of the defeated powers.

UPSC IAS Exam Preparation

शांति संधियाँ

शान्ति समझौते :

  • विजेता शक्तियों अथवा मित्र राष्ट्र पेरिस के उपनगर वर्साय में पहले मिले तथा उसके बाद उनकी बैठक पेरिस में जनवरी से जून 1919 के बीच हुई |
  • हालाँकि सम्मेलन का प्रतिनिधित्व करने वाले देशों की संख्या 27 थी, किंतु शांति संधियों की शर्तें वास्तव में केवल तीन देशों – ब्रिटेन, फ्रांस तथा संयुक्त राज्य अमेरिका, के द्वारा तय की गयीं |
  • पराजित देशों का प्रतिनिधित्व सम्मेलन में नहीं किया गया |
  • विजेता शक्तियों ने रूस को भी सम्मेलन में शामिल नहीं किया |
  • संधि की शर्तें इस तरह पराजित एवं विजेता देशों के बीच वार्ताओं का परिणाम नहीं थीं बल्कि ये शर्तें विजेताओं द्वारा पराजित देशों पर थोपी गयी थीं |
  • मुख्य संधि पर हस्ताक्षर जर्मनी में 28 जून 1919 को किया गया | इसे वर्साय की संधि कहा जाता है |
  • उसे अपने सभी उपनिवेशों से बेदखल कर दिया गया तथा इन उपनिवेशों को विजेताओं ने ले लिया |
  • दक्षिण-पूर्वी अफ्रीका तथा पूर्वी अफ्रीका के जर्मन उपनिवेशों को ब्रिटेन, बेल्जियम, दक्षिण अफ्रीका, एवं पुर्तगाल को दे दिया गया |
  • चीन युद्ध के दौरान मित्र राष्ट्रों के साथ था तथा यहाँ तक कि वह पेरिस सम्मेलन का प्रतिनिधि भी था |
  • किन्तु जर्मन नियंत्रणाधिकार  वाले उसके क्षेत्रों को चीन को वापिस नहीं किया गया तथा उन्हें जापान को दे दिया गया |
  • जर्मनी को मित्र राष्ट्रों को युद्ध के दौरान हुई क्षति एवं नुकसान की भरपाई भी करनी थी |
  • यह सभी स्वतंत्र राष्ट्रों के वैश्विक संगठन के रूप में अभिप्रेत था |
  • इसका लक्ष्य शांति का संरक्षण तथा अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान  करना एवं अपने सदस्यों को युद्ध ना करने के लिए बाध्य करना था |  
  • इसका एक महत्वपूर्ण प्रावधान प्रतिबंधों के सम्बन्ध में था |
  • इस प्रावधान के अनुसार, यदि कोई भी देश आक्रमण करता तो उसपर आर्थिक एवं सैन्य कार्यवाही की जा सकती थी |
  • यह संघ कभी भी एक प्रभावी संगठन नहीं बन सका |
  • 1930 के दशक में, जब कई देशों ने आक्रमण का सहारा लिया, तब इस संगठन को या तो नज़रअंदाज किया गया या फिर  इसकी अवहेलना की गयी |
  • शांति संधियों की एक महत्वपूर्ण विशेषताइसके द्वारा  पराजित देशों के उपनिवेशों के सम्बन्ध में लिए गए निर्णय थे जो इसकी प्रकृति को दर्शाते थे |

Peace treaties

  • The publication of secret treaties by the Soviet government exposed these claims.
  • The Soviet Union which had repudiated all the secret agreements did not receive any spoils which had been promised to the Russian emperor.
  • The League of Nations also recognised this division of the spoils.

Consequences of the war and the Peace Treaties:

  • The First World War was the most frightful war that the world had so far seen.
  • The number of persons who fought in the war is staggering.
  • The total number of those killed and dead in the war are estimated at about nine million.
  • The air raids, epidemics and famines killed many more among the civilian populations.
  • The political institutions as they had been evolving in various countries also suffered a serious setback
  • The war and the peace treaties transformed the political map of the world, particularly of Europe.
  • Three ruling dynasties were destroyed -the Romanov in Russia during the war itself, the Hohenzollern in Germany and the Habsburg in Austria-Hungary.
  • The role played by the soldiers from Asia and Africa in winning the war for one group of nations of Europe against another shattered this myth.
  • Many Asian leaders had supported the war effort in the hope that, once the war was over, their countries would be given freedom.
  • These hopes were, however, belied.
  • All these factors strengthened nationalist movements in the colonies. In some countries, the first stirrings of nationalism were felt after the war.

Conditions in Russia before revolution:

  • By the early years of the twentieth century, political movements based on the ideas of socialism had emerged in a number of countries in Europe.
  • With the outbreak of the First World War, however, the socialist movement in most countries of Europe suffered a setback.
  • During this period, however, unrest was brewing in Russia.
  • The Russian Revolution took place in 1917, affecting the course of world history for many decades.

शांति संधियाँ

  • सोवियत सरकार ने इन गुप्त संधियों को प्रकाश में लाकर इन दावों की पोल खोल दी |
  • सोवियत संघ जिसने सभी गुप्त समझौतों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, उसे कोई भी विजयोपहार नहीं मिला  जिसका रुसी सम्राट को वादा किया गया था |
  • राष्ट्रसंघ ने भी लूट (विजयोपहार ) के विभाजन को स्वीकार किया |

युद्ध के परिणाम तथा शांति संधियाँ :

  • प्रथम विश्व युद्ध दुनिया द्वारा अब तक देखा गया सबसे भयावह युद्ध था |
  • युद्ध में लड़ने वाले लोगों की संख्या चौंकाने वाली है|
  • इस युद्ध में मारे गए लोगों की अनुमानित संख्या नब्बे लाख है |
  • हवाई हमले, महामारियाँ, तथा अकाल, की वजह से नागरिक आबादी में बहुत अधिक लोगों की मौत हो गयी |
  • विभिन्न देशों में विकसित हो रहे राजनीतिक संस्थानों को भी गंभीर नाकामयाबी का सामना करना पड़ा |
  • युद्ध एवं शांति संधियों ने विश्व, विशेष रूप से यूरोप  के राजनीतिक नक़्शे को बदल दिया |
  • तीन सत्तारूढ़ राजवंशों का पतन हो गया –रूस में युद्ध के दौरान ही  रोमानोव,  जर्मनी में होहेनज़ोलर्न तथा ऑस्ट्रिया-हंगरी में हाब्सबर्ग राजवंश |
  • यूरोप के देशों के एक समूह के लिए दूसरे के विरुद्ध युद्ध को जीतने में एशिया तथा अफ्रीका के सैनिकों द्वारा निभाई गयी भूमिका ने इस मिथक को तोड़ दिया |
  • कई एशियाई नेताओं ने युद्ध के प्रयास का इस उम्मीद में समर्थन किया था कि, जैसे ही युद्ध समाप्त होगा, उनके देशों को आज़ादी दे दी जाएगी|
  • ये उम्मीदें, हालाँकि, झूठी साबित हुईं |
  • इन सभी कारकों ने  उपनिवेशों में राष्ट्रवादी आंदोलनों को मजबूत किया तथा युद्ध के बाद राष्ट्रवाद की पहली सरगर्मी महसूस की गयी |

क्रांति के पहले रूस की स्थिति :

  • बीसवीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों तक, समाजवाद के विचारों पर आधारित राजनीतिक आंदोलनों का उदय यूरोप के कई देशों में हुआ था |
  • प्रथम विश्व युद्ध के शुरू हो जाने से, हालाँकि, यूरोप के अधिकांश देशों में समाजवादी आंदोलनों को असफलता का सामना करना पड़ा |
  • इस अवधि के दौरान, रूस में लेकिन अशांति पैदा हो रही थी |
  • रूस की क्रांति 1917 में हुई, जिसने कई दशकों तक विश्व इतिहास के पथ को प्रभावित किया |

Russian Revolution

  • For the small holdings they acquired, they had to pay heavy redemption dues for decades.
  • Land hunger of the peasants was a major social factor in the Russian society.
  • Industrialization began very late in Russia, in the second half of the nineteenth century.
  • Then it developed at a fairly fast rate, but more than half of the capital for investment came from foreign countries.
  • Whether factories were owned by foreigners or Russians, the conditions of work were horrible.
  • The workers had no political rights and no means of gaining even minor reforms.
  • The only people who supported the Czar were the nobility and the upper layers of the clergy.
  • All the rest of the population in the vast Russian empire was hostile.

