Protected Area Network Ecology Study Notes | UPSC IAS Exam 2018

Protected Area Network Ecology Study Notes | UPSC IAS Exam 2018

Protected Area Network Ecology Study Notes | UPSC IAS Exam 2018

Protected Area Network Ecology Study Notes | UPSC IAS Exam 2018

Protected Area Network Ecology Study Notes | UPSC IAS Exam 2018

Protected Areas-

  • It is a clearly defined geographical space, recognised, dedicated and managed, through legal or other effective means, to achieve the long term conservation of nature with associated ecosystem services and cultural values.
  • Protected areas are the core of efforts towards conserving nature and the services it provides us- food, clean water supply, medicine and protection from the impact of natural disaster.

Wildlife Sanctuary (WLS) –

The wildlife(protection) Act of 1972 provided for the declaration of certain Areas by the state government as wildlife sanctuaries if the area was thought to be of adequate ecological, geomorphological and natural significance.

National park-

A park used for conservation purpose.

In 1969 the IUCN declared a national park to be relatively large area with- one or more ecosystems .

National parks are declared in areas that are considered to be adequate ecological, geomorphological and natural significance although within the law, the difference in conservation value of a National Park from that of a Sanctuary is not specified in the WPA 1972

  • National parks are more protected than sanctuaries
  • Human activities are not allowed in a National Park.
  • Wildlife sanctuary can be created for a particular species whereas national park is not primarily focused on a particular species.

General provision for sanctuary and National Park

Initial notification– Whenever it appears to the state government that an area, whether within a sanctuary or not, is byreason of its ecological, faunal, floral, geomorphological or zoological association or importance, needed to be constituted as a national park for the purpose of protecting, propagating or developing wildlife theren or its environment, it may by notification, declare its intention to constitute such area as a national park.

Declaration of area as sanctuary-

When a notification has been issued and the period for preferring claim has elapsed, and all claims, if any made in relation to any land in the area intended to be declared as a sanctuary, have been Disposed of by the state government or

  • Any area comprised within any reserve forest or any part of the territorial waters, which is considered by the state government to be of adequate ecological, faunal, geomorphological, natural or zoological significance.

Restriction on entry in sanctuary-

No other person than a public servant on duty,

  • A person who has been permitted by the Chief Wild Life Warden or the authorized officer to reside within the limits of the sanctuary/national park
  • A person who has any right overImmovable property within the limits of the sanctuary/National Park
  • A person passing through the sanctuary/ National Park along a public highway Shall enter or reside in the sanctuary/ National park, except under and in accordance with the conditions of a permit granted.

Grant of Permit

The chief wildlife warden may, on application, grant to any person a permit to enter or reside in a sanctuary/National park for all or any of the following purposes-

  • Photography
  • Scientific research
  • Tourism
  • Transaction of lawful business with any person residing in the sanctuary
  • Destruction etc in a sanctuary prohibited without a permit
  • Causing fire prohibited
  • Prohibition of entry in sanctuary with weapons
  • Ban on use of injurious substances

संरक्षित क्षेत्र-

  • प्रकृति से सम्बंधित पारितंत्र सेवाओं तथा सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करने के लिए , यह एक स्पष्ट रूप से परिभाषित भौगोलिक क्षेत्र है,  जो कानूनी अथवा अन्य किसी प्रभावशाली साधन के द्वारा मान्यता प्राप्त, समर्पित एवं प्रबंधित है |
  • संरक्षित क्षेत्र प्रकृति को संरक्षित करने के तरफ किये गए प्रयासों के आधार हैं तथा इनके द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं में भोजन, स्वच्छ जल आपूर्ति, औषधि तथा प्राकृतिक आपदा के प्रभाव से संरक्षण शामिल हैं |

वन्य जीव अभ्यारण्य :

  • वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 राज्य सरकार के द्वारा उन क्षेत्रों को वन्य जीव अभ्यारण्य के रूप में घोषित करने की व्यवस्था करता है
  • यदि उस क्षेत्र को  पर्याप्त पारिस्थितिक, भू-आकृतिक तथा प्राकृतिक महत्त्व का समझा गया था |

राष्ट्रीय उद्यान :

एक उद्यान जिसका उपयोग संरक्षण उद्देश्यों के लिए किया जाता है |

1969 में, आईयूसीएन ने उस क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया जो एक या अधिक पारितंत्रों वाला तथा तुलनात्मक रूप से बड़ा क्षेत्र हो |

