UPSC IAS Sociology Study Content | Emile Durkheim – Suicide, Religion and society

UPSC IAS Sociology Study Content | Emile Durkheim – Suicide, Religion and society

UPSC IAS Sociology Study Content | Emile Durkheim – Suicide, Religion and society

UPSC IAS Sociology Study Content | Emile Durkheim – Suicide, Religion and society

UPSC IAS Sociology Study Content | Emile Durkheim – Suicide, Religion and society

Durkheim – Suicide / दुर्खीम – आत्महत्या

Suicide (1897)/आत्महत्या (1897) :

Reasons for taking the theme of ‘Suicide’/“ आत्महत्या” को विषय के रूप में लेने के कारण :

  • Suicide was a growing social problem in Europe by 1850 and many felt that it was associated with the development of industrial society. Industrialization had advanced individualism, accelerated social fragmentation, and weakened the social bonds binding individuals to society./वर्ष 1850 तक आत्महत्या एक बढती हुई  सामाजिक समस्या थी तथा कईयों ने यह महसूस किया कि यह औद्योगिक समाज के विकास से सम्बंधित थी | औद्योगीकरण ने व्यक्तिवाद को उन्नत ,  सामाजिक विखंडन को त्वरित , तथा सामाजिक बंधनों को कमजोर कर दिया था, जो व्यक्तियों को समाज से जोड़ते थे |
  • Industrial society had made economic institutions dominant over other social institutions and this served to place individual self-interest and economic gain over the collective forces of society./औद्योगिक समाज ने अन्य संस्थाओं के स्थान पर आर्थिक संस्थाओं का निर्माण किया था तथा इन संस्थाओं ने व्यक्तिगत स्वार्थ एवं आर्थिक लाभ को समाज की सामूहिक शक्तियों के ऊपर रखने के लिए कार्य किया |
  • The political crisis of the Dreyfus affair in 1894 was a serious blow to French national unity and drew attention to how much social fragmentation and egoistic forces had replaced the collective authority of society. This led Durkheim to believe that the theme of social dissolution brought about by industrial society could be examined sociologically by looking at the mechanisms in society which link individuals to social purposes outside themselves./वर्ष 1894 में ड्रेफस अफेयर के राजनीतिक संकट ने फ़्रांस की राष्ट्रीय एकता को गहरा आघात पंहुचाया तथा इस बात पर ध्यान खींचा की सामाजिक विखंडन एवं अहंकारी शक्तियों ने समाज के सामूहिक प्राधिकरण को कितना अधिक प्रतिस्थापित कर दिया था | इसने दुर्खीम को यह मानने पर विवश किया कि औद्योगिक समाज के द्वारा लाये गए  सामाजिक विघटन के विषय की जांच  समाजशास्त्रीय ढंग से समाज की उस  क्रियाविधि का अवलोकन करके की जा सकती है, जो व्यक्तियों को खुद से बाहर,  सामाजिक उद्देश्यों से जोड़ती है|
  • Factual evidence made available by comparative mortality data from different societies linked suicide to social factors such as industrial change, occupation, family life and religion, and this served to focus attention on society and social institutions rather than on complex psychological factors. Durkheim found that the statistical data contained in the records of suicidal deaths for the period could be categorized according to age, religion, sex, occupation, military service and marital status, and this led directly to a search for the role played by social factors in the cause of suicide./विभिन्न समाजों से प्राप्त तुलनात्मक मृत्यु दर के आंकड़ों के आधार पर उपलब्ध तथ्यात्मक प्रमाणों ने आत्महत्या को सामाजिक कारकों, जैसे कि औद्योगिक परिवर्तन, पेशा, पारिवारिक जीवन, तथा धर्म से जोड़ा तथा इसने जटिल मनोवैज्ञानिक कारकों के बजाय समाज तथा सामाजिक संस्थानों पर ध्यान केन्द्रित किया | दुर्खीम ने यह पाया कि आत्महत्या से होने वाली मौतों में निहित सांख्यिकीय आंकड़े उम्र, धर्म, लिंग, व्यवसाय, सैन्य सेवा, तथा वैवाहिक स्थिति के अनुसार वर्गीकृत किये जा सकते हैं , तथा यह उस भूमिका की खोज की वजह बना जो आत्महत्या के कारण में सामाजिक कारकों के द्वारा  निभायी जाती है |

Suicide/आत्महत्या :

