HCS Sociology Study Notes | Topic Sociological Thinkers | HCS 2018 Exam

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Karl Marx – Social & Intellectual Background:-

Social and intellectual background of Karl Marx (1818 – 1883):

  • Karl Marx’s life coincided with the beginning of a change in the European countries from agrarian to industrial societies. Marx obtained most of his basic empirical data for his theory of development of capitalism from England.
  • The intellectual background for Marx’s theories involved progress of Germany to match more developed countries and this debate was carried out by G.W.F. Hegel.
  • Hegel tried to show that human history had a goal – creation of a reasonable state and the realization of the concept of freedom. Marx was influenced by Hegel’s historical method in which development and change through dialectic contradictions are the primary components. He rejected Hegel’s emphasis on spiritual forces in history and criticized belief of young Hegelian movement (of which he was a part for sometime) that philosophical analysis would lead to change in and liberation of Germany. He stressed human social conditions, specifically their material production important to historical development.
  • Marx was inspired from French Socialist tradition that arose during French Revolution of 1789 and continued till the revolutions of 1830 and 1848. This tradition aimed at arising a new and more radical revolution of 1789 in which the new class, the industrial workers or proletariat would take power and abolish all classes. Some reform oriented socialists (“utopian socialists”) like Saint Simon, Charles Fourier wanted to build a socialist society through state reforms or by creating small local societies in which division of labour was abolished and people lived in harmony. Marx incorporated some of their criticism of the modern capitalist industrial society into his own theories.
  • Marx was also influenced by British Economists Adam Smith, David Ricardo who had analysed the new capitalist market economy. Marx took up their labour theory of value – value of commodity is determined by the quantity of work put into it. Marx objected to the Ricardian socialists (demonstrated injustice of a system in which workers created all value but received only part of it for themselves) and in his ‘theory of surplus’ tried to explain why the workers only received a part of the value they created.

कार्ल मार्क्स – सामाजिक व बौद्धिक पृष्ठभूमि:-

कार्ल मार्क्स की सामाजिक व बौद्धिक पृष्ठभूमि (1818 – 1883) :

  • कार्ल मार्क्स के जीवन में बदलाव की शुरुआत यूरोपीय देशों में कृषि से औद्योगिक समाजों में बदलाव की शुरुआत के साथ हुई | मार्क्स को अपने पूंजीवादी के सिद्धांत के लिए मूल अनुभवजन्य जानकारी इंग्लैंड से प्राप्त हुई |
  • मार्क्स के सिद्धांतों के बौद्धिक पृष्ठभूमि ने जर्मनी के प्रगति को शामिल किया ताकि अधिक विकसित देशों से बराबरी हो और इसे वाद का रूप जी. डबल्यू. एफ. हेगल ने दिया |
  • हेगल ने यह दिखाने की कोशिश की कि मानव इतिहास के पास एक लक्ष्य था – एक उचित राष्ट्र का निर्माण और आजादी के धारणा का एहसास | मार्क्स हेगल की एतिहासिक प्रणाली से प्रभावित थे जिसमें द्वंदात्मक विरोधाभासों द्वारा परिवर्तन व विकास प्राथमिक घटक हैं | उन्होंने इतिहास में आध्यात्मिक तत्वों पर जोर देने के हेगल के सिद्धांत को नकारा और युवा हेगलवादी आन्दोलन (जिसके वे स्वयं ही कभी हिस्सा थे) के विश्वास की आलोचना की कि दार्शनिक विश्लेषण से जर्मनी में परिवर्तन आएगा और जर्मनी को मुक्ति मिलेगी | उन्होंने मानव सामाजिक परिस्थितियों पर अधिक जोर दिया खासकर ऐतिहासिक विकास में उनके महत्वपूर्ण भौतिक उत्पादन पर |
  • मार्क्स फ़्रांसिसी समाजवादी परंपरा से प्रेरित थे जो 1789 के फ़्रांसिसी क्रांति से शुरू हुआ और 1830 व 1848 के क्रांतियों तक जारी रहा | इस परंपरा का लक्ष्य एक नया और अधिक कट्टरवादी 1789 के क्रांति को जन्म देना था जिसमें एक नया वर्ग, औद्योगिक श्रमिक या श्रमजीवी  वर्ग समस्त शक्ति को रखेंगे और सभी वर्गों को समाप्त करेंगे | कुछ सुधार उन्मुख समाजवादी (“अव्यवहार्य मायविचारक समाजवादी”) जैसे संत साइमन, चार्ल्स फौरिएर राष्ट्र सुधारों द्वारा या छोटे स्थानीय समाजों के निर्माण द्वारा एक समाजवादी समाज बनाना चाहते थे जिसमें श्रम विभाजन समाप्त कर दिया गया और लोग सौहाद्रपूर्ण तरीके से रहते थे | मार्क्स ने अपने स्वयं के सिद्धांतों में आधुनिक पूंजीवादी औद्योगिक समाज के उनकी कुछ समीक्षाओं का निगमन किया |
  • मार्क्स एडम स्मिथ, डेविड रिकार्डो जैसे ब्रिटिश अर्थशास्त्रियों से प्रभावित थे, जिन्होंने नए पूंजीवादी बाजार अर्थव्यवस्था को विश्लेषित किया | मार्क्स ने उनके महत्त्व के श्रम सिद्धांत को अपनाया – जिसमें यह कहा गया कि किसी वस्तु का महत्त्व उसमें लगाए गए कार्य के परिमाण से निर्धारित होती है | मार्क्स ने रिकार्डोवादी समाजवादियों पर आपत्ति जताई ( एक प्रणाली में अन्याय को प्रदर्शित किया जिसमें यह बताया कि समस्त महत्त्व का निर्माण तो श्रमिक करते हैं लेकिन उन्हें अपने लिए इसका एक हिस्सा मात्र प्राप्त होता है ) और अपने ‘अधिशेष के सिद्धांत’ में उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि क्यों श्रमिकों को उस महत्त्व का एक हिस्सा मिला जिसका निर्माण उन्होंने किया |

