Sociology Notes 2018 Topic Sociology – The Discipline | UPSC IAS Exam

Sociology Notes 2018 Topic Sociology – The Discipline | UPSC IAS Exam

Sociology Notes 2018 Topic Sociology – The Discipline | UPSC IAS Exam

Sociology Notes 2018 Topic Sociology – The Discipline | UPSC IAS Exam

Sociology Notes 2018 Topic Sociology – The Discipline | UPSC IAS Exam

Scientific Revolution / वैज्ञानिक क्रांति :-

  • Renaissance also saw the beginning of the Scientific Revolution./पुनर्जागरण ने वैज्ञानिक क्रांति की शुरुआत भी देखी |
  • The Scientific Revolution marked an era of description and criticism in the field of Science. It was a clear break from the past, a challenge to old authority. The Scientific Revolution changed material life and also the man’s ideas about Nature and Society. Science does not develop independent of society, it develops in response to human needs. The emergence of Sociology in Europe is greatly influenced by the ideas and discoveries contributed by Science./वैज्ञानिक क्रांति ने विज्ञान के क्षेत्र में वर्णन और आलोचना के युग को चिह्नित किया।  यह अतीत से स्पष्ट अलगाव था, प्राचीन प्रथाओं को एक चुनौती थी । वैज्ञानिक क्रांति ने भौतिक जीवन को बदल दिया और प्रकृति और समाज के बारे में भी मनुष्य के विचारों को बदल दिया। विज्ञान समाज के बिना विकसित नहीं होता है, यह मानव की जरूरतों के अनुरूप विकसित होता है। यूरोप में समाजवाद का उदय विज्ञान द्वारा योगदान किए जाने वाले विचारों और खोजों से काफी प्रभावित था।
  • Because of the dominance of Church and its ‘dogmas’, the development of Science was restricted mainly to improvement in the techniques of production. But, the Renaissance thinkers rejected the blind acceptance of authority and they believed that knowledge could be gained by going out and studying mentally and manually the Book of Nature and not by speculation. According to Francis Bacon, he who seeks knowledge should first look at things that happen in the world around him. He should then ask himself what causes these things to happen and after he has formed a theory or belief, as to the possible cause, he should experiment and see whether the assumed cause produce the result he has observed./चर्च की प्रमुखता और इसके सिद्धांतों के कारण, विज्ञान का विकास मुख्य रूप से उत्पादन की तकनीकों में सुधार तक ही सीमित हो गया। लेकिन, पुनर्जागरण विचारधारियों ने ईश्वर की अंधी स्वीकृति को खारिज कर दिया और उनका मानना था कि ज्ञान को बाहर जाकर और प्रकृति की पुस्तक का मानसिक और शारीरक रूप से अध्ययन करके प्राप्त किया जा सकता है न की चिंतन-मनन द्वारा फ्रांसिस बेकन के अनुसार,ज्ञान की खोज करने वाले को आस पास होने वाली घटनाओं का संज्ञान लेना चाहिए एवं स्वयं से पूछना चाहिए की  ये चीजे क्यों हो रही है और एक सिद्धांत या विश्वास के निर्माण के बाद संभव कारण के तौर पर उन्हें प्रयोग करना चाहिए और यह देखना चाहिए कि उसके द्वारा स्वीकृत कारण से उसके द्वारा माना गया परिणाम आ रहा है अथवा नहीं । 

