HCS Exam Complete Study Material 2018 (Prelims+Mains+Interview)

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Socio religious movements

  • The dawn of the nineteenth century witnessed the birth of a new vision: a modern vision among some enlightened sections of the Indian society.
  • This enlightened vision was to shape the course of events for decades to come and even beyond.
  • This process of reawakening, sometimes, but not with full justification, defined as the ‘Renaissance’.

How British rule was different from previous intruders:

  • Most of the earlier intruders who came to India had settled within her frontiers, were absorbed by her superior culture and had become part of the land and its people.
  • British conquest came at a time when India, in contrast to an enlightened Europe of the eighteenth century affected in every aspect by science arid scientific outlook, presented the picture of a stagnant civilisation and a static and decadent society.

Factors which gave rise to reform movements:

  • Hinduism had become a compound of magic, animism and superstition.
  • Presence of colonial government on Indian soil.
  • Various ills plaguing Indian society—obscurantism, superstition, polytheism, idolatry.

Social Base

  • Newly emerging middle class and traditionally as well as western educated intellectuals.

Ideological Base

  • The important intellectual criteria which gave these reform movements an ideological unity were rationalism, religious universalism and humanism.

These reform movements could broadly be classified in two categories:

  • Reformist movements: the Brahmo Samaj, the Prarthana Samaj, the Aligarh movement
  • Revivalist movements:  Arya Samaj and the Deoband movement.

Reform Movements among Hindus:

Bengal:

  • Raja Ram-mohan Roy and Brahmo Samaj
  • Debendranath Tagore and Tattvabodhini Sabha

Southern India

  • Sri Narayana Dharma Paripalana Movement
  • Self-respect Movement

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सामाजिक धार्मिक आंदोलन

  • उन्नीसवीं सदी की भोर ने एक नई दूरदर्शिता  के आरम्भ को देखा: यह आधुनिक संकल्पना भारतीय समाज के कुछ प्रबुद्ध वर्गों के बीच थी |
  • यह प्रबुद्ध संकल्पना आने वाले दशकों तथा इसके बाद की घटनाओं को एक नया रंग रूप देने वाली थी |
  • इस प्रक्रिया को पुन: जागृति कहा गया, परन्तु इसके पीछे कोई तर्क नहीं था, इसे ‘पुनर्जागरण’ के रूप में भी परिभाषित किया गया |

ब्रिटिश शासन अन्य आक्रमणकारियों से कई प्रकार से भिन्न था |

  • भारत में आने वाले अधिकांश आक्रमणकारी भारत में ही बस गए, वे इसकी श्रेष्ठतर संस्कृति में घुल मिल गए और भारत की धरा तथा आमजन का ही हिस्सा बन गए |
  • किन्तु अंग्रेज़ों का आगमन भारत में ऐसे समय में हुआ जब यूरोप में आधुनिक पाश्चात्य संस्कृति की बयार बह रही थी एवं मानवतावाद,तर्कवाद,विज्ञान एवं वैज्ञानिक अन्वेषण की अपनी महत्ता स्थापित करते जा रहे थे |

सुधार आंदोलन को जन्म देने वाले कारक-

  • हिन्दू समाज बुराइयों,बर्बरता एवं अंधविश्वासों से ओत प्रोत था |  
  • भारत की भूमि पर उपनिवेशी शासन की उपस्थिति |
  • भारतीय समाज में व्याप्त विभिन्न कुरीतियां यथा-भेदभाव,छुआछूत,अंधविश्वास,बहुपत्नी प्रथा तथा मूर्तिपूजा |

सामजिक आधार

  • नव उभरता माध्यम वर्ग और पारंपरिक के साथ-साथ पश्चिमी शिक्षित बौद्धिक

आदर्श आधार

  • वे महत्वपूर्ण बौद्धिक मापदंड जो इन आन्दोलनों को एक आदर्शात्मक एकता प्रदान करते थे, वे थे – तर्कवाद, धार्मिक सार्वभौमिकता और मानवता |

इन सुधार आंदोलनों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता हैं :

  • सुधारक आन्दोलन : ब्रह्म समाज, प्रार्थना समाज, अलीगढ़ आन्दोलन
  • पुनरुत्थानवादी आन्दोलन : आर्य समाज और देवबंद आन्दोलन

हिन्दुओं में सुधार आन्दोलन :

  • राजा राम मोहन राय और ब्रह्म समाज
  • देबेन्द्रनाथ टैगोर और तत्वबोधिनी सभा

दक्षिणी भारत

  • श्री नारायण धर्म परिपालन आन्दोलन
  • आत्मसम्मान आन्दोलन

Brahmo Samaj

All India

  • Ramakrishna Movement and Vivekananda
  • Dayanand Saraswati and Arya Samaj
  • Theosophical Movement

Raja Rammohan Roy and Brahmo Samaj:

  • The father of Indian Renaissance
  • In 1831, he went to England to argue the case of Akbar II before the board of control.

Contribution for Women:

  • Roy was a determined crusader against the inhuman practice of sati.
  • Started his anti-sati struggle in 1818.

