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Rajasthan art and culture I Customs and costumes part 1/3 Rajasthan I RAS 2018

Rajasthan art and culture I Customs and costumes part 1/3

Rajasthan art and culture I Customs and costumes part 1/3

Sixteen Sanskar: –

  • The following sixteen rites have been considered compulsory from conception to funeral to make the human body healthy  and pure and for good values ​​of the mind.

1). Conception: –

  • Proper time for conception and essential religious activities

2). Punsvan: –

  • Before giving  birth to the child in the womb, praising the deities  for the birth of a son is called Punsvan Samskara.

3). Seemantotrayan: –

  • This Sanskar was done to save the pregnant woman from abnormal/evil forces.

PDF :

[pdf-embedder url=”https://www.baljitdhaka.com/wp-content/uploads/securepdfs/2018/04/Customs-and-Costumes-in-Rajasthan-Part-1.pdf” title=”Customs and Costumes in Rajasthan Part – 1″]

सोलह संस्कार :-

  • मनुष्य शरीर को स्वस्थ तथा दीर्घायु और मन को शुद्ध और अच्छे संस्कारों वाला बनाने के लिए गर्भाधान से लेकर अंत्येष्टि तक निम्न सोलह संस्कार अनिवार्य माने गये हैं :-

1).  गर्भाधान :-

  • गर्भाधान के पूर्व उचित काल और आवश्यक धार्मिक क्रियाएँ।

2). पुंसवन :-

  • गर्भ में स्थित शिशु को पुत्र का रूप देने के लिए देवताओं की स्तुति कर पुत्र प्राप्ति की याचना करना पुंसवन संस्कार कहलाता है।

3). सीमन्तोन्नयन :-

  • ग़र्भवति स्त्री को अमंगलकारी शक्तियों से बचाने के लिए किया गया संस्कार।

4). Jaatkarm: –

  • Sanskar performed on the birth of a child.

5). Naamkaran: –

  • Samskaras on the tenth or twelfth day of birth to name the baby.

Video:

6). Nishkraman: –

  • After the fourth month of birth, to bring the child out of the house for the first time, to let him see the sun and moon.

7). Annapraashan: –

  • The action of giving first cereal food to the child in the sixth month of birth

8). Chudakarm or Jadulla: –

  • In the first or third year of the baby, the rituals  being done for cutting head hair first. It is also called jadulla removing.

4). जातकर्म :-

  • बालक के जन्म  पर किया जाने वाला संस्कार।

5). नामकरण :-

  • शिशु का नाम रखने के लिए जन्म के दसवें अथवा 12 वें दिन किया जाने वाला संस्कार।

6). निष्क्रमण :-

  • जन्म के चौथे मास में बालक को पहली बार घर से निकालकर सूर्य और चंद्र दर्शन कराना।

7). अन्नप्राशन :-

  • जन्म के छठे मास में बालक को पहली बार अन्न का आहार देने की क्रिया।   

8). चूड़ाकर्म या जडूला :-

  • शिशु के पहले या तीसरे वर्ष में सिर के बाल  पहली बार मुड़वाने पर किया जाने का संस्कार। इसे जडूला उतारना भी कहते हैं।

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9). Karnvedh: –

  • The sanskaar to be done in the third and fifth years of the baby, in which the ear of the baby is pierced.

10). Schooling: –

  • Sanskaras being done by worshipping the deities and  sitting in front of the Guru to learn the alphabet.

11). Upaniyan: –

  • The child was taken to the teacher for his  education , the Brahmachari Ashram would start with this ritual. It was also called ‘Yagyopaveet Sanskar’. The Brahmins, the Kshatriye and the Vaishyas had the right to practice upnayan.

9). कर्णवेध :-

  • शिशु के तीसरे एवं पाँचवें वर्ष में किया जाने वाला संस्कार, जिसमें शिशु के कान बीधें जाते हैं।

10). विद्यारम्भ :-

  • देवताओं की स्तुति कर गुरु के समक्ष बैठकर अक्षर ज्ञान कराने हेतु किया जाने वाला संस्कार।

11). उपनयन :-

  • इस संस्कार द्वारा बालक को शिक्षा के गुरु के पास ले जाया जाता था ब्रम्हचर्याश्रम इसी संस्कार से  प्रारम्भ होता था। इसे ‘यज्ञोपवीत संस्कार’ भी कहते थे। ब्राह्मणों, क्षत्रीय और वैश्यों को ही उपनयन का अधिकार था।

12). Vedaarambh: –

  • Samskaras to take the right to read the  Vedas

13). Keshant or Godan: –

  • Normally a ritual performed at the age of 16, in which the bachelors had to cut their hair. Now this rites have been extinct.

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14). Samavartan or Convocation: –

  • The ritual performed at the end of the education, the student gave his teacher  Gurudakshina and received blessings from him and returned home after bathing. Due to bathing(snaan), the bachelor was called a Snaatak.

12). वेदारम्भ :-

  • वेदों के पठन-पाठन का अधिकार लेने हेतु किया गया संस्कार।

13). केशान्त या गोदान :-

  • सामान्यतः 16 वर्ष की आयु में किया जाने वाला संस्कार , जिसमें ब्रम्हाचारी को अपने बाल कटवाने पड़ते थे। अब यह संस्कार विलुप्त हो चूका है।

14). समावर्त्तन या दीक्षांत संस्कार :-

  • शिक्षा समाप्ति पर किया जाने वाला संस्कार, विधार्थी अपने आचार्य को गुरुदक्षिणा देकर उसका आशीर्वाद गृहण कराता था तथा स्नान करके घर लौटता था। स्नान के कारण  ही ब्रम्हाचारी को स्नातक कहा जाता था।

15). Wedding ceremony :-

  • Sanskar on the occasion of admission in Grihastashram

16). Funeral: –

  • It is the cremation performed on death.

Other major customs: –

(1). Shamela or Madhuperk :-

  • On reaching bride’s home, the bride’s father introduces the groom’s party with his relatives,  it is called ‘Samola’.

(2) Bindoli: –

  • A day before the marriage, the iundoli of  bride and groom is taken out, in which women sing songs, and make both of them roam in a village or a mohalla.

15). विवाह संस्कार :-

  • ग्रहस्थाश्रम में प्रवेश के अवसर पर किया जाने वाला संस्कार।

16). अंत्येष्टि :-

  • यह मृत्यु  पर किया जाने वाला दाह संस्कार है।

अन्य प्रमुख रीति-रिवाज :-

(1). सामेला या मधुपर्क :-

  • वर के वधु के घर पहुँचने पर वधु  का पिता अपने संबंधियों के साथ वर पक्ष का स्वागत करता है, इसे ‘समोला’  कहते हैं।

(2) बिंदोली :-

  • विवाह के एक दिन पूर्व वर व वधु की बिंदोली  निकाली जाती है, जिसमें स्त्रियाँ माँगलिक गीत गाते हुए उन दोनों को गाँव या मोहल्ले में घूमाती हैं।

(3). Pahrawani / Rangabari: –

  • While the  barat is returning, every barati and bride and bridegroom are given  some amount of money and gifts and they are called pahravani.

(4). Muklava or Gauna: –

  • If the married minor becomes adult enough and she is sent to her in-laws, , it is called ‘Muklava’ or ‘gauna’.

(5). Badhaar : –

  • The collective food  on the occasion of marriage

(6). Kankandor Bandhna:

  • The moli thread tied in the hands of bride and bridegroom before marriage is called Kankandor  bandhna.

(3). पहरावणी/रंगबरी :-

  • बारात विदा करते समय प्रत्येक बाराती तथा वर-वधु को यथाशक्ति धन व उपहारादि दिए जाते हैं, जिसे पहरावणी कहते है।

(4). मुकलावा या गौना :-

  • विवाहित अवयस्क कन्या को वयस्क होने पर उसे अपने ससुराल भेजना ‘मुकलावा’ करना या ‘गौना’ कहलाता है।  

(5). बढार :-

  • विवाह के अवसर पर दिया जाने वाला सामूहिक प्रतिभोज।

(6). कांकनडोर बांधना :-

  • विवाह के पूर्व वर व वधु के हाथ में बाँधा गया मोली का धागा कांकन डोर बाँधना कहा जाता है।

(7). Jamana: –

  • On the birth of a son, The Nai  takes the Pagle (Footprints using turmeric of the new born on white clothes). Then the maternal grandfather or uncle  comes with garments, gifts etc., which is called jamana.

(8). Nangal: –

  • The ceremony of inauguration of the newly built house is called  Nangal.

(9) Mausar: –

  • Death feast is called a Mausar. It is also called Ausar or Nukta.

(10). Toran : –

  • On the occasion of marriage, the bride toches a stick on the toran on the main entrance of the bride’s house. This is called toran ceremony.

(7). जामणा :-

  • पुत्र जन्म पर नाई बालक के पगल्ये (सफेद वस्त्र पर हल्दी से अंकित पद चिन्ह) लेकर उसके ननिहाल जाता है। तब उसके नाना या मामा उपहार स्वरूप वस्त्राभूषण, मिठाई आदि लेकर आते हैं, जिसे ‘जामणा’ कहा जाता है।

(8). नांगल :-

  • नवनिर्मित गृह के उद्घाटन की रस्म नांगल कहलाती है।

(9) मौसर :-

  • मृत्यु भोज को मौसर कहते है। इसे औसर या नुक्ता भी कहते हैं।

(10). तोरण मारना :-

  • विवाह के अवसर पर दूल्हे द्वारा दुल्हन के घर के मुख्य द्वार पर लटके तोरण पर छड़ी लगाना तोरण मारना  कहलाता है।

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Rajasthan GK Art and culture I religious cult part 2 I PDF I Video

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SantPipa (1383-1453 AD): –

  • He was born in the house of Gagron king Kadawa Rao khinchi (Chauhan). His mother’s name was Lakshmi-Vati and his childhood name was ‘Pratap Singh’.
  • Pipaji took initiation from Saint Ramanand and promoted Bhagvat devotion. Tailor community treats them as their god. There is a grand temple of Pipaji in Samadri village of Barmer where huge fair is held. Apart from this, fairs are also held in memory of Masurian and Gagron.
  • Saint Pippa also stayed for some time in Toda Gram (Tonk) where Pappa ji’s cave is situated in  which he used to sing hymns.

PDF Notes : Rajasthan GK Art and culture I religious cult part 2

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संतपीपा (1383-1453 ई.) :-

  • इनका जन्म गागरोन नरेश कड़ावा राव खींची (चौहान) के घर हुआ था। इनकी माता का नाम लक्ष्मी-वती था तथा इनके बचपन का नाम ‘प्रताप सिंह’ था।
  • पीपाजी ने संत रामानंद से दीक्षा ली तथा भगवत भक्ति का प्रचार किया। दर्जी समुदाय इन्हें अपना आराध्य मानता है। बाड़मेर के समदड़ी ग्राम में पीपाजी का भव्य मंदिर है जहाँ विशाल मेला भरता है। इसके अलावा मसूरिया एवं गागरोन में भी इनकी स्मृति में मेले लगते हैं।
  • संत पीपा कुछ समय तोडा ग्राम (टोंक) में भी रहे जहाँ पीपा जी की गुफा है जिसमें वे भजन किया करते थे।
  • Saint Pipa has strongly criticized castes, communalismn and discrimination and worshiped Nirguna Brahma, taught the necessity of the master to attain God and the means of salvation.
  • He was  the first saint who waved the Bhakti movement in Rajasthan.

