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RAS PCS 2018 Exam | History notes – Gupta Empire | UPSC | HCS

RAS PCS 2018 Exam | History notes – Gupta Empire | UPSC | HCS

RAS PCS 2018 Exam | History notes – Gupta Empire | UPSC | HCSGupta Empire

Economy

  • It is argued by many scholars that the state was the exclusive owner of land.
  • The most decisive argument in favor of the exclusive state ownership of land is in the Paharpur Copper plate inscription of Buddhagupta.

From the economic standpoint, land was classified into 5 groups:

  • Kshetra Bhoomi: cultivable land
  • Khila: waste land
  • Vastu Bhoomi: habitable land
  • Charagah Bhhomi: pasture land
  • Aprahata Bhoomi: Forest land
  • Gold coins: largest in number but not pure as kushanas
  • Served to pay officers, meet the need of sale and purchase of lands
  • Silver coins – issued after the conquest of Gujarat for local exchange
  • Copper coins – very few
  • Gold, silver and Copper was used in making ornaments and issuing coins.

The port of the east coast:

  • Tamralipti, Ghantashala and Kandura- handled the North-Indian trade with SouthEast Asia

The ports of the West coast:

  • Bharoach, Chaul, Kalyan and Cambay- traded with the Mediterranean and West asia.

Social Developments

  • Land grants to the Brahmanas on a large scale mean that the Brahmana supremacy continued in Gupta times.

The Guptas made three types of grants.

  • First was the religious grants to brahmans, individually or collectively, known as brahmadeya grants.
  • Second was the grants to institutions such as temples and monasteries known as devagrahara or devadana.
  • Third were secular grants to crown officers, craft guilds or also military commanders in rare occasions.

Caste System

The castes proliferated into numerous sub castes. Professions were determined by caste though not very rigidly.

  • Brahmans: followed trade, architecture and service as professions. They had even become kings.
  • Vaishyas:The Gupta emperors were Vaishyas.
  • Kshatriyas: they followed commercial and industrial vocations.

Position of Women under Gupta Empire

  • Though women were subordinate to men in society, yet their position was no less significant.
  • They were given education but they could not recite the Vedic mantras.
  • Child marriages : common.
  • Purdah system: begun among the higher castes.
  • Widow Remarriage: allowed sometimes.

RAS PCS 2018

गुप्त साम्राज्य  

अर्थव्यवस्था

  • कई विद्वानों द्वारा यह तर्क दिया जाता है कि राज्य की भूमि का एकमात्र अधिकार शासन के पास था |
  • भूमि के राज्य के शासन के स्वामित्व के पक्ष में सबसे असंदिग्ध तर्क बुधगुप्त का पहाड़पुर का ताम्रलेख है |

आर्थिक दृष्टिकोण से, भूमि 5 समूहों में वर्गीकृत की गई थी:

  • क्षेत्र भूमि: खेती योग्य भूमि
  • खिल: बेकार भूमि (वह भूमि जिस पर तीन वर्ष से कृषि ना की गई हो )
  • वास्तु भूमि: रहने योग्य भूमि
  • चारागाह भूमि :पशुओं के चरने के लिए भूमि  
  • अप्रहत भूमि: वन भूमि
  • सोने के सिक्के :इनकी संख्या बहुत अधिक थी परन्तु ये कुषाण काल जितने शुद्ध नहीं थे |
  • सिक्कों का उपयोग अधिकारियों को वेतन देने,भूमि एवं वस्तु विनिमय के लिए किया जाता था
  • चांदी के सिक्के -स्थानीय मुद्रा के रूप में गुजरात के विजय के बाद जारी किए गए थे
  • ताम्बे के सिक्के-कम संख्या में थे |
  • सोने, चांदी और ताम्बे का उपयोग आभूषण बनाने एवं सिक्को के लिया किया जाता था |
  • सोने के सिक्के :इनकी संख्या बहुत अधिक थी परन्तु ये कुषाण काल जितने शुद्ध नहीं थे |
  • सिक्कों का उपयोग अधिकारियों को वेतन देने,भूमि एवं वस्तु विनिमय के लिए किया जाता था
  • चांदी के सिक्के -स्थानीय मुद्रा के रूप में गुजरात के विजय के बाद जारी किए गए थे
  • ताम्बे के सिक्के-कम संख्या में थे |
  • सोने, चांदी और ताम्बे का उपयोग आभूषण बनाने एवं सिक्को के लिया किया जाता था |

पूर्वी तट के बंदरगाह:

  • ताम्रलिप्त, घंटशला और कंडुरा-इनकी दक्षिण पूर्व एशिया के साथ उत्तर-भारत का व्यापार में भागीदारी |

पश्चिम तट के बंदरगाह:

  • भरुच,चौल,कल्याण एवं खंभात – भूमध्य और पश्चिम एशिया के साथ व्यापार में भागीदारी |

सामाजिक विकास

  • बड़े पैमाने पर ब्राह्मणों को भूमि अनुदान में दी गई थी जिसका अर्थ यह था की गुप्त काल में ब्राह्मणों का प्रभुत्व था |

गुप्त शासकों ने तीन प्रकार के अनुदान दिए |

  • सबसे पहला ब्राह्मणों को दिया जाने वाला धार्मिक अनुदान जो व्यक्तिगत रूप से या सामूहिक तौर पर दिया जाता था जिसे ब्रह्मदेय कहा जाता था |
  • दूसरा अनुदान मंदिर एवं मठों जैसे विभिन्न संस्थानों को दिया जाता था जिसे देवदान कहा जाता था |
  • तीसरा धर्मनिरपेक्ष अनुदान था जो अधिकारीयों, शिल्पी संघ अथवा सैन्य अध्यक्षों को दुर्लभ अवसरों पर दिया जाता था

जाति व्यवस्था

जातियां कई उप-जातियों में बंट गई | व्यवसायों का निर्धारण जातिगत हो गया हालंकि इसका पालन कठोरता से नहीं हुआ (क्यूंकि कोई भी अपना व्यवसाय बदल सकता था )

  • ब्राह्मण: व्यापार, वास्तुकला और राज्यसेवाओं को व्यवसाय के रूप में अपनाया | इन्होने शासन भी किया |
  • वैश्य:ऐसा माना जाता है की गुप्त शासक वैश्य थे |
  • क्षत्रिय:इन्होने वाणिज्यिक और औद्योगिक व्यवसायों को अपनाया |

गुप्त साम्राज्य में महिलाओं की स्थिति

  • यद्यपि महिलायें समाज में पुरुषों के अधीन थी | परन्तु उनकी स्थिति उतनी भी कम नहीं थी |
  • उनको शिक्षा दी जाती थी परन्तु उन्हें वैदिक मंत्र पढ़ने की अनुमति नहीं थी |
  • बाल विवाह की प्रथा इस समाज में प्रचलित थी |
  • उच्च जातियों में पर्दा प्रथा प्रचलित थी |
  • गुप्त काल में स्ति प्रथा भी प्रचलित थी |

Buddhism and Bhagavatism

  • No longer received royal patronage.
  • According to Fa Hien, Buddhism flourished but in reality it was not so important in the Gupta period as it was in the days of Asoka and Kanishka.
  • Instead Buddhism had been replaced by Bhagavatism
  • Two Gods who commanded were – Vishnu and Shiva.

Literature:

  • Gupta age was a golden period of literature. Gupta literature can be broadly classified into
  • Religious literature
  • Secular literature
  • Religious Literature
  • Puranas (It literally means the ‘Past’)

Secular Literature:

  • Ritusamhar (first poetry), Meghadutam, Kumarasam-bhavam, Raghuvansam, Malavikagnimitra (first drama), Abhijnana Shakuntalam (Kalidasa), Mudraraksha (Vishakhadatta), Panchtantra (Vishnu Sharma), Kamasutra (Vatsyayan)

Smritis

  • Literally it means ‘Memory’.
  • These are the law books written in Gupta and pre- Gupta period.
  • Manu Smriti: the oldest Smriti written during post Mauryan period. It is the most comprehensive law book of the ancient time.
  • Narada Smriti: it gives a list of various privileges of Brahmins.
  • These smritis made or fixed laws for individual and society based on Varna system or caste heritage.
  • Most smritis assigned legalized property rights only to the male members of the family.
  • Some smriti writers gave ‘Streedhan’ a right of female but it was given only at the time of marriage and in the form of cash and jewelry.

Paintings During Gupta Period

  • They are found from Ajanta and Bagha caves.
  • Ajanta’s Rock cut caves were built during 2nd C – 7th C AD. They were patronized by different rulers and followers of Buddhism.
  • 25 caves are Vihara type (Where monks could live and pray) and 4 are Chaitya type.
  • The paintings are found on the walls and ceilings of these caves.
  • Most famous paintings have been found from caves 16, 17 and 19.
  • Natural colours from vegetation were used.
  • The themes were taken from Jataka tales and various shades of Buddha’s life.
  • Amongst the most famous paintings the ‘Apsara’ of Ajanta had attracted the attention of the critics the most.

बौद्ध धर्म और भगवतवाद

  • अधिक समय तक शासन ने सरंक्षण नहीं मिला |
  • फ़ाहियान के अनुसार बौद्ध धर्म फला फूला परन्तु वास्तविकता यह थी की इसने गुप्त काल में उतनी प्रगति नहीं की जितनी अशोक और कनिष्क के काल में की थी |
  • बल्कि बौद्ध धर्म की जगह भगवतवाद ने ले ली |
  • विष्णु और शिव भगवान का वर्चस्व था |

साहित्य:

  • गुप्त काल साहित्य के लिए सुनहरा काल था |गुप्त काल के साहित्य को दो भागों में बांटा गया था |
  • धार्मिक साहित्य
  • धर्मनिरपेक्ष साहित्य
  • धार्मिक साहित्य:-
  • पुराण (इसका शाब्दिक अर्थ है ‘अतीत’) |

धर्मनिरपेक्ष साहित्य:

  • ऋतुसंहार (कालिदास की प्रथम काव्य रचना ) , मेघदूतम्,कुमारसंभवम्,रघुवंशम्, मालविकाग्निमित्रम् (प्रथम नाटक), अभिज्ञानशाकुन्तलम् (कालिदास), मुद्राराक्षस (विशाखदत्त),  पंचतंत्र (विष्णु शर्मा), कामसूत्र (आचार्य वात्स्यायन)

स्मृतियां

  • इसका शाब्दिक अर्थ है चेतना (स्मृति अथवा याद से संबंधित)
  • ये नियमावली थी जो गुप्त काल एवं पूर्व गुप्त काल में लिखी गई थी |
  • मनु स्मृति : मौर्योत्तर काल में लिखी जाने वाली यह सबसे प्राचीन स्मृति थी |यह प्राचीन काल की सबसे विस्तृत नियमावली थी |
  • नारद स्मृति: यह ब्राह्मणों के विभिन्न विशेषाधिकारों का वर्णन करती है |
  • वर्ण अथवा जातिगत व्यवस्था पर आधारित ये स्मृतियाँ एक व्यक्ति अथवा समाज से संबंधित नियमों का उल्लेख करती है |
  • अधिकांश स्मृतियाँ केवल पुरुषों को ही सम्पति का अधिकार देती है |
  • कुछ स्मृति लेखक “स्त्री धन ” नामक अधिकार का उल्लेख करते है परन्तु यह केवल विवाह के समय ही नगद और आभूषणों के रूप में दिया जाता था |

गुप्तकालीन चित्रकलाएं

  • ये अजंता एवं बाघा गुफाओं से प्राप्त होती है |
  • अजंता की पर्वतीय गुफाएं दूसरी शताब्दी से सातवीं शताब्दी ईस्वी के बीच बनाई गई थी | इनका सरंक्षण विभिन्न शासकों एवं बौद्ध अनुयायियों द्वारा किया गया |
  • 25 गुफाएं विहार की तरह थी (जहाँ बौद्ध भिक्षु रह सकते थे एवं प्रार्थना कर सकते थे ) एवं 4 चैत्य प्रकार के थे |
  • इन गुफाओं की दीवार एवं छतों पर विभिन्न प्रकार के चित्र थे |
  • सबसे प्रसिद्ध गुफाएं 16 ,17 एवं 18 थी |
  • इन सभी चित्रों के लिए प्राकृतिक रंगो का उपयोग किया गया था जो विभिन्न वनस्पतियों से प्राप्त हुए थे
  • इन चित्रों के विषय विभिन्न जातक कथाओं एवं बुद्ध के जीवन की विभिन्न घटनाओं से लिए गए थे |
  • सबसे प्रसिद्ध चित्रकलाओं में अजंता की अप्सरा थी जिसने आलोचकों का ध्यान आकर्षित किया |

Decline of Gupta empire

Reasons of decline

Huna invasion

  • Huna invasion made them weak
  • Use of stirrups made of metal by Hunas so they can move quickly.
  • Excellent archers of Hunas

Loss of Malwa and Yashodharman

  • Malwa which was closer to port was lost.
  • Though Yashodharman had overthrown Hunas, he had given severe blow to Guptas

Rise of feudatories

They tended to become independent

Other reasons

  • By 550 AD,  Bihar and Uttar Pradesh had passed out of Gupta hands.
  • Loss of western India deprived the Guptas of the rich revenues from trade and commerce and crippled them economically.
  • Difficult to maintain large army
  • Land grants had reduced the revenues
  • Decline of foreign trade had affected income
  • No demand of cloth produced by them.
  • Debasement of the coins and gradual disappearance of gold coins during the post-Gupta period indicates the Decline of Trade.

Arguments in favor of Gupta rule:

  • There were political units, foreign rule was completely removed and peace and prosperity prevailed.
  • Enlightened character of government, i.e. taxes were light, mild punishment etc
  • Revival of Hinduism  but there was tolerance of all other regions.
  • Use of Sanskrit developed and art and literature flourished during the period

Arguments against Gupta rule:

  • Existence of too many feudatories
  • Absence of large central army
  • Development of feudal elements (Increasing land grants, Sub-infeudation etc)

गुप्त साम्राज्य का पतन

पतन के कारण

हूणों का आक्रमण

  • हूणों के आक्रमण से ये कमजोर पड़ गए |
  • हूणों ने धातु की रकाबों का प्रयोग किया जिससे वे तेज़ी से आगे बढ़े |
  • हुण उत्कृष्ट धनुर्धारी थे |

मालवा की क्षति एवं यशोधर्मन

  • मालवा जो बंदरगाह के निकट थी नष्ट कर दी गई |
  • हालांकि यशोधर्मन ने हूणों को उखाड़ फेंका, उन्होंने गुप्त शासकों एक गंभीर झटका दिया |

सामंतवादियों का उदय

उन्होंने स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दिया |

अन्य कारण

  • 550 ईस्वी तक, बिहार और उत्तर प्रदेश गुप्त राजवंश के हाथ से जा चुके थे |
  • पश्चिम भारत हारने के बाद गुप्त साम्राज्य को व्यापार और वाणिज्य से प्राप्त राजस्व में बहुत नुकसान और वे आर्थिक रूप से पंगु हो गए |
  • इसके कारण वे एक विशाल सेना को नहीं संभाल पाए |
  • भूमि अनुदान ने भी राजस्व को कम कर दिया |
  • विदेशी व्यापार की गिरावट ने भी आय को प्रभावित किया |
  • उनके द्वारा निर्मित कपड़ा की कोई मांग  नहीं थी |
  • सिक्कों में मिलावट एवं उत्तर गुप्त काल में सोने के सिक्कों के लुप्त होने के कारण व्यापार में गिरावट आई |

गुप्त शासन के पक्ष में तर्क:

  • इस काल में राजनीतिक इकाइयां थीं, विदेशी शासन पूरी तरह से हटा दिया गया था एवं राज्य में शांति एवं समृद्धि थी
  • सरकार का प्रबुद्ध चरित्र, अर्थात कम कर एवं हल्के प्रकार की सजा |
  • हिंदू धर्म का पुनरुद्धार किया लेकिन सभी अन्य धर्मों के प्रति सहिष्णुता थी।
  • गुप्त काल संस्कृत का विकास हुआ एवं कला और साहित्य फले फूले |

गुप्त शासन के प्रतिकूल तर्क

  • सामंतवादियों की अधिकता |
  • बड़ी केंद्रीय सेना की अनुपस्थिति
  • सामंती तत्वों का विकास (भूमि अनुदान को बढ़ावा,भूमि को जागीर के रूप में देना आदि )

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Online UPSC IAS Prelims 2018 || Geography Study Material – Clear IAS

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Natural Vegetation

Montane forest

Montane forest are further classified as:

Montane subtropical forest

  • Sub-tropical broad-leaves
  • Subtropical moist Pine
  • Subtropical dry evergreen

Montane temperate forest

  • Wet temperate
  • Moist temperate
  • Dry temperate

Sub-tropical Broad-leaved Forests

Climatic conditions

  • Mean annual rainfall = 75 cm to 125 cm.
  • Average annual temperature = 18°-21°C.

Distribution

  • In Eastern Himalayas at altitudes varying from 1000 to 2000 m.

Characteristics

  • Forests of evergreen species.
  • Commonly found species are evergreen oaks, chestnuts, ash, beech, sals and pines.
  • In south India, they occur only in the Nilgiri and Palni hills at 1070-1525 metres above sea level.

Subtropical Moist Pine Forests

Distribution

  • In Western Himalayas at elevations between 1000 to 2000 metres above sea level.
  • Some hilly regions of Arunachal Pradesh, Manipur, Naga Hills and Khasi Hills.

Characteristics

  • Chir is the most dominant tree which forms pure stands.
  • It provides valuable timber for furniture, boxes and buildings, used for producing resin and turpentine.

Subtropical Dry Evergreen Forests

Distribution

  • Found in the Bhabar, the Siwaliks and the western Himalayas up to about 1000 metres above sea level.

Climatic Conditions

  • Annual rainfall is 50-100 cm .
  • The summers are hot and winters are very cold.

Characteristics

  • Low scrub forest with small evergreen stunted trees and shrubs.
  • Olive, acacia modesta and pistacia are the most predominant species.

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पर्वतीय  वन

पर्वतीय वनों को निम्नलिखित रूप में वर्गीकृत किया गया है:-

उपोष्णकटिबंधीय पर्वतीय वन

  • उपोष्णकटिबंधीय  चौड़ी पत्तियों वाले
  • आर्द्र  उपोष्णकटिबंधीय चीड़ वाले वन
  • उपोष्णकटिबंधीय शुष्क सदाबहार

पर्वतीय शीतोष्ण वन

  • बरसाती शीतोष्ण वन
  • आर्द्र शीतोष्ण वन
  • शुष्क शीतोष्ण वन

उपोष्णकटिबंधीय चौड़ी पत्तियों वाले वन

जलवायु  परिस्थितियाँ

  • औसत वार्षिक वर्षा-स्तर  = 75 सेमी से 125 सेमी
  • औसत वार्षिक तापमान =  18°-21°C

वितरण

  • पूर्वी हिमालय में ये वन 1000 से 2000 मीटर की ऊंचाई ओर फैले हुए है |

विशेषताएं

  • सदाबहार प्रजातियों के वन।
  • आम तौर पर पाए जाने वाले प्रजातियां सदाबहार ओक, चेस्टनट,  प्रभूर्ज वृक्ष, छाल , साल और चीड़ हैं।
  • दक्षिण भारत में, वे नीलगिरि और पलानी पहाड़ियों पर समुद्र तल से  केवल 1070-1525 मीटर की ऊंचाई पर पाए जाते है |

आर्द्र  उपोष्णकटिबंधीय चीड़ वाले वन

वितरण

  • ये पश्चिमी हिमालय में समुद्र तल से 1000 से 2000 मीटर की ऊंचाई के बीच पाए जाते है |
  • अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नागा पहाड़ियों  और खासी पहाड़ियों के कुछ पर्वतीय इलाकों में पाए जाते है |

विशेषताएं

  • यहाँ पाई जाने वाली प्रमुख प्रजाति चीड़ है जो एकल प्रकार के वृक्षों का निर्माण करती है |
  • यह फर्नीचर,बॉक्सों तथा इमारतों के  लिए बहुमूल्य लकड़ी प्रदान करते है | इनका उपयोग राल तथा तारपीन बनाने के लिए किया जाता है |

उपोष्णकटिबंधीय शुष्क सदाबहार वन

वितरण

  • भाबर, सिवालिक और पश्चिमी हिमालय में समुद्र तल से लगभग 1000 मीटर ऊपर पाए जाते है |

जलवायु परिस्थितियाँ

  • वार्षिक वर्षा-स्तर  50-100 cm है |
  • ग्रीष्म ऋतु में अधिक गर्मी तथा शीत ऋतु में अधिक सर्दी होती है |

विशेषताएं

  • इन वनों में झाड़ियों का घनत्व कम होता है,यहाँ के वृक्ष तथा झाड़ियां सदाबहार छोटे आकार की होती है |
  • जैतून,अकासिया(बबूल), तथा गोंद सबसे प्रमुख प्रजातियां हैं।

Wet Temperate Forests

Climatic Conditions

  • Height =1800 to 3000 m above sea level
  • Mean annual rainfall is 150 cm to 300 cm
  • Mean annual temperature = 11°C to 14°C

Distribution

  • Higher hills of Tamil Nadu and Kerala, in the Eastern Himalayan region.

