Target HCS Exam 2018 | Online Study Notes | History | UPSC | IAS

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Civil disobediene movement

The Run-up to Civil Disobedience movement

Calcutta Session of Congress (December 1928)

  • Nehru Report was approved but the younger elements led by Nehru, Subhash and Satyamurthy expressed their dissatisfaction with the dominion status as the goal of Congress.
  • Instead, they demanded that the Congress adopt purna swaraj or complete independence as its goal.

Political Activity during 1929

  • Gandhi travelled incessantly during 1929 preparing people for direct political action helping to organise constructive work in villages and redressing specific grievances (on lines of Bardoli agitation of 1928).
  • The Congress Working Committee (CWC) organised a Foreign Cloth Boycott Committee to propagate an aggressive programme of foreign cloth boycott

Lahore session of the Congress (December 1929) :

Presided by Jawaharlal Nehru

Major decisions taken

  1. The RTC to be boycotted
  2. Complete independence declared as the aim of the Congress
  3. CWC authorised to launch a programme of civil disobedience including non-payment of taxes and all members of legislatures asked to resign their seats.

Civil Disobedience Movement

Gandhi’s Eleven Demands

  • To carry forward the mandate given by the Lahore Congress, Gandhi presented eleven demands to the Government and gave an ultimatum of January 31, 1930 to accept or reject these demands. The demands were as follows:

Issues of General Interest

  • Reduce expenditure on Army and civil services by 50 per cent.
  • Introduce total prohibition.
  • Carry out reforms in Criminal Investigation Department (CID).

Online Study Notes

सविनय अवज्ञा आंदोलन के लिए का आहवान

कांग्रेस का कलकत्ता अधिवेशन ( दिसम्बर 1928 )

  • नेहरु रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया किन्तु नेहरु, सुभाष चन्द्र बोस  तथा सत्यमूर्ति के नेतृत्व में युवा तत्वों ने कांग्रेस के लक्ष्य के रूप में डोमिनियन दर्जा के विरुद्ध अपनी असंतुष्टि व्यक्त  की |
  • इसके स्थान पर, उन्होंने माँग की, कि कांग्रेस अपने लक्ष्य के रूप में पूर्ण स्वराज्य अथवा पूर्ण स्वतंत्रता को अपनाए |

1929 के दौरान राजनीतिक घटनाएँ  :

  • गाँधी ने 1929 के दौरान निरंतर यात्रा की ताकि लोगों को प्रत्यक्ष राजनीतिक संघर्ष  के लिए तैयार किया जा सके एवं जिससे उन्हें गाँवों में रचनात्मक कार्यों को करने तथा विशिष्ट शिकायतों ( 1928 के बरदोली आंदोलन की तर्ज पर ) के निवारण में सहायता मिल सके  |
  • कांग्रेस कार्य समिति (सी.डब्ल्यू.सी ) ने विदेशी वस्त्र बहिष्कार समिति का गठन किया ताकि विदेशी वस्त्र बहिष्कार के एक आक्रामक कार्यक्रम का प्रचार किया जा सके |

कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन ( दिसम्बर 1929 ) :

जवाहरलाल नेहरु के द्वारा अध्यक्षता की गयी |

लिए गए प्रमुख फैसले :

  • गोलमेज सम्मेलन का बहिष्कार |
  • कांग्रेस के लक्ष्य के रूप में पूर्ण स्वराज्य की घोषणा की गयी |
  • कांग्रेस कार्य समिति को सविनय अवज्ञा आन्दोलन आरम्भ करने का पूर्ण उतरदायित्व सौंपा गया जिसमे करों का भुग्रान नही करने जैसे कार्यक्रम सम्मिलित थे

नागरिक अवज्ञा आंदोलन :

गाँधी की ग्यारह सूत्री माँगें :

  • ये मांगे  कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन के परिप्रेक्ष्य में अगले कदम के रूप मे थी ,गाँधी ने सरकार के समक्ष ग्यारह माँगे रखी तथा 31 जनवरी 1930 तक इन माँगो को स्वीकार अथवा अस्वीकार करने की अंतिम चेतावनी दी | ये माँगे निम्नलिखित थीं :

सामान्य हितों के मुद्दे :

  • सेना तथा लोक सेवाओं पर व्यय  को 50 प्रतिशत तक कम किया जाये |
  • नशीली वस्तुओं पर पूर्ण रूपे से निषेध लगाया जाए   
  • अपराधिक अन्वेषण विभाग (सी.आई.डी.) को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाये

Civil Disobedience movement

Specific Bourgeois Demands

  • Introduce textile protection.
  • Reserve coastal shipping for Indians.

