Ecology Climate Change Notes UPSC IAS Preparation | 2018 Exam

Ecology Climate Change Notes UPSC IAS Preparation | 2018 Exam

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Ecology Climate Change Notes UPSC IAS Preparation | 2018 Exam

Ecology Climate Change Notes UPSC IAS Preparation | 2018 Exam

Climate change is the change in the statistical distribution of weather patterns when that change lasts for an extended period of time

  • It is caused by factors such as biotic processes, variations in solar radiation received by earth, plate tectonics and volcanic eruption.
  • Change in statistical properties of the climate system when considered over long periods of time, regardless of cause.
  • The term “climate change” is often used to refer specifically to anthropogenic climate change.
  • Climate change is the measurable effects of the continual warming trend. Climate change is usually measured in major shifts in temperature, rainfall, snow, and wind patterns lasting decades or more.
  • Human activities influence climate changes such as burning large amount of fossil fuels, deforestation etc.

Global Warming

  • It is an average increase in temperature of the atmosphere near the Earth’s surface and in the troposphere, which can contribute to changes in global climate patterns.
  • Global warming can occur from a variety of causes, both natural and human induced.
  • Average temperatures around the world have risen by 0.75°C over the last 100 years.
  • The natural greenhouse effect maintains the earth’s temperature at a safe level making it possible for humans and other life forms to exist.
  • Since the industrial revolution human activities have significantly enhanced the greenhouse effect causing the earth’s average temperature to rise by almost 1℃.

जलवायु परिवर्तन मौसम प्रारूपों के सांख्यिकीय वितरण में परिवर्तन है, जब वह परिवर्तन एक लम्बे समय तक बना रहता है |

  • यह कई कारकों, जैसे कि जैविक प्रक्रियाओं, पृथ्वी द्वारा प्राप्त की गयी सौर विकिरणों में विभिन्नताएं, प्लेट टेक्टोनिक्स, तथा ज्वालामुखीय विस्फोट आदि की वजह से होता है |
  • जलवायु तंत्र के सांख्यिकीय गुणों में परिवर्तन जब बिना  किसी कारण के लम्बे समय तक रहता है |
  • शब्द “जलवायु परिवर्तन” का इस्तेमाल अक्सर विशेष रूप से मानवजनित जलवायु परिवर्तन को संदर्भित करने के लिए किया जाता है |
  • जलवायु परिवर्तन निरंतर तापन प्रवृत्ति  का औसत प्रभाव है | जलवायु परिवर्तन को सामान्यतः तापमान, बारिश, बर्फ, तथा वायु प्रारूपों में उन बड़े परिवर्तनों में मापा जाता है जो दशकों अथवा उससे अधिक समय तक बने रहते हैं |
  • बड़ी मात्रा में जीवाश्म ईंधन का दहन, निर्वनीकरण आदि जैसी मानव गतिविधियाँ जलवायु परिवर्तन को प्रेरित करती हैं |

वैश्विक तापन

  • यह पृथ्वी की सतह के समीप के वायुमंडल तथा क्षोभ मंडल के तापमान में औसत वृद्धि है, जो वैश्विक जलवायु प्रारूपों में होने वाले परिवर्तनों में योगदान दे सकती है |
  • वैश्विक तापन प्राकृतिक एवं मानव द्वारा प्रेरित कई कारणों से हो सकता है|
  • पिछले 100 वर्षों में विश्व का तापमान 0.75°C तक बढ़ चुका है |
  • प्राकृतिक हरित गृह प्रभाव पृथ्वी के तापमान को मानव तथा जीवन के अन्य रूपों के अस्तित्व के लिए संभव बनाते हुए एक सुरक्षित स्तर पर बनाए रखता है|
  • औद्योगिक क्रान्ति से, मानव गतिविधियों ने महत्वपूर्ण रूप से हरित गृह प्रभाव में वृद्धि की है जिसकी वजह से पृथ्वी के औसत तापमान में लगभग 1℃ की वृद्धि हुई है |  

Impacts of global warming-

  • It is accelerating the melting of ice sheets, permafrost and glaciers which is causing average sea levels to rise.
  • Changing precipitation and weather patterns
  • Desertification
  • Stronger hurricanes and cyclones
  • Widespread vanishing of animal population due to habitat loss
  • Loss of plankton due to warming of sea
  • Coral bleaching
  • Spread of disease
  • Increased likelihood of extreme events such as heat wave, flooding hurricanes etc. 