  • Durkheim study of ‘suicide’ was a shift from psychological to sociological theory of suicide. By stating that the social causes of suicide precede individual causes, Durkheim eliminated the need to look at the various forms suicide assumed in individuals, including depression, personal setbacks, and psychiatric disorders. Also, in focusing his attention on various social environments to which the individual was connected, Durkheim eliminated the need of looking at individual disposition or personality./दुर्खीम के आत्महत्या का अध्ययन, आत्महत्या के मनोवैज्ञानिक से समाजशास्त्रीय सिद्धांत के तरफ परिवर्तन था | यह बताकर कि आत्महत्या के सामाजिक कारण व्यक्तिगत कारणों से अधिक महत्त्व के होते हैं, दुर्खीम ने व्यक्तियों में आत्महत्या के विभिन्न रूपों जिसमें अवसाद, निजी असफलता, तथा मनोवैज्ञानिक विकार शामिल हैं, की तरफ देखने की आवश्यकता  को समाप्त किया | साथ ही, व्यक्ति से जुड़े विभिन्न सामाजिक परिवेशों पर अपना ध्यान केन्द्रित करने के लिए, दुर्खीम ने व्यक्ति के स्वभाव अथवा व्यक्तित्व की तरफ देखने की आवश्यकता को समाप्त किया |

Durkheim defined Suicide as ‘all cases of death resulting directly or indirectly from a positive or negative act of the victim himself, which he knows will produce this result’./दुर्खीम ने आत्महत्या को पीड़ित के खुद के सकारात्मक अथवा नकारात्मक कार्य, जिसके बारे में वह जानता था कि इसका परिणाम यह होगा,  की वजह से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष परिणाम के रूप में होने वाली मौत के सभी मामलों के रूप में परिभाषित किया |

Durkheim used statistical analysis in his study of suicide/दुर्खीम ने आत्महत्या के अपने अध्ययन में  सांख्यिकीय विश्लेषण का प्रयोग इसलिए किया:-

(a) To refute theories based on psychology, biology, genetics, climatic and geographical factors./मनोविज्ञान, जीव विज्ञानं, आनुवांशिकी , तथा भौगोलिक कारकों पर आधारित सिद्धांतों का खंडन करने के लिए |

(b) To support with empirical evidence his own sociological explanation of suicide./आत्महत्या की अपनी खुद की समाजशास्त्रीय व्याख्या को अनुभवजन्य प्रमाण के साथ प्रमाणित करने के लिए |

Suicidal currents – Collective tendencies that dominate some very susceptible individuals and catch them up in their sweep. The act of suicide at times, is interpreted as a product of these currents. Durkheim rejected the various extra-social factors such as heredity, climate, mental alienation, racial characteristics and imitation as the cause of suicide and concluded that suicide which appears to be a phenomenon relating to the individual is actually explicable aetiologically with reference to the social structure and its ramifying functions which may induce, perpetuate or aggravate the suicide potential./आत्मघाती प्रवृत्तियां – सामूहिक प्रवृत्तियां जो कुछ अति संवेदनशील व्यक्तियों पर हावी हो जाती हैं एवं उन्हें अपने प्रभाव में ले लेती हैं | कभी कभी आत्महत्या के कार्य की व्याख्या इन प्रवृत्तियों के परिणाम के रूप में की जाती है | दुर्खीम ने विभिन्न अतिरिक्त-सामाजिक कारको जैसे कि आनुवांशिकी, जलवायु, मानसिक अलगाव, नस्लीय विशेषताओं तथा अनुकृति आदि  को आत्महत्या के कारण के रूप में खारिज कर दिया तथा यह निष्कर्ष निकाला कि आत्महत्या, जो किसी व्यक्ति से जुड़ी घटना प्रतीत होती है, वह वास्तव में सामाजिक संरचना एवं इसके श्रेणी विभाजन कार्यों, जो आत्महत्या की संभावनाओं को को प्रेरित , स्थिर अथवा उत्तेजित कर सकते हैं , के सन्दर्भ में स्पष्ट रूप से रोगपरक होती है |

Durkheim’s central thesis is that suicide rate is a factual order, unified and definite, for each society has a collective inclination towards suicide, a rate of self-homicide which is fairly constant for each society so long as the basic conditions of its existence remain the same. Social suicide rate – Number of suicidal deaths in a given society and the extent to which the ‘suicide rates’ themselves could be looked upon as establishing a pattern of suicide for a given society./दुर्खीम की केंद्रीय थीसिस यह है कि आत्महत्या की दर एक वास्तविक क्रम है, जो एकीकृत एवं निश्चित है, क्योंकि प्रत्येक समाज में आत्महत्या के प्रति सामूहिक झुकाव होता है, आत्महत्या की दर जो प्रत्येक समाज के लिए तबतक स्थिर रहती है जबतक उसके अस्तित्व की बुनियादी परिस्थितियां अभिन्न रहती हैं | सामाजिक आत्महत्या दर- एक समाज में ख़ुदकुशी से होने वाली मौतों की संख्या तथा वह सीमा जहाँ तक आत्महत्या की दरें”

Observations made by Durkheim after studying the suicide rates/आत्महत्या की दरों के अध्ययन के बाद दुर्खीम के द्वारा किये गए अवलोकन :