  • राष्ट्रीय उद्यान उन क्षेत्रों में घोषित किये जाते हैं जिन्हें पर्याप्त पारिस्थितिक, भू-आकृतिक तथा प्राकृतिक महत्व का माना जाता है , हालाँकि क़ानून के भीतर, राष्ट्रीय उद्यान के संरक्षण मूल्यों में तथा अभ्यारण्य के संरक्षण मूल्यों में अंतर डब्ल्यू.पी.ए 1972 में उल्लिखित नहीं किया गया है |
    • प्राकृतिक उद्यान का संरक्षण अभ्यारण्यों से अधिक किया जाता है |
    • राष्ट्रीय उद्यानों में मानव गतिविधियों को अनुमति नहीं दी जाती है |
    • वन्य जीव अभ्यारण्य का निर्माण किसी विशेष प्रजाति के लिए किया जा सकता है जबकि राष्ट्रीय उद्यान किसी विशेष प्रजाति पर केन्द्रित नहीं होता है |

अभ्यारण्य तथा राष्ट्रीय उद्यानों के लिए सामान्य प्रावधान :

प्रारंभिक अधिसूचना : जब भी राज्य सरकार को यह प्रतीत होता है कि अभ्यारण्य के भीतर या बाहर , किसी क्षेत्र को उसके पारिस्थितिक, पशु , पुष्प, भू-आकृति या प्राणी सम्बन्धी महत्व के कारण, रक्षा,  प्रसार, अथवा वहाँ या उसके पर्यावरण में वन्यजीव के विकास के उद्देश्य से राष्ट्रीय उद्यान के रूप में गठित करना आवश्यक है, तो सरकार अधिसूचना के द्वारा, उस क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित करने के अपने इरादे की घोषणा कर सकती है |

अभ्यारण्य के रूप में एक क्षेत्र की घोषणा :

जब एक अधिसूचना जारी कर दी गयी हो तथा दावे को पसंद करने की अवधि गुजर चुकी हो , तथा अभ्यारण्य के रूप में घोषित होने वाली भूमि के सम्बन्ध में किये गए सभी दावों (यदि किये गए हो तो) को राज्य सरकार के द्वारा निपटा दिया गया हो, या

  • आगार वन अथवा प्रादेशिक जल सीमा क्षेत्र में समाविष्ट कोई भी क्षेत्र, जिसे राज्य सरकार के द्वारा पर्याप्त पारिस्थितिक, पशु, भू-आकृतिक, प्राकृतिक अथवा प्राणिशास्त्र से सम्बंधित महत्व का माना जाता है |

अभ्यारण्य में प्रवेश पर प्रतिबन्ध

ड्यूटी पर कार्यरत लोक सेवक के अतिरिक्त किसी भी अन्य व्यक्ति का प्रवेश प्रतिबंधित है |

  • एक व्यक्ति जिसे मुख्य वन्यजीव प्रबंधक अथवा अधिकृत अधिकारी के द्वारा अभ्यारण्य/राष्ट्रीय उद्यान की सीमाओं के भीतर रहने की अनुमति प्रदान की गयी हो |
  • एक व्यक्ति जिसका अभ्यारण्य/राष्ट्रीय उद्यान के भीतर की किसी अचल संपत्ति पर अधिकार है |
  • अभ्यारण्य/ राष्ट्रीय उद्यान के किनारे सार्वजनिक उच्च मार्ग से होकर गुजरने वाला व्यक्ति दी गयी स्वीकृति की शर्तों के अंतर्गत एवं उनकी  सीमा में अभ्यारण्य/ राष्ट्रीय उद्यान में प्रवेश करेगा अथवा रहेगा |

अनुमति देना :

मुख्य वन्यजीव प्रबंधक , आवेदन पर, किसी व्यक्ति को, इन सभी अथवा इनमें से कुछ उद्देश्यों के लिए अभ्यारण्य / राष्ट्रीय उद्यान में प्रवेश अथवा रहने की अनुमति प्रदान कर सकता है :

  • फोटोग्राफी
  • वैज्ञानिक अनुसंधान
  • पर्यटन
  • अभ्यारण्य में रह रहे किसी भी व्यक्ति के साथ वैध व्यापारिक लेनदेन |
  • अभ्यारण्य में तोड़- फोड़ आदि बिना अनुमति के प्रतिबंधित है |
  • आग जलाने पर रोक है |
  • अभ्यारण्य में हथियारों के साथ प्रवेश निषेध है |
  • हानिकारक पदार्थों के इस्तेमाल पर प्रतिबन्ध | 

