UPSC Exam : IAS Preparation | History Study Material | RAS | HCS

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Post Gupta Period

Post Gupta Period (550 AD-647 AD)

  • The Pushyabhuti or Vardhana dynasty was founded at Thanesar (Kurukshetra district) by Pushyabhuti probably towards the beginning of the 6th century.
  • Pushyabhuti were the feudatories of the Guptas, but has assumed independence after the Hun invasions.
  • The first important ruler of the dynasty was Prabhakara Vardhana (580-605 AD).
  • Prabhakara Vardhana was succeeded by his eldest son Rajyavardhana (605-606 AD)
  • Rajyavardhana was killed by Shashanka in 606 AD.

Harshavardhan

  • After killing of Rajyavardhana, his younger brother, Harshavardhana also known as Siladitya, ascended the Pushyabhuti throne in 606 AD and from this year started the Harsha era.
  • He belonged to Pushyabhuti dynasty.
  • Harsha took revenge and defeated Shashank.
  • Harsha made Kannauj as his capital which made him the most powerful king of North India.
  • Pulakeshin II of Chalukya dynasty of Vatapi inflicted a decisive defeat on him at the bank of Narmada. It was the only defeat of Harsha’s victorious life.
  • The Chalukya records describe Harsha as the lord of whole of Northern country.
  • Harsha died in 647 AD. Harsha does not appear to have any heir to his throne which was usurped after his death by his minister named Arunasva.
  • Harshavardhana was not only a patron of learning, but was himself accomplished author.

Vakatakas

  • Vakatakas had succeeded the Satavahanas in Northern Maharashtra and Vidarbha.
  • Vakatakas were Brahmanas.
  • Being Brahmana they granted lands to Brahmana and performed numerous Vedic sacrifices.
  • Chandragupta II made marriage alliance with Vakatakas and then indirectly controlled Vakataka kingdom and conquered Malwa.

Chalukyas

  • Vakatakas were followed by Chalukyas of Badami.
  • They ruled for two centuries until overthrown by its feudatories, the Rashtrakutas.
  • They claimed their descent either from Brahman or Marin or Moon and even ruled at Ayodhya. But all this was not true and was done to earn respect.
  • They seem to have been a local Kanarese people, who were improvised into the ruling Varna under Brahmanical influence.
  • They set up their kingdom in 6th century AD.

Administration and Social Order

  • The Chalukya administration was highly centralized unlike that of the Pallavas and the Cholas.
  • Village autonomy was absent under the Chalukyas.

UPSC Exam

उत्तर गुप्त काल

  • पुष्यभूति या वर्धन राजवंश की स्थापना थानेसर (कुरुक्षेत्र,हरियाणा) में पुष्यभूति  द्वारा छठी शताब्दी में की गई थी
  • पुष्यभूति गुप्त राजवंश के सामंती थे |
  • पुष्यभूति गुप्त राजवंश के सामंती थे,परन्तु हुण आक्रमण के बाद ही वे स्वतंत्र हुए |
  • इस राजवंश के पहले प्रसिद्ध राजा प्रभाकर वर्धन थे | (580-605 ईस्वी)
  • प्रभाकर वर्धन के उत्तराधिकारी इनके बड़े पुत्र राज्यवर्धन थे |(605-606 ईस्वी)
  • राज्यवर्धन 606 ईस्वी में शशांक द्वारा मरे गए थे |