Greenhouse effect-

  • Greenhouse effect is a natural phenomena that warms the earth’s surface.
  • When sun’s energy reaches the earth’s atmosphere, some of it is reflected back to space and rest is absorbed and reradiated by greenhouse gases
  • Greenhouse gases play an important role in the balance of Earth’s cooling and warming.
  • According to an estimate, in the absence of naturally occurring greenhouse effect, the average temperature of the Earth surface would be -19°C instead of present value of 15°C.
  • A greenhouse is a structure with walls and roof made chiefly of transparent material, such as glass, in which plants requiring regulated climate conditions are grown.

वैश्विक तापन के प्रभाव-

  • यह बर्फ की चादरों, स्थायी तुषार भूमि, तथा हिम के पिघलने की गति को तेज कर रहा है जिसकी वजह से समुद्र स्तरों में वृद्धि हो रही है|
  • मौसम प्रारूपों तथा अवक्षेपण में परिवर्तन |
  • मरुस्थलीकरण |
  • अधिक मजबूत समुद्री तूफ़ान तथा चक्रवात |
  • वास स्थलों के विलोपन के कारण जंतुओं की जनसंख्या में बड़े पैमाने पर कमी |
  • समुद्र के गर्म होने के कारण प्लवकों की विलुप्ति |
  • प्रवाल विरंजन
  • रोगों का फैलना
  • अति घटनाओं जैसे कि कड़ी गर्मी, बाढ़ लाने वाले समुद्री तूफानों आदि की वर्धित संभावनाएं|

हरितगृह प्रभाव-

  • हरितगृह प्रभाव एक प्राकृतिक घटना है जो पृथ्वी के तापमान में वृद्धि करती है |
  • जब सूर्य की ऊर्जा पृथ्वी के वायुमंडल में पंहुचती है, तो इसका कुछ भाग वापस अंतरिक्ष में परावर्तित हो जाता है तथा शेष का हरित गृह गैसों के द्वारा अवशोषण तथा पुनः विकिरण कर दिया जाता है |
  • पृथ्वी के तापन तथा शीतलन के संतुलन में हरित गृह गैसें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं |
  • एक अनुमान के मुताबिक़, प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाली हरित गृह गैसों की अनुपस्थिति में, पृथ्वी का औसत तापमान वर्तमान के 15°C के स्थान पर -19°C  होता |
  • एक हरित गृह दीवार तथा छत वाली एक संरचना होता है जिसे मुख्य रूप से पारदर्शी पदार्थ, जैसे कि कांच से बनाया जाता है, जिसमें नियमित जलवायु स्थितियों की आवश्यकता वाले पौधों को उगाया जाता है |  

WHAT IS GREENHOUSE EFFECT?? 

  • Step 1– solar radiations reach the earth’s atmosphere- some of this is reflected back into space.
  • Step 2– rest of sun’s energy is absorbed by the land and the oceans, heating the earth
  • Step 3– heat radiates from earth towards space
  • Step 4– some of this heat is trapped by greenhouse gases in the atmosphere, keeping the earth warm enough to sustain life
  • Step 5- human activities such as burning fossil fuels, agriculture and land clearing are increasing theAmount of greenhouse gases released into the atmosphere.
  • Step 6– this is trapping extra heat, and causing the Earth’s temperature to rise.

Greenhouse Gases-

Greenhouse gases means those gaseous constituents of the atmosphere, both natural and anthropogenic, those absorbs and re-emit infrared radiation.

