HCS Exam Online Preparation | History Study Content | UPSC | IAS

HCS Exam Online Preparation | History Study Content | UPSC | IAS

HCS Exam Online Preparation | History Study Content | UPSC | IAS

HCS Exam Online Preparation | History Study Content | UPSC | IAS

HCS Exam Online Preparation | History Study Content | UPSC | IAS

Peasant movements (1857-1947)

Peasantry under Colonialism:

Causes for impoverishment of the Indian peasantry:

  • Transformation of the agrarian structure due to colonial economic policies
  • Ruin of the handicrafts leading to overcrowding of land
  • The new land revenue system, colonial administrative and judicial system.
  • High rents, illegal levies, arbitrary evictions and unpaid labour in zamindari areas.

Early Peasant movements:

Indigo Revolt (1859-60):

Place :Bengal

Cause of revolt: Exploitation by Indigo planters.

  • They forced the local peasants to grow indigo on their lands instead of the more paying crops like rice.
  • Forced the peasants to take advance sums and enter into fraudulent contracts.

Peasant response:

  • Led by Digambar Biswas and Bishnu Biswas of Nadia district, they decided not to grow indigo under duress and resisted the physical pressure of the planters and their lathiyals (retainers).
  • Organised a counter force against the planters’ attacks.
  • Replied by going on a rent strike by refusing to pay the enhanced rents .

Government response:

  • Appointed an Indigo commission to inquire into the problem of indigo cultivation.
  • Based on its recommendations, the Government issued a notification in November 1860 that the ryots could not be compelled to grow indigo and ensured that all disputes were settled by legal means.

HCS Exam Online Preparation

किसान आंदोलन

उपनिवेशवाद के अंतर्गत  किसान-वर्ग :

भारतीय किसान वर्ग की दरिद्रता के कारण :

  • उपनिवेशवादी आर्थिक नीति की वजह से कृषि संरचना में परिवर्तन |
  • भारतीय हस्तशिल्प के विनाश से भूमि पर अत्यधिक दबाव बढ़ा  
  • नयी भू-राजस्व प्रणाली, उपनिवेशवादी प्रशासनिक तथा न्यायिक व्यवस्था |
  • भारतीय कृषक लगान की ऊँची दरों, अवैध करों, भेदभावपूर्ण बेदखली एवं जमीदारी क्षेत्रों में बेगार जैसी बुराइयों से त्रस्त थे |

आरंभिक कृषक आन्दोलन :

नील आन्दोलन ( 1859-60 )

स्थान : बंगाल

विद्रोह का कारण : नील के बगान मालिकों द्वारा शोषण |

  • यूरोपीय बाजारों की मांग की पूर्ति के लिए नील उत्पादकों ने किसानों को नील की अलाभकर खेती के लिए बाध्य किया  |
  • करार के वक्त  मामूली सी रकम अग्रिम के रूप में दे जाती थी और धोखा देकर उसकी कीमत बाज़ार भाव से कम आंकी जाती थी |

किसानों की प्रतिक्रया :

  • नादिया जिले के दिगंबर विश्वास तथा विष्णु विश्वास के नेतृत्व में, उन्होंने तय किया कि वे दवाब में नील का उत्पादन नहीं करेंगे तथा साथ ही उन्होंने  नील उत्पादकों एवं उनके लठैतों के शारीरिक दबाव का विरोध किया |
  • उत्पादकों के आक्रमण के विरुद्ध  उन्होंने एक जवाबी सेना का गठन किया |
  • बढे हुए लगान को देने से इनकार करके वे भूमिकर हड़ताल पर जाकर उन्होंने इसका जवाब दिया |

सरकार की प्रतिक्रिया :

  • नील उत्पादन में होने वाली समस्याओं की जाँच करने के लिए एक नील आयोग का गठन किया|
  • इसकी सिफारिशों के आधार पर, सरकार ने नवम्बर 1860 में एक अधिसूचना जारी की कि किसानों को नील की खेती के लिए विवश नहीं किया जाएगा तथा यह आश्वासन दिया गया कि सभी विवादों का निपटारा वैधानिक तरीकों से किया जायेगा |

Deccan Riots (1875):

Place: Deccan

  • The ryots of Deccan region of western India suffered heavy taxation under the Ryotwari system.
  • Peasants found themselves trapped in a vicious network with the moneylender as the exploiter and the main beneficiary.
  • These moneylenders were mostly outsiders: Marwaris or Gujaratis.

Peasant response:

  • In 1874, a social boycott movement organised by the ryots against the “outsider” moneylenders.
  • Ryots refused to buy from their shops.
  • No peasant would cultivate their fields.
  • The barbers, washermen, shoemakers would not serve them.

Government response:

  • The Government succeeded in repressing the movement.
  • Deccan Agriculturists Relief Act was passed in 1879.
  • This time also, the modern nationalist intelligentsia of Maharashtra supported the peasants’ cause.

The Kisan Sabha Movement

  • Cause: After the 1857 revolt, the Awadh taluqdars had got back their lands.
  • This strengthened the hold of the taluqdars or big landlords over the agrarian society of the province.
  • The majority of the cultivators were subjected to high rents, summary evictions (bedakhali), illegal levies, renewal fees or nazrana.

