Non Constitutional Bodies Indian Polity Study Material | UPSC IAS 2018

Non Constitutional Bodies Indian Polity Study Material | UPSC IAS 2018

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Non Constitutional Bodies Indian Polity Study Material | UPSC IAS 2018

Non-Constitutional Bodies

Non-Constitutional bodies are not mentioned in the Constitution of India. They cannot derive power from the Constitution. Statutory bodies can also be called as a non-constitutional body.

  • NITI Aayog
  • Planning Commission
  • National Development Council
  • National Human Rights Commission
  • State Human Rights Commission
  • Central Information Commission
  • State Information Commission
  • Central Vigilance Commission
  • Central Bureau of Investigation
  • Lokpal and Lokayuktas

Niti Aayog

  • The NITI Aayog (National Institution for Transforming India) was established on January 1, 2015 to replace the Planning Commission.
  • It is a non-constitutional or extra-constitutional body and a non statutory body.
  • This new institution will accelerate the developmental process and is built on the foundations of:
  • An empowered role of States as equal partners in national development; operationalizing the principle of Cooperative Federalism.
  • A knowledge hub of internal as well as external resources; serving as a repository of good governance best practices, and a Think Tank offering domain knowledge as well as strategic expertise to all levels of government.
  • A collaborative platform facilitating implementation; by monitoring progress, plugging gaps and bringing together the various ministries at the Centre and in States, in the joint pursuit of developmental goals.

गैर-संवैधानिक निकाय-

भारत के संविधान में गैर-संवैधानिक निकायों का जिक्र नहीं है | वे संविधान से शक्तियां हासिल नहीं करते | वैधानिक निकायों को भी गैर-संवैधानिक निकाय कहा जा सकता है |

  • नीति आयोग
  • योजना आयोग
  • राष्ट्रीय विकास परिषद्
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
  • राज्य मानवाधिकार आयोग
  • केन्द्रीय सूचना आयोग
  • राज्य सूचना आयोग
  • केन्द्रीय सतर्कता आयोग
  • केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो
  • लोकपाल एवं लोकायुक्त

नीति आयोग-

  • 1 जनवरी, 2015 को नीति आयोग ( बदलते भारत के लिए राष्ट्रीय संस्थान ) की स्थापना योजना आयोग के उत्तराधिकारी के रूप में की गई |
  • यह एक गैर-संवैधानिक या संवैधानेत्तर निकाय और एक गैर वैधानिक निकाय है |
  • नई संस्था विकासत्मन प्रक्रिया में तेजी लाएगी और इसके निर्माण के निम्न आधार हैं :
  • राष्ट्र के विकास में राज्य की बराबर के भागीदारी के रूप में सशक्त भूमिका ; सहकारी संघवाद के सिद्धांत को कार्यरूप में परिणत करते हुए |
  • आंतरिक एवं बाह्य संशाधनों के एक ज्ञान केंद्र जो कि सुशासन के सर्वोत्तम प्रचलनों के कोष ( या भण्डार ) के रूप में तथा एक प्रबुद्ध मंडल या ‘थिंक टैंक’ के रूप में कार्य करते हुए सरकार के सभी स्टारों पर ज्ञान तथा रणनीतिक विशेषज्ञता प्रदान करे |
  • कार्यान्वयन संभव बनाने वाली एक सहयोगी मंच जो कि प्रगति का अनुश्रवण करके, अंतरों को पाटते हुए केंद्र एवं राज्यों के विभिन्न मंत्रालयों को एक साथ लाकर विकासात्मक लक्ष्यों को को साझे प्रयत्नों से पूर्ति करे |

Composition of Niti Aayog

The composition of NITI Aayog is as follows:

  • The Prime Minister of India (as its Chairperson).

Governing Council:

  • It comprises the Chief Ministers of all the States, Chief Ministers of Union Territories with Legislatures (Delhi and Puducherry) and Lt. Governors of other Union Territories.