Water Vapour-

  • It is the most abundant greenhouse gas in the atmosphere.
  • As the temperature of the atmosphere rises, more water is Evaporated from ground storage.
  • As a greenhouse gas, the higher concentration of water vapour is then able to absorb more thermal IR energy radiated from the earth, thus further warming the atmosphere.
  • As water vapour increases in the atmosphere, more of it eventually condense into clouds, which are more able to reflect incoming solar radiation.
  • Unlike CO2 , which can persist in the air for centuries, water vapour cycles through the atmosphere quickly, evaporating from the oceans and elsewhere before coming back down as rain or snow.

हरित गृह प्रभाव क्या है ?

  • प्रथम चरण : सौर विकिरानें पृथ्वी के वायुमंडल में पंहुचती हैं- इनका कुछ भाग वापिस अंतरिक्ष में परावर्तित हो जाता है |
  • दूसरा चरण: बाकी की सौर ऊर्जा भूमि एवं महासागरों के द्वारा अवशोषित कर ली जाती है, जो पृथ्वी को गर्म करती है |
  • तीसरा चरण : ऊष्मा पृथ्वी से अंतरिक्ष की तरफ विकिरित होती है |
  • चौथा चरण: इस ऊष्मा का कुछ भाग हरित गृह गैसों के द्वारा ले लिया जाता है, जिससे पृथ्वी उतनी गर्म रहती है कि जीवन को बनाए रख सके |  
  • पांचवा चरण : मानव गतिविधियाँ जैसे कि जीवाश्म ईंधनों का दहन, कृषि एवं लैंड क्लीयरिंग,वायुमंडल में मुक्त होने वाली हरित गृह गैसों की मात्रा में वृद्धि कर रही हैं |
  • छठा चरण : यह अतिरिक्त ऊष्मा प्राप्त कर रहा है तथा पृथ्वी के तापमान में वृद्धि की वजह बन रहा है |

हरित गृह गैसें :

हरित गृह गैसों काआशय वायुमंडल के गैसीय घटकों से है, प्राकृतिक तथा मानवजनित दोनों, जो अवरक्त विकिरणों को अवशोषित तथा पुनः विकिरित करती हैं |

 

जलवाष्प :

  • यह वायुमंडल में सबसे अधिक प्रचुर हरित गृह गैस है |
  • जैसे ही वायुमंडल का तापमान बढ़ता है, भूमिगत संचय से अधिक मात्रा में जल वाष्पीकृत होने लगता है |
  • हरित गृह गैस के रूप में, जलवाष्प की उच्च सांद्रता, पृथ्वी से विकिरित अधिक तापीय आईआर ऊर्जा अवशोषित करने में सक्षम होती है, इस प्रकार आगे वायुमंडल को गर्म करती है|
  • जैसे ही वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा बढती है, इसकी अधिक मात्रा फलतः बादलों में संघनित हो जाती है, जो आने वाली सौर विकिरणों को परावर्तित करने में अधिक सक्षम होती है |
  • सदियों तक हवा में बनी रह सकने वाली कार्बन डाइऑक्साइड के विपरीत जलवाष्प का चक्रण वायुमंडल में तेजी से होता है, जो बारिश अथवा बर्फ के रूप में वापिस नीचे आने से पूर्व सागरों तथा अन्यत्र से वाष्पित होती है |

Carbon Dioxide-

  • It is emitted whenever coal, oil, natural gas and other carbon rich fossil fuels are burned
  • It is not the most powerful greenhouse gas but it is the largest contributor to climate change because it is so common.
  • Human activities are altering the carbon cycle both by adding more CO2 to the atmosphere and by reducing the ability of natural sinks, like forests, to remove CO2 from the atmosphere.
  • Main sources-
  1. The combustion of fossil fuels to generate electricity.
  2. The combustion of fossil fuels such as Gasoline and diesel used for transportation.
  3. many industrial processes emit CO2 through fossil fuel combustion
  4. several processes also produce CO2 emissions through chemical reactions that do not involve combustion, for example, the production and consumption of mineral products such as cement, the production and consumption of mineral products such as cement, the production of metals such as iron and steel, and the production of chemicals, etc.
  5. natural sources- plant and animal respiration, soil respiration and Decomposition, volcanic eruptions etc.
  • Between 1990 and 2010, the increase in CO2 emissions corresponded with increased energy use by an expanding economy and population

Reducing CO2 emission-

Reduction in fossil fuel consumption is the most effective way to reduce CO2 emission.Others include energy efficiency, energy conservation, carbon capture and sequestration.