Growth of revolutionary movements in Russia:

  • There were many peasant rebellions in Russia before the nineteenth century but they were suppressed.
  • Many Russian thinkers had been influenced by developments in Western Europe and wanted to see similar changes in Russia.
  • Their efforts had helped to bring about the abolition of serfdom.
  • This, however, turned out to be a hollow victory.
  • One group which was in a minority (hence known as the Mensheviks) favoured a party of the type that existed in countries like France and Germany and participated in elections to the parliaments of their countries.
  • The majority, known as the Bolsheviks, were convinced that in a country where no democratic rights existed and where there was no parliament, a party organized on parliamentary lines would not be effective.
  • More than a thousand of them were killed and thousands of others were wounded.
  • This day is known as Bloody Sunday. The news of the killings provoked unprecedented disturbances throughout Russia.
  • Even sections of the army and the navy revolted.
  • Beginning as committees to conduct strikes, they became the instruments of political power
  • In October, the Czar yielded and announced his manifesto granting freedom of speech, press and association, and conferred the power to make laws upon an elected body called the ‘Duma’ .
  • The Czar’s manifesto contained principles which would have made Russia a constitutional monarchy like England.

रूस की क्रांति

  • उनके स्वामित्व वाले छोटे जोतों के लिए, उन्हें दशकों के मोचन बकाये का भुगतान करना पड़ता था |
  • किसानों की भू-तृष्णा रुसी समाज में एक प्रमुख सामाजिक कारक था |
  • रूस में औद्योगीकरण काफी देर से, उन्नीसवीं सदी के दूसरे भाग में शुरू हुआ |
  • उसके बाद इसने काफी तीव्र गति से विकास किया, किंतु निवेश के लिए आधी से अधिक पूँजी विदेशी देशों से आई थी |
  • कारखानों का मालिक रुसी हो अथवा विदेशी, कार्य की परिस्थितियाँ भयावह थीं |
  • श्रमिकों के पास कोई राजनीतिक अधिकार नहीं थे तथा यहाँ तक कि मामूली सुधारों का भी कोई साधन नहीं था |
  • जार का समर्थन केवल पुरोहित वर्ग के संपन्न लोगों ने एवं कुलीनों ने किया |
  • विशाल रुसी साम्राज्य में शेष आबादी जार के विरुद्ध थी |

रूस में क्रांतिकारी आंदोलनों की उत्पत्ति :

  • रूस में उन्नीसवीं शताब्दी से पूर्व कई कृषक विद्रोह हुए किंतु उनका दमन कर दिया गया था  |  
  • कई रुसी विचारक पश्चिमी यूरोप में घटित घटनाओं से प्रभावित थे तथा वे वैसे ही बदलाव रूस में भी चाहते थे |
  • उनके प्रयासों से दासत्व का उन्मूलन हो सका |
  • किंतु यह, आगे चलकर एक खोखली जीत साबित हुई |
  • एक समूह जो अल्पसंख्यक था (अतः  उसे मेनशेविक के नाम से जाना जाता था ) ने उस तरह की पार्टी का समर्थन किया फ़्रांस तथा जर्मनी जैसे देशों में मौजूद थी तथा उन देशों के संसदीय चुनावों में भाग लेती थी |
  • बहुसंख्यक समूह, जिन्हें बोल्शेविकों के नाम से जाना जाता था, वे इस बात पर यकीन करते थे कि एक ऐसे देश में जहाँ लोकतांत्रिक अधिकार नहीं हैं तथा जहाँ कोई संसद नहीं है, वहां संसदीय तर्ज़ पर गठित कोई पार्टी प्रभावी नहीं होगी |
  • उनमें हज़ारों लोग मारे गए तथा हज़ारों अन्य लोग ज़ख्मी हो गए |
  • इस दिन को खूनी रविवार के नाम से जाना जाता है | इन हत्याओं ने समूचे रूस में  अभूतपूर्व उपद्रव को भड़का दिया |
  • यहाँ तक कि थलसेना तथा जलसेना की इकाइयों ने भी विद्रोह कर दिया |
  • हड़ताल का आयोजन करने वाली समितियों के रूप में शुरुआत करके, वे राज-सत्ता का साधन बन गए |
  • अक्टूबर में, जार झुका तथा उसने घोषणापत्र जारी किया जिसमें अभिव्यक्ति, प्रेस तथा संगठन की स्वतंत्रता प्रदान की गयी थी तथा ड्यूमा नामक एक  निर्वाचित निकाय को क़ानून बनाने की शक्ति प्रदान की गयी थी |
  • जार के घोषणापत्र में वे सिद्धांत निहित थे जो रूस को  इंग्लैंड की तरह एक संवैधानिक राजतंत्र वाला देश बनाते |

Join Frontier IAS Online Coaching Center to prepare for UPSC/HCS/RAS Civil Service comfortably at your home at your own pace/time.

HCS(Prelims+Mains+Interview)   HCS Prelims(Paper 1+Paper 2)

IAS+HCS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    

  RAS+IAS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    RAS(Prelims+Mains+Interview)     RAS Prelims     UPSC IAS Prelims      UPSC  IAS (Prelims+Mains+Interview)

Click Here to subscribe Our YouTube Channel

 

 

Posted on Leave a comment

UPSC | IAS 2018 Study Notes || History Notes || HCS Online Preparation

UPSC | IAS 2018 Study Notes || History Notes || HCS Online Preparation

UPSC | IAS 2018 Study Notes || History Notes || HCS Online Preparation

World War

The First World War:

  • In 1914, a war began in Europe which soon engulfed almost the entire world.
  • It affected the economy of the entire world the casualties suffered by the civilian population from bombing of the civilian areas and the famines and epidemics, caused by the war far exceeded those suffered by the armies.
  • The battles of the war were fought in Europe, Asia, Africa and the Pacific.

Causes of First World War

Imperialist Rivalries:

  • The imperialist conquest of Asia and Africa was accompanied with conflicts between the imperialist countries.
  • If an imperialist country was excluded from a certain area, it could find some other area to conquer.
  • Sometimes wars did break out between imperialist countries as happened, for instance, between Japan and Russia.

Germany:

  • After the unification of Germany had been achieved, it made tremendous economic progress.
  • By 1914, it had left Britain and France far behind in the production of iron and steel and in many manufactures.

Conflicts within Europe:

  • Besides the conflicts resulting from rivalries over colonies and trade, there were conflicts among the major European powers over certain developments within Europe.
  • There were six major powers in Europe at this time-Britain, Germany, Austria-Hungary, Russia, France and Italy.

UPSC | IAS 2018

प्रथम विश्व युद्ध :

  • 1914 में, यूरोप में युद्ध शुरू हुआ जिसने जल्द ही पूरी दुनिया को अपने आगोश में ले  लिया |
  • इसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया तथा नागरिक इलाकों में बमबारी एवं अकाल, तथा महामारियों की वजह से जिन हताहतों का सामना आम नागरिकों को करना पड़ा, वे उन हताहतों से अधिक थीं जिनका सामना सेनाओं को करना पड़ा था |
  • युद्ध की लड़ाइयाँ यूरोप, एशिया, अफ्रीका, तथा प्रशांत महासागर के क्षेत्र में लड़ी गयी थीं |

प्रथम विश्व युद्ध के कारण :

साम्राज्यवादी प्रतिद्वंद्विता :

  • एशिया तथा अफ्रीका  के साम्राज्यवादी विजय के साथ ही साम्राज्यवादी देशों के बीच संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हुई |
  • यदि किसी साम्राज्यवादी देश को किसी क्षेत्र से बाहर कर दिया जाता था, तो यह देश किसी अन्य क्षेत्र पर अपना अधिकार करने के लिए ढूँढ़ लेता  था|
  • कभी कभी साम्राज्यवादी देशों के बीच युद्ध भी हुए, उदाहरण के लिए जापान एवं रूस के बीच |

जर्मनी :

  • अपने एकीकरण के बाद जर्मनी ने  आश्चर्यजनक आर्थिक तरक्की की |
  • 1914 तक, इसने लोहे तथा स्टील के उत्पादन में तथा कई विनिर्माण में ब्रिटेन तथा फ्रांस को काफी पीछे छोड़ दिया था |

यूरोप के भीतर संघर्ष :

  • उपनिवेशों तथा व्यापार के मुद्दे पर प्रतिस्पर्धा का परिणाम संघर्षों के रूप में होने के अतिरिक्त, यूरोप की प्रमुख शक्तियों के बीच यूरोप के भीतर कुछ घटनाओं को लेकर भी संघर्ष चल रहे थे |
  • इस समय यूरोप में छः प्रमुख शक्तियाँ थीं – ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, रूस, फ्रांस तथा इटली |

The First World war

Formation of Alliances:

  • European countries began to form themselves into opposing groups.
  • They also started spending vast sums of money to increase the size of their armies and navies, to develop new and more deadly weapons, and to generally prepare themselves for war.
  • Europe Was gradually becoming a vast armed camp

Incidents preceding the war:

  • The outbreak of the war was preceded by a series of incidents which added to the prevailing tension and ultimately led to the war.