Saint Sunderdas ji (1596-1707.): –

  • Mr. Sundar Das, the ultimate disciple of Dadu Ji, was born in the Khandeval Vaishya family in Dausa. His father was Shri Parmanand (Shah Chokha).
  • By taking initiation from Daduji, he preached his teachings and composed many texts. The main texts are- Gyaan Samundra, Gyaan Savaiyya (Sundarvilas), Sundar Saar, Sundar granthavali etc.
  • संत पीपा ने जाति-पाँति, सम्प्रदायवाद, ऊँच-नीच आदि भेदभावों की कटु आलोचना की एवं निर्गुण ब्रम्हा की उपासना करने, ईश्वर प्राप्ति हेतु गुरु की अनिवार्यता एवं भक्ति को मोक्ष प्राप्ति का साधन बनाने का उपदेश दिया।
  • राजस्थान में भक्ति आंदोलन का अलख जगाने वाले ये प्रथम संत थे।

संत सुंदरदास जी (1596-1707ई.) :-

  • दादूजी के परम शिष्य श्री सुंदरदास जी का जन्म दौसा में खण्डेवाल वैश्य परिवार में हुआ। इनके पिता श्री परमानंद(शाह चोखा) थे।
  • दादूजी से दीक्षा लेकर इन्होंने उनके उपदेशों का प्रचार किया और कई ग्रन्थों की रचना की। प्रमुख ग्रंथ हैं-ज्ञान समुन्द्र, ज्ञान सवैया (सुन्दरविलास), सुंदर सार, सुंदर ग्रंथावाली आदि।
  • He passed away in Sanganer in 1764. his main workplace was Dausa, Sanganer, Narayana and Fatehpur Shekhawati. He started the ‘Naga Sadhu’ class in the Dadu sect.

Saint rajjab ji: –

  • Rajjab ji was born in Sanganer (Jaipur) in the 16th century. While going for marriage, he  listened to the teachings of Daduji, he became his disciple and throughout his life he remained in  groom’s attire and spread ‘Dudu’s teachings’.
  • ‘Rajjabvani’ and Sarvangi are his main texts. He died in Sanganer.
  • इनका निधन संवत 1764 में सांगानेर में हुआ। इनके मुख्य कार्यस्थल दौसा, सांगानेर, नारायणा एवं फतेहपुर शेखावाटी रहे। इन्होने दादू पंथ में ‘नागा’ साधु वर्ग प्रारम्भ किया।

संत रज्जब जी :-

  • रज्जब जी का जन्म सांगानेर(जयपुर) में 16 वीं सदी में हुआ। विवाह के लिए जाते समय दादूजी के उपदेश सुनकर ये उनके शिष्य बन गये और जीवन भर दूल्हे के वेश में रहते हुए ‘दादू के उपदेशों’ का बयान किया।
  • ‘रज्जबवाणी’ एवं सर्वंगी इनके प्रमुख ग्रंथ हैं। इनका स्वर्गवास सांगानेर में हुआ, जहाँ इनकी प्रधान गद्दी है।

Saint Dhanna Ji: –

  • Sant Dhanna ji, disciple of Ramananda  was born in a Jat family in 1472 in ‘Dhuvan’ village near Tonk. Since childhood, he used to be absorbed in devotion of god.
  • These saints started preaching after taking knowledge from Ramnand. Serving saints, freedom of belief in God, and opposing Karm-kaands, superstitions,  and rituals etc. are his main teachings.

Saint Jaimladas ji: –

  • The revered Shree Jimal Das was a disciple of the famous saint, Shri Madhodas ji Diwan of the Ramasnehi Samradaya . He gave deeksha to  Sant Hariram Das, initiator of ramsnehi community of Sinhathal branch.

संत धन्ना जी :-

  • संत धन्ना जी रामानन्द के शिष्य संत धन्ना जी टोंक के निकट ‘धुवन’ ग्राम में संवत 1472 में एक जाट परिवार में पैदा हुए। ये बचपन से ही ईश्वर भक्ति में लीन रहते थे।
  • ये संत रामानंद से दीक्षा लेकर धर्मोप्रदेश एवं भगवत भक्ति का प्रचार करने लगे। संग्रह व्रति से मुक्त रहते हुए संतों की सेवा, ईश्वर में दृढ़ विश्वास तथा बाहरी आडंबरों व कर्मकाण्डों का विरोध आदि इनके प्रमुख उपदेश हैं।

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संत जैमलदास जी :-

  • पूज्यवाद श्री जैमलदास जी रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रसिद्ध संत श्री माधोदास जी दीवान के शिष्य थे। इन्होंने रामस्नेही सम्प्रदाय की सिंहथल शाखा के प्रवर्त्तक संत हरिरामदास जी को दीक्षा दी।
  • Therefore he is also considered as the Adi Acharya of the Sinhital Khopada Branch.

Devotee poet Durlabh: –

  • Sant Durlabh Jee was born in V.S  1753, it was in the Vaagad area . He preached Krishna’s devotion and drew the people to Krishna Leela. He created his work area in Banswara and Dungarpur. He is also called ‘Narsingh of Rajasthan’.

Saint Raidas ji: –

  • Ramanand’s disciple Sant Raidas was not from Rajasthan, but he spent some time in Rajasthan too. These was of the Chamar caste. They also preached  devotion and against discrimination prevailing in the society and devotion of Nirgun Brahma.
  • इसलिए इन्हें सिहंथल खोपडा शाखा का आदि आचार्य भी माना जाता है।

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भक्त कवि दुर्लभ :-

  • संत दुर्लभ जी का जन्म वि.सं. 1753 में वागड़ क्षेत्र में हुआ। इन्होंने कृष्ण भक्ति के उपदेश दिये  तथा लोगों को कृष्ण लीला के रसामृत से सराबोर किया। बाँसवाड़ा व डूँगरपुर को इन्होंने अपना कार्यक्षेत्र बनाया था। इन्हें ‘राजस्थान का नृसिंह’ भी कहते हैं।

संत रैदास जी :-

  • रामानंद के शिष्य संत रैदास राजस्थान के नहीं थे परन्तु इन्होने अपना कुछ समय राजस्थान में भी बिताया था। ये जाति के चमार थे। इन्होंने भी समाज में व्याप्त आडंबरों एवं भेदभावों का विरोध कर निर्गुण ब्रम्हा की भक्ति का उपदेश  दिया।
  • At the time of Meera, he came to Chittor. His chhatri is in a corner of Kumbhashyam temple of Chittorgarh. His teachings are in the book “Radias Ki Parachi”.

Saint Shiromani Meera: –

  • Meerabai was born in 1498 in Kurki village near Merta. His father Shri Ratna Singh ji Rathod was the Jageerdaar of Bajoli.
  • Meera ji was raised  at her grandfather’s house here. Her birth name was Pemal. She were married to Bhojraj, son of Maharana Sangram Singh (Sanga) of Mewar but he died only  few years later.
  • Meera Bai told the simple path of Saguna devotion, Bhajan, Dance and Krishna Smaran.
  • ये मीरा के समय चितौड़ आये। इनकी छतरी चितौड़गढ़ के कुम्भश्याम मंदिर के एक कोने में है। इनके उपदेश ‘रैदास की परची’ ग्रंथ में हैं।

संत शिरोमणी मीरा :-

  • मीराबाई का जन्म सन 1498 में मेड़ता के पास कुड़की ग्राम में हुआ था। इनके पिता श्री रत्न सिंह जी राठौड़ बाजोली के जागीरदार थे।
  • मीरा जी का लालन-पालन अपने दादाजी के यहाँ मेड़ता में हुआ। इनका जन्म नाम पेमल था। इनका विवाह मेवाड़ के महाराणा संग्रामसिंह (सांगा) के पुत्र भोजराज के साथ हुआ, परन्तु कुछ वर्ष बाद ही उनकी मृत्यु हो गई थी।
  • मीरा बाई ने सगुण भक्ति का सरल मार्ग भजन, नृत्य एवं कृष्ण स्मरण को बताया।
  • Meera ji went to the Ranchod temple in Dakor, Gujarat and in her last moments, got merged in his Girdhar Gopal. Meeraji’s ‘Padavalis’ are famous.

Gavri Bai: –

  • Born in Nagar family of Dungarpur, Gavari Bai flowed the stream of Bhaktiras like Meera in Vaagad. She is also called ‘Vaagad ki Meera’.

Saint Mawji: –

  • Saint Maawji was born in a Brahmin family of Sabla village (Dungarpur) In 1727, he received enlightenment at a place named Beneshwar.
  • मीरा जी अपने अंतिम समय में गुजरात के डाकोर स्थित रणछोड़ मंदिर में चली गई और वहीं अपने गिरधर गोपाल में विलीन हो गई। मीरा जी की ‘पदावलियाँ’ प्रसिद्ध हैं।

गवरी बाई :-

  • डूंगरपुर के नागर कुल में जन्मी गवरी बाई ने वागड़ में मीरा की तरह भक्ति रस की धारा प्रवाहित की। इन्हें ‘वागड़ की मीरा’ भी कहा जाता है।

संत मावजी :-

  • वागड़ प्रदेश के संत मावजी का जन्म साबला ग्राम (डूंगरपुर) के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। सन 1727 में इन्हें बेणेश्वर स्थान पर ज्ञान प्राप्त हुआ।
  • Saint Mavji founded Beneshwar Dham . His main temple is only in Sabla village on the Mahi coast.
  • He is installed in the form of the Nikalanki incarnation of Shri Krishna. He composed the Krishna Leela in Bagdi language.
  • His voice is called ‘Chopra’. Sant Mavji comes from those saints of Indian Saints tradition, who coordinated  Nirguna and Saguna and has the reputation of being on the omnipotent path.

Acharya Bhikshu Swamy: –

  • Shwetambar Jain Acharya who was born in Kantalia village of Marwar. 1783 (1726 AD). In 1751 AD, Acharya was conferred in the sect of Raghunath ji.

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Religious Cult Part 1 I Rajasthan Art and Culture I Rajasthan GK I RAS

Religious Cult Part 1 I Rajasthan Art and Culture I Rajasthan GK I RAS

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  • Since ancient times, the society of Rajasthan has been influenced by religious sentiments. Here reside the people of almost all the major religions.
  • Here people believe in both  Saguna and Nirguna worship. In the Saguna Bhakti section, Shaiva and Shakta etc. have been practiced since ancient times.
  • Later, Ramanujacharya, Vallabhacharya, Nimbakacharya etc. Saints  started flow of Vaishnavism in the country, Rajasthan was not left behind  and here also the main branches of Vaishnavism – Pushtimaarg, Nimbarka and Gaudya Sampradaya etc. flourished.
  • प्राचीन समय से ही राजस्थान का समाज धार्मिक भावनाओं से अनुप्रमाणित रहा है। यहाँ लगभग सभी प्रमुख धर्मों व सम्प्रदायों के मतावलम्बी पाये जाते हैं।
  • यहाँ सगुण एवं निर्गुण दोनों प्रकार की उपासना पद्धति की अविरल धारा प्रवाहित है। सगुण भक्ति धारा में शैव, शाक्त आदि सम्प्रदाय यहाँ प्राचीन काल से ही पल्ल्वित रहें है
  • वहीं बाद में रामानुजाचार्य, वल्ल्भाचार्य, निम्बकाचार्य आदि संत मनीषियों ने देश में वैष्णव धर्म की सरिता बहाई जिससे राजस्थान भी अछूता नहीं रहा और यहाँ भी वैष्णव मत की मुख्य शाखाएँ-पुष्टिमार्ग, निम्बार्क व गौडीय सम्प्रदाय आदि फले-फुले।

PDF : Religious Cult Part 1

[pdf-embedder url=”https://www.baljitdhaka.com/wp-content/uploads/securepdfs/2018/04/Religious-cults-Part-1.pdf” title=”Religious cults Part – 1″]

  • In the medieval period, along with the Saguna Bhakti section of the Bhakti movement (Ramananda, Ballabh, Nimbark community) another devotional stream flowed in the country.
  • Which showed the simple and straightforward way of worshiping the Nirakar Brahma to the people, and who gave equal rights to all people to worship God by eliminating discrimination,  untouchability, etc. in the society.
  • This infinite section of devotion is called a section of Nirgun Bhakti because it was worshiped as shapeless , in which God was worshiped as nirguna(no form).
  • मध्य काल में भक्ति आंदोलन की सगुण भक्ति धारा (रामानन्द, बल्लभ, निम्बार्क सम्प्रदाय) के साथ साथ एक अन्य भक्ति रस धारा देश में प्रवाहित हुई।
  • जिसने जन-जन को निराकार  ब्रह्मा की उपासना का सीधा व सरल मार्ग दिखाया तथा जिसने समाज में व्याप्त भेदभाव, ऊँच-नीच, छुआ-छूत आदि को समाप्त कर सभी लोगों को भगवत भक्ति का समान अधिकार दिया।
  • भक्ति रस की यह अविरल धारा निर्गुण भक्ति की धारा कहलायी क्योंकि इसमें परमात्मा को निराकार, निर्गुण मानकर उसकी आराधना की जाती थी।