हर्षवर्धन

  • राज्यवर्धन की हत्या के बाद, उनके छोटे भाई, हर्षवर्धन जिन्हे सिलादित्य के नाम से भी जाना गया, 606 ईस्वी में पुष्यभूति के सिंहासन को संभाला और इसी वर्ष से हर्ष काल की की शुरुआत हुई |
  • ये पुष्यभूति वंश के थे |
  • हर्ष ने अपने भाई की हत्या का बदला लिया और शशांक को पराजित किया |
  • हर्ष ने कन्नौज को अपनी राजधानी  बनाया और उत्तर भारत के सबसे शक्तिशाली राजा के रूप में उभरा |
  • चालुक्य वंश के पुलकेशिन द्वितीय (वातापी) ने हर्षवर्धन को नर्मदा के तट पर एक निर्णायक शिकस्त दी | यह हर्ष के विजयी जीवन की एकमात्र हार थी |
  • चालुक्य के अभिलेखों के अनुसार हर्षवर्धन को पूरे उत्तरी देश के भगवान के रूप वर्णित किया गया है
  • हर्ष की मृत्यु 647 ईस्वी में हुई | हर्ष का कोई उत्तराधिकारी नहीं था, उनके बाद इस ताज को उनके मंत्री अरुणस्व ने संभाला |
  • हर्षवर्धन केवल शिक्षा के सरंक्षक ही नहीं बल्कि,बल्कि स्वयं भी एक अच्छे लेखक थे |

वाकाटक

  • वाकाटक वंश ने उत्तरी महाराष्ट्र और विदर्भ में सातवाहन शासकों के उत्तराधिकारी के रूप में जगह ली |
  • वाकाटक ब्राह्मण थे |
  • ब्राह्मण होने के कारण उन्होंने ब्राह्मणों को भूमि अनुदान में थी एवं कई वैदिक अनुष्ठान किये |
  • चंद्रगुप्त द्वितीय ने वाकाटकों के साथ वैवाहिक संबंध बनाये एवं अप्रत्यक्ष रूप से वाकाटक साम्राज्य को नियंत्रित किया और माल्वा पर विजय प्राप्त की।

चालुक्य

  • वाकाटक शासकों के बाद चालुक्य आये |
  • इन्होने लगभग दो सदियों तक शासन किया,इसके बाद उनके सामंती राष्ट्रकूटों ने इन्हे उखाड़ फेंका |
  • उन्होंने दावा किया की वे ब्राह्मण अथवा चंद्रवंशी थे एवं उन्होंने अयोध्या पर भी शासन किया |परन्तु यह सब सत्य नहीं था यह केवल  सम्मान हासिल करने के लिए बोला गया था |
  • ऐसा प्रतीत होता है की वो स्थानीय कन्नड़ लोग ही थे जो ब्राह्मणवाद के प्रभाव से शासक वर्ग में आ गए थे
  • उन्होंने छ्ठी शताब्दी में अपने राज्य की स्थापना की।

प्रशासन और सामाजिक व्यवस्था

  • चालुक्य प्रशासन ,पल्लव और चोल शासकों की तुलना में अधिक केंद्रित था |
  • चालुक्य शासन में गावों को स्वायत्तता नहीं थी |

Pallavas of Kanchi

  • The Pallavas were the 1st well-known dynasty in the history of South India after the fall of the Satavahanas.
  • Their origin is shrouded in mystery.
  • According to some scholars they came from the north and were of Brahmanical origin.

The Pallavas

Mahendravarman I

  • Son and successor of King Simhavishnu.
  • He was the 1st great and powerful king of the Pallava dynasty.
  • He was a versatile genius.
  • He was famous for his many public works.

Narasimhavarman I

  • Succeeded his father Mahendravarman.
  • Most successful and distinguished king of this dynasty.
  • He avenged the defeat of his father and won back Vengi.

Paramesvarvarman I

  • Next important king of the dynasty.
  • During his reign the old enmity between the Pallavas and the Chalukyas was revived.
  • Both sides claimed victories for themselves.

