Sociology Study Material | Max Weber Protestant ethic and the spirit of capitalism

Sociology Study Material | Max Weber Protestant ethic and the spirit of capitalism

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Sociology Study Material | Max Weber Protestant ethic and the spirit of capitalism

Sociology Study Material | Max Weber Protestant ethic and the spirit of capitalism

The Protestant Ethic & The Spirit of Capitalism / प्रोटोस्टेंट नैतिक बातें व पूंजीवाद की भावना

Various Scholars/विभिन्न अध्येताएँ :

Balwant Nevaskar/बलवंत नेवस्कर :

  • Balwant Nevaskar, in his book, Capitalist without Capitalism : Jains of India and the Quakers of the West (1971), states that Max Weber was the first sociologist to have sociologically studied the major religions of India.  These studies are contained in his book “The Religion of India”./अपनी पुस्तक पूंजीवाद बिना पूंजीपति : भारतीय जैन व पश्चिमी नकली टोप  (1971) में बलवंत नेवस्कर ने बताया है कि मैक्स वेबर वह पहले समाजशास्त्री थे जिन्होंने भारत के प्रमुख धर्मों का अध्ययन समाजशास्त्रपूर्वक किया था | सारे अध्ययन उनकी पुस्तक “भारतीय धर्म” में निहित हैं |
  • Max Weber maintains that the Jains are an exclusive merchant sect and that there is apparently “a positive relationship between Jainism and economic motivation which is otherwise quite foreign in Hinduism”./मैक्स वेबर का कहना है कि जैन धर्म एक व्यापारी रूपी संप्रदाय है और खुले तौर पर “जैन व आर्थिक प्रेरणा के बीच एक सकारात्मक सम्बन्ध है जो कि हिन्दू धर्म में सामान्य रूप से अलग है” |
  • Weber seems to suggest that although Jainism is spiritualized in the direction of world renunciation, some features of inner worldly asceticism are also present in it./वेबर का सुझाव यह था कि भले ही सांसारिक त्याग की दिशा में जैन आध्यात्मिकता का अनुसरण करता है, लेकिन इसमें आतंरिक लौकिक वैराग्य की कुछ विशेषताएं मौजूद हैं |
  • It can be observed that the twin doctrines of ‘predestination’ and the ‘calling’ implied in Protestantism are only indirectly present in Jainism but they must be understood in the light of Karma, and not in relation to God./यह देखा जा सकता है कि प्रोटोस्टेंटमत में निहित ‘पूर्वनियोजन’ व ‘मांग’ के जुड़वे सिद्धांत सिर्फ जैन में ही अप्रत्यक्षतः मौजूद हैं लेकिन इनका अर्थ कर्म के सन्दर्भ में समझा जाना चाहिए न कि ईश्वर के सन्दर्भ में |
  • Various aspects of rational conduct promoting savings such as thriftiness, self-discipline, frugality and abstention as part of this worldly asceticism are directly present in Jainism./बचत को प्रोत्साहित करने वाली इस लौकिक वैराग्य के एक हिस्से के रूप में बचत, आत्म-अनुशासन, मितव्ययिता व तटस्थता जैसे तर्कसंगत आचरण के विभिन्न पहलू जैन में ही प्रत्यक्षतः मौजूद हैं |

Robert Kennedy/रोबर्ट कैनेडी

  • In “The Protestant Ethic and the Parsis,” Robert Kennedy suggests that Zoroastrianism-an ancestral monotheism – set the stage for Modernity, which encompasses not only Capitalism but also science./“पारसी व प्रोटोस्टेंट नैतिक बातें” में रोबर्ट कैनेडी ने सुझाव दिया कि पारसीवाद- एक पैतृक एकेश्वरवाद – आधुनिकता के लिए मंच तैयार करता है, जिसमें न केवल पूंजीवाद बल्कि विज्ञान भी शामिल है |

Kennedy identifies five abstract values associated with Modernity/आधुनिकता से जुड़े हुए पांच सार मूल्यों की पहचान कैनेडी ने की है :

