RAS HCS 2018 : Ecology Agriculture Notes (Prelims+Mains)- Clear IAS

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Agriculture-

  • Agri-soil + cultura- cultivation
  • Agriculture is the cultivation and breeding of animals, plants and fungi for food, fiber, biofuel, medicinal plants  and other products used to sustain and enhance human life.
  • Silviculture– Art of cultivating forest trees
  • Sericulture– Rearing of silkworm for the production of raw silk
  • Apiculture– maintenance of honey bee colonies, commonly in hives, by humans
  • Olericulture– science of vegetable growing, dealing with the culture of non-woody (herbaceous) plants for food.
  • Viticulture– science, production and study of grapes.
  • Floriculture– it is concerned with the cultivation of flowering and ornamental plants for gardens
  • Arboriculture– cultivation, management, and study of individual trees, shrubs, vines, and other perennial woody plants
  • Pomology– branch of horticulture which focuses on the cultivation, Production, harvest, and storage of fruit, etc.

Scope and Importance of Agriculture

India is known as “land of Villages”. Agriculture is the most important enterprise in the World.

  • Contribution of agriculture in Gross domestic Product (GDP)= 17.2%
  • Agriculture provides livelihood support to about two-thirds of country’s population
  • It provides employment to 56.7% of country’s work force and is the single largest private sector occupation.

CROP AND ITS CLASSIFICATION

Classification based on climate-

  • Tropical- crops grow well in warm & hot climate Eg. Rice, sugarcane, Jowar etc
  • Temperate- crops grow well in cool climate. Eg. Wheat, Oats, Gram, Potato etc.

Classification based on growing season-

  1. kharif/Rainy/Monsoon crops: the crops grown in monsoon months from June to Oct-Nov, Require warm, wet weather at major period of crop growth, also required short day length for flowering Eg. cotton, rice, jowar, bajara.
  2. Rabi/winter/cold season crops: the crops grown in winter season from Oct to March month. Crops grow well in cold and dry weather. Require longer day length for flowering. Eg. Wheat, gram, sunflower etc.

Classification based on life of crops/ duration of crops

  • Seasonal crops: A crop completes its life cycle in one season. Eg. rice, Jowar, Wheat etc.
  • Two Seasonal crops: crops complete its life cycle in two seasons. Eg. Cotton, turmeric, ginger
  • Annual crops: Crops require one full year to complete its life cycle. Eg. Sugarcane

Classification based on cultural method/water:

  • Rain fed: Cultivation of crop mainly based on the availability of rain water. Eg. Jowar, Bajara, Mung etc
  • Irrigated crops: Crops cultivated with the help of irrigation water. Eg. Chili, sugarcane, Banana, Papaya etc.

Classification based on root system

  • Tap root system: The main root goes deep into the soil. Eg. Tur, Grape, Cotton etc.
  • Fiber rooted: the crops whose roots are fibrous, shallow & spreading into the soil. Eg. cereal crops, wheat, rice etc.

Classification based on economic importance-

  • Cash crop: Grown for earning money. Eg. Sugarcane, cotton
  • Food crops: grown for raising food grain for the population and fodder for cattle. Eg. Jowar, wheat, rice etc