  • He noticed that the rates varied from society to society. Ex., they were higher in Germany in comparison to Italy; lower in Denmark in comparison to England./उन्होंने पाया कि दरों में समाज दर समाज भिन्नता थी | उदाहरण – इटली की तुलना में जर्मनी में ये दरें  अधिक थी; इंग्लैंड की तुलना में डेनमार्क में ये दरें कम थी |
  • He observed that between 1841 and 1872, the number of suicidal deaths in each of the countries did not change dramatically and were considered to be stable. Ex., between 1841-42 the number of suicidal deaths in France were 2814 and 2866 respectively. The stability of the rates within a given society was crucial as it meant that each society not only produced a ‘quota of suicidal deaths’ but certain social forces were operating to produce what Durkheim saw as the ‘yearly precision of rates’./उन्होंने देखा कि 1841 से 1872 के बीच, प्रत्येक देश में आत्महत्या से होने वाली मौतों की संख्या में नाटकीय रूप से बदलाव नहीं आया तथा उन्हें स्थिर माना गया |   उदाहरण – 1841-42 के बीच फ्रांस में ख़ुदकुशी से होने वाली मौतों की संख्या क्रमशः 2814 एवं 2886 थी |एक समाज में इन दरों की स्थिरता महत्वपूर्ण थी क्योंकि इसका अर्थ था कि प्रत्येक समाज ने ना केवल “ आत्महत्या से होने वाली मौतों का कोटा निर्मित कर लिया था बल्कि कुछ सामाजिक शक्तियां  
  • The observed stability of the rates meant that each society was a distinct social environment with different social characteristics, different religions, different patterns of family life, different military obligations and thus different suicide characteristics. Under these circumstances, each produced rate of suicidal deaths distinct from the other./दरों के अवलोकीय स्थायित्व का अर्थ है कि प्रत्येक समाज विभिन्न सामाजिक विशेषताओं, विभिन्न धर्म, पारिवारिक जीवन के विभिन्न प्रारूप, विभिन्न सैन्य जिम्मेदारियों के साथ और इस प्रकार विभिन्न आत्महत्या विशेषताओं के साथ एक अलग सामाजिक वातावरण था | इन परिस्थितियों के तहत, आत्महत्या वाली मौतों का प्रत्येक निर्मित दर दूसरों से अलग था |
  • When compared to the mortality rate, Durkheim noticed that the suicide rate demonstrated a far greater consistency than did the general mortality rate, which fluctuate randomly./मरण दर से तुलना करने पर, दुर्खीम ने यह पाया कि आत्महत्या दर सामान्य मरण दर, जो कि काफी ज्यादा ऊपर-नीचे होती रहती थी,   से अधिक स्थायी निरंतर थी |

3 Fundamental conclusions which turned on the question of the stability of the rates/3 मूल नतीजे जिन्होंने दर के स्थायित्व पर सवाल खड़े किये :

  • He believed that the stability of the rates showed that, while individual motives for suicide vary from case to case, the regularity exhibited by the social suicide rate was consistently stable./उनका मानना था कि दर के स्थायित्व यह दिखाते थे कि जहां एक तरफ आत्महत्या के व्यक्तिगत उद्देश्य हर मामले में अलग-अलग थे, वहीँ सामाजिक आत्महत्या दर द्वारा प्रदर्शित नियमितता निरन्तर स्थायी था |
  • Though the rates varied between societies, the stability of the rates within a particular society meant that each society produces a ‘quota of suicidal deaths’./भले ही समाजों के दर अलग अलग थे, एक विशेष समाज के अंदर दर के स्थायित्व का अर्थ था कि प्रत्येक समाज में अपना ‘आत्महत्या मौतों का कोटा’ था |
  • Durkheim took the position that the social suicide rate must represent a ‘factual order’ that is separate from individual disposition and, therefore, he thought it had a regularity which could be studied in its own right. In that the ‘social suicide rate’ is independent of individual suicide and has a stability of its own, it should therefore be the subject of a special study whose purpose would be to discover the social causes leading to a definite number of people that take their own lives in a given society./दुर्खीम ने इस बात का पक्ष लिया कि सामाजिक आत्महत्या दर को एक ‘वास्तविक क्रम’ प्रदर्शित करना चाहिए जो कि व्यक्तिगत मिजाज से अलग होते और इसलिए उनका मानना था कि इसमें एक निरंतरता थी जिसका अध्ययन इसके अपने तरीके से किया जा सकता था | ‘सामाजिक आत्महत्या दर’ से व्यक्तिगत आत्महत्या स्वतन्त्र है और इसमें इसका अपना एक स्थायित्व है, इसलिए इसे एक विशेष अध्ययन का विषय होना चाहिए जिसका उद्देश्य उन सामाजिक कारणों की खोज करना है जिसमें वे लोग शामिल होते जो बताए गए समाज में अपनी जिंदगियां दे देते हैं

 

Join Frontier IAS Online Coaching Center to prepare for UPSC/HCS/RAS Civil Service comfortably at your home at your own pace/time

HCS(Prelims+Mains+Interview)   HCS Prelims(Paper 1+Paper 2)    IAS+HCS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    RAS+IAS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    RAS(Prelims+Mains+Interview)     RAS Prelims     UPSC IAS Prelims      UPSC IAS(Prelims+Mains)

 

 

 

No Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!