HCS History Examination Notes (2018) || IAS Online Exam Preparation

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Advent of Europeans In India

The Third Carnatic War (1757-1763 AD.)

  • The seven Years War broke out in Europe in 1756 A.D.
  • In this War, England and France joined opposite camps.
  • The two Companies renewed their hostility in India.
  • Thus began the Third Carnatic War.
  • This time the war passed beyond the limits of the Carnatic and reached Bengal as well, where the English captured the French possession of Chandernagore in 1757.
  • For this purpose the French sent a strong contingent of force headed by Count-de-Lally.
  • Lally started his work vigorously.

Result:

  • It cleared the way for the establishment of the British Empire in India unhampered by any European rival.
  • Subsequently, during their rivalries for the power, they did not hesitate to seek the assistance of either the French or the English.
  • By the end of the Third Carnatic War, the Nawab of the Carnatic practically became a client of the East India Company.

Causes of French failure

  • Superiority of the British naval power: This enabled the English to bring soldiers from Europe and to send supplies from Bengal. But the French were unable to replenish their resources from outside.
  • English East India Company was a private company but the French Company was dependent on the government and lacked the spirit of bold, individual and corporate effort.
  • French had only one strong base at Pondicherry while British had three important bases in India(Calcutta, Madras and Bombay).
  • The British Company had many capable men like Clive, Lawrence, and Eyre Coote etc. in its service.
  • Further, French’s entry point in mainland India was Deccan. In comparison to Deccan, the Bengal was much more prosperous.
  • Recall of Dupleix by French Government was a blunder. The vacuum created was not filled by the persons who succeeded him.

Impact of Europeans on India’s foreign trade:

 

  • Tremendous increase in the demand for Indian textiles for both the Asian markets and later the European market.
  • Bilateral trade between the Coromandal and various parts of Southeast Asia such as Malacca, Java and the Spice Islands.

HCS History Examination Notes

यूरोपियों का भारत में आगमन

कर्नाटक का तीसरा युद्ध (1757-1763 ई.)

  • 1756 ईस्वी में इस युद्ध की शुरुआत यूरोप में हुई और 7 वर्षों के लिए चला |
  • इस युद्ध में, इंग्लैंड और फ्रांस में विरोधी खेमों में बंट गए |
  • दोनों कंपनियों ने भारत में अपनी शत्रुता को फिर से जन्म दिया |
  • इस प्रकार तीसरा कर्नाटक युद्ध शुरू हुआ बार युद्ध कर्नाटक की सीमाओं को पार कर गया और बंगाल तक पहुंच गया
  • जहां 1757 में इंग्लैंड ने फ्रेंच अधीन चन्दननगर पर कब्जा कर लिया |
  • इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए फ़्रांस ने टॉमस आर्थर डी लैली के नेतृत्व में एक मजबूत सेना दल भेजा।
  • लैली ने अपनी जिम्मेदारी को आक्रामक ढंग से निभाया |

परिणाम:

  • इसी के साथ भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना के लिए द्वार खुल गए एवं इसमें कोई यूरोपीय प्रतिद्वंद्वी नहीं था
  • इसके बाद, सत्ता के लिए अपनी प्रतिद्वंद्विता बावजूद भी वे फ्रांसीसी या अंग्रेज़ों की सहायता लेने में संकोच नहीं करते थे।
  • तीसरे कर्नाटक युद्ध के अंत में, कर्नाटक के नवाब व्यावहारिक रूप से ईस्ट इंडिया के वादार्थी बन गए

