HCS Preliminary Exam Notes 2018 || History Study Material – Frontier IAS

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Ghaznavids and Delhi Sultanate 

Ghaznavids and their Invasions

Mahmud of Ghazni and his Invasions Introduction:

  • End of 9th century AD – Abbasid Caliphate declined.
  • The Turkish governors established independent kingdoms and the Caliph became only a ritual authority.

Predecessors of Mahmud of Ghazni

Alptigin (962–963)

  • A Turkic slave commander  later become the semi-independent governor of Ghazni. Ghazni was his capital  

Sabuktigin (977 AD-997 AD)

  • Founder of the Ghaznavid dynasty
  • Apltigin’s successor and son-in-law
  • He wanted to conquer India from the north-west.
  • He succeeded in capturing Peshawar from Jayapala.

Mahmud of Ghazni (A.D. 997-1030)

  • Succeeded his father Sabuktigin.
  • He extended his control over parts of Central Asia, Iran and the north-western part of the Indian subcontinent.

How was he able to raid so many times?

  • During 10th century North India was divided into a number of Hindu states.
  • Frontier of India – Hindu Shahi kingdom which extended from the Punjab to Kabul.
  • Other important kingdoms of north India -Kannauj, Gujarat, Kashmir, Nepal, Malwa and Bundelkhand.

Ghaznavids empire

Patronization of Art and Culture:

  • He also patronized art and literature.
  • Firdausi- Poet-laureate in the court of Mahmud.
  • He wrote Shahnama.
  • Mahmud was interested in finding out more about the people he conquered, and entrusted a scholar named Al-Biruni to write an account of Indian subcontinent.

ग़जनवी और उनके आक्रमण

महमूद गजनी एवं उसके आक्रमण

  • 9वीं सदी के अंत में -अबु खलीफा का पतन हो गया
  • तुर्की के गवर्नरों ने स्वतंत्र राज्य की घोषणा कर दी और खलीफा केवल धार्मिक पद ही रह गया |
  • महमूद गजनी के पूर्वज

अल्प तिगिन  (962-963 ईस्वी)

  • तुर्की का गुलाम सेनानायक जो बाद में गजनी के अर्ध-स्वतंत्र गवर्नर बने | ग़जनी उनकी राजधानी थी

सबुक तिगिन (977 ईस्वी -997 ईस्वी)

  • ग़ज़नवी साम्राज्य के संस्थापक
  • अल्प तिगिन के पुत्र एवं उत्तराधिकारी
  • वह उत्तर-पश्चिम से भारत को जीतना चाहता था
  • यह जयपाल से पेशावर छीनने में सफल रहा |

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महमूद गजनी( 997 ईस्वी 1030 ईस्वी)

  • यह अपने पिता सबुक तिगिन का उत्तराधिकारी था
  • इसने मध्य एशिया के कई भागों , ईरान एवं भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी भाग को अपने नियंत्रण में ले लिया |

इतनी अधिक संख्या में लूटपाट एवं आक्रमण के पीछे कारण :

  • 10 वीं शताब्दी के दौरान उत्तर भारत कई हिंदू राज्यों में विभाजित हो गया |
  • भारत की सीमा हिंदू शाही साम्राज्य पंजाब से काबुल तक फ़ैल गई |
  • उत्तर भारत के अन्य महत्वपूर्ण राज्य – कनौज, गुजरात, कश्मीर, नेपाल, माल्वा और बुंदेलखंड थे

ग़जनवी साम्राज्य

कला और संस्कृति का सरंक्षक

  • इसने कला और साहित्य को भी संरक्षित किया
  • फिरदौसी महमूद का दरबार कवि था,इसने अपना इनाम न मिलने पर महमूद के खिलाफ कुछ पंक्तियाँ भी लिखी थी |
  • इसने शाहनामा की रचना की |
  • महमूद उन लोगों के बारे में अधिक जानने में दिलचस्पी रखता था जिन पर उसने विजय हासिल की थी,इसके लिए उसने अल-बरुनी नामक एक विद्वान नियुक्त किया |

Muhammad Ghori:

  • Ghoris were vassals of Ghazni but became independent after the death of Mahmud.
  • Real name-Muizzuddin Muhammad
  • After decline of Ghaznavid empire, he brought Ghazni under his control and turned his attention to India.
  • Unlike Mahmud of Ghazni, he wanted to conquer India and extend his empire in this direction.