Regional Councils:

  • These are formed to address specific issues and contingencies impacting more than one state or a region.
  • These are formed for a specific tenure.
  • These are convened by the Prime Minister and comprises of the Chief Ministers of States and Lt. Governors of Union Territories in the region.
  • These are chaired by the Chairperson of the NITI Aayog or his nominee.

Special Invitees:

  • Experts, specialists and practitioners with relevant domain knowledge as special invitees nominated by the Prime Minister.

Full-time organisational framework:

It comprises, in addition to the Prime Minister as the Chairperson:

  • Vice-Chairperson: He is appointed by the Prime Minister. He enjoys the rank of a Cabinet Minister.
  • Members: Full-time- They enjoy the rank of a Minister of State.
  • Part-time Members: Maximum of 2, from leading universities, research organisations and other relevant institutions in an ex-officio capacity. Part-time members would be on a rotation.
  • Ex-Officio Members: Maximum of 4 members of the Union Council of Ministers to be nominated by the Prime Ministers.
  • Chief Executive Officer: He is appointed by the Prime Minister for a fixed tenure, in the rank of Secretary to the Government of India. 
  • Secretariat: As deemed necessary. 

नीति आयोग का गठन-

नीति आयोग का गठन निम्नवत है :

  • भारत का प्रधानमंत्री ( इसके अध्यक्ष ) |

शासी परिषद् :

  • सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, केन्द्रशासित क्षेत्रों के मुख्यमंत्री एवं विधायिकाएं ( दिल्ली और पुदुचेरी ) और अन्य केन्द्रशासित क्षेत्रों के उप-राज्यपाल |

क्षेत्रीय परिषदें :

  • इन परिषदों का गठन एक से अधिक राज्यों या क्षेत्रों से सम्बंधित विशिष्ट मुद्दों के समाधान के लिए किया जाता है |
  • इनका एक निश्चित कार्यकाल होता है |
  • इनका संयोजकत्व प्रधानमंत्री करता है और राज्यों के मुख्यमंत्री एवं केन्द्रशासित क्षेत्रों के उप-राज्यपाल इसमें शामिल रहते है |
  • इन परिषदों का सभापतित्व नीति आयोग के अध्यक्ष अथवा उनके द्वारा नामित व्यक्ति करते हैं |

विशिष्ट आमंत्रित :

  • विशेषज्ञ, सुविज्ञ एवं अभ्यासी, जिनके पास सम्बंधित क्षेत्र में विशेष ज्ञान एवं योग्यता हो, प्रधानमंत्री द्वारा नामित व्यक्ति करते है |

पूर्णकालिक सांगठनिक ढांचा :

प्रधानमंत्री के अध्यक्ष होने के अतिरिक्त मिन्म्लिखित द्वारा इसका गठन होता :

  • उपाध्यक्ष : ये प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त किये जाते हैं | इनका पद कैबिनेट मंत्री के समकक्ष होता है |
  • सदस्य : पूर्णकालिक – ये राज्यमंत्री के पद के समकक्ष होते है |
  • अंशकालिक सदस्य : अधिकतम दो, जो कि प्रमुख विश्वविद्यालयों, शोध संगठनों तथा अन्य प्रासंगिक संस्थाओं से आते हैं और पदेन सदस्य के रूप में कार्य करते हैं | अंशकालिक सदस्यता चक्रनुमण पर आधारित होगी |
  • पदेन सदस्य :प्रधानमंत्री द्वारा नामित केन्द्रीय मंत्रिपरिषद के अधिकतम चार सदस्य |
  • मुख्य कार्यपालक अधिकारी : एक निश्चित कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त, भारत सरकार के सचिव पद के समकक्ष |
  • सचिवालय : जैसा आवश्यक समझा जाये |

Specialised Wings of Niti Aayog

NITI Aayog has a number of specialised wings, including:

Research Wing:

It develops in-house sectoral expertise, consisting of domain experts, specialists and scholars.