कार्बन डाइऑक्साइड-

  • जब कभी भी कोयला, तेल, प्राकृतिक गैस तथा अन्य कार्बन की प्रचुरता वाले जीवाश्म इंधनों को जलाया जाता है, यह उत्सर्जित होती है |
  • यह सर्वाधिक शक्तिशाली हरित गृह गैस नहीं है किन्तु यह जलवायु परिवर्तन में सबसे बड़ी योगदानकर्ता है क्योंकि यह बहुत सामान्य है |
  • वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में वृद्धि करके तथा प्राकृतिक परनालो जैसे कि वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को कम करने वाले वनों, को कम करके,   मानव गतिविधियाँ दोनों तरह से कार्बन चक्र में परिवर्तन कर रही हैं |
  • प्रमुख स्रोत :
  1. बिजली उत्पादन करने के लिए जीवाश्म ईंधनों का दहन |
  2. जीवाश्म ईंधनों जैसे कि परिवहन में इस्तेमाल होने वाले डीजल एवं गैसोलीन का दहन |
  3. कई औद्योगिक प्रक्रियाएं जीवाश्म ईंधनों के दहन के माध्यम से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करती हैं |
  4. कई अन्य प्रक्रियाएं भी रासायनिक अभिक्रियाओं के माध्यम से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करती हैं जिनमें दहन शामिल नहीं होता | उदाहरण के लिए, खनिज उत्पादों जैसे कि सीमेंट का उत्पादन एवं उपयोग, धातुओं जैसे कि आयरन एवं स्टील का उत्पादन, तथा रसायनों का उत्पादन आदि |
  5. प्राकृतिक स्रोत : पादप तथा जंतु श्वसन क्रिया, मृदा श्वासोच्छ्वास, तथा अपघटन, ज्वालामुखीय विस्फोट आदि |
    • 1990 से 2010 के बीच, कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में वृद्धि विस्तारशील अर्थव्यवस्था तथा जनसंख्या के द्वारा वर्धित ऊर्जा उपयोग के अनुरूप रही |

कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी :

जीवाश्म ईंधन के दहन में कमी कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है | अन्य तरीकों में ऊर्जा दक्षता, ऊर्जा संरक्षण, कार्बन कैप्चर तथा कार्बन पृथक्करण शामिल हैं |

Methane –

  • Methane is emitted by natural sources such as wetlands, as well as human activities such as leakage from natural gas systems and the raising of livestock.
  • Methane is more potent greenhouse gas than carbon dioxide, there are over 200 times more CO2 in the atmosphere.
  • Amount of warming contributed by methane is 28% of the warming CO2 contributes.

Sources-

  • Main natural sources include wetlands, termite and the ocean. Natural sources are responsible for 36% of methane emission.
  • Human sources include landfills and livestock farming. Other source being the production, transportation and use of fossil fuels.
  • Domestic livestock such as cattle, buffalo, sheep, goats, and camels produce large amounts of CH4 as part of their normal digestive process. Also when animal manure is stored or managed in lagoons or holding tanks, CH4 is produced. Because humans raise these animals for food, the emissions are considered human-related. Globally, the agriculture sector is the primary source of CH4 emissions

मीथेन-

  • मीथेन का उत्सर्जन प्राकृतिक स्रोतों जैसे कि आर्द्रभूमियों, के साथ ही मानव गतिविधियों जैसे कि प्राकृतिक गैस तंत्रों से रिसाव तथा तथा मवेशियों के उत्थापन के द्वारा होता है |
  • मीथेन कार्बन डाइऑक्साइड से अधिक शक्तिशाली हरित गृह गैस है, यह वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड से 200 गुणा अधिक है |
  • मीथेन के द्वारा तापन में दिया गया योगदान कार्बन डाइऑक्साइड के द्वारा तापन में दिए गए योगदान का 28 प्रतिशत है |

