PCS History Examination Notes | HCS RAS Civil Services Exam 2018

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The Khalji dynasty-

Jalaluddin Khalji (1290 – 1296)

  • Founder of Khalji dynasty
  • The advent of the Khalji dynasty marked the zenith of Muslim imperialism in India.
  • He was seventy years old when he came to power.
  • He was generous and lenient. (Malik Chhajju, nephew of Balban was allowed to remain the governor of Kara. But when Chhajju revolted, it was suppressed but he was pardoned.)
  • In 1292 when Malik Chhajju revolted for the second time, he was replaced by Jalaluddin son-in-law, Alauddin Khalji.  
  • In 1296 while taking expedition to Devagiri
  • Alauddin Khalji treacherously murdered his father-in-law Jalaluddin Khalji and usurped the throne of Delhi.  

Alauddin Khalji (1296-1316):

2nd ruler of Khalji dynasty.

Titles given:

  • Called himself as ‘Second Alexander’.
  • He took the title ‘Sikander-i-Sani’.
  • Early name was Ali Gurushap.
  • He built the city Siri, the second of the seven cities of Delhi, near Qutub Minar.
  • He banned drinking of alcohol in open in his kingdom.
  • He made enormous gifts to the hostile nobles and Amirs of Delhi to win over them to his side.
  • Those who still opposed him accession were punished severely.
  • He framed regulations to control the nobles.

Basic reasons according to sultan for noble rebellions :

  • General prosperity of the nobles.
  • Intermarriages between noble families.
  • Inefficient spy-system.
  • Drinking liquor.

Therefore, he passed 4 ordinances.

  • He confiscated the properties of the nobles.
  • Reorganization of intelligence system and immediate report of secret activities of nobles.
  • The public sale of liquor and drugs was totally stopped.
  • Social gatherings and festivities without the permission of Sultan were forbidden.
  • By such harsh measures his reign was free from rebellions.

खिलजी वंश-

जलालुद्दीन खिलजी (1290 – 1296)

  • खिलजी वंश के संस्थापक
  • खिलजी वंश के आगमन से भारत में मुस्लिम साम्राज्य चरमोत्कर्ष पर था |
  • वह 70 वर्ष की आयु में सत्ता में आया |
  • वह उदार और सौम्य था |(बलबन के भतीजे  मलिक छज्जू कड़ामानिकपुर के सूबेदार के रूप में बने रहने दिया,परन्तु जब उसने विद्रोह किया तो उसे कुचल दिया गया एवं बाद में उसे माफ़ भी कर दिया गया )
  • 1292 में जब मलिक छज्जू ने दूसरी बार विद्रोह किया, तब उसका स्थान जलालुद्दीन के दामाद, अलाउद्दीन खिलजी को दे दिया गया |

1296 ईस्वी में जब जलालुद्दीन खिलजी देवगिरि में अपना साम्राज्य विस्तारित कर रहे थे तो अलाउद्दीन खिलजी ने अपने ससुर से विश्वासघात करके उसकी हत्या कर दी और दिल्ली के सिंहासन पर कब्जा कर लिया |

अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316 ईस्वी ):

  • खिलजी वंश का दूसरा शासक

दिए गए शीर्षक:

  • स्वयं को ‘दूसरा सिकंदर ‘ कहता था |
  • सिकन्दर-ए -सानी
  • इसका वास्तविक नाम अली गुरशास्प था |
  • उसने क़ुतुब मीनार के निकट सीरी शहर का निर्माण करवाया जो दिल्ली के सात शहरों में से दूसरी थी
  • उसने अपने राज्य में खुले शराब पीने पर प्रतिबंध लगा दिया।
  • उसने विरोधी कुलीनों और दिल्ली के अमीरों (आमीरों ) को अपनी तरफ करने के लिए बहुत सारे उपहार दिए |
  • जो लोग अभी भी उसकी ताजपोशी का विरोध कर रहे थे उन्हें गंभीर दंड दिया गया |
  • उसने कुलीनों को नियंत्रित करने के लिए नियम बनाये |

