Ecology Climate Change Organizations notes | HCS/RAS/PCS Exam

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Climate Change Organizations

UNFCCC

  • The United Nations Framework Convention on Climate Change is an international environmental treaty adopted on 9 May 1992.
  • It entered into force on 21 March 1994.
  • Its objective is to “stabilize greenhouse gas concentrations in the atmosphere at a level that would prevent dangerous anthropogenic interference with the climate system”.
  • The UNFCCC secretariat supports all institutions involved in the international climate change negotiations, particularly the Conference of the Parties(COP), the subsidiary bodies (which advise the COP), and the COP Bureau (which deals mainly with procedural and organizational issues arising from the COP and also has technical functions).
    KYOTO PROTOCOL: COP-3
  • The Kyoto Protocol is an international agreement linked to the United Nations Framework Convention on Climate Change, which commits its parties by setting internationally binding emission reduction targets.

The architecture of the KP regime: What makes KP tick?

  • The Kyoto Protocol is made up of essential architecture that has been built and shaped over almost two decades of experience, hard work and political will. The beating heart of KP is made up of:
  • Reporting and verification procedures
  • Flexible market-based mechanisms, which in turn have their own governance procedures; and
  • A compliance system

Emission Reduction Commitments

  • The first commitment was binding reduction commitments for developed parties. This meant that the space to pollute was limited.
  • Greenhouse gas emissions, most prevalently carbon dioxide, became a new commodity.

Flexible market mechanism

  • This leads us to the second, the flexible market mechanisms of the KP, based on the trade of emissions permits.

JOINT IMPLEMENTATION

It was defined in Article 6 of the Kyoto Protocol which allows a country with an emission reduction or limitation commitment under the KP to earn Emission Reduction Units (ERUs) from an emission reduction or emission removal project in another Annex B Party, each equivalent to one tonne of CO2, which can be counted towards meeting its kyoto target.

  • Joint Implementation offers parties a flexible and cost-efficient means of fulfilling a part of their Kyoto commitments while the host Party benefits from foreign investment and technology transfer.
    Clean development Mechanism:The CDM defined in article 12 of the Protocol, was intended to meet two objectives:
  • To assist parties not included in Annex 1 in achieving sustainable development and in contributing to the ultimate objective of the UNFCCC.

यूएनएफएफसी

  • जलवायु परिवर्तन पर फ्रेमवर्क कन्वेंशन एक अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरणीय समझौता है जिसे 9 मई 1992 को स्वीकार किया गया था |
  • यह 21 मार्च 1994 को लागू हुआ |
  • इसका उद्देश्य “वातावरण में हरित गृह गैस की सांद्रता को एक स्तर पर स्थिर करना है जो जलवायु तंत्र के साथ खतरनाक मानवजनित हस्तक्षेप को रोकेगा”।
  • यूएनएफसीसी सचिवालय अंतर्राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन, वार्ता में शामिल सभी संस्थानों , विशेष रूप से दलों के सम्मेलन (COP), सहायक निकाय ( जो COP को परामर्श देते हैं ) तथा COP ब्यूरो (जो मुख्य रूप से COP में उठने वाले प्रक्रियात्मक तथा संगठनात्मक मुद्दों से सम्बंधित है तथा इसके कुछ तकनीकी कार्य भी होते हैं ) की सहायता करता है |

क्योटो प्रोटोकॉल : COP -3

  • क्योटो प्रोटोकॉल जलवायु परिवर्तन पर फ्रेमवर्क कन्वेंशन से जुड़ा एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जो अंतर्राष्ट्रीय रूप से बाध्यकारी उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों का निर्माण करके उन्हें  पार्टियों हेतु प्रतिबद्ध करता है |

क्योटो प्रोटोकॉल व्यवस्था की संरचना :

वो क्या है जो क्योटो प्रोटोकॉल को सही बनाता है ?

