Rajasthan GK I RAS History I Quit India Movement Bilingual PDF

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Quit India Movement and establishment of responsible government

  • In August 1942, Mahatma Gandhi started the ‘Quit India Movement’ and started nationwide movement with the spirit Do Or Die.
  • Then according to his orders, the leaders of Prajamandals in Rajputana demanded of the kings that they should break all ties with the British  and establish responsible government.
  • There were strong movements in all princely states regarding this demand.
  • The activists and supporters of Prajamandal gave arrests.
  • The movement in kota became so furious that the people locked the police in barracks and took over the police stations.
  • This town was under the control of revolutionaries for three days. It was led by Benimadhav Sharma, Nathulal Jain and others.

भारत छोडो आंदोलन और उत्तरदायी शासन की स्थापना

  • अगस्त 1942 में महात्मा गाँधी ने ‘भारत छोडो आंदोलन’  का शंखनाद किया और करो या मरो की भावना से देशव्यापी आंदोलन प्रारम्भ किया।  
  • तब उनके निर्देशानुसार राजपूताने के प्रजामंडलों  ने राजाओं से मांग की कि वे अंग्रेज सरकार से अपना सम्बन्ध विच्छेद करें एवं रियासतों में उत्तरदायी शासन की स्थापना करें।  
  • इस मांग को लेकर सभी रियासतों में जोरदार आंदोलन हुए।
  • प्रजामण्डलों के कार्यकर्ताओं व सहयोगियों ने गिरफ्तारियां दी।  
  • कोटा में तो आंदोलन इतना उग्र हो गया था कि जनता ने पुलिस को बैरकों में  बंद कर चौकियों और थानों पर नियंत्रण कर लिया।
  • पुरे तीन इन तक नगर आंदोलनकारियों के कब्जे में रहा,  जिसका नेतृत्व बेनीमाधव शर्मा, नाथूलाल जैन आदि क्रांतिकारी कर रहे थे।  
  • Before handing over the rule to the Maharawal, the Indian National flag was hoisted and army and police saluted it.
  • Jaipur Prajamandal was almost inactive in this movement.
  • Its president Heeralal Shastri and Jaipur Prime Minister Sir Mirza Ismile signed an aggrement in Sept. 1942, khown as Gentlemen’s aggrement.
  • In this aggrement, the government assured that “The state government will not help the Britishers in battles in future and will work towards establishment of responsible govt.”.
  • So this aggrement was contrary to the basic spirit of Quit India Movement.
  • As a result of this aggrement, Hiralal Shastri gave up the idea of struggle using Prajamandal against the Jaipur Maharaja .

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  • यहाँ महारावल को प्रशासन पुनः सौंपने के पूर्व भारत का राष्ट्रीय तिरंगा झंडा फेहराया गया , जिसे पुलिस व सेना ने सलामी दी।  
  • जयपुर प्रजामण्डल इस आंदोलन में लगभग निष्क्रिय रहा।  
  • इसके अध्यक्ष हीरालाल शास्त्री ने जयपुर के तत्कालीन प्रधानमंत्री सर मिर्जा इस्माइल से सितम्बर 1942 में एक समझौता किया जिसे ‘ जेंटलमेंस अग्ग्रेमेन्ट’ के नाम से जाना जाता है।  
  • इस समझौते में सरकार द्वारा आश्वासन दिया गया कि “राज्य सरकार अंग्रेजों को भविष्य में युद्ध के लिए मदद नहीं करेगी और राज्य में उत्तरदायी शासन की स्थापना की कार्यवाही शीघ्र ही प्रारम्भ करेगी”।  
  • इस प्रकार यह समझौता भारत छोडो आंदोलन की मूल भावन के सर्वथा विपरीत था।
  • इस समझौते के  फलस्वरूप शास्त्री जी ने जयपुर महाराजा के विरुद्ध प्रजामण्डल द्वारा संघर्ष छेड़ने का विचार त्याग दिया।  
  • Some activists were dissatisfied with the role of Jaipur Prajamandal in Quit India Movement and some leaders like Baba Harishchandra,  Daulatram Bhandari, Chiranjilal Mishra and Ramkaran Joshi formed ‘Aajad Morcha’ and started the movement.
  • Jamnalal Bajaj founded Charkha Sangh in Jaipur with a view to increasing creative activities and sense of self-reliance.
  • It was led by B.S. Deshpandey.
  • The activists of Charkha Sangh and hundreds other citizens participated in this movement.
  • In 1945, Aajad Morcha was merged with Jaipur Prajamandal.
  • On December 31, 1945 and january 1, 1946, Manikyalal Verma organized the 6th session of Princely State Public Council in Saletiya Maidan of Udaipur and it was presided by Jawaharlal Nehru.

