Sociology Study Notes for UPSC IAS | Topic Emile Durkheim – Social fact

Sociology Study Notes for UPSC IAS | Topic Emile Durkheim – Social fact

Sociology Study Notes for UPSC IAS | Topic Emile Durkheim – Social fact

Sociology Study Notes for UPSC IAS | Topic Emile Durkheim – Social fact

Sociology Study Notes for UPSC IAS | Topic Emile Durkheim – Social fact

Emile Durkheim (1858 – 1917) / इमाइल दुर्खीम (1858-1917):

  • Durkheim lived through a very turbulent period in French history – the disastrous war with the Prussians, the chaos and socio-political turmoil which inevitably followed, and the instability and internal conflicts of the Third Republic. He was also involved in the greatest political conflicts of his time known as the Dreyfus Affair./दुर्खीम फ्रांसीसी इतिहास के बेहद अशांत काल- प्रशियाई लोगों के साथ युद्ध, अराजकता, तथा राजनीतिक उथल-पुथल एवं तीसरे गणराज्य की अस्थिरता एवं आतंरिक संघर्षों, के बीच जीवित रहे | वह अपने समय के सबसे बड़े राजनीतिक संघर्षों में भी शामिल थे जिसे ड्रेफस अफेयर के नाम से जाना जाता है |
  • All these issues of the French society along with his own background of belongingness to a highly well-knit Jewish community, predisposed him towards a search for the basis of moral order in society./बेहद संगठित यहूदी समुदाय से उनकी संबंधितता के साथ फ्रांसीसी समाज की इन सभी समस्याओं ने उन्हें समाज में नैतिक व्यवस्था की खोज के प्रति संवेदनशील बना दिया |
  • Durkheim asserted the primacy of ‘group’ over the individuals and tried exploring the sources of social order and disorder./दुर्खीम ने व्यक्तियों पर ‘समूह’ की प्रधानता पर जोर दिया और सामाजिक व्यवस्था  और अव्यवस्था के स्रोतों की खोज करने का प्रयास किया।
  • He believed that the traditional sources of morality upon which the social order was built, especially religion, were no longer viable without rational changes. The new source of moral integration, necessary for the establishment and stability of society, would be found in the discipline designed to scientifically analyze social order, stability, and continuity i.e. in sociology./उनका मानना था कि नैतिकता के पारंपरिक स्रोत, विशेष रूप से धर्म  जिसपर सामाजिक व्यवस्था का निर्माण किया गया था, तर्कसंगत परिवर्तनों के बिना अब व्यवहार्य नहीं थे | नैतिक एकीकरण का नया स्रोत, जो समाज की स्थापना और स्थायित्व के लिए जरूरी है, वह वैज्ञानिक व्यवस्था, स्थिरता और निरंतरता का वैज्ञानिक रूप से विश्लेषण करने हेतु  रूपांकित किये गए अनुशासन में पाया जाएगा, अर्थात् समाजशास्त्र में।
  • He favoured liberal, democratic constitution, the development of the welfare state, and the regulation of the capitalist economy. He aligned himself with reformist socialism, but was also influenced by conservative ideas on the importance of morality, the family, religion and tradition. Socialism according to Durkheim represented a movement aimed at the moral regeneration of society through scientific morality, and he was not interested in short-term political methods or the economic aspects of socialism./उन्होंने उदारवादी, लोकतांत्रिक संविधान, कल्याणकारी राज्य के विकास, तथा पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के विनियमन का समर्थन किया | उन्होंने खुद को सुधारवादी समाजवाद की पंक्ति में खड़ा किया, किन्तु साथ ही नैतिकता के महत्व, परिवार, धर्म, एवं परंपरा के रुढ़िवादी विचारों से भी प्रभावित थे | दुर्खीम के अनुसार समाजवाद ने वैज्ञानिक नैतिकता के माध्यम से समाज के नैतिक पुनर्निर्माण के उद्देश्य से एक आन्दोलन का प्रतिनिधित्व किया, तथा वे समाजवाद की लघु अवधि की राजनीतिक पद्धतियों अथवा आर्थिक पहलूओं में रूचि नहीं रखते थे |  
  • From Comte, he was inspired by the notion that it was possible and necessary to develop a knowledge of social phenomena that would be as rigorous, reliable and concrete as the positivistic knowledge provided by the biological and natural sciences. He also followed Comte in seeing human society in naturalistic terms as an organic unity./कॉम्त से, वह इस धारणा से प्रेरित थे कि सामाजिक घटनाओं के ज्ञान का विकास करना आवश्यक एवं संभव था जो उतना ही  सशक्त, विश्वसनीय, एवं ठोस होगा जितना सशक्त जैविक एवं प्राकृतिक विज्ञान के द्वारा प्रदान किया गया प्रत्यक्षवादी ज्ञान था |  साथ ही, मानव समाज को प्राकृतिक रूप में एक जैविक एकता के रूप में देखने में भी उन्होंने कॉम्ते का अनुसरण किया |

