Mission HCS Exam 2018 :: Prelims Mains Exam Study Notes | History

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Civil service, Police and Judicial reforms during British era and Constitutional reforms (1773-1858)

Civil Services:

Cornwallis (governor-general, 1786-93):

  • He was the first to bring into existence and organise the civil services.
  • He tried to check corruption through raising salary, strict enforcement of rules against private trade, debarring civil servants from taking presents, bribes etc and enforcing promotions through seniority.

Wellesley(governor-general, 1798-1805)

  • In 1800, set up the Fort William College for training of new recruits.
  • In 1806 Wellesley’s college was disapproved by the Court of Directors

Charter Act of 1853

  • This Act ended the Company’s patronage, enjoining recruitment to be through an open competition henceforth.

The reasons for exclusion of Indians were:

  1. The belief that only the English could establish administrative services serving British interests.
  2. The belief that the Indians were incapable, untrustworthy and insensitive to the British interests.

Lord Lytton:

  • In 1878-79, Lytton introduced the Statutory Civil Service consisting of one-sixth of covenanted posts to be filled by Indians of high families through nominations by local governments subject to approval by the secretary and the viceroy.
  • But, the system failed and was abolished.

Aitchison Committee on Public Services (1886): Set up by Dufferin

Recommendations:

  • Dropping of the terms ‘covenanted’ and ‘uncovenanted’
  • Classification of the civil service into Imperial Indian Civil Service (examination in England), Provincial Civil Service (examination in India) and Subordinate Civil Service (examination in India)
  • Raising the age limit to 23.

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सिविल  सेवाएँ :

कॉर्नवालिस ( गवर्नर जनरल 1786-93 )

  • वह लोक सेवाओं को अस्तित्व में लाने तथा संगठित करने वाला प्रथम गवर्नर जनरल था |
  • उसने भ्रष्टाचार को रोकने के लिए वेतन में वृद्धि, निजी व्यापार पर पूर्ण प्रतिबन्ध, अधिकारियों द्वारा भेंट, घूस आदि स्वीकार करने पर  पूर्ण प्रतिबन्ध तथा वरिष्ठता के आधार पर तरक्की को लागू करने जैसे कई कदम उठाये |

वैलेस्ली (गवर्नर-जनरल 1798-1805 )

  • 1800 में, इन्होने फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना की ताकि नए अधिकारियों  को प्रशिक्षित किया जा सके |
  • 1806 में, वैलेस्ली के कॉलेज को निदेशक मंडल के द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया था |

1853 का चार्टर एक्ट :

  • इस एक्ट के द्वारा नियुक्तियों के मामले में डायरेक्टरों का संरक्षण समाप्त हो गया था तथा सभी नियुक्तियां एक प्रतियोगी परीक्षा के द्वारा की जाने लगी जिसमे किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नही रखा गया |

भारतीयों के बहिष्कार के कारण थे :

  1. अंग्रेजों का यह विश्वास था कि ब्रिटिश हितों को पूरा करने के लिए अंग्रेजों को ही प्रशासन का दायित्व सम्भालना चाहिए |
  2. अंग्रेजों की यह मान्यता कि भारतीय,  ब्रिटिश हितों के लिए अयोग्य, अविश्वसनीय, तथा असंवेदनशील हैं |

लॉर्ड लिटन :

  • 1878-79 में, लिटन ने वैधानिक सिविल सेवा की शुरुआत की जिसमें अनुबंधित पदों का  1/6 भाग स्थानीय सरकारों के मनोनयन के बाद सचिव एवं वायसराय की स्वीकृति के माध्यम से  के उच्च कुल भारतीयों द्वारा भरा जाना था |
  • किंतु, यह व्यवस्था असफल हो गयी तथा इसे समाप्त कर दिया गया |

लोक सेवाओं पर एचिसन समिति ( 1886 ) : डफरिन के द्वारा गठित |

सिफारिशें :

  • अनुबद्ध तथा अ-अनुबद्ध पदों को समाप्त किया जाये |
  • सिविल सेवा को शाही भारतीय सिविल सेवा (इंग्लैंड में परीक्षा ), प्रांतीय सिविल सेवा ( भारत में परीक्षा ) तथा अधीनस्थ सिविल सेवा (भारत में परीक्षा ) में वर्गीकृत  किया जाए |
  • उम्र-सीमा 23 वर्ष तक बढ़ा दी जाए |

Police reforms:

  • 1791: Cornwallis organised a regular police force to maintain law and order by modernising the old Indian system of thanas (circles) in a district under a daroga (an Indian) and a superintendent of police (SP) at the head of a district.
  • Relieved the zamindars of their police duties.
  • 1808: Mayo appointed an SP for each division helped by a number of spies.