Clash over Morocco:

  • In 1904, Britain and France had entered into a secret agreement (Britain was to have a free hand in Egypt, and France was to take over Morocco).
  • The agreement became known to Germany and aroused her indignation.
  • The German emperor went to Morocco and promised the Sultan of Morocco his full support for its independence.

The outbreak of war:

  • The war was precipitated by an incident which would not have created much stir if Europe had not stood divided into two hostile armed camps, preparing for war for many years
  • On 28 june 1914 Archduke Francis Ferdinand, the heir to the throne of Austria-Hungary , was assassinated at Sarajevo, capital of Bosnia. (It had been annexed by Austria only a few years earlier.)

प्रथम विश्व युद्ध

गठबन्धनों का निर्माण :

  • यूरोपीय देशों ने खुद को विरोधी समूहों में शामिल करना शुरू कर दिया |
  • उन्होंने अपनी सेनाओं और नौसेनाओं के आकार में वृद्धि करने के लिए, नए और अधिक घातक हथियारों का विकास करने के लिए, तथा आम तौर पर कहा जाए तो युद्ध के लिए खुद को तैयार करने के लिए भारी रकम खर्च करना शुरू कर दिया।
  • यूरोप धीरे-धीरे एक विशाल सशस्त्र छावनी बन रहा था |

युद्ध के पहले घटित घटनाएँ :

  • युद्ध की शुरुआत के पहले एक श्रृंखला में घटनाएँ घटित हुईं थीं जिन्होंने पहले से प्रबल तनाव में वृद्धि कर दिया तथा अंततः युद्ध की वजह बनीं |

मोरक्को के लिए संघर्ष :

  • 1904 में, ब्रिटेन तथा फ्रांस एक गुप्त समझौते में शामिल हुए ( जिसके तहत ब्रिटेन को मिस्र में खुली छूट मिलनी थी तथा फ़्रांस को मोरक्को का अधिग्रहण करना था )
  • इस समझौते के बारे में जर्मनी को पता चल गया तथा इसने उसकी नाराजगी को बढ़ा दिया |
  • जर्मनी के सम्राट मोरक्को गए तथा मोरक्को के सुलतान को उनके देश की स्वतंत्रता प्राप्ति में पूर्ण सहायता करने का वादा किया |

युद्ध की शुरुआत :

  • युद्ध की उत्पत्ति एक घटना से हुई थी जिससे बहुत ज्यादा विप्लव नहीं होता यदि यूरोप कई वर्षों से युद्ध की तैयारी करते हुए दो शत्रुतापूर्ण सशस्त्र छावनियों में विभाजित नहीं हुआ होता |
  • 28 जून 1914 को, ऑस्ट्रिया-हंगरी की सत्ता के वारिस  आर्चड्युक फ्रांसिस फर्डिनेंड की बोस्निया की राजधानी साराजेवो में हत्या कर दी गयी | ( इसपर ऑस्ट्रिया के द्वारा कुछ वर्षों पूर्व ही कब्ज़ा किया गया था )

The course of war:

  • Germany had hoped that through a lightning strike through Belgium, she would be able to defeat France within a few weeks and then turn against Russia.
  • The plan seemed to succeed for a while and the German troops were within 20 km of Paris.
  • Russia had opened attacks on Germany and Austria and some German troops had to be diverted to the eastern front.
  • Soon the German advance on France was halted and the war in Europe entered a long period of stalemate.
  • In the meantime the war had spread to many other parts of the world and battles were fought in West Asia, Africa and the Far East.

End of the war:

Efforts to bring the war to an end:

  • In early 1917, a few socialist parties proposed the convening of an international socialist conference to draft proposals for ending the war without annexations and recognition of the right of peoples to self-determination. However, the conference could not be held.
  • However, these proposals were rejected.
  • The Pope also made proposals for peace but these too were not taken seriously.
  • Though these efforts to end the war did not get any positive response from the governments of the warring countries, antiwar feelings grew among the people.
  • There was widespread unrest and disturbances and even mutinies began to break out.
  • Germany became a republic and the German emperor Kaiser William II fled to Holland.
  • The new German government signed an armistice on 11 November 1918 and the war was over.
  • The news was received with tremendous Jubilation all over the world

युद्ध का घटनाक्रम :

  • जर्मनी को उम्मीद थी कि बेल्जियम के माध्यम से एक त्वरित प्रहार द्वारा, वह फ्रांस को कुछ हफ़्तों में पराजित करने में कामयाब हो जाएगा एवं उसके बाद रूस की तरफ बढेगा |
  • यह योजना कुछ हद तक सफल रही एवं जर्मन सैनिक पेरिस के 20 किमी के भीतर थे |
  • रूस ने जर्मनी तथा ऑस्ट्रिया  पर हमलों की शुरुआत कर दी थी तथा कुछ जर्मन सैनिकों को पूर्वी मोर्चे पर जाना पड़ा था |
  • जल्द ही फ्रांस पर जर्मनी की बढ़त रुक गयी तथा यूरोप में यह युद्ध गतिरोध की एक लम्बी अवधि में प्रवेश कर गया |
  • तब तक, यह युद्ध विश्व के कई अन्य भागों तक फ़ैल चुका था तथा पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, एवं सुदूर पूर्व में लड़ाइयाँ लड़ी गयीं |

युद्ध की समाप्ति

युद्ध को समाप्त करने के प्रयास :

  • 1917 के आरम्भ में कुछ समाजवादी दलों ने बिना किसी राज्य-हरण के युद्ध को समाप्त करने तथा लोगों के स्वतंत्रता के अधिकार को स्वीकार करने हेतु रूपरेखा तैयार करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन को आहूत करने का प्रस्ताव दिया | हालाँकि, यह सम्मेलन आयोजित नहीं किया जा सका |
  • हालाँकि, इन प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया गया|
  • पोप ने भी शान्ति प्रस्ताव दिया किन्तु इन्हें भी गंभीरता से नहीं लिया गया |
  • यद्यपि युद्ध को समाप्त करने के इन प्रस्तावों को युद्ध में शामिल देशों की सरकारों से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली, किंतु लोगों में युद्ध विरोधी  भावनाओं का जन्म हुआ |
  • बड़े पैमाने पर अशांति एवं उपद्रव हुए तथा यहाँ तक कि सैन्य-विद्रोह होने भी शुरू हो गए |
  • जर्मनी एक गणतंत्र बन गया तथा जर्मन सम्राट कैसर विलियम द्वितीय हॉलैंड भाग गया |
  • नयी जर्मन सरकार ने  11 नवंबर 1918 को युद्धविराम संधि पर हस्ताक्षर कर दिया  तथा युद्ध समाप्त हो गया |
  • इस समाचार का स्वागत पूरी दुनिया में बेहद आनंदोत्सव के साथ किया गया |

Join Frontier IAS Online Coaching Center to prepare for UPSC/HCS/RAS Civil Service comfortably at your home at your own pace/time.