  • It completely opposed idol worship and rituals, and gave the message of brahma being entrenched in every particle.
  • The proponents of this devotional path have tried to overcome  caste-based discrimination and put the sense of welfare of the human beings in mind, to remove the disorders in the religion.
  • It explained the path of worship of God, kirtan, meditation, remembrance  to reach God.
  • In the 15th century and later in Rajasthan, there was an emergence of many Nirguna saints, who paved the way for the welfare of the common people through their teachings.
  • The devotees  Kabir, Nanak, Jambhoji, Jasnathji, Daduji, Ramacharanji etc. rendered the Nirguna Bhakti Marg during this period.
  • इसने मूर्ति पूजा एवं कर्मकाण्डों का पूर्ण रूप से विरोध किया तथा उस अमूर्त परब्रहा के कण-कण में व्याप्त होने का संदेश दिया।
  • इस भक्ति मार्ग के प्रवर्त्तकों ने जाति-पाँति के भेदभावों से ऊपर उठकर मनुष्य मात्र के कल्याण की भावना मन में रखकर धर्म में पैदा हुए विकारों को दूर करने का प्रयास किया।
  • इन्होने भजन, कीर्तन, मनन, नाम-स्मरण एवं गुरु-सानिध्य को ईश्वर प्राप्ति का मार्ग बताया।
  • 15वीं शताब्दी एवं उसके उपरांत राजस्थान में अनेक निर्गुणी संत सम्प्रदायों का आविर्भाव हुआ जिन्होंने अपने उपदेशों एवं शिक्षाओं द्वारा सामान्य जन के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया।
  • कबीर, नानक, जाम्भोजी, जसनाथजी, दादूजी, रामचरणजी आदि संतों ने इस काल में निर्गुण भक्ति मार्ग का प्रतिपादन किया।  

Saguna devotion section: –

Shaivism: –

Religious Cult Part 1 I Rajasthan Art and Culture I Rajasthan GK I RAS

  • Lord Shiva worshipers are called Shaiva. The worship of Shiva has been happening since ancient times.
  • From Kalibanga, indus valley civilization and other excavations, it is known that at that time also Shiva was worshiped in some form.
  • During the medieval period, the incarnation of the four sects – Kapalika, Pashupat, Lingayat or Veer Shaiva  had fallen. There has also been a lot of expansion in the state of the Kapalika and Pashupaat communities.
  • In the Kapalik community, Bhairav ​​is worshiped as an incarnation of Shiva.

सगुण भक्ति धारा :-

शैव सम्प्रदाय :-

  • भगवान शिव की उपासना करने वाले शैव कहलाते हैं। शिव की पूजा अति प्राचीनकाल से होती रही है।
  • कालीबंगा, सिंधुघाटी सभ्यता एवं अन्य उत्खननों से ज्ञात हुआ है कि उस समय भी किसी रूप में शिव की पूजा होती थी।
  • मध्यकाल तक शैव मत चार सम्प्रदायों- कापालिक, पाशुपत, लिंगायत या वीर शैव एवं कश्मीरक का आविर्भाव हो चूका था। कापालिक एवं पाशुपात सम्प्रदायों का राजस्थान में भी काफी विस्तार हुआ।
  • कापालिक सम्प्रदाय में भैरव को शिव का अवतार मानकर पूजा की जाती है।
  • Tantrics  of this community wrap  their body with ash.
  • The main characteristic of this is the Surapaan, narbali etc. laculish has been considered the liberator of the Pashupat community The saints of this community often bath during the day, take dand in their hands, and worship Shiva several times a day.

Nath Samarthya: –

Religious Cult Part 1

  • A new form of Shaivism originated in the medieval period as the Nath sect .Nath Muni is believed to be  Its promoter.
  • Matsyendra Nath, Gopichandahtara, Bhartrihari, Gorakhnath etc. were the chief monks of this sect, who are still worshipped in many places in Rajasthan.
  • इस सम्प्रदाय के साथ तांत्रिक व श्मशान वासी होते है और अपने शरीर पर भस्म लपेटते हैं।
  • सुरापान, मुण्डमाल, नरबलि  आदि इनके मुख्य लक्षण हैं। पाशुपत सम्प्रदाय का प्रवर्त्तक दंडधारी लकुलीश को माना गया है। इस सम्प्रदाय के साधु दिन में कई बार स्नान करते हैं, हाथ में दण्ड धारण करते हैं तथा दिन में कई बार शिव पूजा करते हैं।

नाथ सम्प्रदाय :-

  • नाथ पंथ के रूप में शैव मत का एक नवीन रूप पूर्व मध्यकाल में उद्भूत हुआ। इसके प्रवर्तक नाथ मुनि माने जाते हैं।
  • मत्स्येन्द्र नाथ, गोपीचन्दहर्तृ, भर्तृहरि,गोरखनाथ आदि इस पंथ के प्रमुख साधु हुए जिनकी आराधना आज भी राजस्थान में कई जगह होती है।
  • Jodhpur is an important center for the Nath sect. Rathore ruler Mansingh had become the follower of Nath guru Ayes Devanath . There are two branches of Nath sect in Rajasthan-
  • 1. Beraag cult: – Its center is near Rathadunga near Pushkar.
  • 2. Mannathi sect: – Its main center is Jodhpur’s great palace built by Maharaja Mansingh.

Shaakt sect: –

Religious Cult Part 1

  • Shaakts worship Durga in various forms. Ancient excavations have found evidence that the worship of the Goddess in the form of maternal power was also prevalent at that time. Shakti has been worshiped in various names and forms in all the regions of Rajasthan.
  • जोधपुर नाथ सम्प्रदाय का महत्वपूर्ण केंद्र रहा हैं। यहाँ के राठौड़ शासक मानसिंह तो नाथ मत के गुरु आयस देवनाथ के अनुनायी हो गए थे। राजस्थान में नाथ मत की दो शाखाएँ हैं-
  • 1. बेराग पंथ :- इसका केंद्र पुष्कर के पास राताडुँगा है।
  • 2. माननाथी पंथ :- इसका मुख्य केंद्र जोधपुर का महामंदिर है जो महाराजा मानसिंह ने बनवाया था।

शाक्त सम्प्रदाय :-

  • शाक्त मतावलम्बी शक्ति (दुर्गा) की पूजा विभिन्न रूपों में करते हैं। प्राचीन उत्खननों से प्रमाण मिले है कि मातृ शक्ति के रूप में देवी की पूजा उस समय भी प्रचलित थी। राजस्थान के सभी भूभागों में शक्ति की पूजा विविध नामों एवं रूपों में होती रही है।
  • The rulers here adopted different forms of  Goddess as their ancestral goddess, and built many  temples.

Vaishnava sect: –

  • Vishnu is considered as a devoted lord and worshippers are known  as Vaishnava. Vaishnavas were against the complex rituals and the horrific acts of animal sacrifice and did not regard them as a supporter in finding God.
  • In this community, devotion, kirtan, dance etc. were given priority for getting God. In the South India, the devotees-  Aalvaar saints had a great contribution in activating the Vaishnava Bhakti movement.
  • यहाँ के शासकों ने देवी के विभिन्न रूपों को अपने कुल की आराध्य देवी के रूप में अपनाया और इनके अनेकानेक मंदिरों का निर्माण करवाया।

वैष्णव सम्प्रदाय :-

  • विष्णु को प्रधान देव मानकर उसकी आराधना करने वाले वैष्णव कहलाये। वैष्णव मतावलम्बी जटिल कर्मकांड तथा भयावह नरबलि एवं पशुबलि की क्रियाओं के विरोधी थे तथा इन्हें ईश्वर की प्राप्ति में सहयोगी नहीं मानते थे।
  • इस सम्प्रदाय में ईश्वर प्राप्ति हेतु भक्ति, कीर्तन, नृत्य आदि को प्रधानता दी गई। दक्षिण भारत में वैष्णव भक्ति आंदोलन को सक्रिय करने में तमिल के आलवार संतों का योगदान रहा।

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Rajasthan art folk god and goddesses of Rajasthan I art and culture part 1

Rajasthan art folk god and goddesses of Rajasthan I art and culture part 1

Rajasthan art folk god and goddesses of Rajasthan I art and culture part 1

Folk Gods of Rajasthan : –

  • Legends of superhuman miracles and great acts of heroism became famous as folk gods.
  • Folk gods means those great men, who, by their hard work and self-confidence, established cultural values ​​in the society, protecting the Hindu religion and public interest .
  • Therefore, their supernatural powers and public works  became public belief and they started being worshipped by the people as remover of misery . Even today, in the villages, their ‘Deval-Devara’, or chabutra , are the center of faith in mind of people.

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राजस्थान के लोक देवता  :-

  • अलौकिक चमत्कारों से युक्त एवं वीरता पूर्ण कृत्यों वाले महापुरुष लोक देवता के रूप में प्रसिद्ध हुए।
  • लोकदेवता से तात्पर्य उन महापुरुषों से है, जिन्होंने अपने वीरोचित कार्यों तथा दृढ आत्मबल द्वारा समाज में सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना, हिन्दू धर्म की रक्षा तथा जनहितार्थ अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।

अतः ये अपनी अलौकिक शक्तियों एवं लोकमंगलकारी कार्यों हेतु लोक आस्था के प्रतीत हो गये, तथा इन्हें जनसामान्य द्वारा दुःखहर्ता और मगलकर्ता के रूप में पूजा जाने लगा। आज भी गाँव-गाँव में इनके ’स्थान’ देवल-देवरे, या चबूतरे लोक मानस के आस्था केंद्र के रूप में विधमान हैं।Rajasthan art folk god and goddesses of Rajasthan I art and culture part 1

  • People from all castes and sects come to worship them in these places regardless of caste and creed.
  • In the village, they are  worshiped to sought relief from disease and and ask for some wish . After completion of it they perform Jaagran.
  • In Marwar these five deities – Pabuji, Harbuji, Ramdev JI, Gogaji and Manglia Maha – are considered as Panch Pirs.

A brief description of these five deities of Marwar is as follows: –

Pabuji: –

  1. Pabuji Rathod of the Rathore dynasty was born in the house of Dhanadhal and Kamalda in Kolumand near Phalodi (Jodhpur) in the 13th century.
  • जाति-पाँति एवं छुआछूत से दूर इन थानों पर सभी जाति एवं सम्प्रदायों के लोग इनको पूजते है।
  • गाँव में हारी-बीमारी में इसकी पूजा की जाती है व् मनौतियाँ माँगी जाती है तथा उनके पूर्ण हो जाने पर रात्रि जागरण करवाया जाता है ।
  • मारवाड़ आँचल में इन पाँचों लोकदेवताओं- पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी गोगाजी एवं मांगलिया महा जी को पंच पीर माना गया है।
  • राज्य के प्रमुख लोकदेवताओं का संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार है:-

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पाबूजी :-

1). राठौड़ राजवंश के पाबूजी राठौड़ का जन्म 13वीं शताब्दी में फलौदी(जोधपुर) के निकट कोलुमण्ड में धाँधल एवं कमलादे के घर में हुआ।

  • He was the  descendant of Rathore  Rao Siha. when he was being married to king Surajmal Sodha of Amarkat’s  daughter Supyarde, he got up in the middle of the rounds and went to rescue the cow of Deval Charani (whose  mare he had brought) and in village Dechun village, he died . Therefore, he is worshiped as a cow-saver god.

2). Pabuji has special recognition in the form of plague guard and god of Camels. It is said that the credit to bring the first camel to Marwad (Saunde) goes to him.