Characteristics             

  • closed evergreen forests.
  • The trees rarely achieve a height of more than 6 metres.
  • Deodar, Indian chestnut, birch, plum,oak, hemlock, etc. are important species.


Moist Temperate forest

Climatic Conditions

  • Annual rainfall = 150 cm to 250 cm

Distribution

  • Occurs in the temperate zone of the Himalayas between 1500 and 3300 metres.
  • Cover the entire length of this mountain range in Kashmir, Himachal Pradesh, Uttarakhand, Darjeeling and Sikkim.

Characteristics

  • Mainly composed of coniferous species.
  • Pines, cedars, silver firs, spruce, etc. are most important trees.

Dry Temperate Forests

Climatic Conditions

  • Precipitation is below 100 cm and is mostly in the form of snow.

Characteristics

  • Coniferous forests with xerophytic shrubs in which deodar, oak, ash, olive, etc are the main trees.

Distribution

  • Such forests are found in the inner dry ranges of the Himalayas where south-west monsoon is very feeble.
  • Ladakh, Lahul, Chamba, Kinnaur, Garhwal and Sikkim.

बरसाती शीतोष्ण वन

जलवायु  परिस्थितियाँ

  • समुद्र तल से ऊँचाई = 1800 से 3000 मीटर तक  |
  • औसत वार्षिक वर्षा-स्तर  150 सेंटीमीटर से 300 सेंटीमीटर तक होती है |
  • औसत वार्षिक तापमान = 11 डिग्री सेल्सियस से 14 डिग्री सेल्सियस तक

वितरण

  • तमिलनाडु और केरल की उच्च पहाड़ियों तथा पूर्वी हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाते है |

विशेषताएं

  • लगभग सदाबहार वनों जैसे है |
  • इन पेड़ों की ऊंचाई मुश्किल से 6 मीटर तक होती है
  • देवदार,देशी चेस्टनट,सनौबर वृक्ष बर्च,ओक,हेमलोक आदि महत्वपूर्ण प्रजातियां हैं।

आर्द्र शीतोष्ण वन

जलवायु परिस्थितियाँ

  • वार्षिक वर्षा = 250 सेमी से 150 सेमी

वितरण

  • 1500 और 3300 मीटर के बीच हिमालय के समशीतोष्ण क्षेत्र में पाए जाते है |
  • कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दार्जिलिंग और सिक्किम में इस पर्वत श्रृंखला को पूर्ण रूप से आच्छादित करता है |

विशेषताएं

  • यह मुख्य रूप से शंकुधारी प्रजातियों से बना है |
  • चीड़ , देवदार, सिल्वर-फर , स्प्रूस, आदि सबसे महत्वपूर्ण वृक्ष हैं।

शुष्क शीतोष्ण वन

जलवायु परिस्थितियाँ

  • यहाँ वर्षा 100 सेमी नीचे होती है जो अधिकतर बर्फ के रूप में होती है |

विशेषताएं

  • ये शंकुधारी वन है जहाँ चौड़ी पत्ती वाले मरूद्भिद झाड़ियां जिनमे देवदार,ओक,प्रभूर्ज वृक्ष ,जैतून वृक्ष आदि प्रमुख है

वितरण

  • इस प्रकार के वन हिमालय की आंतरिक शुष्क श्रेणियों में पाए जाते हैं, यहाँ दक्षिण-पश्चिम मानसून बहुत कमजोर है।
  • यह लद्दाख,लाहौल,चम्बा,किन्नौर, गढ़वाल और सिक्किम में पाए जाते है |

Alpine forest

  • Altitudes ranging between 2,900 to 3,500.
  • It is a mixture of coniferous and broad-leaved trees
  • Fir, spruce, rhododendron, etc. are important species.

Littoral and swamp forest

  • They can survive and grow both in fresh as well as brackish water.
  • In India, the mangrove forests spread over 6,740 sq. km which is 7 per cent of the world’s mangrove forests.

Distribution:

  • Highly developed in the Andaman and Nicobar Islands and the Sunderbans of West Bengal where the predominant species is Sundri.
  • Mahanadi, the Godavari and the Krishna deltas.
  • The important species found here are Sundri, agar, screw pines, canes and palms, etc.

अल्पाइन वन

  • इनकी ऊंचाई 2,900 से 3,500 के बीच है |
  • ये वन  शंकुधारी तथा चौड़ी पत्ती वाले वृक्षों का मिश्रण है |
  • फर ,स्प्रूस, बुरांस आदि यहाँ पाई जाने वाली महत्वपूर्ण प्रजातियां हैं।

वेलांचली तथा दलदली वन

  • ये खारे तथा मीठे  दोनों प्रकार के पानी में फल-फूल सकते है |
  • भारत में , मैंग्रोव वन 6,740 वर्ग किलोमीटर तक फैले हुए है जो विश्व  के मैंग्रोव वनों का 7 प्रतिशत है।

वितरण:

  • ये अधिकांशतः अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और पश्चिम बंगाल के सुंदरबन में पाए जाते है यहाँ पाई जाने वाली मुख्य प्रजाति सुंदरी है |
  • महानदी, गोदावरी और कृष्णा नदी के डेल्टाओं पर भी विकसित है |
  •  यहां पाए जाने वाली महत्वपूर्ण प्रजातियां सुंदरी वृक्ष,ऍंगार,चीड़,गन्ना तथा खजूर आदि है |

 

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Prepare History For IAS (Prelims+Mains) || HCS | RAS | PCS Exam 2018

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Gupta empire

  • In 4th century AD a new dynasty, the Guptas, arose in Magadha.
  • It was not as large as the Mauryan Empire but it kept North India politically united for more than a century, from AD 335 to 455.
  • This period is referred as the “Classical age” or “Golden Age” of ancient India and was the most prosperous era in Indian history.
  • Gupta Empire may have been of Vaisya origin.
  • UP was the center Point of Gupta Empire.

The Guptas enjoyed certain material advantages like –

  • Fertile land of MP, Bihar and UP
  • Iron ores
  • Proximity to silk trade route and Byzantine empire (Roman empire)

Guptas set up their rule over –

  • Anuganga (the middle Gangetic basin), Prayag (modern Allahabad), Saketa (modern Ayodhya)
  • Gupta Dynasty was started by Sri Gupta.
  • He was a feudatory of Kushans and not a sovereign ruler.
  • Ghatotkacha was son of Sri Gupta and he succeeded him after his death

Chandragupta -I

  • Chandragupta I was the first independent ruler of Gupta Dynasty.
  • First Gupta ruler to assume the title of Maharajadhiraja.
  • He strengthen his kingdom by matrimonial alliance with the powerful family of Lichchhavis who were the rulers of Mithila.
  • His marriage to Lichchhvi princess Kumaradevi, brought to him enormous power, resources and prestige.

Samudragupta

  • It is written on an Ashokan pillar. It is of great historical importance as details of three kings are engraved on it.
  • 1st – Ashoka, who initially established it.
  • 2nd – Samudragupta, who got his account written on it in Sanskrit
  • 3rd – Jahangir, who got his account inscribed in Persian.
  • The Gupta kingdom was enlarged enormously by Chandragupta I’s son and successor Samudragupta (A.D. 335-380).
  • Samudragupta delighted in violence and conquest. (Opposite to Asoka’s policy of peace and non-aggression)
  • His court poet Harishena wrote a glowing account of the military exploits of his patron in Allahabad’s inscription (Prayag Prashasti)
  • The best source to know about Samudragupta is the Prayag Prashasti in Allahabad.

Titles given:

  • King of poets  (prayaga Prasati)
  • Param Bhagwat (Nalanda copper plate)
  • Ashvamdha Parakrama
  • Sarva-raj-ochchetta: Uprooter of all king
  • Samudragupta was a Vaishnavite.

Prepare History

गुप्त राजवंश

  • मगध में चौदहवीं शताब्दी में एक नए राजवंश का उदय हुआ जिसका नाम था ‘गुप्त राजवंश’
  • यह मौर्य साम्राज्य की तरह विशाल नहीं था,परन्तु इन्होने 335 से 455 ईसा पूर्व तक लगभग एक शताब्दी के लिए उत्तर भारत को राजनैतिक रूप से बांधे रखा |
  • इस काल को प्राचीन भारत का शास्त्रीय काल अथवा स्वर्ण काल कहा गया है एवं यह भारतीय इतिहास का समृद्ध काल माना गया है |
  • सम्भवतः  गुप्त साम्राज्य वैश्य मूल के थे |
  • उत्तर प्रदेश गुप्त साम्राज्य का केंद्र बिंदु था

गुप्त राजवंश को कुछ भौतिक लाभ भी प्राप्त हुए-

  • मध्य प्रदेश,बिहार और उत्तर प्रदेश की उपजाऊ भूमि |
  • लौह अयस्क
  • रेशम व्यापार मार्ग और बाइज़ेंटाइन साम्राज्य (रोमन साम्राज्य ) की निकटता
  • गुप्त साम्राज्य का अनुगंगा (मध्य गंगा द्रोणी क्षेत्र), प्रयाग(वर्तमान इलाहाबाद), साकेत (वर्तमान अयोध्या) पर शासन था |
  • गुप्त राजवंश के संस्थापक श्रीगुप्त थे |
  • ये कुषाणों के सामंती थे न की कोई संप्रभु शासक |
  • घटोतकच श्रीगुप्त के पुत्र थे एवं श्रीगुप्त की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारी बने |

चन्द्रगुप्त प्रथम

  • चंद्रगुप्त प्रथम गुप्त राजवंश का पहला स्वतंत्र शासक था।
  • इन्होने महाराजाधिराज की उपाधि ग्रहण की थी |
  • उन्होंने अपने राज्य को मिथिला नरेश के लिच्छवि परिवार से वैवाहिक संबंध बनाकर मजबूती प्रदान की |
  • उन्होंने लिच्छवि की राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह किया जिसके फलस्वरूप इनकी शक्ति,संसाधनों एवं प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई |

समुद्रगुप्त

  • यह अशोक स्तम्भ पर लिखित है | इसका अपना  महान ऐतिहासिक महत्व है क्यूंकि इस पर तीन राजाओं का विवरण उपलब्ध है-
  • प्रथम- अशोक, जिन्होंने इसे स्थापित किया था |
  • द्वितीय-समुद्रगुप्त का विवरण संस्कृत में है |
  • तृतीय-जहांगीर का उल्लेख  फ़ारसी में मिलता है|
  • गुप्त साम्राज्य चन्द्रगुप्त प्रथम के पुत्र एवं उनके उत्तराधिकारी समुद्रगुप्त (335-380 ईस्वी ) के शासन काल में और अधिक विस्तृत हो गया |
  • समुद्रगुप्त हिंसा एवं युद्ध विजय का समर्थक था (अशोक की शांति एवं अहिंसा की निति का विरोधी)
  • हरिषेण समुद्रगुप्त का दरबारी कवि था एवं इन्होने इलाहाबाद के शिलालेख (प्रयाग प्रशस्ति ) में समुद्रगुप्त की सैन्य विजय गाथाओं का उल्लेख किया है |
  • समुद्रगुप्त के बारे में जानने का सबसे अच्छा स्रोत इलाहाबाद में प्रयाग प्रशस्ति है |

दिए गए खिताब

  • कवियों का राजा (प्रयाग प्रशस्ति )
  • परम भगत (नालंदा के ताम्र लेख)
  • अश्वमेघ पराक्रमी
  • सर्वराजोच्छेदता- समस्त राजाओं का उन्मूलन करने वाला
  • समुद्रगुप्त वैष्णवादी था |

Chandragupta II

  • He adopted the title of Vikramaditya. 1st Ujjain ruler to do so
  • He extended the limits of his empire by marriage alliance and conquests.
  • By marrying his daughter (Prabhavati) to Vakataka prince, he exercised indirect control over the Vakataka kingdom in central India.

Nine Gems/Navaratnas of Chandragupta II:

Kalidasa :

  • was a famous Sanskrit writer and poet in the court of Chandragupta II (Vikramaditya).
  • Commonly regarded as the greatest poet in the Sanskrit language.
  • Author of three famous plays: Abhijnanasakuntalam (tells the story of King Dushyanta and Shakuntala), Malavikagnimitram (story love of King Agnimitra with Malavika),Vikramorvasiyam (love story of King Pururavas and celestial fairy Urvashi)

Vararuchi:

  • Grammarian and Sanskrit scholar, author of Prakrit Prakasha, which is first Grammar of Prakrit Language.

Amarasimha:

  • Was a Sanskrit lexicographer and a poet and his Amarkosha is a vocabulary of Sanskrit roots, homonyms and synonyms.

Dhanvantari- Physician

  • is regarded as one of the world’s first surgeons and medical practitioner from Gupta era.
  • He is considered as the origin exponent of Ayurveda.
  • He is also worshipped as the God of Medicine.

Kumaragupta

Kumaragupta I

  • Chandragupta II was succeeded by his son Kumaragupta I
  • Worshiper of god Kartikeya.
  • His inscription has been found from several of UP and MP like Mathura and Mandsor.
  • During his period, the Huns (Central Asian tribe) made their first attack in India.

Skandagupta

  • last ruler of Gupta dynasty
  • During his reign, Gupta empire was invaded by the Huns. He succeeded in defeating the Huns.
  • The continuous attacks of Huns weakened the empire and adversely affected its economy. The gold coinage of Skandagupta bears testimony to this.

Titles:

  • Vikramaditya and Kramaditya (coins), param Bhagvata (coins), Sharkropama (kahaum Pillar Inscription), Devaraja (Arya Manjushri Mula Kalpa) etc.

चन्द्रगुप्त द्वितीय

  • उन्होंने विक्रमादित्य का शीर्षक अपनाया | ऐसा करने वाले ये प्रथम उज्जैन शासक थे |
  • उन्होंने अपने साम्राज्य का विस्तार विवाह गठबंधनों एवं युद्ध विजयों से किया |
  • उन्होंने अपनी पुत्री प्रभावती का विवाह वाकाटक के राजकुमार से किया एवं अप्रत्यक्ष रूप से वाकाटक  साम्राज्य पर नियंत्रण कर लिया |

नौ रत्न / चंद्रगुप्त द्वितीय के नवरत्न:

कालिदास:

  • चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के दरबार में एक प्रसिद्ध संस्कृत लेखक और कवि थे।
  • आमतौर पर संस्कृत भाषा के सबसे महान कवि के रूप में जाना जाता है।
  • तीन प्रसिद्ध नाटकों के लेखक: अभिज्ञानशाकुंतलम (राजा दुष्यंत और शकुंतला की कहानी),मालविकाग्निमित्रम् (राजकुमारी मालविका तथा विदिशा के राजा अग्निमित्र की प्रेम कहानी) ,विक्रमोर्वशीयम् (राजा पुरुरवा तथा उर्वशी की प्रेम कहानी)

वररुचि

  • व्याकरण शास्त्री,प्राकृत प्रकाश ( प्राकृत भाषा का प्रथम व्याकरण) के लेखक |

अमरसिंह

  • एक संस्कृत भाषाविज्ञानी और एक कवि थे और इनका अमरकोष संस्कृत के मूल शब्दों,पदबंधों,समानार्थक शब्द का एक शब्दकोश है|

धन्वंतरी-चिकित्सक

  • इनको विश्व के सबसे पहले शल्य चिकित्स्क एवं गुप्त काल चिकित्सा व्यवसायी के रूप में जाना जाता है |
  • उन्हें आयुर्वेद के मूल प्रतिपादक के रूप में जाना जाता है |
  • इन्हे चिकित्सा के देवता के रूप में जाना जाता है |

कुमारगुप्त

कुमारगुप्त प्रथम

  • चंद्रगुप्त द्वितीय के उत्तराधिकारी उनके पुत्र  कुमारगुप्त प्रथम थे |
  • ये कार्तिकेय भगवान के उपासक थे |
  • उनके शिलालेख अधिकांश उत्तर प्रदेश एवं मध्यप्रदेश में पाए जाते है जैसे मथुरा एवं मंदसौर |
  • इन्ही के काल खंड में ही हूणों (मध्य एशियाई जनजाति) ने भारत पर आक्रमण किया था |

स्कन्दगुप्त

  • गुप्त राजवंश के अंतिम शासक
  • इन्ही के शासन काल में हूणों ने गुप्त साम्राज्य पर आक्रमण किया | ये हूणों को हराने में सफल रहे |
  • हूणों के निरंतर आक्रमणों ने गुप्त साम्राज्य की जड़े कमजोर कर दी जिस से इसकी अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा |
  • स्कंदगुप्त के सोने के सिक्के इसके साक्ष्य है |

शीर्षक/ख़िताब:

  • विक्रमादित्य और कर्मादित्य (सिक्कों पर),परम भगत (सिक्कों पर), शक्रोपम (कहौम जैन स्तम्भ ) ,देवराज (आर्य मंजुश्री मूल कल्प )

Gupta Administration

Taxation system

  • Land taxation keep on increasing
  • Taxation on trade and commerce decreased
  • Taxation rate – ¼ to 1/6 of produce.
  • Local people had to feed army when it passes through the countryside
  • Villagers were subjected to forced labour called vishti for serving the royal army and officials.

There were several types of taxes in Gupta era as follows:

  • Bali: Bali which was voluntary in Maurya era and was given to the King became compulsory in Gupta Era.
  • Bhaga: King’s share in all produce of the cultivators. It was 1/6th part of produce.

Judicial system

  • More developed than earlier times
  • Several law books compiled
  • 1st time demarcation of criminal and civil laws
  • Criminal law – theft and adultery
  • Civil law – disputes regarding various types of property

Provincial and Local administration

  • The empire was divided as –
  • Divisions (bhuktis) → districts (vishayas) → vithis → villages.

Order of their officers –

  • Uparika (for bhuktis)→ Vishayapati (for Vaisayas)

गुप्त प्रशासन

कराधान प्रणाली

  • भूमि कराधान निरंतर बढ़ाया जा रहा था |
  • व्यापार और वाणिज्य पर कराधान में कमी आई |
  • कराधान दर – उपज का ¼ से 1/6 भाग |
  • जब सेना किसी क्षेत्र से गुजरती तो वहां के स्थानीय लोगों को सेना को खाना खिलाना पड़ता था |
  • गुप्त काल में अन्य भी कई प्रकार के कर थे-
  • बलि: राजा को दिया जाने वाला कर  मौर्य युग में स्वैच्छिक था एवं गुप्त काल में इसे अनिवार्य बना दिया गया |
  • भाग: किसानों के सभी प्रकार के  उत्पादन में राजा का हिस्सा होता था | यह उत्पादन का 1/6 हिस्सा था

न्याय व्यवस्था

  • गुप्त काल की न्याय व्यवस्था पूर्व के अन्य शासकों की तुलना में अधिक विकसित थी |
  • कई कानून की पुस्तकें बनाई गई |
  • पहली बार आपराधिक और नागरिक कानूनों का सीमांकन किया गया |
  • आपराधिक कानून – चोरी और व्यभिचार
  • दीवानी कानून- विभिन्न प्रकार की संपत्ति के संबंध में विवाद

गुप्त काल का प्रांतीय और स्थानीय प्रशासन

  • साम्राज्य का विभाजन इस प्रकार था
  • प्रादेशिक इकाई  (भुक्ति) – जिला (विषय)-विथि-ग्राम
  • प्रशासनिक अधिकारीयों का क्रम
  • उपरिक (भुक्ति)-विषयपति (विषय के लिए ) |

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IAS UPSC Exam Preparation Study Material || Civil Services Examination

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Natural Vegetation

  • Vegetation refers to the plants which collectively found in a particular area or habitat.
  • Vegetation is broader term than flora, which means plant diversity of an area.
  • Natural vegetation refers to a plant community that has been left  undisturbed over a long time, so as to allow its individual species to adjust themselves to climate and soil conditions as fully as possible.
  • That is why, crops are not included in the natural vegetation.
  • Virgin vegetationUndisturbed by the human beings and it can be found in the area where human reach is not possible like Himalayan region and Sunderban delta region.
  • Endemic vegetation– The virgin vegetation which is only found in India
  • Exotic vegetation– the virgin vegetation which has come from outside of the India.
  • India is one of the twelve mega biodiversity countries of the world 47,000 plant species are found in India

Factors affecting Natural vegetation

1.Relief:

Land: Affects the natural vegetation directly and indirectly

  1. Fertile land –for agriculture
  2. Undulating and rough terrains — For grasslands and woodlands and give shelter to a variety of wildlife

Soil:

  1. sandy soils — support cactus and thorny bushes
  2. wet, marshy, deltaic soil –mangroves and deltaic vegetation

B. Climate

Temperature:

  • Temperature falls with Height and affects the type of vegetation and its growth, and changes it from tropical to subtropical temperate and alpine vegetation.

