Target HCS Exam 2018 | Best Study Notes (History)- Frontier IAS

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Development of indian Press and Important sessions of Indian National Congress

Development of Indian Press

  • James Augustus Hickey in 1780 started The Bengal Gazette or Calcutta General Advertiser, the first newspaper in India, which was seized in 1872 because of its outspoken criticism of the Government.
  • Later more newspapers/journals came up-The Bengal Journal, Calcutta Chronicle, Madras Courier, Bombay Herald.
  • The Company’s officers were worried that these newspapers might reach London and expose their misdeeds.

Licensing Act, 1857:

  • Due to the emergency caused by the 1857 revolt, this act imposed licensing restrictions in addition to the already existing registration procedure laid down by Metcalfe Act and the Government reserved the right to stop publication and circulation of any book, newspaper or printed matter.

Registration Act, 1867:

  • This replaced Metcalfe’s Act of 1835 and was of a regulatory, not restrictive, nature.
  • Every book/newspaper was required to print the name of the printer, publisher and the place of the publication.

Important Newspapers/ Journals:

  • Hindu and Swadesamitran: G. Subramaniya Aiyar
  • The Bengalee : Surendranath Banerjee
  • Voice of India, Rast Goftar: Dadabhai Naoroji
  • Amrita Bazar Patrika: Sisir Kumar Ghosh and Motilal Ghosh

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भारतीय प्रेस का विकास

  • जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने 1780 में बंगाल गजट अथवा कलकत्ता जनरल एडवरटाइज़र की शुरुआत की, यह भारत का प्रथम समाचार पत्र था जिसपर  सरकार की मुखर आलोचना करने के कारण 1872 में रोक लगा दी गयी थी |
  • आगे चलकर अन्य समाचार पत्रों/पत्रिकाओं का प्रकाशन हुआ -द  बंगाल जर्नल, कलकत्ता क्रोनिकल, मद्रास कोरियर, बॉम्बे हेराल्ड |
  • कंपनी के अधिकारियों को डर था कि ये समाचार पत्र लंदन तक पँहुच सकते हैं तथा उनके काले कारनामों का भांडा फोड़ सकते है|

लाइसेंसिंग अधिनियम 1857 :

  • 1857 की क्रांति की वजह से उत्पन्न आपातकाल के कारण, इस अधिनियम के तहत मेटकॉफ़ द्वारा निर्धारित तथा पहले से ही मौजूद निबंधन प्रक्रिया के अतिरिक्त लाइसेंस संबंधी प्रतिबंध भी लगा दिए गए तथा सरकार ने किसी भी पुस्तक, समाचार पत्र अथवा प्रकाशित सामग्री के प्रकाशन को रोकने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखा |  

पंजीकरण अधिनियम 1867 :

  • इसने 1835 के मेटकॉफ़ अधिनियम का स्थान लिया तथा यह अधिनियम विनियामक प्रकृति का था ना कि प्रतिबंधक प्रकृति का |
  • प्रत्येक मुद्रित सामग्री के लिए मुद्रकअथवा  प्रकाशक का नाम तथा प्रकाशन के स्थान का स्थान का उल्लेख करना आवश्यक था |

महत्वपूर्ण समाचार पत्र/ पत्रिकाएँ :

  • हिन्दू तथा स्वदेशमित्रन : जी. सुब्रमण्यम अय्यर
  • द बंगाली : सुरेन्द्रनाथ बनर्जी
  • वॉइस ऑफ़ इंडिया, रास्त गफ्तार :  दादाभाई नौरोजी
  • अमृत बाज़ार पत्रिका : शिशिर कुमार घोष तथा मोतीलाल घोष |

Vernacular Press Act, 1878:

  • 1857 revolt resulted in bitterness between the ruler and the ruled.
  • After 1858, the European press always rallied behind the Government in political controversies while the vernacular press was critical of it.
  • There was a strong public opinion against the imperialistic policies of Lytton, compounded by terrible famine (1876-77), and lavish expenditure on the imperial Delhi Durbar.

The provisions of the Act:

  • The district magistrate was empowered to call upon the printer and publisher of any vernacular newspaper to enter into a bond with the Government undertaking not to cause disaffection against the Government or antipathy between persons of different religions, caste, race through published material.
  • The printer and publisher could also be required to deposit security which could be forfeited if the regulation were contravened, and press equipment could be seized if the offence reoccurred.

Newspaper (Incitement to Offences) Act, 1908 :

  • Aimed against Extremist nationalist activity, the Act empowered the magistrates to confiscate press property which published objectionable material likely to cause incitement to murder/ acts of violence.

Indian Press Act, 1910

  • This Act revived the worst features of the VPA: local government was empowered to demand a security at registration from the printer/publisher and forfeit/deregister if it was an offending newspaper.

