Rajasthan art and culture I Customs and costumes part 1/3 Rajasthan I RAS 2018

Rajasthan art and culture I Customs and costumes part 1/3 Rajasthan I RAS 2018
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Rajasthan art and culture I Customs and costumes part 1/3 Rajasthan I RAS 2018

Rajasthan art and culture I Customs and costumes part 1/3

Rajasthan art and culture I Customs and costumes part 1/3

Sixteen Sanskar: –

  • The following sixteen rites have been considered compulsory from conception to funeral to make the human body healthy  and pure and for good values ​​of the mind.

1). Conception: –

  • Proper time for conception and essential religious activities

2). Punsvan: –

  • Before giving  birth to the child in the womb, praising the deities  for the birth of a son is called Punsvan Samskara.

3). Seemantotrayan: –

  • This Sanskar was done to save the pregnant woman from abnormal/evil forces.

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Customs and Costumes in Rajasthan Part - 1

सोलह संस्कार :-

  • मनुष्य शरीर को स्वस्थ तथा दीर्घायु और मन को शुद्ध और अच्छे संस्कारों वाला बनाने के लिए गर्भाधान से लेकर अंत्येष्टि तक निम्न सोलह संस्कार अनिवार्य माने गये हैं :-

1).  गर्भाधान :-

  • गर्भाधान के पूर्व उचित काल और आवश्यक धार्मिक क्रियाएँ।

2). पुंसवन :-

  • गर्भ में स्थित शिशु को पुत्र का रूप देने के लिए देवताओं की स्तुति कर पुत्र प्राप्ति की याचना करना पुंसवन संस्कार कहलाता है।

3). सीमन्तोन्नयन :-

  • ग़र्भवति स्त्री को अमंगलकारी शक्तियों से बचाने के लिए किया गया संस्कार।

4). Jaatkarm: –

  • Sanskar performed on the birth of a child.

5). Naamkaran: –

  • Samskaras on the tenth or twelfth day of birth to name the baby.

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6). Nishkraman: –

  • After the fourth month of birth, to bring the child out of the house for the first time, to let him see the sun and moon.

7). Annapraashan: –

  • The action of giving first cereal food to the child in the sixth month of birth

8). Chudakarm or Jadulla: –

  • In the first or third year of the baby, the rituals  being done for cutting head hair first. It is also called jadulla removing.

4). जातकर्म :-

  • बालक के जन्म  पर किया जाने वाला संस्कार।

5). नामकरण :-

  • शिशु का नाम रखने के लिए जन्म के दसवें अथवा 12 वें दिन किया जाने वाला संस्कार।

6). निष्क्रमण :-

  • जन्म के चौथे मास में बालक को पहली बार घर से निकालकर सूर्य और चंद्र दर्शन कराना।

7). अन्नप्राशन :-

  • जन्म के छठे मास में बालक को पहली बार अन्न का आहार देने की क्रिया।   

8). चूड़ाकर्म या जडूला :-

  • शिशु के पहले या तीसरे वर्ष में सिर के बाल  पहली बार मुड़वाने पर किया जाने का संस्कार। इसे जडूला उतारना भी कहते हैं।

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9). Karnvedh: –

  • The sanskaar to be done in the third and fifth years of the baby, in which the ear of the baby is pierced.

10). Schooling: –

  • Sanskaras being done by worshipping the deities and  sitting in front of the Guru to learn the alphabet.

11). Upaniyan: –

  • The child was taken to the teacher for his  education , the Brahmachari Ashram would start with this ritual. It was also called ‘Yagyopaveet Sanskar’. The Brahmins, the Kshatriye and the Vaishyas had the right to practice upnayan.

9). कर्णवेध :-

  • शिशु के तीसरे एवं पाँचवें वर्ष में किया जाने वाला संस्कार, जिसमें शिशु के कान बीधें जाते हैं।

10). विद्यारम्भ :-

  • देवताओं की स्तुति कर गुरु के समक्ष बैठकर अक्षर ज्ञान कराने हेतु किया जाने वाला संस्कार।

11). उपनयन :-

  • इस संस्कार द्वारा बालक को शिक्षा के गुरु के पास ले जाया जाता था ब्रम्हचर्याश्रम इसी संस्कार से  प्रारम्भ होता था। इसे ‘यज्ञोपवीत संस्कार’ भी कहते थे। ब्राह्मणों, क्षत्रीय और वैश्यों को ही उपनयन का अधिकार था।

12). Vedaarambh: –

  • Samskaras to take the right to read the  Vedas

13). Keshant or Godan: –

  • Normally a ritual performed at the age of 16, in which the bachelors had to cut their hair. Now this rites have been extinct.

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14). Samavartan or Convocation: –

  • The ritual performed at the end of the education, the student gave his teacher  Gurudakshina and received blessings from him and returned home after bathing. Due to bathing(snaan), the bachelor was called a Snaatak.