Photoperiod (Sunlight):

  • sunlight varies at different places due to differences in latitude, altitude, season and duration of the day.
  • Due to longer duration of sunlight, trees grow faster in sunlight

On the basis of certain common features such as predominant vegetation type and climatic regions.

Indian forests can be divided into the following groups:

  • Tropical forests
  • Montane forests
  • Alpine forest

प्राकृतिक वनस्पति

  • वनस्पति से हमारा अभिप्राय किसी क्षेत्र या स्थान पर उगाये जाने वाले पादपों से है |
  • वनस्पति फ़्लोरा (पादप) से बहुत व्यापक शब्द है जिसका अर्थ है किसी क्षेत्र विशेष की पादप विविधता |
  • प्राकृतिक वनस्पति से हमारा तात्पर्य  उस पादप समुदाय से है जो एक लम्बे काल खंड से एकांत में है, जिसके फलस्वरूप  ये पादप वहां पर उपलब्ध मृदा तथा जलवायु परिस्थिति के अनुसार स्वयं को हर सम्भव तरीके से विकसित कर सके |
  • यही कारण है कि, प्राकृतिक वनस्पति में फसल शामिल नहीं हैं |
  • स्थानिक वनस्पति – ऐसी अक्षत वनस्पति जो केवल भारत में पाई जाती है |
  • विदेशी वनस्पति -वे अक्षत वनस्पति जो भारत के बाहर से आई हों |
  • भारत विश्व का बाहरवां जैव विविधता वाला देश है यहाँ पर लगभग 47,000 पादप प्रजातियां पाई जाती हैं |

प्राकृतिक वनस्पति  को प्रभावित करने वाले कारक

A.उच्चावच :

  • भूमि : भूमि का वनस्पति पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव पड़ता है |

1). उपजाऊ भूमि पर प्राय: कृषि की जाती है |

2). ऊबड़ तथा असमतल भूभाग पर, जंगल तथा घास के मैदान हैं, जिन में वन्य प्राणियों को आश्रय मिलता है |

  • मृदा
  1. मरुस्थल की बलुई मृदा में कंटीली झाड़ियाँ पाई जाती है |
  2. नदियों के डेल्टा क्षेत्र में पर्णपाती वन पाए जाते हैं| पर्वतों की ढलानों में जहाँ मृदा की परत गहरी है शंकुधारी वन पाए जाते हैं|

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B.जलवायु

तापमान

तापमान  में गिरावट वनस्पति के पनपने और बढ़ने को प्रभावित करती है और उसे उष्ण कटिबंधीय से उपोष्ण, शीतोष्ण तथा अल्पाइन वनस्पति में परिवर्तित करती है|

सूर्य का प्रकाश:

  • किसी भी स्थान पर सूर्य के प्रकाश का समय, उस स्थान के अक्षांश, समुद्र तल से ऊँचाई एवं ऋतु पर निर्भर करता है
  • प्रकाश अधिक समय पर मिलने के कारण वृक्ष गर्मी की ऋतु में जल्दी बढ़ते हैं|

कुछ सामान्य विशेषताओं जैसे प्रमुख वनस्पति और जलवायु क्षेत्रों के आधार पर :

भारतीय वनों को निम्नलिखित समूहों में विभाजित किया जा सकता है:

  • उष्णकटिबंधीय वन
  • पर्वतीय वन
  • अल्पाइन वन

Tropical wet evergreen forest

  • The trees of these forests do not shed their leaves together.
  • The tropical rain forest appears like a thick canopy of foliage, broken only where it is crossed by large rivers or cleared for cultivation.
  • The sunlight cannot reach the ground due to thick canopy.
  • The undergrowth is formed mainly of bamboos, ferns, climbers, orchids, etc.

Climatic conditions:

  • Annual rainfall exceeds 250 cm
  • The annual temperature=25°-27°C

Distribution

  • Western side of the Western Ghats Some regions in the Purvanchal hills.
  • In the Andaman and Nicobar Islands.

Timber

  • Hardwood: The timber of these forests is fine-grained, hard and durable.
  • It has high commercial value but it is highly challenging to exploit due to dense undergrowth, absence of pure stands and lack of transport facilities ·        
  • The important species of these forests are rosewood, mahogany, aini, ebony, etc.

Tropical semi evergreen forest

  • Transitional forests between tropical wet evergreen forests and tropical deciduous forests.
  • Comparatively drier areas than tropical wet evergreen forests.

Climatic Conditions

  • Annual rainfall is 200-250 cm
  • The dry season is not short like in tropical wet evergreen forests.

Distribution

Western coast, Assam, Lower slopes of the Eastern Himalayas, Odisha and      Andamans.

Tropical moist deciduous

  • Also called the monsoon forests

Climatic Conditions

  • Annual rainfall 100 to 200 cm.
  • Mean annual temperature=27°C

Characteristics

  • The trees drop their leaves during the spring and early summer when sufficient moisture is not available.
  • The general appearance is bare in extreme summers (April-May).
  • These forests occupy a much larger area than the evergreen forests but large tracts under these forests have been cleared for cultivation.

उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार वन

  • इन जंगलों के  पेड़ अपने पत्तों को एक साथ नहीं गिराते है |
  • उष्णकटिबंधीय वर्षा वन पतियों की एक मोटी कैनोपी की तरह दीखते है ये केवल उन्ही जगहों पर काटे जाते है जहाँ पर कोई नदी हो अथवा कृषि प्रयोजन के लिए साफ किया गया हो   |
  • मोटी कैनोपी के कारण सूर्य का प्रकाश  मैदान तक नहीं पहुँच पाता है
  • झाड़-झंखाड़ मुख्यतः  बांस, फ़र्न, बेल,विचित्र फूलों द्वारा निर्मित होता है|

जलवायु की परिस्थितियाँ:

  • वार्षिक वर्षा = 250 सेमी से अधिक
  • वार्षिक तापमान = 25 डिग्री -27 डिग्री सेल्सियस

वितरण

  • पश्चिमी घाट के पश्चिमी हिस्सों  तथा पूर्वांचल पहाड़ियों में कुछ क्षेत्रों पाये जाते है |
  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में |

लकड़ी

  • दृढ़ लकड़ी: इन जंगलों की लकड़ी उत्कृष्ट, दृढ़ और टिकाऊ है|
  • इसका  वाणिज्यिक मूल्य उच्च है, लेकिन घने वृक्षों की वजह से इनका उपयोग न हो पाना, एकल प्रकार के वृक्षों की अनुपस्थिति तथा परिवहन सुविधाओं का अभाव भी बेहद चुनौतीपूर्ण है |
  • इन वनों  की महत्वपूर्ण प्रजातियां शीशम(रोजवुड), महोगनी,एनी आबनूस आदि हैं।

उष्णकटिबंधीय अर्ध सदाबहार वन

  • ये वन उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार से उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वनों में परिवर्तित होते रहते है |
  • उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार वनों की तुलना इनका शुष्क क्षेत्र अधिक होता है |

जलवायु की परिस्थितियाँ

  • वार्षिक वर्षा 200-250 सेमी है |
  • उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार वनों की भांति यहाँ का ग्रीष्म काल खंड छोटा नहीं होता है |

वितरण

ये पश्चिमी तट, असम, पूर्वी हिमालय की निम्न ढ़लाने ,ओडिशा और अंडमान में फैले हुए है |

उष्ण कटिबंधीय आर्द्र  पर्णपाती वन

  • इन्हे वर्षा वन भी कहा जाता है |

जलवायु परिस्थितियां

  • वार्षिक वर्षा 100 से 200 सेमी
  • औसत वार्षिक तापमान = 27 डिग्री सेल्सियस

विशेषताएँ

  • इनके वृक्ष वसंत तथा शुरूआती ग्रीष्म ऋतु के दौरान पत्ते गिराते है इस समय पर्याप्त आर्द्रता नहीं होती है |
  • अत्यधिक गर्मी (अप्रैल-मई) में ये समान्यतः खाली होते है |
  • ये वन सदाबहार वनों से अत्यधिक क्षेत्र आच्छादित करते है परन्तु कृषि के लिए  सदाबहार वनों की तुलना में इनका क्षेत्र ज्यादा साफ़ किया जाता है |

Tropical dry evergreen

Distribution

  • Along the coasts of Tamil Nadu.

Climatic Conditions

  • Annual rainfall of 100 cm(mostly from the north-east monsoon winds in October-December)
  • Mean annual temperature = 28°C.
  • The growth of evergreen forests in areas of such low rainfall is a bit strange

Characteristics

  • Short statured trees, up to 12 m high, with complete canopy.
  • The important species are jamun, tamarind, neem, etc.

Tropical dry deciduous

Climatic Conditions

  • Annual rainfall is 70-100 cm.

Characteristics

  • Similar to tropical moist deciduous forests and shed their leaves in dry season with the only difference that they can grow in areas of comparatively less rainfall.
  • They represent a transitional type – moist deciduous on the wetter side and thorn forests on the drier side.
  • The forests are composed of a mixture of a few species of deciduous trees rising up to a height of 20 metres.

Tropical thorn forest

Climatic Conditions

  • Annual rainfall less than 50 cm.
  • Mean temperature is 25°-30°C.

Characteristics

  • The trees are low (6-10 metres maximum) and widely scattered.
  • consist of a variety of grasses and shrubs.
  • scrub vegetation found here.
  • Important species found are babool, ber, and wild date palm, khair, neem, khejri, palas, etc.

Distribution

Semi-arid areas of south west Punjab,Haryana, Rajasthan, Gujarat, Madhya Pradesh and Uttar Pradesh

उष्णकटिबंधीय शुष्क सदाबहार वन

वितरण :

  • ये तमिलनाडु के तटीय इलाकों में पाए जाते है |

जलवायु की परिस्थितियाँ

  • 100 सेमी की वार्षिक वर्षा (ज्यादातर अक्टूबर-दिसंबर में उत्तर-पूर्व मानसून हवाओं द्वारा)
  • औसत वार्षिक तापमान = 28 डिग्री सेल्सियस
  • ऐसे कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सदाबहार वनों का विकसित होना आश्चर्यजनक है |

लक्षण

  • कम ऊंचाई वाले वृक्ष, 12 मीटर तक की ऊंचाई,इनकी केनोपी पूरी होती है |
  • महत्वपूर्ण प्रजातियां जामुन, इमली, नीम आदि हैं।

उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती

जलवायु परिस्थितियाँ

  • वार्षिक वर्षा-स्तर 70-100 सेमी है |

लक्षण

  • ये उष्णकटिबंधीय आद्र पर्णपाती वनो के समान होते है,एवं ये अपने पत्ते शुष्क मौसम में गिराते है केवल अंतर इतना है की ये अपेक्षाकृत कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी उग सकते है |
  • ये समय के साथ अपना रूप बदलते है,आर्द्र मौसम अवस्था में आर्द्र पर्णपाती तथा शुष्क मौसम में ये कंटीले वन होते है |
  • इन वनों में  पर्णपाती वनो की कुछ प्रजातियां पाई जाती है जिनकी ऊंचाई  20 मीटर तक भी होती है |

उष्ण कटिबंधीय कंटीले वन

जलवायु परिस्थिति

  • वार्षिक वर्षा-स्तर  50 सेमी से कम |
  • औसत तापमान 25 ° -30 डिग्री सेल्सियस |

लक्षण :

  • वृक्ष संख्या में कम होते है एवं छितरे हुए होते है
  • इसमें घास तथा झाड़ियों की विभिन्न किस्मे पाई जाती है |
  • यहाँ पर झाड़ीदार वनस्पतियां पाई जाती है |
  • यहाँ पाई जाने वाली  महत्वपूर्ण प्रजातियां बबूल,बेर,जंगली खजूर,खैर,नीम ,खेजरी,पलाश आदि |

वितरण

दक्षिण पश्चिम पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अर्ध शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती है |

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HCS RAS Exam Geography Study Material || IAS UPSC Online Preparation

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Agriculture

Major food crops in India

  • Foodgrains are dominant crops and occupy about two-third of total cropped area in India.
  • On the basis of the structure of grain, the foodgrains are classified as cereals and pulses.

Cereals:

  • Occupy about 54 per cent of total cropped area in India.
  • India produces about 11 per cent cereals of the world and ranks third in production after China and U.S.A.
  • Classified as fine grains (rice, wheat) and coarse grains (jowar, bajra, maize, ragi), etc.

Cereals: Rice

  • Rice is the major food crop of the world.
  • It is the staple diet of the tropical and sub-tropical regions.
  • India is the second largest producer of rice in the world after China.
  • it is a preferred staple food in Southern and North-Eastern India.
  • It has about 3,000 varieties which are grown in different agro-climatic regions.

Crop Season

  • Kharif crop
  • Grown only in well irrigated areas in rabi season.
  • Most of the rice growing regions lie barren during summer (April-May).
  • It can be grown as summer crop in deltaic regions where water and irrigation is available through the year. ( Deltaic regions of West Bengal, Krishna-Godavari delta etc.)
  • In West Bengal farmers grow three crops of rice called ‘aus’, ‘aman’ and ‘boro’.

Climatic Conditions for Growth

  • Height needed: 0 to 2,500 meters above sea level.
  • Temp: above 25°C and high humidity
  • The fields must be flooded under 10-12 cm deep water at the time of sowing.
  • Average annual rainfall > 100 cm

Soil condition for growth:

  • Loamy soils E.g. Delta regions, Punjab, Haryana and North Indian plains.
  • Clayey soils E.g. Coastal plains of south India, irrigated regions of Karnataka, Telangana etc.

Cereals: Wheat

  • Second most important cereal crop in India after rice.
  • Rich source of calcium, thiamine, riboflavin and iron.
  • Preferred staple food in northern and north-western parts of the country.

Climatic Conditions for Growth

  • Temperate crop which requires a cool climate with moderate rainfall.
  • Can be grown in tropics as well (yields are low).
  • Rabi crop
  • Rainfall : 50cm-75 cm
  • Light drizzles and cloudiness at the time of ripening increases the yield.

Soil condition for growth

  • Well drained fertile, mostly alluvial and clay loams are the best for wheat cultivation.
  • It also grows well in the black soil of the Deccan plateau.
  • Being a rabi crop, it is mostly grown under irrigated conditions.
  • But it is a rainfed crop in Himalayan highlands and parts of Malwa plateau in Madhya Pradesh.

HCS RAS Exam Geography Study Material

भारत की मुख्य खाद्य फसलें

  • अनाज एक प्रमुख फसल है तथा भारत के कुल क्षेत्रफल के दो-तिहाई भाग पर उपलब्ध है |
  • दानों की सरंचना के आधार पर अनाज को खद्यान्न तथा दाल के रूप में विभाजित किया जा सकता है |

खद्यान्न :

  • यह भारत के कुल फसली क्षेत्र के लगभग 54 प्रतिशत भाग उपलब्ध है |
  • भारत दुनिया के 11 प्रतिशत अनाज का उत्पादन करता है और चीन और अमेरिका के  बाद उत्पादन में इसका तीसरा स्थान है।
  • इन्हे महीन अनाज (चावल, गेहूं)  और मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा, मक्का, रागी) आदि के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है |

खाद्यान्न : चावल

  • चावल दुनिया की प्रमुख खाद्य फसल है |
  • यह उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों का मुख्य आहार है।
  • भारत चीन के बाद दुनिया में चावल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
  • यह दक्षिण और उत्तर-पूर्वी भारत में मुख्य आहार के रूप में प्रयोग किया जाता है |
  • इसकी लगभग 3,000 किस्में हैं जो कि विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में उगाई जाती हैं।

फसली ऋतुएँ

  • खरीफ की फसल
  • यह रबी के मौसम में पर्याप्त सिंचाई वाले क्षेत्रों में उगाया जाता है |
  • अधिकाँश चावल उगाने वाले क्षेत्र गर्मी के मौसम (अप्रैल-मई )में बंजर रहते है |
  • डेल्टाई क्षेत्रों में यह ग्रीष्म ऋतु की फसल के रूप में उगाई जाती है क्यूंकि यहाँ पर जल एवं सिंचाई पुरे वर्ष उपलब्ध रहता है | (पश्चिम बंगाल के डेल्टाइ क्षेत्र, कृष्णा-गोदावरी डेल्टा आदि)
  • पश्चिम बंगाल के किसान तीन प्रकार के चावल उगाते है ये हैं – ओस,अमन,बोरो

उपज के लिए जलवायु की स्थिति

  • आवश्यक ऊँचाई : समुद्र तल से 0 से 2,500 मीटर ऊपर।
  • तापमान : 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक और उच्च आर्द्रता
  • बुवाई के समय खेतों में 10-12 सेमी गहरे पानी की आवश्यकता होती है |
  • औसत वार्षिक वर्षा 100 सेमी से अधिक होनी चाहिए  

उपज के लिए मृदा की स्थिति

  • चिकनी मिटटी : डेल्टा क्षेत्र जैसे पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारतीय मैदान |
  • मृत्तिकामय मिट्टी : दक्षिण भारत के तटीय मैदान,कर्नाटक, तेलंगाना आदि के पर्याप्त सिंचाई वाले क्षेत्र |

खाद्यान्न : गेहूं

  • चावल के बाद यह भारत की  दूसरी सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल है |
  • कैल्शियम, थाइमिन (विटामिन B1 ) रिबोफ्लेविन तथा आयरन का समृद्ध स्रोत है |
  • यह देश के उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी भागों में मुख्य आहार के रूप में उपयोग किया जाता है |

उपज के लिए जलवायु की स्थिति

  • यह शीतोष्ण कटिबंधीय  फसल है इसे  मध्यम वर्षा के साथ एक शांत जलवायु की आवश्यकता होती है।
  • ये उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भी उगाये जा सकते है |
  • रबी की फसल
  • आवश्यक वर्षा स्तर : 50 सेमी – 75 सेमी

उपज के लिए मृदा की स्थिति

  • सुगम जल निकासी वाली मृदा, अधिकांशतः जलोढ़ तथा दुमट मिटटी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त है |
  • यह  दक्कन पठार की काली मिट्टी में अच्छी तरह वृद्धि करती है |
  • एक रबी फसल होने के कारण, इसे उपयुक्त सिंचाई की स्थिति में उगाया जाता है |
  • परन्तु हिमालय के उच्च क्षेत्रों मालवा पठार के कुछ हिस्सों में यह वर्षा निर्भर फसल है |

Cereals: Jowar

  • The coarse cereals together occupy about 16.5 per cent of total cropped area in the country.
  • Among these, jowar or sorghum alone accounts for about 5.3 per cent of total cropped area.
  • Rainfed crop of dry farming areas.
  • Grown both as kharif as well as a rabi crop in southern states while as kharif crop in northern states.
  • Does not grow where rainfall >100 cm.
  • Best Soils: Clayey deep regur and alluvium

Cereals: Bajra

  • Bajra is the second most important millet.
  • It occupies about 5.2 per cent of total cropped area in the country.
  • Like jowar, it is also used as food and fodder in drier parts of the country.
  • It is a rainfed kharif crop of dry and warm climate.
  • Annual rainfall: 40-50 cm
  • Best soil:Bajra can be grown on poor light sandy soils, black and red soils.
  • It is sown either as a pure or mixed crop with cotton, jowar and ragi.

Pulses

  • Pulses are  rich sources of proteins.
  • These are legume crops which increase the natural fertility of soils through nitrogen fixation.
  • India accounts for about one-fifth of the total production of pulses in the world.
  • Pulses occupy about 11 per cent of the total cropped area in the country.
  • Main Cultivation areas: drylands of Deccan , central plateaus and northwestern parts of the country.
  • Gram and tur are the main pulses cultivated in India.


Pulses: Gram

  • Gram is the most important of all the pulses.
  • Temperature:20°-25°C
  • Rainfall: 40-50 cm
  • It is a rabi crop.
  • Best Soil: loamy soils.
  • It is cultivated as pure or mixed with wheat, barley, linseed or mustard.
  • Gram is cultivated in subtropical areas.
  • Occupies only about 2.8 per cent of the total cropped area in the country.
  • Leading producers: Madhya Pradesh, Uttar Pradesh, Maharashtra, Andhra Pradesh, Telangana and Rajasthan.

Pulses: Tur

  • Tur is the second most important pulse.
  • It is also known as red gram or pigeon pea
  • Chiefly grown as a kharif crop.
  • In areas of mild winters it is grown as a rabi crop.