  • Therefore, Raika caste (Rebari), the patron of the camels considers him to be their adorable god.
    • ये राठौड़ों के मूल पुरुष राव सीहा के वंशज थे। इनका विवाह अमरकोट के राजा सूरजमल सोडा की पुत्री सुप्यारदे से हो रहा था कि ये फेरों के बीच से ही उठकर देवल चारणी (जिसकी केसर कालमी घोड़ी ये माँग कर लाये थे) की गायें छुड़ाने चले और देचूँ गाँव में युद्ध में वीर गति को प्राप्त हुए। अतः इन्हें गौ-रक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है।

    2). प्लेग रक्षक एवं ऊँटो के देवता के रूप में पाबूजी की विशेष मान्यता है। कहा जाता है कि मारवाड़ में सर्वप्रथम ऊँट(साण्डे) लाने का श्रेय पाबुजी को ही है।

    अतः ऊँटों की पालक राइका (रेबारी) जाति इन्हें अपना आराध्य देव मानती है।

  • He is very popular in  Thori and Bhil caste and the Muslims of the Meher caste worship him as Pir and he is also considered as the incarnation of Laxman.

3). Pabuji is famous for Kesar Kalami  mare and leaned pag in left. His insignia is spear

4). The most prominent temple is in Kolumand, where every year a fair is organised on Chaitra amavasya.

5). Saga song related to Pabuji  ‘Paboji Ki Paawde’ is sung by Nayak and Rebari caste with Maath instrument.

6). The ‘Pabuji ki Pas’ is sung by bhopas of Nayak caste using  Ravanhattha instrument.

7). Chanda-Dima and Harmal are known as the associates of Pabuju.

Rajasthan

  • ये थोरी एवं भील जाति में अति लोकप्रिय हैं तथा मैहर जाति के मुसलमान इन्हें पीर मानकर पूजा करते हैं इन्हे लक्ष्मण का अवतार भी माना जाता है।

3).  पाबूजी केसर कालमी घोड़ी एवं बाँयी और झुकी पाग के लिए प्रसिद्ध है। इनका बोध चिन्ह भाला है।

4). कोलुमण्ड में इनका सबसे प्रमुख मंदिर है, जहाँ प्रतिवर्ष चैत्र अमावस्या को मेला भरता है।

5). पाबूजी से संबंधित गाथा गीत ‘पाबूजी के पवाड़े’ माठ वाद्य के साथ नायक एवं रेबारी जाति द्वारा गाये जाते है।

6). ‘पाबूजी की पड़’ नायक जाति के भोपों द्वारा रावणहत्था वाद्य के साथ बाँची जाती है।

7). चाँदा-डेमा एवं हरमल पाबूजी के रक्षक सहयोगी के रूप में जाने जाते हैं।

8). ‘Papu Prakash’ written by Asia Modji is an important composition on the life of Pabuji.

Gogaji (Gogapir): –

1). Chauhan Vasanthi Gogaji was born in the 11th century in the house of Javar Singh-Bachhal at Dadreva in Churu district. His location in Dadreva is called Seershmedi, where every year Gogaji’s fair is organized.

2). Gogaji gave up his life for protecting the cow and protecting the  country from Muslim invaders (Mahmud Ghaznavi). Therefore, he started being worshiping in the form of folk god. he is also worshiped as ‘Jaharpir’ or ‘Gugga’.

8). आशिया मोड़जी द्वारा लिखित ‘पाबू प्रकाश’ पाबूजी के जीवन पर एक महत्वपूर्ण रचना है।

गोगाजी (गोगापीर) :-

1).  चौहान वंशीय गोगाजी का जन्म 11वीं शताब्दी में चूरू जिले के ददरेवा नामक स्थान पर जेवरसिंह-बाछल के घर हुआ। ददरेवा में इनके स्थान को शीर्षमेड़ी कहते है जहाँ हर वर्ष गोगाजी का मेला भरता है।

2). गोगाजी ने गौ-रक्षार्थ एवं मुस्लिम आक्रांताओं (महमूद गजनवी) से देश की रक्षार्थ अपने प्राण न्योछावर कर दिये। इसलिए इन्हें लोकदेवता के रूप में पूजा जाने लगा। इन्हें ‘जाहरपीर’ या ‘गुग्गा’ के नाम से भी पूजा जाता है।

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RAS exam I Rajasthan GK I Rajasthan Economics I poverty in Rajasthan Part 1

Rajasthan art folk god and goddesses of Rajasthan I art and culture part 1

RAS exam I Rajasthan GK I Rajasthan Economics I poverty in Rajasthan Part 1

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Rajasthan GK

  • Poverty alleviation was accepted as the purpose of in our Five Year Plan (1974-79) plan.
  • Under the chairmanship of Dr. C. Rangarajan, the Planning Commission had appointed a specialist team to review the method of measurement of poverty. In its report of June 2014, based on the newly established method for 2011-12 and 2009- 10, statistics of poverty were presented to various states and Nation as whole.
  • Estimation of poverty in India Arjun Sen Gupta Committee has submitted its report in its “Unorganized Labor” and former Member of Planning Commission Dr. N.C. Saxena had given his inquiry report.

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  • [pdf-embedder url=”https://www.baljitdhaka.com/wp-content/uploads/securepdfs/2018/04/Rajasthan-economics-part-1.pdf” title=”Rajasthan economics part 1″]
  • हमारे देश की पंचवर्षीय योजना (1974-79) में निर्धनता उन्मूलन को योजना के उद्देश्य के रूप में स्वीकार किया गया था।
  • डॉ. सी. रंगराजन की अध्यक्षता में योजना आयोग ने निर्धनता के माप की विधि की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ-दल नियुक्त  किया गया था। जिसने जून, 2014 की अपनी रिपोर्ट में 2011-12 व 2009-10 के लिए नई प्रस्थापित विधि के आधार पर विभिन्न राज्यों व समस्त भारत के लिए निर्धनता के आँकड़े प्रस्तुत किये थे।
  • भारत में निर्धनता के अनुमान अर्जुन सेन गुप्ता समिति ने अपनी “असंगठित श्रम” की रिपोर्ट में तथा योजना आयोग के पूर्व सदस्य डॉ.एन.सी. सक्सेना  ने अपनी जाँच रिपोर्ट दिए थे I
  • Suresh Tandulkar changed the proportion of poverty in 2004-05 compared to the previous estimates presented by the Planning Commission.
  • There has been a new outcome in the MRI estimates and the number of poor in the eight states of Bihar, Chhattisgarh, Jharkhand, Madhya Pradesh, Orissa, Rajasthan, Uttar Pradesh and West Bengal has increased to 42.1 million. Africa, which is 11 million more than the 26 poorest countries. Rajasthan is also included in these 8 states.
  • Earlier it was thought that due to planned development, poverty will automatically decrease. It has been called ‘the evolutionary growth’ or ‘dripping effect’.
  • सुरेश तेन्दुल्कर ने 2004-05 के लिए निर्धनता के अनुपातों  में योजना आयोग द्वारा प्रस्तुत पूर्व अनुमानों की तुलना में परिवर्तन  किया था।
  • MRI के अनुमानों  में एक नया परिणाम सामने आया है और वह भारत के आठ राज्यों -बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान उत्तरप्रदेश, पश्चिमबंगाल  में निर्धनों की संख्या 42.1 करोड़ हो गयी है। जो अफ्रीका 26 निर्धनतम देशों से भी 1.1 करोड़ ज्यादा है। इन 8 राज्यों में राजस्थान भी शामिल पाया जाता है।
  • पहले यह सोचा गया था कि योजनाबद्ध विकास  के फलस्वरूप अपने आप गरीबी कम होती जाएगी। इसे ‘विकास का ढलने वाला’ या ‘टपकने वाला प्रभाव’ कहा गया है।

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  • It was also thought that the financial instruments to be handed over to the states on behalf of the Center should be on basis of poverty.
  • In the second and final report of the new Finance Commission, on the basis of the number of scheduled castes and tribes and agricultural laborers in their place, it was emphasized to prepare a mixed index of backwardness and adopt it as a new foundation.
  • Poverty has been a considerable subject in both national and state levels in the country. Therefore, detailed study on measurements, reasons, government policy and consequences has been considered necessary.
  • केन्द्र की तरफ से राज्यों को हस्तान्तरित किये जाने वाले वित्तीय साधनों के लिए गरीबों  के स्तर को आधार बनाने की बात भी सोची जाने लगी थी।
  • नवें वित्त आयोग ने अपनी दूसरी व अंतिम रिपोर्ट में इनके स्थान पर अनुसूचित जाति व जनजाति  और खेतिहर मजदूरों की संख्या के आधार पर।’पिछड़ेपन का एक मिश्रित सूचकांक’ तैयार करके उसे एक नये आधार के रूप में अपनाने पर बल दिया गया
  • देश में राष्ट्रीय व राज्यीय दोनों स्तरों पर गरीबी एक विचारणीय विषय रहा है। अतः इसके माप, कारणों ,सरकारी नीति व परिणामों पर विस्तृत अध्ययन करना आवश्यक माना  गया है।
  • “Oxford Poverty and Human Development Initiative” A new multidimensional poverty index has also been prepared with assistance of UNDP.
  • In this, not only income, but also  medical education, assets, and services have also been measured to find status of family.

Measurement of poverty line: –

  • In the early seventies, the line of poverty was defined as the per capita monthly expenditure, at the rate of Rs 49 for rural areas and Rs 56.6 for urban areas at the prices of 1973-74.
  • In rural areas it would be possible to get 2400 calories per person per day and consumption level of 2100 calories in urban areas.
  • “ऑक्सफ़ोर्ड पाँवर्टी एण्ड ह्यूमन डवलपमेंट इनीशियेटिव” ने यु.एन.डी.पी. सहायता  से एक नया बहु आयामी निर्धनता सूचकांक भी तैयार किया है।
  • इसमें निर्धनता को केवल आय से ना जोड़कर शिक्षा,चिकित्सा परिसम्पतियों व सेवाओं से परिवारों का स्तर जोड़ा गया है।

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गरीबी की रेखा का माप :-

  • सत्तर के दशक के प्रारम्भ में गरीबी की रेखा को प्रति व्यक्ति मासिक व्यय के रूप में परिभाषित किया गया था,1973-74 के मूल्यों पर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लगभग 49 रूपये व शहरी क्षेत्रों के लिए 56.6 रूपये निर्धारित किया  गया था।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2400 कैलोरी के बराबर उपभोग और शहरी क्षेत्रों में 2100 कैलोरी के बराबर उपभोग का स्तर प्राप्त करना सम्भव हो सकेगा।
  • The person who spent per capita per month below this mark was considered poor.
  • For the rural areas, the poverty line is estimated to be Rs. 816 per person per month. And for urban areas it was considered 1000
  • The concept of poverty in India is an ‘absolute concept’. Because it has been combined with consumption of minimal calories.