  1. An underlying order in nature/प्रकृति में एक अन्तर्निहित क्रम
  2. Sensory standard of verification/सत्यापन के संवेदी मानक
  3. Material work is intrinsically good./भौतिक कार्य वस्तुतः अच्छा है
  4. Maximization of material prosperity/भौतिक समृद्धि का अधिकतमकरण
  5. Accumulation rather than consumption of material goods./भौतिक पदार्थों के उपभोग के बजाय संचय |

From the historical data on the Parsis or Zoroastrian Persians who fled from Iran to India after the Islamic conquest in the 8th century AD, Kennedy examines their beliefs, culture and society for correspondences./पारसी या फारसी पारसी, जो 8वीं शताब्दी में इस्लामिक विजय के बाद ईरान से भारत चले गए थे, के एतिहासिक आकड़ों से कैनेडी उनकी विश्वासों, संस्कृति व समाज का परीक्षण सम्बन्ध स्थापित करने के लिए करते हैं |

Based on the findings, Kennedy suggests that modern economy and science may have roots in Zoroastrian religion./निष्कर्षों के आधार पर, कैनेडी ने सुझाव दिया कि पारसी धर्म में आधुनिक अर्थव्यवस्था व विज्ञान की जड़ें हो सकती हैं |

Clifford Geertz carried out his study in East Java, Indonesia, in the early 1950s with an intention to find a local variant of the Protestant ethic in Muslim societies – inspired by the Weber’s famous “The Protestant Ethic and the Spirit of Capitalism./क्लिफोर्ड गेर्ट्ज़ ने वेबर के प्रसिद्द “प्रोटोस्टेंट नैतिक बातें व पूंजीवाद की भावना” से प्रेरित होकर 1950 के दशक के शुरूआती समय में पूर्वी जावा, इंडोनेशिया में मुस्लिम समाजों में प्रोटोस्टेंट नैतिक बातों के एक स्थानीय प्रारूप को खोजने के इरादे से अपना अध्ययन किया |

The most important reason behind Geertz’s choice to us the Weberian perspective was because he tried to find the relation between religious ideas and human conduct, politics and economic development – between religion and social change./गेर्ट्ज़ के चयन के पीछे हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण कारण वेबरियन परिप्रेक्ष्य थे क्योंकि उन्होंने धर्म व सामाजिक परिवर्तन के बीच धार्मिक विचारों, मानव आचरण, राजनीति व आर्थिक विकास के बीच संबंधों को खोजने की कोशिश की |

Weber’s study of “The Protestant Ethic and the Spirit of Capitalism” opened up new vistas of research on the factors contributing to the rise of modern capitalist society in Europe and elsewhere./वेबर के “प्रोटोस्टेंट नैतिक बातें व पूंजीवाद की भावना” के अध्ययन ने यूरोप व कही भी आधुनिक पूंजीवादी समाज के उदय में योगदान देने वाले तत्वों पर शोध के नए खाका खोजा |

Weber emphasized a lot on the role of ideas in shaping the motivations and lifestyle of future capitalists./वेबर ने भावी पूंजीवादियों के जीवन शैली व प्रेरणाओं को आकार देने में विचारों के भूमिका पर बहुत जोर दिया |

Weber didn’t totally reject Marxian theory of rise of capitalism which sought to explain capitalist development in terms of economic forces./वेबर ने पूर्णतः पूंजीवादी उदय के मार्क्सवादी सिद्धांत को अस्वीकार नहीं किया जो पूंजीवादी विकास को वर्णित आर्थिक तत्वों के सन्दर्भ में करते थे |

He regarded Marxian view as an ideal type model highlighting the role of only economic factors./उन्होंने मार्क्सवादी दृष्टिकोण को एक आदर्श प्रकार के मॉडल माना जो सिर्फ आर्थिक कारकों के भूमिका पर ही प्रकाश डालता था |

