HCS Study Material for (Prelims+Mains+Interview)- Frontier IAS

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Gandhi Irwin Pact and Government of India Act

First round table conference (November 1930- January 1931)

  • First ever conference arranged between the British and the Indians as equals.
  • Boycotted by: Congress and most business leaders
  • Attended by: Musim League, the Hindu Mahasabha, the Liberals and princes.

Gandhi-Irwin pact

  • On January 25, 1931 Gandhi and all other members of the CWC were released unconditionally.
  • As a result of these discussions, a pact was signed between the viceroy, representing the British Indian Government, and Gandhi, representing the Indian people, in Delhi on February 14, 1931.

Evaluation of Civil Disobedience movement

  • Was Gandhi-Irwin Pact a Retreat?
  • Gandhi’s decision to suspend the civil disobedience movement as agreed under the Gandhi-Irwin Pact was, not a retreat, because:
  • Mass movements are necessarily short-lived
  • Capacity of the masses to make sacrifices, unlike that of the activists, is limited

Compared to Non-Cooperation Movement

  • The stated objective this time was complete independence and not just remedying two specific wrongs and a vaguely-worded swaraj.
  • The methods involved violation of law from the very beginning and not just non-cooperation with foreign rule.
  • There was a decline in forms of protests involving the intelligentsia, such as lawyers giving up practice, students giving up government schools to join national schools and colleges.
  • Muslim participation was nowhere near the Non Cooperation Movement level.

Karachi Congress Session 1931

  • In March 1931, a special session of the Congress was held at Karachi to endorse the Gandhi-Irwin or Delhi Pact.
  • Six days before the session Bhagat Singh, Sukhdev and Rajguru had been executed.

The resolution on National Economic Programme included:

  • Substantial reduction in rent and revenue
  • Exemption from rent for uneconomic holdings
  • Relief from agricultural indebtedness
  • Control of usury

HCS Study Material

प्रथम गोलमेज सम्मलेन (नवम्बर 1930-जनवरी 1931)

  • ब्रिटिश सरकार व भारतीयों के बीच बिना किसी असमानता के आयोजित पहली वार्ता  |
  • कांग्रेस एवं अन्य व्यवसायिक  संगठनों ने इसका बहिष्कार किया  
  • मुस्लिम लीग, हिन्दू महासभा, उदारवादी व भारतीय रजवाड़े इसके समर्थन में आये|

गाँधी-इरविन समझौता

  • 25 जनवरी, 1931 को गाँधी व कांग्रेस के अन्य सभी सदस्यों को बिना किसी शर्त के रिहा कर दिया गया
  • इन चर्चाओं के परिणामस्वरूप ब्रिटिश भारतीय सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वायसराय व भारतीय जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले गाँधी के बीच एक समझौता 14 फरवरी, 1931 को दिल्ली में किया गया |

सविनय अवज्ञा आन्दोलन का मूल्यांकन  

  • क्या गाँधी-इरविन समझौता अपने उद्देश्यों से पीछे हट गया ?
  • सविनय अवज्ञा आन्दोलन को स्थगित करने का गाँधी का निर्णय गाँधी-इरविन समझौते के तहत एक शर्त थी, पलायन नहीं, क्योंकि :-
  • किसी भी जन आन्दोलन के लिए आवश्यक है कि उसका कार्यकाल छोटा हो अर्थात उसे ज्यादा लम्बा न खींचा जाये   |
  • कार्यकर्ताओं के विपरीत जनता की त्याग की क्षमता सीमित होती है |

असहयोग आन्दोलन से तुलना

  • इस आन्दोलन ने पूर्ण स्वतंत्रता को अपना मुख्य लक्ष्य घोषित किया जबकि असहयोग आन्दोलन का लक्ष्य स्वराज्य था |
  • इसके तरीके अब सिर्फ विदेशी शासन के साथ असहयोग तक सीमित नहीं थे, बल्कि शुरू से ही कानूनों को तोड़ना इसके तरीकों में शामिल था |
  • बुद्धिजीवियों से जुड़े प्रदर्शनों में गिरावट आई थी, जैसे कि वकीलों का अभ्यास छोड़ना, विद्यार्धियों का सरकारी विद्यालयों को त्याग कर राष्ट्रीय विद्यालय व महाविद्यालयों में जाना आदि  |
  • इस आन्दोलन में असहयोग आन्दोलन की भाँती  मुस्लिम भागीदारी नहीं थी |

कांग्रेस का कराची सत्र 1931

  • गाँधी-इरविन या दिल्ली समझौते का समर्थन करने के लिए कांग्रेस के एक विशेष सत्र का आयोजन कराची में मार्च 1931 में किया गया |
  • सत्र के छह दिन पहले भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी गई |

मूल अधिकार संकल्प ने निम्नलिखित को निश्चित किया :

  • स्वतंत्र अभिव्यक्ति व स्वतंत्र प्रेस
  • संगठन  बनाने का अधिकार
  • सभा एवं सम्मेलन करने  का अधिकार
  • सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार

2nd Civil Disobedience movement

Second RTC and Second Civil Disobedience movement

  • Held in London in December 1931.
  • Attended by Congress
  • The session soon got deadlocked on the question of the minorities.

Changed Government Attitude

There were three main considerations in British policy:

  • Gandhi would not be permitted to build up the tempo for a mass movement again.
  • Goodwill of the Congress was not required, but the confidence of those who supported the British against the Congress-government functionaries, loyalists, etc.—was very essential.

