Haryana GK- Pratihara Rule/Sufi Movement in Haryana || Online Material

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Pratihara Rule in Haryana

  • After Harshavardhana’s death, his vast empire soon became separated into small parts. The underlying powers were trying to be independent.
  • But what happened in Haryana after the death of Harsha is not known.
  • We know from Waqapati’s Godwahas that in the early eighth century, the area of ​​Haryana came under the control of King Yashovarman of Kannauj.
  • But soon afterwards, King Lalitaditya Muktapid of Kashmir defeated Yashovarman and took over the area.
  • So many small powers started raising their heads in Haryana and its surroundings.
  • From the Lakhimpur record of ruler Dharmapala of Pala dynasty, we know that Tomar and Bhadanak of Haryana accepted the greatness of Dharmapala.

हरियाणा में प्रतिहारों का शासन

  • हर्षवर्धन की मृत्यु के पश्चात उसका विशाल साम्राज्य शीघ्र ही छिन्न भिन्न हो गया। अधिनस्थ शक्तियां स्वतंत्र होने का प्रयास करने लगी थी।
  • लेकिन हर्ष की मृत्यु के बाद हरियाणा में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है।
  • हमें वाकपति के गोडवाहों से ज्ञात होता है कि आठवीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों में हरियाणा का क्षेत्र कन्नौज के राजा यशोवर्मन के अधिकार में आ गया था।
  • लेकिन कुछ ही समय पश्चात कश्मीर के राजा ललितादित्य मुक्तापीड ने यशोवर्मन को पराजित करके उस क्षेत्र पर अपना अधिकार कर लिया।
  • अतः हरियाणा और उसके आसपास के क्षेत्र में कई छोटी-छोटी शक्तियां सिर उठाने लगी।
  • पाल वंश के शासक धर्मपाल के लखीमपुर अभिलेख से हमें पता चलता है कि हरियाणा के तोमर व भादानक धर्मपाल की महानता को स्वीकार करते थे।

Munger’s war and defeat of Dharmapala:

  • King Chakrayuddha  of Kannauj was ruling in the guard of the Pala king Dharmapala.
  • On receiving notification of the defeat of Chakra yuddha , Dharmapal announced  war against Nagabhata II. Nagabhata II defeated Dharmapala in this war.
  • Proof of this is obtained from the records of Gwalior, Jodhpur and Chapasu inscriptions.
  • Thus, Nagabhata defeated the rulers of Kannauj and Bengal and established himself in northern India.

मुंगेर का युद्ध और धर्मपाल की हार :

  • कन्नौज का राजा चक्रा युद्ध पाल राजा धर्मपाल के संरक्षण में राज्य कर रहा था।
  • चक्रा युद्ध की हार की सूचना पाते ही धर्मपाल ने नागभट्ट द्वितीय के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। नागभट्ट द्वितीय ने इस युद्ध में धर्मपाल को पराजित किया।
  • इस बात के साक्ष्य हमें ग्वालियर, जोधपुर व चाप्सु अभिलेखों से प्राप्त होते हैं।
  • इस प्रकार नागभट्ट ने कन्नौज और बंगाल के शासकों को पराजित कर उत्तरी भारत में अपनी धाक जमा ली।

Sufi Movement in Haryana-

  • Fariduddin Shakarganji
  • He established the Chisti order in Haryana. Sufi Matts were established at Hansi (Hisar) Panipat, Karnal and Ambala.
  • His full name is Sheikh-ul-Islam Maulana Diwana Baba Fariduddin Ganj-e-Shakar Suleman Aujodhani. In short, he is known as Baba Farid.
  • He was the disciple of Mohammad Bakhtiar Kaki.

हरियाणा में सूफी आंदोलन-

  • फरीदुद्दीन शकर्गनजी
  • उन्होंने हरियाणा में चिस्ती केआदेश की स्थापना की। सूफी मठ हांसी (हिसार) पानीपत, करनाल और अंबाला में स्थापित किए गए थे।
  • उनका पूरा नाम शेख-उल-इस्लाम मौलाना दीवाना बाबा फरीदुद्दीन गंज-ए-शकर सुलेमान औजोधनी है। संक्षेप में, वह बाबा फरीद के रूप में जाना जाता है।
  • वह मोहम्मद बख्तियार काकी का शिष्य था।

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