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Techniques of Data Collection –

Survey –

  • It is the most common type of quantitative research method in sociology.
  • Questionnaires and structured interviews are usually employed to collect data for a research known as the ‘social survey’.
  • Social surveys are divided into descriptive and analytical.
  • A descriptive survey aims to provide an accurate measurement of the distribution of certain characteristics in a given population.
  • Analytic surveys are designed to test hypotheses about the relationships between a number of factors or variables. They are concerned with discovering and explaining the relationships. It was used by Durkheim in his study of suicide which showed that Protestant societies had a higher rate of suicide than Catholic societies. Official statistics showed variations in suicide rate between European societies. He tried to eliminate other variations while studying the variations in suicide rates like differences in national culture, possibility of regional differences for variation in suicide rates.

सर्वेक्षण –

  • यह समाजशास्त्र में मात्रात्मक शोध पद्धति में सबसे सामान्य प्रकार है |
  • प्रश्नावली तथा संरचित साक्षात्कार आमतौर पर “सामाजिक सर्वेक्षण” के रूप में प्रसिद्ध अनुसंधान हेतु आंकड़े संगृहित करने के लिए नियोजित किये जाते हैं |
  • सामाजिक सर्वेक्षणों को विवरणात्मक तथा विश्लेषणात्मक में विभाजित किया जाता है |
  • एक विवरणात्मक सर्वेक्षण का उद्देश्य किसी जनसंख्या में विशिष्ट विशेषताओं के वितरण का एक सटीक माप प्रदान करना होता है।
  • विश्लेषणात्मक सर्वेक्षणों को कई कारकों या चरों के बीच संबंधों के बारे में अनुमानों का परीक्षण करने के लिए परिकल्पित किया गया है। वे संबंधों की खोज करने तथा उनकी व्याख्या करने से सम्बंधित हैं | यह आत्महत्या के अध्ययन में दुर्खीम द्वारा उपयोग किया गया था, जिसने यह दर्शाया कि प्रोटोस्टेंट समाज में कैथोलिक समाज की तुलना में आत्महत्या की दर उच्च थी |  आधिकारिक आंकड़ों ने यूरोपीय समाजों के बीच आत्महत्या की दर में अंतर दिखाया। उन्होंने आत्महत्या दर की भिन्नताओं के अध्ययन के दौरान अन्य भिन्नताओं को दूर करने की कोशिश की, जैसे राष्ट्रीय संस्कृति में अंतर, आत्महत्या दरों में भिन्नता के लिए क्षेत्रीय मतभेदों की संभावना |

Steps involved in survey research:

  • First step – The issues to be explored must be clearly defined and the target population to be interviewed is selected on the basis of the characteristics that the researcher is interested in examining.
  • Second step – Picking an appropriate sample of the population to interview.
  • Third step – To interview or administer the questionnaire to the selected people and to collect the data.
  • Final step – Tabulation, analysis and interpretation of the data.

Possible sources of error:

  • Sampling error is the degree to which the selected sample misrepresents the population as a whole.
  • Problems in observation and  measurement, processing the data and analyzing the findings.
  • Attitudes expressed in interviews are not always perfect expressions of underlying values.

Case Study-

  • Case study method is used for holistic, in-depth investigation of a case which may be an individual, an institution, a system, a community or an organisation.
  • Herbert Spencer was one of the first sociologists to use case materials in his ethnographic studies.
  • Robert K. Yin defined case study as “an empirical inquiry that investigates a contemporary  phenomenon within its real-life context, when the boundaries between phenomenon and context are not clearly evident, and in which multiple sources of evidence are used”
  • A case study can either be quantitative or qualitative or even both, but most case studies lie within the qualitative methodology.
  • Case study aims at determining the factors that account for the complex behaviour patterns of the unit and the relationships of the unit to its surroundings. Thus, researcher try to see the variety of factors within a social unit as an integrated whole.
  • When attention is focussed on the development of the case, it is called ‘case history’. Ex., how a particular boy became a juvenile delinquent.
  • Data for case studies can be collected by primary and secondary sources. Primary sources include interviews and observation. Secondary sources include reports, records, newspapers, magazines, books, files etc.