Poor people Ratio and Number of poor in Rajasthan

  • Nowadays, the National Sample Survey Organization is counting the number of poor people using data usage expenditure per five years. The ratio of the total population of the poor is called ‘poverty-ratio’.
  • इन स्तरों के नीचे प्रति व्यक्ति प्रति माह खर्च करने वाले व्यक्ति गरीब माने गए।
  • 2011-12 के भावों पर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए गरीबी रेखा 816 रूपये प्रति व्यक्ति प्रति माह की व्यय मानी गयी है। व शहरी क्षेत्रों के लिए यह 1000 रूपये मानी गई।
  • भारत में गरीबी की अवधारणा एक ‘निरपेक्ष अवधारणा’ है। क्योकि इसे न्यूनतम कैलोरी के उपभोग से जोड़ दिया गया है।

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राजस्थान में निर्धनता-अनुपात व निर्धनों की संख्या

  • आजकल प्रति पांच वर्ष में राष्ट्रीय सेम्पल सर्वेक्षण संगठन द्वारा उपभोग व्यय के आँकड़ों का उपयोग करके निर्धन व्यक्तियों की गिनती की जाती है। निर्धन व्यक्तियों का कुल जनसंख्या से अनुपात ‘निर्धनता-अनुपात’ कहलाता है।
  • Most of our country’s poor and marginal farmers, agricultural laborers,  rural people and scheduled castes and scheduled tribes, bonded laborers, poor people, lackless farmers etc. come under this .The impact of poverty in cities is mostly seen in the casual labor-class.
  • The Planning Commission had appointed a committee to look into the poverty related figures of 2004-05 under the chairmanship of Suresh Tendulkar. Who presented its report on December, 2009.
  • The Expert Group appointed under the chairmanship of Dr C. Rangarajan has presented the proportion of total poverty for 2011-12 in accordance with its proposed method.
  • हमारे देश के गरीबों में ज्यादातर लघु व सीमांत किसान, खेतिहर, मजदुर, ग्रामीण काश्तकार व अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लोग, बंधुआ मजदूर, अपाहित व्यक्ति, साधनहीन कृषक आदि आते है। शहरों में गरीबी का प्रभाव ज्यादातर आकस्मिक श्रमिक-वर्ग में देखने को मिलता है।  
  • योजना आयोग ने सुरेश तेन्दुलकर की अध्यक्षता में 2004-05 के निर्धनता संबन्धी आँकड़ो की जाँच के लिए एक समिति नियुक्त की थी। जिसने अपनी रिपोर्ट दिसम्बर, 2009 को प्रस्तुत की थी।
  • डॉ. सी रंगराजन की अध्यक्षता में नियुक्त विशेषज्ञ-दल ने 2011-12 के लिए कुल निर्धनता के अनुपात अपनी प्रस्तावित विधि के अनुसार प्रस्तुत किये हैं-
    • Most     poor – Chhattisgarh              47.9%
    • Minimum             – Goa           6.3%
    • All India                                                  29.5%
    • Rajasthan                                               21.7%
    • According to the Rangarajan method, the proportion of poverty in Rajasthan in rural and urban and overall in  2011-12 is as follows
  • सर्वाधिक     – छत्तीसगढ़             47.9%      न्यूनतम    – गोआ                   6.3%      समस्त भारत                                  29.5%     राजस्थान                                       21.7%
    • रंगराजन विधि के अनुसार राजस्थान में ग्रामीण व शहरी तथा समग्र रूप से 2011 -12 में निर्धनता के अनुपात निम्न हैं –
  • राजस्थान ग्रामीण शहरी कुल
    21.4 22.5 21.7

     

    • n 2011-12, 112.0 lakh people  in the rural areas of Rajasthan,  and 39.5 lakh persons in the cities were found poor, and the total number of both were 151.5 lakh.
  • Reasons of  poverty in Rajasthan: –

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  • 1) Historical and geographical conditions: –
    • Before the integration of Rajasthan, there was a group of 19 princely states and 3 chiefships, in which social economic development was very backward.
    • Apart from this, 61% of the total land area and 40% of the population is found in dry and semi-arid regions of the state.
    • Farmers were economically exploited. The state’s feudal atmosphere was the reason of poverty and backwardness.
    • 2011-12 में राजस्थान ग्रामीण क्षेत्रों में 112.0 लाख व्यक्ति एवं शहरों में 39.5 लाख व्यक्ति निर्धन आँके गये, और दोनों की कुल संख्या 151.5 लाख आँकी गयी।
  • राजस्थान में निर्धनता के कारण:-1) ऐतिहासिक व भौगोलिक परिस्थितियाँ :-
    • राजस्थान एकीकरण से पूर्व 19 सामन्ती राज्यों व 3 चीफशिफों का समूह था,जिनमे  सामाजिक आर्थिक विकास काफी पिछड़ा हुआ था।
    • इसके अलावा राज्य के शुष्क व अर्द्ध-शुष्क प्रदेशों में कुल भू-क्षेत्र का 61% व जनसंख्या का 40% पाया जाता है।
    • कृषकों का आर्थिक शोषण होता था। राज्य का सामन्ती वातावरण गरीबी  व पिछड़ेपन का जनक था।
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RAS 2018 I Rajasthan GK I History I Freedom Fighters of Rajasthan PDF

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Guru Govind Giri – He was the resident of Bansiya village of Dungarpur who helped in the upliftment of the Bheels of Vagad  of Rajasthan.

  • He founded ‘Samp Sabha’and started movement for social,religious awakening of tribal Bheels.
  • On November 17, 1913 during a  annual gathering at his place at Mangarh Mountain, the British army fired and massacred many Bheels.
  • Thakur Kushalsingh – Thakur Kushalsingh Champawat of Auwa thikana of Jodhpur defeated the joint army of Jodhpur state and British during the battle of 1857.
  • He again defeated the army of A.G.G Lorentz and Captain Mack Mason in battle.

Amarchand Bathiya – A resident of Bikaner, who helped Queen of Jhansi, Lakshmibai and Tantya Tope by giving them his saved money.

  • He was the first freedom fighter to be hanged during the freedom struggle of 1857.

गुरु गोविन्द गिरी – राजस्थान में वागड़ प्रदेश  के भीलों के प्रथम उद्धारक व डूंगरपुर के बाँसिया ग्राम के निवासी।

  • इन्होने ‘सम्प सभा’ की स्थापना करके आदिवासी भीलों में समाज व धर्मसुधार का आंदोलन चलाया।
  • 17 नवंबर 1913 को इनकी कार्यस्थली मानगढ़ पहाड़ी पर एक वार्षिक सभा के दौरान अंग्रेज सेना ने भीषण फायरिंग कर नरसंहार किया।

ठाकुर कुशलसिंह – जोधपुर रियासत में आउवा ठिकाने  के ठाकुर कुशालसिंह चाँपावत ने 1857 के संग्राम के दौरान जोधपुर राज्य व अंग्रेजों की सम्मिलित सेना को हराया था।

  • पुनः ए.जी.जी.  लॉरेंस तथा कप्तान मैक मेसन की सेना को भी युद्ध में हराया।  

अमरचंद बाठिया – बीकानेर के निवासी,  जिन्होंने झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, तांत्या टोपे को अपनी संचित धनराशि सहायतार्थ दी थी।  

  • ये प्रथम स्वतंत्रता सेनानी थे , जिन्हे 1857 के संग्राम  अंग्रेजों ने फांसी पर लटकाया था।

Risaldar Mehrab Khan Pathan

Risaldar Mehrab Khan Pathan – He was born in Karauli and was a military officer of Kota army and chief revolutionary , who led the revolutionaries in the 1857 battle of independence.

Motilal Tejawat – Tejawat of Kolyari Village of Udaipur started ‘Eki Movement’  to unite the tribal Bheels .

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    • The tribals people called him ‘Bavaji’.
    • He contributed a lot to free the Bheels from exploitation and atrocities .

Lala Jaidayal Bhatnagar – He was a lawyer of Kota court and was a chief freedom fighter.

  • During the struggle of 1857, Risaldar Mehrab Khan and Bhatnagar provided leadership to the revolutionaries and took the city under their control.
  • Later on he was hanged.

रिसालदार मेहराब खान पठान – करौली में जन्मे कोटा राज्य की सेना के एक सैनिक पदाधिकारी एवं प्रमुख क्रन्तिकारी, जिन्होंने 1857 की स्वतंत्रता क्रांति में कोटा के क्रांतिकारियों का नेतृत्व किया था।

मोतीलाल तेजावत – उदयपुर के कोल्यारी ग्राम के श्री तेजावत ने आदिवासी भीलों को संगठित करने हेतु ‘एकी आंदोलन’ चलाया था।

  • आदिवासी इन्हे ‘बावाजी’ कहते थे।
  • भीलों को अत्याचारों एवं शोषण से मुक्ति दिलाने में इन्होने बहोत योगदान दिया।  

लाला जयदयाल भटनागर – कोटा दरबार के वकील व प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी  थे।

  • इन्होने 1857 की क्रांति के दौरान रिसालदार मेहराब खान के साथ कोटा के क्रांतिकारियों को नेतृत्व प्रदान किया एवं शहर पर कब्ज़ा किया।
  • बाद में इन्हे फांसी दे दी गयी।  

Vijaysingh Pathik (1882-1954) – He was  prominent revolutionary and organizer of Bijauliya peasant movement, who was born in Guthawali village of Buland Shahar of Uttar Pradesh. His real name was ‘Bhup Singh’.

    • He was the editor of ‘Rajasthan Kesari’ and founder of ‘Rajasthan Seva Sangh’. He also founded the Veer Bharat Sabha.
    • In 1921, he started publishing ‘Naveen Rajasthan’ and Tarun Rajasthan’ .
    • Pathik was also the vice-president of princely state public council.

Rao Gopalsingh Jharwa –  Rao Gopalsingh Kharva of Kharva Thikana of Ajmer was a famous revolutionary.

  • Together with Rasbihari Bose and Sachindranath Sanyal he made plans for armed rebellion.
  • The revolt failed because their plan leaked before execution.

विजयसिंह पथिक (1882- 1954) – बिजौलिया किसान आंदोलन के प्रमुख संचालक व सुप्रसिद्ध क्रन्तिकारी, जिनका जन्म उत्तरप्रदेश के बुलंद शहर के गुठावाली गाँव में हुआ था।  इनका मूल नाम ‘भूपसिंह’ था।

  • ‘राजस्थान केसरी’ के संपादक व ‘राजस्थान सेवा संघ’ के संस्थापक थे। इन्होने वीर भारत सभा का भी गठन किया।
  • 1921 में ‘नवीन राजस्थान’ व ‘तरुण राजस्थान’ पत्र शुरू किया।
  • पथिक जी देशी राज्य लोक परिषद् के उप्पाध्यक्ष भी रहे।  

राव गोपालसिंह खरवा – अजमेर के खरवा ठिकाने के राव गोपालसिंह खरवा एक प्रसिद्ध क्रन्तिकारी थे।

  • इन्होने रासबिहारी बोस और सचिन्द्रनाथ सान्याल के साथ मिलकर शसस्त्र क्रांति की योजना बनायीं।  
  • इसका भेद खुल जाने के कारण ये क्रांति असफल हो गयी।  

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Arjunlal Sethi –  Born in the house of Jauharilal Sethi in Jaipur, Arjunlal Sethi was the first revolutionary of Rajasthan.

  • To educate people about freedom and revolution, he established the first institute of India , ‘Jain Vardhaman Vidhyalay’.
  • He was a nationalist and as well as a writer.
  • His famous writings were ‘Mahendrakumar’ , ‘Madan Parajay’ , ‘Pasharva Yagna’ etc.
  • He was a strong social reformer.
  • He made efforts for Hindu-Muslim unity.
  • He spent his last time in a mosque.
  • Befor his death, he expressed the desire to be buried instead of burning (Hindu Tradition).
  • His desciple Jorawar Singh Barhath threw a bomb on Lord Hardingues on December 23, 1912 at Chandi Chowk while Hardings entering Delhi, but Hardings survived.

अर्जुनलाल सेठी – जयपुर में जौहरीलाल सेठी के घर जन्मे श्री अर्जुनलाल सेठी राजस्थान के प्रथम क्रन्तिकारी थे।  

  • उन्होंने क्रांति व आजादी का पाठ पढ़ाने के लिए जयपुर में भारत की प्रथम राष्ट्रीय विधापीठ  ‘जैन वर्धमान विद्यालय’ की स्थापना की।
  • वे राष्ट्रवादी नेता होने के साथ-साथ साहित्यकार भी थे।  
  • ‘महेंद्रकुमार’, ‘मदन पराजय’, ‘पाशर्व यज्ञ’  आदि उनकी प्रमुख कृतियाँ है।
  • वे प्रबल समाज सुधारक थे।  
  • इन्होने हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए  प्रयास किये।
  • इनका अंतिम समय मस्जिद में गुजरा।  
  • मृत्यु से पूर्व उन्होंने अपने को जलने की जगह कब्र में दफ़नाने की इच्छा व्यक्त की।  
  • इन्ही के शिष्य जोरावर सिंह बारहठ ने 23 दिसंबर, 1912 को लार्ड हार्डिंग्स पर दिल्ली प्रवेश के समय चांदनी चौक में बम फेंका परन्तु हार्डिंग्स बच गया।

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Kesarsingh Barhath(1872-1941) –  Born in Devpura Kheda village of Shahpura of Mewar state, he was a famous poet and historian, who dedicated his whole life to the nation.

    • He wrote articles namely ‘Chetavani ra Chuntgya’ and stopped Maharana Fatehsingh from going to Delhi Durbar of Lord Curzon, 1903
    • Rasbihari Bose had entrusted him the entire responsibility of armed rebellion in Rajasthan.
    • Revolutionary Pratap Singh Barhath was his son.
    • Hindi translations of ‘Buddhacharit’ written by Avghosh and  biography of King Shyamaldas are the famous works of Kesarsingh Barhatah.
    • His whole family was dedicated to the freedon struggle of Rajasthan.