कांची के पल्लव

  • सातवाहन वंश के पतन के बाद पल्लव दक्षिण भारत के इतिहास में पहले प्रसिद्ध राजवंश थे।
  • इनका मूल एक रहस्य है |
  • कुछ विद्वानों के अनुसार वे उत्तर से आए थे और ब्राह्मण्य मूल के थे।

पल्लव राजवंश

महेन्द्र वर्मन प्रथम

  • ये सिंह विष्णु के पुत्र एवं उत्तराधिकारी थे |
  • ये पल्लव वंश के पहले महान और शक्तिशाली शासक थे।
  • ये बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे
  • ये अपने कई सार्वजनिक कार्यों के लिए प्रसिद्ध थे |

रसिंहवर्मन प्रथम

  • ये अपने पिता महेंद्रववर्मन के उत्तराधिकारी थे |
  • ये इस वंश के सबसे सफल और प्रतिष्ठित शासक थे
  • इन्होने अपने पिता की हार का बदला लिया एवं वेंगी को वापिस प्राप्त किया |

परमेश्वर वर्मन प्रथम

  • पल्लव राजवंश के अगले महत्वपूर्ण शासक |
  • इस शासनकाल में  पल्लवों और चालुक्यों के बीच पुरानी शत्रुता पुनर्जीवित हो गई |
  • दोनों पक्षों ने स्वयं की जीत का दावा किया |

Aparajita

  • Last ruler of Pallava dynasty.
  • He was defeated by the Cholas and his territory was annexed by them.
  • Thus the Pallava dynasty came to an end.

Administration

  • Land tax- primary source of revenue
  • State was divided into Kottams
  • Well-trained army
  • Devadhana-land grants to temples (free from tax)
  • Brahmadeya- land grants to Brahmans (free from tax)

Social Order

  • Rigid caste system, The Brahmins occupied a high place in the society.
  • The Pallava period also witnessed the rise of Saivism and Vaishnavism and also the decline of Buddhism and Jainism.

Rural Expansion

  • 3 types of villages in south India – Ur, Sabha and Nagaram.
  • Ur – the usual type of village inhabited by peasant castes, who perhaps held their land in common.

Social Structure

  • Society dominated by princes and priests.
  • The princes claimed the status of Brahmins or Kshatriyas but many of them were local tribal chiefs
  • They were promoted to the second Varna through benefactions made to the priests.

अपराजित नंद

  • ये पल्लव राजवंश के अंतिम शासक थे |
  • ये चोल शासकों द्वारा हार गए थे एवं उनका क्षेत्र भी कब्जा लिया गया |
  • इस प्रकार पल्लव राजवंश का अंत हो गया।

प्रशासन

  • भूमि कर राजस्व का प्राथमिक स्रोत था |
  • राज्य कोट्टम् में विभक्त था |
  • इनकी सेना प्रशिक्षित थी |
  • देवधन- यह मंदिरों को दिया जाने वाला भूमि अनुदान था (इस पर किसी प्रकार का कर नहीं था)
  • ब्रह्मवैद्य : यह ब्राह्मणों को दिया जाने वाला भूमि अनुदान था  (इस पर किसी प्रकार का कर नहीं था)

सामाजिक व्यवस्था

  • कठोर जाति व्यवस्था थी, ब्राह्मणों को समाज में उच्च स्थान प्राप्त था |
  • पल्लव काल में शैववाद और  वैष्णववाद का उदय हुआ एवं बौद्ध धर्म और जैन धर्म का पतन हुआ |

ग्रामीण विस्तार

  • दक्षिण भारत में तीन प्रकार के गांव थे -ऊर, सभा और नगरम।
  • उर – सामान्य प्रकार का गांव जो किसानों द्वारा बसाया गया था , यहाँ आमतौर पर भूमि धारक लोग थे |

सामाजिक संरचना

  • शासकों और पुरोहितों का वर्चस्व था |
  • राजकुमारों ने भी स्वयं को ब्राह्मण अथवा क्षत्रिय बताया परन्तु उनमे से अधिकांश स्थानीय आदिवासी प्रमुख थे |
  • चूँकि उन्होंने ब्राह्मणों को अनुदान दिया तो ब्राह्मणों ने उन्हें दूसरे स्थान के वर्ण के रूप में प्रस्तुत किया |

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