12). वेदारम्भ :-

  • वेदों के पठन-पाठन का अधिकार लेने हेतु किया गया संस्कार।

13). केशान्त या गोदान :-

  • सामान्यतः 16 वर्ष की आयु में किया जाने वाला संस्कार , जिसमें ब्रम्हाचारी को अपने बाल कटवाने पड़ते थे। अब यह संस्कार विलुप्त हो चूका है।

14). समावर्त्तन या दीक्षांत संस्कार :-

  • शिक्षा समाप्ति पर किया जाने वाला संस्कार, विधार्थी अपने आचार्य को गुरुदक्षिणा देकर उसका आशीर्वाद गृहण कराता था तथा स्नान करके घर लौटता था। स्नान के कारण  ही ब्रम्हाचारी को स्नातक कहा जाता था।

15). Wedding ceremony :-

  • Sanskar on the occasion of admission in Grihastashram

16). Funeral: –

  • It is the cremation performed on death.

Other major customs: –

(1). Shamela or Madhuperk :-

  • On reaching bride’s home, the bride’s father introduces the groom’s party with his relatives,  it is called ‘Samola’.

(2) Bindoli: –

  • A day before the marriage, the iundoli of  bride and groom is taken out, in which women sing songs, and make both of them roam in a village or a mohalla.

15). विवाह संस्कार :-

  • ग्रहस्थाश्रम में प्रवेश के अवसर पर किया जाने वाला संस्कार।

16). अंत्येष्टि :-

  • यह मृत्यु  पर किया जाने वाला दाह संस्कार है।

अन्य प्रमुख रीति-रिवाज :-

(1). सामेला या मधुपर्क :-

  • वर के वधु के घर पहुँचने पर वधु  का पिता अपने संबंधियों के साथ वर पक्ष का स्वागत करता है, इसे ‘समोला’  कहते हैं।

(2) बिंदोली :-

  • विवाह के एक दिन पूर्व वर व वधु की बिंदोली  निकाली जाती है, जिसमें स्त्रियाँ माँगलिक गीत गाते हुए उन दोनों को गाँव या मोहल्ले में घूमाती हैं।

(3). Pahrawani / Rangabari: –

  • While the  barat is returning, every barati and bride and bridegroom are given  some amount of money and gifts and they are called pahravani.

(4). Muklava or Gauna: –

  • If the married minor becomes adult enough and she is sent to her in-laws, , it is called ‘Muklava’ or ‘gauna’.

(5). Badhaar : –

  • The collective food  on the occasion of marriage

(6). Kankandor Bandhna:

  • The moli thread tied in the hands of bride and bridegroom before marriage is called Kankandor  bandhna.

(3). पहरावणी/रंगबरी :-

  • बारात विदा करते समय प्रत्येक बाराती तथा वर-वधु को यथाशक्ति धन व उपहारादि दिए जाते हैं, जिसे पहरावणी कहते है।

(4). मुकलावा या गौना :-

  • विवाहित अवयस्क कन्या को वयस्क होने पर उसे अपने ससुराल भेजना ‘मुकलावा’ करना या ‘गौना’ कहलाता है।  

(5). बढार :-

  • विवाह के अवसर पर दिया जाने वाला सामूहिक प्रतिभोज।

(6). कांकनडोर बांधना :-

  • विवाह के पूर्व वर व वधु के हाथ में बाँधा गया मोली का धागा कांकन डोर बाँधना कहा जाता है।

(7). Jamana: –

  • On the birth of a son, The Nai  takes the Pagle (Footprints using turmeric of the new born on white clothes). Then the maternal grandfather or uncle  comes with garments, gifts etc., which is called jamana.

(8). Nangal: –

  • The ceremony of inauguration of the newly built house is called  Nangal.

(9) Mausar: –

  • Death feast is called a Mausar. It is also called Ausar or Nukta.

(10). Toran : –

  • On the occasion of marriage, the bride toches a stick on the toran on the main entrance of the bride’s house. This is called toran ceremony.

(7). जामणा :-

  • पुत्र जन्म पर नाई बालक के पगल्ये (सफेद वस्त्र पर हल्दी से अंकित पद चिन्ह) लेकर उसके ननिहाल जाता है। तब उसके नाना या मामा उपहार स्वरूप वस्त्राभूषण, मिठाई आदि लेकर आते हैं, जिसे ‘जामणा’ कहा जाता है।

(8). नांगल :-

  • नवनिर्मित गृह के उद्घाटन की रस्म नांगल कहलाती है।

(9) मौसर :-

  • मृत्यु भोज को मौसर कहते है। इसे औसर या नुक्ता भी कहते हैं।

(10). तोरण मारना :-

  • विवाह के अवसर पर दूल्हे द्वारा दुल्हन के घर के मुख्य द्वार पर लटके तोरण पर छड़ी लगाना तोरण मारना  कहलाता है।

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