Various Developments in Science/विज्ञान में विभिन्न विकास –

  • Copernicus /कोपरनिकस –Six Books Concerning the Revolutions of the Heavenly Spheres was published in 1543 after his death. He introduced the notion of heliocentric universe rather than the geocentric universe. It destroyed the idea of the earth’s uniqueness by suggesting that it acted like other heavenly bodies. The idea of an open universe defied the earlier view of a closed universe created and maintained in motion by God./आकाशीय पिंडो के परिक्रमण के बारे में छह पुस्तकें उनकी मृत्यु के बाद 1543 में प्रकाशित हुईं। उन्होंने भूकेन्द्रित ब्रह्मांड की बजाय सूर्यकेंद्रित ब्रह्मांड की धारणा को प्रस्तुत किया। इस अवधारणा  ने पृथ्वी विशिष्टता की अवधारणा को नष्ट कर दिया जिसकेअनुसार यह अन्य खगोलीय पिंडों की भांति थी | ब्रह्मांड की प्राचीन अवधारणा जिसके अनुसार ब्रह्मांड  बंद है एवं यह ईश्वर द्वारा संचालित है की अवधारणा को खुले ब्रह्माण्ड की अवधारणा ने चुनौती पेश की |
  • Tycho Brahe constructed the most accurate tables of astronomical observations. The mathematical relationship that emerged from a consideration of Brahe’s observations suggested that the orbits of the planets were elliptical./टैको ब्राहे ने खगोलीय पर्यवेक्षण की सबसे सटीक तालिका का निर्माण किया। गणितीय संबंध जो ब्राहे के पर्यवेक्षण पर आधारित था, के अनुसार ग्रहों की कक्षाएं अण्डाकार थीं।
  • Kepler published a book ‘On the Motion of Mars’ in 1609. He solved the problems of planetary orbits by using the Copernican concept of circular orbits./केप्लर ने 1609 में एक किताब “ऑन द मोशन ऑफ मार्स” को प्रकाशित किया। उन्होंने वृत्ताकार कक्षों  की कोपर्निक धारणा का उपयोग करके ग्रहों के कक्षों की समस्याओं का हल किया।
  • Galileo invented telescope and examined sky for the very first time and published a famous book ‘Dialogue on the Two Chief Systems of the World’ in 1632. This book brought down on him condemnation of the Catholic Church./गैलीलियो ने दूरदर्शक यंत्र का आविष्कार किया और प्रथम बार आकाश की जांच की और 1632 में एक प्रसिद्ध पुस्तक ‘डायलॉग ऑन द टू चीफ सिस्टम्स ऑफ द वर्ल्ड’ प्रकाशित की। इस पुस्तक के कारण उन पर कैथोलिक चर्च की निंदा का आरोप लगा ।
  • Isaac Newton solved the major problems on the planetary motions and established a base for the Modern Physics. He published ‘The Mathematical Principles of Natural Philosophy’ in 1687. In this he said that the planets and all other particles in the universe moved through the force of mutual attraction, which later came to known as ‘Law of Gravitation’./आइज़क न्यूटन ने ग्रहों के गतियों की प्रमुख समस्याओं का समाधान किया और आधुनिक भौतिक विज्ञान के लिए एक आधार स्थापित किया। उन्होंने 1687 में “द मैथेमेटिकल प्रिंसिपल ऑफ़ नेचुरल फिलॉसफी” प्रकाशित कि। इस में उन्होंने कहा कि ब्रह्मांड में ग्रहों और अन्य सभी कण पारस्परिक आकर्षण के बल के कारण गति करते है , जिसे बाद में ‘गुरुत्वाकर्षण के नियम’ के रूप में जाना जाने लगा।
  • Vesalius published De Humani Corporis Fabrica in 1543. It provided the first complete description of the anatomy of the human body./विसेलियस ने 1543 में डी हमीनी कॉर्पिस फैब्रिका को प्रकाशित किया। इसमें मानव शरीर की शारीरिक रचना का पहला पूरा विवरण प्रदान किया गया था।
  • Servetus published a book explaining the circulation of blood./सेर्वेटस ने एक पुस्तक प्रकाशित की जो रक्तसंचार को समझाती थी।

Reformation / धर्म सुधार –

  • The emerging scientific knowledge stimulated the process of ‘reformation’ in the religious sphere of the European society. European people with new spirit of inquiry and thought started questioning the superstitious beliefs and malpractices of the Catholic Church./उभरते हुए वैज्ञानिक ज्ञान ने यूरोपीय समाज के धार्मिक क्षेत्र में ‘सुधार’ की प्रक्रिया को प्रेरित किया। यूरोपीय लोगों की जांच-पड़ताल की आदत और विचारों की नई भावना के साथ कैथोलिक चर्च की अंधविश्वासी धारणाओं और कुप्रथाओं पर सवाल पूछना शुरू कर दिए।
  • Reformation includes 2 major developments/सुधारों का विकास प्रमुख रूप से 2 प्रकार से हुआ –