खाद्यान्न : ज्वार

  • मोटा अनाज देश के  कुल फसली क्षेत्र के लगभग 16.5 प्रतिशत पर  भाग पर पाया जाता है
  • इनमें से, ज्वार या सोरगम अकेले ही कुल फसली क्षेत्र के  5.3 प्रतिशत भाग पर पाई जाती है |
  • यह शुष्क फसली क्षेत्रों में वर्षा आधारित फसल है |
  • यह दक्षिण भारत में खरीफ तथा रबी दोनों रूपों में उगाई जाती है परन्तु उत्तरी राज्यों में खरीफ फसल के रूप में उगाई जाती है |
  • यह 100 सेमी से अधिक वर्षा-स्तर वाले क्षेत्रों में नहीं उगाई जाती है |
  • उपयुक्त मृदा : मृतिकामय गहरी रेगड़ मिटटी तथा जलोढ़ मृदा

खाद्यान्न : बाजरा

  • बाजरा दूसरी सबसे महत्वपूर्ण ज्वारीय फसल है
  • यह देश में कुल फसली क्षेत्र के  लगभग 5.2 प्रतिशत भाग पर उपलब्ध है |
  • ज्वार की तरह यह भी देश के शुष्क इलाकों में खाद्य तथा चारा फसल के रूप में उपयोग की जाती है  |
  • यह शुष्क और गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में वर्षा निर्भर फसल है |
  • वार्षिक वर्षा-स्तर : 40-50 सेमी
  • उपयुक्त मृदा : बाजरा हल्की रेतीली मिट्टी,काली तथा लाल मृदा पर उगाई जा सकती है |
  • इसे कपास,ज्वार,और रागी के साथ मिश्रित फसल अथवा एकल फसल के रूप में भी बोया जाता है |

दलहन

  • दलहन प्रोटीन के समृद्ध स्रोत हैं |
  • ये फलीदार फसलें है,जो  नाइट्रोजन स्थिरीकरण के माध्यम से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता को बढ़ाती हैं।
  • विश्व में दलहन के कुल उत्पादन का लगभग पांचवां भाग भारत द्वारा उत्पादित किया जाता है |
  • दलहन देश के कुल फसली क्षेत्र के 11 प्रतिशत भाग पर उपलब्ध है |
  • प्रमुख फसली क्षेत्र : यह दक्क्न ,मध्य पठार तथा  उत्तर-पश्चिम भागों के शुष्क क्षेत्रों में बोयी जाती है |
  • चना और अरहर भारत में मुख्य रूप से उगाई जाने वाली दालें है |

दलहन: चना

  • चना अन्य सभी दलहनों में प्रमुख स्थान रखता है
  • तापमान: 20 डिग्री -25 डिग्री सेल्सियस
  • वर्षा-स्तर : 40-50 सेमी
  • यह एक रबी फसल है |
  • उपयुक्त मिट्टी : दोमट मिट्टी
  • यह एकल अथवा गेहूं, जौ, अलसी या सरसों के साथ मिश्रित फसल के रूप में भी उगाया जाता है
  • उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में  चने की खेती की जाती है।
  • यह देश के कुल फसली क्षेत्र के केवल 2.8 प्रतिशत भाग उपलब्ध है।
  • प्रमुख उत्पादक: मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और राजस्थान।

दलहन: अरहर

  • अरहर दूसरा सबसे महत्वपूर्ण दलहन है |
  • इसे लाल चना अथवा तुवर भी कहते है |
  • इसे मुख्यतः खरीफ फसल के रूप में उगाया जाता है।
  • मध्यम सर्द इलाकों में यह रबी  की फसल के रूप में उगाई जाती है |

Oilseeds

  • The oilseeds are produced for extracting edible oils.
  • Oilseed producing region in India: Drylands of Malwa plateau, Marathwada, Gujarat, Rajasthan, Telangana and Karnataka plateau.
  • These crops together occupy about 14 per cent of total cropped area in the country.
  • Groundnut, rapeseed and mustard, soybean and sunflower are the main oilseed crops grown in India.

Oilseeds: Groundnut

  • Groundnut accounts for nearly half of the major oilseeds produced in India.
  • It covers about 3.6 per cent of total cropped area in the country.
  • It contains 40-50% oil which is used as edible oil .
  • It is largely a rainfed kharif crop of drylands but in southern India, it is cultivated during rabi season as well.
  • Leading producers: Gujarat, Tamil Nadu, Telangana, Andhra Pradesh, Karnataka and Maharashtra
  • Gujarat is the highest producer of groundnut.

Oilseeds: Rapeseed and Mustard

  • Rapeseed and mustard comprise several oilseeds as rai, sarson, toria and taramira.
  • Subtropical crops cultivated during rabi season in north-western and central parts of India.
  • Frost sensitive crops

तिलहन

  • तिलहनों को खाद्य तेल  निकालने के लिए उगाया जाता है |
  • भारत में तिलहन की पैदावर करने वाले क्षेत्र :मालवा पठार, मराठवाड़ा, गुजरात, राजस्थान, तेलंगाना और कर्नाटक के पठारों के शुष्क क्षेत्र में पैदा होती है |
  • ये फसलें देश के कुल फसली क्षेत्र के लगभग 14 प्रतिशत  भाग पर उपलब्ध है |
  • मूंगफली ,कैनोला तथा सरसों ,सोयाबीन तथा सूरजमुखी मुख्य तिलहन फसलें है जो भारत में उगाई जाती है |

तिलहन :मूंगफली

  • भारत में पैदा होने वालो लगभग आधे से ज्यादा तिलहनों में मूंगफली का प्रमुख स्थान है |
  • यह देश के  कुल फसली क्षेत्र के  लगभग 3.6 प्रतिशत भाग पर उपलब्ध है |
  • इसमें 40-50% तेल है जो खाद्य तेल के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • यह शुष्क क्षेत्रों की प्रमुख खरीफ फसल है परन्तु दक्षिण भारत में यह रबी के मौसम में भी उगाई जाती है |
  • प्रमुख उत्पादक: गुजरात, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र
  • गुजरात मूंगफली का सबसे बड़ा उत्पादक है

तिलहन: कैनोला तथा सरसों

  • कैनोला तथा सरसों में बहुत सारे तिलहन है जैसे राई,सरसों,तूर्य और तारामिरा  |
  • उत्तर-पश्चिमी और भारत के मध्य भाग में रबी मौसम के दौरान उप-उष्णकटिबंधीय फसलों की खेती की जाती है।
  • यह पाला संवेदनशील फसल है |

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Ecology Organizations Study Material | UPSC IAS (Prelims+Mains) Exam

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ORGANIZATIONS

THE ANIMAL WELFARE BOARD OF INDIA

  • The Animal Welfare Board of India is a statutory advisory body on Animal Welfare Laws and promotes animal welfare in the country.
  • The Animal Welfare Board of India, the first of its kind to be established by any Government in the world, was set up in 1962, in accordance with Section 4 of the Prevention of Cruelty to Animals Acts 1960.
  • Shrimati Rukmini Devi Arundale pioneered the setting up of the Board, with its Headquaters at Chennai. She guided the activities of the Board for nearly twenty years till her demise in 1986

Functions

  • To keep the law in force in India for the Prevention of Cruelty to animals under constant study and to advise the government on the amendments to be undertaken in any such law from time to time.
  • To advise the Central Government on the making of rules under the Act with a view to preventing unnecessary pain or suffering to animals generally, and more particularly when they are being transported from one place to another or when they are used as performing animals or when they are kept in captivity or confinement.
  • To advise the Government or any local authority or other person on improvements in the design of vehicles so as to lessen the burden on draught animals.
  • To take all such steps as the Board may think fit for amelioration of animals by encouraging, or providing for the construction of sheds, water troughs and the like and by providing for veterinary assistance to animals.
  • To advise the Government or any local authority or other person in the design of slaughter houses or the maintenance of Slaughter houses or in connection with slaughter of animals so that unnecessary Pain or suffering, whether physical or mental, is eliminated in the pre-slaughter stages as far as possible, and animals are killed, wherever necessary, is as humane a manner as possible.

CENTRAL ZOO AUTHORITY

The amendment made to the Wild Life (Protection) Act in 1991 added a new chapter dealing with zoos to the Act and allowed for the Central Government to constitute an authority known as the Central Zoo Authority to oversee the functioning and development of zoos in the country. According to the provisions of this chapter, only such zoos which were operated in accordance with the norms and standards prescribed by the Central Zoo Authority would be granted ‘recognition’ to operate by the Authority.

Functions

The following are the functions of the Central Zoo Authority as specified in the Act:

  • To specify the minimum standards for housing, upkeep and veterinary care of animals kept in a zoo.
  • To evaluate and assess the functioning of zoos with respect to the standards or the norms as are prescribed
  • To recognize and derecognize zoos
  • To identify endangered species of wild animals for purposes of captive breeding and assigning responsibility in this regard to a zoo.
  • To co-ordinate the acquisition, exchange and loaning of animals for breeding purposes

Powers

  • Recognition of zoos
  • Permission for acquisition of wild/captive animals
  • Cognizance of offences
  • Grant of licences, certificate of ownership, recognition, etc

THE NATIONAL BIODIVERSITY AUTHORITY (NBA) – CHENNAI.

  • The National Biodiversity Authority (NBA) was established in 2003 to implement India’s Biological Diversity Act (2002)
  • The NBA is a Statutory, Autonomous Body and it performs facilitative, regulatory and advisory function for the Government of India on issues of conservation, sustainable use of biological resources and fair and equitable sharing of benefits arising out of the use of biological resources.

संगठन

भारतीय पशु कल्याण बोर्ड

  • भारतीय पशु कल्याण बोर्ड पशु कल्याण कानूनों के निर्माण के लिए एक परामर्शदात्री वैधानिक निकाय है तथा यह देश में पशु कल्याण को बढ़ावा देता है |
  • भारतीय पशु कल्याण बोर्ड, दुनिया में किसी भी सरकार द्वारा स्थापित अपनी तरह का पहला बोर्ड है, जिसकी स्थापना वर्ष 1962 में पशु हिंसा रोकथाम अधिनियम 1960 के अनुच्छेद 4 के अनुसार की गयी थी |
  • श्रीमती रुक्मिणी देवी अरुंडेल ने इस बोर्ड की स्थापना का बीड़ा उठाया जिसका मुख्यालय चेन्नई में है | उन्होंने वर्ष 1986 में अपनी मृत्यु से पूर्व लगभग 20 वर्षों तक बोर्ड की गतिविधियों को निर्देशित किया |

Ecology Organizations Study Material

कार्य

  • निरंतर अध्ययन के तहत भारत में पशुओं के खिलाफ हिंसा रोकने वाले प्रवृत्त कानूनों से अद्यतन रहना एवं समय-समय पर इनमें संशोधन करने का सरकार को सुझाव देना |
  • आम तौर पर पशुओं की अनावश्यक पीड़ा या परेशानी रोकने के उद्देश्य से इस अधिनियम के तहत केंद्र सरकार को नियम बनाने का सुझाव देना, तथा विशेष रूप से तब जब उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा रहा है या जब उनका प्रयोग अभिनय करने वाले पशुओं के तौर पर कुया जा रहा है अथवा जब उन्हें कैद या बंधन में रखा जाता है |
  • भार ढोने वाले पशुओं के बोझ को कम करने के लिए सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण या अन्य व्यक्ति को वाहनों की डिजाईन में सुधार करने के लिए सलाह देना |
  • छप्परों, जल के नाँद, तथा ऐसी अन्य चीज़ों के निर्माण को प्रोत्साहित करके अथवा इनकी व्यवस्था करके तथा पशुओं के लिए पशुचिकित्सा सहायता की व्यवस्था करके, ऐसे अन्य सभी कदम उठाना जिन्हें पशुओं के सुधार के लिए बोर्ड उपयुक्त मानता है |
  • सरकार अथवा किसी भी स्थानीय प्राधिकरण या अन्य व्यक्ति को बूचड़खानों की बनावट , अथवा बूचड़खानों के रख-रखाव या पशुवध के संबंध में सलाह देना ताकि जहां तक संभव हो मानसिक अथवा शारीरिक अनावश्यक दर्द या पीड़ा को पशुवध के पूर्व के चरण में ही दूर कर दिया जाए, तथा जहां कहीं भी पशुवध अनिवार्य हो, वहां पशुओं का वध जितना संभव हो उतना मानवीय तरीके से किया जाए |

केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण

वर्ष 1991 में वन्यजीव (संरक्षण ) अधिनियम में किये गए संशोधन ने इस अधिनियम में एक नया खंड जोड़ा जिसका संबंध चिड़ियाघरों से था तथा केंद्र सरकार को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण नामक देश में चिड़ियाघरों की देखभाल करने वाले एक प्राधिकरण के गठन के लिए अधिकृत किया | इस खंड के प्रावधानों के अनुसार केवल वैसे चिड़ियाघरों को ही प्राधिकरण द्वारा संचालन की मान्यता प्रदान की जायेगी जिनका संचालन केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानकों तथा मापदंडों के अनुसार किया जाता है |

कार्य

जैसा कि इस अधिनियम में निर्दिष्ट किया गया है, इसके अनुसार केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के निम्नलिखित कार्य हैं :

  • चिड़ियाघर में रखे जाने वाले जीवों के आवास, रख-रखाव तथा पशुचिकित्सा संबंधी देखभाल के लिए न्यूनतम मानकों को निर्दिष्ट करना |
  • निर्धारित मानकों अथवा मापदण्डो  के संबंध में चिड़ियाघरों के कार्यों का मूल्यांकन एवं आकलन करना |
  • चिड़ियाघरों को मान्यता प्रदान करना तथा उनकी मान्यता समाप्त करना |
  • बंदी प्रजनन के लिए वन्यजीवों की संकटग्रस्त प्रजातियों की पहचान करना तथा चिड़ियाघर को इस संबंध में ज़िम्मेदारी सौंपना |
  • प्रजनन संबंधी उद्देश्यों के लिए पशुओं के अभिग्रहण, आदान-प्रदान तथा कुछ समय के लिए उधार लेने की प्रक्रिया का समन्वय करना |   

शक्तियां :

  • चिड़ियाघरों को मान्यता |
  • जंगली/ बंदी पशुओं के अधिग्रहण हेतु अनुमति |
  • अपराधों पर संज्ञान |
  • लाइसेंस, स्वामित्व का प्रमाणपत्र, मान्यता आदि प्रदान करना |

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण – चेन्नई

  • राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की स्थापना वर्ष 2003 में भारत के जैविक विविधता अधिनियम (2002 ) को कार्यान्वित करने के लिए की गयी थी|
  • राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण एक वैधानिक, स्वायत्त निकाय है तथा यह भारत सरकार के लिए जैविक संसाधनों के संरक्षण तथा सतत् प्रयोग एवं जैविक संसाधनों के प्रयोग से होने वाले लाभों के  निष्पक्ष तथा न्यायसंगत वितरण के मुद्दों पर सुविधाजनक, नियामक तथा परामर्शदात्री कार्य करता है |

The State Biodiversity Boards (SBBs)

  • The State Biodiversity Boards focus on advising the State Governments on matters relating to the conservation of biodiversity, sustainable use of its components and equitable sharing of the benefits arising out of the utilization of biological resources;
  • The SSBs also regulate, by granting of approvals or otherwise requests for commercial utilization or biosurvey and bio-utilization of any biological resource by Indians.
  • The local level Biodiversity Management Committees (BMCs)

WILDLIFE CRIME CONTROL BUREAU (WCCB)

  • The Government of India constituted a statutory body, the Wildlife Crime Control Bureau on 6th June 2007, by amending the Wildlife (Protection) Act, 1972. The bureau would complement the efforts of the state governments, primary enforcers of the Wildlife (Protection) Act, 1972 and other enforcement agencies of the country.

Functions

  • Collection, collation of intelligence and its dissemination ans establishment of a centralized Wildlife Crime data bank;
  • Co-ordination of actions by various enforcement authorities towards the implementation of the provisions of this Act
  • Implementation of obligations under the various international Conventions and protocols
  • Assistance to concerned authorities in foreign countries and concerned international organizations to facilitate co-ordination and universal action for wildlife crime control;
  • Development of infrastructure and capacity building for scientific and professional investigation;

NATIONAL LAKE CONSERVATION PLAN (NLCP)

  • Ministry of Environment and Forests has been implementing the National Lake Conservation Plan (NLCP) since 2001 for conservation and management of polluted and degraded lakes in urban and semi-urban areas

Objective

  • To restore and conserve the urban and semi-urban lakes of the country degraded due to waste water discharge into the lake and other unique freshwater eco systems, through an integrated ecosystem approach.

Activities Covered Under NLCP

  • Prevention of pollution from point sources by intercepting, diverting and treating the pollution loads entering the lake. The interception and diversion works may include sewerage & sewage treatment for the entire lake catchment area.

(i) In situ measures of lake cleaning such as de-silting, de-weeding, bioremediation, aeration, bio-manipulation, nutrient reduction, withdrawl of anoxic hypolimnion, constructed wetland approach or any other successfully tested eco-technologies etc depending upon the site conditions.

(ii) Catchment area treatment which may include afforestation, storm water drainage, silt traps etc.

(iii) Strengthening of bund, lake fencing, shoreline development etc.

राज्य जैव विविधता बोर्ड –

  • राज्य जैव विविधता बोर्ड जैव विविधता के संरक्षण, इसके अवयवों के सतत् प्रयोग, तथा जैविक संसाधनों के प्रयोग से प्राप्त होने वाले लाभों के न्यायोचित साझाकरण से संबंधित मामलों पर राज्य सरकारों को परामर्श देने पर ध्यान केंद्रित करता है |
  • राज्य जैव विविधता बोर्ड वाणिज्यिक उपयोग या जैव सर्वेक्षण और भारतीयों द्वारा किसी जैव विविधता संसाधन के उपयोग के लिए अनुमोदन या अन्यथा अनुरोध मंजूर करके, विनियमित भी करता है |  
  • स्थानीय स्तर की जैव विविधता प्रबंधन समितियां|

वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो

  • भारत सरकार ने 6 जून 2007 को वन्यजीव (संरक्षण ) अधिनियम, 1972 में संशोधन करके एक वैधानिक निकाय, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो का गठन किया | यह ब्यूरो राज्य सरकारों, वन्यजीव (संरक्षण ) अधिनियम, 1972 की बाध्यकारी तथा देश की अन्य क्रियान्वयन एजेंसियों के प्रयासों में इजाफा करेगा |

कार्य :

  • सूचना का संग्रहण, परितुलन एवं इसका प्रसार तथा एक केंद्रीकृत वन्यजीव अपराध डाटा बैंक की स्थापना ;
  • इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के संबंध में विभिन्न प्रवर्तन प्राधिकरणों द्वारा किये गए कार्यों का समन्वय |
  • विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों तथा प्रोटोकॉल के अंतर्गत ली गयी प्रतिज्ञाओं का क्रियान्वयन |
  • विदेशों में संबंधित एजेंसियों तथा संबंधित अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को सहायता प्रदान करना ताकि वन्यजीव अपराध नियंत्रण के लिए समन्वय एवं सार्वभौमिक कार्यवाही को सुगम बनाया जा सके |
  • वैज्ञानिक एवं पेशेवर अनुसंधान के लिए आधारिक संरचना तथा क्षमता निर्माण का विकास करना  |

राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना

  • वन एवं पर्यावरण मंत्रालय वर्ष 2001 से शहरी तथा अर्ध शहरी क्षेत्रों में प्रदूषित तथा निम्नीकृत झीलों के प्रबंधन तथा संरक्षण के लिए राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना का कार्यान्वयन कर रहा है |

उद्देश्य :

  • एक एकीकृत पारितंत्र दृष्टिकोण के माध्यम से देश की शहरी तथा अर्ध शहरी झीलों का संरक्षण तथा उनका पुनरुद्धार करना, जो झीलों तथा अन्य अनन्य अलवणीय जलीय पारितंत्रों में अपशिष्ट जल छोड़ने के कारण अवक्रमित हो चुकी हैं |

राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना में शामिल गतिविधियां :

  • झीलों में प्रवेश करने वाले प्रदूषण भार को उपचारित कर, मोड़ कर, अथवा रोक कर बिंदु स्रोतों से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाना | अवरोधन तथा परिवर्तन कार्यों में झील के समूचे जलग्रह क्षेत्र के लिए मलजल का उपचार शामिल हो सकता है |

(i) झील सफाई के स्व-स्थाने उपाय जैसे कि विगादन, डी-वीडिंग, जैव उपचार,  वातन, बायो-मैनीपुलेशन, पोषक तत्वों में कमी, झील के तली के जल का निष्कासन जिसमें ऑक्सीजन की कम मात्रा होती है, निर्मित आर्द्र्भूमि दृष्टिकोण, अथवा स्थल की परिस्थितियों के अनुसार कोई अन्य सफलतापूर्वक परीक्षित  पर्यावरण प्रौद्योगिकी |

(ii ) जलग्रह क्षेत्र का उपचार, जिसमें वनीकरण, तूफ़ान जल निकासी, गाद जाल आदि शामिल हो सकते हैं |

(iii ) बाँध को मजबूत बनाना, झील पर बाड़ लगाना, तटरेखा विकास आदि |

NATIONAL GANGA RIVER BASIN AUTHORITY (NGRBA)

  • NGRBA was constituted on February 2009 under the Environment (Protection) Act, 1986.
  • The NGRBA is a planning, financing, monitoring and coordinating body of the centre and the states.
  • The objective of the NGRBA is to ensure effective abetement of pollution and conservation of the river Ganga by adopting a river basin approach for comprehensive planning and management.
  • The Authority has both regulatory and developmental functions. The Authority will take measures for effective abatement of pollution and conservation of the river Ganga in keeping with sustainable development needs.
  • These include
  • Development of a river basin management plan;
  • Regulation of activities aimed at prevention, control and abatement of pollution in Ganga to maintain its water quality, and to take measures relevant to river ecology and management in the Ganga basin states;
  • Maintenance of minimum ecological flows in the river Ganga;
  • Measures necessary for planning, financing and execution of programmes for abatement of pollution in the river Ganga including augmentation of sewerage infrastructure, catchment area treatment, protection of flood plains, creating public awareness;
  • Collection, analysis and dissemination of information relating to environmental pollution and conservation of the river Ganga;
  • Promotion of water conservation practices including recycling and reuse of water,, rain water harvesting, and decentralised sewage treatment systems;
  • Monitoring and review of the implementation of various programmes or activities taken up for prevention, control and abatement of pollution in the river Ganga;
  • Issue directions under section 5 of the Environment (Protection) Act, 1986 for the purpose of exercising and performing these functions and for achievement of its objectives.