  • क्योटो प्रोटोकॉल एक महत्वपूर्ण संरचना से निर्मित है जिसका निर्माण लगभग दो दशकों के अनुभव, कड़ी मेहनत, तथा राजनीतिक इच्छाशक्ति से किया गया है | क्योटो प्रोटोकॉल की धड़कन निर्मित है :
  • सूचना प्रदान करने तथा उसके सत्यापन की प्रक्रियाएँ |
  • लचीला बाज़ार तंत्र- जिसके पास अपनी स्वयं की नियंत्रण प्रक्रियाएँ हैं , तथा
  • एक अनुपालन तंत्र |

उत्सर्जन में कमी की प्रतिबद्धता –

  • प्रथम प्रतिबद्धता विकसित देशों हेतु बाध्यकारी उत्सर्जन कटौती प्रतिबद्धता थी | इसका अर्थ है कि उनके द्वारा प्रदूषण को सीमित कर दिया गया|
  • हरितगृह गैस उत्सर्जन, सबसे अधिक कार्बन डाइऑक्साइड, एक नयी वस्तु बन गयी |

लचीला बाज़ार तंत्र

  • यह हमें क्योटो प्रोटोकॉल के दूसरे, लचीले बाज़ार तंत्र में लेकर जाता है जो उत्सर्जन अनुमति के व्यापार पर आधारित है |

संयुक्त क्रियान्वयन

  • संयुक्त क्रियान्वयन की कल्पना क्योटो प्रोटोकॉल में की गयी थी जो क्योटो प्रोटोकॉल के तहत उत्सर्जन कटौती एवं नियंत्रण हेतु प्रतिबद्ध किसी देश को किसी दूसरे एनेक्स बी देश में उत्सर्जन कटौती या उत्सर्जन निष्कासन  परियोजना में निवेश द्वारा उत्सर्जन कटौती इकाई उपार्जित करने की अनुमति प्रदान करता है |
  • संयुक्त क्रियान्वयन दलों को उनकी क्योटो प्रोटोकॉल के प्रति प्रतिबद्धता के अपने लक्ष्यों के एक भाग को पूर्ण करने के एक लचीले तथा लागत प्रभावी साधन की पेशकश करता है, जबकि मेजबान दल अथवा पार्टी को विदेशी निवेश तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का लाभ मिलता है |

स्वच्छ विकास तंत्र :

प्रोटोकॉल के अनुच्छेद 12 में वर्णित स्वच्छ विकास तंत्र का उद्देश्य दो लक्ष्यों को प्राप्त करना है :

  • एनेक्स 1 में जो दल शामिल नहीं हैं, उन्हें सतत विकास प्राप्त करने में सहायता करना तथा खतरनाक जलवायु परिवर्तन को रोकने के यूएनएफसीसी के आधारभूत लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान देना |

Ecology Climate Change

BALI SUMMIT, 2007

  • COP 13, CMP 3

Adopted Bali Road Map that included

  • The Bali Action Plan (BAP)
  • Launch of the Adaptation fund
  • Decisions on technology transfer
  • On reducing emission from deforestation

All developed country parties have agreed to “quantified emission limitation taking into account differences in their national circumstances”

  • So they will fix emission limits according to their convenience and try to achieve them.
  • Developed countries stressed developing countries like India and China, which are increasing their emissions as they grow economically, to undertake some kind of emission cuts.

COPENHAGEN SUMMIT, 2009

  • COP 15, CMP 5
  • UNFCCC meet in Copenhagen, capital city of Denmark
  • Produced the Copenhagen Accord.
  • This accord is an agreement between developing nations block called BASIC (Brazil, South Africa, India and China)
  • According to this accord, all countries should pledge voluntary limits (no binding obligations) to reduce GHG emissions.
  • Binding obligations could not be reached due to discord between developed and developing countries.

CANCUN SUMMIT

  • COP 16, CMP 6
  • An agreement adopted by the COP called for a large “Green climate fund” and an “Adaptation committee” at global level to support developing countries in mitigation of GHG.
  • It looked forward to a second commitment period for the Kyoto Protocol.
  • As per the Cancun Agreements, all parties to the convention (including the developed and developing countries) have agreed to report their voluntary mitigation goals for implementation.