Bentinck (governor-general, 1828-35):

  • Abolished the office of the SP.
  • The collector/magistrate was now to head the police force in his jurisdiction and the commissioner in each division was to act as the SP.
  • This arrangement resulted in a badly organised police force, putting a heavy burden on the collector/ magistrate.
  • Presidency towns were the first to have the duties of collector/magistrate separated.

Judicial Reforms

Earlier, the administration of justice used to be under the zamindars and the process of dispensing justice was often arbitrary.

Reforms under Warren Hastings (1772-1785)

  • District Diwani Adalats were established in districts to try civil disputes.
  • These adalats were placed under the collector and had Hindu law applicable for Hindus and the Muslim law for Muslims.

Positive Aspects of Judiciary under the British:

  • The rule of law was established.
  • The codified laws replaced the religious and personal laws of the rulers.
  • Even European subjects were brought under the jurisdiction, although in criminal cases, they could be tried by European judges only.

The Negative Aspects

  • The judicial system became more and more complicated and expensive.
  • The rich could manipulate the system.
  • There was ample scope for false evidence, deceit and chicanery.

पुलिस सुधार :

  • 1791 : कॉर्नवॉलिस ने कानून-व्यवस्था को बनाये रखने के लिए पुराने थानों का आधुनिकीकरण करके एक नियमित पुलिस बल का गठन किया जिसमे जिला दरोगा के अधीन एवं जिले के मुखिया पुलिस अधीक्षक के अधीन था | 
  • ज़मींदारों से उनकी पुलिस अधिकारों को छीन लिया गया |
  • 1808 : मायो ने प्रत्येक मंडल के लिए एक पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति की जिसकी सहायता के लिए कई मुखबिर थे |

बैंटिक (गवर्नर-जनरल 1828-35 ) :

  • पुलिस अधीक्षक के पद को समाप्त कर दिया |
  • कलेक्टर/दंडाधिकारी को उसके अधिकार क्षेत्र में पुलिस बल का मुखिया बनाया गया तथा यह व्यवस्था की गयी कि प्रत्येक संभाग का आयुक्त पुलिस अधीक्षक का दायित्व निभाएगा |
  • इस व्यवस्था का परिणाम एक खराब तरीके से गठित पुलिस बल के रूप में हुआ, जिसमें जिलाधिकारी/मजिस्ट्रेट पर काफी भार दे दिया गया था |
  • प्रेसिडेंसी शहरों में सबसे पहले समाहर्ता / दंडाधिकारी के कार्यों को पृथक किया गया |

न्यायिक सुधार :

पहले, न्यायिक प्रशासन ज़मींदारों के अंतर्गत होता था तथा न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया अक्सर एकपक्षीय होती थी |

वॉरेन हेस्टिंग्स के अंतर्गत सुधार ( 1772 -1885 )

  • नागरिक विवादों की सुनवाई करने के लिए जिलों में जिला दीवानी अदालतों की  स्थापना की गयी |
  • ये अदालतें जिलाधीश के अंतर्गत रखी गयीं तथा यहाँ हिंदुओं के लिए हिंदू क़ानून तथा मुसलमानों के लिए मुस्लिम क़ानून लागू होते थे |

ब्रिटिश शासन के अधीन न्यायपालिका के पहलू :

सकारात्मक पहलू-

  • क़ानून का राज स्थापित किया गया |
  • संहिताबद्ध कानूनों ने धार्मिक तथा शासकों के निजी कानूनों की जगह ले  ली |
  • यहाँ तक कि यूरोपीय लोग भी न्याय क्षेत्र के अधीन लाये गए, हालाँकि फौजदारी मामलों में, उनकी सुनवाई केवल यूरोपीय न्यायाधीश ही कर सकते थे|