Claim of Rights-

  • In the case of a claim to a right in or over any land referred to, the collector shall pass an order admitting or rejecting the same in whole or in part
  • If such claim is admitted in whole or in part, the collector may either
  1. Exclude such land from the limits of the proposed sanctuary or
  2. Proceed to acquire such land or rights, except where by an agreement between the owner of such land or holder of such rights has agreed to surrender his rights to the Government, in or over such land, and on payment of such compensation,As is provided in the Land Acquisition Act, 1894
  3. allow, in consultation with the chief Wild Life Warden, the continuation of any right of any person in or over any land within the limits of the sanctuary

Settlement of rights-

  • The state government shall make alternative arrangements required for making available fuel, fodder and other forest produce to the persons affected, in terms of their rights as per the government records.
  • The State government appoints an officer as a ‘collector’ under the act to inquire into and determine the existence, nature and extent of rights of any person in or over the land comprised within the sanctuary/National Park which is to be notified.
  • After the issue of a notification for declaration of the Protected Area, no right shall be acquired in, on or over the land comprised within the limits of the area specified in such notification, except by succession, testamentary or intestate.

अधिकार के दावे :

  • संदर्भित किसी भूमि में अथवा भूमि पर अधिकार के किसी मामले में, समाहर्ता उस दावे को पूर्णतः अथवा अंशतः स्वीकृत अथवा अस्वीकृत करने वाला एक आदेश पारित करेगा
  • यदि ऐसे किसी दावे को पूर्णतः अथवा अंशतः स्वीकार कर लिया जाता है , तो समाहर्ता या तो,
  1. उस भूमि को प्रस्तावित अभ्यारण्य की सीमा से बाहर रख सकता है या,
  2. वह ऐसी भूमि अथवा अधिकार को अधिग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू करेगा,  सिवाय उस स्थिति में जब उस भूमि का मालिक अथवा उस प्रकार के अधिकारों का धारक एक समझौते के  तहत, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 में उल्लिखित क्षतिपूर्ति के भुगतान पर,  उस भूमि के या उस भूमि पर, अपने अधिकारों को सरकार के समक्ष त्यागने के लिए सहमत हुआ है |
  3. मुख्य वन्यजीव प्रबंधक के परामर्श से, अभ्यारण्य की सीमाओं के भीतर किसी भी भूमि में या भूमि पर किसी व्यक्ति के किसी भी अधिकार की निरंतरता की अनुमति देगा |

अधिकारों का समझौता :

  • सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार उनके अधिकारों के संदर्भ में राज्य सरकार प्रभावित व्यक्तियों के लिए वैकल्पिक रूप से उपलब्ध ईंधन, चारे और अन्य वन उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक व्यवस्था करेगी।
  • अधिसूचित होने वाले अभ्यारण्य/ राष्ट्रीय उद्यान में समाविष्ट भूमि में अथवा के ऊपर किसी व्यक्ति के अधिकारों की सीमा, प्रकृति तथा अस्तित्व की जांच करने तथा उसे निर्धारित करनेके लिए “समाहर्ता” के रूप में एक अधिकारी की नियुक्ति करती है |
  • संरक्षित क्षेत्र के लिए किसी अधिसूचना के जारी हो जाने के बाद , उस अधिसूचना में अधिसूचित विशिष्ट क्षेत्र की सीमाओं में समाविष्ट भूमि के भीतर अथवा भूमि पर किसी भी प्रकार के अधिकार को उपार्जित नहीं किया जाएगा , सिवाय उत्तराधिकार, वसीयती, अथवा  निर्वसीयती के | 

Conservation Reserves-

Can be declared by state government in any area owned by the government,

  • Particularly the area adjacent to National Park and Sanctuaries and those areas which link one protected area with another.
  • Such declaration should be made after having consultations with the local communities.
  • Conservation reserve are declared for the purpose of protecting landscapes, seascapes, flora and fauna and their habitat
  • The rights of people living inside a Conservation reserve is not affected.

