Indian Polity Constitutional Bodies Study Content | UPSC IAS Exam

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Constitutional Bodies

Constitutional bodies are the bodies mentioned in the Indian Constitution. They directly derive their powers from the Constitution.

  • Election Commission
  • Union Public Service Commission
  • State Public Service Commission
  • Finance Commission
  • National Commission for SCs
  • National Commission for STs
  • Special Officer for Linguistic Minorities
  • Comptroller and Auditor General of India
  • Attorney General of India
  • Advocate General of the State

Election Commission

  • Art. 324-329 in Part XV of the Constitution deal with elections in India.
  • The ‘Electoral System’ in India has been borrowed from United Kingdom.
  • Art. 324 of the Constitution provides that the power of superintendence, direction and control of elections to Parliament, State Legislatures, the office of President of India and the office of Vice-President of India shall be vested in the election commission.

Composition

Art. 324 of the Constitution has made following provisions with regard to the composition of election commission:

  • The Election Commission shall consist of the Chief Election Commissioner and such other Election Commissioners as the President may fix from time to time.
  • The appointment of the Chief Election Commissioner and other Election Commissioners shall be made by the President.
  • When any other Election Commissioner is appointed, the Chief Election Commissioner shall act as the chairman of the Election Commission.
  • The President may also appoint after consultation with the Election Commission such regional commissioners as he may consider necessary to assist the election commission.
  • The conditions of service and tenure of office of the election commissioners and the regional commissioners shall be determined by the President.
  • Since its inception in 1950 and till 15 October 1989, the Election Commission functioned as a single member body consisting of the Chief Election Commissioner.
  • On 16 October 1989, the President appointed 2 more Election Commissioners to cope with increased workload because of lowering of the voting age from 21 to 18 years.
  • In 1990, the 2 posts of Election Commissioners were removed. 
  • In October 1993, the President appointed 2 more Election Commissioners and by a Parliamentary Act, given the same position and status as the Chief Election Commissioner. Under the Act, the Commission is required to act as a multi-member body taking decisions unanimously or by majority.

संवैधानिक निकाय-

संवैधानिक निकाये भारतीय संविधान में उल्लिखित निकाये हैं। वे सीधे अपनी शक्तियों को संविधान से प्राप्त करते हैं।

  • निर्वाचन आयोग
  • संघ लोक सेवा आयोग
  • राज्य लोक सेवा आयोग
  • वित्त आयोग
  • अनुसूचित जातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग
  • अनुसूचित जनजातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग
  • भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी
  • भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक
  • भारत के महान्यायवादी
  • राज्य के महाधिवक्ता

निर्वाचन आयोग-

  • संविधान के  भाग  XV में अनुच्छेद 324-329 भारत के चुनावों से सम्बंधित है
  • भारत में ‘निर्वाचन प्रणाली’ यूनाइटेड किंगडम से  लिया गया है।
  • संविधान के अनुच्छेद 324 में यह बताया गया है कि संसद, राज्य विधान मंडल, भारत के राष्ट्रपति का कार्यालय और भारत के उपराष्ट्रपति का पद के लिए चुनावों की सञ्चालन, निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग में निहित होगा। 

बनावट-

संविधान के अनुच्छेद 324 ने चुनाव आयोग की बनावट के संबंध में निम्नलिखित प्रावधान किए हैं:

  • चुनाव आयोग मुख्य निर्वाचन आयुक्त और ऐसे अन्य चुनाव आयुक्त शामिल होंगे, जो राष्ट्रपति समय-समय पर तय कर सकता है ।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी।
  • जब कोई अन्य चुनाव आयुक्त इस प्रकार नियुक्त किया जाता है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त चुनाव आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्य करेगा।
  • राष्ट्रपति चुनाव आयोग की सलाह पर क्षेत्रीय आयुक्तों की नियुक्ति कर सकता है जिसे वह चुनाव आयोग की सहायता के लिए आवश्यक मानता है ।
  • चुनाव आयुक्तों और क्षेत्रीय आयुक्तों पदों की सेवा और कार्यकाल की शर्तों को राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
  • 1950 में और 15 अक्टूबर 1989 तक की स्थापना के बाद से, चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त का एक सदस्यीय निकाय के रूप में कार्य किया।
  • 16 अक्तूबर 1989 को, मतदान करने की उम्र 21 से 18 साल कम करने के कारण राष्ट्रपति ने अधिक कामकाज के बोझ से निपटने के लिए 2 और चुनाव आयुक्त नियुक्त किए।
  • 1990 में, चुनाव आयुक्तों के 2 पदों को हटा दिया गया था।
  • अक्टूबर 1993 में, राष्ट्रपति ने 2 और चुनाव आयुक्त नियुक्त किए और एक संसदीय अधिनियम द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में एक ही स्थिति और दर्जा दी। अधिनियम के तहत, आयोग को एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में कार्य करने के लिए एक मत  से या बहुमत से निर्णय लेने की आवश्यकता होती है। 

