RAS 2018 I Rajasthan GK I History I Freedom Fighters of Rajasthan PDF

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Guru Govind Giri – He was the resident of Bansiya village of Dungarpur who helped in the upliftment of the Bheels of Vagad  of Rajasthan.

  • He founded ‘Samp Sabha’and started movement for social,religious awakening of tribal Bheels.
  • On November 17, 1913 during a  annual gathering at his place at Mangarh Mountain, the British army fired and massacred many Bheels.
  • Thakur Kushalsingh – Thakur Kushalsingh Champawat of Auwa thikana of Jodhpur defeated the joint army of Jodhpur state and British during the battle of 1857.
  • He again defeated the army of A.G.G Lorentz and Captain Mack Mason in battle.

Amarchand Bathiya – A resident of Bikaner, who helped Queen of Jhansi, Lakshmibai and Tantya Tope by giving them his saved money.

  • He was the first freedom fighter to be hanged during the freedom struggle of 1857.

गुरु गोविन्द गिरी – राजस्थान में वागड़ प्रदेश  के भीलों के प्रथम उद्धारक व डूंगरपुर के बाँसिया ग्राम के निवासी।

  • इन्होने ‘सम्प सभा’ की स्थापना करके आदिवासी भीलों में समाज व धर्मसुधार का आंदोलन चलाया।
  • 17 नवंबर 1913 को इनकी कार्यस्थली मानगढ़ पहाड़ी पर एक वार्षिक सभा के दौरान अंग्रेज सेना ने भीषण फायरिंग कर नरसंहार किया।

ठाकुर कुशलसिंह – जोधपुर रियासत में आउवा ठिकाने  के ठाकुर कुशालसिंह चाँपावत ने 1857 के संग्राम के दौरान जोधपुर राज्य व अंग्रेजों की सम्मिलित सेना को हराया था।

  • पुनः ए.जी.जी.  लॉरेंस तथा कप्तान मैक मेसन की सेना को भी युद्ध में हराया।  

अमरचंद बाठिया – बीकानेर के निवासी,  जिन्होंने झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, तांत्या टोपे को अपनी संचित धनराशि सहायतार्थ दी थी।  

  • ये प्रथम स्वतंत्रता सेनानी थे , जिन्हे 1857 के संग्राम  अंग्रेजों ने फांसी पर लटकाया था।

Risaldar Mehrab Khan Pathan

Risaldar Mehrab Khan Pathan – He was born in Karauli and was a military officer of Kota army and chief revolutionary , who led the revolutionaries in the 1857 battle of independence.

Motilal Tejawat – Tejawat of Kolyari Village of Udaipur started ‘Eki Movement’  to unite the tribal Bheels .

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    • The tribals people called him ‘Bavaji’.
    • He contributed a lot to free the Bheels from exploitation and atrocities .

Lala Jaidayal Bhatnagar – He was a lawyer of Kota court and was a chief freedom fighter.

  • During the struggle of 1857, Risaldar Mehrab Khan and Bhatnagar provided leadership to the revolutionaries and took the city under their control.
  • Later on he was hanged.

रिसालदार मेहराब खान पठान – करौली में जन्मे कोटा राज्य की सेना के एक सैनिक पदाधिकारी एवं प्रमुख क्रन्तिकारी, जिन्होंने 1857 की स्वतंत्रता क्रांति में कोटा के क्रांतिकारियों का नेतृत्व किया था।

मोतीलाल तेजावत – उदयपुर के कोल्यारी ग्राम के श्री तेजावत ने आदिवासी भीलों को संगठित करने हेतु ‘एकी आंदोलन’ चलाया था।

  • आदिवासी इन्हे ‘बावाजी’ कहते थे।
  • भीलों को अत्याचारों एवं शोषण से मुक्ति दिलाने में इन्होने बहोत योगदान दिया।  

लाला जयदयाल भटनागर – कोटा दरबार के वकील व प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी  थे।

  • इन्होने 1857 की क्रांति के दौरान रिसालदार मेहराब खान के साथ कोटा के क्रांतिकारियों को नेतृत्व प्रदान किया एवं शहर पर कब्ज़ा किया।
  • बाद में इन्हे फांसी दे दी गयी।  

Vijaysingh Pathik (1882-1954) – He was  prominent revolutionary and organizer of Bijauliya peasant movement, who was born in Guthawali village of Buland Shahar of Uttar Pradesh. His real name was ‘Bhup Singh’.