सुल्तान के अनुसार कुलीनों के विरोध के कारण इस प्रकार थे :-

  • कुलीन आमतौर बहुत रईस थे |
  • इनके कुलीनों के साथ ही अन्तर्विवाह थे |
  • अक्षम गुप्तचर व्यवस्था |
  • मदिरापान |

इसलिए, उसने 4 अध्यादेश पारित किए-

  • उसने कुलीनों की सम्पति को जब्त कर लिया |
  • अपनी गुप्तचर प्रणाली का पुनर्गठन किया एवं कुलीनों की गुप्तचर गतिविधियों का तत्काल रूप से पता लगवाया |
  • मदिरा तथा नशीले पदार्थों की  सार्वजनिक बिक्री पूरी तरह से पाबंदी लगाई |
  • सुल्तान की अनुमति के बिना सामाजिक समारोहों और उत्सवों का आयोजन नहीं किया जा सकता था
  • इस तरह के कठोर कदमों से उसका शासन विद्रोहियों से मुक्त था

Reforms of Alauddin Khalji:

Army reforms:

  • He had a large permanent standing army, which was paid in cash from the royal treasury.
  • This was done through the produce collected as tax from lands between the Ganga and Yamuna. (Tax was fixed at 50 percent of the peasant’s yield).
  • According to the Ferishta, Persian historian, he recruited 4,75,000 cavalrymen.
  • Introduced the system of Dagh (branding of horses) and prepared Huliya or Chehra (descriptive list of soldiers).
  • A strict review of army from time to time was carried out so that the army has its maximum efficiency.
  • Military expeditions into southern India started during the reign of Alauddin Khalji.

Market reforms:

  • Alauddin chose to pay his soldiers salaries in cash rather than iqtas.
  • The soldiers would buy their supplies from merchants in Delhi and it was thus feared that merchants would raise their prices.
  • To stop this, Alauddin controlled the prices of goods in Delhi.
  • Established four separate markets in Delhi: For grain, For cloth, sugar, dried fruits, butter and oil,  For horses, slaves and cattle and For miscellaneous commodities.
  • Each market was under the control of a high officer called Shahna-i-Mandi.
  • The supply of grain was ensured by holding stocks in government store-houses in same way as today Food Corporation of India (FCI) does.
  • Regulations were issued to fix the price of all commodities.

अलाउद्दीन खिलजी द्वारा किये गए सुधार-

सेना सुधार-

  • उसके पास एक विशाल स्थायी सेना थी जिसे राजकोष से वेतन दिया जाता था |
  • यह गंगा और यमुना के बीच की भूमि से प्राप्त कर के माध्यम से होता था (यह कर किसान की उपज का आधा हिस्सा होता था)
  • फारसी इतिहासकार मोहम्मद कासिम फ़रीशता के अनुसार उसके पास  4,75,000 घुड़सवार सैनिक थे |
  • अलाउद्दीन खिलजी ने दाग (घोड़ों की ब्रांडिंग) एवं हुलिया अथवा चेहरा (सैनिकों के लिए अलग अलग भूमिका ) प्रणाली की शुरुआत की |
  • समय-समय पर सेना की सख्त समीक्षा की गई ताकि सेना की  दक्षता अधिकतम हो।

दक्षिणी भारत में सैन्य अभियान अलाउद्दीन खलजी के शासनकाल के दौरान शुरू हुआ।

बाजार सुधार (आर्थिक नियमन):

  • अलाउद्दीन ने अपने सैनिकों को इक्ता की बजाय नकद रूप से भुगतान किया |
  • सैनिक दिल्ली में व्यापारियों से उनके उत्पादन को खरीद लेते थे, इस से यह भी रहता था की व्यापारी कहीं इनका दाम न बढ़ा दे |
  • इसे रोकने के लिए अलाउद्दीन ने दिल्ली में माल की कीमतों को नियंत्रित कर किया

दिल्ली में चार अलग-अलग बाज़ारों की स्थापना की

  • अनाज, कपड़े, चीनी, सूखे फल, मक्खन के लिए
  • तेल, घोड़ों,गुलामों के लिए
  • पशुओं के लिए
  • विविध वस्तुओं के लिए।
  • प्रत्येक बाज़ार एक एक उच्च अधिकारी के नियंत्रण में था जिसे  शहना-ए-मंडी कहा जाता था |
  • अनाज का वितरण सरकारी गोदाम में भंडारित करके निश्चित किया जाता था ठीक उसी प्रकार जैसा आज  भारतीय खाद्य निगम करता है |
  • सभी वस्तुओं की कीमत तय करने के लिए नियम प्रणाली होती थी |