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Characteristics of case study method as identified by Sjoberg:

  • The case study ‘strives towards a holistic understanding of cultural systems of action’. Cultural systems of action refer to sets of interrelated activities engaged in by the actors in a social situation.
  • Case study research is not sampling research. But, selection of the sources or items must be done so as to maximize what can be learned in the limited time available for study.
  • Because they are intensive in nature, case studies tend to be selective, focusing on one or two issues that are fundamental to understanding the system being examined.
  • ‘Case studies are multi-perspective analyses’. The researcher considers not just the voice and perspective of the actors but also of the relevant group of actors and the interaction between them.

Advantages of case study according to Black and Champion:

  • Case study makes holistic and in-depth study of the phenomenon possible.
  • It offers flexibility with respect to using methods like questionnaire, interview.
  • It could be used for studying any specific dimension of the topic in detail.
  • It can be conducted practically in any kind of social setting.
  • They are relatively inexpensive.

Limitations of case study:

  • Time consuming
  • Possibility of emotional involvement thus making objective study difficult.
  • The results may not be representative of all groups or situations in the category.

Survey vs. Case Study-

  • Surveys are extensive and they are usually conducted on a large scale. Case studies are intensive but done on a small scale.
  • Case study is done in terms of limited space and broader time. Survey is done in terms of limited time with broader space.

सर्वेक्षण अनुसंधान में शामिल कार्य :

  • प्रथम कार्य – पता लगाए जाने वाले मुद्दे स्पष्ट रूप से परिभाषित होने चाहिए तथा साक्षात्कार हेतु लक्षित जनसंख्या का चुनाव उन विशेषताओं के आधार पर किया जाता है जिनके जांच में शोधकर्ता की दिलचस्पी है |
  • दूसरा कार्य – साक्षात्कार के लिए आबादी के उपयुक्त नमूने का चयन |
  • तीसरा कार्य – चयनित लोगों का साक्षात्कार करना अथवा उनके लिए प्रश्नावली का प्रबंध करना तथा आंकड़े संगृहित करना |
  • अंतिम कार्य – आंकड़ों का संयोजन, विश्लेषण तथा व्याख्या |

त्रटियों के संभावित स्रोत –

  • नमूनाकरण त्रुटि वह बिंदु है जहाँ चयनित नमूना समष्टि के रूप में आबादी का गलत प्रतिनिधित्व करता है |
  • अवलोकन तथा मापन, आंकड़ों को संसाधित करने तथा निष्कर्षों के विश्लेषण में समस्याएं |
  • साक्षात्कार में व्यक्त दृष्टिकोण हमेशा अंतर्निहित मूल्यों की सही अभिव्यक्ति नहीं होते हैं  |

वृत्त अध्ययन-

वृत्त अध्ययन  पद्धति  का प्रयोग पूरी तरह से, एक वृत्त की गहन जांच के लिए किया जाता है, जो एक व्यक्ति, एक संस्था, एक प्रणाली, एक समुदाय या एक संगठन हो सकता है।

  • हर्बर्ट स्पेन्सर अपने मानव जाति विज्ञान सम्बन्धी अध्ययनों में मामले की सामग्री का उपयोग करने वाले पहले समाजशास्त्रियों में से एक थे।
  • रोबर्ट के यिन ने वृत्त अध्ययन  को “एक अनुभवजन्य जांच के रूप में परिभाषित किया है जो एक समकालीन घटना की  जांच वास्तविक सन्दर्भ में करता है , जब घटना और संदर्भ के बीच की सीमा स्पष्ट रूप से प्रत्यक्ष नहीं होती है, और जिसमें प्रमाण के कई स्रोतों का उपयोग किया जाता है |”
  • एक वृत्त अध्ययन  या तो गुणात्मक या मात्रात्मक अथवा दोनों हो सकता है, किन्तु अधिकांश वृत्त अध्ययन गुणात्मक पद्धति के अंतर्गत आते हैं |
  • वृत्त अध्ययन  का उद्देश्य इकाई के जटिल व्यवहार प्रारूपों के लिए जिम्मेदार कारकों तथा इकाई का इसके परिवेश के साथ सम्बन्ध निर्धारित करना है |  इस प्रकार अनुसंधानकर्ता एकीकृत समष्टि के अंतर्गत कारकों की विभिन्नता को देखने की कोशिश करता है |
  • जब ध्यान वृत्त के विकास पर केन्द्रित होता है, तो इसे वृत्त इतिहास कहा जाता है | उदाहरण- किस तरह एक विशेष बालक बाल अपराधी बन जाता है |
  • वृत्त अध्ययन हेतु आंकड़े प्राथमिक तथा गौण स्रोतों से संगृहित किये जा सकते हैं | प्राथमिक स्रोतों  में साक्षात्कार तथा अवलोकन शामिल हैं | गौण स्रोतों में रिपोर्ट्स, अभिलेख, समाचार पत्र, मैगज़ीन, किताबें, फाइल्स आदि शामिल हैं|