Community Reserves-

Can be declared by the state Government in any private or community land, not comprised within a National Park, Sanctuary or a Conservation reserve, where an individual or a community has volunteered to conserve wildlife and its habitat

  • Community reserves are declared for the purpose of protecting fauna, flora, and traditional or cultural conservation values and practices
  • As in the case of a conservation reserve, the rights of people living inside a community reserve are not affected.
  • Community reserve and conservation reserve are two new categories of protected areas that have been included under the WLPA.
  • They provide a greater role for local communities, stakeholders and civil society as well as the opportunity to protect many areas of conservation value that cannot be designated under strict categories such as wildlife sanctuaries or National Parks.
  • Tiruppadaimarathur conservation reserve in Tirunelveli, tamil nadu is the first conservation reserve established in the country. It is an effort of the village community to protect the birds Nesting in their village village and acted for declaration of conservation reserve. 

संरक्षण आगार :

इसकी घोषणा राज्य सरकार के द्वारा की जा सकती है

  • विशेष रूप से वह क्षेत्र जो राष्ट्रीय उद्यान तथा अभ्यारण्यों तथा उन क्षेत्रों के सन्निकट है जो एक संरक्षित क्षेत्र को दूसरे संरक्षित क्षेत्र से जोड़ते हैं |  
  • इस तरह की घोषणा स्थानीय समुदायों से बातचीत के बाद की जानी चाहिए |
  • संरक्षण आगार भू-दृश्यों, समुद्री दृश्यों, पादप तथा पशुवर्ग एवं उनके आवास को संरक्षित करने के लिए घोषित किये जाते हैं |
  • संरक्षण आगार के भीतर रह रहे लोगों के अधिकार अप्रभावित रहते हैं |

समुदाय आगार :

इसकी घोषणा राज्य सरकार के द्वारा किसी निजी अथवा सामुदायिक भूमि , जो राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारण्य अथवा संरक्षण आगार में समाविष्ट नहीं है , तथा जहाँ कोई व्यक्ति अथवा किसी समुदाय ने स्वेच्छा से वन्यजीवों तथा उनके आवासों को संरक्षित करने का प्रयत्न किया है , में की जाती है |

  • समुदाय आगारों की घोषणा पादप, प्राणिजात, तथा पारंपरिक अथवा सांस्कृतिक मूल्यों एवं प्रथाओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से की जाती है |
  • संरक्षण आगार के तरह ही, किसी समुदाय आगार के भीतर रह रहे लोगों के हित एवं अधिकार अप्रभावित रहते हैं |
  • समुदाय आगार तथा संरक्षण आगार संरक्षित क्षेत्रों की  दो नयी श्रेणियां हैं
  • जिन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत शामिल किया गया है |
  • वे स्थानीय समुदायों, हितधारकों, तथा नागरिक समाज में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं तथा साथ-साथ संरक्षण मूल्य के उन कई क्षेत्रों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं जिन्हें  वन्यजीव अभ्यारण्य एवं राष्ट्रीय उद्यान जैसी कठोर श्रेणियों में नहीं रखा जा सकता है |
  • थिरुविदैमारूदूर संरक्षण आगार तिरुनेलवेली , तमिलनाडु देश में स्थापित प्रथम संरक्षण आगार है | यह उनके गाँव में घोसला बनाने वाले पक्षियों को संरक्षित करने के लिए ग्रामीण समुदाय के प्रयास हैं तथा ये प्रयास संरक्षण आगार की घोषणा के वजह बनें | 

WPA 1972- it is an important statute that provides a powerful legal framework for : prohibition of hunting, protection and management of wildlife habitats, establishment of protected areas, regulation and control of trade in part and products derived from wildlife, management of zoos.

The WLPA provides for several categories of protected areas/reserves.

  • National parks
  • wildlife sanctuaries
  • tiger reserves
  • conservation reserves
  • community reserves

डब्ल्यू.पी.ए 1972 : यह एक महत्वपूर्ण क़ानून है जो निम्नलिखित के लिए एक शक्तिशाली तंत्र प्रदान करता है : शिकार पर रोक, वन्यजीव आवासों का संरक्षण एवं प्रबंधन, संरक्षित क्षेत्रों की स्थापना, वन्यजीवों से प्राप्त उत्पाद तथा उस भाग में व्यापार पर नियंत्रण तथा विनियमन, पशु वाटिकाओं का प्रबंधन |

  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम संरक्षित क्षेत्रों/आगारों की विभिन्न श्रेणियां प्रदान करता है :
  • राष्ट्रीय उद्यान
  • वन्यजीव अभ्यारण्य
  • बाघ आगार
  • संरक्षण आगार
  • समुदाय आगार

Coastal Protected Areas-

  • Aim- to protect and conserve natural marine ecosystem in their pristine condition.
  • They are protected areas of seas, ocean, estuaries or large lakes. It restricts human activities for a conservation purpose, typically to protect natural or cultural resources.
  • “Any area of the intertidal or subtidal terrain, together with its overlying water and associated fauna, flora, historical or cultural features, which has been reserved by law or other effective means to protect part or all of the enclosed environment” – by IUCN 

Why MPA( marine protected areas)?