स्रोत:

  • प्रमुख प्राकृतिक स्रोतों में आर्द्र्भूमि , दीमक तथा महासागर शामिल हैं | प्राकृतिक स्रोत मीथेन उत्सर्जन के 36 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार हैं |
  • मानव जनित स्रोतों में भूमि भराव, तथा मवेशी कृषि शामिल हैं | अन्य स्रोत जीवाश्म ईंधनों के उत्पादन, परिवहन तथा उपयोग हैं |
  • घरेलु पशु जैसे कि मवेशी, भैंस, भेड़, बकरियां तथा ऊंट अपनी सामान्य पाचन क्रिया के भाग के रूप में CH4 की बड़ी मात्रा उत्पादित करते हैं| साथ ही,  जब जानवरों के खाद को लैगून या टंकियों में रखा अथवा प्रबंधित किया जाता है, तब CH4  उत्पादित होती है | चूँकि मानव इन पशुओं को इन पशुओं को भोजन के लिए पालते हैं, इसलिए उत्सर्जन को मानव सम्बन्धी उत्सर्जन माना जाता है | वैश्विक रूप से, कृषि क्षेत्र CH4  का प्राथमिक स्रोत है |

Nitrous Oxide –

  • It is naturally present in the atmosphere as part of the earth’s nitrogen cycle, and has a variety of natural resources.

Sources-

  • Agriculture– largest human source. Direct emissions come from fertilized agricultural soils and livestock manure. Indirect emission come from runoff and leaching of fertilizers.
  • Fossil fuel combustion and industrial processes– N2O oxide is a byproduct of fuel combustion in mobile and stationary sources. Two main industrial sources are production of Nitric and adipic acid. Nitric acid is an important ingredient for synthetic fertilizers, while adipic acid is used primarily used for making synthetic fibers.
    • Biomass burning- burning of living and dead vegetation. In these fires, some of the nitrogen in the biomass and surrounding air is oxidised creating nitrous oxide emission.
    • Atmospheric deposition
    • Human sewage
    • Natural sources– soils under natural vegetation, oceans, atmospheric chemical reactions.

नाइट्रस ऑक्साइड-

  • यह पृथ्वी के नाइट्रोजन चक्र के भाग के रूप में प्राकृतिक रूप से वायुमंडल में उपस्थित होती है तथा इसमें कई प्राकृतिक संसाधन होते हैं | .

स्रोत :

  • कृषि : सबसे बड़ा मानव स्रोत | निषेचित कृषि सम्बन्धी मृदा तथा पशु खाद से सीधे उत्सर्जन | उर्वरकों के अपवाह तथा निक्षालन से अप्रत्यक्ष उत्सर्जन |
  • जीवाश्म ईंधन दहन तथा औद्योगिक प्रक्रियाएं : N2O ऑक्साइड अस्थिर एवं स्थिर स्रोतों में जीवाश्म ईंधन के दहन की एक उपोत्पाद है | दो प्रमुख औद्योगिक स्रोतों मेंनाइट्रिक तथा वसीय अम्ल के उत्पादन शामिल हैं| नाइट्रिक अम्ल संशलिष्ट उर्वरकों के लिए एक   महत्वपूर्ण घटक हैं, जबकि वसीय अम्ल का उपयोग प्रमुख रूप से संशलिष्ट रेशे बनाने में किया जाता है |
  • जैव भार दहन : जीवित एवं मृत वनस्पतियों का दहन | इन दहानों में, जैव भार तथा आसपास की हवा  में नाइट्रोजन की कुछ मात्रा ऑक्सीकृत होती है जिससे नाइट्रस ऑक्साइड का उत्सर्जन होता है |
  • वायुमंडलीय निक्षेप
  • मानव मल
  • प्राकृतिक स्रोत : प्राकृतिक वनस्पतियों की मिट्टी, महासागर, वायुमंडलीय रासायनिक अभिक्रियाएँ |  