Consultancy Wing:

It provides a marketplace of panels of expertise and funding, for the Central and State Governments to tap into matching their requirements with solution providers, public and private, national and international. NITI Aayog is thus able to focus its resources on priority matters, providing guidance and as overall quality check to the rest.

Team India Wing:

It comprises of the representatives from every State and Ministry and serves as a permanent platform for national collaboration.

Each representative:

ensures that every State/Ministry has a continuous voice and stake in the NITI Aayog.

establishes a direct communication channel between the State/Ministry and NITI Aayog for all development related matters.

NITI Aayog functions in close cooperation with the Ministries of the Central Government, and the State Governments. While it makes recommendations to the Central and State Governments, the responsibility for taking and implementing decisions rests with them.

नीति आयोग के लिए विशेषज्ञता प्राप्त शाखाएं-

नीति आयोग के अंतर्गत अनेक विशेषज्ञता प्राप्त शाखाएं हैं :

शोध शाखा :

यह अपने क्षेत्र के विषय विशेषज्ञों एवं विद्वानों के रूप में आंतरिक प्रक्षेत्रीय सुविज्ञता का विकास करती है |

परमर्शिता शाखा :

यह सुविज्ञता एवं निधियन के विशेषज्ञ की एक बड़ी मंडी उपलब्ध कराता है जिसका उपयोग केंद्र एवं राज्य सरकारें अपनी जरूरतों के अनुसार कर सकती है | यहाँ समस्या समाधानकर्ता उपलध है : सार्वजनिक एवं निजी, देशी एवं विदेशी | नीति आयोग प्राथमिकता वाले मामलों में अपने संसाधनों को एकाग्र करता है तथा एक समग्र गुणवत्ता जांचकर्ता का कार्य करता है |

टीम इंडिया शाखा :

इसमें प्रत्येक राज्य एवं मंत्रालय के प्रतिनिधि होते हैं और यह राष्ट्रीय सहयोग एवं सहकार के एक स्थायी मंच के रूप में कार्य करता है |

प्रत्येक प्रतिनिधि :

  • सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक राज्य / मंत्रालय का मत नीति आयोग में सतत रूप से सुना जाये |
  • राज्य / मंत्रालय तथा नीति आयोग के बीच विकास सम्बन्धी मामलों पर समर्पित अन्तरापृष्ठ के रूप में प्रत्यक्ष संचार चैनल स्थापित करता है |
  • नीति आयोग केंद्र सरकार के मंत्रालयों एवं राज्य सरकारों के नजदीकी सहयोग, परामर्श एवं समन्वय में कार्य करता है |यह केंद्र एवं राज्य सरकारों के लिए अनुशंसाएं करता है लेकिन निर्णय लेने एवं लागू करने की जिम्मेवारी उन्ही पर होती है | 

Objectives of Niti Aayog

  • To evolve a shared vision of national development priorities, sectors and strategies with the active involvement of States.
  • To foster cooperative federalism through structured support initiatives with the States on a continuous basis.
  • To develop mechanisms to formulate credible plans at the village level.
  • To design strategic and long-term policy and initiatives and monitor their progress.
  • To create a knowledge, innovation and entrepreneurial support system through a collaborative community of national and international experts.
  • To offer a platform for resolution of inter-sectoral and inter-departmental issues.
  • To actively monitor and evaluate the implementation of programmes including the identification of the needed resources.
  • To focus on technology upgradation and capacity building for implementation of initiatives.