(a) Protestant reformation which resulted in a split in Christianity and the secession of many countries from the Roman Catholic Church and establishment of separate Churches in those countries./प्रोटेस्टेंट सुधार के परिणाम्स्वरूप ईसाई धर्म में एक विभाजन और रोमन कैथोलिक चर्च से कई देशों का  अलगाव हुआ और उन देशों में अलग-अलग चर्चों की स्थापना हुई।

(b)Catholic Reformation or Counter Reformation/कैथोलिक सुधार या काउंटर सुधार

  • Reformation was not only a religious movement but it was connected with various social and political movement of the period which brought about the end of medieval period and the emergence of the modern world./कैथोलिक सुधार केवल एक धार्मिक आन्दोलन नहीं था, बल्कि यह उस काल के विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन से जुड़ा हुआ था जिसने मध्य युग की समाप्ति की और आधुनिक युग की शुरआत की ।

Catholic Church/कैथोलिक चर्च

  • During the early medieval era, Catholic Church had become a vast hierarchical organisation headed by the Pope in Rome./पूर्व मध्यकालीन युग के दौरान, कैथोलिक चर्च रोम में पोप के नेतृत्व में एक विस्तृत पदानुक्रम संगठन बन गया था।
  • The Pope was the ultimate authority over the entire hierarchy and exercised this authority directly./पोप का पूरे पदानुक्रम पर अंतिम अधिकार था और इस सत्ता का उपयोग उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से किया था |
  • Everyone irrespective of their position was required to make an oral confession of his sins to a priest at least once a year and suffer the punishment then imposed. The people not following this were excommunicated. An excommunicated person was supposed to have been sent to hell temporarily. If he died, his body could not be buried in a ritualistic manner. Other Christians were forbidden from associating with him./हर किसी को अपने पद का ख्‍याल किए बिना एक वर्ष में कम से कम एक बार पादरी के सामने अपने पापों को मौखिक रूप से स्वीकार करना पड़ता था और दी गई सजा को भुगतना पड़ता था | जो लोग इसका पालन नहीं करते थे, उन्हें समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता था। ऐसा माना जाता था कि समाज से बहिष्कृत व्यक्ति को अस्थायी तौर पर नरक में भेज दिया गया है। यदि वह मर जाता है, तो उसके शव का एक धार्मिक तरीके से दफन नहीं किया जा सकता था। अन्य ईसाइयों को उसके साथ सम्बद्ध रखने से मना कर दिया जाता था
  • Theory of Sacraments was propagated by the Church. A Sacrament is an instrument by which divine grace is communicated to men. There was no salvation without them./ धार्मिक अनुष्ठान का सिद्धांत चर्च द्वारा प्रचारित किया गया था। धार्मिक अनुष्ठान एक माध्यम है जिसके द्वारा परमात्मा की कृपा मनुष्य तक पहुंचाई जाती है | जिनके बिना कोई मोक्ष नहीं था।
  • Theory of priesthood asserted that the priest who was ordained by a bishop was the inheritor of a part of the authority conferred by Christ on Peter. The Priest had the power to co-operate with God in performing certain miracles and in releasing sinner from the consequences of their sins./पादरीपन का सिद्धांत : पादरीत्व के सिद्धांत के अनुसार वो पादरी जो धर्माध्यक्ष द्वारा नियुक्त था वह उन शक्तियों एवं अधिकारों का उत्तराधिकारी था जो ईसा मसीह ने पीटर को दी थी |पादरी के पास भगवान के सहयोग से चमत्कार करने एवं एक पापी को उसके पापों से मुक्ति दिलाने की शक्ति होती थी |
  • Reformation is a revolt against abuses growing in the Catholic Church like appointments through corrupt means, leading of  a luxurious life by Popes and higher clergy, ‘Letter of Indulgence’ which remitted punishments of sinners who bought them, levying of fees on everything from birth to death etc./धर्म सुधार एक विद्रोह था जो कैथोलिक चर्च में व्याप्त कई बुराइयों के खिलाफ था,ये बुराइयां गलत तरीके से पादरियों की नियुक्ति,पोप एवं पादरियों द्वारा भोग विलास का जीवन व्यतीत करना,पापियों के पाप मुक्त कराना,जन्म से लेकर मृत्यु तक प्रत्येक अवसर पर धन लेना आदि थी |