WARSAW OUTCOMES, COP 19, 2013

At the UN climate change Conference in Warsaw, governments took further essential decisions to stay on track towards securing a universal climate change agreement in 2015.

Objectives –

  • First, to bind nations together into an effective global effort to reduce emissions rapidly enough to chart humanity’s long term path out of the danger zone of climate change, while building adaptation capacity.
  • Second, to stimulate faster and broader action
  • COP 13, CMP 3

BALI SUMMIT, 2007

स्वीकृत बाली रोडमैप में शामिल था –

  • बाली कार्ययोजना अथवा बाली एक्शन प्लान |
  • अनुकूलन निधि की स्थापना |
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर निर्णय |
  • निर्वनीकरण से होने वाले उत्सर्जन को कम करने पर निर्णय |

इस सम्मेलन के दलों में शामिल सभी विकसित देश अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों में भिन्नताओं को ध्यान में रखते हुए परिमाणित उत्सर्जन को  सीमित करने के लिए सहमत हुए हैं |

  • इसलिए वे अपनी सुविधा के लिए  उत्सर्जन सीमाओं को निर्धारित करेंगे तथा उसे प्राप्त करने की कोशिश करेंगे |
  • विकसित देशों ने उत्सर्जन में कुछ तरह की कटौतियों को शुरू करने के लिए  विकासशील देशों पर दबाव डाला है जो आर्थिक रूप से विकास करने के साथ ही उत्सर्जन में भी वृद्धि कर रहे हैं |

कोपेनहेगन सम्मेलन 2009

  • COP 15 CMP 5
  • युएनएफसीसी की बैठक डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में हुई |
  • इसमें कोपेनहेगन एकार्ड हुआ |
  • यह एकार्ड विकासशील देशों के बेसिक ( ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका, भारत, तथा चीन ) नामक समूह के बीच एक समझौता है |
  • इस एकार्ड के अनुसार, सभी देशों को हरितगृह गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए  स्वैच्छिक सीमाओं ( कोई बाध्यकारी दायित्व नहीं ) का संकल्प लेना चाहिए |
  • विकसित एवं विकासशील देशों के बीच असामंजस्य होने की वजह से बाध्यकारी दायित्वों तक नहीं पंहुचा जा सका |

 कानकुन समझौता

  • COP 16 , CMP 6
  • COP द्वारा स्वीकृत एक समझौते के तहत “हरित जलवायु निधि” तथा एक “अनुकूलन समिति” की वैश्विक स्तर पर स्थापना की गयी ताकि विकासशील देशों को हरितगृह गैसों के उत्सर्जन के शमन में सहायता की जा सके |
  • इसमें क्योटो प्रोटोकॉल के लिए दूसरी प्रतिबद्धता अवधि की उम्मीद की गयी |
  • कानकुन समझौतों के अनुसार, सम्मेलन के सभी दल ( विकसित एवं विकासशील देशों सहित ) क्रियान्वयन हेतु अपने स्वैच्छिक शमन लक्ष्यों को रिपोर्ट करने के लिए सहमत हुए हैं |

वारसा के परिणाम, COP 19, 2013

वारसा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में, सरकारों ने 2015 में हुए सार्वभौमिक जलवायु परिवर्तन समझौता को सुरक्षित करने के क्रम में पथ पर बने रहने के लिए और भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए |

उद्देश्य –

  • पहला, जलवायु परिवर्तन के खतरे से मानवता के दीर्घकालीन मार्ग को बाहर निकालने के लिए उत्सर्जनों को पर्याप्त तीव्रता से कम करने हेतु अनुकूलन क्षमता के निर्माण के दौरान राष्ट्रों को एक प्रभावी वैश्विक प्रयास के सूत्र में बाँधना |
  • दूसरा,  तीव्र एवं व्यापक कार्यवाही को प्रोत्साहित करना |

PARIS CLIMATE CHANGE CONFERENCE

Objectives of the Paris agreement

  • Limit global warming to ‘well below’ 2°C, or 1.5°C if possible
  • Cut greenhouse gas emission in the 2020s
  • A pledge for deeper emission cuts in future- the emission cuts pledges made so far still leave the world on track for at least 2.7°C warming this century
  • Rich nations to provide funding to poorer ones- developed nations will continue to help developing countries with the costs of going green, and the costs of coping with effects of climate change..