    • He was the editor of ‘Rajasthan Kesari’ and founder of ‘Rajasthan Seva Sangh’. He also founded the Veer Bharat Sabha.
    • In 1921, he started publishing ‘Naveen Rajasthan’ and Tarun Rajasthan’ .
    • Pathik was also the vice-president of princely state public council.

Rao Gopalsingh Jharwa –  Rao Gopalsingh Kharva of Kharva Thikana of Ajmer was a famous revolutionary.

  • Together with Rasbihari Bose and Sachindranath Sanyal he made plans for armed rebellion.
  • The revolt failed because their plan leaked before execution.

विजयसिंह पथिक (1882- 1954) – बिजौलिया किसान आंदोलन के प्रमुख संचालक व सुप्रसिद्ध क्रन्तिकारी, जिनका जन्म उत्तरप्रदेश के बुलंद शहर के गुठावाली गाँव में हुआ था।  इनका मूल नाम ‘भूपसिंह’ था।

  • ‘राजस्थान केसरी’ के संपादक व ‘राजस्थान सेवा संघ’ के संस्थापक थे। इन्होने वीर भारत सभा का भी गठन किया।
  • 1921 में ‘नवीन राजस्थान’ व ‘तरुण राजस्थान’ पत्र शुरू किया।
  • पथिक जी देशी राज्य लोक परिषद् के उप्पाध्यक्ष भी रहे।  

राव गोपालसिंह खरवा – अजमेर के खरवा ठिकाने के राव गोपालसिंह खरवा एक प्रसिद्ध क्रन्तिकारी थे।

  • इन्होने रासबिहारी बोस और सचिन्द्रनाथ सान्याल के साथ मिलकर शसस्त्र क्रांति की योजना बनायीं।  
  • इसका भेद खुल जाने के कारण ये क्रांति असफल हो गयी।  

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Arjunlal Sethi –  Born in the house of Jauharilal Sethi in Jaipur, Arjunlal Sethi was the first revolutionary of Rajasthan.

  • To educate people about freedom and revolution, he established the first institute of India , ‘Jain Vardhaman Vidhyalay’.
  • He was a nationalist and as well as a writer.
  • His famous writings were ‘Mahendrakumar’ , ‘Madan Parajay’ , ‘Pasharva Yagna’ etc.
  • He was a strong social reformer.
  • He made efforts for Hindu-Muslim unity.
  • He spent his last time in a mosque.
  • Befor his death, he expressed the desire to be buried instead of burning (Hindu Tradition).
  • His desciple Jorawar Singh Barhath threw a bomb on Lord Hardingues on December 23, 1912 at Chandi Chowk while Hardings entering Delhi, but Hardings survived.

अर्जुनलाल सेठी – जयपुर में जौहरीलाल सेठी के घर जन्मे श्री अर्जुनलाल सेठी राजस्थान के प्रथम क्रन्तिकारी थे।  

  • उन्होंने क्रांति व आजादी का पाठ पढ़ाने के लिए जयपुर में भारत की प्रथम राष्ट्रीय विधापीठ  ‘जैन वर्धमान विद्यालय’ की स्थापना की।
  • वे राष्ट्रवादी नेता होने के साथ-साथ साहित्यकार भी थे।  
  • ‘महेंद्रकुमार’, ‘मदन पराजय’, ‘पाशर्व यज्ञ’  आदि उनकी प्रमुख कृतियाँ है।
  • वे प्रबल समाज सुधारक थे।  
  • इन्होने हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए  प्रयास किये।
  • इनका अंतिम समय मस्जिद में गुजरा।  
  • मृत्यु से पूर्व उन्होंने अपने को जलने की जगह कब्र में दफ़नाने की इच्छा व्यक्त की।  
  • इन्ही के शिष्य जोरावर सिंह बारहठ ने 23 दिसंबर, 1912 को लार्ड हार्डिंग्स पर दिल्ली प्रवेश के समय चांदनी चौक में बम फेंका परन्तु हार्डिंग्स बच गया।

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Kesarsingh Barhath(1872-1941) –  Born in Devpura Kheda village of Shahpura of Mewar state, he was a famous poet and historian, who dedicated his whole life to the nation.