Protestant Revolution:

  • It began in 1517 when Martin Luther nailed his ninety-five statements which attacked the sale of indulgences, on the door of the Church in Wittenberg in Germany. He challenged people to come and hold debates with him on these. He knew that his doctrines could not be reconciled with those of the Catholic Church and that he had to break with the Catholic Church. For several years, he occupied himself with the task of building an independent German Church and in expounding his doctrine./यह 1517 में शुरू हुआ जब मार्टिन लूथर ने अपने 95 वां कथन का उल्लेख किया जिसके अनुसार जर्मनी में विटानबर्ग में चर्च के दरवाजे पर राजदूतों के समूह पर हमला किया गया। उन्होंने लोगों को इन विषयों पर आने के लिए और उनके साथ बहस करने की चुनौती दी। वह जानता था कि उनकेसिद्धांत कैथोलिक चर्च के साथ मेल नहीं खा सकते थे इसलिए उन्होंने कैथोलिक चर्च के साथ अपना सम्बन्ध तोड़ना पड़ा था। कई सालों तक उन्होंने खुद को एक अपना जर्मन चर्च बनाने और अपने सिद्धांतों का विस्तार करने के कार्य में व्यस्त कर लिया था।
  • Luther rejected the entire system of hierarchy of the Catholic Church, introduced German as the language of Church services, abolished the special status of priests as representatives of God, eliminated many sacraments and emphasized on faith than pilgrimages. He gave the utmost priority to the supreme authority of the scriptures. The German rulers supported Luther as they wanted to be free from the authority of Popes and get possession of the wealth in German monasteries for themselves. The common people supported him as his teachings gave them an opportunity to demand more freedom from their rulers./लूथर ने कैथोलिक चर्च के पदानुक्रम की पूरी प्रणाली को अस्वीकृत कर दिया , जर्मन को चर्च सेवाओं की भाषा के रूप में पेश किया, उन्होंने देवताओं के प्रतिनिधियों के रूप में पादरीयों की विशेष पद को समाप्त कर दिया, कई धार्मिक अनुष्ठानों का सफाया कर दिया और तीर्थों की बजाय विश्वास पर बल दिया। उसने बाइबिल की सर्वोच्च शक्ति को अधिक प्राथमिकता दी। जर्मन शासकों ने लूथर का समर्थन किया क्योंकि वे पोप के अधिकार से मुक्त होना चाहते थे और स्वयं के लिए जर्मन मठों की संपत्ति पर अधिकार प्राप्त करना चाहते थे। आम लोगों ने उन्हें समर्थन दिया क्योंकि उनकी शिक्षाओं ने उन्हें अपने शासकों से अधिक स्वतंत्रता मांगने का अवसर मिला। 
  • Zwingli and Calvin became the leaders of the Protestant movement in Switzerland and King Henry VIII and Queen Elizabeth I in England./ज्विंगली और केल्विन स्विट्जरलैंड में और किंग हेनरी VIII और महारानी एलिज़ाबेथ I इंग्लैंड में प्रोटेस्टेंट आंदोलन के नेता बने थे