देशी भाषा समाचार पत्र अधिनियम 1878 :

  • 1857 की क्रांति का परिणाम शासक तथा प्रजा के बीच कटुता  के रूप में हुआ |
  • 1858 के बाद, यूरोपीय प्रेस ने सरकार की नीतियों का समर्थन किया तथा विवादास्पद मामलों में सरकार का पक्ष लिया किन्तु देशी भाषाओं के प्रेस सरकार  के कट्टर आलोचक थे |
  • 1876-1877 भीषण अकाल में एक और जहाँ लाखों लोग मौत के मुह में समा गए वहीँ दूसरी ओर     लार्ड लिटन ने दिल्ली में एक भव्य दरबार का आयोजन किया |

इस अधिनियम के प्रावधान :

  • जिलाधिकारी को स्थानीय भाषा के समाचार पत्र के मुद्रक तथा प्रकाशक को सरकार के साथ, प्रकाशित सामग्री के माध्यम से  सरकार के विरुद्ध असंतोष अथवा विभिन्न धर्मों, जातियों, एवं वर्णों के बीच विद्वेष नहीं पैदा करने का वचन देने वाले एक अनुबंध में शामिल करने की शक्ति प्रदान की गयी |
  • मुद्रक तथा प्रकाशक को जमानत जमा करने की भी आवश्यकता होती थी जिसे नियमों का उल्लंघन करने पर ज़ब्त किया जा सकता था, तथा यदि फिर से अपराध दोहराया जाता है तो प्रेस के उपकरणों को ज़ब्त किया जा सकता था |

समाचार पत्र ( अपराध को बढ़ावा ) अधिनियम 1908 :

  • इस अधिनियम का उद्देश्य उग्रवादी राष्ट्रवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाना था | इस अधिनियम ने मजिस्ट्रेट को आपत्तिजनक सामग्री, जो हत्या/ हिंसा के कृत्यों को प्रोत्साहन की वजह बन सकती है, को  प्रकाशित करने वाले प्रेस की संपत्ति को ज़ब्त करने का अधिकार दिया |

भारतीय प्रेस अधिनियम 1910

  • इस अधिनियम ने देशी प्रेस अधिनियम  के सभी घिनौने प्रावधानों को पुनर्जीवित कर दिया जिसके अनुसार स्थानीय सरकार मुद्रक अथवा प्रकाशक से पंजीकरण जमानत मांग सकती थी एवम आपत्तिजंक सामग्री होने की वजह से यह जमानत जब्त भी हो सकती थी |

Important sessions of Indian National Congress

1885 (Dec. 28), Bombay:  

  • President: W.C. Bonnerji
  • First session, attended by 72 delegates; objectives of the Congress outlined.

1886 (Dec. 28) Calcutta:

  • President: Dadabhai Naoroji
  • Attended by 436 delegates; witnessed the merger of National Congress and National Conference

1896 (Dec. 27-28) Calcutta :

  • President: Rahimtulla Sayani
  • National song “Vande Mataram” was first sung publicly in this session by Rabindranath Tagore himself.

1899 (Dec27-28) Lucknow:

  • President: Romesh Chandra Dutt
  • Demand for permanent fixation of land revenue.

1905 ( Dec 27-30) Benaras:

  • President: Gopal Krishna Gokhale
  • Expressed resentment over partition of Bengal.

1906 ( Dec 26-29) Calcutta:

  • President: Dada Bhai Naoroji
  • The word ‘Swaraj’ mentioned for first time.

1907 (Dec 26-27) Surat:

  • President: Rash Behari Ghosh
  • Split in Congress into Moderates and the Extremist.

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महत्वपूर्ण अधिवेशन

1885 ( 28 दिसम्बर ), बॉम्बे :

  • अध्यक्ष : व्योमेश चन्द्र बनर्जी
  • प्रथम अधिवेशन में 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, कांग्रेस के लक्ष्यों पर चर्चा की गयी |

1886 (28 दिसम्बर ) कलकत्ता :

  • अध्यक्ष : दादाभाई नौरोजी
  • 436 प्रतिनिधियों ने भाग लिया; यह अधिवेशन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस तथा नेशनल कांफ्रेंस के विलय का साक्षी बना |

1896 ( 27-28 दिसम्बर ) कलकत्ता :

  • अध्यक्ष : रहीमतुल्ला सयानी
  • राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” पहली बार सार्वजनिक रूप से इस अधिवेशन में खुद रवीन्द्रनाथ टैगोर के द्वारा गाया गया था |

1899 (27-28 दिसम्बर ) लखनऊ :

  • अध्यक्ष : रमेश चन्द्र दत्त
  • भू-राजस्व के स्थायी निर्धारण की माँग |  

1905 ( 27-30 दिसम्बर ) बनारस :

  • अध्यक्ष : गोपाल कृष्ण गोखले
  • बंगाल के विभाजन के खिलाफ नाराजगी ज़ाहिर की |

1906 (26-29 दिसम्बर ) कलकत्ता :

  • अध्यक्ष : दादाभाई नौरोजी
  • पहली बार “स्वराज” शब्द का उल्लेख किया गया |

1907 ( 26-27 दिसम्बर ) सूरत :

  • अध्यक्ष : रासबिहारी घोष
  • कांग्रेस का गरमपंथियो तथा नरमपंथियों में विभाजन |

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