History Study Material – IAS | UPSC | HCS | RAS Exam Preparation | 2018

History Study Material – IAS | UPSC | HCS | RAS Exam Preparation | 2018

History Study Material – IAS | UPSC | HCS | RAS Exam Preparation | 2018

History Study Material – IAS | UPSC | HCS | RAS Exam Preparation | 2018

History Study Material – IAS | UPSC | HCS | RAS Exam Preparation | 2018

World from 1919 to World War II

Nationalist movements in Asia and Africa

  • The period following the First World War saw the strengthening of the movements of the peoples of Asia and Africa for independence.
  • Many leaders of freedom movements in Asia and Africa had supported the war effort of the Allies in the hope that their countries would win freedom, or at least more rights after war was over.

India:

  • In India this was the period when the freedom movement became a mass movement under the leadership of Mahatma Gandhi.

Afghanistan:

  • The British government had waged many wars against Afghanistan in the nineteenth century.

Arab Countries:

  • There was an upsurge in Arab countries against Britain and France.
  • The had been asked by the Allies, during the First World War, to fight against their Ottoman rulers.
  • However, the end of the war did not result in the independence of Arab countries.
  • These countries had assumed additional importance after it was known that they had immense oil resources.

Turkey and Khilafat movement:

  • One of the most important events in the national awakening of the peoples after the First World War was the revolution in Turkey.
  • The disintegration of the Ottoman empire began in the nineteenth century and was completed after Turkey’s defeat in the First World War.
  • During this period, many nations which were formerly under the subjugation of the Ottoman empire had become free.

History Study Material

एशिया तथा अफ्रीका में राष्ट्रवादी आंदोलन :

  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद की इस अवधि में एशिया तथा अफ्रीका के लोगों के स्वतंत्रता आंदोलनों में मज़बूती देखी गयी |
  • एशिया तथा अफ्रीका के स्वतंत्रता संग्राम के कई नेताओं ने इस उम्मीद में  मित्र राष्ट्रों के द्वारा युद्ध के प्रयासों का समर्थन किया था कि युद्ध की समाप्ति के बाद उनके देशों को स्वतंत्रता मिल जाएगी या कम से कम उन्हें अधिक अधिकार मिल जायेंगे |

भारत :

  • भारत में यह अवधि वह अवधि थी जब स्वतंत्रता आंदोलन महात्मा गाँधी के नेतृत्व में  एक जन आंदोलन बन चुका था |

अफ़गानिस्तान :

  • उन्नीसवीं शताब्दी में ब्रितानी हुकुमत ने अफ़ग़ानिस्तान के विरुद्ध कई युद्ध छेड़ दिए थे |

अरब देश :

  • अरब देशों में ब्रिटेन तथा फ्रांस के विरुद्ध रोष था |
  • अरब देशवासियों से मित्र राष्ट्रों द्वारा ऑटोमन शासकों के विरुद्ध लड़ने को कहा गया था |
  • हालाँकि, युद्ध का अंत अरब देशों के लिए स्वतंत्रता का परिणाम लेकर नहीं आया |
  • यह जानने के बाद कि इन देशों में इन देशों में अत्यधिक तेल संसाधन है, इन देशों को अतिरिक्त महत्व दिया जाने लगा |

तुर्की तथा खिलाफ़त आंदोलन :

  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद लोगों की राष्ट्रीय जागृति की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक तुर्की में हुई  क्रांति थी।
  • ऑटोमन साम्राज्य का विघटन उन्नीसवीं शताब्दी में शुरू हुआ तथा प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की की हार के साथ ही यह पूर्ण हो गया |
  • इस अवधि के दौरान कई राष्ट्र जो पूर्व में ऑटोमन साम्राज्य के अधीन थे, स्वतंत्र हो गए |

Nationalist movements in Asia and Africa

China:

  • One of the most powerful movements in this period began in China.
  • In 1911, there was a revolution in China which resulted in the establishment of a republic.
  • However, power passed into the hands of corrupt governors called warlords.
  • The national movement in China aimed at the overthrow of foreign domination and the unification of China by ending the rule of the warlords.

Africa:

  • This period also saw the emergence of political and national consciousness in Africa.
  • Though the struggles for national independence in Africa gained momentum after the Second World War, the 1920s and the 1930s were a period when the first political associations were formed.