नीति आयोग के उद्देश्य-

  • राज्यों की सक्रिय सहभागिता से राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं, प्रक्षेत्रों, एवं रणनीतियों के प्रति साझा दृष्टिकोण का विकास |
  • सहकारी संघवाद स्थापित करने के लिए सतत आधार पर राज्यों के साथ सरंचित सहयोग |
  • ग्राम स्तर पर विश्वसनीय योजनाओं के सूत्रण के लिए प्रक्रियाओं का विकास |
  • रणनीतिक एवं दीर्घकालिक नीति एवं कार्यक्रम रुपरेखा एवं पहलों को डिजाइन करना और उनकी प्रगति का अनुश्रवण करना |
  • राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों, अभ्यासियों एवं अन्य साझेदारों के सहयोगी समुदाय के माध्यम से ज्ञान, नवाचार एवं उद्यामितापूर्ण समर्थक प्रणाली का सृजन करना |
  • अंतर-प्रक्षेपीय एवं अंतर-विभागीय मुद्दों के समाधान के लिए एक मंच तैयार करना ताकि विकास एजेंडा को लागू करने की गति तीव्र की जा सके |
  • कार्यक्रमों एवं पहलों के कार्यान्वयन का सक्रिय रूप से अनुश्रवण एवं समीक्षा करना, साथ ही जरुरी संसाधनों की पहचान करना |
  • प्रौद्योगिकी उन्नयन तथा कार्यक्रमों एवं पहलों के कार्यान्वयन के लिए क्षमता निर्माण पर एकाग्रता |

Guiding Principles of Niti Aayog-

NITI Aayog is guided by the following principles:

Antyodaya:

Prioritise service and upliftment of the poor as provided in Pandit Deendayal Upadhyay’s idea of ‘Antyodaya’.

Inclusion:

Empower vulnerable and marginalised sections, redressing identity based inequalities.

Village:

Integrating villages into the development process to draw on the importance and energy of our ethos, culture and sustenance.

Demographic dividend:

Improving human assets by focusing on their development through education and skills.

People’s Participation:

Increasing the participation of citizens for good governance.

Governance:

Effective governance transitioning focus from Outlay to Output to Outcome.

Sustainability:

Maintaining sustainability of our planning and development process and by taking care of our environment.

So, NITI Aayog is based on the 7 pillars:

  • Pro-people agenda that fulfills the aspirations of the society as well a individuals.
  • Proactive in anticipating and responding to citizen needs.
  • Participative, by involvement of citizens.
  • Empowering women in all aspects.
  • Inclusion of all groups with special attention to the SCs, STs, OBCs and minorities.
  • Equality of opportunity for the youth.
  • Transparency through the use of technology to make government responsive.

नीति आयोग के मार्गदर्शक सिद्धांत

नीति आयोग को निम्नलिखित सिद्धांतों द्वारा मार्गदर्शन होता है :

अंत्योदय :

गरीबों की सेवा एवं उत्थान पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘अंत्योदय’ विचार के अनुसार |

समावेशिता :

असुरक्षित एवं हाशियाकृत वर्गों को सशक्त बनाना, पहचान आधारित हर भेदभाव को समाप्त करना |

ग्राम :

विकास प्रक्रिया से गाँव को जोड़ना, हमारे नैतिक बोध, संस्कृति की ताकत, और ऊर्जा अर्जित करना |

जनसंख्यात्मक लाभांश :

मानव परिसंपत्ति को शिक्षा और कौशल के माध्यम से बेहतर बनाना |

जनसहभागिता :

अच्छे शासन के लिए जन-सहभागिता को बढ़ाना |

अभिशासन :

अभिशासन शैली को प्रश्रय देते हुए ‘लागत से उत्पाद से परिणाम’ की ओर प्रयासों का अंतरण |

धारणीयता :

अपने नियोजन एवं विकास प्रक्रिया में अपने पर्यावरण का ख्याल करते हुए धारणीयता को केंद्र में रखना |

इस प्रकार नीति आयोग 7 स्तंभों पर आधारित है-

  • जन-समर्थक एजेंडा जो कि समाज के साथ-साथ व्यक्ति की आकांक्षाओं को भी पूरा करता हो |
  • नागरिकों की जरूरतों का अनुमान कर प्रत्युत्तर के प्रति आगे बढ़कर सक्रियता दिखाना |
  • नागरिकों की सलंग्नता के अम्ध्यम से सहभागी होना |
  • सभी पक्षों में स्त्री सशक्तिकरण |
  • सभी समूहों की समावेशिता, अनु. जाति / जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यकों पर विशेष ध्यान |
  • युवाओं के लिए अवसर की समानता |
  • प्रौद्योगिकी के माध्यम से पारदर्शिता स्थापित कर सरकार को दृष्टव्य अथवा अनुक्रियात्मक बनाना |

