HCS Prelims Mains Complete Study Notes (History) | Online Preparation

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Cabinet mission, Mountbatten Plan, Partition, Indian Independence Act

The Cabinet mission

Cabinet Mission in India

  • The mission reached Delhi on March 24, 1946.
  • It had prolonged discussions with Indian leaders of all parties and groups on the issues of- interim government, principles and procedures for framing a new Constitution giving freedom to India.

Main Points

  1. Rejection of the demand for a full-fledged Pakistan
  2. Three-tier executive and legislature at provincial, section and union levels.
  3. A constituent assembly to be elected by provincial assemblies by proportional representation (voting in three groups-General, Muslims, Sikhs).
  4. In the constituent assembly, members from groups A, B and C were to sit separately to decide the constitution for provinces and if possible, for the groups also.

Main Objections

Congress:

  • Provinces should not have to wait till the first general elections to come out of a group. They should have the option of not joining a group in the first place.
  • Absence of provision for elected members from the princely states in the constituent assembly was not acceptable.

League

  • Grouping should be compulsory with sections B and C developing into solid entities with a view to future secession into Pakistan.

HCS Prelims Mains Complete Study Notes

कैबिनेट मिशन

भारत में कैबिनेट मिशन :

  • यह शिष्टमंडल 24 मार्च 1946 को दिल्ली पँहुचा |
  • इसने सभी दलों और समूहों के भारतीय नेताओं के साथ अंतरिम सरकार, भारत को आज़ादी देने वाले नए संविधान के निर्माण की प्रक्रियाएँ तथा सिद्धांत जैसे मुद्दों पर लंबी चर्चा की |

मुख्य बिंदु :

  • पूर्ण पाकिस्तान की माँग को नामंजूरी |
  • कार्यपालिका एवं व्यवस्थापिका का त्रिस्तरीय -केन्द्रीय,प्रांतीय एवं समूह स्तरों में विभाजन |
  • संविधान सभा का चुनाव प्रांतीय विधानसभाओं के द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व के माध्यम से किया जाएगा ( तीन समूहों में मतदान – सामान्य, मुस्लिम, सिख ) |
  • इस सविंधान सभा में- तीनो प्रान्तों के सदस्य सविंधान बनाने हेतु पृथक पृथक बैठकर विचार-विमर्श करेंगे |

मुख्य आपत्तियाँ :

कांग्रेस :

  • प्रान्तों को किसी समूह से बाहर होने के लिए आम चुनाव होने का इंतज़ार नहीं करना चाहिए| उनके पास पहले ही किसी समूह में शामिल नहीं होने का विकल्प होना चाहिए |  
  • संविधान सभा में देशी रियासतों से निर्वाचित सदस्यों के प्रावधान की अनुपस्थिति स्वीकार्य नहीं थी |

लीग :

  • समूहीकरण की शर्त समूह ब एवम स के लिए अनिवार्य होनी चाहिए तथा भविष्य में पाकिस्तान के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा |   

Communal Holocaust and Interim Government

Changed Government Priorities

  • Wavell was now eager to somehow get the Congress into the Interim Government, even if the League stayed out .

Interim Government Sworn In

  • Fearing mass action by the Congress, a Congress-dominated Interim Government headed by Nehru was sworn in on September 2, 1946 .
  • Despite the title, the Interim Government was little more than a continuation of the old executive of the viceroy.

Obstructionist Approach and Ulterior Motives of League

  • The League did not attend the Constituent Assembly which had its first meeting on December 9, 1946.
  • The League refused to attend informal meetings of the cabinet to take decisions.

Attlee’s statement-February 20, 1947

Main points:

  • A deadline of June 30, 1948 was fixed for transfer of power even if the Indian politicians had not agreed by that time on the constitution.
  • The British would relinquish power either to some form of central government or in some areas to the existing provincial governments if the Constituent Assembly was not fully representative .

Mountbatten plan, June 3, 1947

  • The freedom with partition formula was coming to be widely accepted well before Mountbatten came.
  • One major innovation (actually suggested by V.P. Menon) was the immediate transfer of power on the basis of grant of dominion status (with ”a right of secession), thus obviating the need to wait for an agreement in the Constituent Assembly on a new political structure.

सांप्रदायिक दंगे और अंतरिम सरकार

सरकार की परिवर्तित प्राथमिकताएँ :

  • वेवेल अब अंतरिम सरकार में किसी भी तरह से कांग्रेस को शामिल करने के लिए आतुर थे, भले ही लीग बाहर रह जाये |

अंतरिम सरकार ने शपथ ली

  • कांग्रेस द्वारा जन आंदोलन के भय से, नेहरु की अध्यक्षता में कांग्रेस के प्रभुत्व वाली अंतरिम सरकार ने 2 सितम्बर 1946 को शपथ ली |
  • उपाधि के बावजूद, अंतरिम सरकार, वायसराय की पुरानी कार्यकारिणी के विस्तार से थोड़ी अधिक थी |

लीग के गुप्त उद्देश्य तथा बाध्यकारी दृष्टिकोण

  • लीग ने 9 दिसम्बर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक में भाग नहीं लिया |
  • लीग ने निर्णय लेने के लिए कैबिनेट की अनाधिकारिक बैठकों में भाग लेने से इनकार कर दिया  |