Fluorinated Gases –

  • Fluorinated greenhouse gases are a family of gases containing fluorine.
  • They are powerful greenhouse gases that trap heat in the atmosphere and contribute to global warming.
  • Fluorinated gases are removed from the atmosphere only when they are destroyed by sunlight in the far upper atmosphere. In general, fluorinated gases are the most potent and longest lasting type of greenhouse gases emitted by human activities.
  • There are three main types of F-gases-
  1. Hydrofluorocarbons (HFCs)
  2. Perfluorocarbons (PFCs), and
  3. Sulfur hexafluoride (SF6)

फ्लूरीनेटेड गैसें-

  • फ्लूरीनेटेड हरित गृह गैसें फ्लुओरीन वाली गैसों का समूह होती हैं |
  • वे शक्तिशाली हरित गृह गैसें होती हैं जो वायुमंडल में ऊष्मा का अवशोषण करती हैं तथा वैश्विक तापन में योगदान देती हैं |
  • फ्लूरीनेटेड गैसें वायुमंडल से केवल तब हटती हैं जब वे बहुत ऊपर के वायुमंडल में सूर्य के प्रकाश के द्वारा उन्हें नष्ट किया जाता है | सामान्यतः मानव गतिविधियों के द्वारा उत्सर्जित हरित गृह गैसों में फ्लूरीनेटेड गैसें सबसे शक्तिशाली तथा सबसे लम्बे समय तक रहने वाली गैसें होती हैं |
  • फ्लूरीनेटेड गैसों के तीन मुख्य प्रकार होते हैं:
  1. हाइड्रोफ्लुरोकार्बन (HFCs)
  2. परफ्लुरोकार्बन (PFCs) तथा
  3. सल्फर हेक्साफलुराइड

Substitution for Ozone-Depleting Substances-

  • Hydrofluorocarbons are used as refrigerants, aerosol propellants, solvents, and fire retardants. These chemicals were developed as a replacement for chlorofluorocarbons (CFCs) and hydrochlorofluorocarbons (HCFCs) because they do not deplete the stratospheric ozone layer.
  • Unfortunately, HFCs are potent greenhouse gases with long atmospheric lifetimes and high GWPs, and they are released into the atmosphere through leaks, servicing, and disposal of equipment in which they are used.

Industry-

  • Perfluorocarbons are compounds produced as a byproduct of various industrial processes associated with aluminium production and the manufacturing of semiconductors.
  • Like HFCs, PFCs generally have long atmospheric lifetimes and high GWPs.
  • Sulfur hexafluoride is used in magnesium processing and semi- conductor manufacturing, as well as a tracer gas for leak detection. HFC-23 is produced as a byproduct of HCFC-22 production.
  • SF6 is used in electrical transmission equipment, including circuit breakers.

ओजोन विघटनकारी पदार्थों के विकल्प-

  • हाइड्रोफ्लुरोकार्बन का उपयोग शीतल करने वाले यंत्रों, एरोसोल प्रणोदक, विलयन टाटा अग्निरोधी के रूप में किया जाता  है | ये रसायन क्लोरोफ्लूरोकार्बन तथा हाइड्रोफ्लुरोकार्बन,के प्रतिस्थापन के रूप में विकसित किये गए थे क्योंकि ये संताप मंडल की ओजोन परत को क्षीण नहीं करते  हैं |
  • दुर्भाग्य से, हाइड्रोफ्लुरोकार्बन लम्बे वायुमंडलीय जीवनकाल वाली तथा उच्च जी.डब्ल्यू.पी वाली शक्तिशाली हरित गृह गैसें हैं तथा वे  उस उपकरण के रिसाव, मरम्मत, तथा निपटान से वायुमंडल में मुक्त होती हैं जिनमें उनका उपयोग किया जाता है |

उद्योग :

