Indian Polity Various Provisions for Some State | UPSC IAS Exam 2018

Indian Polity Various Provisions for Some State | UPSC IAS Exam 2018

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Indian Polity Various Provisions for Some State | UPSC IAS Exam 2018

Indian Polity Various Provisions for Some State | UPSC IAS Exam 2018

Special Provisions for some States –

  • Art. 371-371 J in Part XXI of the Constitution contains special provision for 12 states incorporated by various subsequent amendments.
  • Special provisions are being made-
    • to meet the aspirations of the people of backward regions of the states.
    • to promote cultural and economic interests of the tribal people.
    • to deal with disturbed law and order condition.
    • to protect the interests of the local people of the states.

कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रावधान –

  • संविधान के भाग XXI में अनुच्छेद 371-371-झ तक बारह राज्यों के सम्बन्ध में विशेष प्रावधान किये गए हैं |
  • विशेष प्रावधान बनाए गए हैं-
    • इन राज्यों के पिछड़े क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करना |
    • जनजातीय लोगों के आर्थिक व सांस्कृतिक हितों की रक्षा करना |
    • अशांत कानून और व्यवस्था की परिस्थितियों से निपटना |
    • राज्यों के स्थानीय लोगों की हितों की रक्षा करना | 

Special Provisions for Maharashtra and Gujarat –

Under Art. 371, the President is authorised to provide that the Governor of Maharashtra and that of Gujarat would have special responsibility for-

  • The establishment of separate development boards for Vidarbha, Marathwada and the rest of Maharashtra; and Saurashtra, Kutch and rest of Gujarat with the provision that a report on the working of these boards would be placed every year before the State Legislative Assembly;
  • The equitable allocation of funds for developmental expenditure over the said areas, subject to the requirements of the State as a whole; and
  • An equitable arrangement providing adequate facilities for technical education and vocational training, and adequate employment opportunities in the state services in respect of the said areas.  

महाराष्ट्र और गुजरात के लिए विशेष प्रावधान-

अनुच्छेद 371 के तहत राष्ट्रपति इस बात के लिए प्राधिकृत है कि वह महाराष्ट्र और गुजरात के राज्यपालों को कुछ विशेष शक्तियां दें, जो इस प्रकार हैं :-

  • विदर्भ, मराठवाडा एवं शेष महाराष्ट्र ; तथा सौराष्ट्र, कच्छ एवं शेष  गुजरात के लिए पृथक विकास बोर्डों की स्थापना इस प्रावधान के साथ करना कि इन बोर्डों के कार्यों का वार्षिक प्रतिवेदन विधानसभा में पेश किया जाएगा |
  • उक्त वर्णित क्षेत्रों में विकास खर्च हेतु निधियों का साम्यपूर्ण आवंटन, जो सम्पूर्ण राज्य की आवश्यकताओं के अधीन हो, ; और
  • उक्त वर्णित क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा एवं व्यवसायिक प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराने के निमित्त उचित व्यवस्था करना एवं उक्त वर्णित क्षेत्रों के युवाओं के लिए राज्य की सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना

Special Provisions for Nagaland

Art. 371-A (added by 13th Constitutional Amendment Act, 1962) makes the following special provisions for Nagaland-