HCS(Prelims+Mains+Interview)   HCS Prelims(Paper 1+Paper 2)

IAS+HCS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    

  RAS+IAS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    RAS(Prelims+Mains+Interview)     RAS Prelims     UPSC IAS Prelims      UPSC  IAS (Prelims+Mains+Interview)

Click Here to subscribe Our YouTube Channel

 

 

Posted on Leave a comment

HCS Prelims Mains Exam Material | Online Exam Preparation | 2018

HCS Prelims Mains Exam Material | Online Exam Preparation | 2018

HCS Prelims Mains Exam Material | Online Exam Preparation | 2018

Imperialism and Colonialism

Imperialism in Africa

North Africa:

  • Algeria, on the north coast of Africa, was conquered by France in 1830, but it took her about 40 years to suppress the Algerian resistance.
  • It ‘was the most profitable of France’s colonial possessions, providing her a vast market for French goods
  • To the east of Algeria is Tunisia which was coveted by France, England and Italy

Morocco:

  • Morocco is situated on the north coast of Africa, just south of Gibraltar and thus it is very important to the western entrance of the Mediterranean.
  • Both France and Italy wanted to claim it as their territory
  • The two countries agreed, in 1900, to the French occupation of Morocco and to the Italian occupation of Tripoli and Cyrenaica, to the east of Tunisia

Egypt

  • Egypt was a province of the Turkish empire when the scramble for colonies began in the nineteenth century.
  • It was ruled by a representative of the Turkish Sultan, called Pasha
  • Since the time of Napoleon, France had been interested in Egypt
  • A French company had gained a concession from Ismail Pasha, the Governor of Egypt, to dig a canal across the isthmus of Suez.
  • Sudan, or what was earlier known as Egyptian Sudan, was jointly exploited by Egypt and Britain.
  • A Sudanese leader who had proclaimed himself the Mandi had succeeded in overthrowing Egyptian and British control over Sudan.
  • Sudan came under British rule.
  • The French at this time tried to occupy southern parts of Sudan but were forced to withdraw by the British
  • France, however, was given a free hand to extend her control over what was known as western Sudan and the Sahara
  • With these gains, France was able to connect her equatorial conquests with her west and north African conquests.

HCS Prelims Mains Exam Material

अफ्रीका में साम्राज्यवाद

उत्तरी अफ्रीका :

  • अफ्रीका के उत्तरी तट पर बसे अल्जीरिया पर 1830 में फ्रांस ने विजय प्राप्त कर ली थी, किंतु अल्जीरियाई लोगों के प्रतिरोध का दमन करने में उसे 40 वर्ष लग गए |
  • यह फ्रांस की सबसे लाभदायक  औपनिवेशिक संपत्ति थी, जिसने उसे फ्रांसीसी वस्तुओं के लिए एक विशाल बाज़ार प्रदान किया था |
  • अल्जीरिया के पूर्व में ट्यूनीशिया था जिसे जीतने की लालसा फ्रांस, इंग्लैंड तथा इटली को थी |

मोरक्को :

  • मोरोक्को, जिब्राल्टर के बिल्कुल दक्षिण में ,  अफ्रीका के उत्तरी तट पर स्थित है तथा इसलिए भूमध्य में पश्चिमी प्रवेश के लिए यह काफी महत्वपूर्ण था |
  • फ्रांस तथा इटली दोनों इसपर अपने प्रदेश के रूप में दावा करना चाहते थे |
  • 1900 में  इन दोनों देशों ने मोरक्को पर फ्रांस के अधिपत्य को स्वीकार कर लिया तथा त्रिपोली एवं  ट्यूनीशिया के पूर्व में सिरेनेइका पर इटली के अधिपत्य को स्वीकार कर लिया |

मिस्र

  • जब उन्नीसवीं शतब्दी में उपनिवेशों के लिए संघर्ष शुरू हुआ उस वक्त मिस्र तुर्की साम्राज्य का एक प्रांत था |
  • इसपर तुर्की के सुल्तान के पाशा नामक प्रतिनिधि द्वारा शासन किया जाता था |
  • नेपोलियन के समय से ही, फ़्रांस की दिलचस्पी मिस्र में थी |
  • एक फ्रांसीसी कंपनी को मिस्र के गवर्नर इस्माइल पाशा से स्वेज के नगरडमरूमध्य के किनारे  एक नहर बनाने की छूट मिली |
  • सूडान, अथवा जिसे पहले इजिप्टीयन सूडान के नाम से जाना जाता था, का शोषण मिस्र तथा ब्रिटेन दोनों ने संयुक्त रूप से किया |
  • एक सूडानी नेता जिसने खुद को मंडी घोषित किया था, सूडान से ब्रिटिश तथा मिस्र के नियंन्त्रण को उखाड़ फेकने में सफल रहा |
  • सूडान ब्रिटिश शासन के अंतर्गत आ गया |
  • इस समय फ्रांस ने सूडान के दक्षिणी भागों पर कब्ज़ा करने की कोशिश की तथा अंग्रेजों ने उसे वापस जाने पर मजबूर कर दिया |
  • फ़्रांस को हालाँकि पश्चिमी सूडान तथा सहारा पर अपने नियंत्रण को विस्तारित करने की खुली छूट दी गयी |
  • इन प्राप्तियों के साथ , फ़्रांस अब अपने भूमध्यीय उपनिवेशों को अपने पश्चिमी एवं उत्तरी अफ़्रीकी उपनिवेशों के साथ जोड़ने में सक्षम था |

Imperialism

The Americas and the Pacific:

  • By 1820s, almost all countries of the Americas had gained their independence from Spain and Portugal.
  • Only a few colonies were left like Cuba and Puerto Rico under Spanish rule and a few others under British, French, Dutch and Danish rule.
  • The United states in the nineteenth century emerged as the biggest power in the Americas.
  • The forces that had led to the emergence of imperialism in Europe and later in Japan also led to the emergence of the United States as a major imperialist power by the later half of the nineteenth century.
  • After the USA-Spanish War, the Philippines had become a U.S. colony.

Big Stick Policy/ Dollar diplomacy:

  • The policy of the United States was described as the ‘Big Stick’ policy and one of an ‘international policeman’ .
  • The extension of the USA influence through economic investments in the region is known as the ‘Dollar diplomacy’.
  • The economic and political domination of South America was facilitated by the absence of strong governments in the countries of South America.

Panama Canal

  • One of the major acquisitions by the United States was the Panama Canal.
  • A French company had started the construction of the canal in the Isthmus of Panama in Colombia.

Effects of Imperialism:

  • By 1914, almost all parts of the non-industrialized world had come under or indirect control of a few industrialized countries.
  • Most countries of Africa had lost their political freedom and were ruled by one or other country.

साम्राज्यवाद

अमेरिका तथा प्रशांत महासागर :

  • 1820 के दशक में, अमेरिकी महाद्वीप के लगभग सभी देशों को पुर्तगाल तथा स्पेन से स्वतंत्रता मिल चुकी थी |
  • स्पेन के शासन में क्यूबा तथा पोर्टो रिको जैसे केवल कुछ ही उपनिवेश बाकी थे तथा कुछ उपनिवेशों पर अंग्रेज, फ्रांसीसी, डच, तथा डेनिश का शासन था |
  • उन्नीसवीं शताब्दी में संयुक्त राज्य (यूएस) अमेरिकी देशों में सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरा|
  • वे ताकतें, जो यूरोप तथा बाद में जापान में साम्राज्यवाद के उदय की वजह बनीं थीं, वाही ताकतें उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में एक प्रमुख साम्राज्यवादी शक्ति के रूप में संयुक्त राज्य के उदय की वजह बनीं |
  • संयुक्त राज्य अमेरिका तथा स्पेन के बीच युद्ध के बाद, फिलीपींस अमेरिका का एक उपनिवेश बन गया |  

बड़ी छड़ी नीति/ डॉलर कूटनीति :

  • संयुक्त राज्य की नीति की व्याख्या “बिग स्टिक नीति” तथा एक “अंतर्राष्ट्रीय पुलिस अधिकारी” के रूप में की गयी है |
  • क्षेत्र में आर्थिक निवेशों के माध्यम से  संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रभाव के विस्तार को “डॉलर कूटनीति” के नाम से जाना जाता है |
  • दक्षिण अमेरिका के आर्थिक तथा राजनीतिक प्रभुत्व दक्षिण अमेरिका में मजबूत सरकारों की अनुपस्थिति ने सुगम बना दिया |

पनामा नहर

  • संयुक्त राज्य द्वारा किये गए प्रमुख अधिग्रहणों में से एक पनामा नहर का अधिग्रहण था |
  • कोलंबिया में एक फ्रांसीसी कंपनी ने नहर के स्थलडमरूमध्य का निर्माण शुरू किया था |

साम्राज्यवाद के प्रभाव :

  • 1914 तक, गैर-औद्योगीकृत विश्व के लगभग सभी भाग कुछ औद्योगीकृत देशों के अंतर्गत अथवा अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रण में आ चुके थे |
  • अफ्रीका के अधिकांश देशों ने अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता खो दी थी तथा उनपर किसी अन्य देश का शासन था |

Economic Backwardness:

  • Imperialism led to destruction of local industries.
  • For example, During imperialist rule, India’s  indigenous textile industry was destroyed and she became an importer of British cloth.