Contribution for Education:

  • Supported David Hare’s efforts to found the Hindu college in 1817, while Roy’s English school taught mechanics and Voltaire’s philosophy.
  • Established a Vedanta college ( In 1825) where courses in both Indian learning and Western social and physical sciences were offered.

Debendranath Tagore

  • Father of Rabindranath Tagore
  • Product of the best in the traditional Indian learning and the new thought of the West.
  • In 1839, founded the Tattvabodhini Sabha to propagate Ram Mohan Roy’s ideas.

ब्रह्म समाज

अखिल भारतीय

  • रामकृष्ण आन्दोलन और विवेकानंद
  • दयानंद सरस्वती और आर्य समाज
  • थियोसोफिकल आन्दोलन

राजा राम मोहन राय और ब्रह्म समाज :

  • भारतीय नवीनीकरण के जनक
  • 1831 में वे अकबर II के मामले के लिए नियंत्रण समिति के समक्ष अपना तर्क रखने इंग्लैंड गए |

महिलाओं के लिए योगदान :

  • राय अमानवीय सती प्रथा के खिलाफ लड़ने वाले एक बहुत सशक्त योद्धा थे |
  • 1818 में उन्होंने अपना सती प्रथा विरोधी आन्दोलन शुरू किया |

शिक्षा में योगदान :

  • डेविड हैरे के प्रयासों का समर्थन 1817 में हिन्दू कॉलेज को स्थापित कर किया, वही राय के अंग्रेजी विद्यालय में मैकेनिक और वोल्टेअर के दर्शन को पढाया जाता था |
  • वेदांत कॉलेज (1825 में) स्थापित किया जहाँ पढ़ाई भारतीय तरीके और पश्चिमी सामाजिक व भौतिक विज्ञान दोनों में उपलब्ध थे |

देबेन्द्र नाथ टैगोर

  • रबीन्द्रनाथ टैगोर के पिता जी |
  • पारंपरिक भारतीय सीख व पश्चिमी नए विचार के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण |
  • 1839 में इन्होने तत्वबोधिनी सभा की स्थापना राम मोहन राय के विचारों का प्रचार करने के लिए किया |

Movements of Western India

Western India

Paramhans Mandali

  • 1849 – founded in Maharashtra
  • Its founders believed in one God and were primarily interested in breaking caste rules.

Prarthana Samaj :

  • founded by Keshab Chandra Sen in Bombay in 1863.
  • Earlier, the Brahmo ideas spread in Maharashtra where the Paramhansa Sabha was founded in 1849.

There was a four-point social agenda also:

  • Disapproval of caste system,
  • Women’s education
  • Widow remarriage
  • Raising the age of marriage for both males and females.

The Servants of India Society :

  • Gopal Krishna Gokhale, the liberal leader of Indian National Congress, founded the Servants of India Society in 1905.

Aims of the society:

  • To train national missionaries for the service of India
  • To promote, by all constitutional means, the, true interests of the Indian people

Social Service League

  • Founded by Narayan Malhar Joshi in Bombay.

Aim:

  • To secure for the masses better and reasonable conditions of life and work .
  • Organized many schools, libraries, reading rooms, and cooperative societies.

पश्चिमी भारत के आन्दोलन

पश्चिमी भारत

परमहंस मंडली

  • 1849 में महाराष्ट्र में स्थापित हुई|
  • इसके संस्थापक एक ईश्वर में विश्वास करते थे और मुख्य रूप से जाति नियमों को तोड़ने में उनकी रूचि थी |

प्रार्थना समाज :

  • 1863 में बॉम्बे में केशव चन्द्र सेन द्वारा स्थापित किया गया|
  • आरम्भ में  ब्रह्म विचार महाराष्ट्र में फैले जहाँ परमहंस सभा की स्थापना 1849 में हुई थी |

इसमें चार बिन्दुओ का  सामाजिक मुद्दा भी था :

  • जाति प्रथा की अस्वीकार्यता
  • महिला शिक्षा
  • विधवा पुनर्विवाह
  • पुरुष व महिला दोनों के लिए विवाह की आयु को बढ़ाना |

भारतीय समाज सेवक :

  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उदारवादी नेता गोपाल कृष्ण गोखले ने 1905 में भारतीय समाज सेवक की स्थापना की |

समाज के लक्ष्य :

  • भारतीय सेवा के लिए राष्ट्रीय मिसनरियों को प्रशिक्षित करना |
  • संवैधानिक तरीकों से, भारतीय लोगों के सारे सच्चे हितों को बढ़ावा देना |

सामाजिक सेवा लीग

  • नारायण मनोहर जोशी द्वारा बॉम्बे में स्थापित की गई   |

लक्ष्य :

  • जनता की भलाई ,उनके जीवन व कार्य की उचित  परिस्थितियों को सुरक्षित करना |
  • कई विद्यालयों, पुस्तकालयों, पाठ्य कमरों और सहकारी सोसाइटी का गठन करना |

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