  • The Acts of Parliament relating to the following matters would not apply to Nagaland unless the State Legislative Assembly so decides:
    • Religious or social practices of the Nagas;
    • Naga customary law and procedure;
    • Administration of civil and criminal justice involving decisions according to Naga customary law; and
    • Ownership and transfer of land and its resources.
  • The Governor of Nagaland shall have special responsibility for law and order in the state so long as in his opinion internal disturbances occurring in the Naga hills, Tuensang area still continues and in the discharge of his functions, the Governor after consulting the Council of Ministers, exercises his individual judgement and his decision is final. This special responsibility of the Governor shall cease when the President so directs. 
  • The Governor has to ensure that the money provided by the Government of India out of the Consolidated Fund of India for any specific purpose is included in the demand for a grant relating to that purpose and not in any other demand.
  • A regional council consisting of 35 members should be established for the Tuensang district of the state.
    • The Governor should make rules for the composition of the council, manner of choosing its members, their qualifications, term, salaries and allowances.
    • The appointment of officers and staff of the council and their service conditions; and any other matter relating to the constitution and proper functioning of the council. 
  • For a period of ten years from the formation of Nagaland or for such further period as the Governor may specify on the recommendation of the regional council, the following provisions would be operative for the Tuensang district-
    • The administration of the Tuensang shall be carried on by the Governor.
  • The Governor shall in his discretion arrange for equitable distribution of money provided by the Centre between Tuensang district and the rest of Nagaland.
  • Any act of Nagaland Legislature shall not apply to Tuensang district unless the Governor so directs on the recommendation of the regional council.
  • The Governor can make regulations for the peace, progress and good government of the Tuensang district which may repeal or amend any act of Parliament or any other law. 
  • There shall be a minister for Tuensang affairs in the State Council of Ministers who is to be appointed from amongst the members representing Tuensang district in the Nagaland Legislative Assembly.
  • The final decision on all matters relating to Tuensang district shall be made by the Governor in his discretion.
  • Members in the Nagaland Legislative Assembly from the Tuensang district are not elected directly by the people but by the regional council.

नागालैंड के लिए विशेष प्रावधान-

अनुच्छेद 371-के तहत ( 13वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1962 में जोड़ा गया ) नागालैंड के लिए निम्नलिखित विशेष प्रावधान किये गए-

  • संसद द्वारा निम्न मामलों के सम्बन्ध में बनाया गया अधिनियम तब तक नागालैंड पर लागू नहीं होगा, जब तक राज्य विधानसभा इसका मंजूरी न दे:
    • नागाओं की धार्मिक या सामाजिक प्रथाएँ;
    • नागा रूढ़िजन्य कानून और प्रक्रिया ;
    • सिविल और दांडिक न्याय प्रशासन, जहा विनिश्चय नागा रूढ़िजन्य कानूनों के अनुसार होते हैं ; और
    • भूमि और उसके संपत्ति स्रोतों का स्वामित्व और अंतरण 
  • जब तक स्थानीय नागाओं द्वारा किये गए उपद्रव नागा पहाड़ियों, त्वेनसांग क्षेत्रों में समाप्त नहीं हो जाते, तब तक राज्य में कानून और व्यवस्था बनाए रखने का विशेष दायित्व नागालैंड के राज्यपाल पर है | अपने इन दायित्वों के निर्वहन में राज्यपाल, राज्य की मंत्रिपरिषद से परामर्श कर सकता है लेकिन वह स्वविवेक से निर्णय लेने का अधिकारी है तथा उसका निर्णय ही  अंतिम व मान्य होगा | राज्यपाल के इस विशेष दायित्व को यदि राष्ट्रपति चाहे तो समोप्त कर सकता है | 
  • राज्यपाल का यह दायित्व है कि वह केंद्र सरकार द्वारा भारत के समेकित निधि से राज्य के विकास हेतु विशेष कार्य हेतु दिए गए धन का उचित आवंटन एवं खर्च सुनिश्चित करे, जिसमें इस कार्य से सम्बंधित अनुदान मांगे भी शामिल होगी |
  • राज्य के त्वेंसंग जिले के लिए 35 सदस्यीय क्षेत्रीय परिषद् की स्थापना की जाएगी |
    • राज्यपाल परिषद् के सरंचना, इसके सदस्यों के चुनाव के तरीके, उनकी योग्यता, कार्यकाल, वेतन एवं भत्ते के लिए नियम बनाएगा  
  • परिषद् के अधिकारी और कर्मचारी की नियुक्ति और उनकी सेवाओं की शर्तें ; और परिषद् के बनावट एवं उसके सही तरीके से सञ्चालन से जुड़े अन्य मामले |
    • नागालैंड के निर्माण से 10 वर्ष की अवधि या आगे भी राज्यपाल के विवेकानुसार इस क्षेत्रीय परिषद् के गठन के सम्बन्ध में त्वेनसांग जिले के बारे में निम्न प्रावधान लागू होंगे;
      • त्वेनसांग जिले के शासन का सञ्चालन राज्यपाल द्वारा किया जाएगा | 
  • राज्यपाल केंद्र से राज्य के विकास के लिए प्राप्त राशि से त्वेनसांग जिले और शेष नागालैंड के विकास हेतु उचित धन का आवंटन सुनिश्चित करेगा |
  • नागालैंड विधानसभा द्वारा बनाया कोई भी अधिनियम त्वेनसांग जिले पर तब तक लागू नहीं होगा, जब तक कि इस जिले की क्षेत्रीय परिषद् राज्यपाल को इस बारे में अनुशंसा न करे |
  • राज्यपाल त्वेनसांग जिले में शांति, विकास एवं सुशासन के लिए उचित विनियम बना सकता है | तथापि इस प्रकार के किसी विनियम को संसद के अधिनियम या किसी अन्य ऐसे कानून, जो जिले पर लागू होता है, के द्वारा संशोधित या समाप्त किया जा सकता है | 
  • राज्य मंत्रिपरिषद में त्वेनसांग जिले के लिए एक मंत्री होगा | वह नागालैंड विधानसभा में त्वेनसांग जिले का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायकों में से ही चुना जाएगा |
  • त्वेनसांग जिले के सम्बन्ध में अंतिम निर्णय राज्यपाल अपने विवेकानुसार ही निर्णय लेगा |
  • नागालैंड विधानसभा में त्वेनसांग जिले के विधायकों का निर्वाचन जनता द्वारा प्रत्यक्ष तरीके से न होकर, क्षेत्रीय परिषद् द्वारा किया जाएगा | 

