HCS Geography Online Study Notes | Online Exam Preparation | 2018

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Solar Radiation, Heat Balance And Temperature

Insolation (Incoming solar radiation)

  • Primary source of energy for earth is the sun.
  • The sun radiates its energy in all directions into space in short wavelengths.
  • The earth’s surface receives only a part of this radiated energy because of the small size of the earth and its distance from the sun. (Approx 2 units out of 1,00,00,00,000 units of energy radiated by the sun).

Factors affecting insolation:

  • Place and time.
  • Insolation is more in summers and less in winters.
  • Rotation of the earth on its axis
  • The angle of incidence of the sun’s rays
  • Duration of the day
  • Transparency of the atmosphere

Rotation of the earth on its axis:

  • The earth rotates on its own axis which makes an angle of 66.5 with the plane of its orbit around the sun.
  • The amount of insolation received changes with latitudes on the rotation of earth on this inclined axis.

The angle of incidence of the sun’s rays:

  • Since the earth is a geoid resembling a sphere, the sun’s rays strike the surface at different angles at different places and changes with the latitude of the place.
  • The higher the latitude, the less is the angle they make with the surface of the earth.

HCS Geography Online Study Notes

धरती के लिए ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत सूर्य है |

  • सूर्य अपनी ऊर्जा को अन्तरिक्ष में छोटे तरंग दैर्ध्य में सभी दिशाओं में विकरित करता है |
  • पृथ्वी के छोटे आकार और इसके सूर्य से दूरी के कारण धरती के सतह पर इस विकरित ऊर्जा का एक छोटा हिस्सा ही पहुँच पाता है  ( सूर्य द्वारा विकरित 1,00,00,00,000 इकाई ऊर्जा से मात्र लगभग 2 इकाई ऊर्जा ) |

सुर्यातप को प्रभावित करने वाले कारक :

  • स्थान और समय
  • सुर्यातप गर्मियों में अधिक और ठण्ड में कम होता है |
  • पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना |
  • सूर्य की किरणों का आपतित कोण |
  • दिन की अवधि |
  • वायुमंडल की पारदर्शिता |

पृथ्वी का इसके धुरी पर घूमना :

  • पृथ्वी अपने स्वयं के अक्ष पर घुमती है जो सूर्य की परिक्रमण की समतल  कक्षा के साथ 66.5 डिग्री का कोण बनाती है |
  • इस झुके अक्ष पर धरती के घुमने पर अक्षांशों में परिवर्तन के साथ प्राप्त होने वाले सुर्यातप की मात्रा में भी परिवर्तन होता है |

सूर्य की किरणों का आपतित कोण

  • धरती एक गोले के आकार लिए हुए भू-आभ है, इसके कारण सूर्य की किरणें सतह पर विभिन्न स्थानों पर विभिन्न कोण बनाती हुई पड़ती है और स्थानों के अक्षांशों के साथ परिवर्तित होती है |
  • अक्षांश जितना उच्च होगा, धरती के सतह के साथ बनने वाला कोण उतना ही कम होगा |

Spatial distribution of Insolation

Spatial Distribution of Insolation at the Earth’s Surface

  • Maximum insolation is received over the subtropical desert, where the cloudiness is the least.
  • The equator receives comparatively less insolation than the tropics (Clouds obstructs the sunlight at equator).
  • Generally, at the same latitude, the insolation is more over the continent than over the oceans.

Heating and cooling of the atmosphere

Terrestrial Radiation

  • All objects whether hot or cold, emit radiant energy continuously.
  • The temperature of an object determines the wavelength of radiation. Temperature and wavelength are inversely proportional.
  • Hotter the object, shorter is the wavelength.
  • So, the earth’s surface after being heated up by the insolation (in the form of short waves), becomes a radiating body.

Conduction:

  • Conduction is the process of heat transfer from a warmer object to a cooler object when they come in contact with each other.
  • The flow of heat energy continues till the temperature of both the objects become equal or the contact is broken.
  • The conduction in the atmosphere occurs at the zone of contact between the atmosphere and the earth’s surface.
  • Conduction is important in heating the lower layers of the atmosphere.