Impact of Battle of Tarain

  • Major disaster for the Rajputs.
  • Political prestige suffered a serious setback.
  • The whole Chauhan kingdom now lay at the feet of the invader.

Causes for the failure of Hindu kingdoms:  

  • Lacked unity and were divided by factions.
  • The Rajput princes exhausted one another by their mutual conflicts.
  • Inferior and outdated military methods.
  • Indians  continued to rely on elephants

The Slave Dynasty

Slave dynasty (Mamluk dynasty) was mainly sum up of 3 small dynasties, namely

  • Qutubi Dynasty (1206 – 1211): By Qutubuddin Aibak
  • 1st Ilbari Dynasty (1211 – 1246): By Iltutmish
  • 2nd Ilbari Dynasty (1246 – 1290): By Balban

Qutbuddin Aibak (1206-1210)

  • Turkish slave by origin, he was purchased by Mohammad Ghori who later made him his Governor.
  • After the death of Ghori, Aibak became the master of Hindustan and founded the Slave dynasty in 1206.

Construction works:

  • Built Quwwat-ul-Islam mosque in Delhi and Adhai-Din-Ka-Jhonpra mosque in Ajmer.
  • Started the construction of Qutub Minar in memory of sufi saint Qutbuddin Bakhtiar Kaki which was completed by his successor, Iltutmish.

Death:

  • Died suddenly while playing chaugan (horse polo) in 1210.

मोहम्मद गौरी

  • गौरी ग़जनी के जागीरदार थे,परन्तु महमूद की मृत्यु के बाद ये स्वतंत्र हो गए |
  • वास्तविक नाम : मुईज़ुद्दीन मुहम्मद बिन साम
  • गजनवी साम्राज्य के पतन के बाद ,उसने ग़जनी पर कब्जा कर लिया एवं भारत की ओर बढ़ा |
  • महमूद ग़जनी के विपरीत,वह भारत को जीतना चाहता था एवं इसी ओर अपना साम्राज्य बढ़ाना चाहता था

तेराइन की लड़ाई के परिणाम

  • राजपूतों के लिए सबसे बड़ा दुर्भाग्य |
  • राजनीतिक प्रतिष्ठा को गंभीर झटका लगा
  • पूरा चौहान साम्राज्य इस क्रूर आक्रमणकारी के आगे घुटने पर था |

हिन्दू राज्यों के पतन के कारण

  • इनमे एकता की कमी थी एवं गुटों में बंटे हुए थे |
  • राजपूत शासक आपस में एक दूसरे के साथ संघर्ष करके कमजोर हो गए |
  • इनके सैन्य लड़ाई के तरीके निम्न कोटि की एवं पुराने थे |
  • युद्ध में ये हाथी का ही प्रयोग करते थे |

गुलाम वंश

गुलाम वंश (मामलुक वंश) इसमें मुख्य रूप से 3 छोटे राजवंश शामिल थे,जो इस प्रकार है-

  • कुतुबी वंश (1206 – 1211): कुतुबुद्दीन ऐबक
  • इल्बारी प्रथम वंश (1211 – 1246): इल्तुतमिश
  • इल्बारी द्वितीय वंश (1246 – 1290): बलबन

कुतुबुद्दीन ऐबक (1206-1210)

  • मूल रूप से तुर्की गुलाम जिसे मोहम्मद गौरी ने खरीदकर अपना गर्वनर बनाया |
  • गौरी की मृत्यु के बाद,ऐबक हिन्दुस्तान का स्वामी बन गया और 1206 ईस्वी में गुलाम वंश की स्थापना की |