Emile Durkheim – Social Fact / इमाइल दुर्खीम – सामाजिक तथ्य:

  • Durkheim aspired to create a separate and identifiable niche for sociology. But psychology and philosophy claimed to already cover the domain sought by sociology./दुर्खीम समाजशास्त्र के लिए एक अलग और पहचाने जाने योग्य स्थान बनाने की इच्छा रखते थे। लेकिन मनोविज्ञान और दर्शन में दावा किया गया कि पहले से ही समाजशास्त्र द्वारा मांगे गए ज्ञान क्षेत्र को शामिल कर लिया गया है।
  • To separate sociology from philosophy, Durkheim argued that sociology should be oriented toward empirical research. He found it necessary to attack both Comte and Spencer for relying on preconceived ideas of social phenomena instead of actually studying the real world./समाजशास्त्र को दर्शन से अलग करने के लिए, दुर्खीम ने तर्क दिया कि समाजशास्त्र को अनुभवजन्य अनुसंधान के तरफ उन्मुख होना चाहिए | उन्होंने इसे वास्तव में वास्तविक दुनिया का अध्ययन करने के बजाय सामाजिक घटनाओं के पूर्वकल्पित विचारों पर निर्भर रहने के लिए कॉम्ते एवं स्पेंसर पर आक्रमण करने के लिए  आवश्यक पाया |
  • Comte was said to be guilty of assuming theoretically that the social world was evolving in the direction of an increasingly perfect society, rather than engaging in the difficult and basic work of actually studying the changing nature of various societies. Spencer was accused of assuming harmony in society rather than studying whether harmony actually existed./कॉम्ते इस बात का सैद्धांतिक रूप से विश्लेषण करने के लिए दोषी माने जाते थे कि विभिन्न समाजों की परिवर्तनशील प्रकृति के  वास्तविक अध्ययन के कठिन एवं बुनियादी कार्य में संलग्न रहने के बजाय सामाजिक दुनिया एक सुदृढ़ समाज की दिशा में विकसित हो रही है | स्पेंसर को, वास्तव में सौहार्द्रपूर्णता कहाँ है इस बात का अध्ययन करने के बजाय समाज में समरसता की कल्पना करने के लिए दोषी माना जाता है |
  • To give sociology a separate identity, Durkheim proposed that the distinctive subject matter of sociology should be the study of social facts./समाजशास्त्र को एक पृथक पहचान देने के लिए, दुर्खीम ने यह प्रस्ताव दिया कि समाजशास्त्र का विशिष्ट  विषय सामाजिक तथ्यों का अध्ययन होना चाहिए |

Social Fact/सामाजिक तथ्य :

    • Social facts are the social structure and cultural norms and values that are external to, and coercive of, actors./सामाजिक तथ्य सामाजिक संरचनाएं तथा सांस्कृतिक आदर्श एवं मूल्य हैं जो कर्ता के लिए बाहरी एवं अनिवार्य  हैं |
    • Social facts must be studied by acquiring data from outside of our own minds through observation and experimentation. This empirical study of social fact as “things” sets Durkheimian sociology apart from more philosophical approaches./अवलोकन और प्रयोग के माध्यम से हमारे अपने मन के बाहर से आंकड़ों को प्राप्त करके सामाजिक तथ्यों का अध्ययन किया जाना चाहिए। “वस्तुओं” के रूप में सामाजिक तथ्यों का अनुभवजन्य अध्ययन  अधिक दार्शनिक दृष्टिकोणों से दुर्खीम के समाजवाद को अलग करता हैं |
  • Social facts can be empirically studied, are external to the individual, are coercive of the individual, and are explained by other social facts./सामाजिक तथ्यों का अनुभवजन्य अध्ययन किया जा सकता है, वे व्यक्ति के लिए बाहरी होते हैं, व्यक्ति के लिए अनिवार्य होते हैं तथा  अन्य सामाजिक तथ्यों के द्वारा परिभाषित किये जाते हैं |/Durkheim gave 2 ways of defining a social fact so that sociology is distinguished from psychology/दुर्खीम ने सामाजिक तथ्यों को परिभाषित करने के दो तरीके दिए ताकि समाजशास्त्र दर्शन से अलग हो सके

