IAS Study Material 2018 | Prelims and Mains Paper | History

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Rashtrakutas and Imperial Cholas

North India (Rajputa period)

  • The Ancient Indian history came to an end with the rule of Harsha and Pulakesin II.
  • The Medieval period lies between the 8th and the 18th century A.D.

The medieval period can be divided into two stages:

  • Early medieval period: 8th-12th century A.D.
  • Later Medieval period: 12th-18th century.

The Rajput Period (647A.D- 1200 A.D.)

  • From the death of Harsha to the 12th century, the destiny of India was mostly in the hands of various Rajput dynasties.
  • They belong to the ancient Kshatriya families.
  • They are foreigners.

Rulers

Nagabhata I (725-740 A.D.)

  • Founder of the Pratihara dynasty with Kannauj as it’s capital.

Vatsaraja and Nagabhata II

  • Played a vital role in merging the empire.

Pala Dynasty

Gopala (765-769 A.D.)

  • Founder of Pala Dynasty and he also restored order.
  • Ruled over Northern and Eastern India.
  • He expanded the Pala dynasty and extended his power over Magadha.

Dharmapala (769-815 A.D.)

  • He is the son of Gopala and succeeded his father.
  • He brought Bengal, Bihar, and Kannauj under his control.

Why Kannauj?

  • Strategic location of Kannauj on the Ganga trade route and was connected to the Silk route.
  • It was also the erstwhile capital of Harshavardhana’s empire in north India.

UPSC Exam

उत्तर भारत (राजपूत काल)

  • प्राचीन भारतीय इतिहास का काल हर्ष और पुलकेसिन द्वितीय के शासन तक माना गया है |
  • मध्यकालीन भारत 8 वीं और 18 वीं शताब्दी के बीच का समय माना गया |

मध्यकाल को दो चरणों में विभाजित किया जा सकता है:-

  • पूर्व मध्यकाल: 8 वीं-12 वीं शताब्दी ईस्वी
  • उत्तर मध्यकाल : 12 वीं -18 वीं शताब्दी ईस्वी

राजपूत काल (647 ईस्वी -1200 ईस्वी)

  • हर्ष की मृत्यु से 12 वीं सदी तक ,भारत के अधिकांश भागों पर राजपूतों का शासन हो गया था |
  • ये प्राचीन क्षत्रिय वंशों से थे |
  • ये विदेशी थे (हालाँकि यह विवादास्पद विषय है)

विभिन्न शासक

नागभट्ट प्रथम (725-740 ईस्वी)

  • ये प्रतिहार साम्राज्य के संस्थापक थे एवं कन्नौज इनकी राजधानी थी |

वत्सराज और नागभट्ट द्वितीय

  • साम्राज्य को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई |

पाल राजवंश

  • गोपाल (765-769 ईस्वी)
  • पाल राजवंश के संस्थापक और व्यवस्थित शासन करने वाले |
  • इन्होने उत्तरी और पूर्वी भारत पर शासन किया |
  • इन्होने पाल राजवंश का विस्तार किया और मगध पर अपना प्रभुत्व कायम किया |

धर्मपाल (769-815 ईस्वी)

  • ये गोपाल के पुत्र थे एवं अपने पिता के उत्तराधिकारी थे |
  • इन्होने बंगाल, बिहार, और कन्नौज को अपने नियंत्रण में ले लिया।

कन्नौज ही क्यों ?

  • कन्नौज सामरिक दृष्टी से उपयुक्त स्थान पर था यह गंगा व्यापार मार्ग और रेशम मार्ग पर स्थित था |
  • यह उत्तर भारत के हर्षवर्धन  साम्राज्य की भी राजधानी थी |

The Chauhans of Delhi and Ajmer

  • The Chauhans declared their independence in the 1101 century at Ajmer and they were the feudatories of the Pratiharas.
  • They captured Ujjain from the Paramaras of Malwa and Delhi in the early part of the 12th century.
  • They shifted their capital to Delhi.

The Paramaras of Malwa

  • The Paramaras were also the feudatories of Pratiharas.
  • They declared their independence in the 10th century and Dhara was their capital.

Raja Bhoja (1018-1069)

  • He was the most famous ruler of this period.
  • He constructed a beautiful lake more than 250 sq. miles near Bhopal.
  • He set up a college at Dhara for the study of Sanskrit Literature.

Prithviraj Chauhan (1178-1192)

  • He ruled over Delhi and Agra and fought the two important battles, First battle of Tarain (1191) between Prithviraj Chauhan and Muhammad Ghori, in which Ghori was defeated.
  • Second Battle of Tarain was fought in 1192 when Muhammad ghori again invaded India in which Prithviraj Chauhan was defeated and Kingdom of Delhi fell to Muhammad Ghori.

