HCS Exam Online Preparation | History Study Material | IAS | UPSC Exam

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Maratha Empire

Factors which led to the rise of Marathas

  • Physical environment of the Maratha country.
  • Mountainous region and dense forests helped them to adopt guerilla tactics.
  • Building several forts on the mountains.
  • Spirit of religious unity due to spread of the Bhakti movement in Maharashtra.
  • Social unity fostered by spiritual leaders like Tukaram, Ramdas, Vaman Pandit and Eknath

Shivaji (1627-1680):

  • Born at Shivner in 1627.
  • Father: Shahji Bhonsle  
  • Mother: Jijabai.
  • He inherited the jagir of Poona from his father in 1637.
  • After the death of his guardian, Dadaji Kondadev in 1647, Shivaji assumed full charge of his jagir.

Conflict with Adilshahi sultanate:

Combat with Afzal Khan :

  • In 1657, he attacked the Bijapur kingdom and captured a number of hill forts in the Konkan region.
  • The Sultan of Bijapur sent Afzal Khan against Shivaji.
  • But Afzal Khan was murdered by Shivaji in 1659 in a daring manner.

Clash with the Mughals:

  • The Mughal emperor Aurangzeb was anxious about the rise of Maratha power under Shivaji.

Treaty of Purandar

  • Attack on Shaista khan and Surat, enraged the Mughal emperor, Aurangzeb.
  • In response, he sent Mirza Raja Jai Singh I with an army numbering around 150,000 to defeat Shivaji.
  • Jai Singh’s forces made significant gains and captured many Maratha forts, forcing Shivaji to come to terms with Aurangzeb rather than lose more forts and men.

Reconquest:

  • Then he renewed his wars against the Mughals.
  • In 1670 Surat was plundered 2nd time by him.  He also captured all his lost territories by his conquests.

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मराठा साम्राज्य

मराठों के उदय के कारक

  • मराठा क्षेत्र का भौतिक वातावरण
  • पहाड़ी क्षेत्र और घने जंगलों ने उन्हें गोरिल्ला रणनीति (छापामार युद्ध) अपनाने में मदद की
  • पहाड़ों पर कई किलों का निर्माण किया |
  • महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन के प्रसार के कारण धार्मिक एकता की भावना उत्पन्न हुई |
  • तुकाराम, रामदास, वामन पंडित और एकनाथ जैसे आध्यात्मिक नेताओं ने सामाजिक एकता को बढ़ावा दिया

शिवाजी (1627-1680):

  • इनका जन्म 1627 में शिवनेर में हुआ |
  • पिता: शाहजी भोंसले
  • माता: जीजाबाई
  • उन्हे 1637 में अपने पिता से पूना की जागीर विरासत में मिली
  • अपने संरक्षक दादाजी कोंडदेव की मृत्यु के बाद, 1647 में शिवाजी ने जागीर को पूरी तरह से संभाल लिया |

आदिलशाही सल्तनत के साथ संघर्ष:

अफजल खान के साथ युद्ध :

  • 1657 में, उन्होंने बीजापुर प्रांत पर हमला किया और कोंकण क्षेत्र में कई पहाड़ी किलों पर कब्जा कर लिया।
  • बीजापुर के सुल्तान ने शिवाजी से युद्ध करने के लिए अफजल खान को भेजा।
  • लेकिन  शिवाजी ने 1659 में एक साहसी तरीके अफ़ज़ल खान की हत्या कर दी |

मुगलों से संघर्ष

  • मुगल सम्राट औरंगजेब शिवाजी के अधीन मराठा शक्ति के उदय के बारे में चिंतित थे।

पुरन्दर की संधि

  • शाइस्ता खान और सूरत पर हमले ने , मुगल शासक औरंगजेब को क्रोधित कर दिया |
  • इसके फलस्वरूप,उसने राजा जय सिंह प्रथम को 150000 सैनिकों के साथ शिवाजी को हराने के लिए भेजा  
  • जय सिंह की सेना सफल रही और कई मराठा किलों पर कब्जा कर लिया एवं शिवाजी पर दबाव बनाया की वह ओरंगजेब की शर्तें मान ले अन्यथा और भी किलों व जनता का नुक्सान भुगतना पड़ेगा |