कृषि

  • Agri- मिट्टी + cultura-
  • Agri- मिट्टी + cultura-खेती
  • कृषि, भोजन, रेशों, जैव ईंधन, औषधीय पौधों, तथा अन्य उत्पादों जिनका इस्तेमाल मानव जीवन को उन्नत बनाने तथा बनाए रखने के लिए किया जाता है, के लिए की जाने वाली  पशुओं, पादपों, तथा कवक की खेती एवं वंशवृद्धि है |
  • वन संवर्धन वनीय वृक्षों को उपजाने की कला |
  • रेशम उत्पादन – कच्चे रेशम के उत्पादन के लिए रेशम के कीड़ों को पालना |
  • मधुमक्खी पालन – मधुमक्खियों की आबादी का संरक्षण, आम तौर पर मनुष्यों द्वारा उनके छत्तों में|
  • कृषि, भोजन, रेशों, जैव ईंधन, औषधीय पौधों, तथा अन्य उत्पादों जिनका इस्तेमाल मानव जीवन को उन्नत बनाने तथा बनाए रखने के लिए किया जाता है, के लिए की जाने वाली  पशुओं, पादपों, तथा कवक की खेती एवं वंशवृद्धि है |
  • शाक कृषि – सब्जियाँ उगाने का विज्ञान, भोजन के लिए अकाष्ठीय पादपों की खेती से संबंधित |
  • अंगूर की खेती – अंगूरों का विज्ञान, उत्पादन तथा अध्ययन |
  • पुष्पकृषि – यह उद्यानों के लिए कुसुमित एवं सजावटी पौधों की खेती से संबंधित है |
  • वृक्ष संवर्धन – एक वृक्ष, झाड़ी, लता, तथा अन्य चिरस्थायी काष्ठीय पौधों की खेती, प्रबंधन तथा उनका अध्ययन |
  • फलकृषि विज्ञान – बागवानी की एक शाखा जिसमें फलों आदि की खेती, कटाई, उत्पादन तथा भंडारण आदि पर ध्यान केन्द्रित किया जाता  है |

कृषि का क्षेत्र तथा महत्व :

भारत को गाँवों की भूमि के रूप में जाना जाता है | कृषि विश्व का सबसे महत्वपूर्ण उद्यम है |

  • सकल घरेलु उत्पाद में कृषि का योगदान = 17.२ प्रतिशत |
  • कृषि देश की दो-तिहाई आबादी को आजीविका की सहायता प्रदान करता है |
  • यह देश की 56.7 प्रतिशत श्रमिक संख्या को रोज़गार प्रदान करता है तथा यह एकमात्र सबसे बड़ा निजी क्षेत्र व्यवसाय है |

फसल तथा इसका वर्गीकरण :

जलवायु पर आधारित वर्गीकरण –

  • उष्णकटिबंधीय- वैसी फसलें जो गर्म जलवायु में फसलें अच्छी होती हैं | उदाहरण – धान, गणना, ज्वार आदि |
  • शीतोष्ण – वैसी फसलें जो ठंडी जलवायु में अच्छी होती हैं | उदाहरण – गेहूं, जई, चना, आलू आदि |

उपजाने की ऋतुओं के आधार पर वर्गीकरण :

  • खरीफ/ बरसाती/ मानसून फसलें – जून से लेकर अक्टूबर-नवम्बर तक मॉनसून के महीनों में उगाई जाने वाली फसलों को फसल विकास की मुख्य अवधि में  हल्के गर्म, आर्द्र मौसम की आवश्यकता होती है तथा साथ ही पुष्पण के लिए इन्हें कम लम्बाई वाले दिनों की आवश्यकता होती है | उदाहरण –  कपास, धान, ज्वार, बाजरा आदि |
  • रबी/ शीतकालीन फसलें : अक्टूबर से मार्च के महीने के बीच सर्दियों में उगाई जाने वाली फसलें| ये फसलें ठन्डे एवं शुष्क मौसम में अच्छे से उगती हैं | इन्हें पुष्पण के लिए अधिक लम्बाई वाले दिनों की आवश्यकता होती है | उदाहरण – गेहूँ, चना, सूर्यमुखी आदि |

फसलों के जीवन/ फसलों की कालावधि के आधार पर वर्गीकरण

  • मौसमी फसलें- वे फसलें जो अपना जीवनचक्र एक ऋतू में पूरा करती हैं | उदाहरण- धान, ज्वार. गेहूं आदि |
  • द्वि-मौसमी फसलें :  वे फसलें जो अपना जीवनचक्र दो मौसमों में पूरा करती हैं | उदाहरण- कपास, हल्दी, अदरक |
  • वार्षिक फसलें : वैसी फसलें जिन्हें अपना जीवनचक्र पूरा करने में एक वर्ष का समय लगता है | उदाहरण- गन्ना |

खेती विधि/पानी के आधार पर वर्गीकरण:

  • वर्षा पोषित फसलें : फसलों का उत्पादन मुख्यतः वर्षा जल की उपलब्धता पर आधारित होता है | उदाहरण- ज्वार, बाजरा, मूंग आदि |
  • सिंचित फसलें : वैसी फसलें जिनका उत्पादन सिंचाई जल की सहायता से किया जाता है | उदाहरण- मिर्च, गन्ना, केला, पपीता आदि |