Erstwhile Planning Commission

  • The Planning Commission was established in March 1950 by an executive resolution of the Government of India on the recommendation of the Advisory Planning Board constituted in 1946, under the chairmanship of K C Neogi.
  • It is a non-constitutional or extra-constitutional body (not created by the Constitution) and a non-statutory body (not created by an act of Parliament).

Composition of Planning Commission

  • The Prime Minister of India has been the chairman of the commission and presides over its meetings.
  • The commission has a deputy chairman, who is the de-facto executive head (full time functional head) of the commission. He is responsible for the formulation and submission of the draft Five-Year Plan to the Central cabinet. He is appointed by the Central cabinet for a fixed tenure and enjoys the rank of a cabinet minister. Though he is not a member of cabinet, he is invited to attend all its meeting (without right to vote).
  • Some Central ministers are appointed as a part-time members of the commission. The Finance Minister and Planning Minister are ex-officio (by virtue of) members of the commission.
  • The commission has 4 to 7 full-time expert members. They enjoy the rank of a minister of state.
  • The commission has a member secretary who is usually a senior member of IAS.
  • Planning Commission is wholly a Centre-constituted body.

पूर्ववर्ती योजना आयोग-

  • योजना आयोग की स्थापना मार्च 1950 में भारत सरकार के एक कार्यपालीय संकल्प द्वारा की गई थी, जो कि के. सी. नियोगी  के अध्यक्षता के तहत 1946 में गठित सलाहकार योजना बोर्ड की सिफारिश के अनुरूप थी |
  • यह एक गैर-संवैधानिक या संविधानेत्तर निकाय है ( संविधान के द्वारा सृजित नहीं ) और एक विधिक निकाय है ( संसद के किसी अधिनियम द्वारा सृजित नहीं ) | 

योजना आयोग का गठन-

  • भारत के प्रधानमंत्री योजना आयोग के अध्यक्ष थे | वही आयोग की  बैठक की अध्यक्षता करते थे |
  • आयोग का एक उपाध्यक्ष होता था, जो कि आयोग का वास्तविक प्रमुख था ( पूर्णकालिक कार्यात्मक प्रमुख ) | पंचवर्षीय योजना को तैयार कर उसका प्रारूप केंद्र को सौंपने की जिम्मेदारी उसी की थी | उसकी नियुक्ति एक निश्चित कार्यकाल के लिए के ,लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा की जाती थी और उसे कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था | हालाँकि वह कैबिनेट सदस्य नहीं था, वह मंत्रिमंडलों की बैठकों में आमंत्रित किया जाता था ( बिना मताधिकार के ) |
  • कुछ केन्द्रीय मंत्री आयोग के अंशकालिक सदस्य के रूप में नियुक्त होते थे | जैसे वित्त मंत्री, योजना मंत्री आयोग के पदेन सदस्य होते थे |
  • आयोग के 4 से 7 पूर्णकालिक विशेषज्ञ सदस्य होते थे | उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त होता था |
  • आयोग का एक सदस्य सचिव होता था जो कि एक वरिष्ठ आई.ए.एस पदाधिकारी होता था |
  • योजना योग पूर्णतया केंद्र द्वारा गठित एक संस्था थी |

Functions of Planning Commission

  • To make an assessment of material, capital and human resources of the country and investigate the possibilities of augmenting them.
  • To formulate a plan for the most effective and balanced utilisation of the country’s resources.
  • To determine priorities and to define stages in which the plan should be carried out.
  • To indicate the factors that retard economic development.
  • To determine the nature of the machinery required for successful implementation of the plan in each stage.
  • To appraise, from time to time the progress achieved in execution of the plan and to recommend necessary adjustments.
  • To make appropriate recommendations for facilitating the discharge of its duties, or on a matter referred to it for advice by Central or state governments. 