Art and Architecture

  • Mural paintings and Miniature paintings were popular.
  • Temples at Khajuraho
  • Lingaraja Temple at Bhubaneshwar

Major Causes of decline of Rajput Power

  • Lack of unity and foresightedness
  • Defective military organization

चौहान (दिल्ली और अजमेर )

  • चौहानों ने अजमेर में 1101 ईस्वी में स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दिया ये प्रतिहारों के सामंती थी |
  • इन्होने 12 वीं शताब्दी के आरम्भ में दिल्ली और मालवा के परमारों से उज्जैन छीन लिया |
  • इन्होने दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया |

परमार (मालवा)

  • परमार प्रतिहारों के सामंती थे |
  • इन्होने 10 वीं शताब्दी में स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दिया एवं धार को अपनी राजधानी बनाया |

राजा भोज ((1018-1069 ईस्वी )

  • ये अपने समय के प्रसिद्ध शासक थे |
  • इन्होने  भोपाल के निकट 250 वर्ग मीटर से भी अधिक लम्बी सुंदर झील का निर्माण करवाया |
  • इन्होने संस्कृत साहित्य के अध्ययन के लिए धार में एक महाविद्यालय की स्थापना की |

पृथ्वीराज चौहान (1178-1192 ईस्वी )

  • इन्होने दिल्ली और आगरा पर शासन किया एवं दो महत्वपूर्ण युद्ध लड़े |पहला युद्ध तेहरान (1191) का था जो मुहमद गौरी और पृथ्वी राज चौहान के बीच हुआ, यह युद्ध गौरी हार गया |
  • तेहरान का दूसरा युद्ध 1192 में हुआ जिसमे गौरी ने भारत पर आक्रमण किया, यह युद्ध पृथ्वीराज चौहान हार गए एवं गौरी ने दिल्ली पर कब्ज़ा कर लिया |

कला और वास्तुकला

  • इस काल में भित्ति चित्र और लघु चित्र लोकप्रिय थे।
  • खजुराहो के मंदिर
  • भुवनेश्वर में लिंगराज मंदिर

राजपूतों के पतन का कारण

  • एकता और दूरदृष्टि का अभाव
  • दोषपूर्ण सैन्य संगठन

The Chola Empire

The decline of the Pallavas in the 9th century  created a political vacuum which was filled by the Cholas.

Capital: Tanjore

Vijayalaya Chola (846-907 AD):

  • He was a vassal of the Pallavas.
  • Founder of Chola Dynasty
  • Built Durga Temple at Tanjore
  • He captured Tanjore from the Pandyas and made it the capital of the Cholas.

Raja Raja Chola I (907-1014 AD):

  • Orchestrated the resurgence of the Cholas.
  • He defeated the Pandyas and the Cheras.
  • In 993 AD when Cheras sought support from the Sri Lankan rulers, the Cholas captured the northern portion of Sri Lanka and the capital-Anuradhapura was captured and they also raided another capital Polonnaruwa.
  • Northern Sri Lanka was organized in the form of a province.

Chola Administration

King:  

  • was the most important person in the Chola administration.
  • All authority rested in his hands. He often went on tours in order to keep better touch with the administration.
  • The king was aided and advised by a council of ministers who held office at the pleasure of the king.

Revenue Administration:

  • The Cholas paid attention to irrigation and used river such as Kaveri for this purpose.

चोल साम्राज्य

9 वीं शताब्दी में पल्लवों के पतन के बाद एक राजनीतिक रिक्ति पैदा हो गई जो चोल शासकों द्वारा भरी गई राजधानी : तंजावुर

विजयालय चोल (846- 907 ईस्वी)

  • ये पल्लवों के जागीरदार थे |
  • इन्होने चोल साम्राज्य की स्थापना की |
  • तंजावुर में दुर्गा माता का मंदिर बनवाया |
  • इन्होने तंजावुर को पांड्यन से छीन कर इसे चोल साम्राज्य की राजधानी बनाया |

राजाराज चोल  प्रथम (907-1014 ईस्वी):

  • इन्होने चोल राजवंश को गुमनामी के अँधेरे से निकाला |
  • इन्होने पांड्यन और चेरों को हराया |
  • 993 ईस्वी में जब चेर शासक श्रीलंका से समर्थन मांगने लगे तो चोल शासकों ने श्रीलंका के उत्तरी भाग एवं राजधानी अनुराधापुर पर कब्जा कर लिया उन्होंने अन्य राजधानी  पोलोननरुवा पर भी धावा बोल दिया |
  • उत्तरी श्रीलंका को एक प्रांत के रूप में व्यवस्थित किया गया |

चोल प्रशासन

शासक (राजा):

  • शासक चोल प्रशासन में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखते थे |
  • सभी अधिकार राजा के हाथ में थे |प्रशासन के साथ बेहतर संपर्क बनाए रखने के लिए राजा अकसर अपने राज्य का भर्मण करता था |
  • राजा अपने निर्णयों के लिए एक मंत्री परिषद बुलाता था, जिसमे वह सलाह-मशविरा करता था , यह परिषद राजा की इच्छा के अनुसार कभी भी बुलाई जा सकती थी |

राजस्व प्रशासन:

  • चोलों ने सिंचाई को प्रमुखता दी एवं इस उद्देश्य के लिए उन्होंने कावेरी जैसी नदी का उपयोग किया |

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