HCS Sociology Study Notes
Hegel – Idealism:-

  • According to Hegel, the ultimate purpose of human existence was to express the highest form of human Geist or ‘Spirit’. This Spirit was not a physical or material entity but an abstract expression of the moral and ethical qualities and capacities, the highest cultural ideals were the ultimate expression of what it is to be a human being. For Hegel, material life was the practical means through which this quest for the ultimate realisation of human consciousness, the search for a really truthful awareness of reality, could be expressed.
  • For rationalists, human knowledge and understanding are more about what goes on inside our minds than outside of them. For Hegel, reason and thought are not simply part of reality, they are reality. Therefore, the laws and principles that govern human thought must also be the laws and principles that govern the whole of reality.
  • Hegel suggested that the minds of all human beings are essentially the same, we are all part of the same overarching consciousness.
  • According to Hegel, the process by which the quest for the ultimate truth is carried on involves a dialectical process in which one state of awareness about the nature of reality (thesis) is shown to be false by a further and higher state of awareness (antithesis) and is finally resolved in a final and true state of awareness (synthesis). Hegel uses this approach to suggest that the contradictions or imperfections of the family and of civil society (corresponding with thesis and antithesis) are finally resolved by the institutions of the state, which correspond with the new ethical synthesis.

हेगल – विचारवाद:-

  • हेगल के अनुसार, मानव अस्तित्व का आखिर प्रयोजन मानव आत्मा के उच्चतम रूप को व्यक्त करना था | आत्मा एक भौतिक या जिस्मानी इकाई नहीं थी बल्कि नैतिक व नीतिपरक गुणों व क्षमताओं का सार अभिव्यक्ति थी, एक मनुष्य होना का अर्थ क्या है यह सबसे बड़े सांस्कृतिक विचार ही परम अभिव्यक्ति थी | हेगल के लिए, जिस्मानी जीवन व्यावहारिक साधन था जिसके जरिये मानव चेतना के परम एहसास का यह रहस्य, सच्चाई के वास्तविक सच्ची जागरूकता की खोज को व्यक्त किया जा सकता था |
  • बुद्धिजीवियों के लिए, मानव ज्ञान और समझ वैसे ही है जैसे कि हमारे मन के बाहर होने से ज्यादा हमारे मन में जो भी होती हैं | हेगल के लिए, कारण और विचार वास्विकता के हिस्सा मात्र नहीं हैं, बल्कि वास्तविकता ही है | इसलिए, नियम व सिद्धांत जो मानव विचार को नियंत्रित करते हैं उन्हें वे नियम व सिद्धांत बनने चाहिए जो पूर्ण वास्तविकता को नियंत्रित करें |
  • हेगल ने यह सुझाया कि सभी मनुष्यों के मस्तिष्क अनिवार्यतः समान होते हैं, हम सब उसी व्यापक चेतना के सभी भाग है |
  • हेगल के अनुसार, वह प्रक्रिया, जिसके द्वारा परम सत्य की खोज की जाती है, में एक द्वंदात्मक प्रक्रिया शामिल होती है, जिसमें वास्तविकता की प्रकृति (थीसिस) के बारे में जागरूकता की एक अवस्था को जागरूकता की एक अधिक बड़ी अवस्था (प्रतिपक्ष) द्वारा गलत दिखाया जाता है और आखिरकार जागरूकता की एक अंतिम व सच्ची अवस्था (संकलन) में सुलझती है | हेगल इस दृष्टिकोण का प्रयोग यह सुझाव देने के लिए करते हैं कि नागरिक समाज व परिवार के विरोधाभास या अपूर्णता (थीसिस व प्रतिपक्ष से सम्बंधित) को राष्ट्र के संस्थानों द्वारा अंतिम में मिटाया जाता है, जो नए नैतिक संकलन के अनुरूप होते हैं |