Special Provisions for Assam –

  • Under Art. 371-B (added by the 22nd Constitutional Amendment Act, 1969) the President is empowered to provide for the creation of a committee of the Assam Legislative Assembly consisting of the members elected from the Tribal Areas of the state and such other areas as he may specify.
  • The Tribal Areas of Assam are specified in the Sixth Schedule of the Constitution. They are North Cachar Hills District, Karbi Anglong District and Bodoland Territorial Areas District. 

असम के लिए विशेष प्रावधान-

  • अनुच्छेद 371-ख के तहत ( 22वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1969 द्वारा जोड़ा गया ) राष्ट्रपति के पास इस बात की शक्ति है कि असम के विधानसभा का एक समिति का निर्माण करे जिसमें कि असम के जनजातीय क्षेत्रों या किसी अन्य क्षेत्रों, जिसे वह निर्दिष्ट करता है, से चुने गए सदस्य शामिल होंगे |
  • संविधान के छठी अनुसूची में असम के जनजातीय क्षेत्र निर्दिष्ट किये गए हैं | यह उत्तरी कछार पहाड़ी जिला, कारबी एन्ग्लोंग जिला और बोडोलैंड क्षेत्रीय जिला हैं | 

Special Provisions for Manipur –

Art. 371-C (added by the 27th Constitutional Amendment Act, 1971) makes the following special provisions for Manipur:

  • The President is authorized to provide for the creation of a committee of the Manipur Legislative Assembly consisting of the members elected from the hill areas of the state. ‘Hill Areas’ means such areas as the President may, by order, declare to be Hill Areas.
  • The President can also direct that the Governor shall have special responsibility to secure the proper functioning of that committee. 
  • The Governor should submit an annual report to the President regarding the administration of the hill areas.
  • The Central Government can give directions to the State Government as to the administration of the Hill areas. 

