UPSC IAS Exam Preparation 2018 | Online Geography Study Content

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Minerals: An introduction-

  • A mineral is a natural substance of organic or inorganic origin with definite chemical and physical properties.
  • Minerals are found in varied forms in nature, ranging from the hardest diamond to the softest talc.
  • Inverse relationship in quality and quantity of minerals i.e. good quality minerals are less in quantity as compared to low quality minerals.
  • Minerals are exhaustible over time, these take long to develop geologically and cannot be replenished immediately .

Mode of occurrence of minerals-

  • Generally found in “ores (an accumulation of any mineral mixed with other elements).

Minerals generally occur in these forms:

In Igneous and Metamorphic rocks

    • Found in the cracks, crevices, faults or joints.
    • The smaller occurrences are called veins and the larger are called lodes.
    • Veins and lodes are formed when minerals in liquid/molten and gaseous forms are forced upward through cavities towards the earth’s surface.
    • Example: Tin, copper, zinc and lead etc. are obtained from veins and lodes.

In sedimentary rocks

  • Minerals occur in beds or layers.
  • They have been formed as a result of deposition, accumulation and concentration in horizontal strata.
  • Coal and some forms of iron ore have been concentrated as a result of long periods under great heat and pressure.
  • Example:Gypsum, potash salt and sodium salt.

खनिज : एक परिचय-

  • एक खनिज विशिष्ट रासायनिक और भौतिक गुणों के साथ कार्बनिक या अकार्बनिक उत्पत्ति का एक प्राकृतिक पदार्थ है।
  • खनिज प्रकृति में विभिन्न रूपों में पाए जाते हैं, जिनमें से सबसे कठिन हीरे से लेकर नरम पाउडर तक|
  • खनिजों के गुणवत्ता तथा मात्रा के बीच प्रतिलोमी सम्बन्ध है अर्थात् निम्न गुणवत्ता वाले खनिजों की तुलना में अच्छी गुणवत्ता वाले खनिज मात्रा में कम हैं।
  • ये सभी खनिज समय के साथ समाप्त हो जाते हैं , ये भूगर्भिक रूप से विकसित होने में अधिक समय लेते हैं और इनका तुरंत पुनर्भरण नहीं किया जा सकता है |

खनिज की उपलब्धता-

  • आम तौर पर “अयस्क” (अन्य तत्वों के साथ मिश्रित किसी भी खनिज का एक संग्रह) में पाया जाता है

खनिज आम तौर पर इन रूपों में होते हैं:

आग्नेय और कायांतरित चट्टान में

    • दरारों, जोड़ों , भ्रंशों या  विदरों में पाया जाता है
    • छोटी जमाव को शिरा कहा जाता है और बड़े जमाव को परत  कहा जाता है|
    • शिराओं और परतों का निर्माण होता है जब तरल / पिघला हुआ और गैसीय रूपों में खनिजों को भू-पृष्ठ की ओर गुहा के माध्यम से ऊपर की तरफ धकेला जाता है ।
    • उदाहरण: टिन, तांबा, जस्ता और सीसा आदि शिराओं और परतों से प्राप्त होते हैं।

अवसादी  चट्टानों में

  • खनिज संस्तरों  या परतों में होते हैं।
  • क्षैतिज स्तर में निक्षेपण, संचयन और जमाव के परिणामस्वरूप उनका निर्माण हुआ  है।
  • कोयले और कुछ प्रकार के लौह अयस्क  बहुत गर्मी और दबाव के तहत लंबी अवधि के परिणाम के रूप में  सांद्रित हुए हैं ।
  • उदाहरण: जिप्सम, पोटाश नमक और सोडियम नमक।

Mode of occurrence of minerals-

By the decomposition of surface rocks: By the decomposition of surface rocks and the removal of soluble constituents, leaving a residual mass of weathered material containing ores.

Example: Bauxite

As alluvial deposits :

  • In sands of valley floors and the base of hills.
  • These deposits are called ‘placer deposits’ and generally contain minerals, which are not corroded by water.