MARRAKECH CLIMATE CHANGE CONFERENCE-COP 22, 2016

  • Nearly 200 nations attending the COP 22 to the UNFCCC have adopted Marrakech Action Proclamation for our climate and sustainable development.

Beyond developing the Paris rulebook, parties tool actions and made announcements on a range of other issues, including:

Finance

The Paris Agreement requires developed countries to provide biennial reports on financial support provided or mobilized through “public interventions”, and on projected levels of future support.

  • In Marrakech, SBSTA began considering how to account for public finance.

REDD+ strategy of India

  • The REDD+ strategy plan for India will include mechanism for addressing direct benefit for biodiversity as well as benefit sharing to indigenous and local communities.
  • The incentives so received from REDD+ would be passed from local communities involved in protection and management of forest.
  • This will ensure sustained protection of our forests against deforestation.

India’s initiatives related to REDD+

  • India has made a submission to UNFCCC on “REDD, Sustainable Management of Forest (SMF) and Afforestation and Reforestation” in December 2008.
  • A technical group has seen set up to develop methodologies and procedures to assess and Monitor contribution of REDD+ actions
  • A national REDD+ coordinating agency is being established.
  • A National Forest Carbon Accounting Programme is being institutionalized

The GEF

  • Article 11 of the UNFCCC creates a ‘financial mechanism’ for convention implementation, which is to function under the guidance of the UNFCCC COP and be accountable to the COP.
  • Under Article 11(1), the COP is to decide on the financial mechanism’s policies, programme priorities and eligibility criteria relating to the convention.
  • Article 21 names the GEF to serve as the financial mechanism on an interim basis.

The GEF now has six focal areas:

  1. Biological diversity
  2. Climate change
  3. International waters
  4. Land degradation, primarily desertification and deforestation
  5. Ozone layer depletion
  6. Persistent organic pollutants.

पेरिस समझौता के उद्देश्य :

  • वैश्विक तापन को अच्छी तरह से 2°C, अथवा यदि संभव हो तो  1.5°C तक सीमित करना |
  • 2020 के दशक में हरितगृह गैसों के उत्सर्जन में कटौती करना |
  • भविष्य में अधिक गहन उत्सर्जन कटौतियों का संकल्प- उत्सर्जन में कटौतियों का संकल्प लिया गया  ताकि इस सदी में वैश्विक तापन को कम से कम 2.7°C कम किया जा सके |
  • धनी राष्ट्र गरीब राष्ट्रों को धन प्रदान करेंगे – विकसित राष्ट्र विकासशील देशों को हरित विकास प्राप्त करने की लागत तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से मुकाबला करने की लागत प्रदान करके उनकी  मदद करना जारी रखेंगे |

मराकेश जलवायु परिवर्तन सम्मेलन – COP 22, 2016

  • यूएनएफसीसी की COP 22 में भाग लेने वाले लगभग 200 देशों ने हमारी जलवायु तथा सतत् विकास के लिए मराकेश कार्य घोषणा को स्वीकार किया है |

पेरिस नियम पुस्तिका को विकसित करने से परे, दलों ने कार्यवाही की तथा अन्य कई मुद्दों पर घोषणाएं की, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं :

वित्त :

पेरिस समझौता विकसित देशों  से “सार्वजनिक हस्तक्षेप” के माध्यम से  प्रदत्त अथवा जुटाए गए वित्तीय सहयोग तथा भावी समर्थन के प्रलंबित स्तरों  पर द्वि-वार्षिक रिपोर्ट मुहैया कराने की अपेक्षा करता है  |