मणिपुर के लिए विशेष प्रावधान-

अनुच्छेद 371- ( 27वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा जोड़ा गया ) मणिपुर के लिए निम्नलिखित विशेष प्रावधान बनाता है:

  • राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि यदि वह चाहे तो राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों से मणिपुर विधानसभा के लिए चुने गए सदस्यों में से एक समिति का गठन कर सकता है | ‘पहाड़ी क्षेत्रों’ का अर्थ वैसे क्षेत्र जो राष्ट्रपति अपने आदेश द्वारा पहाड़ी क्षेत्र होने की घोषणा करे |
  • राष्ट्रपति इस समिति का उचित कार्य सञ्चालन सुनिश्चित करने हेतु राज्यपाल को विशेष उत्तरदायित्व भी सौंप सकता है |
  • राज्यपाल राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों के प्रशासन के सम्बन्ध में प्रतिवर्ष राष्ट्रपति को प्रतिवेदन भेजेगा |
  • राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों के प्रशासन के सम्बन्ध में केंद्र सरकार, राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश दे सकती है |

Special Provisions for Andhra Pradesh

Art. 371-D and 371-E (added by 32nd Constitutional Amendment Act) contain the special provisions for Andhra Pradesh.

  • The President is empowered to provide for equitable opportunities and facilities for the people belonging to different parts of the state in the matter of public employment and education and different provisions can be made for various parts of the state.
  • For the above purpose, the President may require the State Government to organise civil posts in local cadres for different parts of the state and provide for direct recruitment to posts in any local cadre. He may specify the parts of the state which shall be regarded as the local area for admission to any educational institution. He may also specify the extent and manner of preference or reservation given in the matter of direct recruitment to posts in any such cadre or admission to any such educational institution.
  • The President may provide for the establishment of an Administrative Tribunal in the state to deal with certain disputes and grievances relating to appointment, allotment or promotion to civil posts in the state. (The tribunal has been set up by the Andhra Pradesh Administrative Tribunal Order, 1975). The tribunal is to function outside the purview of the state High Court. No court (other than the Supreme Court) is to exercise any jurisdiction of the tribunal. The President may abolish the tribunal when he is satisfied that its continued existence is not necessary.
  • With the formation of separate Telangana state, Art. 371D will need to be amended.
  • Art. 371-E empowers the Parliament to provide for the establishment of a Central University in the state.

आंध्र प्रदेश के लिए विशेष प्रावधान –

अनुच्छेद 371-और अनुच्छेद 371-ड. ( 32वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा जोड़ा गया ) में आन्ध्र प्रदेश के लिए विशेष प्रावधान का जिक्र है |

  • राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह राज्य को विभिन्न क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों के लिए शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों में सामान अवसर उपलब्ध कराने के लिए उचित व्यवस्था कर सकता है | वे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के लिए विभिन्न प्रकार के प्रावधान भी बना सकते हैं |
  • उक्त उद्देश्य के लिए राष्ट्रपति को राज्य सरकार के सहायता की आवश्यकता होती है, जिससे कि राज्य के विभिन्न भागों में स्थानीय काडर के लिए लोक सेवाओं को संगठित किया जा सके तथा किसी भी स्थानीय काडर में आवश्यकतानुसार सीधी भर्ती की जा सके | वे यह भी निर्धारित कर सकते है कि किसी भी शैक्षिक संसथान में राज्य के किस भाग के छात्रों को प्रवेश में वरीयता दी जाएगी | वे इस प्रकार के किसी काडर या किसी शैक्षिक संसथान में राज्य के किसी विशेष क्षेत्र के लोगों के लिए विशेष आरक्षण की व्यवस्था भी कर सकते है |
  • राष्ट्रपति राज्य में सिविल सेवा के पदों पर कार्यरत अधिकारीयों की शिकायतों एवं विवादों के निपटन हेतु प्रशासनिक अधिकरण की स्थापना कर सकता है | यह अधिकरण लोक सेवाओं में भर्ती, आवंटन, पदोन्नति से सम्बंधित शिकायतों एवं विवादों की सुनवाई करेगा | यह अधिकरण राज्य उच्च न्यायालय के अतिरिक्त किसी अन्य न्यायालय के प्रति यह अधिकरण अपने कार्यों एवं निर्णयों के प्रति जवाबदेह नहीं होगा | जब राष्ट्रपति को यह लगता है कि अब इस अधिकरण का कार्य समाप्त हो चूका है या अब इसकी आवश्यकता नहीं है तो वे इस अधिकरण को समाप्त भी कर सकता है | 

Special Provisions for Sikkim –

The 36th Constitutional Amendment Act of 1975 made Sikkim a full-fledged state of the Indian Union. It included a new Art. 371-F containing special provisions with respect to Sikkim.