Example: Gold, silver, tin and platinum

खनिज की उपलब्धता-

सतह चट्टानों के अपघटन से:

सतह के चट्टानों के अपघटन और घुलनशील घटकों को हटाने से, जो अयस्क वाली अविशिष्ट चट्टानें छोड़ जाती है |

उदाहरण: बॉक्साइट

जलोढ़ जमाव के रूप में:

घाटी तल के रेत और पहाड़ियों के आधार में  |

इन निक्षेपों को “ प्लेसर निक्षेप “  कहा जाता है और इनमे  आम तौर पर खनिज होते हैं, जो जल द्वारा घर्षित नहीं होते |

उदाहरण: सोना  चांदी, टिन और प्लैटिनम |

Mode of occurrence of minerals

From ocean waters :

Ocean waters contain vast quantities of minerals, but most of these are too widely diffused to be of economic significance.

Example: Common salt, magnesium and

Bromine

खनिज की उपलब्धता-

महासागरीय जल से :

महासागरीय जल में भी विशाल मात्रा में खनिज पाए जाते हैं लेकिन इनमे अधिकांश के व्यापक रूप से विसरित होने के कारण इनकी आर्थिक सार्थकता कम  है

उदाहरण : साधारण नमक, मैगनेसियम और ब्रोमिन

Distribution of minerals in India-

  • Minerals are generally concentrated in three broad belts in India. These belts are :

The North-Eastern Plateau Region

  • Extension: Chhotanagpur (Jharkhand), Odisha Plateau, West Bengal and parts of Chhattisgarh.
  • Major minerals: iron ore coal, manganese, bauxite, mica.

भारत में खनिजों का वितरण-

  • भारत में खनिज मुख्यतः तीन विस्तृत पट्टियों में सांद्रित हैं | ये पट्टियां हैं :-

उत्तर – पूर्वी पठारी प्रदेश :

  • विस्तार : छोटा नागपुर (झारखंड ), ओडिशा पठार, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के कुछ भाग |
  • मुख्या खनिज : लौह अयस्क, कोयला, मैंगनीज, बॉक्साइट और अभ्रक |

Distribution of minerals in India

The South-Western Plateau Region

  • Extension:  Karnataka, Goa and contiguous Tamil Nadu uplands and Kerala.
  • Major minerals: Contains high grade iron ore, manganese and limestone.
  • This belt does not have as diversified mineral deposits as the north-eastern belt.
  • Kerala: Monazite and thorium,bauxite clay.
  • Goa: Iron ore deposits.

भारत में खनिजों का वितरण-

दक्षिण- पश्चिमी पठार प्रदेश

  • विस्तार : कर्नाटक, गोवा तथा संस्पर्शी तमिलनाडु उच्च भूमि और केरल |
  • मुख्य खनिज : उच्च कोटि का लौह अयस्क, मैंगनीज तथा चूना पत्थर |
  • इस पट्टी के खनिज निक्षेप उत्तर पूर्वी पट्टी की भांति विविधतापूर्ण नहीं हैं |
  • केरल : मोनाज़िट, थोरियम और बॉक्साइट क्ले |
  • गोवा : लौह अयस्क निक्षेप |

Distribution of minerals in India

The North-Western Region

  • Extension: Along Aravali in Rajasthan and part of Gujarat.
  • Major minerals: Copper, zinc have been major minerals.
  • Rajasthan : Sandstone, granite, marble, Gypsum, salt deposits
  • Gujarat:petroleum deposits, salt

भारत में खनिजों का वितरण-

उत्तर – पश्चिमी प्रदेश :

  • विस्तार : राजस्थान में अरावली और गुजरात के कुछ हिस्सों में
  • मुख्य खनिज : तांबा, जिंक प्रमुख खनिज हैं
  • राजस्थान :  बलुआ पत्थर, ग्रेनाइट, संगमरमर, जिप्सम, नमक निक्षेप
  • गुजरात : पेट्रोलियम निक्षेप, नमक  

Classification of minerals

  • On the basis of composition, minerals are classified mainly as metallic, non-metallic and energy minerals.

Metallic mineral:

  • Contain metal (hard substances that conduct heat and electricity and have a characteristic lustre or shine) in raw form.
  • Metallic minerals can be further classified as  ferrous or non-ferrous.
  • Ferrous minerals contain iron like iron ore, manganese and chromites.
  • Non-ferrous minerals does not contain iron but may contain some other metal such as gold, silver, copper or lead.