धरती के सतह पर सुर्यातप का स्थानिक वितरण :

  • अधिकतम सुर्यातप उपोष्णकटिबंधीय रेगिस्तानों में प्राप्त होता है, जहाँ पर मेघाच्छादन सबसे कम होते हैं |
  • उष्णकटिबंधीय इलाकों की तुलना में विषुवत रेखा कम सुर्यातप को प्राप्त करता है ( विषुवत रेखा पर बादल सूर्य की रौशनी में रूकावट डालते हैं ) |
  • सामान्यतः समान अक्षांश पर महाद्वीपों में महासागरों की तुलना में अधिक सुर्यातप होता है |

वायुमंडल का तापन और शीतलन

स्थानिक सुर्यातप

  • सारे पदार्थ चाहे वह गर्म हो या ठंडा, दीप्तिमान ऊर्जा को निरंतर उत्सर्जित करते हैं |
  • किसी पदार्थ का तापमान सुर्यातप की तरंग दैर्ध्यता को निर्धारित करता है | तापमान और तरंग दैर्ध्यता व्युतक्रमानुपाति आनुपातिक होते हैं |
  • पदार्थ जितना अधिक गर्म रहता है, तरंग दैर्ध्यता उतनी ही छोटी होती है |
  • इसीलिए धरती का सतह सुर्यातप द्वारा गर्म होने के बाद ( छोटे तरंग दैर्ध्य के रूप में ), एक विकिरण पिंड बन जाता है |

चालन :

  • ऊष्मा का एक गर्म पदार्थ से एक ठन्डे पदार्थ में, उनके एक दुसरे के संपर्क में आने पर, स्थानांतरण की प्रक्रिया को चालन कहते हैं |
  • ऊष्मा की ऊर्जा का प्रवाह तब तक जारी रहता है जब तक कि दोनों पदार्थों का तापमान समान न हो जाए या उनके बीच संपर्क न टूट जाये |
  • वायुमंडल में चालन संपर्क के उस क्षेत्र  में प्रारंभ होता है जो वायुमंडल और धरती के सतह के बीच होता है |
  • वायुमंडल की निचली परतों के तापन में चालन महत्वपूर्ण होता है |

Heat budget of earth:

  • The earth as a whole does not accumulate or lose heat. It maintains its temperature.
  • This is why the earth neither warms up nor cools down despite the huge transfer of heat that takes place.
  • This can happen only if the amount of heat received in the form of insolation equals the amount lost by the earth through terrestrial radiation.

Albedo:

  • It is a reflection coefficient (Value <1)
  • When the solar radiation passes through the atmosphere, some amount of it is reflected, scattered and absorbed.
  • The reflected amount of radiation is called as the albedo of the earth.
  • It will be different for different surfaces.

Variation in the net budget at the earth’s surface:

  • Although the earth as a whole maintains a balance between the insolation and the terrestrial radiation, this is not true what is observed at different latitudes.
  • There are variations in the amount of insolation received at different latitudes.
  • In the tropical region, the amount of insolation is higher than the amount of terrestrial radiation.Hence it is a region of surplus heat.
  • This process of redistribution and balancing of latitudinal heat is commonly known as Latitudinal Heat Balance.

पृथ्वी का ऊष्मा बजट :

  • सम्पूर्ण धरती न तो ऊष्मा को संचय करती है और न इसे ह्रास करती है | यह अपने तापमान को कायम रखती है |
  • इतनी बड़ी मात्रा में ऊष्मा के स्थानांतरण के बाद भी इसीलिए धरती न तो गर्म होती है और न ही ठंडा |
  • यह सिर्फ तभी संभव है जब सुर्यातप के रूप में प्राप्त ऊष्मा की मात्रा धरती द्वारा स्थानिक विकिरण द्वारा ह्रासित ऊष्मा की मात्रा के बराबर हो |

प्रकाशुनापात :

  • यह परावर्तन का गुणक है | ( < 1 )
  • जब सौर विकिरण वायुमंडल  से गुजरती है तो इसका कुछ हिस्सा परावर्तित, अवशोषित और प्रकीर्णित कर दिया जाता है |
  • विकिरण की परावर्तित मात्रा को ही धरती का प्रकाशुनापात कहते हैं |
  • यह अलग सतहों के लिए भिन्न होता है |

पृथ्वी की सतह पर शुद्ध बजट में भिन्नता:

  • यद्यपि पूरी तरह से सम्पूर्ण पृथ्वी सुर्यातप और स्थानिक विकिरण के बीच एक संतुलन बनाए रखती है, परन्तु जैसा कि देखा गया है की यह अलग अलग अक्षांशो के लिए भिन्न है |  
  • भिन्न- भिन्न अक्षांशों पर प्राप्त सुर्यातप की मात्रा में भिन्नता होती है |
  • उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में सुर्यातप की मात्रा स्थानिक विकिरण की मात्रा से अधिक होती है | इसीलिए ये क्षेत्र अधिशेष ऊष्मा के क्षेत्र हैं |
  • इस प्रकार की अक्षांशीय ऊष्मा का पुनर्वितरण और संतुलन की प्रक्रिया सामान्यतः अक्षांशीय ऊष्मा संतुलन कहलाती है |  

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