जड़-तंत्र के आधार पर वर्गीकरण :

  • मुख्य जड़तंत्र : मुख्य जड़ मिट्टी में गहराई तक जाती है | उदाहरण – तुरा, अंगूर, कपास आदि  |
  • रेशेदार जड़ वाली फसलें : वे फसलें जिनकी जड़ें रेशेदार,  उथली तथा मिट्टी में फैली हुई होती हैं | उदाहरण – खाद्यान्न फसलें, गेहूं, धान आदि |

आर्थिक महत्त्व के आधार पर वर्गीकरण :

  • नकदी फसलें : वैसी फसलें जिन्हें धन कमाने के लिए उपजाया जाता है | उदाहरण – गन्ना, कपास|
  • खाद्य फसलें : जिनका उत्पादन आबादी के लिए खाद्यान्न बढ़ाने तथा पशुओं के चारे के लिए किया जाता है | उदाहरण- ज्वार, गेहूं, धान आदि |

RAS HCS 2018

CROPPING

Cropping Intensity: Number of crops cultivated in a piece of land per annum is cropping intensity.

In Punjab and Tamil Nadu the cropping intensity is more than 100 per cent i.e. around 140-150%. In Rajasthan the cropping intensity is less.

Cropping pattern:  the yearly sequence and spatial arrangement of crops and fallow on a given area is called cropping pattern

Cropping system: the cropping pattern used on a farm and its interactions with farm resouces, other farm enterprises, and available technology which determine their makeup.

Multiple cropping: Growing more than two crops in a piece of land in a year in orderly succession. It is also called as intensive cropping. It is used to intensify the production. It is possible only when assured resources are available. (Land, labour, capital and water)

Intercropping: growing two or more crops simultaneously with distinct row arrangement on the same field at the same time.

Base crop: primary crop which is planted/sown at its optimum sole crop population in an intercropping

Intercrop: This is a second crop planted in between rows of base crop with a view to obtain extra yields with intercrop without compromise in the main crop yields.

Advantages of Intercropping

  • Better use of growth resources including light, nutrients and water
  • Suppression of weeds
  • Yield & stability- even if one crop fails due to unforeseen situations, another crop will yield and provides some secured income.

Disadvantages:

  • Higher amount of nitrogen has to be applied for mineralization of organic matter in zero tillage
  • Perrenial weeds may be a problem
  • High number of volunteer plant and buildup of pest.

Mixed cropping-

  • Growing of two or more crops simultaneously intermingled without row arrangement is known as mixed cropping.
  • It is a common practice in most of dryland tracts in India.
  • Seeds of different crops are mixed in certain proportion and are sown.
  • The objective is to meet the family requirement of cereals, pulses and vegetables, it is a subsistence farming
  • Ex. Sorghum, Bajra and cowpea are mixed and broadcasted in rainfed conditions

Difference between Intercropping & Mixed Cropping

फसल सघनता : भूमि के एक टुकड़े पर प्रतिवर्ष उगाई जाने वाली फसलों की संख्या को फसल सघनता कहते हैं |

पंजाब तथा तमिलनाडु में फसल तीव्रता 100 प्रतिशत से अधिक है अर्थात् लगभग 140-150 प्रतिशत | राजस्थान में फसल तीव्रता कम है |

सस्य स्वरुप : किसी दिए गए क्षेत्र में फसलों का वार्षिक क्रम तथा उनकी स्थानिक व्यवस्था एवं परती को सस्य स्वरुप कहते हैं |

सस्यक्रम : किसी कृषिभूमि पर प्रयुक्त फसल क्रम तथा कृषि-भूमि संसाधनों, अन्य कृषि उपक्रमों एवं उपलब्ध तकनीक के साथ उसकी अंतःक्रियाएँ जो उसकी बनावट को निर्धारित करती है |