WILDLIFE TRUST OF INDIA

  • NGO founded:1998
  • Aim: to conserve nature, especially endangered species and threatened habitats, in partnership with local communities and governments on a range of projects, from species rehabilitation to the prevention of the illegal wildlife trade.

राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण

  • राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण का गठन फरवरी 2009 में पर्यावरण (संरक्षण ) अधिनियम, 1986 के तहत किया गया था |
  • राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण केंद्र तथा राज्यों का नियोजन, वित्तपोषण, निगरानी तथा सहयोगी निकाय है |
  • राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण का उद्देश्य प्रदूषण में प्रभावी कमी सुनिश्चित करना तथा व्यापक नियोजन एवं प्रबंधन के एक सम्पूर्ण  नदी बेसिन दृष्टिकोण को अपनाकर गंगा नदी को संरक्षित करना है |
  • इस प्राधिकरण के नियामक एवं विकासात्मक दोनों कार्य हैं | यह प्राधिकरण सतत् विकास की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रदूषण में प्रभावी रूप से कमी तथा गंगा नदी के संरक्षण के लिए उपाय करेगा |
  • इनमें शामिल है
  • नदी बेसिन प्रबंधन योजना का विकास;
  • गंगा के जल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए गंगा में प्रदूषण के रोकथाम, नियंत्रण तथा न्यूनीकरण पर लक्षित गतिविधियों का विनियमन, तथा गंगा पारितंत्र एवं गंगा बेसिन वाले राज्यों में प्रबंधन से संबंधित उपायों को करना |
  • गंगा नदी के न्यूनतम पारिस्थितिक प्रवाह को बनाए रखना |
  • गंगा नदी में प्रदूषण के न्यूनीकरण हेतु कार्यक्रमों के नियोजन, वित्तपोषण तथा निष्पादन के लिए आवश्यक उपाय करना जिसमें मलप्रवाह-पद्धति की आधारिक संरचना में विस्तार करना , जलग्रह क्षेत्रों का उपचार, बाढ़ मैदानों का संरक्षण, एवं जन जागरूकता का निर्माण आदि शामिल है |
  • पर्यावरणीय प्रदूषण तथा गंगा नदी के संरक्षण से संबंधित सूचनाओं का संग्रहण, विश्लेषण तथा प्रसार करना |
  • जल संरक्षण की पद्धतियों को बढ़ावा देना जिसमें जल का पुनर्चक्रण एवं पुनःप्रयोग, वर्षा जल संचयन, तथा विकेंद्रीकृत मलजल उपचार तंत्र शामिल हैं |  
  • गंगा नदी में प्रदूषण में कमी तथा नियंत्रण के लिए शुरू की गयी गतिविधियों अथवा विभिन्न कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की निगरानी तथा समीक्षा करना |
  • पर्यावरण (संरक्षण ) अधिनियम, 1986 की धारा 5  के तहत इन कार्यों को निष्पादित करने तथा इसके उद्देश्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से दिशा निर्देश जारी करना |

भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट

  • एनजीओ स्थापित : 1998
  • लक्ष्य : प्रजाति पुनर्वास से लेकर अवैध वन्यजीव व्यापार पर रोकथाम तक, विभिन्न परियोजनाओं में सरकार तथा स्थानीय समुदायों की भागीदारी से प्रकृति का संरक्षण करना , विशेष रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों तथा संकटग्रस्त वास स्थलों का संरक्षण करना  |

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Online History Study Material I HCS I RAS I UPSC I Prelims I Mains – Frontier IAS

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Sangam Age

The Sangam Period (1st- 3rd Century AD)

  • Sangam literally means ‘Union’. It was an assembly or Union of Tamil Poets.
  • Although it was compiled/written in 6-7th Century AD, it depicts the society of 1st-4th AD.
  • Three types of Tamil Literary pieces are found-Grammar, Poems and Epics.
  • It describes the period of Pandyas, Cheras and Cholas, the three important rival kingdoms of South India.
  • According to Legends, There were 3 sangams which took more than 10000 years to complete.
  • They were patronized by 197 kings.
  • 6598 poets participated.

Historical Information from Sangam Literature

  • In Sangam literature, three kingdoms are mentioned – Pandyas, Cheras and Cholas.
  • The literature informs us about the contemporary economy, like agriculture was well developed and land was fertile.
  • Cotton cloth industry was also well developed. Main center was Uraiyur.
  • They had well developed port cities like Muziri in Kerala.
  • Roman coins have been found at Arikamedu (Pondicherry) and a Roman Colony was also found there. Showing trade relations with Europe.
  • They used animal pulled carts for transportation.
  • Traders used to take their female folks with them unlike the traders of the north.
  • In the society, there were certain similarities and dissimilarities from the north:
  • The Varna ‘Kshatriya’ is almost missing in the south.
  • The Brahmins enjoyed the highest position in the South as in the north but second highest social significance was that of Vaishya.
  • Similar Vedic rituals were prevalent here like that of North.

1st Sangam:

  • Held at Madurai
  • Attended by gods and legendary sages under the chairmanship of Agastya, but no literary work of this Sangam is available.

2nd Sangam:

  • Held at Kapadapuram
  • All the literary works had perished except Tolkappiyam.
  • Under the chairmanship of Agastya

3rd Sangam:

  • Held at Madurai.
  • It was founded by Mudathirumaran.
  • Under the chairmanship of Nakkirar.
  • It was attended by a large number of poets who produced voluminous literature but only a few had survived.
  • These Tamil literary works remain useful sources to reconstruct the history of the Sangam Age.

Sangam Literature

  • The corpus of Sangam literature includes Tolkappiyam, Ettutogai, Pattuppattu, Pathinenkilkanakku, and the two epics Silappathigaram and Manimegalai.
  • Tolkappiyam authored by Tolkappiyar is the earliest of the Tamil literature.
  • It is a work on Tamil grammar but it provides information on the political and socio economic conditions of the Sangam period.
  • The Ettutogai or Eight Anthologies consist of eight works – Aingurunooru, Narrinai, Aganaooru, Purananooru, Kuruntogai, Kalittogai, Paripadal and Padirruppattu.

The Cheras

  • Occupied the portion of both Kerala and Tamil Nadu.
  • Their capital was Vanji and their important seaports were Tondi and Musiri.
  • Udiyangeral, Sengttuvan were the famous rulers of this dynasty.
  • Cheran Senguttuvan belonged to 2nd century A.D. His younger brother was Elango Adigal, the author of Silappathigaram.
  • Senguttuvan introduced the Pattini cult or the worship of Kannagi as the ideal wife in Tamil Nadu.

The Chola

  • The Chola kingdom called as Cholamandalam was situated to the North -east of Pandya kingdom between Pennar and Vellar rivers.
  • It corresponded to modern Tanjore and Tiruchchirappalli district.
  • Capital was first located at Uraiyur and then shifted to Puhar.
  • Puhar identical with kaveripattanam was the main port of Cholas and served as alternative capital of Cholas.
  • The earliest Chola king was Elara who conquered Sri Lanka and ruled over it for nearly 50 years.

Online History Study Material

संगम काल

  • संगम का शाब्दिक अर्थ है मिलन | यह तमिल कवियों का संघ अथवा मिलन था |
  • यद्यपि यह छठी से सातवीं शताब्दी ईस्वी में लिखा गया था , यह प्रथम से चौथी शताब्दी का वर्णन करता है |
  • तीन प्रकार के तमिल साहित्यिक अवशेष पाए जाते है-व्याकरण, कविताएं और महाकाव्य |
  • यह दक्षिण भारत के तीन महत्वपूर्ण प्रतिद्वंद्वी राज्य पाण्ड्य,चेर,चोल राजवंशों के काल खंड का वर्णन करता है |
  • एक अनुश्रुति के अनुसार,कुल तीन संगम थे जिन्होंने पूरा होने के लिए 10000 से अधिक वर्षों का समय लिया |
  • इनको 197 राजाओं का सरंक्षण प्रदान था |
  • संगम में 6598 कवियों ने भाग लिया था |

संगम साहित्य से प्राप्त ऐतिहासिक जानकारी

  • संगम साहित्य में, तीन राज्यों  पाण्ड्य, चेर और चोल का उल्लेख है |
  • संगम साहित्य हमे उस काल की अर्थव्यवस्था के बारे में बताता है जैसे कृषि का सुविकसित रूप और उपजाऊ भूमि |
  • सूती वस्त्र उद्योग सुविकसित था जिसका मुख्य केंद्र उरैयुर था |
  • इस काल खंड में बंदरगाह शहर भी अच्छी तरह से विकसित थे जैसे केरल का मुज़िरी शहर |
  • रोमन सिक्के अरिकामेडु पांडिचेरी में पाए गए है,यहाँ एक रोमन कॉलोनी भी पाई गई है जो यूरोप के साथ व्यापारिक संबंध दर्शाती है|
  • वे जानवरों द्वारा खींची जाने वाली गाड़ियों का उपयोग परिवहन के लिए करते थे |
  • यहाँ के व्यापारी लोग व्यापार के दौरान औरतों को भी साथ रखते थे जबकि उत्तरी लोग ऐसा नहीं करते थे |
  • उत्तर के समाज और संगम काल (दक्षिण ) के समाज में काफी सारी  समानताएं और असमानताएं थीं |
  • क्षत्रिय वर्ण दक्षिण में लगभग ना के बराबर था |
  • दक्षिण और उत्तर में ब्राह्मण सर्वोच्च स्थान पर ही थे,परन्तु दूसरा सामजिक वर्चस्व वाला तबका वैश्य था |
  • उत्तर के जैसे वैदिक अनुष्ठान भी प्रचलित थे |

प्रथम संगम:

  • मदुरै में आयोजित किया गया |
  • ऐसा कहा जाता है की अगस्त्य की अध्यक्षता में देवताओं और महान संतों ने इस संगीति में भाग लिया था परन्तु इसकी कोई साहित्यिक कृति उपलब्ध नहीं है।

दूसरी संगम:

  • यह कवत्तापुरम अथवा कपाटपुरम में आयोजित की गई थी |
  • तोल्काप्पियम को छोड़कर सारी साहित्यिक कृति नष्ट हो गई है |
  • यह अगस्तय की अध्यक्षता में आयोजित हुई |

तीसरी संगम:

  • यह मदुरै में आयोजित की गई |
  • इसकी स्थापना मुदाथीरमरण ने की  
  • इसकी अध्यक्षता नक्कीरर ने की थी |
  • इसमें बड़ी संख्या में कवियों ने भाग लेकर कई साहित्यों की रचना की थी परन्तु इनमे से कुछ ही आगे बढ़ने में सफल हुए |
  • ये तमिल साहित्यिक कृतियां संगम काल के इतिहास को पुनः धागे में पिरोने के लिए काफी सहायक सिद्ध हुई है |

संगम साहित्य

  • संगम साहित्य के संग्रह में तोल्काप्पियम,एतुतोगई, पत्तुपाटु,पादिनेनकिलकनक्कु एवं  शिलप्पदिगारम , मणिमेकलई तथा शिवगसिन्दामणि  जैसे महाकाव्य शामिल है |
  • तोल्काप्पियम तमिल साहित्य का प्राचीनतम ग्रंथ था जो तोल्काप्पियर द्वारा रचित था |
  • हालाँकि यह एक तमिल व्याकरण कृति थी परन्तु यह संगम काल की राजनीतिक और सामाजिक आर्थिक स्थितियों का उल्लेख करती है |
  •  एटुटोगई में आठ काव्य संग्रह है,नरेनई, अगानुरू,पुरानानुरू,कुरुंटोगई,कलीटोगई,परीपदल, पदिरिपटु |

चेर शासक

चेरइनका केरल और तमिलनाडु दोनों के हिस्से पर शासन था |

  • इनकी राजधानी वांजी (करूर) थी एवं महत्वपूर्ण समुद्री बंदरगाह टोन्डी एवं मुज़िरी थे |
  • उदियनजेरल,सेनगुटटूवन इस वंश के प्रसिद्ध शासक थे |
  • सेनगुटटूवन चेर दूसरी शताब्दी ईस्वी से संबंध रखते है | इनके छोटे भाई ‘इलांगो आदिगल’ थे जिन्होंने शिलप्पादिकारम की रचना की थी |
  • सेनगुटटूवन ने तमिलनाडु में कन्नगी की आदर्श पत्नी के रूप में पूजा अथवा पत्तिनी पूजा की शुरुआत की |

चोल

  • चोल साम्राज्य को चोलमंडलम भी कहा जाता है यह पाण्ड्य साम्राज्य के उत्तर-पूर्व में पेन्नार एवं वेल्लार नदी के बीच स्थित था |
  • यह आधुनिक तंजावुर एवं तिरुचिरापल्ली जिले में स्थित है|
  • इन्होने  उरैयुर को अपनी सर्वप्रथम राजधानी बनाया था बाद में इसे पुहार में ले गए |
  • पुहार कावेरीपट्ट्नम के सदृश थी,यह चोल चोलों की प्रमुख बंदरगाह थी एवं एक वैकल्पिक राजधानी की भूमिका भी निभाई |
  • इनका पहला महत्वपूर्ण चोल शासक अल्लार था जिन्होंने श्रीलंका पर विजय प्राप्त की थी एवं 50 वर्षों तक इस पर शासन किया |

The Pandyas

  • The Pandyas ruled over the present day southern Tamil Nadu.
  • Their capital was Madurai, situated on the banks of Vaigai river.
  • The Pandya were first mentioned by Megasthenes, who aid their kingdom was famous for pearls.
  • The Pandya territory included modern district of Tirunelveli, Ramand and Madurai in Tamil Nadu.
  • The Pandya kings profitted from trade with Roman empire and sent emissaries to Roman emperor Augustus an Trojan.

Sangam Polity

  • Hereditary monarchy was the form of government during the Sangam period.
  • The king had also taken the advice of his minister, court-poet and the imperial court or avai.

Titles adopted by kings –

  • Chera: Vanavaramban, Vanavan, Kuttuvan, Irumporai and Villavar.
  • Chola : Senni, Valavan and Killi.
  • Pandya: Thennavar and Minavar.

Each of the Sangam dynasties had a royal emblem:

  • Cholas – Tiger
  • Cheras – Bow
  • Pandyas – Carp

The king was assisted by a large body of officials who were divided into five councils.

They were:

  • Ministers (amaichar)
  • Priests (anthanar)
  • Military commanders (senapathi)
  • Envoys (thuthar)
  • Spies (orrar).
  • Each ruler had a regular army and their respective Kodimaram (tutelary tree).
  • Chief source of state’s income – Land revenue. While custom duty was also imposed on foreign trade.
  • Pattinappalai – custom officials employed in the seaport of Puhar.
  • Booty captured in wars was also a major income to the royal treasury.

Sangam Society

  • Five-fold division of lands:
  • Kurinji (hilly tracks)
  • Mullai (pastoral)
  • Marudam (agricultural)
  • Neydal (coastal) and Palai (desert).
  • The people living in these five divisions had their respective chief occupations as well as gods for worship.
  • Kurinji: chief deity was Murugan, chief occupation was hunting and honey collection.
  • Mullai: chief deity Mayon (Vishnu), chief occupation was cattle-rearing and dealing with dairy products.
  • Marudam: chief deity Indira, chief occupation was agriculture.
  • Neydal: chief deity Varunan, chief occupation was fishing and salt manufacturing.
  • Palai: chief deity Korravai, chief occupation was robbery.
  • Korravai ancient goddess of war and victory and mother of Murugan,

Position of Women

  • Women poets like Avvaiyar, Nachchellaiyar, and Kakkaipadiniyar flourished in this period and contributed to Tamil literature.
  • Karpu or Chaste life was considered the highest virtue of women.
  • Love marriage was a common practice.
  • Women were allowed to choose their life partners.

पांड्य शासक

पाण्ड्य

  • इन्होने आधुनिक तमिलनाडु के दक्षिणी भाग पर शासन किया था |
  • इनकी राजधानी मदुरै थी जो वैगाई नदी के किनारे पर स्थित थी |
  • पाण्ड्य का उल्लेख सबसे पहले मेगस्थनीज़ ने किया है,उनके अनुसार पाण्ड्य मोतियों के लिए प्रसिद्ध थे |
  • पाण्ड्य साम्राज्य में आधुनिक तमिलनाडु के तिरूनेलवेली,रामन्द,मदुरै जैसे जिले शामिल है |
  • रोमन साम्राज्य के साथ व्यापार से पांड्य शासकों ने लाभ कमाया एवं रोमन सम्राट ऑगस्टस से लेकर ट्रोजन तक दूत भेजे |
  • संगम काल की राजव्यवस्था
  • संगम काल के दौरान सरकार का स्वरूप  वंशानुगत था |
  • राजा अपने निर्णयों के लिए मंत्रियों,न्यायालय कवि एवं शाही न्यायालय से विचार विमर्श करते थे |

राजाओं द्वारा अपनाये गए शीर्षक-

  • चेर : वनवरम्बन,वनावन, कुत्तुवन,इरमपोराई और विलावर |
  • चोल: शेन्नी ,वाल्वन और किली
  • पांड्य: थेन्नावर एवं मिनावर

प्रत्येक संगम राजवंश का एक शाही प्रतीक था:-

  • चोल – बाघ
  • चेर -धनुष
  • पांड्य-मत्स्य

राजा की सहायता के लिए अधिकारियों का एक बड़ा समूह था जो पांच परिषदों में विभाजित था |

ये थे-

  • मंत्री (अमैच्यार)
  • पुरोहित्तार (पुरोहित )
  • सेनापत्तियार (सेनानायक)
  • दुत्तार (राजदूत)
  • ओररि (गुप्तचर)
  • प्रत्येक राजा की एक नियमित सेना थी एवं उनसे संबंधित कडिमारम वृक्ष (संरक्षक वृक्ष) था |
  • राज्य की आय का प्रमुख स्रोत भू-राजस्व था | विदेशी व्यापार पर सीमा शुल्क लगता था |
  • पट्टिनप्पलाई- सीमा शुल्क एकत्र करने वाला अधिकारी जिसकी नियुक्ति पुहार बंदरगाह पर थी
  • युद्ध में लूट का माल भी  शाही खजाने के लिए भी एक बड़ी आय थी।

संगम काल का समाज

  • पांच तह वाली भू व्यवस्था थी-
  • कुरिंजी (पहाड़ी क्षेत्र)
  • मुल्लई (चारागाह संबंधी)
  • मरुदम (कृषि के लिए )
  • नेयदल (तटीय क्षेत्र) एवं  पलाई (रेगिस्तान)
  • इन सभी पांच भागों में निवास करने वाले लोगों का मुख्य व्यवसाय था और पूजा के लिए विशिष्ट देवता भी थे |
  • कुरिंजी: मुख्य देवता मुरुगन थे, मुख्य व्यवसाय शिकार और शहद संग्रह था।
  • मुल्लई:मुख्य देवता मेयन (विष्णु) थे,इनका मुख्य व्यवसाय पशु-पालन और दुग्ध निर्मित पदार्थों का व्यापार |
  • मरुदम : इंद्र मुख्य देवता थे,इनका मुख्य व्यवसाय  कृषि था |
  • नेयदल :इनके  मुख्य देवता वरुण थे , मुख्य व्यवसाय मछली पकड़ना और नमक उत्पादन था।
  • पल्लई : मुख्य देवी कोर्रवाइ थी एवं इनका मुख्य  व्यवसाय डकैती था |
  • कोरनाबाई  युद्द और विजय की देवी थी एवं मुरुगन की माँ थी |

महिलाओं की स्थिति

  • अव्वैयर,नच्चेलियर,ककईपेडिनियार जैसी कवियत्रियाँ इस काल में फली फूली एवं  तमिल साहित्य में अपना योगदान दिया।
  • पवित्र जीवन ही महिला का सर्वोच्च गुण माना जाता था।
  • प्रेम विवाह एक आम बात थी |
  • महिलाओं को अपने जीवन साथी चुनने की अनुमति थी।

Economy

  • The life of widows was miserable.
  • The practice of Sati was also prevalent in the higher strata of society.