Seth Jamnalal Bajaj – Born in Kashi ka Bas village of Sikar, he was a famous industrialist, social activist and revolutionary. Like Bhamashah he gave all all his money for the welfare of country.

केसरसिंह बारहठ (1872- 1941) – मेवाड़ राज्य की शाहपुरा रियासत के ग्राम देवपुरा खेड़ा में जन्मे प्रसिद्ध क्रन्तिकारी कवि व इतिहासकार, जिन्होंने अपना सारा जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित किया।  

  • इन्होने मेवाड़ के महाराणा फतेहसिंह को  ‘चेतावणी रा चूंगट्या’ के रूप में सोरठे लिखकर लार्ड कर्ज़न के 1903 के दिल्ली  दरबार में जाने से रोका था।
  • रासबिहारी बोस ने राजस्थान में शास्त्र क्रांतिकारी दल का संपूर्ण दायित्व इन्हे सौंपा था।
  • क्रन्तिकारी प्रतापसिंह बारहठ इन्ही के पुत्र थे।  
  • अवघोष कृत ‘बुद्धाचरित’ का हिंदी अनुवाद एवं कवी राजा श्यामलदास की जीवनी श्री केसरसिंह बारहठ की  महत्त्वपूर्ण रचनाओं में गिनी जाती है।
  • इनका समस्त परिवार राजस्थान के स्वतंत्रता आंदोलन में न्योछावर हो गया।  

सेठ जमनालाल बजाज – सीकर के एक छोटे से गाँव कशी का बास में जन्मे प्रसिद्ध उद्योगपति, समाजसेवी व क्रांतिकारी। ‘भामाशाह’ की तरह उन्होंने अपनी सारी पूंजी देश हित में लगा दी।   

    • Jamnalal Bajaj is often referred as the fifth son of Gandhi.

Manikyalal Verma –  Born in Bijauliya on December 4, 1887, he pledged to work for the welfare of the nation throughout his life.

    • His song ‘Panchida’ was very popular.
    • He wstablished Mewar Prajamandal in 1938.
    • His book ‘Mewar ka Vartaman Shasak’ portrayed the exploitation of public by feudal rule and described the condition of the public.
    • Verma became the Prime Minsiter of Sanyukt Rajasthan established in Udaipur.

Narayani Devi verma – She was wife of  Manikyalal Verma and was a leading lady female fighter and a great warrior.

  • On November 14, 1944, she established Mahila Ashram in Bhilwara.
  • जमनालाल बजाज को गाँधी का 5 व पुत्र भी कहा जाता है।

माणिक्यलाल वर्मा – बिजौलिया में 4 दिसंबर, 1887 को जन्मे लोकनेता, जिन्होंने श्री विजयसिंह पथिक से आजन्म देश सेवा का व्रत लिया।

  • वर्मा जी का ’पंछीड़ा’ नामक गीत बहुत लोकप्रिय हुआ
  • उन्होंने 1938 में मेवाड़ प्रजामण्डल  की स्थापना की।
  • इनके द्वारा लिखित पुस्तक ‘मेवाड़ का वर्तमान शासन’ में सामंती शासन के अत्याचारों और जनता की दारुण दशा का वर्णन किया गया।  
  • वर्मा जी उदयपुर में गठित हुए संयुक्त राजस्थान के प्रधानमंत्री बने।

नारायणी देवी वर्मा – लोकनायक श्री माणिक्यलाल वर्मा की धर्मपत्नी व अग्रणी महिला स्वतंत्रता सेनानी व महान योद्धा।

  • उन्होंने 14 नवंबर, 1944 को भीलवाड़ा में महिला आश्रम की स्थापना की।

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Rajasthan GK : History Quit India Movement 

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Rajasthan GK I RAS History I Quit India Movement Bilingual PDF

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Quit India Movement and establishment of responsible government

  • In August 1942, Mahatma Gandhi started the ‘Quit India Movement’ and started nationwide movement with the spirit Do Or Die.
  • Then according to his orders, the leaders of Prajamandals in Rajputana demanded of the kings that they should break all ties with the British  and establish responsible government.
  • There were strong movements in all princely states regarding this demand.
  • The activists and supporters of Prajamandal gave arrests.
  • The movement in kota became so furious that the people locked the police in barracks and took over the police stations.
  • This town was under the control of revolutionaries for three days. It was led by Benimadhav Sharma, Nathulal Jain and others.

भारत छोडो आंदोलन और उत्तरदायी शासन की स्थापना

  • अगस्त 1942 में महात्मा गाँधी ने ‘भारत छोडो आंदोलन’  का शंखनाद किया और करो या मरो की भावना से देशव्यापी आंदोलन प्रारम्भ किया।  
  • तब उनके निर्देशानुसार राजपूताने के प्रजामंडलों  ने राजाओं से मांग की कि वे अंग्रेज सरकार से अपना सम्बन्ध विच्छेद करें एवं रियासतों में उत्तरदायी शासन की स्थापना करें।  
  • इस मांग को लेकर सभी रियासतों में जोरदार आंदोलन हुए।
  • प्रजामण्डलों के कार्यकर्ताओं व सहयोगियों ने गिरफ्तारियां दी।  
  • कोटा में तो आंदोलन इतना उग्र हो गया था कि जनता ने पुलिस को बैरकों में  बंद कर चौकियों और थानों पर नियंत्रण कर लिया।
  • पुरे तीन इन तक नगर आंदोलनकारियों के कब्जे में रहा,  जिसका नेतृत्व बेनीमाधव शर्मा, नाथूलाल जैन आदि क्रांतिकारी कर रहे थे।  
  • Before handing over the rule to the Maharawal, the Indian National flag was hoisted and army and police saluted it.
  • Jaipur Prajamandal was almost inactive in this movement.
  • Its president Heeralal Shastri and Jaipur Prime Minister Sir Mirza Ismile signed an aggrement in Sept. 1942, khown as Gentlemen’s aggrement.
  • In this aggrement, the government assured that “The state government will not help the Britishers in battles in future and will work towards establishment of responsible govt.”.
  • So this aggrement was contrary to the basic spirit of Quit India Movement.
  • As a result of this aggrement, Hiralal Shastri gave up the idea of struggle using Prajamandal against the Jaipur Maharaja .

Video 

  • यहाँ महारावल को प्रशासन पुनः सौंपने के पूर्व भारत का राष्ट्रीय तिरंगा झंडा फेहराया गया , जिसे पुलिस व सेना ने सलामी दी।  
  • जयपुर प्रजामण्डल इस आंदोलन में लगभग निष्क्रिय रहा।  
  • इसके अध्यक्ष हीरालाल शास्त्री ने जयपुर के तत्कालीन प्रधानमंत्री सर मिर्जा इस्माइल से सितम्बर 1942 में एक समझौता किया जिसे ‘ जेंटलमेंस अग्ग्रेमेन्ट’ के नाम से जाना जाता है।  
  • इस समझौते में सरकार द्वारा आश्वासन दिया गया कि “राज्य सरकार अंग्रेजों को भविष्य में युद्ध के लिए मदद नहीं करेगी और राज्य में उत्तरदायी शासन की स्थापना की कार्यवाही शीघ्र ही प्रारम्भ करेगी”।  
  • इस प्रकार यह समझौता भारत छोडो आंदोलन की मूल भावन के सर्वथा विपरीत था।
  • इस समझौते के  फलस्वरूप शास्त्री जी ने जयपुर महाराजा के विरुद्ध प्रजामण्डल द्वारा संघर्ष छेड़ने का विचार त्याग दिया।  
  • Some activists were dissatisfied with the role of Jaipur Prajamandal in Quit India Movement and some leaders like Baba Harishchandra,  Daulatram Bhandari, Chiranjilal Mishra and Ramkaran Joshi formed ‘Aajad Morcha’ and started the movement.
  • Jamnalal Bajaj founded Charkha Sangh in Jaipur with a view to increasing creative activities and sense of self-reliance.
  • It was led by B.S. Deshpandey.
  • The activists of Charkha Sangh and hundreds other citizens participated in this movement.
  • In 1945, Aajad Morcha was merged with Jaipur Prajamandal.
  • On December 31, 1945 and january 1, 1946, Manikyalal Verma organized the 6th session of Princely State Public Council in Saletiya Maidan of Udaipur and it was presided by Jawaharlal Nehru.

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  • भारत छोडो आंदोलन में जयपुर प्रजामण्डल की भूमिका से असंतुष्ट होकर कुछ सक्रिय कार्यकर्ताओं  – बाबा हरिश्चंद्र, दौलतराम भंडारी, चिरंजीलाल मिश्र तथा रामकरण जोशी आदि ने ‘आजाद मोर्चे’ का गठन किया और आंदोलन शुरू किया।  
  • जमनालाल बजाज द्वारा सन 1942 में जयपुर में रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने और स्वदेशी तथा स्वावलम्बन की भावना को विकसित करने के उद्देश्य से चरखा संघ की स्थापना की।  
  • इसको श्री बी. एस. देशपांडे नेतृत्व प्रदान कर रहे थे।
  • इस आंदोलन में चरखा संघ के कर्मचारियों व सैंकड़ों अन्य नागरिकों ने भी भाग लिया।  
  • 1945 में आजाद मोर्चे का जयपुर प्रजामण्डल में विलय हो गया।
  • 31 दिसंबर, 1945 व 1 जनवरी 1946 को श्री माणिक्यलाल वर्मा ने अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद् का षष्ठम अधिवेशन उदयपुर में सलैटिया मैदान  में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में आयोजित किया।

Rajasthan GK

  • A resolution was passed in the All India Princely State Public Council which appealed the rulers to immediatley establish responsible government in their states, keeeping in mind the changing political scenario of the nation.
  • This session created widespread political consciousness and led to the formation of responsible governments.
  • In 1948,  responsible govt. was established in Jaipur under leadership of Hiralal Shastri.
  • In Jodhpur also popular cabinet was formed in 1948 and Jainarayan Vyas was appointed the Prime Minister.
  • In the small state Shahpura also a constitution was enacted on August 14, 1947 in which there was provision of completely responsible government.
  • The popular cabinet of Gokullal Assawa was sworn on that day.
  • अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद् ने एक प्रस्ताव द्वारा रियासतों के शासकों से अपील की कि वे देश में तेजी से बदलती हुई परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपनी-अपनी रियासतों में अविलब उत्तरदायी शासन स्थापित करें।  
  • इस अधिवेशन से राजस्थान की रियासतों में अभूतपूर्व जाग्रति आई और उत्तरदायी सरकारों की स्थापना हुई।  
  • 1948 में जयपुर रियासत में हीरालाल शास्त्री के नेतृत्व में उत्तरदायी सरकार की स्थापना हुई।  
  • जोधपुर में भी 1948 में लोकप्रिय मंत्रिमंडल का गठन हुआ और श्री जयनारायण व्यास प्रधानमंत्री बनाये गए।
  • शाहपुरा के छोटे से राज्य में भी 14 अगस्त, 1947 को एक संविधान लागु किया गया जिसमे पूर्ण उत्तरदायी सरकार का प्रावधान किया गया।  
  • गोकुललाल असावा के लोकप्रिय मंत्रिमंडल ने उस दिन शपथ ली।  

RAS 2018 Notification out I How to prepare for RAS 2018

  • In jhalawar also popular cabinet was established in 1947 and Maharaja Harishchndra himself became the Prime Minister.