Beginning of Fascist aggression:

  • In the 1930s the fascist powers began their wars of conquest which ultimately led to the Second World War.
  • The major fascist countries were Italy and Germany.
  • They acquired an ally in the militarist regime which came to power in Japan.
  • These three countries started series of aggressions in Europe, Asia and Africa.
  • All of them claimed to have been fighting against communism and were united in 1937 under the Anti Comintern Pact. (Comintern is short for Communist International)
  • It also created a worldwide awareness of the danger that fascism posed to all countries and helped in building support for the victims of fascist aggression.
  • The leader of the Comintern at this time was Georgi Dimitrov, a Bulgarian Communist, who had been arrested along with German Communists, by the Nazis in 1933 after the Reichstag fire.
  • His courageous defence at the trial had won him worldwide admiration and he had been released.
  • Hitler had time and again declared that Germany had ambitions of conquering the vast   resources and territory of the Soviet Union.
  • Since the success of the Russian Revolution, the Western countries had been haunted by the danger of communism and they hoped that fascist countries would rid them of this danger.

एशिया तथा अफ्रीका में राष्ट्रवादी आंदोलन

चीन :

  • इस अवधि के सबसे शक्तिशाली आंदोलनों में से एक आन्दोलन चीन में शुरू हुआ |
  • 1911 में, चीन में एक क्रांति हुई जिसके परिणामस्वरूप वहां गणतंत्र की स्थापना हुई |
  • लेकिन, शक्तियाँ भ्रष्ट गवर्नरों के पास चली गयी जिन्हें वॉरलॉर्ड कहा जाता था |
  • चीन में राष्ट्रीय आन्दोलन का लक्ष्य विदेशी प्रभुत्व को समाप्त करना था तथा वॉरलॉर्ड्स के शासन का अंत करके चीन का एकीकरण करना था |

अफ्रीका :

  • इस अवधि में अफ्रीका में भी राजनीतिक एवं राष्ट्रीय जागृति देखी गयी |
  • हालाँकि अफ्रीका में स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्षों को गति द्वितीय विश्व युद्ध के बाद मिली, किंतु 1920 एवं 1930 का दशक वह समय था जब वहां राजनीतिक संगठनों का गठन हुआ |

फासीवादी आक्रमण की शुरुआत :

  • 1930 के दशक में, फासीवादी ताकतों ने देश विजय के उनके युद्ध को  शुरू कर दिया जो अंततः द्वितीय विश्व युद्ध की वजह बना |
  • इटली तथा जर्मनी प्रमुख फ़ासीवादी देश थे |
  • उन्हें जापान की सत्ता में आये सैन्यवादी शासन के रूप में एक सहयोगी प्राप्त हो गया |
  • इन तीन देशों ने यूरोप, एशिया तथा अफ्रीका में आक्रमणों की एक श्रृंखला की शुरुआत कर दी |
  • इन सभी ने दावा किया कि ये साम्यवाद के खिलाफ मुकाबला कर रहे हैं तथा ये तीनों कोमिंटर्न विरोधी संधि के तहत एकजुट हैं | (कोमिंटर्न शब्द कम्युनिस्ट इंटरनेशनल का संक्षिप्त रूप है )
  • इसने फासीवाद द्वारा सभी देशों पर उत्पन्न किये गए ख़तरे के प्रति विश्वव्यापी जागरूकता का निर्माण भी किया तथा यह नीति फासीवादी आक्रमण के पीड़ितों को सहारा दिलवाने में भी सहायक रही |
  • इस समय कोमिंटर्न के नेता एक बुल्गारियाई साम्यवादी  जॉर्जी दिमित्रोव थे, जिन्हें नाज़ियों के द्वारा राइश्टाग आग की घटना के बाद  जर्मन साम्यवादियों के साथ ही गिरफ़्तार कर लिया गया था |
  • सुनवाई में अपने साहसिक प्रतिवाद से उन्होंने पूरे विश्व की प्रशंसा को जीत लिया तथा उन्हें रिहा कर दिया गया |
  • हिटलर ने कई बार यह घोषणा की थी कि जर्मनी की महत्वाकांक्षा सोवियत संघ के विशाल प्रदेश तथा संसाधनों पर विजय प्राप्त करने की है |
  • रुसी क्रांति की सफलता के बाद से ही , पश्चिमी देश साम्यवाद के ख़तरे से भयभीत थे तथा उन्हें उम्मीद थी कि फ़ासीवादी देश उन्हें इस ख़तरे से मुक्ति दिला देंगे |

Nationalist movements in Asia and Africa

Japanese Invasion of China

  • One of the first major acts of aggression after the First World War was the Japanese invasion of China in 1931.
  • China, a member of the League of Nations, appealed to the League for sanctions against Japan to stop the aggression.
  • However, Britain and France, the leading countries in the League, were completely indifferent to the appeal and acquiesced in the aggression.

