HCS Online Notes 2018 | Atmospheric Circulations | Geography

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Atmospheric Circulations

General circulation of Atmosphere

  • The wind circulation at the earth’s surface around low and high on many occasions is closely related to the wind circulation at higher level.
  • Generally, over low pressure area the air will converge and rise.
  • Over high pressure area the air will subside from above and diverge at the surface.

The pattern of planetary winds depend on:

  • Latitudinal variation of atmospheric heating
  • Emergence of pressure belts
  • The migration of belts following apparent path of the sun
  • The distribution of continents and oceans

Inter Tropical convergence Zone

  • Inter-tropical convergence zone (ITCZ) is a belt of converging trade winds and rising air that encircles the earth near the Equator which is also called equatorial convergence zone.
  • The rising air produces high cloudiness, frequent thunderstorms, and heavy rainfall.
  • The ITCZ follows the sun and its position varies seasonally.

Circulating cells

Hadley Cell:

  • The air at the Inter Tropical Convergence Zone (ITCZ) rises because of the convection currents caused by low pressure.
  • Low pressure in turn occurs due to high insolation. The winds from the tropics converge at this low pressure zone.
  • The converged air rises along with the convective cell. It reaches the top of the troposphere up to an altitude of 14 km, and moves towards the poles.

HCS Online Notes 2018

सामान्य वायुमंडलीय परिसंचरण

  • पृथ्वी की सतह पर कई बार निम्न व उच्च दाब के चारों ओर पवनों का परिसंचरण ऊँचाई पर होने वाले वायु परिसंचरण से सम्बंधित ही होता है |
  • प्रायः निम्न दाब क्षेत्रों पर वायु अभिसरित होंगी और ऊपर उठेंगी |
  • उच्च दाब क्षेत्रों में वायु का अवतलन होगा और धरातल पर अपसरित होगी |

भूमंडलीय पवनों का प्रारूप मुख्यतः निम्न बातों पर निर्भर करता है :

  • वायुमंडलीय ताप में अक्षांशीय भिन्नता
  • वायुदाब पट्टियों की उपस्थिति
  • वायुदाब पट्टियों का सौर किरणों के साथ विस्थापन
  • महासागरों व महाद्वीपों का वितरण

अंतर उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र

  • अंतर उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र  अभिसरित सन्मार्गी हवा और ऊपर उठने वाली हवाओं का वह क्षेत्र है जो पृथ्वी को विषुवत रेखा के निकट घेरती है, इसलिए इसे विषुवतरेखीय अभिसरण क्षेत्र कहते हैं |
  • उठने वाली हवा अधिक मेघाच्छादन, बारम्बार तूफ़ान और भारी वर्षा लाती है |
  • अंतर उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र सूर्य का अनुसरण करता है और प्रत्येक मौसम में इसकी स्थिति बदलती है |

परिसंचरण कोष्ठ

हेडले कोष्ठ :

  • निम्न वायुदाब द्वारा संवहन धाराओं के कारण अंतर उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र पर हवा उठती है |
  • उच्च सूर्यातप के कारण निम्न दाब की परिस्थिति उत्पन्न  होती है | उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की पवनें इस निम्न वायु दाब क्षेत्र पर अभिसरित होती है |
  • अभिसरित वायु संवहन कोष्ठों के साथ ऊपर उठती है | यह क्षोभमंडल के ऊपर 14 किमी की ऊँचाई तक ऊपर चढ़ती है और फिर ध्रुवों की तरफ प्रवाहित होती है |

Classification of winds

Permanent winds/Primary winds/ Prevailing winds/Planetary Winds

  • The trade winds, westerlies and easterlies.

Secondary or Periodic Winds

  • Seasonal winds: These winds change their direction in different seasons. Example: Monsoons in India.
  • Periodic winds: Land and sea breeze, mountain and valley breeze.

Local winds

  • These blow only during a particular period of the day or year in a small area.

Planetary  winds

Trade Winds

  • The trade winds are those blowing from the subtropical high pressure areas towards the equatorial low pressure belt.
  • Therefore, these are confined to a region between 30°N and 30°S throughout the earth’s surface.

Westerlies

  • The westerlies are the winds blowing from the subtropical high pressure belts towards the subpolar low pressure belts.
  • They blow from south­west to northeast in the northern hemisphere and north-west to south-east in the southern hemisphere.