Tenure of Commissioners

  • Chief Election Commissioner and Election Commissioner have tenure of 6 years, or up to the age of 65 years, whichever is earlier.
  • They enjoy the same status and receive salary and perks as available to Judges of the Supreme Court of India.
  • Chief Election Commissioner is not eligible for reappointment and cannot hold any office either under the Union or the States, after retirement.
  • The members of Election Commission can resign by addressing a letter to the President.
  • The Chief Election Commissioner can be removed from office only through ‘Impeachment’ by Parliament. It means the Chief Election Commissioner may be removed from office by Parliament by passing a resolution to that effect, passed by Special majority by both the Houses of the Parliament on the ground of proved misbehaviour or incapacity.
  • Other Election Commissioners can be removed by the President on the recommendation of Chief Election Commissioner

 आयुक्तों के कार्यकाल –

  • मुख्य चुनाव आयुक्त और निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल 6 साल या 65 वर्ष की आयु तक का होता है, जो भी पहले हो।
  • वे वही प्रतिष्ठा और वेतन और सुविधाएं प्राप्त करते हैं जो भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए उपलब्ध है।
  • मुख्य निर्वाचन आयुक्त पुन: नियुक्ति के लिए पात्र नहीं हैं और सेवानिवृत्ति के बाद संघ या राज्यों के अधीन कोई भी कार्यालय नहीं रख सकता है।
  • राष्ट्रपति को पत्र लिखकर चुनाव आयोग के सदस्य अपना इस्तीफा दे सकते हैं।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त को संसद द्वारा केवल ‘महाभियोग’ के माध्यम से कार्यालय से हटाया जा सकता है। इसका अर्थ है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को संसद द्वारा कार्यालय से निकाल दिया जा सकता है जो उस प्रभाव का एक संकल्प पारित कर दिया जा सकता है, संसद के दोनों सदनों द्वारा साबित दुर्व्यवहार या अक्षमता के आधार पर पारित किया गया।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाया जा सकता है।  

Independence of Election Commission

Art. 324 of the Constitution has made the following provisions to safeguard and ensure the independence of the Election Commission:

  • The Chief Election Commission can be removed from his office only in a manner and on grounds as a Judge of the Supreme Court.
  • After appointment, conditions of service of the Chief Election Commissioner cannot be varied to his disadvantage.
  • The other Election Commissioners or Regional Commissioners cannot be removed from their offices by the President except in consultation with the Chief Election Commissioner.
  • Chief Election Commissioner is not eligible for reappointment and cannot hold any office either under the Union or the States, after retirement.

Some flaws in Election Commission are-

  • The Constitution has not prescribed the qualifications (legal, educational, administrative or judicial) of the members of the Election Commission.
  • The Constitution has not specified the term of the members of the Election Commission.
  • The Constitution has not debarred the retiring Election Commissioners from any further appointment by the government.

चुनाव आयोग की स्वतंत्रता –

संविधान के अनुच्छेद 324 ने निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता की सुरक्षा और सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित प्रावधान किए हैं:

  • मुख्य निर्वाचन आयोग को केवल उसी तरीके से हटाया जा सकता है जिस आधार पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को अपने कार्यालय से।
  • नियुक्ति के बाद, मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सेवा की शर्तों को उनके नुकसान से अलग नहीं किया जा सकता है।
  • मुख्य निर्वाचन आयुक्त के परामर्श के अलावा अन्य चुनाव आयुक्त या क्षेत्रीय आयुक्तों को अपने कार्यालयों से राष्ट्रपति द्वारा हटाया नहीं जा सकता है।
  • मुख्य निर्वाचन आयुक्त पुन: नियुक्ति के लिए पात्र नहीं हैं और सेवानिवृत्ति के बाद संघ या राज्यों के अधीन कोई भी कार्यालय नहीं रख सकता है। 

चुनाव आयोग में कुछ दोष हैं-

  • संविधान ने चुनाव आयोग के सदस्यों की योग्यता (कानूनी, शैक्षिक, प्रशासनिक या न्यायिक) निर्धारित नहीं किया गया है
  • संविधान ने चुनाव आयोग के सदस्यों की अवधि को निर्दिष्ट नहीं किया है।
  • संविधान ने सरकार द्वारा किसी और नियुक्ति से अवकाश ग्रहण करने वाले चुनाव आयुक्तों को नहीं छोड़ा है। 

Powers and Functions of Election Commission

The powers and functions of the Election Commission with regard to elections to the Parliament, State Legislatures and offices of President and Vice-President can be classified into three categories:

  • Administrative
  • Advisory
  • Quasi-Judicial

The Administrative expenditure of the Election Commission is not charged on the Consolidated Fund of India.