बहु फसली  : भूमि के एक भाग पर एक वर्ष में क्रमबद्ध अनुक्रमण में दो से अधिक फसलों का उत्पादन | इसे गहन सस्यक्रम भी कहा जाता है | इसका प्रयोग उत्पादन में वृद्धि करने के लिए किया जाता है | यह केवल तभी संभव है जब आश्वस्त संसाधन उपलब्ध हों | (भूमि, श्रम, पूँजी, तथा पानी )

अंतरासस्यन : दो या दो से अधिक फसलों का एक साथ एक ही भूमि पर एक ही समय में पृथक पंक्ति व्यवस्था के साथ उत्पादन करना |

मूल फसल : प्राथमिक फसल जिसे अंतरासस्यन में इसकी अनुकूलतम एकल फसल के ऊपर बोया/ रोपा जाता है |

अंतर फसल : यह दूसरी फसल होती है जिसे मूल फसल की पंक्तियों के बीच में बिना मुख्य फसल की उपज से समझौता किये हुए अधिक पैदावार प्राप्त करने के लिए रोपा जाता है |

अंतरासस्यन के लाभ :

  • फसलों के विकास में सहायक संसाधनों का बेहतर प्रयोग | इनमें प्रकाश, पोषक तत्त्व, तथा जल शामिल हैं |
  • खरपतवारों का शमन |
  • उपज तथा स्थिरता – अनपेक्षित कारणों की वजह से यदि कोई फसल खराब भी हो जाए तो दूसरी फसल का उत्पादन होगा एवं कुछ सुरक्षित आय प्राप्त होगी |

हानि :

  • शून्य जुताई में जैविक पदार्थो के खनिजीकरण के  लिए नाइट्रोजन का अधिक मात्रा में प्रयोग किया जाता है |
  • बारहमासी खरपतवार एक समस्या हो सकते हैं |
  • ऐच्छिक पौधों तथा कीटों की संख्या में वृद्धि |

मिश्रित सस्यन –

  • दो या दो से अधिक फसलों का एक साथ बिना पंक्ति व्यवस्था के परस्पर मिश्रित उत्पादन को मिश्रित सस्यन कहा जाता है |
  • यह भारत के अधिकांश शुष्क भूमि वाले इलाकों की आम प्रथा है |
  • विभिन्न फसलों के बीजों को निश्चित अनुपात में मिलाया जाता है तथा उन्हें बो दिया जाता है |
  • इसका उद्देश्य अनाज, दालों, तथा सब्जियों की पारिवारिक ज़रूरतों को पूरा करना है, यह एक जीवन-निर्वाह कृषि है |
  • उदाहरण- ज्वार, बाजरा तथा राजमा को मिला दिया जाता है एवं वर्षा अनुकूल परिस्थितियों में छीट (रोप ) दिया जाता है |

FARMING SYSTEMS

Definitions

  • Farm- is a piece of land with specific boundaries, where crop and livestock enterprises are taken up under common management.
  • Farming- is the process of harnessing solar energy in the form of economic plant and animal products.
  • System- a set of components which are interdependent and interacting

Wetland farming-

  • Wetland- soils flooded or irrigated through lake, pond or canal and land is always in submerged condition.
  • Wetland farming- is the practice of growing crops in soils flooded through natural flow of water for most part of the year

Garden land/irrigated Dryland farming

  • Garden land- soils irrigated with ground water sources
  • Garden land farming: Growing crops with supplemental irrigation by lifting water from underground sources.

Mixed farming

  • Mixed farming is defined as a system of farming on a particular farm which includes crop production, raising live stock, poultry, fisheries, bee keeping etc. to sustain and satisfy as many needs of the farmer as possible.
  • Subsistence is important objective of mixed farming.
  • While higher profitability without altering ecological balance is important in farming system.
  • Advantages:
  • It offers highest return on farm business, as the by-products of farm are properly utilized.
  • It provides work throughout year.
  • Efficient utilization of land, labour, equipment and other resources.

Specialized Farming

  • The farming in which 50% or more income of total crop production is derived from a single crop is called specialized farming.

CROP ROTATION

  • Growing of different crops on a piece of land is a pre-planned succession. The principle of crop rotation is to utilize the available resources to the fullest extent in order to harvest the maximum in a unit land without affecting the soil health.