निर्माण कार्य

  • दिल्ली की कुव्वत-उल-इस्लाम-मस्जिद और ‘अजमेर का अढ़ाई दिन का झोंपड़ा’ ऐबक ने बनवाया था |
  • सूफ़ी संत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की स्मृति में कुतुब मीनार के निर्माण को शुरू किया, जो उसके उत्तराधिकारी इल्तुतमिश द्वारा पूरा किया गया |

मृत्यु :

  • ऐबक की मृत्यु 1210 में चोगान (अश्व पोलो) खेलते समय हो गई |

Shamsuddin Iltutmish (1211-1236)

  • He was a slave of Qutubuddin Aibak and occupied the throne of Delhi in 1211 after deposing Aram Bakhsh.
  • He was very capable ruler and is regarded a the “real founder of the Delhi Sultanate”
  • He saved Delhi Sultanate from the wrath of Chengiz Khan, the Mongol leader, by refusing shelter to Khwarizm Shah, whom Chengiz Khan was Chasing.

Raziya (1236-1240)

  • Razia was the first and last female ruler of Delhi Sultanate.
  • Even Iltutmish nominated his daughter Raziya as his successor, the Qazi of Delhi and Wazir put Ruknuddin Firoz on the throne.
  • Nasiruddin Mahmud – real brother of Raziya

Masud Shah (1242-1246):

  • Son of Ruknuddin but was deposed after Balban and Nassiruddin.
  • Mahamud’s mother conspired against him and established Nasiruddin Mahmud as the new Sultan.

Nasiruddin Mahmud (1246-66)

  • He was the son of Iltutmish and was known as the Darvesi king as he was very pious and noble.

Titles given:

  • He took up the title of Zil-i-Ilahi (Shadow of God)

Reforms done:

  • Broke the power of Chalisa and resorted the prestige of the crown.

शम्सुद्दीन इल्तुतमिश (1211-1236)

  • यह कुतुबुद्दीन ऐबक का दास था और 1211 में अराम बख्श को हटाने के बाद दिल्ली के सिंहासन पर बैठा दिया गया |
  • यह बहुत योग्य शासक था एवं इसे दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक माना गया |
  • इसने  दिल्ली सल्तनत को मंगोल शासक चंगेज़ खान के कोप भंजन से बचाया क्यूंकि इसने ख्वारिज्मी शाह  पनाह नहीं दी जिसका चंगेज़ खान पीछा कर रहा था |

रजिया (1236-1240)

  • रजिया दिल्ली सल्तनत की पहली और अंतिम महिला शासक थी |
  • इल्तुतमिश ने अपनी पुत्री रजिया को उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्त किया था,दिल्ली के क़ाज़ी एवं वजीर ने रूकुनुद्दीन फ़ीरोज़शाह को सिंहासन पर बैठाया |
  • नसीरूद्दीन महमूद – राजिया का सगा भाई

मसूद शाह (1242-1246):

  • यह रूकुनुद्दीन फ़ीरोज़शाह का पुत्र था,परन्तु बाद में इसे बलबन और नशीरुद्दीन द्वारा पदमुक्त कर दिया गया |
  • महमूद की मां ने इसके खिलाफ षड्यंत्र किया और नशीरुद्दीन महमूद को नए सुल्तान के रूप में स्थापित किया।

नशीरुद्दीन महमूद (1246-66)

  • इल्तुतमिश का पुत्र,अपनी पवित्रता और महानता के कारण दरवेसी राजा के रूप में जाना गया |

दिए गए शीर्षक:

  • इसे ज़िल्ल-ए-इलाही (भगवान की परछाई) का शीर्षक दिया गया  

किए गए सुधार :

  • चालीसा की शक्ति को कमजोर किया और सिंहासन की प्रतिष्ठा को मजबूत किया |

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