  • परफ्लुरोकार्बन एल्युमीनियम के उत्पादन तथा अर्धचालकों के निर्माण  से सम्बंधित विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियायों के उपोत्पाद के रूप में उत्पन्न होने वाले यौगिक हैं |
  • हाइड्रोफ्लुरोकार्बन की तरह ही, परफ्लुरोकार्बन का लम्बा वायुमंडलीय जीवनकाल तथा उच्च जी.डब्ल्यू.पी  होता है |
  • सल्फर हेक्साफ्लुओराइड का इस्तेमाल मैग्नीशियम प्रसंस्करण तथा अर्धचालक निर्माण में किया जाता है तथा साथ ही साथ रिसाव का पता लगाने के लिए इसका इस्तेअमल पता लगाने वाली एक गैस के रूप में भी किया जाता है |  HFC-23 का उत्पादन HCFC-22 के उत्पादन के एक उपोत्पाद के रूप में होता है |

Black Carbon

Black carbon is a sooty black material emitted from gas and diesel engines, coal-fired power plants, and other sources that burn fossil fuel. It comprises a significant proportion of particulate matter.

  • Inhalation of black carbon is associated to health problems including respiratory and cardiovascular diseases, cancer and even birth defects
  • Sources- biomass burning, cooking with solid fuels, and diesel exhaust, etc.

What does BC do?

  • Public health impacts- black carbon particulate matter contains very fine Carcinogens. Even relatively low exposure concentrations of black carbon have an inflammatory effect on the respiratory system of children.
  • Direct effect- black carbon particles directly absorb sunlight and reduce the planetary albedo when suspended in the atmosphere.
  • snow/ice albedo effect
  • BC is the strongest absorber of sunlight and heats the air directly. In addition, it darkens snowpacks and glaciers through deposition and leads to melting of ice and snow.
  • Life time- black carbon stays in the Atmosphere for only several days to weeks.
  • Thus the effects of BC on the atmospheric warning and glacier retreat disappear within months of reducing emissions.
  • According to estimates, between 25 and 35% of black carbon in the global atmosphere comes from China and India, emitted from the burning of wood and cow dung in household cooking and through the use of coal to heat homes.
  • Project Surya has been launched to reduce black carbon in atmosphere by introducing efficient stove technologies, solar cookers, solar lamps and biogas plant.

काला कार्बन-

काला कार्बन एक कालिख वाला काला पदार्थ है जो गैस एवं डीजल इंजनों, कोयला आधारित बिजली संयत्रों, तथा जीवाश्म ईंधनों के दहन वाले अन्य स्रोतों  से उत्सर्जित होता है| इसमें कणिकीय पदार्थ का एक महत्वपूर्ण अनुपात शामिल होता है |

  • श्वसन क्रिया में काले कार्बन को ग्रहण करना स्वास्थ्य समस्याओं से सम्बंधित है जिनमें श्वसन एवं ह्रदय रोग, कैंसर तथा यहाँ तक कि जन्म विकार भी शामिल हैं | स्रोत : जैव भार दहन , ठोस ईंधनों की सहायता से भोजन पकाना, तथा डीजल निकास आदि |

काला कार्बन क्या करता है ?