फ़्रांस की असफलता के कारण-

  • ब्रिटिश नौसेना शक्ति का वर्चस्व :इसका उपयोग करके वो यूरोप से नए सैनिकों को ला सकते थे और बंगाल से माल का आदान-प्रदान कर सकते थे | परन्तु फ्रांसीसी अपने संसाधनों को बाहर भेजने में असमर्थ थे |
  • अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी एक निजी कंपनी थी, लेकिन फ्रांसीसी कंपनी सरकार पर निर्भर थी और इसलिए उनमे कड़े फैसले लेने का ,व्यक्तिगत तौर पर निर्णय लेने का, और निगमित रूप से निर्णय लेने का  साहस नहीं था |
  • फ़्रांस के पास केवल पांडिचेरी में ही मजबूत आधार था जबकि ब्रिटिशों के पास भारत में तीन महत्वपूर्ण केंद्र (कलकत्ता, मद्रास और बॉम्बे) थे
  • ब्रिटिश कम्पनी के पास कई सक्षम व्यक्ति सेवाओं में थे जैसे क्लाइव,लॉरेंस और आइवर कोट आदि |
  • इसके आलावा फ्रेंच भारत में दक्कन से प्रवेश करते थे | और ब्रिटिश बंगाल से जो दक्कन की तुलना में अधिक समृद्ध था |
  • फ़्रेंच सरकार द्वारा ड्यूप्लेक्स को वापिस बुलाना सबसे बड़ी गलती थी | इस प्रकार जो रिक्ति हुई वह उनके उत्तराधिकारियों द्वारा नहीं भरी जा सकी |

भारत के विदेश व्यापार पर यूरोप का प्रभाव:

  • एशियाई बाजारों और बाद में यूरोपीय बाजार दोनों में भारतीय वस्त्रों की मांग में भारी वृद्धि
  • कोरोमंडल और दक्षिण पूर्व एशिया के विभिन्न हिस्सों जैसे मलक्का, जावा और स्पाइस द्वीप के बीच द्विपक्षीय व्यापार।

Indian states and societies in 18th Century:

  • After 17th century, Indian politics had undergone many major changes.
  • With the gradual weakening and decline of the Mughal Empire, local and economic forces began to arise and assert themselves.
  • These changes were rising of large number of independent and semi-independent powers such as Bengal, Awadh, Hyderabad, Mysore and the Maratha Kingdom on the debris of Mughal Empire.

Polity and administration of these states

  • While the overall political and administrative framework were same in these two states or zone but politics were different because of local conditions.
  • Most of the rulers had acknowledged the nominal Mughal supremacy to legitimize their positions.

Economy

  • None of these states succeeded in curbing the economic crisis started in the 17th century.
  • All of them remained rent extracting states.

Hyderabad

  • Founded by Chin Qilich Khan.
  • He was given the title of Nizam-ul-mulk.
  • He had founded the Asaf Jahi dynasty

Bengal:

Murshid Quli Khan

  • Murshid Quli Khan was diwan of Bengal under Aurangzeb.
  • He had been effective ruler of Bengal since 1700.

18 वीं सदी में भारतीय राज्य और समाज :

  • 17 वीं शताब्दी के बाद, भारतीय राजनीति में कई बड़े बदलाव हुए।
  • मुगल साम्राज्य की धीरे धीरे कमजोरी और पतन के फलस्वरूप स्थानीय एवं आर्थिक ताकतों का उदय होना आरम्भ हो गया एवं इन्होने स्वयं को मजबूत किया |
  • इन परिणामों के फलस्वरूप बंगाल, अवध, हैदराबाद, मैसूर और मराठा साम्राज्य जैसे स्वतंत्र और अर्ध-स्वतंत्र शक्तियों का उदय हुआ |

राज्यों का राजतन्त्र और प्रशासन

  • हालांकि, इन दोनों राज्यों अथवा क्षेत्रों का समग्र राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचा समान था,लेकिन  स्थानीय स्थितियों के कारण राजनीति अलग-अलग थी।
  • अधिकांश शासकों ने अपनी स्थिति को बरकार रखने के लिए मुगल वर्चस्व को केवल नाममात्र रूप से स्वीकार किया |

अर्थव्यवस्था

  • इन राज्यों में से एक भी राज्य 17 वीं शताब्दी के आर्थिक संकट को रोकने में सफल नहीं हुआ |
  • इनमे से सभी राज्य कर वृद्धि करने की पद्धति का अनुसरण करते थे |

हैदराबाद

  • इसकी स्थापना चीन क्लिच खान ने की |
  • इसे निज़ाम-उल-मुल्क आसफजाह का शीर्षक दिया गया |
  • इसने आसफजाही  राजवंश की स्थापना की |

