Sociology Topic Karl Marx – Class struggle, Alienation | HCS Exam 2018

Sociology Topic Karl Marx – Class struggle, Alienation | HCS Exam 2018

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Sociology Topic Karl Marx – Class struggle, Alienation | HCS Exam 2018

Sociology Topic Karl Marx – Class struggle, Alienation | HCS Exam 2018

MARX – CLASS STRUGGLE:-

Marx – Class, Class Struggle and Social Change:

  • According to Marx, in all stratified societies, there are 2 major social groups – a ruling class and a subject class. The ruling class derives its power from its ownership and control of the forces of production.
  • The systems of stratification, as per Marx derive from the relationships of social groups to the forces of production. A class is a social group whose members share the same relationship to the forces of production. Ex., during feudal epoch, there are 2 main classes – feudal nobility and landless serfs.

Marx believed that Western society had developed through 4 main epochs:

  • Primitive Communism
  • Ancient society
  • Feudal society
  • Capitalistic society

Primitive Communism is represented by the prehistoric societies and is the only example of a classless society. Societies were based on a socialist mode of production. In hunting and gathering band, the land and its products were communally owned and all members of society shared the same relationship to the forces of production.

  • Classes emerge when the productive capacity of society expands beyond the level required for subsistence. This occurs when the agriculture becomes the dominant mode of production. Only some individuals work to produce the food while others specialize in other tasks. This division of labour of the hunting and gathering band was replaced by an increasingly more complex and specialized division. Surplus wealth was produced which lead to exchange of goods and development of trading. This was accompanied by the development of a system of private property.
  • Private property and the accumulation of surplus wealth form the basis for the development of class societies. In particular, they provide the preconditions for the emergence of a class of producers and a class of non-producers.
  • From a Marxian perspective, the relationship between the major social classes is one of mutual dependence and conflict. Ex., nature of ownership and production in capitalist society.

मार्क्स -वर्ग संघर्ष:-

मार्क्स-वर्ग, वर्ग संघर्ष, तथा सामाजिक परिवर्तन :

  • मार्क्स के अनुसार, सभी स्तरीकृत समाजों में, दो प्रमुख सामाजिक समूह होते हैं – एक शासक वर्ग तथा एक प्रजा वर्ग | शासक वर्ग  अपनी शक्तियां उत्पादन शक्तियों के नियंत्रण एवं स्वामित्व से प्राप्त करता है |
  • स्तरीकरण की व्यवस्था, मार्क्स के अनुसार, उत्पादन की शक्तियों के लिए सामाजिक समूहों के संबंधों से उत्पन्न होती है  | एक वर्ग कोई सामाजिक समूह है जिसके सदस्यों का सम्बन्ध उत्पादन की शक्तियों के साथ एक समान है | उदाहरण – सामंती युग के दौरान, 2 मुख्य वर्ग थे – सामंती ठाकुर एवं भूमिहीन कृषक |

मार्क्स का यह मानना था कि पश्चिमी समाज चार मुख्य माध्यमों से विकसित हुआ है :

  • प्राचीन साम्यवाद
  • प्राचीन समाज
  • सामंतवादी समाज
  • पूंजीवादी समाज  

प्राचीन साम्यवाद का प्रतिनिधित्व प्रागैतिहासिक समाजों के द्वारा किया जाता है तथा यह वर्गहीन समाज का एकमात्र उदाहरण है | समाज उत्पादन के सामाजिक प्रारूप पर आधारित थे| शिकार तथा एकत्रित दल में ,  भूमि तथा उसके उत्पादों पर सामुदायि स्वामित्व था तथा समाज के सभी सदस्यों का सम्बन्ध उत्पादन की शक्तियों से एक जैसा था |