Ex- Rice-Red Gram-Banana

Principles of crop Rotation

  • leguminous crops should be grown before non-leguminous crops because legumes fix atmospheric N into the soil and add organic matter to the soil
  • Crops of same family should not be grown in succession because they act as alternate hosts for insect pests and diseases
  • The selection of crops should suit farmers financial conditions
  • The crop selected should also suit to the soil and climatic condition.

कृषि प्रणाली

परिभाषा :

  • कृषिभूमि/खेत – विशिष्ट सीमाओं वाला एक भूखंड जिसमें फसल अथवा पशुओं से सम्बंधित उद्यम एक साझा प्रबंधन के अंतर्गत शुरू किये जाते हैं |
  • खेती- आर्थिक पौधों एवं पशु उत्पादों के रूप में सौर ऊर्जा के दोहन की प्रक्रिया |
  • प्रणाली- अवयवों का एक समूह जो परस्पर निर्भर होते हैं तथा एक दूसरे को प्रभावित करते हैं |

आर्द्र्भूमि कृषि –

  • आर्द्र्भूमि – जलप्लावित अथवा झील, तालाब या  नहर द्वारा सिंचित मृदा जहां भूमि हमेशा जलमग्न स्थिति में रहती है
  • आर्द्र्भूमि कृषि – फसलों के उत्पादन की वह पद्धति है जिसमें मृदा वर्ष के अधिकांश हिस्सों में पानी के प्राकृतिक प्रवाह से जलमग्न रहती है |

उद्यान भूमि/ सिंचित शुष्कभूमि कृषि

  • उद्यान भूमि- भूजल स्रोतों से सिंचित भूमि |
  • उद्यान भूमि कृषि – भूमिगत स्रोतों से पानी प्राप्त करके पूरक सिंचाई की सहायता से फसलों का उत्पादन |

मिश्रित खेती

  • मिश्रित खेती को किसी विशेष कृषिभूमि पर खेती की एक प्रणाली के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें किसान की अधिक से अधिक आवश्यकताओं को संतुष्ट करने के लिए फसल उत्पादन, पशुधन में वृद्धि,  मुर्गी पालन, मत्स्यन, मधुमक्खी पालन आदि जैसे कार्य शामिल होते हैं|
  • मिश्रित खेती का महत्वपूर्ण उद्देश्य जीवन निर्वाह होता है |
  • पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित किये बिना कृषि प्रणाली में उच्च लाभप्रदता महत्वपूर्ण है |

लाभ :

  • खेत के उपोत्पादों का बेहतर प्रयोग होने के कारण यह पद्धति कृषि व्यापार में सबसे अधिक लाभ प्रदान करती है |
  • यह पूरे वर्ष रोज़गार प्रदान करती है |
  • भूमि, श्रम, औजार तथा अन्य संसाधनों  का कुशल प्रयोग|

विशिष्ट कृषि

  • वैसी खेती जिसमें कुल फसल उत्पादन की 50 प्रतिशत या उससे अधिक आय केवल एक ही  फ़सल से प्राप्त होती है, उसे विशिष्ट कृषि कहा जाता है |

फसलों का चक्रीकरण –

  • एक पूर्व-नियोजित अनुक्रमण में किसी भूखंड पर विभिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन |  फसल चक्रीकरण का उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का पूर्ण हद तक उपयोग करना है ताकि मिट्टी के स्वास्थ्य को प्रभावित किये बिना अधिकतम उपज प्राप्त की जा सके |

फसल चक्रीकरण के सिद्धांत

  • गैर-फलीदार फसलों से पहले फलीदार फसलों को उगाना चाहिए क्योंकि फलियां वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मृदा में स्थिर करती हैं तथा मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों में वृद्धि करती हैं |
  • एक ही कुल की फसलों को अनुक्रमण में नहीं उगाना चाहिए क्योंकि वे  कीट परोपजीवियों एवं रोगों के लिए पोषिता के रूप में कार्य करती हैं |
  • फसलों का चयन किसानों की वित्तीय स्थिति के अनुकूल होना चाहिए |
  • चयनित फसल मिट्टी एवं जलवायु परिस्थिति के भी अनुकूल होनी चाहिए |

 

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