HCS Examination Online Preparation || HCS Exam Material- Geography

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Clouds and Precipitation

Clouds

  • Cloud is a mass of minute water droplets or tiny crystals of ice formed by the condensation of the water vapour in free air at considerable elevations.
  • Caused mainly by the adiabatic cooling of air below its dew point.
  • They take various shapes as they are formed at some height over the surface of the earth.

Cirrus Clouds

  • Formed at high altitudes (8,000– 12,000m).
  • Thin and detached clouds having a feathery appearance.

Cumulus Clouds

  • Look like cotton wool.  
  • Exist in patches and can be seen scattered here and there. They have a flat base.

Stratus Clouds

  • Layered clouds covering large portions of the sky.
  • Generally formed either due to loss of heat or the mixing of air masses with different temperatures.

Nimbus Clouds

  • Black or dark gray in colour.
  • Form at middle levels or very near to the surface of the earth.

A combination of these four basic types can give rise to the following types of clouds:

  • High clouds–Cirrus, Cirrostratus, Cirrocumulus
  • Middle clouds–Altostratus and Altocumulus
  • Low clouds–Stratocumulus and Nimbostratus (long duration rainfall cloud)
  • Clouds with extensive vertical development–Cumulus and Cumulonimbus (thunderstorm cloud)

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मेघ

  • बादल पानी की छोटी बूंदो या बर्फ के छोटे रवों की संहति होता है जो की पर्याप्त ऊंचाई पर स्वतंत्र हवा में जलवाष्प के संघनन के कारण बनते है |
  • यह मुख्य रूप से वायु के ओसांक बिंदु से नीचे उसके समोष्ण शीतलन द्वारा होता है |
  • चूँकि बादल का निर्माण पृथ्वी की सतह से कुछ ऊंचाई पर होता है,इसलिए ये विभिन्न आकारों के होते है |

पक्षाभ मेघ

  • पक्षाभ मेघों का निर्माण  8000-12000 मीटर की ऊंचाई पर होता है |
  • ये पतले तथा बिखरे हुए बादल होते है, जो पंख के समान प्रतीत होते है |

कपासी मेघ

  • कपासी मेघ रुई के समान दिखते है |
  • ये छितरे तथा इधर-उधर बिखरे देखे जा सकते है | ये चपटे आधार वाले होते है |

स्तरी मेघ

  • ये बादल परतदार होते है जो की आकाश के बहुत बड़े भाग पर फैले रहते है |
  • ये बादल सामान्यतः या तो ऊष्मा के ह्रास या अलग-अलग तापमानों पर हवा के आपस में मिश्रित होने से बनते है |

वर्षा मेघ

  • वर्षा मेघ काले या गहरे स्लेटी रंग के होते है |
  • ये मध्य स्तरों या पृथ्वी की सतह के काफी नजदीक बनते है |

ये चार मूल रूपों के बादल मिलकर निम्नलिखित रूपों के बादलों का निर्माण करते है –

  • ऊँचे बादल-पक्षाभ मेघ,पक्षाभ स्तरी, पक्षाभ कपासी
  • मध्य ऊंचाई के बादल-स्तरी मध्य तथा कपासी मध्य
  • कम ऊंचाई के बादल- स्तरी कपास, स्तरी वर्षा मेघ ( कपासी वर्षा मेघ )
  • लम्बवत रचना वाले बादल -कपासी एवं कपासी वर्षी बादल (आंधी तूफान) |

Precipitation

  • The process of continuous condensation in free air helps the condensed particles to grow in size.
  • When the resistance of the air fails to hold them against the force of gravity, they fall onto the earth’s surface.
  • So after the condensation of water vapour, the release of moisture is known as Precipitation.
  • This may take place in liquid or solid form.

Precipitation types

Virage:

  • When raindrops evaporate before reaching the earth while passing through dry air.

Drizzle:

  • It is light rainfall with drop size being less than 0.5 mm

Snowfall:

  • When the temperature is lower than the 0° C, precipitation takes place in the form of fine flakes of snow and is called snowfall.

Rainfall types

Convectional Rainfall:

  • The air on being heated, becomes light and rises up in convection currents.
  • As it rises, it expands and loses heat and consequently, condensation takes place and cumulous clouds are formed.

Orographic Rainfall

  • It is also known as the Relief rain.
  • When the saturated air mass comes across a mountain, it is forced to ascend and as it rises, it expands, the temperature falls and the moisture is condensed.
  • This type of precipitation occurs when warm, humid air strikes an orographic barrier.