 

  • Kanhaiyalal Mitaal and Mangilal Bhavya represented the Prajamandal.
  • On seeing the changing conditions of country, Dungarpur Maharawal established a popular cabinet in january 1948. Gorishankar Upadhyay was made the Chief Minister.
  • This cabinet worked till Dungarpur princely state was merged with Rajasthan Sangh.
  • Bhupendranath Trivedi became the Chief Minister of the popular cabinet of Banswara.
  • In this manner, steps were taken in all princely states for constitutional reforms and establishment of responsible government.
  • Jaisalmer was the only princely state in which there was no progress in this direction
  • झालावाड़  में सन 1947 में लोकप्रिय मंत्रिमंडल की स्थापना हुई, जिसमे प्रधानमंत्री स्वयं महाराजा हरिश्चंद्र बने।  
  • प्रजामण्डल की और से सर्व श्री कन्हैयालाल मित्तल और मांगीलाल भव्य शामिल हुए।  
  • देश में बदलती हुई परिस्थितियों को देखकर डूंगरपुर महारावल ने राज्य में जनवरी, 1948 में एक लोकप्रिय मंत्रिमंडल बनाया, जिसमे श्री गौरीशंकर उपाध्याय मुख्यमंत्री बनाये गए।  
  • यह मंत्रिमंडल डूंगरपुर रियासत के राजस्थान संघ में विलय होने तक कार्य करता रहा।  
  • बांसवाड़ा के लोकप्रिय मंत्रिमंडल में श्री भूपेन्द्रनाथ त्रिवेदी मुख्यमंत्री बने।  
  • इसी प्रकार बूंदी अलवर आदि लगभग सभी रियासतों में संवैधानिक सुधार कर उत्तरदायी सरकार बनाने की दिशा में कुछ कदम उठाये गए।  
  • केवल जैसलमेर ही एक ऐसी रियासत थी,  जहाँ इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई।  
  • Neither it participated in the ‘Quit India Movement’ of 1942, nor was responsible government established there.

उसने न तो 1942 में ‘भारत छोडो आंदोलन’ में भाग लिया और न ही वहाँ उत्तरदायी शासन की स्थापना हुई।

 

 

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RAS 2018 Notification out I How to prepare for RAS 2018

RAS 2018 Notification out I How to prepare for RAS 2018

RAS 2018 Notification : Rajasthan Public Service commission ( RPSC ) has released notification for RAS exam.

In this article we will discuss

  1.  Vacancies
  2. Eligibility
  3. Important dates
  4. RAS exam pattern
  5. RAS syllabus
  6. RAS prelims
  7. RAS Mains
  8. Previous year question Papers
  9. Interview
  10. How to prepare : Frontier IAS online coaching

For video presentation to understand above points Click below video

  1. Vacancies

There are total 980 vacancies.

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UPSC/HCS/RAS Civil Service Day 17 Art and Culture-Religions in India MCQ

 UPSC/HCS/RAS Civil Service Day 17 Art and Culture-Religions in India MCQ

 

 

Dear aspirants,

Welcome to Frontier IAS online coaching classes. Frontier IAS is a part of Pinnacle New Era Education Pvt. Ltd.  Frontier IAS provides guidance for the preparation of UPSC/HCS/RAS Civil Service. Frontier IAS has started Indian Art and Culture questions series for UPSC/HCS/RAS aspirants.

Questions from Indian art and culture come in both prelims and mains (GS1) in UPSC Civil Service Examination. In GS1, the syllabus of Indian culture covers the salient aspects of Art Forms, Literature and Architecture from ancient to modern times. This is a very easy topic if you get a basic idea regarding what to study and what not to study in Indian culture. Clearing the basic ideas on key topics will help you improve your score. Practising these MCQs provided by us can help you improve your knowledge and perform better in the actual exam.

Frontier IAS team brings you an MCQ series on various topics of Indian Art and Culture. You can solve it in your leisure time and use your time more productively while surfing the internet. So, here comes UPSC/HCS/RAS Civil Service Day 17 Art and Culture-Religions in India MCQ.

Frontier IAS

 

UPSC/HCS/RAS Civil Service Day 17 Art and Culture-Religions in India MCQ

Q1. Consider the following statements about Islam./ इस्लाम के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें :

  1. Islam is older than Christianity./इस्लाम, इसाई धर्म से प्राचीन है |
  2. Muslim Calendar started from 622 AD./मुस्लिम कैलेंडर 622 ईस्वी से प्रारभ होता है |
  3. Muslims and christians have a common ancestor./मुसलामानों तथा ईसाईयों के पूर्वज एक हैं|
  4. Zakat is a special prayer done in community mosque on every friday./ ज़कात एक विशेष प्रार्थना है जो प्रत्येक शुक्रवार को सामुदायिक मस्जिद में की जाती है |

Select the correct code/सही विकल्प का चयन करें :

  1. 1 and 4/1 और 4
  2. 1, 2 and 4/1,2, और 4
  3. 2, 3 and 4/2,3 और 4
  4. 2 and 3/2 और 3

 

Q2. Shias and Sunnis are the two major sects of Islam religion. Consider the following statements about them./ शिया तथा सुन्नी इस्लाम धर्म के दो मुख्य धड़े हैं | उनके सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें |

  1. Shias are those who follow Sunnah and Sunnis are those who are the partisans of Ali. / शिया वे हैं जो सुन्नाह का अनुसरण करते हैं तथा सुन्नी वे हैं जो अली के पक्षपाती हैं |
  2. Iran has the highest population of Shias in the world./ शिया की सर्वाधिक जनसँख्या इरान में है |
  3. The main reason for the division is the dispute over succession of Prophet Muhammad./विभाजन की मुख्य वजह पैगम्बर मुहम्मद के उत्तराधिकारी को लेकर विवाद है |
  4. Majority of the muslims in India are Sunnis, particularly Hanafi school of thought./ भारत में बहुसंख्यक वर्ग सुन्नियों का है, विशेषकर हनफी विचारधारा वाले |

Select the correct code/ सही विकल्प का चयन करें :

  1. 2, 3 and 4/2,3 और 4
  2. 1 and 2/1 और 2
  3. 1 and 3/1 और 3
  4. 1, 2, 3 and 4/1,2,3 और 4

 

Q3. With reference to christianity, consider the following statements./ इसाई धर्म के सम्बन्ध में , निम्नलिखित कथनों पर विचार करें |

  1. Baptism is a practice where an individual enters the church’s service./वैप्तिस्म एक परंपरा है जिसमे कोई व्यक्ति चर्च की सेवा में प्रवेश करता है |
  2. Christianity was introduced in India by St.Thomas when he visited Muziris in Kerala./ भारत में इसाई धर्म की शुरुआत संत थॉमस के द्वारा हुई थी जब वे केरल के मुज़िरिस आयें |
  3. Some Mughal emperors gave permission to Portuguese missionaries to preach christianity./ कुछ मुग़ल शासकों ने पुर्तगाली मिशनरीज को इसाई धर्म के प्रचार करने की अनुमति दी |
  4. Christianity attracted the lower classes and poor people by introducing modern education and medical facilities./ इसाई धर्म ने आधुनिक शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाएं शुरू कर के निम्न वर्गीय तथा गरीबों को अपनी ओर आकर्षित किया |

Select the correct code/ सही विकल्प का चयन करें :

  1. 1 and 2/1 और 2
  2. 1 and 3/1 और 3
  3. 1, 3 and 4/1,3 और 4
  4. 1, 2, 3 and 4/ 1,2,3 और 4

 

Q4. With respect to Sikhism, consider the following statements and identify correct answer./ सिख धर्म के सम्बन्ध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें एवं सही उत्तर की पहचान करें |

  1. Guru Nunak is the one who founded Sikhism religion./ गुरु नानक वे हैं जिन्होंने सिख धर्म की स्थापना की |
  2. Guru Mukhi, a new script was introduced by Guru Angad./ गुरु मुखी, एक नयी लिपि, की शुरुआत गुरु अंगद के द्वारा की गयी थी |
  3. Harmandir Sahib (Golden temple) at Amritsar was built by Guru Arjun Dev./ अमृतसर में हरमंदिर साहब (स्वर्ण मंदिर )  का निर्माण गुरु अर्जुन देव ने करवाया था |
  4. Khalsa panth was founded by Guru Gobind Singh./ खालसा पंथ की स्थापना गुरु गोबिंद सिंह के द्वारा की गयी थी |

Select the correct code/ सही विकल्प का चयन करें :

  1. 1 and 4/1 और 4
  2. 1, 3 and 4/1,3 और 4
  3. 1, 2 and 3/1,2 और 3
  4. 2, 3 and 4/2,3 और 4

 

Q5. Zoroastrianism is a shrinking religion in India. Consider some statements about it./ पारसी धर्म भारत में एक  सिकुड़ता हुआ धर्म है| इसके सम्बन्ध में कुछ कथनों पर विचार करें |

  1. This religion is not introduced to India intentionally./ यह धर्म भारत में साभिप्राय शुरू नहीं किया  गया था |
  2. They primarily worship the natural elements like fire, water, earth and air./ वे मुख्य रूप से प्राकृतिक तत्वों जैसे आग, पानी, वायु तथा भूमि की पूजा करते हैं|
  3. According to them, DakhmaNashini are the vulture which eat the dead bodies./ उनके अनुसार दख्मा नाशिनी वे गिद्ध हैं जो मृत शरीरों को खाते हैं |
  4. Parsis are mainly restricted to Goa, Mumbai and Ahmedabad./ पारसी मुख्य रूप से गोवा, मुंबई तथा अहमदाबाद तक सीमित हैं |

Select the incorrect code/ सही विकल्प का चयन करें :

  1. 1 and 2/1 और 2
  2. 1, 3 and 4/1,3 और 4
  3. 1, 2, 3 and 4/1,2,3 और 4
  4. None of the above/ इनमे से कोई नहीं

 

Frontier IAS

 

Answers:

1.Correct option is (d) 2 and 3/2 और 3

Explanation:

  • Christianity was born around 6th century BCE whereas Islam was born at 6th century CE./इसाई धर्म का जन्म ईसा पूर्व छठी शताब्दी के आसपास हुआ था जबकि इस्लाम की उत्पत्ति छठी शताब्दी में हुई थी |
  • Islamic calendar is also known as Hijra calendar and starts from 622 AD./ इस्लामिक कैलेंडर को हिजरी कैलेंडर के नाम से भी जानते हैं तथा यह 622 ईस्वी से प्रारंभ होता है |
  • Moses, Abraham, Muhammad etc are some ancestors of Islam. Both Islam and christianity have Abraham as a common ancestor./ मूसा, अब्राहम, मुहम्मद आदि इस्लाम के पूर्वज हैं | इस्लाम तथा इसाई दोनों धर्मों के लोग अब्राहम को अपना पूर्वज मानते हैं |
  • Juma Namaz is a special prayer in a community mosque on every friday./ जुमे की नमाज़ एक विशेष प्रार्थना है जो सामुदायिक मस्जिद में  प्रत्येक शुक्रवार को की जाती है |
  • Zakat is a principle which says that every muslim should donate 2.5% of wealth to the poor./ ज़कात एक सिद्धांत है जो कहता है की प्रत्येक मुसलमान को उसके धन का 2.5 प्रतिशत हिस्सा गरीबों को दान करना चाहिए |

 

2.Correct option is (a) 2, 3 and 4/2,3, और 4

Explanation:

  • Shias and Sunnis are divided about the dispute regarding the succession of Prophet Muhammad./ शिया तथा सुन्नी पैगम्बर मुहम्मद के उत्तराधिकारी के सम्बन्ध में विवाद की वजह से विभाजित हैं |
  • Sunnis believe that the successor should be the follower of Abu Bakr and close to the Prophet./ सुन्नी यह मानते हैं की उत्तराधिकारी को अबू बकर का अनुयायी तथा पैगम्बर के निकट का होना चाहिए |
  • Shias believe that the successor should be related to Prophet through blood relation. / शिया मानते हैं की उत्तराधिकारी का पैगम्बर मुहम्मद से खून का रिश्ता  होना चाहिए |
  • In the world, highest population of Shias is found in Iran but India has majority of Sunni muslims (Hanafi school). / विश्व में , शिया मुसलमानों की सर्वाधिक आबादी ईरान में पायी जाती है किन्तु भारत में बहुसंख्यक वर्ग सुन्नियों का है |(हनफी विचारधारा )
  • Other schools of thought are Maliki, Shafei and Hambali./ मलिकी, शैफेई तथा हम्बाली अन्य विचार्धायें हैं |

 

3.Correct option is (d) 1, 2, 3 and 4/1,2,3, और 4

Explanation:

