HCS Preliminary Examination – Geography Study Material | IAS | UPSC

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Disaster Management


Disaster :

  • An undesirable occurrence resulting from forces that are largely outside human control
  • Strikes quickly with little or no warning, causes or threatens serious disruption of life and property including death and injury to a large number of people
  • Requires therefore, mobilisation of efforts in excess of that which are normally provided by statutory emergency services.

Causes of Disaster

Natural forces

  • Landslides and floods due to deforestation
  • Cyclones
  • Drought

Human forces

  • Unscientific land use
  • Construction activities in fragile areas
  • Nuclear disaster, Wars

Classification of natural disaster

Broadly, natural disasters can be classified under these categories.


  • Blizzards, Thunderstorms, Lightning, Tornadoes, Tropical Cyclone, Drought, Hailstorm, Frost, Heat Wave or Loo, Cold Waves, etc.


  • Earthquakes, Volcanic Eruptions, Landslides, Avalanches, Subsidence, Soil Erosion


  • Floods, Tidal Waves, Ocean Currents, Storm Surge, Tsunami

HCS Preliminary Examination




  • आपदा प्रायः एक अनपेक्षित घटना होती है जो ऐसी ताकतों द्वारा घटित होती है,जो मानव के नियंत्रण में नहीं है |
  • यह थोड़े समय में और बिना चेतावनी के घटित होती है जिसकी वजह से मानव जीवन के क्रियाकलाप अवरुद्ध होते है तथा बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान होता है |
  • इस से निपटने के लिए हमे सामान्यतः दी जाने वाली वैधानिक आपातकालीन सेवाओं की अपेक्षा अधिक प्रयत्न करने पड़ते है |

आपदा के कारण

प्राकृतिक बल

  • वनों की कटाई के कारण भूस्खलन और बाढ़
  • चक्रवात
  • सूखा

मानवीय  बल

  • अवैज्ञानिक तरीके से भूमि का उपयोग
  • भंगुर क्षेत्रों में निर्माण कार्य
  • परमाणु आपदा , युद्ध

प्राकृतिक आपदा का वर्गीकरण

मोटे तौर पर, प्राकृतिक आपदाओं को इन श्रेणियों के अंतर्गत वर्गीकृत किया जा सकता है।


  • बर्फ़ीला तूफ़ान,तड़ितझंझा ,तड़ित ,टोरनेडो, उष्णकटिबंधीय चक्रवात, सूखा,करकपात,पाला,लू,शीतलहर |


  • भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट, भूस्खलन, हिमस्खलन, अवतलन ,मृदा अपरदन


  • बाढ़, ज्वार, महासागरीय धारायें , तूफान महोर्मि,सुनामी


  • Floods occur commonly when water in the form of surface runoff exceeds the carrying capacity of the river channels and streams and flows into the neighbouring low-lying flood plains.
  • Floods are relatively slow in occurrences and often, occur in well-identified regions and within expected time in a year.

Natural Causes of Floods:

  • Storm surge (in the coastal areas)
  • High intensity rainfall for a considerably longer time period

Causes of  Floods

  • Presence of eroded material in the water due to higher rate of soil erosion.
  • Floods in the South, Southeast and East Asian countries, particularly in China, India and Bangladesh, are frequent and equally disastrous.

Human induced causes of flood:

  • Indiscriminate deforestation
  • Unscientific agricultural practices

Consequence of Floods:

  • Frequent inundation of agricultural land and human settlement, particularly in Assam, West Bengal, Bihar and Eastern Uttar Pradesh (flooding rivers), coastal areas of Orissa, Andhra Pradesh, Tamil Nadu and Gujarat (cyclone) and Punjab, Rajasthan, Northern Gujarat and Haryana (flash floods).
  • Damage of physical infrastructure such as roads, rails, bridges and human settlements.


  • आमतौर पर बाढ़ तब होती है जब नदी जल वाहिकाओं में इनकी क्षमता से अधिक जल बहाव होता है और जल बाढ़ के रूप में मैदान के निचले हिस्सों में भर जाता है |
  • बाढ़ आमतौर पर अचानक नहीं आती और कुछ विशेष क्षेत्रों और ऋतु में ही आती है |

बाढ़ के प्राकृतिक कारण

  • तटीय क्षेत्रों में तूफ़ान महोर्मि
  • लम्बे समय तक होने वाली तेज़ बारिश

बाढ़ के कारण

  • अधिक मृदा अपरदन के कारण नंदी जल में  जलोढ़ की मात्रा में वृद्धि होना
  • दक्षिण,दक्षिण-पूर्व और पूर्व एशिया के देशों , विशेषकर चीन,भारत और बांग्लादेश में इसकी बारम्बारता और होने वाले नुक़सान अधिक है |  