Racism:

  • Imperialism also bred racial arrogance and discrimination.
  • In their colonies, the white rulers and settlers discriminated against the local inhabitants who were considered inferior to them.

Struggle against Imperialism:

  • At every step, the imperialist powers met with the resistance of peoples they were trying to enslave.
  • Even when the conquest by arms was decisive, foreign rule that ensued was never peaceful for the rulers.
  • The conquered peoples organized movements not merely to overthrow foreign rule but also to develop their countries into modern nations.
  • In a sense, these movements against imperialism were international in character
  • People striving for freedom in one country supported the cause of peoples in other countries.
  • Most of the nineteenth century and the first quarter of the twentieth century were the years in which the nations of the western world held Asia and Africa as their colonial possessions.
  • In the later years of this period of imperialism, about two thirds of the world’s population was living under the rule of one foreign government or the other.
  • The empires acquired by the European nations were the largest in world history.
  • Despite the ‘gentlemen’s agreements’, there was a continuous effort among the western powers to redivide the world as between themselves but never with any consideration for the welfare of the people to whom the territory really belonged.

आर्थिक पिछड़ापन :

  • साम्राज्यवाद स्थानीय उद्योगों के विनाश की वजह बना |
  • उदाहरण के लिए, साम्राज्यवादी शासन के दौरान, भारत के स्वदेशी सूती वस्त्र उद्योग का विनाश हो गया तथा भारत ब्रिटिश वस्त्रों का एक आयातक बन गया |

नस्लवाद :

  • साम्राज्यवाद ने नस्लीय अहंकार तथा भेदभाव को भी बढ़ा दिया |
  • अपने उपनिवेशों में, गोरे शासक तथा उनके द्वारा बसाए गए लोग स्थानीय निवासियों के खिलाफ भेदभाव करते थे जिन्हें उनके सामने तुच्छ अथवा निम्न समझा जाता था |

साम्राज्यवाद के विरुद्ध संघर्ष :

  • प्रत्येक कदम पर, साम्राज्यवादी शक्तियों को उन लोगों के प्रतिरोध का सामना करना पड़ा जिन्हें वे गुलाम बनाना चाहते थे |
  • यहाँ तक कि जब विजय का निर्णय हथियारों से होता था तब भी लागू किया गया विदेशी शासन कभी भी शासकों के लिए शांतिपूर्ण नहीं रहा |
  • जिन लोगों पर विजय प्राप्त किया गया, उन लोगों ने ना केवल विदेशी शासन को उखाड़ फेकने बल्कि अपने देश को भी आधुनिक राष्ट्रों के रूप में विकसित करने के लिए आंदोलन किया |
  • एक तरह से, साम्राज्यवाद के खिलाफ हुए ये आंदोलन अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति के थे |
  • एक देश में स्वतंत्रता की माँग कर रहे लोग अन्य देशों में लोगों की माँग का समर्थन करते थे |
  • उन्नीसवीं शताब्दी के अधिकांश वर्ष तथा बीसवीं शताब्दी के एक चौथाई वर्ष वे वर्ष थे जिसमें पश्चिमी दुनिया के देशों ने एशिया तथा अफ्रीका के देशों को अपनी औपनिवेशिक संपत्ति बनाकर रखा था |
  • इस साम्राज्यवाद की अवधि में बाद के वर्षों में, दुनिया की लगभग दो तिहाई आबादी विदेशी सरकार अथवा अन्य किसी सरकार के शासन में रह रही थी |
  • यूरोपीय देशों द्वारा अधिग्रहित किये गए राष्ट्र विश्व इतिहास में सबसे बड़े थे |
  • जबानी समझौतों के बावजूद पश्चिमी शक्तियों द्वारा विश्व को अपने बीच पुनः विभाजित करने का प्रयास लगातार चलता रहा किंतु उनलोगों के कल्याण पर कभी भी विचार नहीं किया गया जिनका वास्तव में वह क्षेत्र था |  

Join Frontier IAS Online Coaching Center to prepare for UPSC/HCS/RAS Civil Service comfortably at your home at your own pace/time.

HCS(Prelims+Mains+Interview)   HCS Prelims(Paper 1+Paper 2)

IAS+HCS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    

  RAS+IAS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    RAS(Prelims+Mains+Interview)     RAS Prelims     UPSC IAS Prelims      UPSC  IAS (Prelims+Mains+Interview)

Click Here to subscribe Our YouTube Channel

 

 

Posted on Leave a comment

HCS Examination 2018 | Online Study Material | RAS PCS Exam Preparation

HCS Examination 2018 | Online Study Material | RAS PCS Exam Preparation

HCS Examination 2018 | Online Study Material | RAS PCS Exam Preparation

Japan as an Imperialist Power –

  • Japan started on her program of imperialist expansion in the last decade of the nineteenth century
  • Western countries had tried to establish their foothold there
  • 1853: American warships under Commodore Perry had, after a show of force, compelled the Japanese to open their country to American shipping and trade
  • This was followed by similar agreements by Japan with Britain, Holland, France and Russia.
  • However, Japan escaped the experience and fate of other Asian countries.
  • 1867: After a change in government, known as Meiji Restoration, Japan began to modernize her economy
  • Within a few decades, she became one of the most industrialized countries of the world but the forces that made many of the Western countries imperialist were also active in the case of Japan.
  • Japan had few raw materials to support her industries so she looked for lands that had them and for markets to sell her manufactured goods
  • China provided ample opportunities for Japan’s imperialist designs and the Anglo Japanese Treaty of 1902 recognized her as a power of equal standing with the great European powers.
  • In 1904-5 she defeated Russia and in 1910, Korea became a colony of Japan.
  • Japan had become a great power and could expand further at the cost of China if the Western powers would only allow her to do so
  • Japan’s rise as an imperialist power helped to show that imperialism was not limited to any one people or region
  • Rather, it was the result of greed for economic and political power which could distort the policy of any country regardless of its race or cultural claims.
  • Thus, almost all of Asia had been swallowed up by the imperialist countries by the early years of the twentieth century.

साम्राज्यवादी शक्ति के रूप में जापान:

  • उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक में जापान ने अपना साम्राज्यवादी विस्तार आरम्भ कर diya |
  • पश्चिमी देशों ने भी वहां अपना पैर जमाने की कोशिश की थी
  • 1853: कमोडोर पेरी के नेतृत्व में अमेरिका ने जापान को अपनी सैन्य शक्ति का भय दिखाकर उसे शिपिंग और व्यापार के लिए मजबूर किया |
  • इसके बाद जापान ने हॉलैंड, फ्रांस और रूस के साथ समान समझौते किए गए।
  • हालांकि, जापान के हालत अन्य एशियाई देशों जैसे नहीं थे |
  • 1867: सरकार में बदलाव के बाद, जिसे मेइजी पुनर्स्थापन के नाम से जाना जाता है,  जापान की अर्थव्यवस्था ने तरक्की की |
  • कुछ दशकों के भीतर, जापान दुनिया के सबसे अधिक औद्योगिक देशों में से एक बन गया ,जिन कारकों से अन्य पश्चिमी देश साम्राज्य्वादी बने थे, वे कारक जापान में भी सक्रिय थे |
  • जापान में उसके उद्योगों को गति प्रदान करने के लिए कच्ची सामग्रियां थीं, इसलिए इसकी तलाश केवल अपने उत्पादों को बेचने के लिए बाज़ार खोजने की जरूरत थी |
  • चीन ने जापान के साम्राज्यवादी विस्तार को पर्याप्त अवसर प्रदान किए और आंग्ल-जापानी संधि ने उसे अन्य शक्तिशाली यूरोपीय देशों के बराबर ला कर खड़ा कर दिया |
  • 1904-5 में उसने रूस को हराया और 1910 में, कोरिया जापान की एक उपनिवेश बन गई
  • अब जापान एक  शक्तिशाली देश था और वह चीन पर भी कब्जा कर सकता था यदि पश्चिमी देश उसकी राह में रोड़ा न बने |
  • साम्राज्यवादी शक्ति के रूप में जापान के उदय ने यह सिद्ध कर दिया की साम्राज्यवाद केवल किसी विशेष क्षेत्र अथवा किन्ही विशेष लोगों तक ही सिमित नहीं है|
  • इसके बजाय, यह आर्थिक और राजनीतिक शक्ति की लालच का परिणाम था, जो किसी भी देश की जाति अथवा सांस्कृतिक माहौल के बावजूद उसकी नीति को विकृत कर सकता था  