    • He wrote articles namely ‘Chetavani ra Chuntgya’ and stopped Maharana Fatehsingh from going to Delhi Durbar of Lord Curzon, 1903
    • Rasbihari Bose had entrusted him the entire responsibility of armed rebellion in Rajasthan.
    • Revolutionary Pratap Singh Barhath was his son.
    • Hindi translations of ‘Buddhacharit’ written by Avghosh and  biography of King Shyamaldas are the famous works of Kesarsingh Barhatah.
    • His whole family was dedicated to the freedon struggle of Rajasthan.

Seth Jamnalal Bajaj – Born in Kashi ka Bas village of Sikar, he was a famous industrialist, social activist and revolutionary. Like Bhamashah he gave all all his money for the welfare of country.

केसरसिंह बारहठ (1872- 1941) – मेवाड़ राज्य की शाहपुरा रियासत के ग्राम देवपुरा खेड़ा में जन्मे प्रसिद्ध क्रन्तिकारी कवि व इतिहासकार, जिन्होंने अपना सारा जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित किया।  

  • इन्होने मेवाड़ के महाराणा फतेहसिंह को  ‘चेतावणी रा चूंगट्या’ के रूप में सोरठे लिखकर लार्ड कर्ज़न के 1903 के दिल्ली  दरबार में जाने से रोका था।
  • रासबिहारी बोस ने राजस्थान में शास्त्र क्रांतिकारी दल का संपूर्ण दायित्व इन्हे सौंपा था।
  • क्रन्तिकारी प्रतापसिंह बारहठ इन्ही के पुत्र थे।  
  • अवघोष कृत ‘बुद्धाचरित’ का हिंदी अनुवाद एवं कवी राजा श्यामलदास की जीवनी श्री केसरसिंह बारहठ की  महत्त्वपूर्ण रचनाओं में गिनी जाती है।
  • इनका समस्त परिवार राजस्थान के स्वतंत्रता आंदोलन में न्योछावर हो गया।  

सेठ जमनालाल बजाज – सीकर के एक छोटे से गाँव कशी का बास में जन्मे प्रसिद्ध उद्योगपति, समाजसेवी व क्रांतिकारी। ‘भामाशाह’ की तरह उन्होंने अपनी सारी पूंजी देश हित में लगा दी।   

    • Jamnalal Bajaj is often referred as the fifth son of Gandhi.

Manikyalal Verma –  Born in Bijauliya on December 4, 1887, he pledged to work for the welfare of the nation throughout his life.

    • His song ‘Panchida’ was very popular.
    • He wstablished Mewar Prajamandal in 1938.
    • His book ‘Mewar ka Vartaman Shasak’ portrayed the exploitation of public by feudal rule and described the condition of the public.
    • Verma became the Prime Minsiter of Sanyukt Rajasthan established in Udaipur.

Narayani Devi verma – She was wife of  Manikyalal Verma and was a leading lady female fighter and a great warrior.

  • On November 14, 1944, she established Mahila Ashram in Bhilwara.
  • जमनालाल बजाज को गाँधी का 5 व पुत्र भी कहा जाता है।

माणिक्यलाल वर्मा – बिजौलिया में 4 दिसंबर, 1887 को जन्मे लोकनेता, जिन्होंने श्री विजयसिंह पथिक से आजन्म देश सेवा का व्रत लिया।

  • वर्मा जी का ’पंछीड़ा’ नामक गीत बहुत लोकप्रिय हुआ
  • उन्होंने 1938 में मेवाड़ प्रजामण्डल  की स्थापना की।
  • इनके द्वारा लिखित पुस्तक ‘मेवाड़ का वर्तमान शासन’ में सामंती शासन के अत्याचारों और जनता की दारुण दशा का वर्णन किया गया।  
  • वर्मा जी उदयपुर में गठित हुए संयुक्त राजस्थान के प्रधानमंत्री बने।

नारायणी देवी वर्मा – लोकनायक श्री माणिक्यलाल वर्मा की धर्मपत्नी व अग्रणी महिला स्वतंत्रता सेनानी व महान योद्धा।

  • उन्होंने 14 नवंबर, 1944 को भीलवाड़ा में महिला आश्रम की स्थापना की।

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