  • The Sikkim Legislative Assembly is to consist of at least 30 members.
  • One seat is allotted to Sikkim in the Lok Sabha and Sikkim forms one Parliamentary constituency.
  • For the purpose of protecting the rights and interests of the different sections of the Sikkim population, the Parliament is empowered to provide for the:
    • Number of seats in the Sikkim Legislative Assembly which may be filled by candidates belonging to such sections; and
    • Delimitation of the Assembly constituencies from which candidates belonging to such sections alone may stand for election to the Assembly.
  • The Governor shall have special responsibility for peace and for an equitable arrangement for ensuring the social and economic advancement of the different sections of the Sikkim population. In the discharge of this responsibility, the Governor shall act in his discretion, subject to the directions issued by the President.
  • The President can extend (with restrictions or modifications) to Sikkim any law which is in force in a state of the Indian Union.

सिक्किम राज्य के लिए विशेष प्रावधान-

36वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1975 ने सिक्किम को भारतीय संघ का एक पूर्ण राज्य बना दिया | इसमें एक नया अनुच्छेद 371-जोड़ा गया जिसमें  सिक्किम के लिए विशेष प्रावधान उल्लेखित है |

  • सिक्किम विधानसभा का गठन कम से कम 30 सदस्यों  से होगा |
  • लोकसभा  में सिक्किम को एक सीट दी जाएगी और पूरे सिक्किम को एक संसदीय क्षेत्र माना जाएगा |
  • सिक्किम जनसँख्या के विभिन्न अनुभागों के अधिकार एवं हितों की रक्षा के लिए संसद को यह अधिकार दिया गया कि वह
  • सिक्किम विधानसभा की अधिकांश सीटें इन समुदाय के सदस्यों द्वारा भरी जाएंगी |
  • विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण में यदि इस समुदाय की किसी सीट में बदलाव होता है तो भी वह अकेला इस सीट से चुनाव लड़ सकता है |
  • राज्य के राज्यपाल का यह विशेष दायित्व है कि वे सिक्किम में शांति स्थापित करने की व्यवस्था करें तथा राज्य की जनसँख्या के समान सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए संशाधनों एवं अवसरों का उचित आवंटन सुनिश्चित करे | अपने इस दायित्व के निर्वहन में राज्यपाल, रह्स्त्रपति द्वारा उसे प्रदान की गई विशेष शक्तियों के अंतर्गत स्वविवेक से निर्णय ले सकता है |
  • राष्ट्रपति यदि चाहे तो वे भारतीय संघ के राज्यों के लिए बनाए गए नियमों को सिक्किम के विशेष सन्दर्भ में विस्तारित ( प्रतिषेध या संशोधन के द्वारा ) कर सकता है |

Special Provisions for Mizoram

Art. 371-G (added by 53rd Constitutional Amendment Act, 1986)specifies the following special provisions for Mizoram:

  • The Acts of Parliament relating to the following matters would not apply to Mizoram unless the State Legislative Assembly so decides:
    • Religious or social practices of the Mizos;
    • Mizo customary law and procedure;
    • Administration of civil and criminal justice involving decisions according to Mizo customary law; and
    • Ownership and transfer of land.
  • The assembly should have at least 40 members.

मिजोरम के लिए विशेष प्रावधान-

अनुच्छेद 371- ( 53वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1986 द्वारा जोड़ा गया ) में मिजोरम के लिए विशेष प्रावधान है:

  • संसद द्वारा बनाया गया कोई नियम मिजोरम राज्य पर तब तक लागू नहीं होगा, जब तक कि राज्य की विधानसभा ऐसा करने का निर्णय न करे-
    • मिजो लोगों की सामाजिक और धार्मिक प्रथाएँ,
    • मिजो रूढ़िजन्य कानून और प्रक्रिया |
    • सिविल और दांडिक न्याय प्रशासन, जहाँ विनिश्चय मिजो रूढ़िजन्य कानून के अनुसार होगा |
    • भूमि का स्वामित्व और अंतरण |
  • मिजोरम विधानसभा में कम से कम 40 सदस्य होंगे | 