नकारात्मक पहलू :

  • न्याय व्यवस्था अधिक से अधिक जटिल तथा महंगी  होती चली गयी |
  • अमीर लोग इस व्यवस्था का दुरूपयोग कर सकते थे |
  • झूठे साक्ष्य, छल तथा झूठे इल्जाम की पर्याप्त गुंजाइश थी |

Development of Constitution from 1773 to 1858

  • After the Battle of Buxar (1764), the East India Company got the Diwani rights of Bengal, Bihar and Orissa.
  • 1767: British Government demanded 10 per cent share in the plunder amounting to 4 million pounds annually.
  • 1765-72: The dual system of government continued for seven years (where the Company had the authority but no responsibility and its Indian representative had all the responsibility but no authority ).

The Regulating Act of 1773:

  • The directors of the Company were required to submit all correspondence regarding revenue affairs and civil and military administration to the Government.
  • Thus for the first time, the British cabinet was given the right to exercise control over Indian affairs.
  • In Bengal, the administration was to be carried out by governor-general and a council consisting of 4 members, representing civil and military government.

The Charter Act of 1813

  • The Company’s monopoly over trade in India ended, but the Company retained the trade with China and the trade in tea.
  • The Company was to retain the possession of territories and the revenue for 20 years more, without prejudice to the sovereignty of the Crown.
  • Powers of the Board of Control were further enlarged.

The Charter Act of 1853

  • The Company was to continue possession of territories unless the Parliament provided otherwise.
  • The Company’s patronage over the services was dissolved—the services were now thrown open to a competitive examination.
  • The law member became the full member of the governor-general’s executive council.

1773 से 1858 तक संविधान का विकास

  • बक्सर युद्ध ( 1764 )  के बाद, ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल बिहार तथा उड़ीसा के दीवानी अधिकार प्राप्त हो गए |
  • 1767 : ब्रिटिश सरकार ने 40 लाख की विशाल वार्षिक आय में 10 प्रतिशत हिस्से की माँग की |
  • 1765-72 : सरकार की दोहरी प्रणाली ( जिसमें कंपनी के पास अधिकार थे किंतु जवाबदेही नहीं थी तथा इसके भारतीय प्रतिनिधि के पास  सभी जिम्मेदारी थी किंतु अधिकार नहीं थे ) सात वर्षों तक जारी रही |

रेग्युलेटिंग एक्ट 1773 :

  • कंपनी के निदेशकों से कहा गया कि वे राजस्व से संबंधित सभी मामलों तथा दीवानी एवं सैन्य प्रशासन के संबंध में किये गए सभी प्रकार के कार्यों से सरकार को अवगत करवाएंगे |
  • इस तरह, पहली बार, ब्रिटिश कैबिनेट को भारतीय मामलों पर हस्तक्षेप करने का अधिकार दिया गया |
  • बंगाल में, प्रशासन को संभालने के लिए गवर्नर-जनरल तथा 4 सदस्यों वाले एक परिषद का गठन किया गया जो नागरिक तथा सैन्य प्रशासन से सम्बद्ध थे |

चार्टर एक्ट, 1813

  • भारत में व्यापार पर कंपनी का एकाधिकार समाप्त कर दिया गया , किंतु उसका चीन से व्यापार तथा चाय का व्यापार जारी रहा |
  • क्राउन की संप्रभुता पर प्रतिकूल प्रभाव के बिना, कंपनी को अगले और 20 वर्षों के लिए भारतीय प्रदेशों पर राजस्व तथा नियंत्रण का अधिकार दे दिया गया |
  • नियंत्रण बोर्ड की शक्तियाँ बढ़ा दी गयीं |

चार्टर एक्ट 1853

  • कंपनी को भारतीय प्रदेशों को “जब तक कि संसद ना चाहे” तब तक के लिए अपने अधीन रखने की अनुमति दी गयी |
  • नौकरियों पर कंपनी के संरक्षण को समाप्त कर दिया गया-  नौकरियाँ अब एक सार्वजनिक परीक्षा के लिए खुली छोड़ दी गयीं |
  • विधि सदस्य को गवर्नर-जनरल के परिषद का पूर्ण सदस्य बना दिया गया|

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