Fine Arts

  • Panar and Viraliyar – singing bards
  • Kanigaiyar – dance person
  • Koothu – most famous form of entertainment

Economy of the Sangam Age

  • Agriculture – chief occupation.
  • Common crop – Rice.
  • Other crops – Ragi, sugarcane, cotton, pepper, ginger, turmeric, cinnamon and a variety of fruits
  • Jack fruit and pepper were famous in the Chera country.
  • Chief crop in the Chola and Pandya country – Paddy

Others

  • The handicrafts of the Sangam period were popular and included weaving, metal works and carpentry, ship building and making of ornaments using beads, stones and ivory.
  • Spinning and weaving of cotton and silk clothes attained a high quality.
  • There was a great demand in the western world for the cotton clothes woven at Uraiyur.

Trade

  • Flourished during this period
  • Merchants carried the goods on the carts and on animal-back from place to place.
  • Internal trade was mostly based on the barter system.
  • External trade was carried between South India and the Greek kingdoms.
  • The port city of Puhar became an emporium of foreign trade, as big ships entered this port with precious goods.
  • Other ports of commercial activity include Tondi, Musiri, Korkai, Arikkamedu and Marakkanam.
  • The author of Periplus provides the most valuable information on foreign trade and he was the critic of India as it drained Rome’s gold.
  • Main exports – cotton fabrics, spices like pepper, ginger, cardamom, cinnamon and turmeric, ivory products, pearls and precious stones.
  • Chief imports – Gold, horses and sweet wine.

संगम काल की अर्थव्यवस्था

  • विधवाओं की स्थिति दयनीय थी |
  • समाज में  सती प्रथा का भी प्रचलन था |

ललित कला

  • पानार और विरलीयार – गायन बोर्ड
  • कणगीयर – नृतक
  • कुथु – मनोरंजन का सबसे प्रसिद्ध रूप

संगम काल की अर्थव्यवस्था

  • कृषि – मुख्य व्यवसाय
  • सामान्य फसल – चावल
  • अन्य फसल – रागी, गन्ना, कपास, काली मिर्च, अदरक, हल्दी, दालचीनी और कई प्रकार के फल
  • चेर साम्राज्य में कटहल फल और काली मिर्च प्रसिद्ध थे |
  • चोल और पांड्य साम्राज्य की मुख्य फसल धान थी

अन्य

  • संगम काल के हस्तशिल्प लोकप्रिय थे और इसमें बुनाई, धातु कर्म ,बढ़ईगीरी, जहाज निर्माण और मोती, पत्थर और हाथी दांत का उपयोग करके गहने  बनाना शामिल था |
  • सूती और रेशम कपड़ों की कताई-बुनाई उच्च गुणवत्ता वाली होती थी |
  • पश्चिमी देशों में उरैयुर में निर्मित सूती वस्त्रों की बहुत मांग थी |

व्यापार

  • इस काल में व्यापार में फला -फूला |
  • व्यापारी अपना सामान छकड़ा गाडी एवं जानवरों की पीठ पर लादते थे |
  • आंतरिक व्यापार ज्यादातर वस्तु विनिमय प्रणाली पर आधारित था।
  • दक्षिण भारत और ग्रीक राज्यों के बीच बाह्य व्यापार किया गया था।
  • पुहार बंदरगाह शहर विदेशी व्यापार का एक विक्रय केन्द्र बन गया, क्योंकि बड़े जहाजों द्वारा इन बंदरगाहों पर सामान लाया गया |
  • अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों वाली बंदरगाह- टोन्डी,मुज़िरी, कोरकाई, अरिककमेडू और मर्ककनम |
  • परिनौकायन के लेखक विदेशी व्यापार के बारे में सबसे महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं और ये भारत के आलोचक थे क्योंकि इससे रोम के सोने का व्यापार ठप हो गया था |
  • मुख्य निर्यात – सूती कपड़े, मसाले जैसे काली मिर्च, अदरक, इलायची, दालचीनी और हल्दी, हाथीदांत उत्पाद, मोती और कीमती पत्थर |
  • मुख्य आयात – सोने, घोड़े और मीठी शराब

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UPSC IAS 2018 Geography Material | Online Content | Civil Services Examination

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Agriculture

Agriculture: An Introduction

Agriculture is the science and art of cultivation on the soil, raising crops and rearing livestock. It is also called farming.

  • It includes growing crops, fruits, vegetables, flowers and rearing of livestock.
  • The important inputs needed are seeds, fertilisers, machinery and labour, ploughing, sowing, irrigation, weeding and harvesting.

Importance of agriculture in India

  • India is an agriculturally important country.
  • Two-thirds of its population is engaged in agricultural activities.
  • Agriculture is a primary activity, which produces most of the food that we consume.
  • Besides food grains, agriculture also produces raw material for various industries.

Types of farming

1.Subsistence Farming

  • Primitive Subsistence Farming
  • Intensive Subsistence Farming

2. Commercial Farming

Primitive Subsistence Farming

  • Practised on small patches of land with the help of primitive tools like hoe, digging sticks, and family/ community labour.
  • Depends upon monsoon, natural fertility of the soil and suitability of other environmental conditions.
  • It is a ‘slash and burn’ agriculture.
  • A patch of land is cleared to produce cereals and other food crops to sustain one’s family.
  • once the fertility decreases, a fresh patch of land is cleared for cultivation allowing nature to replenish the fertility of the soil

  • Kumari–Western Ghats
  • Valre/Waltre–South-eastern Rajasthan,
  • Khil–Himalayan belt
  • Kuruwa— Jharkhand

In other areas of world Slash and burn agriculture is known as:

  • Milpa— Mexico and Central America
  • Conuco— Venezuela,
  • Roca–Brazil
  • Masole–Central Africa,
  • Ladang–Indonesia,
  • Ray–Vietnam

Intensive Subsistence Farming

  • Practised in areas of high population pressure on land.
  • It is  labour intensive farming, where high doses of biochemical inputs and irrigation are used for obtaining higher production.
  • prevalent in the thickly populated areas of the monsoon regions of south, southeast and east Asia.

कृषि : एक परिचय

कृषि –  कृषि मिट्टी पर खेती करने की कला है, इसमें फसलों को उगाना और पशुपालन शामिल है। इसे खेती भी कहा जाता है।  

  • इसमें पशुओं को पालना और फसलों, फल, सब्जियां व फूल लगाना शामिल है।
  • बीज, उर्वरक, मशीनरी और श्रम, जुताई, बुवाई, सिंचाई, खुरदुआ और कटाई आदि का कृषि में महत्त्वपूर्ण योगदान है।

भारत में कृषि का महत्व

  • भारत कृषि की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण देश है।
  • इसकी आबादी का दो-तिहाई  भाग कृषि गतिविधियों में सलंग्न है
  • कृषि एक प्राथमिक गतिविधि है, जो हमारे द्वारा खाए जाने वाले अधिकांश भोजन का उत्पादन करती है।
  • अनाज के अलावा, कृषि विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चे माल का उत्पादन भी करती है।

UPSC IAS 2018 Geography

कृषि के प्रकार

1.जीविका कृषि

  • प्रारम्भिक जीविका निर्वाह कृषि
  • गहन जीविका निर्वाह कृषि

2. वाणिज्यिक खेती

प्रारम्भिक जीविका निर्वाह कृषि

  • इस प्रकार की खेती आदिम उपकरणों की मदद से भूमि के छोटे टुकड़े पर की जाती है।  इसमें खुदाई के उपकरण, और परिवार / सामुदायिक श्रम का अभ्यास किया जाता है ।
  • यह कृषि मानसून, मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता और अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों की उपयुक्तता  पर निर्भर करती है
  • यह  ‘काटना और जलाना‘ प्रकार की कृषि है।  
  • एक परिवार का पालन करने के लिए अनाज और अन्य खाद्य फसलों का उत्पादन करने के लिए भूमि का एक टुकड़ा  साफ किया जाता है।
  • एक बार उर्वरता कम हो जाने पर, खेती के लिए जमीन का एक नया टुकड़ा साफ किया  जाता है जिससे मिट्टी की उर्वरता की प्राकृतिक भरपाई हो सके।

  • कुमारी- पश्चिमी घाट
  • वाले / वाल्ट्रे – दक्षिण-पूर्वी राजस्थान,
  • ख़िल – हिमालयी बेल्ट
  • कुरुवा – झारखंड

दुनिया के अन्य क्षेत्रों में काटना और जलाना कृषि को इन नामों से जाना जाता है:

  • मिलपा – मेक्सिको और मध्य अमेरिका
  • कोनको – वेनेजुएला,
  • रोका – ब्राजील
  • मासोली – मध्य अफ्रीका,
  • लदांग – इंडोनेशिया,
  • रे – वियतनाम

गहन जीविका निर्वाह कृषि

  • उच्च आबादी वाली भूमि के क्षेत्र में इस प्रकार की खेती की जाती है।
  • यह  श्रम  गहन खेती  है, जहां उच्च  उत्पादन प्राप्त करने के लिए  उच्च मात्रा में जैव रासायन और  सिंचाई की जाती है।
  • दक्षिण, दक्षिण पूर्व और पूर्वी एशिया के मानसून क्षेत्रों के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में प्रचलित है।


Commercial Farming

  • The main feature is the use of higher doses of modern inputs, like  high yielding variety (HYV) seeds, chemical fertilisers, insecticides and pesticides in order to obtain higher productivity.
  • Crops are grown and animals are reared for sale.
  • The area cultivated and the amount of capital used is large.
  • The Commercial nature of crop varies from one region to another. (Rice is a commercial crop in Haryana and Punjab, but  a subsistence crop in Odisha)

Mixed farming:

  • The land is used for growing food and fodder crops and rearing livestock together.
  • It is practised in Europe, eastern USA, Argentina, southeast Australia, New Zealand and South Africa.

Plantation Agriculture:

  • A single crop  of tea, coffee, sugarcane, cashew, rubber, banana or cotton is grown on a large area.
  • The plantation has an interface of agriculture and industry.
  • Plantations cover large tracts of land, using capital intensive inputs, with the help of migrant labourers.
  • The produce may be processed on the farm itself or in nearby factories.
  • The development of a transport network is thus essential for such farming.
  • Major plantations are found in the tropical regions of the world.
  • Examples: Rubber in Malaysia, coffee in Brazil, tea, coffee, rubber, sugarcane, banana, etc in India and Sri Lanka.

Cropping seasons in India

  • There are three distinct crop seasons –Rabi, kharif and zaid in the northern and interior parts of country
  • But this distinction in the cropping season does not exist in southern parts of the country.
  • Reason: High temp. is  enough to grow tropical crops during any period in the year provided the soil moisture is available.
  • Therefore, in this region same crops can be grown thrice in an agricultural year provided there is sufficient soil moisture.

Rabi season:

  • Sowing time: from October to December
  • Harvesting time: from April to June.
  • Crops grown: Wheat, barley, peas, gram and mustard.
  • Producing states: Punjab, Haryana, Himachal Pradesh, Jammu and Kashmir, Uttarakhand and Uttar Pradesh .

Factors responsible:

  • Availability of precipitation during winter months (western temperate cyclones)
  • green revolution in Punjab, Haryana, western Uttar Pradesh and parts of Rajasthan .

Kharif Crop:

  • Sowing time: July (with the onset of monsoon)
  • Harvesting time: September-October.
  • Crops grown: paddy, maize, jowar, bajra, tur, moong, urad, cotton, jute, groundnut and soyabean.
  • Producing states: rice-growing regions (Assam, West Bengal, coastal Odisha, Andhra Pradesh, Telangana, Tamil Nadu, Kerala and Maharashtra, along with Uttar Pradesh and Bihar).
  • In Assam, West Bengal and Odisha,three crops of paddy (Aus, Aman and Boro) are grown in a year.

Zaid Crop:

  • Sowing and harvesting time: In between the rabi and the kharif seasons
  • Crops grown: watermelon, muskmelon, cucumber, vegetables and fodder crops.

वाणिज्यिक खेती

  • उच्च उत्पादकता प्राप्त करने के लिए उच्च उपज देने वाली विविधता (एचवाईवी) बीज, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशकों की उच्च मात्रा का उपयोग किया जाता है।
  • फसलें उगाई जाती हैं और पशुओं को बिक्री के लिए तैयार किया जाता है।
  • खेती के लिए अधिक जमीन और पूंजी का बड़ी मात्रा में इस्तेमाल किया जाता  है।
  • फसलों की वाणिज्यिक प्रकृति एक क्षेत्र से दूसरे में भिन्न होती है। (चावल हरियाणा और पंजाब में एक वाणिज्यिक फसल है, लेकिन ओडिशा में एक निर्वाह की फसल   )

मिश्रित खेती:

  • भूमि का इस्तेमाल खाद्य और चारा फसलों और पशुओं के पालन के लिए किया जाता है।
  • इसका अभ्यास यूरोप, पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका, अर्जेंटीना, दक्षिण पूर्व ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका में किया जाता है।

बागान कृषि:

  • इसमें एक बड़े क्षेत्र पर चाय, कॉफी, गन्ना, काजू, रबर, केला या कपास की एक ही फसल उगाई जाता है।
  • बागान  में कृषि और उद्योग का एक इंटरफ़ेस होता है।

भारत में फसली ऋतुएँ

  • देश के उत्तरी और आंतरिक हिस्सों में तीन अलग-अलग फसल ऋतु हैं – रबी, खरीफ और जायद ।  
  • लेकिन देश के दक्षिणी हिस्सों में फसलों  के मौसम में यह अंतर मौजूद नहीं है।
  • कारण:  किसी भी अवधि के दौरान उष्णकटिबंधीय फसलों को विकसित करने के लिए पर्याप्त तापमान उपलब्ध होता है,बस  मृदा में नमी उपलब्ध होनी चाहिए ।
  • इसलिए, इस क्षेत्र में एक ही वर्ष में एक ही प्रकार की कृषि फसलों को तीन बार उगाया जा सकता है, बशर्ते मिट्टी की नमी पर्याप्त हो।

रबी मौसम:

  • बोने का समय: अक्टूबर से दिसंबर तक
  • फसल काटने का समय: अप्रैल से जून तक
  • फसलें : गेहूं, जौ, मटर, चना और सरसों
  • उत्पादक राज्य: पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश।

जिम्मेदार कारक:

  • सर्दियों के महीनों के दौरान वर्षा की उपलब्धता (पश्चिमी समशीतोष्ण चक्रवात)
  • पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में हरित क्रांति।  

खरीफ फसल:

  • बुवाई का समय: जुलाई (मानसून की शुरुआत के साथ)
  • फसल काटने का समय: सितंबर-अक्टूबर
  • फसल –  धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, तूर, मूंग, उडद, कपास,  मूंगफली और सोयाबीन।
  • उत्पादक राज्य: चावल बोन वाले क्षेत्रों (असम, पश्चिम बंगाल, तटीय ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ)।
  • असम, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में, धान की तीन किस्म (औस, अमन और बोरो) एक वर्ष में उगाई जाती है।

जायद फसल:

  • बुवाई और कटाई का समय: रबी और खरीफ फसल  के बीच में
  • फसलें  : तरबूज, खरबूजा, ककड़ी,गन्ना,  सब्जियां और चारा फसलें।

Crop Classification

Crop Classification based on the type of produce:

  • Food Crops: Rice, wheat, maize, millets pulses ,cereals
  • Cash Crops: Cotton, jute, sugarcane, tobacco, oilseeds, groundnut, linseed, sesamum, castor seed, rapeseed, mustard, etc.
  • Plantation Crops: Tea, coffee, coconut, arecanut, rubber and spices (cardamom, chillies, ginger, turmeric)
  • Horticulture Vegetables:Onion, tomato, etc; and fruits — Apple, Orange, Mango, banana, citrus fruits, etc..

Crop Classification based on climate:

  • Tropical climate crop

Crops grow well in warm & hot climate E.g. Rice, sugarcane, Jowar etc.

  • Temperate Climate crop

Crops grow well in cool climate E.g. Wheat, Oats, Gram, Potato, apple etc.

Classification Based on growing season

  • Kharif/Rainy/Monsoon crops: Cotton, Rice, Jowar, Bajra etc.
  • Rabi/winter/cold seasons crops: Wheat, gram, sunflower etc.
  • Summer/Zaid crops: Groundnuts, Watermelon, Pumpkins, Gourds etc.

Classification based on life of crops/duration of crops:

  • Seasonal crops: A crop completes its life cycle in one season i.e. 3-4 months (rice, Jowar, wheat)
  • Two seasonal crops: Crops complete its life cycle in two seasons i.e.6-8 months (Cotton, turmeric, ginger)
  • Annual crops: Crops require one full year to complete its life cycle(sugarcane)
  • Biennial crops: Crops requires two year to complete its life cycle (Banana, Papaya)
  • Perennial crops: crops live for several years.(Fruit crops, mango, guava )

Classification based on water availability:

  • Rain fed: Cultivation of crop mainly based on the availability of rainwater. (Jowar, Bajra, Moong )
  • Irrigated crops: Crops cultivated with the help of irrigation water. (Chili, sugarcane, Banana, papaya)

फसलों का वर्गीकरण

उत्पादन के प्रकार पर आधारित फसलों का वर्गीकरण:

  • खाद्य फसलें : चावल, गेहूं, मक्का, बाजरा दालें , अनाज आदि।  
  • नकद फसलें : कपास, जूट, गन्ना, तंबाकू, तिलहन, मूंगफली, अलसी, तिल, अरंडी बीज,  सरसों आदि।
  • बागान फसलें : चाय, कॉफी, नारियल, सुपारी, रबर और मसाले  (इलायची, मिर्च, अदरक, हल्दी)
  • बागवानी सब्जियां : प्याज, टमाटर, आदि; और फल – सेव, संतरा , आम, केला, खट्टे फल,  आदि।

जलवायु के आधार पर फसलों का  वर्गीकरण:

  • उष्णकटिबंधीय फसल

गर्म जलवायु में उगाई जाने वाली फसलें , उदाहरण के लिए – चावल, गन्ना, ज्वार आदि।  

  • शीतोष्ण कटिबंधीय  फसल

ये फसलें ठंडे  वातावरण में अच्छी तरह से  बढ़ती हैं उदाहरण – गेहूं, ओट, चना,  आलू, सेब आदि

फसलों का उगाये जाने वाले मौसम के आधार पर वर्गीकरण

  • खरीफ / बरसात / मानसून की फसलें: कपास, चावल, ज्वार, बाजरा आदि।
  • रबी / सर्दी / ठंडे मौसम की फसलें: गेहूं, चना , सूरजमुखी आदि
  • ग्रीष्मकालीन / जायद फसलें : मूंगफली, तरबूज, कद्दू, आदि।

फसलों की अवधि के आधार पर वर्गीकरण:

  • मौसमी फसलें: एक फसल एक ऋतू में अपने जीवन चक्र को पूरा करती है i.e. 3-4 महीने (चावल, ज्वार, गेहूं)
  • दो मौसमी फसलें: दो ऋतुओं में फसल अपना जीवन चक्र पूरा करती है  । 6-8 महीने (कपास, हल्दी, अदरक)
  • वार्षिक फसलें: अपने जीवन चक्र (गन्ने) को पूरा करने के लिए फसलों को एक वर्ष पूरा करना पड़ता है
  • द्विवार्षिक फसलें: अपने जीवन चक्र (केले, पपीता) को पूरा करने के लिए फसलों को दो वर्ष की आवश्यकता होती है
  • बारहमासी फसलें :  ये फसलें  कई वर्षों तक जीवित रहती हैं। (फलों की फसलें, आम, अमरूद)

पानी की उपलब्धता के आधार पर वर्गीकरण:

  • वर्षा जल पर निर्भर फसलें : ऐसे फसलें जो सिर्फ वर्षा जल की उपलब्धता  पर ही निर्भर हो (ज्वार, बाजरा, मूंग)
  • सिंचाई निर्भर फसलें  : सिंचाई के पानी की मदद से खेती की जाती हो । (मिर्च, गन्ना, केला, पपीता)

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IAS Ecology notes 2018 – Institutions & Measures | RAS/HCS/PCS 2018

IAS Ecology notes 2018 – Institutions & Measures | RAS/HCS/PCS 2018

IAS Ecology notes 2018 – Institutions & Measures | RAS/HCS/PCS 2018

INSTITUTIONS & MEASURES

NATIONAL WILDLIFE ACTION PLAN

  • The first National Wildlife Action Plan (NWAP) was adopted in 1983, based upon the decision taken in the XV meeting of the Indian Board for wildlife held in 1982. The plan had outlined the strategies and action points for wildlife conservation which are still relevant.
  • In the meanwhile, however, some problems have become more acute and new concerns have become apparent, requiring a change in priorities. Increased commercial use of natural resources, continued growthof human and livestocks populations and changes in composition patterns are causing greater Demographic impacts. Biodiversity conservation has thus become a focus of interest. The National Forest Policy was also formulated in 1988, giving primacy to conservation.
  • The first National Wildlife Action Plan (NWAP) of 1983 has been revised and the Wildlife Action Plan (2002-2016) has been adopted.