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  • भारत छोडो आंदोलन में जयपुर प्रजामण्डल की भूमिका से असंतुष्ट होकर कुछ सक्रिय कार्यकर्ताओं  – बाबा हरिश्चंद्र, दौलतराम भंडारी, चिरंजीलाल मिश्र तथा रामकरण जोशी आदि ने ‘आजाद मोर्चे’ का गठन किया और आंदोलन शुरू किया।  
  • जमनालाल बजाज द्वारा सन 1942 में जयपुर में रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने और स्वदेशी तथा स्वावलम्बन की भावना को विकसित करने के उद्देश्य से चरखा संघ की स्थापना की।  
  • इसको श्री बी. एस. देशपांडे नेतृत्व प्रदान कर रहे थे।
  • इस आंदोलन में चरखा संघ के कर्मचारियों व सैंकड़ों अन्य नागरिकों ने भी भाग लिया।  
  • 1945 में आजाद मोर्चे का जयपुर प्रजामण्डल में विलय हो गया।
  • 31 दिसंबर, 1945 व 1 जनवरी 1946 को श्री माणिक्यलाल वर्मा ने अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद् का षष्ठम अधिवेशन उदयपुर में सलैटिया मैदान  में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में आयोजित किया।

Rajasthan GK

  • A resolution was passed in the All India Princely State Public Council which appealed the rulers to immediatley establish responsible government in their states, keeeping in mind the changing political scenario of the nation.
  • This session created widespread political consciousness and led to the formation of responsible governments.
  • In 1948,  responsible govt. was established in Jaipur under leadership of Hiralal Shastri.
  • In Jodhpur also popular cabinet was formed in 1948 and Jainarayan Vyas was appointed the Prime Minister.
  • In the small state Shahpura also a constitution was enacted on August 14, 1947 in which there was provision of completely responsible government.
  • The popular cabinet of Gokullal Assawa was sworn on that day.
  • अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद् ने एक प्रस्ताव द्वारा रियासतों के शासकों से अपील की कि वे देश में तेजी से बदलती हुई परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपनी-अपनी रियासतों में अविलब उत्तरदायी शासन स्थापित करें।  
  • इस अधिवेशन से राजस्थान की रियासतों में अभूतपूर्व जाग्रति आई और उत्तरदायी सरकारों की स्थापना हुई।  
  • 1948 में जयपुर रियासत में हीरालाल शास्त्री के नेतृत्व में उत्तरदायी सरकार की स्थापना हुई।  
  • जोधपुर में भी 1948 में लोकप्रिय मंत्रिमंडल का गठन हुआ और श्री जयनारायण व्यास प्रधानमंत्री बनाये गए।
  • शाहपुरा के छोटे से राज्य में भी 14 अगस्त, 1947 को एक संविधान लागु किया गया जिसमे पूर्ण उत्तरदायी सरकार का प्रावधान किया गया।  
  • गोकुललाल असावा के लोकप्रिय मंत्रिमंडल ने उस दिन शपथ ली।  

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  • In jhalawar also popular cabinet was established in 1947 and Maharaja Harishchndra himself became the Prime Minister.

 

  • Kanhaiyalal Mitaal and Mangilal Bhavya represented the Prajamandal.
  • On seeing the changing conditions of country, Dungarpur Maharawal established a popular cabinet in january 1948. Gorishankar Upadhyay was made the Chief Minister.
  • This cabinet worked till Dungarpur princely state was merged with Rajasthan Sangh.
  • Bhupendranath Trivedi became the Chief Minister of the popular cabinet of Banswara.
  • In this manner, steps were taken in all princely states for constitutional reforms and establishment of responsible government.
  • Jaisalmer was the only princely state in which there was no progress in this direction
  • झालावाड़  में सन 1947 में लोकप्रिय मंत्रिमंडल की स्थापना हुई, जिसमे प्रधानमंत्री स्वयं महाराजा हरिश्चंद्र बने।  
  • प्रजामण्डल की और से सर्व श्री कन्हैयालाल मित्तल और मांगीलाल भव्य शामिल हुए।  
  • देश में बदलती हुई परिस्थितियों को देखकर डूंगरपुर महारावल ने राज्य में जनवरी, 1948 में एक लोकप्रिय मंत्रिमंडल बनाया, जिसमे श्री गौरीशंकर उपाध्याय मुख्यमंत्री बनाये गए।  
  • यह मंत्रिमंडल डूंगरपुर रियासत के राजस्थान संघ में विलय होने तक कार्य करता रहा।  
  • बांसवाड़ा के लोकप्रिय मंत्रिमंडल में श्री भूपेन्द्रनाथ त्रिवेदी मुख्यमंत्री बने।  
  • इसी प्रकार बूंदी अलवर आदि लगभग सभी रियासतों में संवैधानिक सुधार कर उत्तरदायी सरकार बनाने की दिशा में कुछ कदम उठाये गए।  
  • केवल जैसलमेर ही एक ऐसी रियासत थी,  जहाँ इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई।  
  • Neither it participated in the ‘Quit India Movement’ of 1942, nor was responsible government established there.

उसने न तो 1942 में ‘भारत छोडो आंदोलन’ में भाग लिया और न ही वहाँ उत्तरदायी शासन की स्थापना हुई।

 

 

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