Imperialism in Africa:

  • In the later part of the fifteenth century, a new phase began in the history of some parts of Africa.
  • Besides the establishment of commercial relations with some parts of Africa, this phase was characterized by slave trade
  • Till about the last quarter of the nineteenth century, European control over Africa extended over about one-fifth of the territory of the continent.
  • However, within a few years almost the entire continent was partitioned among various European imperialist countries though it took them much longer to establish their effective occupation

Slave Trade:

  • The European penetration of Africa from the late fifteenth century onwards was confined for a long time mainly to certain coastal areas
  • Even these limited contacts led to the most tragic and disastrous consequences for the people of Africa, i.e. the purchase and sale of people-the slave trade.
  • African villages were raided by slave traders and people were captured and handed over to the European traders
  • Some African chiefs also took part in the slave trade by trading slaves in exchange for firearms which the European traders sold to them.
  • The Europeans themselves also raided the villages and enslaved the people, who were then transported.
  • When the demand for slaves in America increased, they were sent directly from Africa by the trade
  • Millions of Africans were uprooted from their homes and were taken in ships as inanimate objects and in such unhygienic conditions that the sailors on the ships often revolted
  • By early nineteenth century, trade in slaves lost its importance in the system of colonial exploitation.
  • Slavery was also a hindrance if the interior of Africa was to be opened to colonial exploitation

अफ्रीका में साम्राज्यवाद:

  • पंद्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में ,अफ्रीका के कुछ भागों के इतिहास में एक नया चरण शुरू हुआ।
  • अफ्रीका के कुछ हिस्सों के साथ व्यापारिक सबंधों के अलावा यह काल खंड दास व्यापार का परिचायक था |
  • उन्नीसवीं सदी की आखिरी तिमाही तक,अफ्रीका महाद्वीप पर यूरोपीय नियंत्रण लगभग 1 /5 गुणा तक बढ़ गया था |
  • हालांकि, कुछ वर्षों के भीतर लगभग पूरे महाद्वीप पर विभिन्न यूरोपीय साम्राज्यवादी देशों का प्रभाव था, इसलिए इन देशों का अपना अपना व्यापार स्थापित करने में थोड़ा अधिक समय लगा |

ग़ुलामों का व्यापार:

  • पंद्रहवीं शताब्दी के बाद से लम्बे समय तक यूरोपीय प्रभाव मुख्य रूप से अफ्रीका कुछ तटीय क्षेत्रों  तक सीमित था
  • हालांकि यह नाममात्र प्रभाव भी अफ्रीका के लोगों के दुखद और विनाशकारी साबित हुआ क्यूंकि इसी के साथ ही गुलामों का व्यापार शुरू हो गया |
  • दास व्यापारियों द्वारा अफ्रीकी गांवों पर धावा बोल दिया जाता और लोगों को पकड़कर यूरोपीय व्यापारियों को सौंप दिया गया
  • कुछ अफ्रीकी नेता भी यूरोपीय व्यापारियों से हथियार खरीदने के लिए गुलामों का व्यापार करते थे |
  • यूरोपियों ने स्वयं भी कई गांवों पर धावा बोला तथा लोगों गुलाम बनाकर उन्हें व्यापारिक केंद्र तक पहुंचा दिया |
  • जब अमेरिका में दासों की मांग में वृद्धि हुई तो गुलाम व्यापार को प्रत्यक्ष रूप से आरम्भ कर दिया गया |
  • लाखों अफ्रीकी लोगों को उनके घर से उठा कर उन्हें मैली एवं दूषित जहाज़ों में निर्जीव वस्तुओं की भांति ठूंस ठूंस कर ले जाया था ,जिसका नाविक कई बार विरोध भी करते थे |
  • उन्नीसवीं सदी के प्रारंभ में, गुलामों के व्यापार ने औपनिवेशिक शोषण की कुव्यवस्था में अपना महत्व खो गया।
  • यदि औपनिवेशिक शोषण अफ्रीका के आंतरिक भागों तक पहुँच जाता तो गुलामी इसके लिए एक बहुत बड़ी बाधा बन सकती थी |

HCS Examination 2018
Scramble for Africa:

  • The interior of Africa was almost unknown to the Europeans up to about the middle of the nineteenth century.
  • The coastal regions were largely in the hands of the old trading nations —the Portuguese, the Dutch, the English and the French
  • They had set up their forts there.
  • There were only two places where the European rule extended deep into the interior. In the north the French had conquered Algeria and in the south the English had occupied Cape Colony for     their commerce with India.
  • It had earlier been a Dutch colony where a number of Europeans, mainly the Dutch, had settled.
  • These settlers, known as Boers, had taken to farming. This was the only part of Africa where a large number of Europeans were settled
  • Within a few years, however, a scramble for colonies began and almost the entire continent had been cut up and divided among European powers

अफ्रीका के लिए संघर्ष

  • लगभग 19 वीं शताब्दी के मध्य तक अफ्रीका का आंतरिक भाग यूरोपियों के लिए अनजान था |
  • तटीय क्षेत्रों पर बड़े पैमाने पर पुराने व्यापारिक राष्ट्रों -पुर्तगाल, डच, ब्रिटेन और फ्रेंच का कब्जा था
  • उन्होंने वहां अपने किले स्थापित कर दिए थे |
  • केवल दो जगहें ऐसी थीं जहां यूरोपीय शक्तियों ने वहां के आंतरिक भागों में अपनी पैठ बनाई | उत्तर में फ्रेंच ने अल्जीरिया पर विजय प्राप्त की थी और दक्षिण में अंग्रेज़ों ने भारत के साथ अपने व्यापार के लिए केप कॉलोनी पर कब्जा कर लिया था।
  • यह शुरुआत में एक डच उपनिवेश था जहाँ पर यूरोपीय बस गए थे इनमे से अधिकांश डच थे |
  • इन लोगों को बॉयर कहा जाता था एवं  ये खेती करते थे | यह अफ्रीका का एकमात्र स्थान था जहाँ बड़ी संख्या में यूरोपीय बस गए थे |
  • कुछ वर्षों के भीतर उपनिवेशों के लिए एक संघर्ष शुरू हो गया और पूरा महाद्वीप विभिन्न यूरोपीय देशों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में बंट गया

Explorer, Traders and Missionaries:

  • They played their respective roles in the conquest of Africa.
  • The explorers aroused the Europeans’ interest in Africa.
  • The missionaries saw the continent as a place for spreading the message of Christianity.
  • The interests created by explorers and missionaries were soon used by the traders.
  • Western governments supported all these interests by sending troops, and the stage was set for conquest.
  • The economic might of the imperialist powers was much greater than the economic resources of the African states
  • The latter did not have the resources to fight a long war
  • In terms of military strength, the imperialist countries were far more powerful than the African states
  • The Africans had outdated firearms which had been sold to them by the Europeans.
  • Politically, like Indian states in the eighteenth century, the African states were not united
  • There were conflicts between states and within states.

खोजकर्ता, व्यापारी और मिशनरी:

  • उन्होंने अफ्रीका विजय में अपनी अपनी भूमिका निभाई
  • खोजकर्ताओं ने अफ्रीका में यूरोपीय लोगों की दिलचस्पी को जगाया
  • मिशनरी ने अफ्रीका को ईसाई धर्म के संदेश के प्रसार के लिए एक उपयुक्त स्थान के रूप में देखा।
  • खोजकर्ता और मिशनरियों द्वारा बनाई गई रुचियों का उपयोग व्यापारियों ने अपने व्यापार के लिए किया |
  • पश्चिमी सरकारों ने सैनिकों को भेजकर इन सभी कारकों का समर्थन किया और विजय के लिए जमीन तैयार की |
  • अफ्रीकी राज्यों के आर्थिक संसाधनों की तुलना में साम्राज्यवादी शक्तियों की आर्थिक शक्ति बहुत अधिक थी
  • इसके अतिरिक्त लम्बा युद्ध लड़ने के लिए उनके पास पर्याप्त संसाधन भी नहीं थे |
  • सैन्य शक्ति के संदर्भ में, साम्राज्यवादी देश अफ्रीकी राज्यों की तुलना में कहीं ज्यादा शक्तिशाली थे
  • अफ्रीकियों के पास पुरानी तकनीक के अस्त्र-शस्त्र थे जो यूरोपियों ने ही उनको बेचे थे |
  • अठारहवीं सदी में भारतीय राज्यों की तरह अफ्रीकी राज्य भी राजनीतिक रूप से एकजुट नहीं थे |
  • राज्यों का आपस में संघर्ष रहता था |