खनिजों का वर्गीकरण-

संरचना के आधार पर, खनिजों को मुख्य रूप से धात्विक,अधात्विक और ऊर्जा खनिजों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

धात्विक खनिज:

  • कच्चे रूप में धातु (ठोस  पदार्थ जो गर्मी और बिजली का संचालन करते हैं और इसमें एक विशेष चमक होता है) शामिल होता है।
  • धात्विक खनिजों को आगे लौह या अलौह के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है
  • लौह खनिजों में लोहे पाए जाते हैं जैसे लौह अयस्क, मैंगनीज, क्रोमाइट
  • अलौह खनिजों में लोहे नहीं पाए जाते हैं लेकिन इसमें सोने, चांदी, तांबा या सीसा जैसे कुछ अन्य धातुएं हो सकती हैं।

Ferrous Mineral

  • Ferrous minerals account for about three fourths of the total value of the production of metallic minerals.

Example: iron ore, manganese, chromite

  • India is well-placed in respect of ferrous minerals both in reserves and production and  provides a strong base for the development of metallurgical industries.
  • India exports substantial quantities of ferrous minerals after meeting her internal demands.

Iron ore –

India has the largest reserve of iron ore in Asia.

The two main types of ore found in India are haematite and magnetite.

  • Magnetite is the finest iron ore with a very high content of iron up to 70 per cent and has excellent magnetic qualities, valuable in the electrical industry.
  • Hematite ore is the most important industrial iron ore in terms of the quantity used, but has a slightly lower iron content than magnetite. (50-60 per cent).

लौह खनिज-

  • लौह खनिज धात्विक खनिजों के उत्पादन मूल्य के तीन-चौथाई भाग का योगदान करते हैं |

उदाहरण : लौह अयस्क, मैंगनीज, क्रोमाइट

  • लौह खनिज के संचय और उत्पादन दोनों में ही हमारे देश की स्थिति अच्छी है और लौह खनिज धातु आधारित उद्योगों के विकास के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं |
  • भारत अपनी आंतरिक मांगों को पूरा करने के बाद लौह खनिजों की पर्याप्त मात्रा में निर्यात करता है।

लौह अयस्क-

एशिया में भारत में लौह अयस्क का सबसे बड़ा भंडार है

भारत में पाए जाने वाले दो मुख्य प्रकार के अयस्क हेमाटाइटऔर मैग्नेटाइट हैं।

  • मैग्नेटाइट सर्वोत्तम प्रकार का लौह अयस्क है जिसमे 70 % तक का लोहांश पाया जाता है . इसमें सर्वश्रेष्ठ चुम्बकीय गुण होते हैं जो विदयुत उद्योगों में विशेष रूप से उपयोगी होते हैं |
  • हेमेटाइट अयस्क  मात्रा के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक लौह अयस्क है, लेकिन इसमें मैग्नेटाइट की तुलना में थोड़े कम लोहांश पाए जाते हैं । (50-60 प्रतिशत)

Manganese

  • It is an important raw material for smelting of iron ore and also used for manufacturing ferro alloys.
  • Mainly used in the manufacturing of steel and ferro-manganese alloy.
  • Nearly 10 kg of manganese is required to manufacture one tonne of steel.
  • Also used in manufacturing bleaching powder, insecticides and paints.

Distribution:

Largest producer –Odisha(major mines-in Bonai, Kendujhar, Sundergarh, Gangpur, Koraput, Kalahandi and Bolangir.)

मैंगनीज

  • लौह अयस्क के प्रगलन के लिए मैंगनीज एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है और इसका उपयोग लौह – मिश्रातु में भी किया जाता है |
  • मुख्य रूप से इसका उपयोग इस्पात के विनिर्माण में किया जाता है |
  • एक टन इस्पात बनाने में लगभग १० किग्रा मैंगनीज की आवश्यकता होती है |
  • इसका उपयोग ब्लीचिंग पाउडर, कीटनाशक और पेंट बनाने में किया जाता है |

वितरण :

सबसे बड़ा उत्पादक – ओडिशा (मुख्य खानें – बोनाई, केंदूझार, सुंदरगढ़, गंगपुर, कोरापुट, कालाहांडी और बोलांगीर )

Non-Ferrous Minerals

  • India’s reserves and production of non- ferrous minerals is not very satisfactory.

Examples: Copper, Bauxite, Lead, Zinc and Gold

  • Play a vital role in many metallurgical, engineering and electrical industries.

Copper / तांबा

  • Copper is an important metal in the electrical industry for making wires, electric motors, transformers and generators.
  • It is malleable and ductile.
  • Mixed with gold to provide strength to jewellery.