  • They are essential to safeguard biodiversity and to sustain vibrant seas and can increase biomass and biodiversity in tropical and temperate ecosystem.
  • They serve as insurance policies against the impacts of fishing and other destructive activities

India has at present following Designated marine Protected Areas-

  • Gulf of Mannar National Park, Tamil Nadu
  • Gulf of Kutch Marine National Park Gujarat
  • Gulf of kutch Marine Sanctuary, Gujarat
  • Malvan Wildlife Sanctuary, Maharashtra
  • Mahatma Gandhi Marine National Park, Andaman & Nicobar Islands
  • Gahirmatha Sanctuary, Orrisa
  • The MPAs in marine environment in India are primarily classified into following three categories
    • category-I: This covers National Parks and Sanctuaries and having entire areas in intertidal/sub-tidal or mangroves, coral reefs, creeks, seagrass beds, algal beds, estuaries, lagoons
    • category-II: This includes Islands, which have major parts in marine ecosystem and some part in terrestrial ecosystem.
    • category-IIIA: This includes sandy beaches beyond intertidal line but occasionally interacting with the seawater
    • Category IIIB: this includes evergreen or semi ever green forests of Islands.

Sacred Groves of India-

  • Patches of vegetation protected on the basis of religious faith are called sacred groves.
  • In India sacred groves are mainly Distributed in the states of Andhra Pradesh, Chhattisgarh, Haryana, Himachal Pradesh, Karnataka, Kerala, Maharashtra, Manipur, Meghalaya, Orissa, Rajasthan, Tamil Nadu, Uttarakhand, West Bengal and Union Territory of Puducherry.
  • The Garo and the Khasi tribes of northeastern India completely prohibit any human interference in the sacred groves. In other groves, deadwood or dried leaves may be picked up, but the live tree or its branches are never cut. For example, the Gonds of central India prohibit the cutting of a tree but allow fallen parts to be used.

तटीय संरक्षित क्षेत्र-

  • लक्ष्य : प्राकृतिक समुद्री पारितंत्र को उसके पूर्वकालीन स्थिति में संरक्षित करना |
  • वे समुद्रों, महासागरो, ज्वारनदमुखों, अथवा बड़ी झीलों के संरक्षित क्षेत्र होते हैं | यह संरक्षण उद्देश्यों, विशेष रूप से प्राकृतिक अथवा सांस्कृतिक संसाधनों को संरक्षित करने  के लिए मानव गतिविधियों को सीमाबद्ध करता है |
  • उपरितायी जल तथा उससे सम्बंधित पशु, पुष्प, ऐतिहासिक, तथा सांस्कृतिक विशेषताओं वाला कोई भी अंतर्ज्वारीय अथवा उप-ज्वारीय क्षेत्र, जिसे सम्पूर्ण संलग्न पर्यावरण या उसके कुछ भाग को संरक्षित करने हेतु क़ानून अथवा अन्य प्रभावी तरीकों से आरक्षित किया गया है | – IUCN 

एमपीए ( समुद्री संरक्षित क्षेत्र ) क्यों ?

  • वे जैव विविधता की रक्षा करने के लिए तथा जीवंत समुद्रों को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं तथा उष्णकटिबंधीय एवं शीतोष्ण पारितंत्रों में जैवभार तथा जैव विविधता को बढ़ा सकते हैं |
  • वे मछली पालन एवं अन्य हानिकारक गतिविधियों के विरुद्ध इंश्योररेंस पॉलिसीज की तरह कार्य करते हैं |

भारत में अभी निम्नलिखित निर्दिष्ट समुद्री संरक्षित क्षेत्र हैं :