(a)It is experienced as an external constraint rather than an internal drive./इसे एक आतंरिक शक्ति के बजाय बाहरी बाधा के रूप में अनुभव किया जाता  है |

(b)It is general throughout the society and is not attached to any particular individual./यह पूरे समाज में सामान्य है तथा किसी विशेष व्यक्ति से  जुड़ा नहीं है |

  • Durkheim argues that when individuals come together and start living in a group, a new level of reality emerges, i.e. social reality or society. In a society, individuals interact and enter into relations with each other giving rise of a way of life (social currents, for Durkheim)./दुर्खीम तर्क देते हैं कि जब व्यक्ति साथ आते हैं तथा एक समूह में रहना शुरू करते हैं, तब वास्तविकता के एक नए स्तर का उदय होता है अर्थात् सामाजिक वास्तविकता अथवा समाज | एक समाज में, व्यक्ति परस्पर क्रिया करते हैं एवं एक दुसरे के साथ संबंधों में प्रवेश करते हैं जिससे जीवन के एक तरीके की उत्पत्ति होती है | (दुर्खीम के लिए, सामाजिक धाराएं )
  • Durkheim argues that although society (and its various institutions) develop out of the continuous process of interaction of its individual members yet it comes to acquire a unique and independent existence of its own. It cannot be explained simply by reducing it to a mere aggregation of individuals./दुर्खीम तर्क देते हैं कि हालाँकि एक समाज (तथा इसके विभिन्न संस्थानों ) का विकास इसके वैयक्तिक सदस्यों की परस्पर क्रियाओं की निरंतर प्रक्रिया से होता है, लेकिन फिर भी इसे स्वयं का स्वतंत्र तथा अनन्य अस्तित्व प्राप्त है | इसे केवल व्यक्तियों के एकीकरण मात्र तक सीमित करके वर्णित नहीं किया जा सकता है |

According to Durkheim, social facts are those ways of acting, thinking and feeling which are capable of exerting an external constraint on individual members, which are generally diffused throughout a given society and which can exist in their own life independent of their individual manifestations. Ex., religion, law, language, any form of socio-economic and political institutions etc./ दुर्खीम के अनुसार, सामाजिक तथ्य कार्य करने, सोचने और महसूस करने के वे तरीके हैं जो  सदस्यों पर बाहरी बाधा उत्पन्न करने में सक्षम हैं | ये आमतौर पर पूरे समाज में फैले हुए हैं तथा ये अपने स्वयं के जीवन में व्यक्तिगत अभिव्यक्तियों से स्वतंत्र हो सकते हैं | उदाहरण – धर्म, क़ानून, भाषा, सामाजिक-आर्थिक तथा राजनीतिक संस्थाओं का कोई भी रूप आदि |

Major characteristics of Social facts/सामाजिक तथ्यों की मुख्य विशेषताएं :