वृत्त अध्ययन की स्जोबेर्ग के द्वारा चिन्हित की गयी विशेषताएं :

  • वृत्त अध्ययन “क्रिया की सांस्कृतिक व्यवस्था की समग्र समझ के प्रति प्रयास करता है | क्रिया की सांस्कृतिक व्यवस्था एक सामाजिक स्थिति में कर्ताओं द्वारा निगमित अंतर सम्बन्धी गतिविधियों के समुच्चय को दर्शाती है |
  • वृत्त अध्ययन अनुसंधान नमूना चयन सिद्धांत नहीं है | किंतु, स्रोतों अथवा मदों का चयन  अवश्य किया जाना चाहिए ताकि अध्ययन के लिए उपलब्ध सीमित समय में जो सीखा जा सकता है, उसे अधिकतम किया जा सके |
  • चूँकि वे प्रकृति में गहन होते हैं, इसलिए वृत्त अध्ययन चयनात्मक होते हैं. जो उन एक या दो मुद्दों पर केन्द्रित होते हैं जो जांच की जा रही प्रणाली को समझने के लिए मूलभूत हैं |   
  • वृत्त अध्ययन बहु-परिप्रेक्ष्य विश्लेषण होते हैं| अनुसंधानकर्ता ना केवल अभिनेताओं की आवाज तथा दृष्टिकोण पर विचार करता है बल्कि अभिनेताओं के प्रासंगिक समूह एवं उनके बीच होने वाली परस्पर क्रिया पर भी विचार करता है|

ब्लैक तथा चैंपियन के अनुसार वृत्त अध्ययन के लाभ –

  • वृत्त अध्ययन संभावित घटना का समग्र तथा गहराई से अध्ययन करता है |
  • यह प्रश्नावली, साक्षात्कार जैसे तरीकों का उपयोग करने के संबंध में लचीलापन प्रदान करता है।
  • इसका इस्तेमाल विषय के किसी भी आयाम के विस्तृत अध्ययन के लिए किया जा सकता है |
  • यह किसी भी तरह की सामाजिक व्यवस्था में व्यवहारिक रूप से किया जा सकता है |
  • वे अपेक्षाकृत कम महंगे हैं |

वृत्त अध्ययन की सीमायें :

  • समय लेने वाला अध्ययन |
  • भावनात्मक भागीदारी की संभावना, जो विषयनिष्ठ अध्ययन को मुश्किल बनता है |
  • परिणाम श्रेणी के सभी समूहों अथवा परिस्थितियों के प्रतिनिधि नहीं हो सकते हैं |
  • सर्वेक्षण विस्तृत होते हैं तथा सामान्यतः उन्हें बड़े पैमाने पर किया जाता है | वृत्त अध्ययन गहन तो होते हैं किन्तु उन्हें लघु पैमाने पर किया जाता है|
  • वृत्त अध्ययन सीमित स्थान तथा व्यापक समय के मामले में किया जाता है | सर्वेक्षण व्यापक स्थान के साथ सीमित समय के मामले में किया जाता है |

सर्वेक्षण बनाम वृत्त अध्ययन-

  • सर्वेक्षण विस्तृत होते हैं तथा सामान्यतः उन्हें बड़े पैमाने पर किया जाता है | वृत्त अध्ययन गहन तो होते हैं किन्तु उन्हें लघु पैमाने पर किया जाता है|
  • वृत्त अध्ययन सीमित स्थान तथा व्यापक समय के मामले में किया जाता है | सर्वेक्षण व्यापक स्थान के साथ सीमित समय के मामले में किया जाता है |

 

 

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