But Weber advocated that the rise of modern capitalism can be explained only by taking into account the multiplicity of factors at work./लेकिन वेबर का कहना था कि आधुनिक पूंजीवाद के उदय को सिर्फ और सिर्फ कार्य के कारकों की बहुलता को ध्यान में रखकर ही समझाया जा सकता है |

Other scholars also have tried to explain the development of capitalism and highlighted the factors which have contributed to the growth of modern capitalism./अन्य विद्वानों ने भी पूंजीवाद के विकास को समझाने का प्रयास किया है और उन कारकों को प्रकाशित किया है जिसने आधुनिक पूंजीवाद के विकास में योगदान दिया है |

  • Neil Joseph Smelser, an American sociologist in his study of third world countries, found that the state played an important role in the rise of capitalism./अमेरिकी समाजशास्त्री नील जोसफ स्मेल्सर ने तृतीय विश्व युद्ध के राष्ट्रों के अध्ययन में निष्कर्ष निकाला कि देश की भूमिका पूंजीवाद के उदय में महत्वपूर्ण थी |
  • He argued that the nationalistic ideology in the third world war societies has played the same role which Protestant ethos did in the case of Europe in the rise of Capitalism./उनका तर्क था कि राष्ट्रवादी विचारधारा ने तृतीय विश्व युद्ध के समाज में उसी प्रकार की भूमिका निभायी जिस प्रकार की भूमिका प्रोटोस्टेंट नैतिकता ने यूरोप में पूंजीवाद की भूमिका में निभायी |

Werner Sombart, a German sociologist and economist was deeply influenced by the ideas of Marx and Weber and divided the development of Capitalism into three stages/जर्मन समाजशास्त्री व अर्थशास्त्री वेर्नर सोम्बर्ट मार्क्स व वेबर के विचारों से बहुत अधिक प्रभावित थे और उन्होंने पूंजीवाद के विकास को तीन चरणों में विभाजित किया :

  1. Early Capitalism: Ending before the Industrial Revolution/प्रारंभिक पूंजीवाद : औद्योगिक क्रांति के पूर्व समाप्त
  2. High Capitalism: Beginning about 1760/उच्च पूंजीवाद : 1760 से शुरू
  3. Late Capitalism: Beginning with World War I. / हाल पूंजीवाद : प्रथम विश्व युद्ध से शुरू

During the first stage of capitalism, the moving force was a smaller number of enterprising businessmen, emerging from all groups of population-noble men, adventurers, merchants and artisans./पूंजीवाद के पहले चरण के दौरान, गतिशील शक्ति छोटे उद्यमी व्यावसायिक, जनसँख्या के सभी समूहों से उदय होते महान पुरुष, साहसी, व्यापारियों व कलाकार थे |

  • He also highlighted the importance if precious metal (Gold, Silver, etc.) into Europe from South America./उन्होंने इस बात के महत्त्व पर भी जोर दिया कि यदि यूरोप से दक्षिण अमेरिका कीमती धातुओं (सोना, चांदी, इत्यादि) का आदान प्रदान होता |
  • Sombart, in his book ‘The Jews and Modern Capitalism’, also highlighted the role of Jews in the development of modern capitalism./अपनी पुस्तक “यहूदी और आधुनिक पूंजीवाद” में सोम्बर्ट ने आधुनिक पूंजीवाद के विकास में यहूदियों की भूमिका पर प्रकाश डाला है |
  • He also accepted Weber’s views that Protestant ethic emphasized values of hard work while deferring gratification and such an attitude favoured creation of capital and its productive  reinvestment rather than consumption./उन्होंने वेबर के दृष्टिकोणों को भी स्वीकार किया कि प्रोटोस्टेंट नैतिकता तृप्ति को टालते समय कठिन श्रम के मूल्यों पर जोर डालती है और ऐसे एक दृष्टिकोण ने पूंजी व इसके उपभोग के बजाय उत्पादक पुनर्निवेश के सृजन का निर्माण किया |