German militarization:

  • Germany had been admitted to the League of Nations some time after its formation but soon after Hitler came to power, she quit the League and undertook a massive programme of militarization.
  • According to the Treaty of Versailles, severe restrictions had been imposed on the military strength of Germany.
  • The beginning of German remilitarization in violation of the Treaty created a sense of insecurity in many countries, particularly France.

Italian Invasion of Ethiopia

  • In 1935, Italy invaded Ethiopia
  • On the appeal of Ethiopia, the League of Nations passed a resolution condemning Italy as an aggressor.

The Munich Pact:

  • While the Spanish Civil War was still going on, Hitler’s troops marched into Austria in March 1938 and occupied it.
  • Even though this was a violation of the peace treaties signed after the First World War, the Western powers did not protest against it.
  • The final act of appeasement of fascism by the Western powers was the Munich Pact.

एशिया तथा अफ्रीका में राष्ट्रवादी आंदोलन

चीन पर जापानी आक्रमण :

  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद प्रमुख आक्रामक कृत्यों में से एक कृत्य जापान द्वारा 1931 में चीन पर किया गया आक्रमण था |
  • चीन, जो राष्ट्र संघ का एक सदस्य था, ने संघ से जापान के विरुद्ध प्रतिबंधों की अपील की ताकि इस आक्रमण को रोका जा सके |
  • हालाँकि, ब्रिटेन तथा फ्रांस, जो संघ के अग्रणी देश थे, इस अपील के प्रति पूरी तरह उदासीन बने  रहे एवं इस आक्रमण को चुपचाप स्वीकार कर लिया |

जर्मन सैन्यीकरण :

  • जर्मनी को  राष्ट्रसंघ के निर्माण के कुछ समय बाद राष्टसंघ में शामिल किया गया था किंतु हिटलर के सत्ता में आने के बाद शीघ्र ही, उसने संघ छोड़ दिया तथा सैन्यीकरण के एक व्यापक कार्यक्रम की शुरुआत की |
  • वर्साय की संधि के अंतर्गत जर्मनी की सैन्य ताकत पर कठोर प्रतिबंध लगाए गए थे |  
  • संधि का उल्लंघन करके जर्मनी द्वारा सैन्यीकरण की पुनः शुरुआत ने कई देशों में, विशेष रूप से फ्रांस में,  असुरक्षा की भावना को जन्म दिया |

इथियोपिया पर इतालवी आक्रमण :

  • 1935 में इटली ने इथियोपिया पर आक्रमण कर दिया |
  • इथियोपिया की अपील पर राष्ट्रसंघ ने एक आक्रामक के रूप में इटली की निंदा का प्रस्ताव पारित किया |

म्यूनिख समझौता :

  • जब स्पेन का गृह युद्ध चल ही रहा था, तभी हिटलर के सैनिक मार्च 1938 में ऑस्ट्रिया में घुस आये तथा इसपर कब्ज़ा कर लिया |
  • भले ही यह घटना प्रथम विश्व युद्ध के बाद हस्ताक्षरित शांति संधियों का उल्लंघन थी, लेकिन फिर भी पश्चिमी ताकतों ने इसका विरोध नहीं किया|
  • पश्चिमी ताकतों द्वारा फासीवाद के तुष्टिकरण का किया गया अंतिम कार्य म्यूनिख समझौता था |

Join Frontier IAS Online Coaching Center to prepare for UPSC/HCS/RAS Civil Service comfortably at your home at your own pace/time.

HCS(Prelims+Mains+Interview)   HCS Prelims(Paper 1+Paper 2)

IAS+HCS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    

  RAS+IAS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    RAS(Prelims+Mains+Interview)     RAS Prelims     UPSC IAS Prelims      UPSC  IAS (Prelims+Mains+Interview)

Click Here to subscribe Our YouTube Channel

 

 

No Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!