Specific Peasant Demands

  • Reduce land revenue by 50 per cent.
  • Abolish salt tax and government’s salt monopoly.

February 1930

  • No positive response from the Government on these demands
  • CWC invested Gandhi with full powers to launch the Civil Disobedience Movement (CDM) at a time and place of his choice.

Dandi March (March 12-April 6, 1930)

  • On March 2, 1930, Gandhi informed the viceroy of his plan of action.
  • Gandhi, along with a band of 78 members of Sabarmati Ashram, was to march from his headquarters in Ahmedabad through the villages of Gujarat for 240 miles.
  • On reaching the Dandi coast, salt law was to be violated by collecting salt from the beach.
  • Even before the proposed march began, thousands thronged to the ashram.
  • Gandhi asked that truth and non-violence as means to attain swaraj should be faithfully adhered to.
  • The historic march, marking, the launch of the Civil Disobedience Movement, began on March 12, and Gandhi broke the salt law by picking up a handful of salt at Dandi on April 6.

Other Forms of Upsurge

  • Other areas in the country showed different forms of protest.

Chittagong:

  • Surya Sen’s Chittagong Revolt Group carried out a raid on two armouries and declared the establishment of a provisional government.

Peshawar:

  • Gaffar Khan (Badshah Khan and Frontier Gandhi) had started the first Pushto political monthly Pukhtoon

विशिष्ट  पूंजीपतियों की माँगे :

  • वस्त्र उद्योग के संरक्षण की व्यवस्था |
  • तटीय नौ-परिवहन भारतीयों के लिए आरक्षित रहे |

किसानों की विशिष्ट माँगे :

  • भू-राजस्व में 50 प्रतिशत की कमी |
  • नमक कर तथा नमक पर सरकार के एकाधिकार की समाप्ति |

फरवरी 1930

  • सरकार के तरफ से इन माँगो पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आयी |
  • कांग्रेस कार्य समिति ने गाँधी को उनकी मर्जी के स्थान तथा समय पर सविनय  अवज्ञा आंदोलन शुरू करने के निर्णय को छोड़ दिया |

दांडी मार्च ( 12 मार्च से 6 अप्रैल 1930 )

  • 2 मार्च 1930 को, गाँधी ने अपने कदम  के बारे में वायसराय को पत्र लिखा  |
  • गाँधी , साबरमती आश्रम के 78 सदस्यों के दल के साथ, अहमदाबाद में इसके मुख्यालय से गुजरात गाँवों से होते हुए 240 मील तक पैदल चले |
  • दांडी तट पर पंहुचने के बाद, नमक क़ानून तट पर से नमक एकत्रित करके नमक क़ानून का उल्लंघन किया जाना था |
  • प्रस्तावित मार्च के शुरू होने से पहले ही, हजारों लोग आश्रम पँहुच गए |
  • गाँधी ने कहा कि स्वराज्य प्राप्त करने के माध्यम के रूप में सत्य और अहिंसा का ईमानदारी से पालन करना चाहिए |  
  • यह ऐतिहासिक पदयात्रा, सविनय अवज्ञा आंदोलन के शुरुआत को चिन्हित करते हुए, 12 मार्च को शुरू हुई, तथा 6 अप्रैल को गाँधी जी ने मुट्ठीभर नमक उठाकर इस क़ानून को तोड़ दिया |

विद्रोह  के अन्य रूप :

  • देश के अन्य क्षेत्रों में विरोध-प्रदर्शन के विभिन्न रूप देखे गए |

चटगाँव :