Strategy for action

  • Adopting and implementing strategies and needs outlined above will call for action covering the following parameters:
  1. strengthening and enhancing the protected area network
  2. effective management of protected areas
  3.  conservation of wild and endangered species and their habitats

NATIONAL AFFORESTATION AND ECO-DEVELOPMENT BOARD

  • The Ministry of Environment and Forests constituted the National Afforestation and Eco-development Board (NAEB) in August 1992.
  • National Afforestation and Eco-development board has evolved specific schemes for promoting afforestation and management srategies, which help the states in developing specific afforestation and management strategies and eco-development packages.

COMPENSATORY AFFORESTATION FUND MANAGEMENT AND PLANNING AUTHORITY (CAMPA)

  • While according prior approval under the Forest (Conservation) Act, 1980 for diversion of forest land for non forest purpose, Central governmnet stipulates conditions that amounts shall be realised from user agencies to undertake compensatory afforestation and such other activities related to conservation and development of forests, to mitigate impact of diversion of forest land.
  • In April 2004, the central government, under the orders of the Supreme Court, constituted the Compensatory Afforestation Fund Management and Planning Authority (CAMPA) for the management of money towards compensatory afforestation, and other money recoverable, in compliance of the conditions stipulated by the central government and in accordance with the Forest (Conservation) Act.

JOINT FOREST MANAGEMENT (JFM)

  • JFM is an initiative to institutionalize participatory governance of country’s forest resources by involving the local communities living close to the forest.
  • This is a co-management institution to develop partnership between forest fringe communities and the Forest Department (FD) on the basis of mutual trust and jointly defined roles and responsibilities with regard to forest protection and regeneration

SOCIAL FORESTRY

  • The National Commission on Agriculture, Government of India, first used the term ‘social forestry’ in 1976.
  • It was then that India embarked upon a social foresty project with the aim of taking the pressure off the forests and making use of all unused and fallow land.
  • Government forest areas that are close to human settlement and have been degraded over the years due to human activities needed to be afforested.

राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना :

  • प्रथम राष्ट्रीय  वन्यजीव कार्ययोजना को वर्ष 1983 में स्वीकार किया गया था | यह कार्ययोजना वर्ष 1982 में आयोजित की गयी भारतीय वन्यजीव बोर्ड की पंद्रहवीं बैठक में लिए गए निर्णयों पर आधारित थी | इस योजना में उन रणनीतियों तथा कार्यवाहियों की रूपरेखा तैयार की गयी थीं जो आज भी प्रासंगिक हैं |  
  • इस बीच, हालांकि, कुछ समस्याएं अधिक विकट हो गयी हैं तथा नयी चिंताएं सामने आई हैं जिससे प्रतीत होता है कि प्राथमिकताओं में बदलाव की आवश्यकता है | प्राकृतिक संसाधनों का वर्धित व्यापारिक प्रयोग, मानव तथा पशुओं की आबादी में लगातार वृद्धि, तथा रचना प्रारूपों में बदलाव व्यापक जनसांख्यिकीय प्रभावों की वजह बन रहे हैं| जैव विविधता का संरक्षण इसलिए अब ध्यान का केंद्र बन गया है | राष्ट्रीय वन नीति का निर्माण भी वर्ष 1988 में किया गया था, जिसमें संरक्षण को प्राथमिकता दी गयी थी |
  • 1983 की प्रथम राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना में संशोधन किया गया तथा वन्यजीव कार्ययोजना (2002-2016 ) को स्वीकार किया गया है |

कार्य की रणनीति :

  • उपरोक्त उल्लिखित ज़रूरतों तथा रणनीतियों की स्वीकृति तथा क्रियान्वयन निम्नलिखित मापदंडों को शामिल करने वाले कार्यों का आह्वान करेगा :
  1. संरक्षित क्षेत्रों के नेटवर्क को सुदृढ़ बनाना तथा उनका विस्तार |
  2. संरक्षित क्षेत्रों का प्रभावी प्रबंधन |
  3. जंगली तथा संकटग्रस्त प्रजातियों तथा उनके वास स्थलों का संरक्षण |

राष्ट्रीय वनीकरण एवं पारिस्थितिकी विकास बोर्ड –

  • वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने अगस्त 1992 में राष्ट्रीय वनीकरण एवं पारिस्थितिकी विकास बोर्ड का गठन किया |
  • राष्ट्रीय वनीकरण तथा पारिस्थितिकी विकास बोर्ड ने वनीकरण तथा प्रबंधन संबंधी रणनीतियों को बढ़ावा देने के लिए विशिष्ट योजनाओं का विकास किया है, जो राज्यों को संयुक्त वन प्रबंधन तथा भागीदारी नियोजन प्रक्रिया के माध्यम से   उनकी विशिष्ट वनीकरण एवं प्रबंधन संबंधी नीतियों तथा को विकसित करने में सहायता करती है |

प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं नियोजन प्राधिकरण (कैम्पा )

  • वन (संरक्षण ) अधिनियम 1980 के अंतर्गत वन भूमि के गैर-वनीय उद्देश्य हेतु परिवर्तन के लिए पूर्व अनुमोदन के अनुसार, केंद्र सरकार ने शर्तों को निर्धारित किया है कि प्रतिपूरक वनीकरण तथा वनों के संरक्षण एवं विकास से संबंधित ऐसी अन्य गतिविधियों को प्रारम्भ करने के लिए  उपयोगकर्ता एजेंसियों से क्षतिपूर्ति की राशि वसूल की जायेगी, ताकि वन भूमि के परिवर्तन से उत्पन्न प्रभावों का शमन किया जा सके |
  • अप्रैल 2004 में, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार केंद्र सरकार ने, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुपालन में एवं वन (संरक्षण ) अधिनियम के अनुसार प्रतिपूरक वनीकरण के लिए  धन, तथा अन्य वसूली योग्य धन के प्रबंधन हेतु प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैम्पा ) का गठन किया |

संयुक्त वन प्रबंधन :

  • संयुक्त वन प्रबंधन एक पहल है जो वन संसाधनों के प्रबंधन में स्थानीय समुदायों को शामिल करके  देश के वन संसाधनों की सहभागितामूलक गवर्नेंस की स्थापना करती है |
  • यह एक सह-प्रबंधन संस्था है जिसका कार्य वनों के समीप रहने वाले समुदायों तथा वन विभाग के बीच वन संरक्षण तथा पुनरुत्थान के संबंध में परस्पर विश्वास तथा संयुक्त रूप से परिभाषित भूमिकाओं के आधार पर एक साझेदारी की स्थापना करना है |

सामाजिक वानिकी

  • राष्ट्रीय कृषि आयोग, भारत सरकार ने, पहली बार शब्द “सामाजिक वानिकी” का प्रयोग वर्ष 1976 में किया था |
  • इसके बाद भारत ने एक सामाजिक वानिकी परियोजना की शुरुआत की जिसका उद्देश्य वनों का भार कम करना तथा अनुपयोगी और परती भूमि को  उपयोगी बनाना था |
  • मानवीय गतिविधियों के कारण नष्ट हो रहे ऐसे सरकारी वन क्षेत्र, जो मानव अधिवासों से सटे हैं, उन्हें पुनर्वनीकरण की ज़रूरत है |

IAS Ecology Notes 2018

NATIONAL BAMBOO MISSION

  • The national bamboo mission is a centrally sponsored scheme with 100% contribution from central government. It is being implemented by the Horticulture Division under department of Agriculture and Co-operation in the Ministry of agriculture, New Delhi.
  • Bamboo Mission envisages integration of different ministries/Departments and involvement of local people/initiatives for the holistic development of bamboo sector in terms of growth of bamboo through increase in area coverage, enhanced yields and scientific

ECO MARK

A government scheme of laeling of environment friendly products to provide accrediation and labelling for household and other consumer products which meet certain environmental criteria along with quality requirements of the Bureau of Indian Standards for that product.

Objective- to recognize good environmental performance as well as improvements in performance of the unit

Any product, which is made, used or disposed of in a way that significantly reduces the harm to environment, could be considered as ‘Environment Friendly Product’

URBAN SERVICES ENVIRONMENTAL RATING SYSTEM (USERS)

  • Project funded by UNDP executed by Ministry of Environment and Forests and implemented by TERI.
  • Aim- to develop an analytical tool to measure the performance, with respect to delivery of basic services in local bodies of Delhi and Kanpur.
  • Performance measurement (PM) tool was developed through a set of performance measurement indicators that are benchmarked against set targets using the inputs-outputs efficiency outcomes framework.

BIODIVERSITY CONSERVATION & RURAL LIVELIHOOD IMPROVEMENT PROJECT (BCRLIP)

  • Aim- conserving biodiversity in selected landscapes, including wildlife protected areas/critical conservation areas while improving rural livelihoods through participatory approaches.
  • Development of Joint Forest Management (JFM) and eco-development in some states are models of new approaches to provide benefits to both conservation and local communities.

NATIONAL CLEAN ENERGY FUND

  • ‘National Clean Energy Fund’ (NCEF) was constituted in the public account of India in the Finance Bill 2010-11
  • Objective- to invest in entrepreneurial ventures and research & innovative projects in the field of clean energy technology.
  • The Central Board of Excise and Customs consequently notified the Clean Energy Cess Rules 2010 under which producers of specified goods namely raw coal, raw lignite and raw peat were made liable to pay Clean Energy Cess.

NATIONAL MISSION FOR ELECTRIC MOBILITY

  • A National Mission for Electric Mobility (NCEM) to promote electric mobility and manufacturing of electric vehicles in India.
  • The setting up of NCEM has been influenced bythe following three factors:
  1. Fast dwindling petroleum resources
  2. Impacts of vehicles on the environment and climate change
  3. Worldwide shift of the automobile industry towards more efficient drive technologies and alternative fuels including electric vehicles

राष्ट्रीय बाँस योजना

  • राष्ट्रीय बाँस योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसमें 100 प्रतिशत अंशदान केंद्र सरकार देती है |  इसका क्रियान्वयन कृषि विभाग के अंतर्गत बागवानी प्रभाग द्वारा कृषि मंत्रालय, नयी दिल्ली के सहयोग से किया जा रहा है |
  • बाँस मिशन में क्षेत्र व्याप्ति में वृद्धि , वर्धित पैदावार तथा बाँस के वैज्ञानिक प्रबंधन, बाँस तथा बाँस से निर्मित हस्तशिल्प उत्पादों के विपणन, रोजगार अवसरों के निर्माण आदि के रूप में बाँस क्षेत्र के समग्र विकास के लिए  विभिन्न मंत्रालयों/ विभागों के एकीकरण तथा स्थानीय लोगों/ पहलों की भागीदारी की परिकल्पना की गयी है |

ईको-मार्क

पर्यावरण अनुकूल उत्पादों पर लेबल लगाने की एक सरकारी योजना जिसके अंतर्गत वैसे घरेलू तथा उपभोक्ता उत्पादों पर अंकितक लगाया जाता है तथा मान्यता प्रदान की जाती है, जो उस उत्पाद के लिए भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा निर्धारित की गयी गुणवत्ता अपेक्षाओं तथा कुछ निश्चित मानदंडों पर खरा उतरते हैं |

उद्देश्य- इकाई के अच्छे पर्यावरणीय प्रदर्शन के साथ ही साथ उसके प्रदर्शन में सुधार को जांच करना |

कोई भी उत्पाद, जिसका निर्माण, प्रयोग अथवा निपटान इस प्रकार किया जाता है कि उससे पर्यावरण को कम हानि होती है, पर्यावरण अनुकूल उत्पाद माना जा सकता है |

शहरी सेवाओं की पर्यावरणीय रेटिंग सिस्टम (यूजर्स ) –

  • यूएनडीपी द्वारा वित्तपोषित परियोजना जिसका निष्पादन वन एवं पर्यावरण मंत्रालय तथा क्रियान्वयन टेरी ( ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान ) के द्वारा किया जाता है |
  • उद्देश्य- दिल्ली तथा कानपुर के स्थानीय निकायों में बुनियादी सेवाओं को प्रदान करने के संबंध में प्रदर्शन को मापने के लिए एक विश्लेषणात्मक उपकरण विकसित करना |
  • प्रदर्शन मापक उपकरण का विकास प्रदर्शन मापक सूचकांकों के एक समूह के माध्यम से किया गया था जिनकी इनपुट-आउटपुट दक्षता परिणाम फ्रेमवर्क का प्रयोग करके पहले से तय  लक्ष्यों के साथ तुलना की जाती है |

जैव विविधता संरक्षण तथा ग्रामीण आजीविका सुधार परियोजना –

  • उद्देश्य- सह्भागितामूलक दृष्टिकोण के माध्यम से ग्रामीण आजीविका में सुधार करते हुए चयनित भू-दृश्यों में जैव विविधता का संरक्षण, जिनमें वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र/ गंभीर रूप से संरक्षण वाले क्षेत्र शामिल हैं |
  • संरक्षण तथा स्थानीय समुदाय दोनों को लाभ प्रदान करने के लिए कुछ राज्यों में संयुक्त वन प्रबंधन तथा इको-डेवलपमेंट नयी दृष्टिकोण के आदर्श हैं |

राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा निधि –

  • राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा निधि का गठन वित्तीय विधेयक 2010-11 में भारत के सार्वजनिक खाते के अंतर्गत किया गया था |
  • उद्देश्य- ऊर्जा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उद्यमशील व्यापार तथा अनुसंधान एवं अभिनव परियोजनाओं में निवेश करना |
  • इसके फलस्वरूप केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर बोर्ड ने स्वच्छ ऊर्जा उपकर नियम, 2010 को अधिसूचित कर दिया जिसके तहत विनिर्दिष्ट वस्तुओं- अपरिष्कृत कोयला, अपरिष्कृत भूरा कोयला तथा अपरिष्कृत पीट कोयला के उत्पादकों को स्वच्छ ऊर्जा उपकर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी बनाया गया |

राष्ट्रीय विद्युत् गतिशीलता मिशन –

  • भारत में विद्युत गतिशीलता तथा विद्युत वाहनों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए विद्युत गतिशीलता का एक राष्ट्रीय मिशन |
  • राष्ट्रीय विद्युत गतिशीलता मिशन की शुरुआत निम्नलिखित तीन कारकों से प्रभावित है :
  1. तेजी से सिकुड़ते पेट्रोलियम संसाधन |
  2. पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन पर वाहनों का प्रभाव |
  3. पूरी दुनिया में मोटर वाहन उद्योग का गाड़ी चलाने की अधिक कुशल तकनीकों तथा विद्युत वाहनों सहित वैकल्पिक ईंधन की तरफ झुकाव |

SCIENCE EXPRESS- BIODIVERSITY SPECIAL (SEBS)

  • SEBS is an innovative mobile exhibition mounted on a specially designed 16 coach AC train, traveling across India from 5 June to 22 December 2012 to create widespread awareness on the unique biodiversity of the country.
  • SEBS is the fifth phase of the iconic and path-breaking Science Express.
  • The SEBS is a unique collaborative initiative of Department of Science & Technology (DST) and Ministry of Environment & Forests (MoEF), Government of India

ENVIRONMENT EDUCATION, AWARENESS & TRAINING (EEAT) SCHEME

  • EEAT a Central Scheme launched during the 6th Five Year Plan in 1983-84 with the following objectives:
  1. To promote environmental awareness among all sections of the society.
  2. To spread environmental education, especially in the non-formal system
  3. To facilitate development of education/training materials and aids in the formal education sector.
  4. To promote environment education through existing educational/scientific institutions

NATIONAL ENVIRONMENT AWARENESS CAMPAIGN (NEAC)

  • The NEAC was launched in 1986 with the objective of creating environmental awareness at the national level.
  • It is a multi-media campaign which utilises conventional and non-conventional methods of communication for disseminating environmental messages.
  • Under this campaign, nominal financial assistance is provided to registered NGOs, schools, colleges, universities, research institutions, women and youth organisations, army units, State

ECO-CLUBS (NATIONAL GREEN CORPS)

  • The main objectives of this programme are to educate children about their immediate environment and impart knowledge about the eco-systems, their interdependence and their need for survival, through visits and demonstrations and to mobilise youngsters by instilling in them the spirit of scientific inquiry into environmental preservation.
  • Global learning and Observations to Benefit the Environment (GLOBE)
  • The GLOBE is an International Science and Education Programme, which stress on hands-on participatory approach.

MANGROVES FOR THE FUTURE

  • Mangroves for the future are a partnership-based initiative promoting investment in coastal ecosystems for sustainable development

Mission

  • To promote healthy coastal ecosystems through a partnership-based, people-focused, policy-relevant and investment-oriented approach, which builds and applies knowledge, empowers communities and other stakeholders, enhances governance, secure livelihoods, and increases resilience to natural hazards and climate change.

विज्ञान एक्सप्रेस – जैव विविधता विशेष

  • एसईबीएस (विज्ञान एक्सप्रेस- जैव विविधता विशेष ) एक विशेष रूप से डिजाईन की गयी 16 डिब्बों वाली ट्रेन पर की जाने वाली एक नवोन्मेष प्रदर्शनी है | देश की अनन्य जैव विविधता पर व्यापक जागरूकता का निर्माण करने के उद्देश्य से इस ट्रेन ने 5 जून से 22 दिसम्बर 2012 तक पूरे भारत की यात्रा की |
  • एसईबीएस, प्रतिष्ठित तथा पथ प्रवर्तक विज्ञान एक्सप्रेस का पाँचवां चरण है |
  • एसईबीएस, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार की एक अनूठी सहयोगपूर्ण पहल है |

पर्यावरण शिक्षा, जागरूकता एवं प्रशिक्षण योजना –

  • पर्यावरण शिक्षा, जागरूकता एवं प्रशिक्षण योजना एक केंद्रीय योजना है जिसकी शुरुआत वर्ष 1983-84 में छठी पंचवर्षीय योजना में निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ की गयी थी :
  1. समाज के सभी वर्गों में पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देना |
  2. पर्यावरणीय शिक्षा का प्रसार करना, विशेष रूप से अनौपचारिक तरीके से |
  3. औपचारिक शिक्षा क्षेत्र में शैक्षणिक / प्रशिक्षण सामग्रियों तथा सहायता के विकास को सुगम बनाना |
  4. मौजूदा शैक्षणिक/ वैज्ञानिक संस्थानों के माध्यम से पर्यावरण संबंधी शिक्षा को बढ़ावा देना |

राष्ट्रीय पर्यावरण जागरूकता अभियान

  • राष्ट्रीय पर्यावरण जागरूकता अभियान की शुरुआत वर्ष 1986 में राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरणीय जागरूकता का निर्माण करने के उद्देश्य से की गयी थी |
  • यह एक बहुमाध्यम  (मल्टी-मीडिया) अभियान है जो पर्यावरणीय संदेशों का प्रसार करने के लिए पारंपरिक तथा गैर-पारंपरिक संचार माध्यमों का इस्तेमाल करता है |
  • इस अभियान के अंतर्गत, पूरे देश के पंजीकृत गैर-सरकारी संगठनों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, महिला एवं युवा संगठनों, सेना इकाइयों, राज्य

इको-क्लब्स ( राष्ट्रीय हरित दल )

  • इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके सन्निकट  पर्यावरण के बारे में शिक्षित करना तथा उन्हें पारितंत्रों , उनकी एक-दूसरे पर निर्भरता तथा जीवित रहने के लिए उनकी ज़रूरत के बारे में यात्राओं तथा प्रदर्शनी के माध्यम से ज्ञान प्रदान करना एवं युवाओं के मन में पर्यावरण संरक्षण के प्रति वैज्ञानिक अनुसंधान की भावना जगाकर उन्हें संगठित करना है |
  • पर्यावरण को लाभ पहुंचाने के लिए वैश्विक शिक्षा तथा अवलोकन | (ग्लोब )
  • GLOBE एक अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान एवं शिक्षा संबंधी कार्यक्रम है जो व्यवहारिक और क्रियाशील सह्भागितामूलक दृष्टिकोण पर जोर देता है |  

भविष्य के लिए मैन्ग्रोव :

  • भविष्य के लिए मैन्ग्रोव एक साझेदारी आधारित पहल है जो सतत् विकास के लिए तटीय पारितंत्र में निवेश को प्रोत्साहित करता है |

मिशन

  • स्वस्थ तटीय पारितंत्र को साझेदारी आधारित, लोगों पर केंद्रित, नीति-संगत तथा निवेश उन्मुख दृष्टिकोण के माध्यम से बढ़ावा देना, जो ज्ञान का निर्माण तथा उसे प्रयोग में लाता है, समुदायों तथा अन्य हितधारकों को सशक्त बनता है,  प्रशासन में सुधार करता है, आजीविका को सुरक्षित करता है, तथा प्राकृतिक आपदाओं एवं जलवायु परिवर्तन के प्रति सह्यता में वृद्धि करता है |

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UPSC Indian History Notes | IAS Prelims 2018 – Online Exam Preparation

UPSC Indian History Notes | IAS Prelims 2018 – Online Exam Preparation

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Post Mauryan Era

  • After Ashoka’s death, his successors were not able to keep the vast Mauryan kingdom intact.
  • Provinces started declaring independence. N-W India slipped out of Mauryan control and a series of foreign invasion affected this region.
  • Kalinga declared its independence and in further south Satavahanas declared their independent rule
  • As a result, the Mauryan empire was confined to Gangetic valley & soon replaced by Sunga dynasty

Sunga Dynasty (185 BC-73BC)

Capital: Vidisha (Madhya pradesh)

  • Founder of Sunga dynasty was Pushyamitra Sunga, who was commander in chief under the Mauryas.
  • He assassinated the last Mauryan ruler & claimed the throne.
  • After the invasion from Bactrian Greeks from N-W, Greeks advanced up to Patliputra and occupied it for some time but Pushyamitra Sunga reclaimed it.
  • Pushyamitra was a staunch follower of Brahmanism and persecutor of Buddhists, however he patronised Buddhist art and during his reign Buddhist monuments of Bharhut (MP) & Sanchi were renovated
  • After death of Pushyamitra, his son Agnimitra became the ruler
  • The last Sunga ruler was Devabhuti, Who was murdered by his own minister Vasudeva Kanva, Founder of Kanva dynasty.
  • Kanva dynasty ruler for approx 45 years & then Supplanted by Satavahanas & few time later came Gupta’s at Magadha

Effect of Sunga’s

  • Defended Gangetic valley from foreign invaders, revived brahmanism, vaishnavism, horse sacrifice and use of Sanskrit language.
  • Hence, Sunga rule was a brilliant anticipation of golden age of Guptas

Satavahanas (60 BC-225 AD)

Capital: Paithan/ Pratisthan on the river Godavari

  • Founder:Simuka.
  • He was succeeded by Krishna, who extended his kingdom to west uptil Nashik.
  • Satavahanas were the most important of the native successors of the Mauryas in Deccan and Central India.
  • In deccan, Satavahanas established their independent rule after the decline of Mauryas.
  • Their rule lasted for 450 years and were known as Andhras

Chedi dynasty of Kalinga

  • The history of Kalinga after the death of Ashoka is shrouded in obscurity.
  • A new dynasty known as the Cheti or Chedi dynasty, rose in the region probably in 1st century BC.
  • Information of this dynasty comes from Hathigumpha inscription of Kharavela (3rd ruler of dynasty)
  • A follower of Jainism,Kharavela was liberal patron of Jain monks for whose residence he constructed caves on the Udayagiri hill, near Bhubaneswar.