The Khalji dynasty-

  • A separate department called Diwan –i-Riyasat, which was renaming of Diwan-i-Rasalat was created under an officer called Naib-i-Riyasat.
  • The primary function of Diwan-i-riyasat was to implement the economic regulations issued by the Sultan and control the markets and prices.
  • Every merchant was registered under the Market department.
  • There were secret agents called munhiyans who sent reports to the Sultan regarding the functioning of these markets.
  • The Sultan also sent slave boys to buy various commodities to check prices.
  • Harsh punishment was given if any shopkeeper charged a higher price, or tried to cheat by using false weights and measures.
  • Even during the famine, the same price was maintained.

Land Revenue Administration reforms

  • He was the first Sultan of Delhi who ordered for the measurement of land.
  • After measurement the revenue from the land was assessed according to the measurement of land.
  • Even the big landlords could not escape from paying land tax.  

खिलजी वंश-

  • दिवान -ए-रियासत नामक एक अलग विभाग बनाया ,जो दीवान-ए-रसालत का बदला गया नाम था जिसका गठन नायब-ए-रियासत नामक अधिकारी ने किया था |
  • दिवान -ए-रियासत का मुख्य कार्य सुल्तान द्वारा बनाये गए आर्थिक नियमों को लागू करना एवं बाजारों और मूल्यों को नियंत्रित करना था।
  • हर व्यापारी बाजार विभाग के तहत पंजीकृत था।
  • वहां कुछ गुप्तचर भी थे जिन्हे मुनहियन कहा जाता था ये सुलतान को बाज़ार में होने वाली गतिविधियों की सूचना देते थे |
  • विभिन्न वस्तुओं के मूल्य की जाँच के लिए सुल्तान अपने गुलामों को भी भेजता था |
  • यदि कोई दुकानदार निर्धारित मूल्य से ज्यादा कीमत वसूलता अथवा माप-तोल में गड़बड़ करता तो उसे कठोर दंड दिया जाता |
  • अकाल के समय भी वस्तुओं का मूल्य वहीं रहता था |

भूमि राजस्व  प्रशासन सुधार

  • खिलजी दिल्ली का पहला सुल्तान था जिसने भूमि को मापने के आदेश दिए |
  • भूमि के माप के अनुसार ही राजस्व लिया जाता था |
  • यहाँ तक की बड़े बड़े जमींदार भी राजस्व देने से नहीं बच सकते थे |

The Tughlaq dynasty-

The Tughlaq Dynasty (1320-1414) Ghiyasuddin Tughlaq (1320 – 1325):

  • Founder of dynasty (after killing Khuzru Khan in 1320).
  • His real name was Ghazi Malik.
  • Ghiyasuddin laid the foundation for Tughlakabad near Delhi.
  • Ghiyasuddin Tughlaq sent his son Juna Khan to fight against Warangal.
  • He defeated Prataparudra and returned with rich booty.
  • He built the Tughlaqabad Fort.
  • First Sultan to start irrigation works.
  • Ghiyasuddin died by the collapse of a pavilion.

Muhammad bin Tughlaq (1325-1351)

  • He was said to have treacherously killed his father and ascended the throne with the title Muhammad bin Tughlaq in 1325.
  • He had introduced many ambitious schemes and novel experiments but all of them ended in miserable failures because they were all far ahead of their time.
  • Very tolerant in religious matters.
  • Maintained diplomatic relations with far off countries like Egypt, China and Iran.
  • Contemporary writers like Isami, Barani and Ibn Battuta were unable to portrait correct picture about his personality.