Hegel’s Idea of Sublation:

  • This term was used by Hegel to describe the need social actors have to feel at ease with their understanding of reality and how they fit into it. Lack of sublation shows itself as a feeling of estrangement, of not fitting in, of being at odds with the world and being confused about the nature of reality.
  • Hegel felt that estrangement arose because uncertainty about the nature of reality ‘out there’ caused us to be uncertain about reality ‘in here’. The extent to which we do not understand the objective world around us is also the extent to which we are ignorant about our subjective inner nature.

Young Hegelians:

  • They proposed a counter-thesis of their own. They applied the thesis, antithesis and synthesis to Hegel’s own philosophical system.
  • Ludwig Feuerbach, argued that by subordinating the material world to the realm of consciousness and ideas, Hegel’s obsession with the coming of the great universal Spirit, was not in the least bit rational or objective in the scientific sense and was nothing more than a form of religious mysticism.
  • Rather than describing how social actors might overcome their sense of estrangement from material reality, Hegel said that it was not objective reality that was the problem but simply the inadequacy of social actors’ understanding of it.

हेगल की सब्लेषण का विचार :

  • हेगल द्वारा इस धब्द का प्रयोग यह दिखाने के लिए किया गया था कि सामाजिक कर्ताओं को वास्तविकता की उनकी समझ में आसानी से एहसास के जरूरत है और वे इसमें किस तरह शामिल है | सब्लेषण की कमी खुद को एक मनमुटाव के एहसास के रूप में दिखाती है, नहीं शामिल हो पाने के रूप में, दुनिया के साथ बाधाओं के रूप में और वास्तविकता के प्रकृति के बारे में संशय के रूप में दिखाती है |
  • हेगल ने महसूस किया कि मनमुटाव का जन्म इसलिए हुआ क्योंकि ‘बाहर के’ वास्तविकता के प्रकृति के बारे में अनिश्चितता ने ‘अन्दर के’ वास्तविकता के बारे में हम में अनिश्चितता फैला दी | बाहरी दुनिया के जिस सीमा तक हम नहीं जान पाते हैं अपने अन्दर के उसी हद तक व्यक्तिपरक प्रवृत्ति के बारे में हम अज्ञानी रहते हैं |

युवा हेगालियन :

  • उन्होंने स्वयं की एक काउंटर-थीसिस को प्रस्तावित किया | उन्होंने थीसिस, प्रतिपक्ष और संकलन को हेगल की खुद के दार्शनिक प्रणाली पर लागू किया |
  • लुडविग फ्युरबैच ने तर्क दिया कि विचारों और चेतना के दायरे तक भौतिक दुनिया को सीमित कर , विशाल सार्वभौमिक आत्मा का आगमन के साथ हेगल का जुनून, वैज्ञानिक तरीके से जरा सा भी तर्कसंगत या निष्पक्ष नहीं था और यह धार्मिक रहस्यवाद से ज्यादा कुछ नहीं था |
  • बजाय इसका वर्णन करने की कि कैसे सामाजिक कर्ता भौतिक वास्तविकता से मनमुटाव के उनके भावना से उबरे, हेगल ने कहा कि समस्या यह नहीं थी कि यह निष्पक्ष वास्तविकता नहीं थी लेकिन यह थी कि इसके समझ के लिए सामाजिक कर्ताओं की अपर्याप्तता |

Marx:

  • While giving Hegel, ‘that mighty thinker’, credit for developing a number of very important insights, Marx argued that he had not applied them correctly and therefore reached incomplete conclusions about true nature of real reality.
  • Marx’s social theory can be thought of as the new synthesis emerging out of collision of Hegel’s thesis and the Young Hegelians’ antithesis.

मार्क्स :

  • हेगल, ‘एक महान विचारक’, को बहुत सी महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि के विकास के लिए श्रेय देते समय, मार्क्स ने तर्क दिया कि उसने उनको सही रूप से नहीं लागू किया और इसलिए असली वास्तविकता के सत्य प्रवृत्ति के बारे में अपूर्ण निष्कर्षों पर पहुंचे |
  • मार्क्स की सामाजिक सिद्धांत को हेगल की थीसिस और युवा हेगालियनों के प्रतिपक्ष के टकराव से उत्पान हुए नए संकलन के रूप में देखा जा सकता है |

 

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