It is subject to the vote of the Parliament.

The expenditure is finalized directly in consultation between the Commission and the Finance Ministry of the Union Government. The latter generally accepts the recommendations of the Commission for its budgets.

Budget and Expenditure/ बजट और व्यय-

  • The Administrative expenditure of the Election Commission is not charged on the Consolidated Fund of India.
  • It is subject to the vote of the Parliament.
  • The expenditure is finalized directly in consultation between the Commission and the Finance Ministry of the Union Government. The latter generally accepts the recommendations of the Commission for its budgets. 

चुनाव आयोग की शक्तियां और कार्य-

संसद के चुनावों के संबंध में चुनाव आयोग की शक्तियां और कार्य, राज्य विधानसभाएं और राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति के कार्यालयों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

  • प्रशासनिक
  • सलाहकार
  • अर्ध न्यायिक

चुनाव आयोग के प्रशासनिक व्यय पर भारत के समेकित निधि पर शुल्क नहीं लगाया जाता है

यह संसद के वोट के अधीन है।

आयोग और केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय के बीच परामर्श में सीधे व्यय को अंतिम रूप दिया जाता है। बाद में आम तौर पर आयोग की सिफारिशों को अपने बजट के लिए स्वीकार करता है।

Advisory Jurisdiction & Quasi-Judicial Functions –

  • Under the Constitution, the Commission also has advisory jurisdiction in the matter of post-election disqualification of sitting members of Parliament and State Legislatures.
  • The cases of persons found guilty of corrupt practices at elections which come before the Supreme Court and High Courts are also referred to the Commission for its opinion on the question as to whether such person shall be disqualified and, if so, for what period.
  • The opinion of the Commission in all such matters is binding on the President or, as the case may be, the Governor to whom such opinion is tendered.
  • The Commission has the power to disqualify a candidate who has failed to lodge an account of his election expenses within the time and in the manner prescribed by law.
  • The Commission has also the power for removing or reducing the period of such disqualification as also other disqualification under the law.

सलाहकार क्षेत्राधिकार और अर्ध-न्यायिक कार्य-

  • संविधान के तहत, आयोग ने संसद और राज्य विधान सभा के वर्तमान सदस्यों के चुनाव के बाद के निर्वाचन के मामले में परामर्श अधिकार क्षेत्र भी दिया है।
  • सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के सामने आने वाले चुनावों में भ्रष्ट प्रथाओं के दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों को भी इस प्रश्न पर आयोग द्वारा अपनी राय के लिए भेजा जाता है कि क्या इस व्यक्ति को अयोग्य ठहराया जाएगा और यदि हां, तो किस अवधि के लिए?
  • इस तरह के सभी मामलों में आयोग की राय राष्ट्रपति पर बाध्यकारी है या, जैसा कि मामला हो, राज्यपाल जिसको इस राय को प्रस्तुत किया जाता है।
  • आयोग के पास ऐसे उम्मीदवार को अयोग्य घोषित करने का अधिकार है जो समय के भीतर अपने चुनाव खर्चों का एक खाता दर्ज करने में और विधि द्वारा निर्धारित तरीके से विफल रहे हैं
  • आयोग को ऐसे अयोग्यता की अवधि को हटाने या कम करने की शक्ति भी है और कानून के तहत अन्य अयोग्य भी हैं।

Executive Interference Barred –

  • Election Commission is insulated from executive interference, while exercising its powers.
  • It is the Commission which decides the election schedules for the conduct of elections (general or bye-elections).
  • It is the Commission which decides on the location polling stations, assignment of voters to the polling stations, location of counting centres, arrangements to be made in and around polling stations and counting centres and other related matters.

कार्यपालिका का हस्तक्षेप वर्जित-

  • चुनाव आयोग कार्यकारी अधिकारियों से हस्तक्षेप करता है, जबकि अपनी शक्तियों का प्रयोग करता है।
  • यह आयोग है जो चुनाव के संचालन (सामान्य या उप-चुनाव) के लिए चुनाव कार्यक्रम का निर्णय करता है।
  • यह आयोग है जो लोकेशन मतदान केंद्रों पर मतदान करता है, मतदान केंद्रों पर मतदाताओं के कामकाज, गिनती केंद्रों के स्थान, मतदान केंद्रों और गिनती केंद्रों और अन्य संबंधित मामलों में और उसके आसपास की व्यवस्था की जाती है।

 

 

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