तुगलक राजवंश-

तुगलक राजवंश (1320-1414)

गयासुद्दीन तुगलक (1320 – 1325)  

  • राजवंश के संस्थापक (1320 में खुज्रु खान को मरने के बाद )
  • इसका वास्तविक नाम गाज़ी मलिक था |
  • गयासुद्दीन ने दिल्ली के निकट तुगलकाबाद बनाया
  • गयासुद्दीन ने अपने पुत्र जूना खां को वरंगल पर धावा बोलने के लिए भेजा |
  • उसने प्रतापरूद्र को हराया एवं बहुत ज्यादा लूट के साथ वापिस आया |
  • उसने तुगलकाबाद किला बनाया |
  • यह प्रथम सुल्तान था जिसने सिंचाई प्रणाली की शुरुआत की |
  • गयासुद्दीन तुगलक की मृत्यु एक लकड़ी के महल के ढहने से हो गई थी

मुहम्मद बिन तुगलक (1325-1351)

  • ऐसा माना जाता है की इसने अपने पिता की हत्या षड्यंत्र से कर दी थी एवं 1325 में मुहम्मद बिन तुगलक के नाम से सिंहासन पर कब्जा कर लिया था |
  • उसने बहुत  महत्वाकांक्षी योजनाएं बनाई  एवं नए नए प्रयोग किये, परन्तु ये सब प्रयत्न औंधे मुँह आ गिरे, क्यूंकि उसके ये प्रयत्न उस समय के अनुरूप नहीं थी |
  • धार्मिक मामलों में वह बहुत सहिष्णु था |
  • इसने मिस्र, चीन और ईरान जैसे देशों के साथ राजनयिक संबंधों को कायम रखा |
  •  इज़मी,बरानी एवं इबने-बतूता जैसे समकालीन लेखक उसके व्यक्तित्व को सही चित्रित नहीं कर पाए एवं उसे अधर्मी घोषित किया |

  1. Transfer of Capital (1327)
  • He transferred capital from Delhi to Devagiri.
  • Devagiri had been a base for the expansion of Turkish rule in South India.
  • He wanted to make Devagiri his second capital so that he might be able to control South India better.

Why this experiment failed?

  • It was too far from northern India (more than 1500 kms) and sultan could not keep a watch on the western frontiers.
  • Everyone, including nobles, population had to suffer the hardship of summer and long distance.  
  • Those who opposed were suppressed.
  • He returned to Delhi and once again it was made the capital.

Impact:

  • Southern kingdoms saw this as sign of weakness of sultan.
  • Soon after Bahamani and Vijayanagar kingdom in Deccan declared their independence.

2. Introduction of Token Currency

  • The sultan decided to issue ‘token’ coins in brass and copper which could be exchanged for silver coins from the treasury  Kublai Khan issued paper money in China.

Why this experiment failed?

  • Because he was not able to prevent forging the new coins.
  • The goldsmiths began to forge the token coins on a large scale.

Impact:

  • Soon the new coins were not accepted in the markets.
  • Finally, he had to discontinue the circulation of token currency and promised to exchange silver coins for the copper coins.
  • Soon the treasury became empty.
  • According the Barani, the heap of copper coins remained lying on roadside in Tughlakabad.
  1. Taxation in Doab
  • He wanted to conquer India and central Asia, this means large army and that means large amount of money to pay their salaries
  • To overcome financial difficulties, he increased the land revenue on the farmers of Doab (land between Ganges and Yamuna rivers).

Why this experiment failed?

  • It was an excessive and arbitrary step on the farmers.
  • At the same time there struck a famine in doab which made the condition worse.

Impact: Serious peasant revolts.  Farmers fled from the villages.

4. Proposed Khurasan Expedition:

  • Sultan had a vision of universal conquest.
  • He decided to conquer Khurasan and Iraq and mobilized a huge army for the purpose.
  • He was encouraged to do so by Khurasani nobles who had taken shelter in his court.
  • This project was also abandoned.

5. Qarachil Expedition:

  • This expedition was launched in Kumaon hills in Himalayas allegedly to counter Chinese incursions.
  • It was directed against some refractory tribes in Kumaon-garhwal region with the object of bringing them under Delhi Sultanate.

Agricultural Reforms

  • Lately Sultan realized that real solution lies in adequate relief measures and the promotion of agriculture.
  • A separate department for agriculture, Diwan- i- Kohi was established.
  • He launched a scheme by which Takkavi loans (loans for cultivation) were given to the farmers to buy seed and to extend cultivation.
  • Model farm under the state was created in an area of 64 square miles for which the government spent seventy lakh tankas.
  • This experiment was further continued by Firoz Tughlaq.