वर्षण 

  • स्वतंत्र हवा में लगातार संघनन की प्रक्रिया संघनित कणों के आकार को बड़ा करने में मदद करती है |
  • जब हवा का प्रतिरोध गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध उनको रोकने में असफल हो जाता है तब ये पृथ्वी की सतह पर गिरते है |
  • इसलिए जलवाष्प के संघनन के बाद नमी के मुक्त होने की अवस्था को वर्षण कहते है |
  • यह द्रव या ठोस अवस्था में हो सकता है |

वर्षण के प्रकार

विराज:

  • जब वर्षा की बूंदें सूखी हवा से गुजरते समय पृथ्वी पर पहुंचने से पहले वाष्पीकरण करती हैं।

बूंदा-बांदी:

  • यह हल्की वर्षा होती है, जिसकी बूंदो का आकार 0.5 मिमी से कम होता है

हिमपात

  • जब तापमान 0° C से कम होता है तब वर्षण हिमतूलों के रूप में होता है जिसे हिमपात कहते है |

वर्षा के प्रकार

संवहनीय वर्षा

  • हवा गर्म हो जाने पर हल्की होकर सवंहन धाराओं के रूप रूप में ऊपर की ओर उठती है
  • वायुमंडल की ऊपरी परत में पहुँचने के बाद यह फैलती है तथा तापमान के कम होने से ठंडा होती है ,परिणामस्वरूप संघनन की क्रिया होती है तथा कपासी मेघों का निर्माण होता है |

पर्वतीय वर्षा

  • इसे उच्चावच वर्षा के रूप में भी जाना जाता है |
  • जब संतृप्त वायु की संहति पर्वतीय ढाल पर आती है तब यह ऊपर उठने के लिए बाध्य हो जाती है तथा जैसे ही यह ऊपर की ओर उठती है ,यह फैलती है तापमान गिर जाता है तथा आर्द्रता संघनित हो जाती है |
  • इस प्रकार की वर्षा तब होती है जब गर्म, आर्द्र हवा किसी पर्वतीय बैरियर से टकराती है |

World Distribution of Rainfall

  • Different places on the earth’s surface receive different amounts of rainfall in a year and that too in different seasons.
  • Moving from the equator towards the poles: Rainfall goes on decreasing.
  • The coastal areas of the world receive greater amounts of rainfall than the interior of the continents.

Moderate rainfall varying from 100–200 cm per annum:

  • Interior continental areas receive.
  • The coastal areas of the continents receive moderate amount of rainfall.

Rainfall varying between 50 – 100 cm per annum:

  • The central parts of the tropical land and the eastern and interior parts of the temperate lands receive

Areas having less than 50 cm per annum:

  • Areas lying in the rain shadow zone of the interior of the continents and high latitudes
  • Seasonal distribution of rainfall provides an important aspect to judge its effectiveness.

संसार में वर्षा वितरण

  • एक साल में पृथ्वी की सतह पर अलग अलग भागों में होने वाले वर्षा की मात्रा भिन्न भिन्न होती है तथा यह अलग-अलग मौसमों में भी होती है |
  • विषुवत वृत से ध्रुवों की तरफ जाने पर वर्षा की मात्रा धीरे धीरे घटती है |
  • विश्व के तटीय क्षेत्रों में महाद्वीपों के भीतरी भागों की अपेक्षा अधिक वर्षा होती है |

मध्यम वर्षा (प्रतिवर्ष 100–200 cm )

  • महाद्वीपों के आंतरिक भाग ऐसी वर्षा प्राप्त करते है |
  • महाद्वीपों के तटीय क्षेत्रों में वर्षा की मात्रा मध्यम होती है |

ऐसे क्षेत्र जहाँ प्रतिवर्ष वर्षा 50 से 100 सेंटीमीटर के बीच होती है |   

  • उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र के केंद्रीय भाग तथा शीतोष्ण क्षेत्रों के पूर्वी एवं भीतरी भाग

ऐसे क्षेत्र जहाँ प्रतिवर्ष वर्षा 50 सेन्टीमीर से कम होती है |

  • महाद्वीप के भीतरी भाग के वृष्टि छाया क्षेत्रों में पड़ने वाले भाग तथा ऊँचे अक्षांशो वाले क्षेत्र
  • वर्षा का मौसमी वितरण इसकी प्रभाविता को समझने का एक महत्वपूर्ण पहलु है |

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