  • Baptism is an important practice in Christianity where an individual voluntarily enters to the service of church./वैप्तिस्म इसाई धर्म में एक महत्वपूर्ण परंपरा है जिसमे एक व्यक्ति स्वेच्छा से चर्च की सेवा में प्रवेश करता है |
  • Christianity was spread in India in two stages- Medieval and 19th century. / इसाई धर्म का भारत में प्रसार दो चरणों में हुआ – मध्य काल तथा 19 वीं शताब्दी |
  • It was first introduced by St.Thomas in Kerala (Muziris) and converted many people to christianity. /इसकी शुरुआत पहली बार केरल (मुज़िरिस) में संत थॉमस के द्वारा हुई थी तथा उन्होंने कई लोगों को इसाई धर्म में धर्मान्तरित किया |
  • In the 19th century, when British were ruling India, they allowed many christian missionaries to preach their teachings. / 19 वीं शताब्दी में , जब भारत पर अंग्रेजों का राज था , उन्होंने इसाई मिशनरीज को उनकी शिक्षाओं का प्रसार करने की अनुमति दी |
  • Even, Akbar and Jahangir of Medieval period allowed the missionaries of Portuguese to preach their teachings./ यहाँ तक की मध्यकाल में अकबर तथा जहाँगीर ने भी पुर्तगाली मिशनरियों को उनकी शिक्षाओं का प्रचार करने की अनुमति दी |
  • People were easily attracted to those teachings due to medical facilities and education provided by missionaries./ मिशनरियों द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं तथा आधुनिक शिक्षा के कारण लोग आसानी से उन शिक्षाओं की तरफ आकर्षित हुए |

 

4.Correct option is (d) 2, 3 and 4/2,3, और 4

Explanation:

  • Guru Nank propounded monotheism and was against idolatry. He started Sangaet (meeting together) and pangat (eating together). He formed a group of people known as Sikhs but never intended to start to any religion./ गुरु नानक ने एकेश्वरवाद को प्रतिपादित किया तथा वे मूर्ति पूजा के खिलाफ थे | उन्होंने संगत ( एक साथ मिलना ) तथा पंगत ( एक साथ भोजन) की शुरुआत की | उन्होंने सिखों के नाम से जाने वाले एक समूह का निर्माण किया किन्तु किसी भी धर्म को शुरू करने का उनका कोई इरादा नही था |
  • Guru Angad was the 2nd guru and was the pioneer of a new script called Guru Mukhi./ गुरु अंगद दुसरे गुरु थे तथा गुरु मुखी नामक नयी लिपि के अग्रदूत थे |
  • The Golden temple was built by Guru Arjun Dev while the land was donated by Akbar to Guru Ramdas./स्वर्ण मंदिर  का निर्माण गुरु अर्जुन देव ने करवाया था जबकि अकबर ने गुरु रामदास को भूमि दान में दी थी |
  • An identity to the Sikhs was given by Guru Gobind Singh and is called 5 K’s. He also founded Kalsa Panth, a dedicated Sikh army in Punjab./ सिखों को गुरु गोविन्द सिंह द्वारा एक पहचान दी गयी थी जिसे 5 क के नाम से जाना जाता है | उन्होंने पंजाब में एक समर्पित सिख सेना, खालसा पंथ की स्थापना भी की |

 

5.Correct option is (d) None of the above/ इनमे से कोई नहीं

Explanation:

  • Zoroastrianism was orginated in Persia by Prophet Zarathustra and propounds only one God./पारसी धर्म की उत्पत्ति पर्शिया में पैगम्बर जरथ्रुस्टू के द्वारा हुई थी तथा यह धर्म केवल एक ईश्वर में यकीन रखता है |
  • The followers of this religion are called Parsis and are the smallest and shrinking communities in India. They live primarily in Goa, Mumbai and Ahmedabad. /इस धर्म के अनुगामियों को पारसी कहा जाता है तथा वे भारत में  सर्वाधिक छोटे एवं सिकुड़ते हुए समुदाय हैं | वे मुख्य रूप से गोवा , मुंबई तथा अहमदाबाद में रहते  हैं |
  • There are only eight temples belonging to this religion in India./ भारत में इस धर्म से संबधित केवल आठ मंदिर हैं |
  • They mainly worship water, fire, earth and air as they feel it as sacred. / वे मुख्य रूप से जल,अग्नि, भूमि, तथा वासु की पूजा करते हैं क्योंकि वे इन्हें पवित्र मानते  हैं |
  • Their sacred texts are Athuna Vairyo and Zenda Avesta./ अथुना वैर्यो तथा जेंदा अवेस्ता पवित्र ग्रन्थ हैं |

 

 

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UPSC/HCS/RAS Civil Service Day 17 Indian Polity-Making of our Constitution MCQ

UPSC/HCS/RAS Civil Service Day 17 Indian Polity-Making of our Constitution MCQ

 

 

Dear aspirants,

Welcome to Frontier IAS online coaching classes. Frontier IAS is a part of Pinnacle New Era Education Pvt. Ltd.  Frontier IAS provides guidance for the preparation of UPSC/HCS/RAS Civil Service. Frontier IAS has started Indian Polity questions series for UPSC/HCS/RAS aspirants.

Indian Polity is an important topic at all the three stages of exam i.e. Prelims, Mains and Interview. UPSC Prelims  syllabus on this topics includes “Indian Polity and Governance – Constitution, Political System, Panchayati Raj, Public Policy, Rights Issues, etc.” You can expect polity questions from both static (basic) as well as the dynamic (current events) part in both prelims and mains. Questions on Indian polity are asked in both prelims and mains (GS1 and GS2) in UPSC Civil Service Examination. Clearing the basic ideas on key topics will help you improve your score. Practising these MCQs provided by us can help you improve your knowledge and perform better in the actual exam.

Frontier IAS team brings you an MCQ series on various topics of Indian Polity. You can solve it in your leisure time and use your time more productively while surfing the internet. So, here comes UPSC/HCS/RAS Civil Service Day 17 Indian Polity-Making of our Constitution MCQ.

Frontier IAS

 

UPSC/HCS/RAS Civil Service Day 17 Indian Polity-Making of our Constitution MCQ

Q1. Consider the following statements regarding Committees and their Chairman: / समितियों और उनके अध्यक्षों से सम्बंधित निम्नलिखित कथनों  पर विचार करें :

  1. Rules of Procedure Committee- Dr. Rajendra Prasad / प्रक्रिया नियम समिति-डॉo राजेंद्र प्रसाद
  2. Union Powers Committee- Jawaharlal Nehru / संघीय शक्तियां समिति- जवाहरलाल नेहरु
  3. Drafting Committee- B. R. Ambedkar / प्रारूप समिति- बीo आरo अम्बेडकर

Which of the statements given above is/are incorrectly matched? / दिए गए कथनों में से कौन सा मिलन सही नहीं है / हैं ?

  1. Only 1 / सिर्फ 1
  2. Only 2 / सिर्फ 2
  3. 1 and 2 / 1 और 2
  4. None of these / इनमें से कोई नहीं

 

Q2. Which of the following changes took place in Constituent Assembly by Independence Act? / निम्नलिखित में से कौन सा परिवर्तन स्वतंत्रता अधिनियम द्वारा संविधान सभा में हुआ था ?

  1. The Assembly became a fully sovereign body. / सभा एक पूर्ण संप्रभु निकाय बन गई |
  2. It was given legislative powers. / इसे विधायी शक्तियां दी गई |
  3. The Muslim League members (from Pakistan) also became part of the Constituent Assembly. / मुस्लिम लीग के सदस्य ( पाकिस्तान के क्षेत्रों से सम्बंधित ) भी इस सभा का हिस्सा बन गए |

Which of the statements given above is/are not untrue? / दिए गए कथनों में से कौन सा कथन असत्य नहीं है / हैं ?

  1. 1 and 2 / 1 और 2
  2. 1 and 3 / 1 और 3
  3. 2 and 3 / 2 और 3
  4. 1, 2 and 3 / 1, 2 और 3

 

Q3. Consider the following statements regarding composition of the Constituent Assembly: / संविधान सभा के गठन से सम्बंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार करें :

  1. Initially, the total strength of Constituent Assembly was to be 387. / आरम्भ में संविधान सभा के कुल सदस्यों की संख्या 387 थी |
  2. Seats were allotted to provinces in proportion to their population. / प्रान्तों को सीटें उनकी जनसँख्या के अनुपात में आवंटित की गई थी |
  3. Voting was to be done by proportional representation by means of single transferable vote. / मतदान एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से समानुपातिक प्रतिनिधि द्वारा किया जाना था |

Which of the statements given above is/are correct? / दिए गए कथनों में से कौन सा कथन सही है / हैं ?

  1. 1 and 2 / 1 और 2
  2. 2 and 3 / 2 और 3
  3. 1 and 3 / 1 और 3
  4. 1, 2 and 3 / 1, 2 और 3

 

Q4. Consider the following statements: / निम्नलिखित कथनों पर विचार करें :

  1. The idea of a Constituent Assembly was the creation of B. R. Ambedkar. / संविधान सभा के सृजन का विचार डॉo बीo आरo अम्बेडकर का था |
  2. The Constituent Assembly was dominated by the legal luminaries. / संविधान सभा पर क़ानूनी दिग्गजों का प्रभुत्व था |
  3.  Some provisions in the Constitution of India are borrowed from Government of India Act, 1935. / भारत के संविधान के कुछ प्रावधान भारत शासन अधिनियम, 1935 से उद्धृत हैं |

Which of the statements given above is/are true? / दिए गए कथनों में से कौन सा कथन सही है / हैं?

  1. 1 and 2 / 1 और 2
  2. 2 and 3 / 2 और 3
  3. 1 and 3 / 1 और 3
  4. 1, 2 and 3 / 1, 2 और 3

 

Q5.  Consider the following statements: / निम्नलिखित कथनों पर विचार करें :

  1. 26 January was selected as the ‘date of commencement’ of the Constitution. / 26 जनवरी को संविधान के ‘ शुरुआत की तारीख’ के रूप में चुना गया था |
  2. On 26 January 1930, Purna Swaraj day was celebrated. / 26 जनवरी, 1930 को पूर्ण स्वराज दिवस मनाया गया था |
  3. The Constitution when adopted, did not contain the Preamble. / जब संविधान को अपनाया गया तो उसमें प्रस्तावना शामिल नहीं था |
  4. Which of the statements given above is/are not untrue? / इनमें से कौन सा कथन असत्य नहीं है / हैं ?
  1. 1 and 2 / 1 और 2
  2. 2 and 3 / 2 और 3
  3. 1 and 3 / 1 और 3
  4. 1, 2 and 3 / 1, 2 और 3

 

Frontier IAS

 

Answers:

1.Correct option is (d) None of these.

Explanation:

  • Chairman of Rules of Procedure Committee- Dr. Rajendra Prasad
  • Chairman of Union Powers Committee- Jawaharlal Nehru
  • Chairman of Drafting Committee- B. R. Ambedkar

 

2.Correct option is (a) 1 and 2.

Explanation:

  • By Indian Independence Act, the Assembly became a fully sovereign body which can frame any Constitution it wanted.
  • The Assembly also became a legislative body which was chaired by GV Mavlankar when it met as a legislative body.
  • The Muslim League members (which hailed from Pakistan) withdrew from the Constituent Assembly.

 

3.Correct option is (b) 2 and 3.

Explanation:

  • Initially the strength of the Constituent Assembly was to be 389. But when the Muslim League members (from Pakistan) withdrew from the assembly, the strength came down to 299.
  • Seats were allotted to the provinces and princely states in proportion to their population.
  • The representatives of each community were to be elected by the members of that community in provincial legislative assembly and voting was to be done by the method of proportional representation by means of single transferable vote.

 

4.Correct option is (b) 2 and 3.

Explanation:

  • The idea of a Constituent Assembly was put forward by M.N. Roy.
  • The Constituent Assembly consisted of many eminent lawyers and thus was dominated by legal luminaries.
  • Some provisions in the Constitution of India like Federal scheme, power of federal judiciary and administrative structure both at the centre and state level are borrowed from Government of India Act, 1935.

 

5.Correct option is (a) 1 and 2.

Explanation:

  • 26 January was selected as the ‘date of commencement’ of the Constitution because on this day in 1930 Purna Swaraj day was celebrated.
  • The Constitution which was adopted on November 26, 1949 contained a Preamble, 395 Articles and 8 Schedules.

 

 

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