हवाओं का वर्गीकरण

स्थायी पवनें / प्राथमिक पवनें / प्रधान पवनें / वायुमंडलीय पवनें :

  • सन्मार्गी पवनें, पछुआ पवनें और पूर्वी पवनें |

द्वितीयक या आवर्ती पवनें :

  • मौसमी पवनें : ये पवनें अलग-अलग मौसमों में अपनी दिशा में परिवर्तन करती है | उदाहरण : भारत में मॉनसून |
  • आवर्ती पवनें : समुद्र और स्थल समीर, पहाड़ी और घटी पवनें |

स्थानीय पवनें

  • ये दिन या साल के किसी विशेष समय छोटे क्षेत्र में बहती है |

भूमंडलीय हवा

व्यापार  पवनें (सन्मार्गी पवनें)

  • सन्मार्गी पवनें  वे हैं जो उपोष्ण उच्च दाब से विषुवतरेखीय निम्न दाब की ओर बहती है |
  • इसलिए यह पूरी धरती के धरातल के 30° उत्तर और 30° दक्षिण के बीच रहती है |

पछुआ पवने

  • पछुआ पवनें वे पवनें हैं जो उपोष्ण उच्च दाब से अधोध्रुवीय निम्न दाब पट्टियों की ओर बहती है |
  • ये उत्तरी गोलार्द्धों में दक्षिण पश्चिम से उत्तर पश्चिम की ओर बहती है और दक्षिणी गोलार्द्ध में उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पश्चिम में बहती है |

Secondary winds

Monsoons

  • The monsoons are characterized by seasonal reversal of wind direction.
  • During summer, the trade winds of southern hemisphere are pulled northwards by an apparent northward movement of the sun and by an intense low pressure core in the north-west of the Indian sub­continent.
  • While crossing the equator, these winds get deflected to their right under the effect of Coriolis force.

Valley breeze and Mountain Breeze:

  • In mountainous regions, during the day the slopes get heated up and air moves upslope.
  • To fill the resulting gap, the air from the valley blows up the valley. This wind is known as the valley breeze.
  • During the night the slopes get cooled and the dense air descends into the valley as the mountain wind.

Local winds

Tertiary wind or Local winds:

  • Local differences of temperature and pressure produce local winds.
  • Such winds are local in extent and are confined to the lowest levels of the troposphere.

Loo –(Harmful Wind)

  • In the plains of northern India and Pakistan, sometimes a very hot and dry wind blows from the west in the months of May and June, usually in the afternoons.

It is known as Loo.

द्वितीयक हवा

मॉनसून

  • मॉनसून को हवा की दिशा को मौसम के अनुसार उलट जाने से समझा जा सकता है |
  • गर्मियों के दौरान दक्षिणी गोलार्द्ध की सन्मार्गी पवनें, उत्तर की तरफ सूर्य की उत्तर दिशा की स्पष्ट गति द्वारा और भारतीय उपमहाद्वीप की उत्तर-पश्चिम में तीव्र निम्न दाब द्वारा खिंची जाती है |
  • विषुवत रेखा से जाने के बाद ये पवनें कोरिओलिस बल के प्रभाव के तहत अपनी दाहिनी तरफ विक्षेपित होते हैं |

पर्वत व घाटी पवनें :

  • दिन के दौरान पर्वतीय प्रदेशों में ढलाव गर्म हो जाते है और वायु ढलाव के साथ-साथ ऊपर उठती है |
  • इस स्थान को भरने के लिए वायु घाटी से बहती है | इन पवनों को घाटी समीर कहते हैं |
  • रात के दौरान पर्वतीय ढलाव ठन्डे हो जाते है सघन वायु घाटी में नीचे उतरती है |

स्थानीय हवा

स्थानीय पवनें या तृतीयक पवनें :

  • स्थानीय तापमान और दाब में अंतर से स्थानीय हवाओं का जन्म होता है |
  • ऐसी हवाएं सिर्फ स्थानीय सीमाओं तक फैली होती हैं और क्षोभ मंडल के निचली स्तर तक ही सीमित रहती है |

लू (हानिकारक पवन)

  • उत्तरी भारत और पाकिस्तान के मैदानी भागों में सामान्यतः दोपहरों में मई और जून के माह में पश्चिम से अत्यधिक गर्म और शुष्क हवा कभी कभी बहती हैं |
  • इसे लू के नाम से जाना जाता है |

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