Andre Gunder Frank, a German-American economic historian and sociologist emphasized the role of colonial rule or imperial domination in the development of capitalism under imperial powers./एक जर्मन-अमेरिकी आर्थिक इतिहास्वादी व समाजशास्त्री आंद्रे गुन्देर फ्रैंक ने शाही शक्तियों के तहत पूंजीवादी के विकास में शाही वर्चस्व या औपनिवेशिक शासन की भूमिका पर जोर डाला |

The colonial expansion divided the world into two major zones and created an international division of labour./औपनिवेशिक विस्तार ने विश्व को दो प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित कर दिया और श्रम के अंतर्राष्ट्रीय विभाजन को सृजित किया |

In such division, the colonies supplied cheap raw materials to the European imperial powers to feed their manufacturing industries./इस विभाजन में उपनिवेशों ने यूरोपी शाही शक्तियों को उनके विनिर्माण उद्योगों की पूर्ति के लिए कच्चे माल की आपूर्ति की |

The manufactured goods were exported back to the colonies which served also as markets./विनिर्मित वस्तुओं को वापस उपनिवेशों में ही निर्यात किया जाता था जो कि शाही शक्तियों के विनिर्मित वस्तुओं के बाजार के रूप में भी कार्य करते थे |

This colonial relationship helped in the rapid capitalist development in the European countries while destroying the handicraft industries of the colonies and suppressing the economic growth there./इस औपनिवेशिक सम्बन्ध ने यूरोपीय देशों में तेजी से पूंजीवादी विकास में मदद की जबकि उपनिवेशों में उनके हस्तनिर्मित उद्योगों को नष्ट किया व वहां के आर्थिक विकास का दमन कर दिया |

Criticism on Weber’s protestant Ethic and the rise of Spirit of Capitalism/वेबर के प्रोटोस्टेंट नैतिकता व पूंजीवाद की भावना के उदय की आलोचना :

  • English historian, R H Tawney pointed out that the empirical evidence on which Weber’s interpretation of Protestantism was based was too narrow./अंग्रेज इतिहासकार आर. एच. तौने ने उन प्रयोगसिद्ध साक्ष्यों, जिनपर वेबर की प्रोटोस्टेंटवाद की व्याख्या आधारित थी, को अत्यधिक संकीर्ण बताया |
  • According to him, England was the first country to develop capitalism but the English Puritans  didn’t believe in predestination./उनके अनुसार, इंग्लैंड पूंजीवाद का विकास करने वाला पहला राष्ट्र था लेकिन अंग्रेज नैतिकतावादियों ने पूर्वनियति पर विश्वास नहीं किया |
  • Further Weber states that the spirit of Capitalism was only one important component. There are other components including private ownership of the means of production, technological development such as mechanization or automation, formally free labour, organization of capitalist producers into joint stock companies, a univeristic legal system which applied to everyone and is administered equitably, etc constituted the basis of the ideal type of modern capitalism./इसके अलावा वेबर ने बताया कि पूंजीवाद की भावना एकमात्र महत्वपूर्ण तत्व है | इसके अलावा भी अन्य तत्व जैसे कि उत्पादन के साधनों का निजी स्वामित्व, यांत्रिकीकरण या स्वचालन जैसे तकनीकी विकास, औपचारिक रूप से स्वतन्त्र श्रम, संयुक्त स्टॉक कम्पनियों में पूंजीवादी उत्पादकों का संगठन, एक सार्वभौमिकवादी कानून प्रणाली जिसे सभी व्यक्तियों पर लागू किया जाये और जिसका प्रशासन समान रूप से किया जाता हो इत्यादि ने आधुनिक पूंजीवाद के आदर्श प्रकार के आधार को गठित किया |
  • Critics also pointed that modern capitalism is no longer guided by inner asceticism but hedonism./आलोचकों ने इस बात की ओर भी इशारा किया कि आधुनिक पूंजीवाद का मार्गदर्शन आतंरिक वैराग्य द्वारा नहीं बल्कि प्रेमवाद द्वारा होता है |

 

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