  • मराकेश में, SBSTA ने सार्वजनिक वित्त के समाधान पर विचार करना शुरू किया |

भारत की REDD+ रणनीति

  • REDD+ हेतु भारत की रणनीतिक योजना में जैव विविधता के प्रत्यक्ष लाभों के साथ ही उन लाभों को स्वदेशी तथा स्थानीय समुदायों के साथ साझा करने वाली क्रियाविधि को शामिल किया जाएगा |
  • REDD+ से इस प्रकार मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का हस्तान्तरण वनों के प्रबंधन एवं संरक्षण में संलग्न स्थानीय समुदायों में किया जायेगा |
  • इससे निर्वनीकरण के विरुद्ध हमारे वनों की संपोषणीय सुरक्षा सुनिश्चित होगी |

REDD+ के संबंध में भारत द्वारा

  • भारत ने दिसम्बर 2008 में REDD पर वनों के सतत प्रबंधन एवं वनीकरण तथा पुनःवनीकरण पर यूएनएफसीसी को एक रिपोर्ट सौंपी |
  • REDD+ कार्यों के योगदान का आकलन करने तथा उनकी निगरानी करने हेतु क्रियाविधि तथा प्रक्रियाओं का विकास करने के लिए एक तकनीकी समूह का गठन किया गया है |
  • एक राष्ट्रीय REDD+ समन्वय एजेंसी स्थापित की जा रही है |
  • एक राष्ट्रीय वन कार्बन लेखा कार्यक्रम को संस्थागत किया जा रहा है |  

वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF )

  • यूएनएफसीसी का छठा अनुच्छेद कन्वेंशन के कार्यान्वयन के लिए एक वित्तीय तंत्र का निर्माण करता है, जो यूएनएफसीसी COP के निर्देशानुसार कार्य करगा तथा COP के प्रति जवाबदेह होगा |
  • अनुच्छेद 11 (1 ) के तहत, इस वित्तीय तंत्र की नीतियों ,  कार्यक्रम प्राथमिकताओं , तथा कन्वेंशन से संबंधित पात्रता मानदंडों का निर्धारण COP द्वारा किया जाएगा |
  • अनुच्छेद 21 GEF (वैश्विक पर्यावरण सुविधा )  को एक अंतरिम आधार पर वित्तीय तंत्र के रूप में कार्य करने के लिए नामित करता है |

GEF अब छः क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित करता है :

  1. जैविक विविधता
  2. जलवायु परिवर्तन
  3. अंतर्राष्ट्रीय जल सीमा क्षेत्र
  4. भूमि निम्नीकरण, मुख्य रूप से निर्वनीकरण तथा मरुस्थलीकरण |
  5. ओज़ोन परत का क्षरण |
  6. दृढ़ कार्बनिक प्रदूषक |

National GHG inventories Programme (NGGIP)

  • The Task force on National Greenhouse gas inventories (TFI) was established by the IPCC to oversee the IPCC National Greenhouse gas inventories Programme (IPCC-NGGIP)
  • Objectives are to develop and refine an internationally-agreed methodology and software for the calculation and reporting of national GHG emissions and removal, and to encourage the widespread use of this methodology by countries participating in the IPCC.
  • All the IPCC guidance has therefore been compiled by an international range of authors and with an extensive global review process.

Methodology

  • First methodologies were produced in early 1990s
  • Revised 1996 guidelines for National Greenhouse Gas Inventories, the Good Practice Guidance and uncertainty management in National greenhouse gas inventories (GPG 2000) and the Good Practice guidance for land use, land-use change and forestry (GPG-LULUCF) are used by developed countries to estimate emissions and removals, and recommended by the UNFCCC for use by all countries.

The Economics of Ecosystems and biodiversity

  • This major international initiative, funded by the European commision, Germany, United kingdom, Norway, the Netherlands, Sweden.
  • Managed by the United Nations Environment Programme as part of its green economy initiative
  • It seeks to draw attention to the global economic benefits of biodiversity, to highlight the growing costs of biodiversity loss and ecosystem degradation, and to draw together expertise from the fields of science, economics and policy to enable practical actions moving forward.

