Haryana Civil Services Geography Exam 2018 :: Complete Study Notes

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Indian Monsoon

Chief characteristics of Monsoonal rainfall

  • Largely governed by relief or topography.
  • Windward side of the Western Ghats register a rainfall of over 250 cm.
  • It has a declining trend with increasing distance from the sea.
  • The summer rainfall comes in a heavy downpour leading to considerable runoff and soil erosion.
  • Three-fourths of the total rain in the country is received during the southwest monsoon season.

Distribution of Monsoonal rainfall in India

  • Areas of High Rainfall (>200 cm): Along the west coast of the Western Ghats, hills of Meghalaya.
  • Areas of Medium Rainfall (100-200 cm): Southern parts of Gujarat, east Tamil Nadu, Orissa, Jharkhand, Bihar, northern Ganga plain
  • Areas of Low Rainfall (50-100cm): Western Uttar Pradesh, Delhi, Haryana, Punjab, Jammu and Kashmir.

El Nino

  • ‘El Nino’ is a Spanish word meaning ‘the child’, and refers to the baby Christ, as this current starts flowing during Christmas.
  • El Nino normally occurs around Christmas and usually lasts for a few weeks to a few months.
  • Occasional development of warm ocean surface waters along the coast of Ecuador and Peru.

This results in:

  • The distortion of equatorial atmospheric circulation
  • Irregularities in the evaporation of sea water
  • Reduction in the amount of planktons which further reduces the number of fish in the sea.

Walker circulation

  • The Walker circulation (walker cell) is caused by the pressure gradient force resulting from a high pressure system over the eastern Pacific ocean, and a low pressure system over Indonesia.
  • This cross-section of the Pacific Ocean, along the equator, illustrates the pattern of atmospheric circulation typically found at the equatorial Pacific.
  • The Walker cell is indirectly related to upwelling off the coasts of Peru and Ecuador.

Haryana Civil Services Geography

मानसूनी वर्षा की मुख्य विशेषता

  • मानसून वर्षा मुख्य रूप से उच्चावच अथवा भू-आकृति द्वारा नियंत्रित होती है |
  • पश्चिमी घाट की पवनाभिमुखी ढाल 250 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज करती है |
  • समुद्र से बढ़ती हुई दूरी के साथ मानसून वर्षा में घटने की प्रवृत्ति पाई जाती है |
  • ग्रीष्मकालीन वर्षा मूसलाधार होती है जिस से बहुत सा पानी बह जाता है और मिटटी का अपरदन होता है |
  • देश में होने वाली कुल वर्षा का तीन-चौथाई भाग दक्षिण-पश्चिमी मानसून की ऋतु से प्राप्त होता है

भारत में मानसूनी वर्षा का वितरण

  • अधिक वर्षा वाले क्षेत्र (>200 cm) : पश्चिमी तट, पश्चिमी घाट, मेघालय की पहाड़ियां
  • मध्यम वर्षा (100-200 cm)  के क्षेत्रः गुजरात के दक्षिणी भाग , पूर्वी तमिलनाडु, उड़ीसा, झारखंड, बिहार, उत्तरी गंगा मैदान
  • निम्न वर्षा (50-100 cm) के क्षेत्र: पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, जम्मू और कश्मीर

एल निनो

  • ‘एल नीनो’ एक स्पैनिश शब्द है जिसका अर्थ है ‘बालक’, और यह बालक ईसा मसीह को संदर्भित करता है, क्योंकि यह क्रिसमस के दौरान आती है |
  • एल नीनो आमतौर पर क्रिसमस के आसपास होता है और कुछ महीनों से कुछ हफ्तों तक रहता है।
  • ईक्वाडोर और पेरू के तट के किनारे आकस्मिक रुप से गर्म महासागरीय जल सतह का विकसित होना |

इसके निम्नलिखित परिणाम होते है –

  • भूमध्यरेखीय वायुमंडलीय परिसंचरण में विकृति
  • समुद्री जल के वाष्पन में अनियमितता
  • प्लवक की मात्रा में,जिससे समुद्र में मछलियों की संख्या का घट जाना |

वाकर परिसंचरण

  • वाकर परिसंचरण पूर्वी प्रशांत महासागर पर दाब प्रवणता बल के कारण बनती है इसके परिणामस्वरूप पूर्वी प्रशांत महासागर पर उच्च दाब तंत्र तथा इंडोनेशिया के ऊपर एक निम्न दाब प्रणाली का निर्माण होता है |
  • भूमध्य रेखा के साथ, प्रशांत महासागर का यह क्षेत्र वायुमंडलीय परिसंचरण के पैटर्न को दर्शाता है जो आमतौर पर भूमध्यीय प्रशांत क्षेत्र में पाया जाता है।
  • वाकर कोष्ठिका अप्रत्यक्ष रूप से पेरू और ईक्वाडोर के तटों के अवरोहण से संबंधित है |

El Nino year

During El Nino year

  • In an El Nino year, air pressure drops over large areas of the central Pacific and along the coast of South America.
  • The normal low pressure system is replaced by a weak high in the western Pacific (the southern oscillation).
  • This change in pressure pattern causes the trade winds to be reduced (Weak Walker Cell). Sometimes Walker Cell might even get reversed.

Effects of El Nino all over world

  • The warmer waters has a devastating effect on marine life existing off the coast of Peru and Ecuador.
  • Fish catches off the coast of South America were lower than in the normal year (Because there is no upwelling).
  • Severe droughts occur in Australia, Indonesia, India and southern Africa.