बाढ़ के मानवीय कारण:

  • अंधाधुंध वनों की कटाई
  • गैर-वैज्ञानिक कृषि कार्य

बाढ़ परिणाम और नियंत्रण

  • असम,पश्चिम बंगाल,बिहार,पूर्वी उत्तर प्रदेश(मैदानी क्षेत्र) और उड़ीसा,आंध्र प्रदेश,तमिलनाडु और गुजरात के तटीय क्षेत्र तथा पंजाब राजस्थान,उत्तर गुजरात और हरियाणा में बार बार बाढ़ आने और कृषि भूमि तथा मानव बस्तियों के डूबने से देश की आर्थिक व्यवस्था तथा समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है |
  • बाढ़ आधारभूत ढांचे जैसे सड़कों,रेल पटरियों,पुलों और मानव बस्तियों को भी नुकसान पहुंचाती है |


  • Drought is a complex phenomenon as it involves elements of meteorology like precipitation, evaporation, evapo- transpiration, groundwater, soil moisture, storage and surface run-off, agricultural practices, particularly the types of crops grown, socio-economic practices and ecological conditions.

Types of Drought:

  • Meteorological Drought: It is a situation when there is a prolonged period of inadequate rainfall marked with mal-distribution of the same over time and space.
  • Agricultural Drought : Also known as soil moisture drought, Characterised by low soil moisture that is necessary to support the crops, thereby resulting in crop failures.
  • Hydrological Drought : Results when the availability of water in different storages and reservoirs like aquifers, lakes, reservoirs, etc. falls below what the precipitation can replenish.

Droght prone areas

Drought Prone Areas in India

  • About 30 per cent of the country’s total area is identified as drought prone affecting around 50 million people.
  • On the basis of severity of droughts, India can be divided into the following regions:

Extreme Drought Affected Areas : Most parts of Rajasthan, particularly areas to the west of the Aravali hills, i.e. Marusthali and Kachchh regions of Gujarat

Severe Drought Prone Area : Parts of eastern Rajasthan, most parts of Madhya Pradesh, eastern parts of Maharashtra, interior parts of Andhra Pradesh and Karnataka Plateau.


  • सूखा एक जटिल परिघटना है जिसमे कई प्रकार के मौसम विज्ञान संबंधी तथा अन्य तत्व जैसे वृष्टि,वाष्पीकरण,वाष्पोत्सर्जन,भौम जल, मृदा में नमी,जल भंडारण व भरण, कृषि पद्धतियां, विशेषतः उगाई जाने वाली फसलें,सामाजिक-आर्थिक गतिविधियां और परिस्थितिकी शामिल है |

सूखे के प्रकार

  • मौसमविज्ञान संबंधी सूखा: यह एक ऐसी स्थिति है जिसमे लम्बे समय तक अपर्याप्त वर्षा होती है और इसका सामयिक और स्थानिक वितरण भी असंतुलित होता है |
  • कृषि क्षेत्र: इसे भूमि-आर्द्रता सूखा भी कहा जाता है | इसका का मुख्य गुण मिट्टी में आर्द्रता की कमी है जिसके कारण फसलें मुरझा जाती है ,क्योंकि आर्द्रता फसलों के लिए बहुत आवश्यक है |
  • जल विज्ञान संबंधी सूखा: यह स्थिति तब पैदा होती है जब विभिन्न जल संग्रहण,जलाशय,जलभूत,और झीलों आदि का स्तर वृष्टि द्वारा की जाने वाली जलापूर्ति के बाद भी नीचे गिर जाए |

सूखा ग्रस्त क्षेत्र

भारत में सूखा ग्रस्त क्षेत्र

  • देश का लगभग 30 प्रतिशत क्षेत्र सूखे से प्रभावित हो सकता है और यह  5 करोड़ लोगों पर असर डालता है |
  • सूखे की तीव्रता के आधार पर सूखे को निम्नलिखित क्षेत्रों में बाँटा गया है-

अत्यधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र : राजस्थान के ज्यादातर भाग विशेषकर अरावली के पश्चिम में स्थित मरुस्थली गुजरात का कच्छ क्षेत्र अत्यधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र है

अधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र :इसमें राजस्थान के पूर्वी भाग,मध्यप्रदेश के ज्यादातर भाग,महाराष्ट्र के पूर्वी भाग,आंध्र प्रदेश के अंदरूनी भाग,कर्नाटक का पठार,तमिलनाडु के उत्तरी भाग,झारखंड का दक्षिणी भाग और ओडिशा का आंतरिक भाग शामिल है |

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