Special Provisions for Arunachal Pradesh –

Under Art. 371-H (added by 55th Constitutional Amendment Act, 1986), the following special provisions are made for Arunachal Pradesh:

  • The Governor of Arunachal Pradesh shall have special responsibility for law and order in the state. In the discharge of this responsibility, the Governor after consulting the Council of Ministers, exercises his individual judgement and his decision is final. This special responsibility shall cease when the President so directs.
  • The Assembly shall have at least 30 members.
  • Art. 371-I (added by 56th Constitutional Amendment Act, 1987) provides that the Goa Legislative Assembly should consist of at least 30 members.

अरुणाचल प्रदेश के लिए विशेष प्रावधान-

अनुच्छेद 371-( 55वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1986 द्वारा इसे जोड़ा गया ) के तहत अरुणाचल प्रदेश के लिए निम्नलिखित विशेष प्रावधान है :

  • अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल पर राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थापना करने का विशेष दायित्व है | अपने इस दायित्व का निर्वहन करने में राज्यपाल, राज्य मंत्रिपरिषद से परामर्श करके व्यक्तिगत निर्णय ले सकता है तथा उसका निर्णय ही अंतिम निर्णय माना जाएगा | यदि रह्स्त्रपति चाहे तो राज्य के राज्यपाल के इस विशेषाधिकार पर रोक लगा सकता है |
  • विधानसभा में कम से कम 30 सदस्य होंगे | 

Special Provisions for Goa –

  • Art. 371-I (added by 56th Constitutional Amendment Act, 1987) provides that the Goa Legislative Assembly should consist of at least 30 members.

गोवा के लिए विशेष प्रावधान –

अनुच्छेद 371- ( 56वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1987 द्वारा जोड़ा गया ) में गोवा के लिए यह विशेष प्रावधान किया गया कि राज्य की विधानसभा में कम से कम 30 सदस्य होंगे |

Special Provisions for Karnataka –

Art. 371-J was inserted by the 118th Constitutional Amendment Act, 2012. The act seeks to empower the Governor of Karnataka to take steps to develop the Hyderabad-Karnataka region. The Hyderabad-Karnataka region includes the 6 backward districts of Northern karnataka viz., Gulbarga, Bidar, Raichur, Koppal, Yadgir and Bellary.

Special Provisions for Karnataka-

The President may allow the Governor to take the following steps for development of the region:

  • Setting up a development board for the region.
  • Ensure equitable allocation of funds for development of the region.
  • Provide for reservation of seats in educational and vocational training institutions.
  • Provide for reservation in state government posts in the region for persons belonging to that region.

कर्णाटक के लिए विशेष प्रावधान

अनुच्छेद 371-जे  ( 118वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2012 द्वारा शामिल किया गया ) के तहत कर्णाटक के राज्यपाल को हैदराबादकर्णाटक क्षेत्र के विकास के लिए कदम उठाने के लिए शक्ति देता है | हैदराबाद-कर्णाटक क्षेत्र में उत्तरी कर्णाटक के 6 पिछड़े जिले शामिल है जो इस प्रकार हैं; गुलबर्ग, बिदार, रायचूर, कोप्पल, यादगिर और बेल्लारी |

कर्णाटक के लिए विशेष प्रावधान

राष्ट्रपति राज्यपाल  को क्षेत्र के विकास के लिए निम्नलिखित कदम उठाने की सहमती दे सकता है :

  • क्षेत्र के लिए एक विकास बोर्ड की स्थापना करना |
  • क्षेत्र में विकासात्मक खर्चों के लिए निधि का समत्व्पूर्ण आवंटन |
  • क्षेत्र के शैक्षणिक तथा व्यवसायिक शिक्षण संसथान में सीटों का आरक्षण |
  • क्षेत्र के लोगों के लिए राज्य सरकार के पदों में आरक्षण |

 

 

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