West and Central Africa:

  • In 1878, with the financial assistance of King Leopold II of Belgium, H M. Stanley founded the International Congo Association which made over 400 treaties with African chiefs .
  • They did not understand that by placing their ‘marks’ on bits of paper they were transferring their land to the Congo Association in exchange for cloth or other articles of no great value.
  • Stanley acquired large tracts of land by these methods.
  • In 1885, some 2.3 million square kilometres, rich in rubber and ivory, became the ‘Congo Free State’ with Leopold as its king.
  • Stanley called the occupation of Congo (the present Zaire) ‘a unique humanitarian and political enterprise’, but it began with brutal exploitation of the Congo people
  • They were forced to collect rubber and ivory .
  • The treatment of the Congolese people was so bad that even other colonial powers were shocked (soldiers of the Congo Free State chopped off the hands of the defiant villagers and brought them as souvenirs).
  • In 1908, Leopold was compelled to hand over the Congo Free State to the Belgian government, and it became known as Belgian Congo

पश्चिम और मध्य अफ्रीका:

  • 1878 में, बेल्जियम के राजा लियोपोल्ड द्वितीय की वित्तीय सहायता के साथ, एच.एम. स्टेनली ने अंतर्राष्ट्रीय कांगो संघ की स्थापना की, जिसने अफ्रीकी प्रमुखों के साथ 400 से अधिक संधियां की।
  • उन्हें यह नहीं पता था कि वे अपने प्रभावी क्षेत्रों की जानकारी लिखित में देकर कांगो एसोसिएशन को कपड़ों अथवा अन्य मूल्यहीन वस्तुओं के बदले अपने जमीन दे रहे थे |
  • इन युक्तियों के माध्यम से स्टेनली ने बड़े पैमाने पर भूमि का अधिग्रहण किया।
  • 1885 में, लगभग 2.3 मिलियन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र जहाँ रबर और हाथीदांत प्रचुर मात्रा में थे , काँगो के अधीन आ गए जिन पर  लियोपोल्ड का शासन था |
  • स्टेनली ने कांगो (ज़ैरे) के कब्जे को  ‘एक अद्वितीय मानवतावादी और राजनीतिक उद्यम’ कहा, लेकिन इसी के साथ ही कांगो के लोगों का क्रूर शोषण शुरू हो गया |
  • उन्हें रबर और हाथीदांत इकट्ठा करने के लिए मजबूर किया गया |
  • कांगो के लोगों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया जाता था, कांगो के सैनिक विद्रोही गावं वालों के हाथ काट देते और राजा को स्मृति चिह्न के रूप में पेश करते थे | यह स्थिति देखकर अन्य औपनिवेशिक शक्तियों  को भी गहरा धक्का लगा |
  • 1908 में, लियोपोल्ड ने मजबूरन  कांगो फ्री स्टेट को बेल्जियम की सरकार को सौंप दिया अब इस बेल्जियम कांगो के रूप में जाना जाने लगा |
  • धीरे-धीरे, कांगो के सोने, हीरा, यूरेनियम, लकड़ी और तांबा, उसके रबड़ और हाथीदांत से ज्यादा महत्वपूर्ण बन गए।

 

Join Frontier IAS Online Coaching Center to prepare for UPSC/HCS/RAS Civil Service comfortably at your home at your own pace/time.

HCS(Prelims+Mains+Interview)   HCS Prelims(Paper 1+Paper 2)

IAS+HCS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    

  RAS+IAS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    RAS(Prelims+Mains+Interview)     RAS Prelims     UPSC IAS Prelims      UPSC  IAS (Prelims+Mains+Interview)

Click Here to subscribe Our YouTube Channel

Posted on Leave a comment

Mission HCS Exam 2018 | Imperialism And Colonialism | History Notes

Mission HCS Exam 2018 | Imperialism And Colonialism | History Notes

Mission HCS Exam 2018 | Imperialism And Colonialism | History Notes

Imperialism And Colonialism

Japan as an Imperialist Power:

  • Japan started on her program of imperialist expansion in the last decade of the nineteenth century
  • Western countries had tried to establish their foothold there
  • 1853: American warships under Commodore Perry had, after a show of force, compelled the Japanese to open their country to American shipping and trade
  • 1867: After a change in government, known as Meiji Restoration, Japan began to modernize her economy
  • Within a few decades, she became one of the most industrialized countries of the world but the forces that made many of the Western countries imperialist were also active in the case of Japan.
  • Japan had few raw materials to support her industries so she looked for lands that had them and for markets to sell her manufactured goods

Imperialism in Africa

  • In the later part of the fifteenth century, a new phase began in the history of some parts of Africa.
  • Besides the establishment of commercial relations with some parts of Africa, this phase was characterized by slave trade
  • Till about the last quarter of the nineteenth century, European control over Africa extended over about one-fifth of the territory of the continent.

Slave Trade:

  • The European penetration of Africa from the late fifteenth century onwards was confined for a long time mainly to certain coastal areas
  • Even these limited contacts led to the most tragic and disastrous consequences for the people of Africa, i.e. the purchase and sale of people-the slave trade.
  • African villages were raided by slave traders and people were captured and handed over to the European traders

History Notes

साम्राज्यवादी शक्ति के रूप में जापान

  • उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक में जापान ने अपना साम्राज्यवादी विस्तार आरम्भ कर diya |
  • पश्चिमी देशों ने भी वहां अपना पैर जमाने की कोशिश की थी
  • 1853: कमोडोर पेरी के नेतृत्व में अमेरिका ने जापान को अपनी सैन्य शक्ति का भय दिखाकर उसे शिपिंग और व्यापार के लिए मजबूर किया |
  • 1867: सरकार में बदलाव के बाद, जिसे मेइजी पुनर्स्थापन के नाम से जाना जाता है,  जापान की अर्थव्यवस्था ने तरक्की की |
  • कुछ दशकों के भीतर, जापान दुनिया के सबसे अधिक औद्योगिक देशों में से एक बन गया ,जिन कारकों से अन्य पश्चिमी देश साम्राज्य्वादी बने थे, वे कारक जापान में भी सक्रिय थे |
  • जापान में उसके उद्योगों को गति प्रदान करने के लिए कच्ची सामग्रियां थीं, इसलिए इसकी तलाश केवल अपने उत्पादों को बेचने के लिए बाज़ार खोजने की जरूरत थी |

अफ्रीका में साम्राज्यवाद:

  • पंद्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में ,अफ्रीका के कुछ भागों के इतिहास में एक नया चरण शुरू हुआ।
  • अफ्रीका के कुछ हिस्सों के साथ व्यापारिक सबंधों के अलावा यह काल खंड दास व्यापार का परिचायक था |
  • उन्नीसवीं सदी की आखिरी तिमाही तक,अफ्रीका महाद्वीप पर यूरोपीय नियंत्रण लगभग 1 /5 गुणा तक बढ़ गया था |

ग़ुलामों का व्यापार:

  • पंद्रहवीं शताब्दी के बाद से लम्बे समय तक यूरोपीय प्रभाव मुख्य रूप से अफ्रीका कुछ तटीय क्षेत्रों  तक सीमित था
  • हालांकि यह नाममात्र प्रभाव भी अफ्रीका के लोगों के दुखद और विनाशकारी साबित हुआ क्यूंकि इसी के साथ ही गुलामों का व्यापार शुरू हो गया |
  • दास व्यापारियों द्वारा अफ्रीकी गांवों पर धावा बोल दिया जाता और लोगों को पकड़कर यूरोपीय व्यापारियों को सौंप दिया गया

Explorer, Traders and Missionaries:

  • They played their respective roles in the conquest of Africa.
  • The explorers aroused the Europeans’ interest in Africa.
  • The missionaries saw the continent as a place for spreading the message of Christianity.
  • The interests created by explorers and missionaries were soon used by the traders.
  • The economic might of the imperialist powers was much greater than the economic resources of the African states
  • The latter did not have the resources to fight a long war
  • In terms of military strength, the imperialist countries were far more powerful than the African states
  • The Africans had outdated firearms which had been sold to them by the Europeans.