वर्ग तब उभरते हैं जब समाज की उत्पादक क्षमता निर्वाह हेतु आवश्यक स्तर से अधिक हो जाती है | | यह तब होता है जब कृषि उत्पादन का प्रमुख साधन बन जाता है | केवल कुछ व्यक्ति ही भोजन उत्पादित करने के लिए कार्य करते हैं जबकि अन्य लोग अन्य कार्यों में विशेषज्ञ होते हैं | शिकारी तथा एकत्रीकरण दल के बीच श्रम का विभाजन  एक अधिक जटिल तथा विशेषज्ञ विभाजन के द्वारा विस्थापित कर दिया गया | अधिशेष धन का निर्माण हुआ जो वस्तुओं के आदान-प्रदान एवं व्यापार के विकास की वजह बना | इसके साथ ही निजी संपत्ति की प्रणाली का विकास हुआ

  • निजी संपत्ति एवं अधिशेष धन के संचयन ने वर्ग-समाजों के आधार का निर्माण किया |  विशेष रूप से , वे उत्पादकों के एक वर्ग तथा गैर-उत्पादकों के एक वर्ग की पूर्वापेक्षा प्रदान करते हैं  |
  • मार्क्सवादी दृष्टिकोण से, प्रमुख सामाजिक वर्गों के बीच सम्बन्ध पारस्परिक निर्भरता एवं संघर्ष में से एक है | उदाहरण – पूंजीवादी समाज में स्वामित्व तथा उत्पादन  की प्रकृति|

Sociology Topic Karl Marx
Basic characteristics of a Capitalist economy:

  • Capital – Money used to finance the production of commodities for private gain.
  • Capitalism involves the investment of capital in the production of commodities with the aim of maximizing profit.
  • Capital is privately owned by the minority which is gained from the exploitation of the working class.
  • Marx argues that capital, as such, produces nothing. Only labour produces wealth. Yet the wages they receive are far below the value of goods they produce.
  • The difference between the value of wages and commodities is known as ‘surplus value’. This surplus value is appropriated in the form of profit by the capitalists. Since they are non-producers, the bourgeoisie are therefore exploiting the proletariat, the real producers of wealth.
  • In all class societies, the ruling class exploits and oppresses the subject class.

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की मूल विशेषताएं :

  • पूँजी – निजी लाभ हेतु वस्तुओं के उत्पादन के लिए पूँजी लगाने में प्रयुक्त धन |
  • पूँजीवाद में लाभ को अधिकतम करने के  उद्देश्य से वस्तुओं के उत्पादन में पूँजी का निवेश शामिल है |
  • पूँजी का निजी स्वामित्व अल्पसंख्यक वर्ग के पास होता है जो श्रमिक वर्ग के दोहन से प्राप्त की जाती है |
  • मार्क्स यह तर्क देते हैं कि पूँजी, जैसे, कुछ भी उत्पादित नहीं करती है | केवल श्रमिक धन का उत्पादन करते हैं | फिर भी जो मजदूरी उन्हें मिलती है वह उनके द्वारा उत्पादित वस्तुओं के मूल्य से काफी कम होती है |
  • मजदूरी और वस्तुओं के मूल्य का अंतर “अधिशेष मूल्य” के रूप में जाना जाता है | यह अधिशेष मूल्य पूंजीपतियों के द्वारा लाभ के रूप में विनियोजित किया जाता है | चूँकि वे गैर-उत्पादक हैं, इसलिए पूंजीपति वाढ, श्रमिक वर्ग का शोषण कर रहा है, जो धन के वास्तविक उत्पादक हैं |
  • सभी वर्ग समाजों में , शासक वर्ग, प्रजा वर्ग का शोषण एवं दमन करता है |

Power of ruling class:

  • From a Marxian perspective, political power derives from economic power. Since the superstructure of society – the major institutions, values and belief systems – is seen to be largely shaped by the economic infrastructure, the relations of production will be reproduced in the superstructure. Particularly, the political and legal systems will reflect ruling class interests. Ex., the various ownership rights of the capitalist class will be enshrined in and protected by the laws of the land.
  • The position of the dominant class is supported by beliefs and values which are systematically generated by the infrastructure. Marx refers to the dominant concepts of class societies as ruling class ideology since they justify and legitimate ruling class domination and project a distorted picture of reality. Ex., the emphasis on freedom in capitalist society, illustrated by phrases such as ‘the free market’, ‘free democratic societies’ and ‘the free world’, is an illusion which disguises the wage slavery of the proletariat.
  • Ruling class ideology produces ‘false class consciousness’, a false picture of the nature of relationship between social classes. Members of both classes tend to accept the status quo as normal and natural and are largely unaware of the true nature of exploitation.
  • In Marx’s words, the relations of production constitute ‘the real foundation on which rise legal and political superstructures and to which correspond definite forms of social consciousness. The mode of production in material life determines the general character of the social, political and spiritual processes of life’.

शासक वर्ग की शक्ति :

  • मार्क्सवादी दृष्टिकोण के अनुसार, राजनीतिक शक्ति आर्थिक शक्ति से प्राप्त होती है | चूँकि समाज की अधिरचना – प्रमुख संस्थान, मूल्य एवं विश्वास प्रणालियाँ, को बड़े पैमाने पर आर्थिक ढाँचे के द्वारा आकार दिया जाता है, इसलिए उत्पादन के सम्बन्ध अधिरचना में फिर से निर्मित होंगे | विशेष रूप से राजनीतिक तथा वैधानिक तंत्र शासक वर्ग के हितों को प्रतिविम्बित करेंगे | उदाहरण – पूंजीपति वर्ग के विभिन्न स्वामित्व अधिकार प्रतिष्ठापित होंगे तथा उन्हें देश के कानूनों के द्वारा संरक्षण प्रदान किया जाएगा |
  • प्रभावी वर्ग की स्थिति विश्वासों एवं मूल्यों से समर्थित होती है जो व्यवस्थित रूप से आधारिक संरचना से उत्पन्न होते हैं | मार्क्स वर्ग समाजों की प्रमुख अवधारणाओ को शासक वर्ग की विचारधारा के रूप में संदर्भित करते हैं क्योंकि वे शासक वर्ग के शासन को उचित तथा तर्कसंगत बनाती हैं तथा वास्तविकता की एक  विकृत तस्वीर पेश करती हैं | उदाहरण – पूंजीवादी समाज में स्वतंत्रता पर जोर की “मुक्त बाजार”, “मुक्त लोकतांत्रिक समाज” तथा “मुक्त विश्व” जैसे वाक्यांशों से व्याख्या की गयी है, जो एक भ्रम है तथा श्रमिक वर्ग की मजदूरी दासता को छिपाते हैं |  
  • शासक वर्ग की विचारधारा “झूठी वर्ग चेतना” का निर्माण करती है, सामाजिक वर्गों के बीच संबंधों की प्रकृति की झूठी तस्वीर | दोनों वर्गों के सदस्य सामान्य और प्राकृतिक रूप में यथास्थिति को स्वीकार करते हैं एवं शोषण की वास्तविक प्रकृति से बड़े पैमाने पर अनजान है |
  • मार्क्स के शब्दों में , उत्पादन के सम्बन्ध वास्तविक आधार का निर्माण करते हैं जिसपर वैधानिक तथा राजनीतिक अधिरचनाओं का उदय होता है तथा ये सामाजिक चेतना के निश्चित रूपों के अनुरूप होते हैं | भौतिक जीवन में उत्पादन के साधन जीवन की  सामाजिक, राजनीतक, एवं आध्यात्मिक प्रक्रियाओं के सामान्य चरित्र का निर्धारण करते हैं |

Class struggle:

  • Marx believed that the class struggle was the driving force of social change. He said ‘The history of all societies up to the present is the history of the class struggle’. A new historical epoch is created by the development of superior forces of production by new social group. Ex., the merchants and industrialists accumulated capital, laid the foundations for industrial manufacturers, factory production and the system of wage labour. The superiority of the capitalist mode of production led to a rapid transformation of the structure of society.
  • The class struggles of history have been between minorities. Ex., capitalism developed from the struggle between the feudal aristocracy and the emerging capitalist class.
  • Major changes in history have involved the replacement of one form of private property by another and of one type of production technique by another. Ex., capitalism involves the replacement of privately owned land and an agricultural economy by privately owned capital and an industrial economy.
  • Marx believed that the class struggle which would transform capitalist society would involve none of these processes. The protagonists would be the bourgeoisie and the proletariat, a minority vs. a majority. Private property would be replaced by communally owned property. Industrial manufacture would remain the basic technique of production in the society which would replace capitalism.
  • Marx believed that the basic contradictions contained in a capitalist economic system would lead to its eventual destruction. The proletariat would overthrow the bourgeoisie and seize the forces of production. Property would be communally owned. This will led to the formation of a classless society. Since history is the history of the class struggle, history would end now. The communist society which replaces capitalism will contain no contradictions, no conflicts of interest and therefore be unchanging.

वर्ग संघर्ष :

  • मार्क्स का यह मानना था कि वर्ग संघर्ष सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणा शक्ति थी |  उन्होंने कहा “अबतक के सभी समाजों का इतिहास, वर्ग संघर्ष का इतिहास है” | नए सामाजिक समूह के द्वारा उत्पादन के श्रेष्ठतर साधनों के विकास द्वारा एक नए ऐतिहासिक युग का निर्माण होता है | उदाहरण – व्यापारी तथा उद्योगपतियों ने पूँजी का संचयन किया, औद्योगिक संरचनाओं, फैक्ट्री उत्पादन एवं मजदूरी शर्म की व्यवस्था  की नींव डाली| पूंजीवादी उत्पादन की श्रेष्ठता के कारण समाज की संरचना में तेजी से परिवर्तन हुआ |
  • इतिहास का वर्ग संघर्ष अल्पसंख्यकों के बीच रहा है | उदाहरण – पूँजीवाद का विकास, सामंती अभिजात्य वर्ग एवं उभरते पूंजीपति वर्ग के बीच संघर्ष के कारण हुआ |
  • इतिहास में प्रमुख परिवर्तनों में निजी संपत्ति के एक रूप का दूसरे रूप द्वारा प्रतिस्थापन एवं उत्पादन तकनीक के एक प्रकार का दुसरे प्रकार द्वारा प्रतिस्थापन शामिल रहा है | उदाहरण – पूँजीवाद में  निजी स्वामित्व वाली भूमि तथा कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का निजी स्वामित्व वाली पूँजी तथा औद्योगिक अर्थव्यवस्था द्वारा प्रतिस्थापन शामिल है |
  • मार्क्स का यह मानना था कि वर्ग संघर्ष जो पूंजीवादी समाज को बदल देगा उसमें इनमें से किसी भी तरह की प्रक्रियाएं शामिल नहीं होंगी | इसके अगुआ पूंजीपति एवं श्रमिक होंगे, अर्थात् अल्पसंख्यक बनाम बहुसंख्यक |  निजी संपत्ति की जगह सार्वजनिक स्वामित्व वाली संपत्ति होगी | समाज में औद्योगिक निर्माण उत्पादन की बुनियादी तकनीक होगी, जो पूँजीवाद का स्थान लेगी |
  • मार्क्स का यह मानना था कि पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में निहित विरोधाभासों का अंततः विनाश हो जाएगा | श्रमिक वर्ग, पूंजीपति वर्ग को उखाड़ फेंकेगा एवं उत्पादन की शक्तियों पर अधिकार कर लेगा | संपत्ति पर सार्वजनिक स्वामित्व होगा | और इस तरह ये वर्गविहीन समाज के गठन को प्रेरित करेगा | चूँकि इतिहास, वर्ग संघर्ष का इतिहास है, इसलिए इतिहास का अब अंत हो जाएगा | साम्यवादी समाज, जो पूंजीवादी समाज का स्थान लेगा, उसमें किसी तरह के विरोधाभास, हितों के टकराव  नहीं होंगे तथा इसलिए यह अपरिवर्तित रहेगा |

 

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