  • मन्नार राष्ट्रीय उद्यान की खाड़ी, तमिलनाडु |
  • कच्छ की खाड़ी, समुद्री राष्ट्रीय उद्यान, गुजरात |
  • कच्छ की खाड़ी समुद्री  अभ्यारण्य, गुजरात |
  • मालवण वन्यजीव अभ्यारण्य , महाराष्ट्र |
  • महात्मा गाँधी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान , अंडमान तथा निकोबार द्वीप |
  • गहिरमाथा राष्ट्रीय उद्यान , उड़ीसा |

भारत में समुद्री पर्यावरण में एमपीए को प्राथमिक रूप से निम्नलिखित तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है :

  • श्रेणी-I  : इसमें राष्ट्रीय उद्यान तथा अभ्यारण्य शामिल हैं तथा अंतर्ज्वारीय/ उप-ज्वारीय अथवा मैन्ग्रोव वन, प्रवाल भित्तियां, क्रीक, समुद्री घास तल, शैवाल बेड्स, ज्वारनदमुख तथा लैगून के सभी क्षेत्र आते हैं |
  • श्रेणी – II : इसमें द्वीप सम्मिलित हैं जिनका कुछ भाग समुद्री पारितंत्र तथा कुछ भाग स्थलीय पारितंत्र में है |  
  • श्रेणी-IIIA : इसमें अंतर्ज्वारीय रेखा से परे रेतीले तट शामिल हैं किन्तु कदाचित ही समुद्री जल के संपर्क में आते हैं |
  • श्रेणी IIIB : इसमें द्वीपों के सदाबहार तथा अर्ध सदाबहार वन शामिल हैं |

भारत के पवित्र उपवन :

  • धार्मिक विश्वास के आधार पर वनस्पतियों के संरक्षण को पवित्र उपवन कहा जाता है |
  • भारत में, पवित्र उपवन मुख्यतः आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, उड़ीसा, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, तथा केंद्र शासित प्रदेश पंडुचेरी में वितरित हैं |
  • उत्तर-पूर्वी भारत की गारो तथा खासी जनजातियाँ पवित्र उपवनों में किसी भी मानव हस्तक्षेप पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध लगाती हैं | अन्य उपवनों में , निर्जीव काठ अथवा सूखे पत्ते उठाये जा सकते हैं, किन्तु सजीव वृक्ष अथवा इसकी शाखाएं कभी काटी नहीं जाती हैं | उदाहरण के लिए, मध्य भारत के गोंड वृक्ष काटने से रोकते हैं किन्तु उसके गिरे हुए भागों के उपयोग की अनुमति देते हैं |

Types of Sacred Groves

  • Temple groves- A grove is created around a temple
  • Traditional sacred grove- the place where the village deity resides, who is represented by an elementary symbol
  • Burial grove- A grove is created around the cremation grounds.

Ecological Significance-

  • Traditional uses- one of the most important traditional uses of sacred groves was that it acted as a repository for various ayurvedic medicine. Other uses involved a source of replenishable resources like fruits and honey.
  • Modern uses-sacred groves have become biodiversity hotspots, as various species seek refuge in the areas due to progressive habitat destruction, and hunting. Sacred groves often contain plant and animal species that have become extinct in neighbouring areas.

Threats-

  • Urbanization, over-exploitation of resources and environmental destruction due to religious practices.
  • Disappearance of traditional belief systems.
  • Developmental interventions such as roads, railway tracks, dams including commercial forestry.
  • “Sanskritisation” or transformation of primitive forms of nature worship into formal temple worship.
  • Invasion by exotic weeds.
  • Pressure due to increasing livestock and fuelwood collection.

Export- Prohibited Goods-

Prohibited goods are not permitted to be exported.  An export licence will not be given in the normal course for goods in the prohibited category.

The following are prohibited in the flora and fauna category-

  • All wild animals, animal articles including their products andderivatives(excluding those for which ownership certificates have been granted and also those required for transactions for education, scientific research and management under Wild Life (protection) Act, 1972 including their parts and products
  • Beefs of cows, oxen and calf. Beef in the form of offal of cows, oxen and calf
  • Meat of buffalo (both male and female) fresh and chilled and frozen
  • Peacock tail feathers & its Handicrafts and articles
  • Shavings & Manufactured Articles of shavings of Shed Antlers of Chital and Sambhar
  • Sea shells
  • Wood and wood products
  • Fuel wood
  • Wood charcoal
  • Sandalwood in any form, (but excluding finished handicraft products of sandalwood, machine finished sandalwood products, sandalwood oil
  • Red sanders wood, Value added products of Red Sanders
  • Mechanical, chemical and semi chemical wood pulp.