एटली का बयान – 20 फरवरी 1947

  • सत्ता के हस्तांतरण के लिए 30 जून 1948 की समय-सीमा तय की गयी थी, भले ही उस समय तक भारतीय राजनेता संविधान पर सहमत ना हो |
  • यदि इस तिथि तक सविंधान नही बन सका तो उस स्थिति में ब्रिटिश सम्राट की सरकार यह विचार करेगी कि  निश्चित तिथि को ब्रिटिश शासित भारत की केन्द्रीय सर्कार की सत्ता किसको सौंपी जाएगी क्या ब्रिटिश केन्द्रीय सरकार के किसी रूप को अथवा कुछ भागों में वर्तमान प्रान्तीय सरकारों अथवा किसी अन्य ढंग से जो सर्वाधिक न्यायसंगत एवं सर्वहित में हो, सत्ता दी जाये |

माउंटबेटन योजना, जून 1947

  • माउंटबेटन के आने से पहले ही भारतीय नेताओं द्वारा  ‘विभाजन के साथ स्वतंत्रता’ को स्वीकार किया जा चूका था |
  • एक प्रमुख नयी पद्धति (असल में वि.पी मेनन द्वारा प्रस्तावित ) डोमिनियन दर्जा प्रदान करने के आधार पर सत्ता का तत्काल हस्तांतरण थी (अलग होने के अधिकार के साथ ) ताकि संविधान सभा में नयी राजनीतिक संरचना पर किसी समझौते के इंतजार से बचा जा सके |

Indian independence Act

  • The constituent assembly of each new dominion was to exercise the powers of the legislature of that dominion, and the existing Central Legislative Assembly and the Council of States were to be automatically dissolved.
  • For the transitional period, i.e., till a new constitution was adopted by each dominion, the governments of the two dominions were to be carried on in accordance with the Government of India Act, 1935.

Problems of Early withdrawal:

  • The breakneck speed of events under Mountbatten caused anomalies in arranging partition details and totally failed to prevent the Punjab massacre, because:
  • There were no transitional institutional structures within which partition problems could be tackled.

Integration of states

  • During 1946-47 there was a new upsurge of State People’s Movement demanding political rights and elective representation in the Constituent Assembly.
  • Nehru presided over the All India State People’s Conference sessions in Udaipur (1945) and Gwalior (April 1947).
  • He declared that the states refusing to join the Constituent Assembly would be treated as hostile.

Why Congress Accepted Partition?

  • The Congress was only accepting the inevitable due to the long-term failure to draw Muslim masses into the national movement.
  • The Congress had a two fold task: Structuring diverse classes, communities, groups and regions into a nation, and Securing independence for this nation.
  • Only an immediate transfer of power could forestall the spread of communal violence.

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम

  • प्रत्येक नए अधिराज्य की संविधान सभा को उस अधिराज्य की विधायिका की शक्तियों का प्रयोग करना था, तथा मौजूदा केंद्रीय विधान सभा तथा राज्य परिषदों को स्वयं भंग हो जाना था |
  • संक्रमणकालीन अवधि के लिए अर्थात् प्रत्येक अधिराज्य द्वारा नए संविधान को अपनाने से पूर्व, दोनों ही अधिराज्यों का शासन भारत सरकार अधिनियम 1935 के अनुसार किया जाएगा |

अंग्रेजों की जल्द वापसी के निर्णय से उत्पन्न समस्याएँ :

  • माउंटबेटन की विभाजन के सम्बन्ध में सुनिश्चित योजना बनाने की रणनीति गड़बड़ा गयी तथा यह पंजाब में व्यापक नरसंहार को रोकने में असफल रही क्यूंकि :-  
  • विभाजन की योजना के सम्बन्ध में एक सुनिश्चित एवं दूरदर्शितापूर्ण रणनीति का अभाव था साथ ही यह योजना भी नही बनाई गई की विभाजन उपरान्त उत्पन्न समस्याओं को कैसे हल किया जायेगा   

राज्यों का एकीकरण

  • 1946-47 के दौरान राज्यों में विभिन्न जन-आन्दोलन उठ खड़े हुए,जिसमे लोगों ने अधिक राजनीतिक अधिकार तथा सविंधान सभा  में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की मांग की |
  • नेहरु ने  उदयपुर (1945)  तथा ग्वालियर (अप्रैल 1947 ) में अखिल भारतीय राज्य जन सम्मेलन की अध्यक्षता की |
  • उन्होंने यह  घोषणा की कि संविधान सभा में शामिल होने से इनकार कर रहे राज्यों के साथ शत्रु जैसा व्यवहार किया जायेगा |

कांग्रेस ने विभाजन को स्वीकार क्यों किया ?

  • मुस्लिम आबादी को राष्ट्रीय आंदोलन में आकर्षित करने की दीर्घकालीन असफलता के कारण कांग्रेस इस दुखद विभाजन  को स्वीकार कर रही थी |
  • विभाजन से कांग्रेस के नेतृत्व में साम्राज्यवाद विरोधी आन्दोलन के दो पक्ष उजागर हुए : (i).विविध वर्गों, समुदायों तथा क्षेत्रों का एक राष्ट्र के रूप में एकीकरण  (ii).भारत के लिए स्वतंत्रता सुनिश्चित करना
  • सत्ता का केवल तत्काल हस्तांतरण ही सांप्रदायिक दंगों के प्रसार को रोक सकता था |

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