1. राजधानी का स्थानांतरण (1327)

  • उसने अपनी राजधानी दिल्ली के स्थान पर देवगिरि को बनाया |
  • देवगिरि दक्षिण भारत में तुर्की शासन के विस्तार के लिए एक आधार था |
  • वह देवगिरी को अपनी दूसरी राजधानी बनाना चाहता था ताकि वह दक्षिण भारत को बेहतर नियंत्रण में सक्षम हो सके।

यह प्रयोग विफल रहने के कारण

  • यह उत्तर भारत से बहुत दूर था (1500 किलोमीटर से अधिक) , जिसके कारण  सुल्तान पश्चिमी सीमाओं पर एक साथ नजर नहीं रख सकता था।
  • सभी लोग, चाहे वह उच्च वर्ग हो या आम जनता सबको गर्मी में लम्बी दुरी को तय करना पड़ता |
  • जिसने इसका विरोध किया वह कुचल दिया गया |
  • वह वापिस दिल्ली लौटा और इसे अपनी राजधानी बनाया |

इस प्रयोग की असफलता के परिणाम:

  • दक्षिणी राज्यों ने इसे सुल्तान की कमजोरी के संकेत के रूप में देखा |
  • जल्दी ही बहमनी और विजयनगर साम्राज्य ने स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दिया |

2. टोकन मुद्रा जारी करना

  • सुल्तान ने पीतल और तांबे की टोकन मुद्रा जारी की जिसे राजकोष से चांदी के सिक्कों से बदला जा सकता था | चीन में कुबलाई खान ने कागज की मुद्रा जारी की |

इस प्रयोग के असफल होने के कारण –

  • वह जाली सिक्के बनने से नहीं रोक पाया |
  • सुनारों ने बड़े पैमाने पर जाली सिक्के बनाने शुरू कर दिए |

प्रभाव

  • बाज़ार में नए सिक्के स्वीकार नहीं किये गए
  • अंत में उसने टोकन मुद्रा के संचालन को बंद किया एवं चांदी एवं ताम्बे के सिक्को के आदान प्रदान का भरोसा दिया |
  • जल्द ही राजकोष खाली हो गया
  • बरानी के अनुसार तुगलकाबाद में ताम्बे के सिक्कों के ढेर पाए गए |

3. दो आब में कर व्यवस्था

  • वह पुरे भारत और मध्य एशिया को जीतना चाहता था जिसके लिए उसे बहुत बड़ी सेना की आवश्यकता थी और उन्हें वेतन देने के लिए उतने ही ज्यादा धन की आवश्यकता होती थी |
  • वित्तीय कठिनाइयों को दूर करने के लिए, उसने दोआब के किसानों (गंगा और यमुना नदी के बीच की भूमि ) के भूमि राजस्व में वृद्धि की।

प्रयोग की विफलता के कारण

  • किसानो पर लगाया जाने वाला यह कर बहुत अधिक था एवं यह कदम विवेकहीन था |
  • उसी समय दो आब में अकाल पड़ा और स्थिति और भी खराब हो गई |

प्रभाव :

  • किसानो ने विद्रोह किया एवं गावं छोड़कर चले गए |

4.   ख़ुरासान पर विजय प्राप्ति की इच्छा

  • सुल्तान विश्व विजेता बनना चाहता था |
  • उसने ख़ुरासान पर विजय प्राप्त करने का निर्णय लिया एवं इसके लिए एक विशाल सेना का गठन किया |
  • ऐसा करने के लिए उसे खुरासानी कुलीनों प्रोत्साहित किया जिन्होंने सुल्तान के दरबार में शरण ले रखी थी |

5. काराचिल पर विजय प्राप्ति की इच्छा

  • यह अभियान चीनी घुसपैठ को रोकने के लिए हिमालय की  कुमाऊं पहाड़ियों में चलाया गया था |
  • यह अभियान कुमाऊं-गढ़वाल क्षेत्र में कुछ दुर्दम्य जनजातियों के विरुद्ध उनको दिल्ली सल्तनत के अधीन लाने के लिए किया गया |

 

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