पवित्र उपवनों के प्रकार-

  • मंदिर उपवन : वह उपवन जो मंदिर के आसपास निर्मित है |
  • पारंपरिक पवित्र उपवन : वह स्थान जहाँ ग्रामीण देवता रहते हैं, जिन्हें प्राथमिक चिन्ह के द्वारा दर्शाया जाता है |
  • समाधि उपवन : वह उपवन जो शवदाह स्थलों के आसपास है |

पारिस्थितिक महत्व :

  • पारंपरिक उपयोग : पवित्र उपवनों के सबसे महत्वपूर्ण पारंपरिक उपयोगों में से एक यह था कि ये उपवन विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों के कोष के रूप में कार्य करते थे | इनके अन्य उपयोगों में इनका पुनर्भरणीय संसाधनों जैसे फूल एवं शहद का स्रोत होना शामिल था |
  • वर्तमान उपयोग : पवित्र उपवन अब जैव विविधता हॉटस्पॉट बन चुके  हैं , क्योंकि लगातार हो रहे आवास विनाश तथा शिकार के कारण विभिन्न प्रजातियाँ इन क्षेत्रों में आश्रय लेती हैं| पवित्र उपवनों में अक्सर वे पादप तथा पशु प्रजातियाँ पायी जाती हैं , जो आसपास के क्षेत्रों से विलुप्त हो चुकी हैं |

खतरे :

  • शहरीकरण, संसाधनों का अति-दोहन, तथा धार्मिक प्रथाओं के कारण पर्यावरणीय विनाश |
  • पारंपरिक विशवास प्रणालियों का लुप्त होना |
  • विकास कार्यों से होने वाला हस्तक्षेप जैसे, सड़क, रेल पटरियां, बाँध,  वाणिज्यिक वानिकी|
  • प्रकृति पूजा के प्राचीन रूपों का औपचारिक मंदिर पूजा में रूपांतरण अथवा “संस्कृतिकरण” |
  • विदेशी खरपतवारों के द्वारा अतिक्रमण |
  • बढ़ते पशुधन तथा ईंधन की लकड़ियों के संग्रहण के कारण दबाव |

निर्यात – प्रतिबंधित वस्तुएं-

प्रतिबंधित वस्तुओं के निर्यात की अनुमति नहीं है | प्रतिबंधित श्रेणी में आने  रखी गयी वस्तुओं के लिए निर्यात लाइसेंस नहीं दिया जाएगा |

पादप एवं पशुवर्ग श्रेणी में निम्नलिखित पर प्रतिबन्ध लगाया गया है :

  • सभी जंगली जानवर, जानवरों की वस्तुएं जिनमें उनके उत्पाद तथा संजात ( सिवाय उनके जिनके लिए स्वामित्व प्रमाणपत्र प्रदान किये गए हैं तथा वे भी जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, तथा प्रबंधन के लेनदेन के लिए आवश्यक हैं | इसमें उनके भाग तथा उत्पाद भी शामिल हैं |
  • गाय, बैल, तथा बछड़ो  का मांस| गाय, बैल, बछड़ो के आतंरिक अंगों के रूप में गोमांस |
  • भैंस का मांस, ( महिला एवं पुरुष दोनों ), ताजा, ठंडा और जमा हुआ |
  • मोर की पूंछ के पंख तथा इसके हस्तशिल्प एवं वस्तुएं |
  • चीतल तथा संबर की शाखादार सींगों से दाढ़ी बनाने तथा दाढ़ी बनाने की निर्मित वस्तुएं |
  • सीप
  • लकड़ी तथा लकड़ियों के उत्पाद |
  • ईंधन की लकड़ियाँ
  • लकड़ी का कोयला
  • किसी भी रूप में चन्दन की लकड़ी ( किन्तु चन्दन की लकड़ी के निर्मित हस्तशिल्प उत्पाद, मशीन से निर्मित चन्दन की लकड़ी के उत्पाद, चन्दन की लकड़ी के तेल के अतिरिक्त )
  • रक्तचंदन की लकड़ी,  रक्त चन्दन के मूल्य वर्धित उत्पाद
  • काठ की यांत्रिक, रासायनिक तथा अर्ध-रासायनिक लुगदी |  

 

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