The Allocation of Business Rules have assigned the following matters (in addition to the above) to the Planning Commission:

  • Public Cooperation in National Development
  • Specific programmes for area development notified from time to time.
  • Perspective planning
  • Institute of Applied Manpower Research
  • Unique Identification Authority of India (UIDAI)
  • All matters relating to National Rainfed Area Authority (NRAA)
  • The UIDAI has been constituted in 2009 as an attached office under aegis of Planning Commission.
  • The NRAA has been transferred from Ministry of Agriculture to the Planning Commission.
  • Planning Commission is an advisory body and has no executive responsibility.

योजना आयोग के कार्य-

  • देश के भौतिक, पूंजी एवं मानव संसाधन का आकलन का उनकी संवृद्धि की सम्भावना तलाश करना |
  • देश के संसाधनों का सबसे प्रभावी एवं संतुलित उपयोग के लिए योजना का सूत्रण करना |
  • प्राथमिकताओं का निर्धारण और उन चरणों को परिभाषित करना जिनमें योजनाओं को कार्यान्वित करना है |
  • आर्थिक विकास को धीमा करने वाले कारकों की पहचान करना |
  • योजना के प्रत्येक चरण के सफल कार्यान्वयन के लिए जरुरी प्रक्रियाओं के प्रकृति का निर्धारण |
  • योजना को लागू करने में हुई प्रगति का समय-समय पर मूल्याङ्कन करना तथा जरुरी समायोजनाओं की अनुशंसा करना |
  • अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए उपयुक्त अनुशंसा करना या ऐसे मामलों पर अनुशंसा देना जो इसकी सलाह के लिए केंद्र अथवा राज्य सरकारों द्वारा संदर्भित किये गए हैं | 

कार्यवाही नियमावली आवंटन ने योजना आयोग को (उपरोक्त के अतिरिक्त ) निम्नलिखित मामले सौपे थे :

  • राष्ट्रीय विकास में जन सहयोग |
  • समय-समय पर अधिसूचित क्षेत्र विकास के लिए विकास कार्यक्रम |
  • परिप्रेक्ष्य नियोजन |
  • इंस्टिट्यूट ऑफ़ एप्लाइड मैनपावर रिसर्च |
  • भारतीय विशिष्ठ पहचान प्राधिकरण |
  • राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण से सम्बंधित सभी मामले |
  • भारतीय विशिष्ठ पहचान अधिकरण का गठन योजना आयोग के तत्वाधान में सलंग्न कार्यालय के रूप में 2009 में की गई थी |
  • एनआरएए को कृषि मंत्रालय से योजना आयोग में स्थानांतरित कर दिया गया है |
  • योजना आयोग एक सलाहकारी निकाय है और इसकी कोई कार्यपालिका जिम्मेदारी नहीं है | 

Internal Organisation of Planning Commission

The Planning Commission has the following 3 organs:

  • Technical Divisions
  • Housekeeping Branches
  • Programme Advisors

Technical Divisions-

  • They are the major functional units of Planning Commission.
  • They are mainly concerned with plan formulation, plan monitoring and plan evaluation.
  • They have general divisions (concerned with aspects of the entire economy) and subject divisions (concerned with specified fields of development). 

Housekeeping Branches:

The Planning Commission has the following housekeeping branches:

  • General administration branch
  • Establishment branch
  • Vigilance branch
  • Accounts branch
  • Personal training branch

Programme Advisors:

They act as a link between the Planning Commission and the states of Indian Union in the field of planning.

Functions:

  • To make an assessment of the implementation of development programmes in states.
  • To keep the Planning Commission and Union Ministries informed about the progress of Centre-aided schemes as well as centre-sponsored schemes.
  • To advise the Planning Commission on the proposals received from states for their five year and annual plans. 