बंगाल:

मुर्शिद कुली खान

  • मुरशीद कुली खान औरंगजेब के अधीन बंगाल का दिवान था।
  • वह वर्ष 1700 से बंगाल का प्रभावी शासक रहा |

Economy in the administration

  • Reorganized the finances of Bengal by transferring large parts of Jagir lands into khalisah (crown) lands by – Fresh revenue settlement
  • Introduced revenue-farming system.
  • He also granted agricultural loans (taccavi) to the poor cultivators to relieve their distress and enable them to pay land revenue in time.

Ali Vardi Khan

  • Ali Vardi Khan was the Nawab of Bengal during 1740–1756.
  • He toppled the Nasiri Dynasty of the Nawabs and took powers of the Nawab.

Religious policies of Nawabs of Bengal

  • Gave equal opportunities for employment to Hindus and Muslims.
  • Filled the highest civil posts and many of the military posts with Bengalis, most of whom were Hindus.

Trade and commerce

  • All the Nawabs knew that trade benefited people and so they gave encouragement to all merchants, Indian or Foreign.
  • Regular thanas and chowkies were established so that roads and rivers remain safe from thieves and robbers.

How the Bengal Nawab’s short-sightedness, negligence, ignorance and lack of contact with other world cost the state dearer?

  • They did not firmly put down the increasing tendency of the English.
  • After 1707 East India Comany had started to use military force, or to threaten its use, to get its demands accepted.
  • Even judicial officials, the Qazis and muftis, were taking bribes.

प्रशासन में अर्थव्यवस्था

  • जागीर के बड़े हिस्सों को खालिसा भूमि में मिलाकर (वह भूमि जो प्रत्यक्ष रूप से शासन के अधीन हो) , नई राजस्व प्रणाली को स्थापित करके , बंगाल की वित्तीय प्रणाली का पुनर्गठन किया |
  • राजस्व-कृषि प्रणाली की शुरुआत की |
  • उन्होंने गरीबों को उनके संकट से मुक्त करने के लिए कृषि ऋण (तकावी ऋण) भी प्रदान किया और उन्हें समय पर भूमि राजस्व का भुगतान करने में सक्षम बनाया।

अली वर्दी खान

  • अली वर्दी खान 1740-1756 के दौरान बंगाल का नवाब था |
  • उसने नवाबों के नासिरी राजवंश को उखाड़ फेंका और नवाबों की शक्तियां हासिल कर ली |

बंगाल के नवाबों की धार्मिक नीतियां

  • हिंदुओं और मुसलमानों को रोजगार के लिए समान अवसर दिए।
  • उच्चतम पदों और कई सैन्य पदों को बंगालियों द्वारा भरा जिनमे से अधिकांश हिन्दू थे |

व्यापार एवं वाणिज्य

  • सभी नवाबों को पता था कि व्यापार ने लोगों को फायदा पहुंचाया और इसलिए उन्होंने सभी व्यापारियों, भारतीयों अथवा विदेशी व्यापारियों को प्रोत्साहन दिया
  • थानों और चौकियों की स्थापना की गई ताकि स्थल मार्ग तथा जलमार्ग चोर-लुटेरों से सुरक्षित रहे |

बंगाल के नवाब की अदूरदर्शी सोच , लापरवाही, अज्ञानता और अन्य क्षेत्रों के साथ सम्पर्क न रखना राज्य को महंगा पड़ा जिसके निम्नलिखित कारण थे-

  • उन्होंने अंग्रेजों की बढ़ती प्रवृत्ति को मजबूती से नहीं दबाया |
  • 1707 में ईस्ट इंडिया कम्पनी ने अपनी मांगों को स्वीकार करने के लिए सैन्य बल का उपयोग करना शुरू कर दिया अथवा  इसका इस्तेमाल करने के लिए धमकी देने लगे |
  • यहाँ तक की न्यायिक अधिकारी,काजी और मुफ़्ती भी रिश्वत लेते थे |

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