Government Action

  • A series of repressive ordinances were issued which ushered in a virtual martial law, though under civilian control, or a “Civil Martial Law”.
  • Congress organisations at all levels were banned; arrests were made of activists, leaders, sympathisers; properties were confiscated; Gandhi ashrams were occupied.
  • Repression was particularly harsh on women.

Communal award and Poona Pact:

  • Announced by the British Prime Minister, Ramsay MacDonald, in August 1932.
  • This was yet another expression of British policy of divide and rule.
  • The Muslims, Sikhs and Christians had already been recognised as minorities.

सविनय अवज्ञा आन्दोलन का दूसरा चरण

द्वितीय गोलमेज सम्मलेन व सविनय अवज्ञा आन्दोलन का दूसरा चरण

  • 1931 में लन्दन में आयोजित |
  • कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में गांधी ने भाग लिया
  • अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर सत्र का समापन तुरंत हो गया |

सरकार का परिवर्तित रूप  

ब्रिटिश रणनीति  में तीन मुख्य प्रावधान  थे :

  • गांधी को पुन: कोई जन आन्दोलन आरम्भ करने की अनुमति नही दी जाएगी   |
  • कांग्रेस की सद्भावना आवश्यक नहीं है| अपितु इसके स्थान पर उन लोगों का सहयोग एवं समर्थन अति आवश्यक है जिन्होंने कांग्रेस के विरुद्ध हुकुमत का साथ दिया है |

सरकारी प्रतिक्रिया

  • प्रशासन को असीमित तथा मनमानी शक्तियाँ देने वाले अनेक अध्यादेश जारी किये गए तथा नागरिक सैनिक कानून की शुरुआत हो गई | |
  • सभी स्तरों पर कांग्रेस के संगठनों पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया ; कार्यकर्ताओं, नेताओं, समर्थकों को गिरफ्तार किया गया ; संपत्तियों को जब्त कर लिया गया ; गाँधी के आश्रमों पर कब्ज़ा कर लिया गया |
  • महिलाओं पर दमन विशेष रूप से कठोर था |

सांप्रदायिक निर्णय  व पूना समझौता :

  • ब्रिटिश प्रधानमंत्री रेम्से मेक्डोनाल्ड ने अगस्त 1932 में इस सांप्रदायिक निर्णय की घोषणा की |
  • फूट डालो  और राज करो की ब्रिटिश नीति का यह एक और प्रमाण  था |
  • मुस्लिम, सिखों व ईसाईयों को अल्पसंख्यकों का दर्जा पहले ही मिल गया था |

Government of India Act, 1935

Main Features

An All India Federation

  • It was to comprise all British Indian provinces, all chief commissioners provinces and Indian states.
  • The federation’s formation was conditional on the fulfilment of two conditions:
  • States with allotment of 52 seats in the proposed Council of States should agree to join the federation;

Federal Level Executive

  • Governor-general was the pivot of the entire Constitution.
  • Subjects to be administered were divided into reserved and transferred subjects.
  • Reserved subject like foreign affairs, defence, tribal areas and ecclesiastical affairs were to be exclusively administered by the governor-general on the advice of executive councillors.

Provincial Autonomy

  • Replaced dyarchy.
  • Provinces were granted autonomy and separate legal identity.
  • Provinces derived their legal authority directly from the British Crown.
  • Provinces were given independent financial powers and resources.

Legislature

  • Separate electorates based on Communal Award were to be made operational.
  • All members were to be directly elected. Women got the right on the same basis as men.

भारत सरकार अधिनियम, 1935

मुख्य विशेषताएं

एक अखिल भारतीय संघ

  • इस अधिनियम के अनुसार,प्रस्तावित संघ में सभी ब्रिटिश भारतीय प्रान्तों का सम्मिलित होना अनिवार्य था |  |
  • संघ निर्माण के लिए दो शर्तें थी:-
  • जिन राज्यों को प्रस्तावित राज्य परिषद् में 52 सीटें आवंटित की गई थी, उन्हें संघ में शामिल होगा  :

संघीय व्यवस्था कार्यपालिका  

  • गवर्नर-जनरल केंद्र में सम्पूर्ण संविधान की धुरी था
  • प्रशासित होने वाले विषयों को सुरक्षित  व हस्तांतरित विषयों में विभाजित किया गया था |
  • सुरक्षित विषय जैसे कि विदेशी मुद्दे, रक्षा, आदिवासी क्षेत्र व चर्च सम्बन्धी मामलों का सञ्चालन कार्यकारी परिषदों की सलाह पर गवर्नर-जनरल द्वारा किया जाना था |

प्रांतीय स्वायत्तता

  • द्विशासन प्रणाली की जगह ले ली  |
  • प्रान्तों को स्वायत्तता व पृथक विधिक पहचान बनाने का अधिकार दिया गया
  • प्रान्तों को भारत सचिव एवं गर्वनर जनरल के आलाकमान वाले आदेशों से मुक्त कर दिया गया |
  • प्रान्तों को स्वतंत्र वित्तीय शक्तियां व संसाधन प्रदान किये गए |

विधायिका

  • सांप्रदायिक पंचाट पर आधारित पृथक निर्वाचक मंडलों को कार्यान्वयित किया जाना था |
  • सभी सदस्यों को प्रत्यक्षतः निर्वाचित किया जाना था | महिलाओं को पुरुषों के समान मताधिकार प्रदान किये गए   

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