Personnel

The internal organisation of Planning Commission has dual hierarchy- administrative and technical.

Administrative Hierarchy-

  • The administrative hierarchy is headed by the Secretary of the Planning Commission who is assisted by Joint Secretaries, Deputy Secretaries, Under Secretaries and other administrative and clerical staff.
  • These functionaries are drawn from IAS, IRS, Central Secretariat Service, Indian Audit and Accounts Service and the other non-technical Central services.

Technical Hierarchy-

  • It is headed by the Advisor who is assisted by Chiefs, Directors, Joint Directors and other technical staff.
  • These functionaries are drawn from the Indian Economic Service, Indian Statistical Service, Central Engineering Service and other Central technical services.
  • The Advisor is head of the technical division and enjoys the rank of either an Additional Secretary or a Joint Secretary.

योजना आयोग के आतंरिक संगठन-

योजना आयोग के निम्नलिखित 3 अंग थे :

  • तकनीकी प्रभाग
  • गृह-व्यवस्था शाखाएं
  • कार्यक्रम सलाहकार

तकनीकी प्रभाग –

  • ये योजना आयोग के प्रमुख कार्यात्मक इकाइयाँ थे |
  • उनका सम्बन्ध मुख्यतः योजना-सूत्रण, योजना अनुश्रवण तथा योजना मूल्याङ्कन से था |
  • इनकी सामान्य प्रभाग ( जिनका सम्बन्ध सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था से था ) और विषय प्रभाग ( जिनका सम्बन्ध विकास के विशिष्ठ क्षेत्रों से था ) कोटियाँ थी |

गृह व्यवस्था शाखाएं :

योजना आयोग में निम्नलिखित गृह व्यवस्था शाखाएं थी :

  • सामान्य प्रशासन शाखा
  • स्थापना शाखा
  • सतर्कता शाखा
  • लेखा शाखा
  • व्यक्तिगत प्रशिक्षण शाखा 

कार्यक्रम सलाहकार :

ये योजना आयोग तथा भारतीय संघ के राज्यों के बीच कड़ी के रूप में नियोजन के क्षेत्र में कार्य करते हैं |

कार्य :

  • राज्यों में विकास कार्यक्रमों के कार्यान्वयन का आकलन करना |
  • योजना आयोग और केन्द्रीय मंत्रालयों को केंद्र सहायता योजनाओं के साथ साथ केंद्र प्रायोजित योजनाओं की प्रगति के बारे में जानकारी देना |
  • राज्यों की पंचवर्षीय योजनाओं और वार्षिक योजनाओं के लिए राज्यों से प्राप्त प्रस्तावों पर योजना आयोग को सलाह देना | 

कार्मिक-

योजना आयोग के आतंरिक संगठन में दोहरा पदानुक्रम था – प्रशासनिक एवं तकनीकी |

प्रशासनिक पदानुक्रम –

  • प्रशासनिक पदानुक्रम का प्रमुख योजना आयोग के सचिव था, जिसके सहयोग के लिए संयुक्त सचिव, उप-सचिव, अवर सचिव, तथा अन्य प्रशासनिक एवं लिपिकीय कर्मचारी होते थे |
  • इन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय राजस्व सेवा, केन्द्रीय सचिवालय सेवा, तथा अन्य गैर-तकनीकी सेवाओं से लिया जाता था | 

तकनीकी पदानुक्रम –

  • इसका प्रमुख सलाहकार होता था जिसकी सहायता के लिए चीफ, निदेशक, संयुक्त निदेशक तथा अन्य तकनीकी कर्मचारी होते थे |
  • इनका चयन भारतीय आर्थिक सेवा, भारतीय सांख्यिकीय सेवा, केंन्द्रीय अभियंत्रण सेवा तथा केन्द्रीय तकनीकी सेवाओं से किया जाता था |
  • सलाहकार तकनीकी प्रभाग का प्रमुख था और इसे भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव अथवा संयुक्त सचिव का दर्जा प्राप्त था | 

 

 

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