Distribution:

Singhbhum district (Jharkhand), Balaghat district (Madhya Pradesh) and Khetri mines (Rajasthan).

Minor producers :

Agnigundala in Guntur District (Andhra Pradesh), Chitradurg and Hasan districts (Karnataka) and South Arcot district (Tamil Nadu).


अलौह खनिज-

  • भारत में अलौह खनिज की संचित राशि और उत्पादन अधिक संतोषजनक नहीं है |

उदाहरण – तांबा, बॉक्साइट, सीसा, जिंक और सोना

  • धातु शोधन, इंजीनियरिंग व् विदयुत उद्योगों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं |
  • तार, बिजली के मोटर्स, ट्रांसफार्मर और जनरेटर बनाने के लिए तांबा विदयुत उद्योग में एक महत्वपूर्ण धातु है।
  • यह आघातवर्ध्य तथा तन्य होता है |
  • गहने को सुदृढ़ता प्रदान करने  के लिए इसे स्वर्ण के साथ मिलाया जाता है |

वितरण:

सिंहभूम जिले (झारखंड), बालाघाट जिले (मध्य प्रदेश) और  खेतरी खान (राजस्थान)।

लघु  उत्पादक:

आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में अग्निगुण्डाला , चित्रदुर्ग और हसन जिले (कर्नाटक) और दक्षिण आरकॉट जिले (तमिल में) |

Non-metallic Minerals-Mica –

Non-metallic minerals are those which does not contain metal like Mica, limestone, dolomite and phosphate.

Mica:

  • Made up of a series of plates or leaves and splits easily into thin sheets.
  • These sheets can be so thin that a thousand can be layered into a mica sheet of a few centimeters high.
  • Mica can be clear, black, green, red yellow or brown.
  • It has  excellent dielectric strength, insulating properties and resistance to high voltage
  • Used in electric and electronic industries.

Distribution:

Northern edge of the Chota Nagpur plateau. Jharkhand–Koderma-Gaya-Hazaribagh belt(leading producers)

Rajasthan-mica belt extends for about 320 kms from Jaipur to Bhilwara and around Udaipur.

Andhra Pradesh -Nellore

Jharkhand – lower Hazaribagh plateau.

Other producers:

Mysore and Hasan districts of Karanataka, Coimbatore, Tiruchirapalli, Madurai and Kanyakumari in Tamil Nadu, Alleppey in Kerala, Ratnagiri in Maharashtra, Purulia and Bankura in West Bengal.

अधात्विक खनिज – अभ्रक –

अधात्विक खनिज वैसे खनिज होते हैं जिनमे धातु नहीं पायी जाती है जैसे अभ्रक, चूना पत्थर, डोलोमाइट, फॉस्फेट .

अभ्रक

  • प्लेटों या पत्तियों की श्रृंखला से बना होता है और इसका पतले चादरों में आसानी से  विपाटन हो सकता है |
  • ये परते इतनी महीन हो सकती है कि इसकी एक हज़ार परतें कुछ सेंटीमीटर   ऊंचाई में समाहित हो सकती है |
  • अभ्रक पारदर्शी, काला, हरा, लाल, पीला अथवा भूरे रंग का हो सकता है
  • इसके पास उत्कृष्ट पराविदयुतशक्ति, विंसवाहक के गुण और उच्च वोल्टेज की प्रतिरोधिता  होती है |
  • इसका उपयोग  विदयुत और इलेक्ट्रॉनिक उद्योग में किया जाता है |

वितरण:

छोटा नागपुर पठार का उत्तरी किनारा

झारखंड – कोडरमा-गया-हजारीबाग बेल्ट (प्रमुख उत्पादक)

राजस्थान-अभ्रक पट्टी जयपुर से भीलवाड़ा और उदयपुर के करीब 320 किमी तक  फैली हुई है।

आंध्र प्रदेश – नेल्लोर

झारखंड – निचला हज़ारीबाग पठार

अन्य निर्माता:

मैसूर और हसन के जिलों में कर्नाटक, कोयम्बटूर, तिरुचिरापल्ली, मदुरै और कन्याकुमारी तमिलनाडु में, केरल के एलेप्पी, महाराष्ट्र में रत्नागिरी, पश्चिम बंगाल में पुरुलिया और बांकुरा।

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