Counter-Reformation/धर्मसुधार-विरोधी आंदोलन –

  • Due to the damage caused by the Protestant Movements, a series of reforms began within the Catholic Church, known as ‘Counter-Reformation’./प्रोटेस्टेंट आंदोलनों की वजह से हुई क्षति के कारण, कैथोलिक चर्च में सुधार का एक सिलसिला शुरू हुआ, जिसे धर्मसुधार-विरोधी आंदोलन (काउंटर-रिफॉर्मेशन) कहा जाता है।
  • Efforts were made to restore the Catholic Church’s universal authority./कैथोलिक चर्च के विश्वव्यापी अधिकार को नवीकरण करने के प्रयास किए गए ।
  • The Council of Trent (1545) was summoned by Pope Paul III to consider ways to combat Protestantism. It decided to settle disputes regarding doctrines of the Catholics and the Protestants; clean up moral and administrative abuses within the Catholic Church and organise a new crusade against the Muslims./प्रोटेस्टेंटिज़्म के विरोध करने के तरीकों पर विचार करने के लिए पोप पॉल III ने ट्रेंट (1545) की समिति को बुलाया था। इसने कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट के सिद्धांतों के बारे में विवादों का निपटारा करने का निर्णय लिया, कैथोलिक चर्च के भीतर नैतिक और प्रशासनिक कुरीति को साफ करें और मुसलमानों के खिलाफ एक नया अभियान संगठित करें।
  • An order of missionaries, known as Jesuits was organized with the purpose of spreading the message of Christ./धर्म-प्रचारकों का एक क्रम जिसे ईसा मसीह के संदेश को फैलाने के उद्देश्य के लिए संगठित किया गया था को जेसुइट्स के नाम से जाना जाता था ।
  • Although most of Europe remained Protestant, new lands overseas were being won to the Catholic Church./यद्यपि अधिकांश यूरोप प्रोटेस्टेंट ही बना रहा लेकिन नए बाहरी क्षेत्र कैथोलिक चर्च द्वारा अधिग्रहीत कर लिए गए |

Industrial Revolution/औद्योगिक क्रांति –

  • It began around 1760 A.D. in England. Itt brought about great changes in the social and economic life of the people first in England, then in other countries of Europe and later in other countries. In England, the discovery of new territories, explorations, growth of trade and commerce and the consequent growth of towns brought about an increase in demand for goods./यह इंग्लैंड में लगभग 1760 ईस्वी में प्रारंभ हुआ। इसकी वजह से पहले इंग्लैंड में लोगों के सामाजिक और आर्थिक जीवन के संबंध में , फिर यूरोप के दूसरे देशों में और बाद में दूसरे देशों में बहुत बदलाव आया। इंग्लैंड में, नए क्षेत्रों की खोज, अन्वेषण, व्यापार और वाणिज्य की वृद्धि और कस्बों के परिणामस्वरूप वृद्धि से वस्तुएँ की मांग में वृद्धि हुई।

Impact of Industrial Revolution on Society/समाज पर औद्योगिक क्रांति का प्रभाव

  • Capitalist system of production developed. The developments of banks, insurance companies, and finance corporations took place./उत्पादन की पूंजीवादी प्रणाली विकसित हुई और बैंकों, बीमा कंपनियों और वित्त निगमों का विकास हुआ।
  • New class of industrial workers, managers, capitalists emerged. The factory workers were involved in repetitive and boring work, the result of which they could not enjoy. Marx saw a form of enslavement in the machine and a manifestation of alienation of labour. The conservatives feared that such conditions would lead to chaos and disorder. The radicals like Engels felt that the factory workers would initiate social transformation./नए वर्गों का उदय हुआ जिनमे औद्योगिक श्रमिक , प्रबंधक, और पूंजीवादी थे । कारखाने के मज़दूर समान प्रकार के और अरुचिकर काम में शामिल थे, जिसके परिणामस्वरूप वे आनंद नहीं ले सकते थे।    रूढ़िवादियों को डर था कि ऐसी परिस्थितियों में अराजकता और अव्यवस्था पैदा होगी।एंजल्स जैसे कट्टरपंथियों का यह मानना था कि कारखाने के मजदूर सामाजिक परिवर्तन का आंदोलन  शुरू देंगे

Significant Themes of the Industrial Revolution/औद्योगिक क्रांति के महत्वपूर्ण विषय

The Condition of labour/श्रमिकों की स्थिति:

  • A new population earning their livelihood by working in the factories arose. They lived in poverty and squalor. Sociologists recognised that the poverty of this class of workers is not natural poverty but social poverty./अपनी आजीविका के लिए कारखानों में काम कर रही  एक नई पीढ़ी का उदय हुआ। वे गरीबी और गन्दगी में रहते थे। समाजशास्त्रियों ने यह स्वीकार किया कि श्रमिकों की इस श्रेणी की गरीबी प्राकृतिक गरीबी नहीं बल्कि सामाजिक गरीबी है।

The transformation of property/संपत्ति का रूपान्तरण:

  • Capital became important and new capitalists gained power. Property is related to economic privileges, social status and political power. A change in the property system involves a change in the fundamental character of society./पूंजी महत्वपूर्ण बन गई और नए पूंजीपतियों ने सत्ता हासिल की। संपत्ति से अभिप्राय आर्थिक विशेषाधिकार, सामाजिक स्थिति और राजनीतिक शक्ति से था। संपत्ति प्रणाली में बदलाव के कारण समाज के मूलभूत स्वरूप में बदलाव हुआ |
  • Sociologists have grappled with the question of property and its impact on social stratification since the days of Marx, Tocqueville, Taine and Weber./समाजशास्त्री सम्पति एवं इसके वितरण के समाज पर प्रभाव के विषय पर मार्क्स, टोकेविले, टाइन और वेबर  के समय से ही असमंजस था

Urbanisation/शहरीकरण –

  • Industries grew and along with it grew populations, modern towns and cities./उद्योग की वृद्धि हुई और इसके साथ ही जनसंख्या, आधुनिक कस्बों  और शहरों में वृद्धि हुई।
  • Ancient cities were known as repositories of civilised graces and virtues while the new cities were known as repositories of misery and inhumanity. These aspects of the new cities concerned the early sociologists./प्राचीन शहरों को सभ्य गौरव और गुणों के खजाने के रूप में जाना जाता था, जबकि नए शहरों को दुख और निर्दयता के खजाने के रूप में जाना जाता था। नए शहरों के ये पहलु शुरुआती समाजशास्त्रियों से संबंधित थे