Normal vs El Nino Condition

Normal Conditions

  • Eastern Pacific-Coast of Peru and Ecuador -Cold Ocean Water- Good for Fishing.
  • Western Pacific-Indonesia and Australia -Warm Ocean Water-Plenty of rains.

El Nino Condition

  • Eastern Pacific-Coast of Peru and Ecuador-Warm Ocean Water-Fishing industry takes a hit.
  • Western Pacific-Indonesia and Australia – Cold Ocean Water-Drought.

एल निनो वर्ष

एल निनो वर्ष के दौरान

  • एल निनो वर्ष  में मध्य प्रशांत के बड़े क्षेत्रों और दक्षिण अमेरिका के तट के साथ वायु दाब में भारी कमी आती है |
  • पश्चिमी प्रशांत में एक सामान्य निम्न दाब तंत्र दुर्बल उच्च तंत्र द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया जाता है |(दक्षिणी दोलन )
  • दबाव पैटर्न में यह बदलाव व्यापार हवाओं को कम करता है (दुर्बल वाकर कोष्ठ)। कभी-कभी वाकर कोष्ठ उल्टे भी हो सकते है |

पूरे विश्व में एल निनो के प्रभाव

  • गर्म पानी का पेरू और इक्वाडोर के तटों पर स्थित जलीय जीवन पर विनाशकारी प्रभाव पड़ता है।
  • दक्षिण अमेरिका के तट पर पकड़ी गई मछलियों की संख्या सामान्य वर्ष की तुलना में कम होती है |(क्यूंकि समुद्र का स्तर ऊपर नहीं आता है )
  • ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, भारत और दक्षिणी अफ्रीका में गंभीर सूखा पड़ता है |

सामान्य एवं एल निनो के लिए परिस्थितियाँ

सामान्य परिस्थितियाँ

  • पूर्वी प्रशांत-पेरू और इक्वाडोर का तट, ठंडा महासागरीय जल, मत्स्य पालन के उचित है |
  • पश्चिमी प्रशांत , इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया ,गर्म महासागरीय जल ,पर्याप्त वर्षा

एल निनो के लिए परिस्थिति

  • पूर्वी प्रशांत ,पेरू और इक्वाडोर के तट,गर्म महासागर जल , मत्स्य पालन उद्योग के उपयुक्त है |
  • पश्चिमी प्रशांत , इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया , महासागरीय जल , सूखा  

La Nina

  • After an El Nino event weather conditions usually return back to normal.
  • However, in some years the trade winds can become extremely strong and an abnormal accumulation of cold water can occur in the central and eastern Pacific.
  • This event is called a La Nina.

Weather effects of La Nina:

  • Abnormally heavy monsoons in India and Southeast Asia.
  • Cool and wet winter weather in southeastern Africa
  • Wet weather in eastern Australia

Indian Ocean Dipole effect

  • Not every El Nino year is same in India.
  • The Indian Ocean Dipole (IOD) is defined by the difference in sea surface temperature between two areas (or poles, hence a dipole) – a western pole in the Arabian Sea (western Indian Ocean) and an eastern pole in the eastern Indian Ocean south of Indonesia.
  • IOD develops in the equatorial region of Indian Ocean from April to May peaking in October.

Monsoon and economic life in India

  • Entire agricultural cycle of India depends on Monsoon.
  • Except Himalayas all the parts of the country have temperature above the threshold level to grow the crops or plants throughout the year.
  • Regional variations in monsoon climate help in growing various types of crops.
  • Variability of rainfall brings droughts or floods every year in some parts of the country.

ला नीना

  • एल निनो की घटना के बाद मौसम की स्थिति आम तौर पर सामान्य हो जाती है |
  • हालांकि, कुछ वर्षों में व्यापार पवनें बहुत प्रबल हो सकती हैं और मध्य और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में ठंडे पानी का असामान्य रूप से संग्रहण हो सकता है |
  • इस घटना को ला नीना कहा जाता है |

ला नीना का मौसम प्रभाव:

  • भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में असामान्य रूप से भारी मानसून
  • दक्षिण-पूर्वी अफ्रीका में ठंडा और आर्द्र सर्दियों का मौसम
  • पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में आर्द्र मौसम

हिंद महासागर का द्विध्रुव प्रभाव

  • भारत में प्रत्येक एल-निनो वर्ष समान नहीं होता है |
  • हिंद महासागर द्विध्रुव को किसी भी क्षेत्र अथवा ध्रुवों  के समुद्र सतह के तापमान में अंतर के रूप में परिभाषित किया जा सकता है |ये ध्रुव इस प्रकार हो सकते है – अरब सागर का पश्चिमी ध्रुव (पश्चिमी हिन्द महासागर) एवं पूर्वी हिन्द महासागर जो इंडोनेशिया के दक्षिण में है |
  • हिंद महासागर द्विध्रुव हिंद महासागर के भूमध्य रेखा क्षेत्र में अप्रैल से मई में पनपता है तथा अक्टूबर में यह समाप्त हो जाता है |

मानसून तथा भारतीय अर्थव्यवस्था

  • भारत का सम्पूर्ण कृषि चक्र मानसून पर निर्भर है |
  • हिमालयी प्रदेशों के अतिरिक्त शेष भारत में वर्ष भर यथेष्ट गर्मी रहती है, जिस से सारा साल खेती की जा सकती है |
  • मानसून जलवायु की क्षेत्रीय विभिन्नता कई प्रकार की फसलों को उगाने में सहायक है |
  • वर्षा की परिवर्तनीयता देश के कुछ भागों में सूखा अथवा बाढ़ का कारण बनती है |

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