मौर्योत्तर काल

  • अशोक की मृत्यु के बाद, उनके उत्तराधिकारी विशाल मौर्य साम्राज्य को यथावत रखने में सक्षम नहीं थे।
  • विभिन्न प्रांतों ने स्वतंत्रता की घोषणा शुरू कर दी।उत्तर-पश्चिम भारत मौर्यों के हाथ से फिसल गया एवं इस पर कई विदेशी आक्रमण हुए |
  • कलिंग ने स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दिया एवं दक्षिण सातवाहन  वंश ने भी स्वतंत्र शासन की घोषणा कर दी |
  • इसके परिणामस्वरूप ,मौर्य साम्राज्य गंगा के घाटी तक ही सीमित हो गया और बहुत जल्द यह शुंग राजवंश द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया |

शुंग राजवंश

राजधानी: विदिशा (मध्यप्रदेश)

  • शुंग राजवंश के संस्थापक पुष्यमित्र शुंग थे,जो मौर्य सम्राज्य में मुख्य सेना अध्यक्ष थे |
  • इन्होने अंतिम मौर्य शासक की हत्या कर दी और सिंहासन पर कब्जा कर लिया |
  • यूनानियों के उत्तर-पश्चिम आक्रमण के बाद वो पाटलिपुत्र तक बढ़ गए थे,परन्तु इनके कुछ समय के कब्जे के बाद पुष्यमित्र शंगु ने इसे पुनः प्राप्त कर लिया।
  • पुष्यमित्र ब्राह्मणवादी एवं बौद्ध धर्म के खिलाफ थे |हालांकि उन्होंने बौद्ध कला का संरक्षण किया और उनके शासन के दौरान भरहुत (मध्यप्रदेश ) और सांची के बौद्ध स्मारकों का पुनर्निर्माण किया
  • पुष्यमित्र की मृत्यु के बाद,उनके बेटे अग्निमित्र ने शासन संभाला |
  • अंतिम शुंग शासक देवभूति थे |इनकी हत्या इनके ही मंत्री वासुदेव कण्व ने कर दी जो कण्व राजवंश का संस्थापक था |
  • लगभग 45 वर्षों के लिए कण्व राजवंश का शासन रहा उसके बाद सातवाहन आये एवं कुछ समय बाद गुप्त राजवंश का मगध पर कब्जा हो गया |

शुंग राजवंश का प्रभाव

  • विदेशी आक्रमणकारियों से गंगा घाटी की रक्षा की  ब्राह्मणवाद, वैष्णववाद, घोड़े के बलिदान और संस्कृत भाषा का प्रचलन वापिस से किया |
  • इस प्रकार शुंग शासन ने गुप्त राजवंश को शासन करने के लिए एक सुनहरा आधार प्रदान किया |

सातवाहन

राजधानी: गोदावरी नदी पर पैठन / प्रतिष्ठान  

  • संस्थापक: शिमुक
  • शिमुक का उत्तराधिकारी उसका भाई कृष्ण (कन्ह) था जिसने राज्य का विस्तार पश्चिम में नासिक तक किया
  • दक्कन एवं मध्य भारत में सातवाहन मौर्यों के उत्तराधिकारी के रूप में उभरे |
  • मौर्यों के पतन के बाद सातवाहनों ने दक्कन में स्वतंत्र शासन चलाया |
  • इन्होने लगभग 450 वर्ष तक शासन किया एवं इन्हे आंध्र कहा गया है |

कलिंग का चेदि साम्राज्य

  • अशोक की मृत्यु के बाद कलिंग का इतिहास अस्पष्टता में डूबा हुआ है।
  • इसके बाद इस राज्य में चेदि राजवंश का उदय हुआ जो सम्भवतः 1 ईसा पूर्व माना गया है |
  • इस वंश के विषय में इसके तीसरे शासक खारवेल के हाथीगुम्फ शिलालेख (पुरी,उदयगिरि )से प्राप्त होती है |
  • खारवेल जैन धर्म का अनुयायी था,ये जैन भिक्षुओं के प्रति उदार थे,उन्होंने जैन भिक्षुओं के लिए  भुवनेश्वर के निकट उदयगिरि पहाड़ी पर गुफाओं का निर्माण करवाया था।

UPSC Indian History Notes

Foreign successors of Mauryas

  • After The decline of Mauryan Empire, many new foreign rulers arrived and had a deep impact on the Indian society and culture. Most important of them were –
  • Indo-Greeks (Bactrian kings – Greeks – 2nd Century BC)
  • Shakas(1st Century BC-4th Century BC)
  • Parthians (1st Century BC-1st Century AD)
  • Kushans(1st Century AD-3rd Century AD)

Indo – Greeks (Bactrians)

  • They came in 2nd Century BC and got settled in Northwestern India (Afghanistan) and made Taxila their Capital.
  • The first known king was Demetrius
  • Their greatest king was Menander, known as Milind in Indian literature.
  • In his period, a great Buddhist scholar Nagasena, also called Nagarjuna, wrote a book ‘Milindpanho’ in Sanskrit.
  • Milindpanho literally means questions of Milind.
  • It is a book on Buddhist philosophy, where Milind is asking questions to a Buddhist monk about life.

Contribution of Bactrians:

  • Coins: They were the first to use gold coins in India. They were also the first to use date and images on coins.
  • Astronomy: They helped in the development of astronomy and astrology. They made a week of 7 days (Greek influence).
  • Art: They developed Gandhara School of sculptural art also known as Hellenistic Art.
  • Hellenistic = Greek + Persian + Indian
  • Themes: Buddha and his life were themes of this art.

Shakas (Scythians – Central Asia)

  • Shakas came to India from Central Asia in 1st Century AD and settled in Punjab to Gujarat region.
  • The wall of China was built in the south to protect china from Shaka attack in 3rd C.
  • There were many dynasties in Shakas which ruled. Shakas were a group of people and not a single dynasty like Mauryas and Mughals.
  • They had two major headquarters in India – Ujjain and Mathura.
  • They introduced the concept of ‘Kshatrapi’ system-military governorship appointed by the king.

Parthians (Phalvas) – Persia

  • They came from Persia and settle in the western part of India.
  • Takht – e – Bahi inscription tells about them.
  • Most famous king is Gondopherous.
  • It is believed that the first Christian missionary, Saint Thomas, came to his court around 52 AD.
  • According to a Christian tradition, Saint Thomas was sent by the Christ himself.

Kushanas (Yuthi Tribe) – Central Asia

  • They came from Central Asia and occupied area from Afghanistan, Kashmir to Prayag (Allahabad).
  • Amongst the foreigners they had the largest empire.
  • They had two headquarters – Peshawar and Mathura.
  • Kanishka was the most powerful king of Kushans. And ruled in 1st – 2nd C.

Some great scholars of this period:

  • Charak: ‘Charak Samhita’
  • It is the first scientific book on medicine in India. It describes in detail the symptoms, causes, and cure of the diseases.
  • Many surgical process and instruments are also mentioned in the book.
  • The book is known as the encyclopedia of medicine in India.
  • Asvaghosa wrote Buddha Charita. The first biography of Buddha. It was written in Sanskrit.

Contribution of Kushans:

  • They accepted Indian religion and language. As they themselves were tribesmen they did not have an organized religion before.
  • They also followed Vaishnavism as it was more liberal than Shaivism.
  • For the first time there is a mention of ‘Vasudev Krishna’ in Mathura.
  • Horse riding was introduced by them. Use of stirrup, saddle and reins was introduced. Chariots became outdated.
  • A new fashion and costumes were introduced. Hat, leather boots, pants and overcoat.

मौर्य के विदेशी उत्तराधिकारी

  • मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद, कई नए विदेशी शासकों ने आकर भारतीय समाज और संस्कृति पर गहरा प्रभाव छोड़ा । उनमें से सबसे महत्वपूर्ण थे –
  • हिन्द-यूनानी ( बाख़्तर शासक – यूनानी – 2 सदी ईसा पूर्व)
  • शक (1 शताब्दी ईसा पूर्व -4  सदी ईसा पूर्व)
  • पहलवी साम्राज्य (1 शताब्दी ईसा पूर्व -1 सदी ईस्वी )
  • कुषाण राजवंश (1 शताब्दी ईस्वी – तीसरी शताब्दी ईस्वी )

हिन्द-यूनानी (बाख़्तर)

  • ये दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व आये एवं उत्तर-पश्चिमी भारत (अफ़ग़ानिस्तान) में बस गए और तक्षशिला को अपनी राजधानी बनाया ।
  • इसके प्रथम शासक देमेमैत्रियस थे |
  • मेनांडर इसके महान शासक थे जिसे  भारतीय साहित्य में मिलिन्द कहा जाता है |
  • इस काल में नागसेन नामक एक महान बौद्ध विद्वान जिसे नागार्जुन भी कहते है,इन्होने संस्कृत में एक पुस्तक लिखी जिसका नाम ‘मिलिन्दपन्हों’ था
  • मिलिन्दपन्हों का शब्दिक अर्थ मिलिन्द के प्रश्न था
  • यह बौद्ध दर्शन की एक पुस्तक थी जिसमे मिलिंद जीवन के संबंध में बौद्ध भिक्षु से प्रश्न पूछ रहे है |

बाख़्तर राजवंश का योगदान:

  • सिक्के:भारत में सोने के सिक्कों का उपयोग करने वाले वे सबसे पहले बाख़्तर ही थे |
  • खगोल विज्ञान: उन्होंने खगोल विज्ञान और ज्योतिष के विकास में मदद की। उन्होंने 7 दिनों का एक सप्ताह बनाया (यूनान का प्रभाव)।
  • कला: उन्होंने गांधार मूर्तिकला के सम्प्रदाय को विकसित किया इसे हेलेनिस्टिक आर्ट के रूप में भी जाना जाता है।
  • हेलेनिस्टिक = यूनान+फ़ारसी+भारतीय
  • विषय:इनका विषय बुद्ध एवं उनका जीवन था |

शक (सिथियन – मध्य एशिया)

  • शक मध्य एशिया से प्रथम शताब्दी में भारत आये एवं पंजाब से गुजरात तक के क्षेत्रों में बस गए
  • शक के आक्रमण में से बचने के लिए तीसरी शताब्दी में दक्षिण में चीन की दीवार का निर्माण किया गया |
  • शक में कई राजवंश शामिल थे जिन्होंने शासन किया | शक लोगों का एक समूह था न की मौर्यों और मुग़लों की तरह एकल राजवंश |
  • भारत में उनके दो  मुख्यालय – उज्जैन और मथुरा
  • उन्होंने क्षत्रप प्रणाली की अवधारणा को शुरू किया,यह राजा द्वारा नियुक्त सैन्य प्रशासन था |

पहलवी साम्राज्य- फारस

  • ये फारस से आये थे एवं भारत के पश्चिमी भाग में बस गए |
  • तख्त-ए-बहि शिलालेख उनके बारे में उल्लेख करती है |
  • गॉन्डोफर्नीज इस साम्राज्य के सुप्रसिद्ध शासक थे |
  • ऐसा माना जाता है की प्रथम ईसाई मशनरी संत थॉमस उनके न्यायालय में 52 वीं ईस्वी में आये थे |
  • ईसाई पंथ के अनुसार ईसा मशीह ने स्वयं संत थॉमस को भेजा था |

कुषाण (यूथि जनजाति) – मध्य एशिया

  • ये मध्य एशिया से आए थे और  अफगानिस्तान, कश्मीर से प्रयाग (इलाहाबाद) तक के क्षेत्र पर कब्जा कर लिया |
  • जितने भी विदेशी आक्रमणकारी थे,उन सब में पहलवी साम्राज्य सबसे विशाल था |
  • इनके दो मुख्यालय थे – पेशावर और मथुरा
  • कनिष्क कुषाण वंश का सबसे शक्तिशाली राजा था और प्रथम से दूसरी शताब्दी तक शासन किया |

इस काल के कुछ महान विद्वान:

  • चरक: ‘चरक संहिता’
  • यह भारत में चिकित्सा पर पहली वैज्ञानिक पुस्तक है | इसमें बीमारियों के लक्षणों, कारणों और इलाज के बारे में विस्तार से वर्णन है |
  • इसमें कई शल्य चिकित्साएं एवं उनके उपकरणों का भी उल्लेख किया गया है |
  • इस पुस्तक को भारत में औषधि के विश्वकोश के रूप में जाना जाता है।
  • अश्वघोष ने बुद्ध चरित्र की रचना की | यह बुद्ध की प्रथम थी एवं संस्कृत में लिखी गई थी |

कुषाण राजवंश का योगदान

  • उन्होंने भारतीय धर्म और भाषा को स्वीकार किया। चूँकि वे स्वयं कबीलाई लोग थे उनका भी को व्यवस्थित धर्म नहीं था |
  • ये वैष्णववाद का पालन करते थे क्योंकि यह शैव धर्म से ज्यादा उदार था।
  • पहली बार मथुरा में ‘वासुदेव कृष्ण’ का उल्लेख किया गया ।
  • घोड़े की सवारी उनके द्वारा शुरू की गई थी। रेशम, काठी और गद्दी का इस्तेमाल किया गया था।
  • रथ इनके शासन काल में अप्रासंगिक हो गए |
  • उन्होंने एक नए फैशन और वेशभूषा की शुरुआत की | इस वेशभूषा में टोपी, चमड़े के जूते, पैंट और ओवरकोट शामिल थे |

Impact of Central Asian Contacts

Structures

  • Advanced in building activities.
  • Use of burnt bricks for flooring and of tiles for both flooring and roofing.
  • Construction of brick—wells

Pottery

  • Red ware is typical pottery with plain and polished.
  • Know red pottery techniques
  • The distinctive pots are sprinklers and spouted channels.
  • Better cavalry
  • The Sakas and Kushans added new ingredients to Indian culture and enriched it immensely.
  • They Settled in India and assimilated with its culture.
  • Because they don’t have their own script, language and religion they adopted these from India.
  • Became integrated part of Indian society.
  • Introduced cavalry and use of riding horse on large scale
  • Use of reins and saddles in the Buddhist sculptures.
  • Possible used stirrup
  • Introduced turban, tunic, trousers, and heavy long coat (see the effect – the Afghans and Punjabis wear turbans, and the sherwani (successor of the long coat) even today )

Trade and agriculture

  • Created trade contacts between Indian and Central Asia
  • Result: India received gold from Altai mountains
  • Profit in roman trade as received gold coins
  • Income from silk route.
  • Promoted agriculture
  • Large scale irrigation in Pakistan, Afghanistan and Western Asia.

Polity

  • Development of a feudatory organization.
  • Adopted the pompous title of king of kings to indicate their supremacy over numerous small princes.
  • Strengthened the origin of kingship
  • Called themselves as sons of gods. (while Ashoka called dear to gods)
  • Introduced satrap system of government (empire divided into satrapies under a satrp)
  • Introduced hereditary dual rule (two kings ruling in the same kingdom at one and the same time)
  • Introduced Military governorship.

मध्य एशिया के साथ संबंधों का प्रभाव

मध्य एशिया के साथ संबंधों का प्रभाव

भवन निर्माण एवं सरंचनाएं

  • इनकी भवन निर्माण पद्धति उच्च कोटि की थी |
  • फर्श निर्माण के लिए पकाई गई ईंटो का प्रयोग किया जाता था हालंकि फर्श और छत दोनों पर खपरेल का उपयोग भी होता था |
  • कुओं का निर्माण भी ईंटो से होता था |

मिट्टी के बर्तन

  • लाल बर्तन विशिष्ट प्रकार के थे ये पुताई वाले और बिना पुताई वाले होते थे |
  • लाल बर्तनों को बनाने की पद्धति जानते थे |
  • विशिष्ट प्रकार के फुव्वारे वाले एवं छिड़काव करने वाले बर्तन थे |
  • सुव्यवस्थित अश्‍वसेना थी |
  • शक और कुषाणों ने भारतीय संस्कृति में नए तत्वों को जोड़ा एवं उन्हें समृद्धि प्रदान की |
  • वे भारत में बस गए एवं भारतीय संस्कृति को आत्मसात किया |
  • क्यूंकि इनकी स्वयं की कोई लिपि,भाषा एवं धर्म नहीं था इसलिए उन्होंने भारत से ये सब चीज़ें ग्रहण कर ली |
  • इस प्रकार ये भारतीय समाज का ही अभिन्न अंग बन गए
  • अश्वसेना एवं बड़े पैमाने पर घुड़सवारी की शुरुआत की |
  • बौद्ध मूर्तियों में लगाम और काठी का प्रयोग (घोड़ों से संबंधित)।
  • घोड़ों में रकाब का प्रयोग शुरू किया (घुड़सवार के पैर रखने का खोल )
  • इन्होने पगड़ी,अंगरखा, पतलून और भारी लम्बे कोट की शुरुआत की (आज भी इनका प्रभाव पंजाब और अफगानिस्तान में देखा जा सकता है जो शेरवानी और पगड़ी पहनते है |)

व्यापार और कृषि

  • भारत और मध्य एशिया के बीच व्यापारिक बने
  • परिणाम: भारत को अल्ताई पहाड़ों से सोने की प्राप्ति हुई 
  • रोमन व्यापार से लाभ के रूप में सिक्कों की प्राप्ति हुई |
  • रेशम मार्ग से आय
  • कृषि को बढ़ावा दिया
  • पाकिस्तान, अफगानिस्तान और पश्चिमी एशिया में बड़े पैमाने पर सिंचाई की व्यवस्था की गई |

राज-व्यवस्था

  • एक सामंतवादी पद्धति थी |
  • छोटे राजाओं पर अपना प्रभुत्व प्रदर्शित करने के लिए उन्होंने स्वयं को राजाओं के राजा का शीर्षक दिया |
  • बादशाहत की उत्पत्ति को मजबूत बनाया
  • स्वयं को भगवान का सुपुत्र कहा |(जबकि अशोक को देव प्रिय कहा गया था )
  • क्षत्रप प्रणाली किस शुरुआत की (राज्य क्षत्रपि में विभाजित था जो प्रत्येक क्षत्रप के अधीन थी )
  • दो तरह की वंशानुगत शासन प्रणाली की शुरुआत की | (एक ही समय में एक ही राज्य के दो शासक )
  • सैन्य शासन की शुरुआत की |

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