पुनर्विजय:

  • उन्होंने मुगलों के खिलाफ अपने युद्धों को वापिस आरम्भ किया |
  • 1670 में उन्होंने वापिस सूरत को लूट लिया एवं अपने द्वारा पूर्व में जीते गए क्षेत्रों को भी वापिस प्राप्त किया |

Shivaji’s Administration:

  • A great administrator.
  • He laid the foundations of a sound system of administration.
  • The king was the pivot of the government.
  • He was assisted by a council of ministers (CoM) called Ashtapradhan.
  • However, each minister was directly responsible to Shivaji.

Revenue System :

  • It was based on that of Malik Amber of Ahmednagar.
  • Lands were measured by using the measuring rod called kathi.

Military :

  • Shivaji demonstrated great skill in creating his military organisation, which lasted till the demise of the Maratha empire.
  • The regular army consisted of about 30000 to 40000 cavalry supervised by havildars.

Tax:

  • Land revenue was fixed 1/3rd of the gross produce (initially), 2/5th of the gross produce (after reforms).
  • Chauth: 1/4th i.e. 25 % of the land revenue was paid to the Marathas so for not being subjected to Maratha raids.
  • Sardeshmukhi was an additional levy of 10 % on those lands of Maharashtra over which the Maratha claimed hereditary rights, but which formed part of the Mughal empire.

Sambhaji (1680-1689)

  • Sambhaji, the elder son of Shivaji, defeated Rajaram, the younger son of Shivaji, in the war of succession.
  • He provided protection and support to Akbar II, the rebellious son of Aurangzeb.
  • He was captured at Sangameshwar by a Mughal noble and executed.

शिवाजी का प्रशासन:

  • शिवाजी एक महान प्रशासक थे |
  • उन्होंने एक सुव्यवस्थित प्रशासन  प्रणाली की नींव रखी।
  • सम्राट सरकार की धुरी होता था |
  • इन्हे मंत्रियों के एक समूह जिसे अष्टप्रधान कहा जाता था, से सहायता मिलती थी |
  • हालांकि, प्रत्येक मंत्री की सीधे तौर पर शिवाजी को जवाबदेही थी |

राजस्व प्रणाली:

  • यह अहमदनगर के मलिक अंबर पर आधारित था।
  • भूमि को मापने के लिए छड़ का उपयोग किया जाता था जिसे काठी कहा जाता था |

सैन्य:

  • शिवाजी ने अपने सैन्य संगठन को बनाने में महान कौशल का प्रदर्शन किया, जो मराठा साम्राज्य के अंत तक चला |
  • नियमित सेना में लगभग 30000 से 40000 घुड़सवार सैनिक शामिल थे, जो हवलदार की निगरानी में रहते थे |

कर:

  • आरम्भ में भू राजस्व सकल उत्पादन का तीसरा भाग था, सुधारों के बाद यह  2/5 वां भाग हो गया |
  • चौथ: एक चौथाई भाग अर्थात् मराठों को जमीन के राजस्व का 25% भुगतान किया जाने का नियम था ताकि इन क्षेत्रों पर मराठों का आक्रमण न हो |
  • सरदेशमुखी महाराष्ट्र की उस भूमि पर लगने वाला कर था जो वंशानुगत  रूप से तो मराठों की थी लेकिन जो मुग़ल साम्राज्य में शामिल थी |

संभाजी (1680-1689)

  • ये शिवाजी के बड़े पुत्र थे, इन्होने उत्तराधिकार की जंग के लिए अपने ही छोटे भाई राजाराम को युद्ध में पराजित किया था |
  • उन्होंने औरंगजेब के विद्रोही पुत्र अकबर द्वितीय को सुरक्षा और सहायता प्रदान की।
  • उन्हें संगमेश्वर में एक मुग़ल कुलीन द्वारा बंदी बना लिया गया तथा उनकी हत्या कर दी गई |

Rajaram (1689-1700)

  • He succeeded the throne with the help of the ministers at Raigarh.
  • He fled from Raigarh to Jinji in 1689 due to a Mughal invasion in which Raigarh was captured along with Sambhaji’s wife and son (Shahu) by the Mughals.