Enlightenment/प्रबोधन  –

  • Enlightenment is used to indicate the intellectual movement in 18th century western and central Europe especially in England and France. In France, the Enlightenment is termed as the Age of Reason and it was dominated by a group of scholars known as the philosophes./18 वीं सदी के पश्चिमी और मध्य यूरोप में विशेष रूप से इंग्लैंड और फ्रांस में बौद्धिक आंदोलन को इंगित करने के लिए प्रबोधन का उपयोग किया जाता है। फ्रांस में, प्रबोधन को विवेक का युग कहा जाता है और इस परविद्वानों के एक समूह प्रभुत्व था जिसे दार्शनिकों के रूप में जाना जाता था
  • Various changes during 16th and 17th centuries like discovery of new lands, application of technology to agriculture and industries, increase in population, new sectors like banking, trade etc, and education served as a catalyst in the movement of ideas./16 वीं और 17 वीं शताब्दी के दौरान नई भूमि की खोज, कृषि और उद्योगों के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग, आबादी में वृद्धि, नए क्षेत्र जैसे बैंकिंग, व्यापार आदि में विभिन्न बदलाव आये और शिक्षा ने विचारों के आंदोलन में मुख्य स्रोत के रूप में काम किया।
  • Enlightenment challenged Absolutism. In the course of Enlightenment, reason supplanted authority as the accepted method of arriving at the truth. All who participated in this movement were convinced that human understanding is capable by its own power and without recourse to supernatural assistance, of comprehending the system of the world. Under absolutism, the individual had to submit to the authority who was supposed to possess the monopoly of the truth; but under Enlightenment the individual acquired a new importance, dignity and self respect./प्रबोधन ने निरपेक्षता को चुनौती दी ,प्रबुद्धता के दौरान तर्क ने सत्य को स्वीकारने की दैव्य शक्ति का स्थान ले लिया, इस आंदोलन में शामिल सभी का यह मानना था की मनुष्य अपनी स्वयं की बुद्धि  एवं बिना किसी अलौकिक सहायता के ब्रह्माण्ड तंत्र को समझा जा सकता है |निरपेक्षता के अधीन, व्यक्ति को स्वयं को उस दैव्य शक्ति को सौंपना होता था जिनके पास सत्य का एकाधिकार होता था, परन्तु प्रबोधन के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति का अपना महत्व है,अपनी गरिमा है एवं अपना आत्म सम्मान है |
  • Montesquieu in his book, The Spirit of the Law, asserted that there should not be concentration of authority at one place. He believed in the theory of separation of powers and the liberty of the individual./मॉन्टेस्क्यू ने अपनी पुस्तक ‘द स्पिरिट ऑफ द लॉ’ में कहा कि प्राधिकरण की एकाग्रता को एक स्थान पर नहीं होना चाहिए। उन्होने शक्तियों के पृथक्करण और व्यक्ति की स्वतंत्रता का सिद्धान्त दिया।
  • Rousseau in his book, The Social Contract argued that the people of a country have the right to choose their sovereign. He believed that people can develop their personalities best only under a government which is of their own choice. He explained that the king and his subjects are parties to a contract and if the king does not rule the people according to their general will, he loses their loyalty./रूसो ने अपनी किताब, द सोशल कॉन्ट्रैक्ट में तर्क दिया कि किसी देश के लोगों को अपने शासक को चुनने का अधिकार है उनका मानना था कि लोग अपने व्यक्तित्व को केवल सरकार के अधीन ही विकसित कर सकते हैं जो कि उनके पसंद की है उन्होंने समझाया कि राजा और उसकी प्रजा एक अनुबंध के दल हैं और अगर राजा अपनी सामान्य इच्छा के अनुसार लोगों पर शासन नहीं करता है, वह अपनी निष्ठा खो देता है
  • Enlightenment was also influenced by the Scientific revolution, particularly Physics. It was said that with scientific inquiry (based on empirical observation and application of reason) the underlying natural laws governing the universe can be discovered. The knowledge of these laws and gradual inclusion of the individual and society into the realm of science would help in controlling the physical world better and creating a better society./प्रबोधन भी वैज्ञानिक क्रांति, विशेष रूप से भौतिकी द्वारा प्रभावित था।यह कहा गया था कि वैज्ञानिक जांच से(आनुभविक अवलोकन और विवेक के इस्तेमाल के आधार पर) ब्रह्मांड को नियंत्रित करने वाले आधारभूत प्राकृतिक नियमों  की खोज की जा सकती है। इन नियमों का ज्ञान और विज्ञान के क्षेत्र में व्यक्ति और समाज के क्रमिक समावेश को भौतिक दुनिया को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने और बेहतर समाज बनाने मदद करते थे|
  • Enlightenment thinkers also shared ‘a vision of human progress’. Humanity was seen to be marching in a direction and was considered to be governed by a ‘law of progress’. The enlightenment scholars argued that all humans had certain inalienable natural rights which must be respected such as right to freedom of speech and expression, right of participation in the decision making process etc./प्रबोधन विचारकों ने भी ‘मानव प्रगति का एक दृष्टिकोण’ साझा किया है। मानवता को एक दिशा में आगे बढ़ते देखा गया  और इसे ‘प्रगति के नियम ‘ के अधीन माना जाता था। प्रबोधन विद्वानों ने तर्क दिया कि सभी इंसानों के कुछ अहस्तान्तरणीय प्रकृतिक अधिकार हैं जिनका सम्मान किया जाना चाहिए जैसे कि भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, निर्णय लेने की प्रक्रिया आदि में भागीदारी का अधिकार।
  • The developments were seen as the sign of progress and the enlightenment period was marked by a new optimism about the man’s capacity to usher in  a happy social order./विकास को उन्नति के प्रतीक के रूप में देखा गया और प्रबोधन समय को  एक खुशहाल सामाजिक क्रम में मनुष्य की क्षमता को एक नई आशा के रूप में चिह्नित किया |

 

 

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