  • Social facts have distinctive social characteristics and determinants which are not amenable to explanation on either the biological or psychological level./सामाजिक तथ्यों में विशिष्ट सामाजिक विशेषताएं तथा निर्धारक तत्व होते हैं जो जैविक या मनोवैज्ञानिक स्तर पर वर्णन करने के योग्य नहीं हैं |
  • They are external to the individual, i.e., social facts are external to and independent of the individual members of the society./वे व्यक्ति के लिए बाहरी होते हैं | अर्थात् सामाजिक तथ्य समाज के सदस्यों के लिए बाहरी तथा समाज के सदस्यों से मुक्त होते हैं |
  • Social facts are diffused throughout the collectivity and are commonly shared by most of the members. They are general throughout a given society./सामाजिक तथ्य सामूहिकता से पूरे समाज में प्रचलित हैं एवं आम तौर पर इसके अधिकांश सदस्यों के द्वारा साझा किये जाते हैं | वे किसी समाज में सामान्य होते हैं 
  • They endure through time outlasting any set or group of individuals./वे समय के साथ दृढ रहते हैं तथा व्यक्तियों के किसी समूह अथवा समुच्चय को लम्बे समय तक जीवित रखते हैं |
  • As Durkheim’s says, they are, “endowed with coercive power, by virtue of which they impose themselves upon him, independent of his individual will”. Social facts constrain the individual to abide by the social norms and code of conduct. According to Durkheim, true human freedom lies in being properly regulated by the social norms./जैसा कि दुर्खीम कहते हैं, “वे बाध्यकारी शक्ति से संपन्न होते हैं, जिसके आधार पर वे व्यक्ति की वैयक्तिक चाह से मुक्त होकर उस  पर खुद को लागू करते हैं |” सामाजिक तथ्य व्यक्ति को सामाजिक मानदंडों एवं आचार संहिता का पालन करने के लिए विवश करते हैं | दुर्खीम के अनुसार, सच्ची मानवीय स्वतंत्रता सामाजिक मानकों द्वारा उचित ढंग से विनियमित होने में निहित है |
  • Social facts are dynamic in nature./सामाजिक तथ्यों की प्रकृति गतिशील होती है |
  • Durkheim argued that social facts can be explained only by other social facts, i.e., to understand social consequences, one must look for social causes./दुर्खीम ने यह तर्क दिया कि सामाजिक तथ्यों की व्याख्या केवल अन्य सामाजिक तथ्यों के द्वारा ही की जा सकती है | अर्थात् सामाजिक परिणामों को समझने के लिए, व्यक्ति को सामाजिक कारणों पर अवश्य ध्यान देना चाहिए |

2 Types of Social Facts/2 प्रकार के सामाजिक तथ्य :

  • For Durkheim, sociology is a science of social facts. Society or ‘Conscience collective’ is the ultimate social fact. These social facts have to be studied in terms of their interrelationship and interdependence with each other. According to Durkheim, what holds the society together as an ongoing concern is the cohesiveness (solidarity, as Durkheim said) between these interdependent parts. /दुर्खीम के लिए, समाजशास्त्र,  सामाजिक तथ्यों का विज्ञान है | समाज अथवा सामूहिक चेतना अंतिम सामाजिक तथ्य है | इन सामाजिक तथ्यों का इनके पारस्परिक संबंधों तथा एक दूसरे पर परस्पर निर्भरता के सन्दर्भ में अध्ययन किया जाना चाहिए | दुर्खीम के अनुसार, इन अन्योन्याश्रित भागों के बीच संयोगशीलता  (एकजुटता , जैसा की दुर्खीम ने कहा )वह चीज है जो समाज को अविरत सम्बन्ध के रूप में  एक साथ रखती है |
  • 2 broad types of social facts /सामाजिक तथ्यों के दो व्यापक प्रकार :
    • Material social fact/भौतिक सामाजिक तथ्य
    • Nonmaterial social fact/अभौतिक सामाजिक तथ्य
  • Material social facts, such as forms of technology, styles of architecture, and legal codes are directly observable, external to individuals and coercive over them./भौतिक सामाजिक तथ्य , जैसे कि प्रौद्योगिकी के रूप, वास्तुकला की शैलियाँ, तथा कानूनी धाराएँ स्पष्ट रूप से अवलोकन योग्य होती हैं, जो व्यक्तियों के लिए बाहरी होती हैं तथा उनके लिए अनिवार्य होती हैं |
  • Durkheim argued that a sociologist usually begins a study by focusing on material social facts, which are empirically accessible, in order to understand nonmaterial social facts, which are the real focus of his work./दुर्खीम ने यह तर्क दिया कि एक समाजशास्त्री सामान्यतः किसी अध्ययन की शुरुआत भौतिक उन  सामाजिक तथ्यों पर ध्यान केन्द्रित करके करता है जो अनुभवतः सुलभ हैं , ताकि अभौतिक सामाजिक तथ्यों को समझा जा सके जो उसके कार्य की वास्तविक केंद्रबिंदु है |
  • Examples of nonmaterial social facts are morality, collective conscience, collective representations, and social currents. / अभौतिक सामाजिक तथ्यों के उदाहरणों में नैतिकता, सामूहिक अन्तः करण , सामूहिक प्रतिनिधित्व तथा सामाजिक धाराएँ शामिल हैं |

 

 

 

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