West and Central Africa:

  • In 1878, with the financial assistance of King Leopold II of Belgium, H M. Stanley founded the International Congo Association which made over 400 treaties with African chiefs .
  • They did not understand that by placing their ‘marks’ on bits of paper they were transferring their land to the Congo Association in exchange for cloth or other articles of no great value.
  • Stanley acquired large tracts of land by these methods.
  • In 1885, some 2.3 million square kilometres, rich in rubber and ivory, became the ‘Congo Free State’ with Leopold as its king.

French Congo:

  • When Stanley was carving out the empire for King Leopold in Congo, a Frenchman, de Brazza, was active north of the Congo river
  • Following the methods of Stanley, de Brazza won the area for France, this area became what was until recently called the French Congo with its capital town named Brazzaville, after de Brazza.
  • On Africa’s west coast, Senegal had been occupied by France earlier.
  • Now France set out to extend her empire in West Africa. Soon she obtained Dahomey (present Benin), the Ivory Coast and French Guinea.

खोजकर्ता, व्यापारी और मिशनरी:

  • उन्होंने अफ्रीका विजय में अपनी अपनी भूमिका निभाई
  • खोजकर्ताओं ने अफ्रीका में यूरोपीय लोगों की दिलचस्पी को जगाया
  • मिशनरी ने अफ्रीका को ईसाई धर्म के संदेश के प्रसार के लिए एक उपयुक्त स्थान के रूप में देखा।
  • खोजकर्ता और मिशनरियों द्वारा बनाई गई रुचियों का उपयोग व्यापारियों ने अपने व्यापार के लिए किया |
  • अफ्रीकी राज्यों के आर्थिक संसाधनों की तुलना में साम्राज्यवादी शक्तियों की आर्थिक शक्ति बहुत अधिक थी
  • इसके अतिरिक्त लम्बा युद्ध लड़ने के लिए उनके पास पर्याप्त संसाधन भी नहीं थे |
  • सैन्य शक्ति के संदर्भ में, साम्राज्यवादी देश अफ्रीकी राज्यों की तुलना में कहीं ज्यादा शक्तिशाली थे
  • अफ्रीकियों के पास पुरानी तकनीक के अस्त्र-शस्त्र थे जो यूरोपियों ने ही उनको बेचे थे |

पश्चिम और मध्य अफ्रीका:

  • 1878 में, बेल्जियम के राजा लियोपोल्ड द्वितीय की वित्तीय सहायता के साथ, एच.एम. स्टेनली ने अंतर्राष्ट्रीय कांगो संघ की स्थापना की, जिसने अफ्रीकी प्रमुखों के साथ 400 से अधिक संधियां की।
  • उन्हें यह नहीं पता था कि वे अपने प्रभावी क्षेत्रों की जानकारी लिखित में देकर कांगो एसोसिएशन को कपड़ों अथवा अन्य मूल्यहीन वस्तुओं के बदले अपने जमीन दे रहे थे |
  • इन युक्तियों के माध्यम से स्टेनली ने बड़े पैमाने पर भूमि का अधिग्रहण किया।
  • 1885 में, लगभग 2.3 मिलियन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र जहाँ रबर और हाथीदांत प्रचुर मात्रा में थे , काँगो के अधीन आ गए जिन पर  लियोपोल्ड का शासन था |

फ्रेंच कांगो:

  • जब स्टेनली कांगो में राजा लियोपोल्ड के साम्राज्य की सीमा का निर्धारण कर रहे थे तो एक अन्य फ्रांसीसी, डे ब्राज़ा, कांगो नदी के उत्तर में सक्रिय था |
  • स्टेनली की नीति का ही अनुसरण करते हुए ,ब्राज़ा ने फ्रांस के लिए उस क्षेत्र को जीत लिया, ब्राज़ा की जीत के बाद इस क्षेत्र को फ्रेंच कांगों कहा जाने लगा तथा ब्राज़िविले इसकी राजधानी बनी |
  • अफ्रीका के पश्चिमी तट पर स्थित सेनेगल पर फ्रांस का कब्जा था।
  • अब फ्रांस पश्चिम अफ्रीका में अपने साम्राज्य का विस्तार कर सकता था | जल्द ही उसने डाहोमी (वर्तमान बेनिन), आइवरी कोस्ट और फ्रेंच गिनी को अपने अधीन कर लिया

Imperialism in Africa

South Africa:

  • In South Africa, the Dutch had established the Cape Colony, which the British took over in the early nineteenth century.
  • The Dutch settlers, known as Boers, then went north and set up two states, the Orange Free State and the Transvaal.

Rhodesia

  • The English adventurer, Cecil Rhodes, came to south Africa in 1870, made a fortune in mining diamond and gold of this region and gave his name to an African colony Rhodesia.
  • Northern Rhodesia is now independent and is called Zambia.
  • Southern Rhodesia which became an independent nation in April 1980 is Zimbabwe.
  • Rhodes became famous as a great philanthropist who founded the ‘Rhodes scholarships’, but he was first of all a profiteer and empire builder.

East Africa:

  • Except for the Portuguese, possession of a part of Mozambique, East Africa had not been occupied by any European power before 1884.
  • In that year a German adventurer, named Karl Peters, came to the coastal region.
  • Using bribery and threats, he persuaded some rulers to sign agreements placing themselves under German protection
  • The ruler of Zanzibar who claimed East Africa as his property got a strip of coast land, 1600 kilometres long and 16 kilometres deep
  • The Northern half of this strip was reorganized as a British sphere of influence, and the southern part Tanganyika, a German sphere of influence.
  • These were later occupied by England and Germany

अफ्रीका में साम्राज्यवाद

दक्षिण अफ्रीका:

  • दक्षिण अफ्रीका में, डच ने केप कॉलोनी की स्थापना की थी, जिस पर अंग्रेजों ने उन्नीसवीं शताब्दी की शुरुआत कब्जा कर लिया था |
  • डच निवासी जिन्हें बोआर कहा जाता था, उत्तर की ओर गए एवं दो राज्यों ऑरेंज फ्री स्टेट और ट्रांसवाल का गठन किया।

रोडेशिया

  • 1870 में दक्षिण अफ्रीका में अंग्रेजी एडवेंचरर, सेसिल रोड्स ने इस क्षेत्र के सोने और हीरे के खनन को आरम्भ किया और इसे अपना नाम रोड्सिया दिया
  • उत्तरी रोड्सिया अब एक स्वतंत्र देश है और इसे ज़ाम्बिया कहा जाता है |
  • दक्षिणी रोडेशिया जो 1980 में एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आया अब उसे जिम्बाब्वे कहा जाता है|
  • रोड्स एक महान समाज-सेवी के रूप में प्रसिद्ध हुए जिन्होंने रोड्स स्कोलरशिप की शुरुआत की, लेकिन अंत में वह अपने उपनिवेशों का विस्तार करने वाले और व्यापार द्वारा लाभ कमाने वाले व्यक्ति ही थे |

पूर्वी अफ्रीका

  • पुर्तगालियों को छोड़कर, जिनका मोज़ाम्बिक के एक हिस्से पर कब्जा था , 1884 से पहले किसी भी यूरोपीय देश का पूर्वी अफ्रीका का कब्जा नहीं था |
  • इस वर्ष एक अन्य जर्मन खोजकर्ता कार्ल पीटर ने तटीय क्षेत्रों में प्रवेश किया
  • रिश्वतखोरी और धमकियों का इस्तेमाल करते हुए, उन्होंने कुछ शासकों को जर्मन सुरक्षा का आश्वासन देते हुए कई समझौतों पर हस्ताक्षर करवाए |
  • ज़ांज़ीबार के शासक, जिसने पूर्वी अफ्रीका को अपने राज्य के रूप में दावा पेश किया था, उसे केवल तटीय भूमि का एक खंड ही मिला जो 1600 किलोमीटर लंबा और 16 किलोमीटर गहरा था |
  • इस खंड का उत्तरी भाग ब्रिटिश का प्रभावी क्षेत्र था जबकि दक्षिणी भाग तांगान्यीका जर्मन प्रभाव वाला क्षेत्र था |
  • बाद में इन पर  इंग्लैंड और जर्मनी द्वारा कब्जा कर लिया गया |

Join Frontier IAS Online Coaching Center to prepare for UPSC/HCS/RAS Civil Service comfortably at your home at your own pace/time.

HCS(Prelims+Mains+Interview)   HCS Prelims(Paper 1+Paper 2)

IAS+HCS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    

  RAS+IAS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    RAS(Prelims+Mains+Interview)     RAS Prelims     UPSC IAS Prelims      UPSC  IAS (Prelims+Mains+Interview)

Click Here to subscribe Our YouTube Channel