Tarabai: (1700-1707):

  • Rajaram was succeeded by his minor son Shivaji II under the guardianship of his mother Tarabai.
  • Tarabai continued the struggle with Mughals.

Shahu (1707-179):

  • Shahu was released by the mughal emperor Bahadur Shah.
  • Tarabai’s army was defeated by Shahu in the battle of Khed and Shahu occupied Satara.
  • But the southern part of maratha kingdom with its capital Kolhapur continued to be under the control of the descendents of Rajaram (Shivaji II and later Sambhaji II).

Balaji vishwanath (1713-1720):

  • The first Peshwa
  • A petty revenue official who rose step by step as an official.
  • He had helped Shahu to suppress his enemies.
  • He had sided many Maratha sardar to Shahu side with his diplomacy.

Baji Rao I (1720 – 1740):

  • Balaji Vishwanath died in 1720.  He was succeeded by his 20-year old son Baji Rao I.
  • He served as Peshwa (Prime Minister) to the 4th Maratha Chhatrapati (King).
  • He was a general of the Maratha Empire in India.

Died: 1740

  • Just in 20 years changed the character of Maratha state.
  • Transformed kingdom of Maharashtra into empire expanding in the north but failed to lay strong foundation of it.

राजाराम (1689-1700)

  • इन्होने मंत्रियों की सहायता से रायगढ़ दुर्ग सिंहासन ग्रहण किया |
  • मुगल आक्रमण के कारण वे 1689 में रायगढ़ से जिंजी भागकर आ गए, लेकिन शम्भाजी की पत्नी और उनके पुत्र शाहू को मुगलों ने बंदी बना लिया |

तारा बाई  (1700-1707):

  • राजाराम का उत्तराधिकारी उनका अल्पवयस्क पुत्र शिवाजी द्वितीय बना, उनकी माता ताराबाई ने इन्हे सरंक्षण दिया |
  • ताराबाई ने मुग़लों से संघर्ष जारी रखा |

शाहू (1707-179):

  • मुगल सम्राट बहादुर शाह ने शाहू को रिहा कर दिया |
  • खेद के युद्ध में शाहू ने ताराबाई की सेना को पराजित कर दिया और शाहू ने सतारा पर कब्जा कर लिया |
  • परन्तु मराठा राज्य का दक्षिणी हिस्सा अपनी राजधानी कोल्हापुर के साथ राजाराम  (शिवाजी द्वितीय और बाद में संभाजी द्वितीय) के नियंत्रण में रहा |

बालाजी विश्वनाथ (1713-1720):

  • प्रथम पेशवा  
  • एक छोटे सा राजस्व अधिकारी था जिसने धीरे धीरे अपने पद में वृद्धि की |
  • उसने अपने शत्रुओं को कुचलने के लिए शाहू की मदद की |
  • उसने अपनी कूटनीति के साथ कई मराठा सरदार शाहू पक्ष के पक्ष में किये |

बाजीराव I (1720 – 1740):

  • बालाजी विश्वनाथ का निधन 1720 में हुआ था। उनके 20 वर्षीय पुत्र बाजी राव प्रथम ने उनका स्थान लिया |
  • उन्होंने पेशवा (प्रधान मंत्री) के रूप में चौथे मराठा छत्रपति (राजा) को सेवाएं प्रदान की |
  • वह भारत में मराठा साम्राज्य का सेनापति था |

मृत्यु: 1740 

  • मात्र 20 वर्षों में ही इन्होने मराठा साम्राज्य के स्वरूप को बदल दिया।
  • महाराष्ट्र के साम्राज्य को उत्तर तक फैला दिया परन्तु एक मजबूत बुनियाद प्रदान नहीं कर सके |

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