ECOLOGICAL FOOTPRINT

  • “The area of productive land and water ecosystem required to produce the resources that the population consumes and assimilates the waste that the population produces wherever on earth the land and water is located.
  • The total footprint for a designated population’s activities is measured in terms of ‘global hectare’
  • A ‘global hectare’ is one hectare of biologically productive space with an annual productivity equal to the world average.

National GHG inventories Programme (NGGIP)

  • IPCC के द्वारा राष्ट्रीय हरितगृह गैस वस्तुसूची पर कार्यदल की स्थापना IPCC के राष्ट्रीय हरितगृह गैस वस्तुसूची कार्यक्रम की देखरेख करने के लिए की गयी थी |
  • इसका उद्देश्य  अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मत कार्यप्रणाली तथा सॉफ्टवेयर को विकसित करना  तथा उसमें सुधार करना है ताकि राष्ट्रीय हरितगृह गैसों के उत्सर्जन एवं निष्कासन  की गणना एवं रिपोर्टिंग की जा सके तथा इस IPCC में भाग लेने वाले देशों द्वारा इस कार्यप्रणाली के व्यापक प्रयोग को प्रोत्साहित किया जा सके |
  • इसलिए IPCC के सभी दिशानिर्देशों को  व्यापक वैश्विक समीक्षा प्रक्रिया के साथ अंतर्राष्ट्रीय लेखकों द्वारा संकलित किया गया है |

कार्यप्रणाली

  • पहली कार्यप्रणालियों को 1990 के दशक के आरंभ में प्रस्तुत किया गया था |
  • विकसित देशों द्वारा हरितगृह गैसों की राष्ट्रीय वस्तुसूची के लिए , राष्ट्रीय हरितगृह गैसों की वस्तुसूची (GPG 2000 )  की अनिश्चितता के प्रबंधन एवं अच्छे अभ्यासों के मार्गदर्शन के लिए , एवं भूमि प्रयोग हेतु अच्छे अभ्यासों के मार्गदर्शन, तथा  भूमि प्रयोग में परिवर्तन एवं वानिकी के संबंध में 1996 के संशोधित दिशानिर्देशों का प्रयोग किया जाता है ताकि उत्सर्जनों तथा उनकी निकासी का अनुमान लगाया जा सके, साथ ही यूएनएफसीसी सभी देशों को इन दिशा निर्देशों का प्रयोग करने की सलाह देता है |  

The Economics of Ecosystems and biodiversity

  • यह एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय पहल है जिसका वित्तपोषण यूरोपीय आयोग, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम. नॉर्वे, नीदरलैंड, तथा स्वीडन के द्वारा किया जाता है |
  • इसका प्रबंधन संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के द्वारा इसकी हरित अर्थव्यवस्था की पहल के एक भाग के रूप में किया जाता है |
  • यह जैव विविधता हानि तथा परितंत्र के पतन की बढ़ती लागतों पर प्रकाश डालने के लिए जैव विविधता के वैश्विक आर्थिक लाभों की तरफ ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करता है तथा साथ ही वैज्ञानिक, आर्थिक, तथा नीतिगत क्षेत्र की  विशेषज्ञता को साथ आकर्षित करने का प्रयास करता है ताकि आगे बढ़ने के लिए व्यवहारिक कार्यों को सक्षम बनाया जा सके |

ECOLOGICAL FOOTPRINT

  • उत्पादक भूमि तथा जलीय पारितंत्र का वह क्षेत्र जो उन संसाधनों के उत्पादन के लिए आवश्यक है जिनका उपभोग आबादी करती है तथा जो आबादी द्वारा उत्पादित अपशिष्ट को पृथ्वी पर जहाँ कहीं भी भूमि एवं जल हो, वहां उनका अपघटन करते हैं  |
  • निर्दिष्ट आबादी की गतिविधियों के लिए कुल पदचिन्ह को वैश्विक हेक्टेयर के रूप में माना जाता है |
  • एक “वैश्विक हेक्टेयर” जैविक रूप से उत्पादक एक हेक्टेयर स्थल है जिसकी वार्षिक उत्पादकता विश्व औसत के बराबर है |

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