दक्कन विद्रोह  ( 1875 ) :

स्थान : दक्कन

  • दक्षिण भारत के दक्कन क्षेत्र के किसान रैयतवाड़ी बंदोबस्त के अंतर्गत भारी कराधान से पीड़ित थे |
  • किसानों ने खुद को ऋणदाताओं के कुचक्र में फँसा हुआ पाया क्योंकि शोषणकर्ता तथा लाभार्थी दोनों ही ऋणदाता थे |
  • ये साहूकार अधिकतर बाहरी थे : मारवाड़ी अथवा गुजराती |

किसानों की प्रतिक्रया :

  • 1874 में, बाहरी साहूकारों के खिलाफ किसानों  ने एक सामाजिक बहिष्कार आन्दोलन छेड़ दिया
  • किसानों  ने उनकी दुकानों से सामान खरीदने से इनकार कर दिया |
  • उनके खेतों में काम करने से मना कर दिया |
  • नाइयों,धोबियों, तथा चर्मकारों ने उनकी सेवा करने से इनकार कर दिया |

सरकार की प्रतिक्रया :

  • सरकार आंदोलन का दमन करने में सफल रही |
  • दक्कन कृषक राहत अधिनियम को 1879 में पारित किया गया |
  • इस बार भी, महाराष्ट्र के आधुनिक राष्ट्रवादी बुद्धिजीवियों ने किसानों की माँगों का समर्थन किया |

किसान सभा आंदोलन :

 

  • कारण : 1857 के विद्रोह के बाद, अवध के तालुकदारों को उनकी भूमि लौटा दी गयी थी |
  • इससे प्रांतों के कृषि समाज पर तालुकदारों अथवा ज़मींदारों का नियंत्रण और मजबूत हो गया |
  • किसानों का एक बड़ा वर्ग उच्च लगान, बेदखली, अवैध करों, तथा नजराना से पीड़ित था |

Bardoli Satyagraha:

Cause:

  • The movement sparked off in January 1926 when the authorities decided to increase the land revenue by 30 per cent.
  • The Congress leaders were quick to protest and a Bardoli Inquiry Committee was set up to go into the issue.
  • The committee found the revenue hike to be unjustified.

Methods  adopted by Sardar Patel:

  • Bardoli peasants resolved to refuse payments of the revised assessment until the Government appointed an independent tribunal or accepted the current amount as full payment.
  • Patel Set up 13 chluzvanis or workers’ camps in the taluqa.
  • Bardoli Satyagraha Patrika was brought out to mobilise public opinion.

India Kisan Congress Sabha:

  • Founded in Lucknow in April 1936
  • President: Swami Sahajanand Saraswati
  • General secretary: N.G. Ranga.
  • A kisan manifesto was issued and a periodical under Indulal Yagnik started.
  • The AIKS and the Congress held their sessions in Faizpur in 1936.

Immediate issues:

  • Resettlement of land revenue in Amritsar and Lahore
  • Increase in water rates in canal colonies of Multan and Montgomery where feudal levies were being demanded by the private contractors.
  • Here the peasants went on a strike and were finally able to win concessions.
  • The peasant activity in Punjab was mainly concentrated in Jullundur, Amritsar, Hoshiarpur, Lyallpur and Shekhupura.

बारदोली सत्याग्रह :

कारण :

  • यह आंदोलन जनवरी 1926 में भड़का जब सरकार ने भू-राजस्व को 30 प्रतिशत से बढ़ाने का निर्णय लिया |
  • कांग्रेस के नेताओं ने तुरंत विरोध किया तथा समस्या के समाधान हेतु बारदोली जाँच समिति का गठन किया गया |
  • समिति ने राजस्व में वृद्धि को अनुचित पाया |

सरदार पटेल द्वारा अपनाई गयी पद्धतियाँ :

  • पटेल के नेतृत्व में लोगों ने यह मांग की कि जब तक सरकार एक स्वतंत्र आयोग का गठन नहीं करती अथवा वर्तमान प्रस्तावित लगान वृद्धि को वापिस नही लेती , तब तक बारदोली के किसान लगान का भुगतान नही करेंगे|
  • पटेल ने पूरे तालुके में 13 छावनियों की स्थापना की  
  • जनमत जुटाने के लिए “बारदोली सत्याग्रह” पत्रिका निकाली गयी|

अखिल भारतीय किसान कांग्रेस सभा :

  • अप्रैल 1936 में इसका गठन लखनऊ में किया गया|
  • अध्यक्ष : स्वामी सहजानंद सरस्वती
  • आम सचिव : एन.जी. रंगा
  • एक किसान घोषणापत्र जारी किया गया तथा इंदुलाल यागनिक के निर्देशन में एक पत्र का प्रकाशन शुरू किया गया |

तात्कालिक समस्यायें :

  • अमृतसर एवं लाहौर में भू-राजस्व में परिवर्तन |
  • मुल्तान तथा मांटागोमरी  की नहर वाली बस्तियों में सिंचाई कर में वृद्धि जबकि निजी ठेकेदारों के द्वारा  सामंतवादी करों की माँग की जा रही थी |
  • इस स्थिति में किसान हड़ताल पर चले गए तथा अंततः वे रियायतें प्राप्त करने में सफल रहे |
  • पंजाब में कृषक गतिविधियाँ मुख्य रूप से जालंधर, अमृतसर, होशियारपुर, लैलपुरा , तथा शेखपुरा में केन्द्रित थीं |

Join Frontier IAS Online Coaching Center to prepare for UPSC/HCS/RAS Civil Service comfortably at your home at your own pace/time.

HCS(Prelims+Mains+Interview)   HCS Prelims(Paper 1+Paper 2)

IAS+HCS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    

  RAS+IAS Integrated(Prelims+Mains+Interview)    RAS(Prelims+Mains+Interview)     RAS Prelims     UPSC IAS Prelims      UPSC  IAS (Prelims+Mains+Interview)

Click Here to subscribe Our YouTube Channel

No Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!