  • सूर्य सेन के चटगाँव क्रांतिकारी समूह ने दो शस्त्रागारों पर एक छापे को अंजाम दिया तथा अल्पकालीन सरकार की स्थापना की घोषणा की |

पेशावर :

  • गफ्फार खान (बादशाह खान तथा सीमान्त गाँधी ) ने प्रथम पश्तो राजनीतिक मासिक पत्रिका पख्तून की शुरुआत की |

Civil Disobedience movement

Sholapur:

  • This industrial town of southern Maharashtra saw the fiercest response to Gandhi’s arrest.
  • Textile workers went on a strike from May 7 and along with other residents burnt liquor shops and other symbols of government authority such as railway stations, police stations, municipal buildings, law courts, etc.

Dharsana:

  • On May 21, 1930, Sarojini Naidu, Imam Sahib and Manila (Gandhi’s son) took up the unfinished task of leading a raid on Dharsana Salt Works.
  • The unarmed and peaceful crowd was met with a brutal lathicharge which left 2 dead and 320 injured.

Bengal:

  • Anti-chowkidara tax and anti-union board tax campaign was met with repression and confiscation of property.

Gujarat:

  • The impact was felt in Anand, Borsad and Nadiad areas, in Kheda district, Bardoli in Surat district and Jambusar in Bharuch district.

Government Response:

Efforts for Truce

  • The Government’s attitude throughout 1930 was ambivalent.
  • It was puzzled and perplexed.
  • It faced the classic dilemma of ‘damned if you do, damned if you don’t — if force was applied, the Congress cried ‘repression’, and if little was done, the Congress cried ‘victory’.
  • Either way the hegemony of the Government was eroded.
  • Even ,Gandhi’s arrest came after much vacillation.

नागरिक अवज्ञा आंदोलन

शोलापुर :

  • दक्षिणी महाराष्ट्र  के इस औद्योगिक नगर में गाँधी की गिरफ़्तारी के विरुद्ध उग्र प्रतिक्रिया देखी गयी |
  • वस्त्र उद्योग के मज़दूर 7 मई से हड़ताल पर चले गए तथा अन्य निवासियों के साथ शराब की दुकानों तथा अन्य सरकारी स्थानों जैसे कि रेलवे स्टेशनों, पुलिस स्टेशनों, नगरपालिका भवनों, अदालतों आदि  में आग लगा दी |

धारासणा   :

  • 21 मई 1930 को, सरोजिनी नायडू, इमाम साहिब, तथा मणिलाल (गाँधी के पुत्र ) ने धरासना नमक कारखाना पर छापे के नेतृत्व के अधूरे कार्य को अपने हाथों में ले लिया |
  • निहत्थी तथा शांतिपूर्ण भीड़ पर निष्ठुर लाठीचार्ज किया गया जिसमें 2 लोग शहीद हो गए तथा 320 घायल हुए |

बंगाल :

  • यहाँ भी चौकीदारी एवं यूनियन बोर्ड विरोधी आन्दोलन चलाया गया फलस्वरूप लोगों को पीटा  गया तथा उनकी सम्पति जब्त कर ली गई

गुजरात :

  • खेड़ा जिले के आनंद, बोरसद, तथा नादियाद  क्षेत्रों में, सूरत जिले के बरदोली में, भरूच जिले के जम्बुसार में प्रभाव देखने को मिला |

सरकार की प्रतिक्रिया :

अस्थाई संधि के प्रयास :

  • वर्ष 1930 में सरकार का रुख दो तरफा था |
  • सरकार की मन: स्थिति व्याकुलता एवं भ्रान्ति से ग्रस्त थी | 
  • यदि सरकार आन्दोलनकारियों के प्रति हिंसा और दमन का सहारा लेती तो कांग्रेस इसकी भर्त्सना करती यदि वह हल्के तौर तरीके अपनाती तो कांग्रेस इसे अपनी  विजय करार देती |
  • दोनों तरीके से सरकार का वर्चस्व कम होता |
  • यहाँ तक कि, गाँधीजी की गिरफ्तारी पर सरकार काफी हिचकीचा रही थी  

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