  • लोगों के स्वास्थ्य पर प्रभाव – काला कार्बन के कणिकीय पदार्थ बहुत उम्दा कासीनजन होते हैं | यहाँ तक की काले कार्बन की अपेक्षाकृत कम सांद्रता के संपर्क का भी बच्चों के श्वसन तंत्र पर एक  उत्तेजक प्रभाव होता है |
  • प्रत्यक्ष प्रभाव : काले कार्बन के कण सूर्य के प्रकाश को सीधे अवशोषित कर लेते हैं तथा वायुमंडल में निलंबित होने पर पृथ्वी की शुक्लता में कमी लाते हैं |
  • हिम शुक्लता प्रभाव |
  • काला कार्बन सूर्य के प्रकाश का सबसे मजबूत अवशोषक होता है तथा यह वायु को सीधे तौर पर गर्म कर देता है | इसके अतिरिक्त, यह स्नोपैक्स, तथा हिम को निक्षेपण के माध्यम से काला कर देता है तथा बर्फ एवं हिम के पिघलने की वजह बनता है |  
  • जीवन काल : काला कार्बन वायुमंडल में केवल कुछ दिनों से कुछ सप्ताह तक रहता  है |
  • इसलिए काले कार्बन का वायुमंडलीय तापन तथा हिम पर प्रभाव उत्सर्जन घटने के कुछ महीनों के भीतर गायब हो जाता है |
  • अनुमानों के मुताबिक़, विश्व के वायुमंडल में काले कार्बन का 25 से 35 प्रतिशत उत्सर्जन भारत तथा चीन में होता है, जहाँ यह  घरों में भोजन पकाने के दौरान लकड़ी तथा गाय के उपलों के दहन तथा घरों को गर्म रखने के लिए कोयले के इस्तेमाल से उत्सर्जित होता है |
  • कुशल स्टोव प्रौद्योगिकी, सौर कुकर, सौर लैंप, तथा बायोगैस प्लांट्स के द्वारा वायुमंडल में काले कार्बन को कम करने के लिए प्रोजेक्ट सूर्य की शुरुआत की गयी है |  

Brown Carbon-

  • It is a ubiquitous and unidentified component of organic aerosol which has recently come into the forefront of atmospheric research.
  • Light absorbing organic matter in atmospheric aerosols of various origins, eg soil humics, humic-like substances, tarry materials from combustion, bioaerosols, etc.

Sources-

  • Biomass burning is shown to be a major source of brown carbon
  • Smoke from agricultural fires may be an additional source.
  • Brown carbon is generally referred for Greenhouse gases and black carbon for particles resulting from impure combustion, such as soot and dust.

Climate Forcings- climate forcings are a major cause of climate change. A climate forcing is any influence on climate that originates from outside the climate system itself.

Example of external forcings include-

  1. Surface reflectivity
  2. Human induced changes changes in greenhouse gases
  3. Atmospheric aerosols
  • Positive forcings such as excess greenhouse gases warm the earth While negative forcings, such as the effects of most aerosols and volcanic eruptions, actually cool the earth.
  • Atmospheric aerosols include volcanic dust, soot from the combustion of fossil fuels, particles from burning forests and mineral dust.
  • The consequences from such forcings are often then expressed as the change in average global temperature, and the conversion factor from forcing to temperature change is the sensitivity of earth’s climate system.

भूरा कार्बन

  • यह कार्बनिक एयरोसोल का एक सर्वव्यापी और अज्ञात घटक है जो हाल ही में वायुमंडलीय अनुसंधान के मामले में सबसे आगे आया है।
  • विभिन्न स्रोर्तों के एयरोसोल में प्रकाश अवशोषी कार्बनिक पदार्थ , उदाहरण – मृदा ह्यूमिक, ह्यूमिक के जैसे पदार्थ, दहन से प्राप्त तारकोल पदार्थ, बायोएरोसोल आदि |

स्रोत :

  • जैवभार दहन भूरे कार्बन का एक प्रमुख स्रोत है|
  • कृषि सम्बन्धी आग से निकलने वाला धुंआ इसका एक अतिरिक्त स्रोत हो सकता है |
  • भूरे कार्बन को सामान्यतः हरित गृह गैसों के लिए तथा काले कार्बन को अशुद्ध दहन के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाले कणों, जैसे की कालिख एवं धूल  के लिए संदर्भित किया जाता है |

जलवायु दबाव : जलवायु दबाव जलवायु परिवर्तन का एक प्रमुख स्रोत है | जलवायु दबाव जलवायु पर होने वाला कोई भी प्रभाव है जो जलवायु तंत्र के बाहर खुद से उत्पन्न होता है |

बाह्य दबावों में शामिल हैं –

  1. सतह परावर्तन
  2. मानव द्वारा प्रेरित परिवर्तन, हरित गृह गैसों में परिवर्तन
  3. वायुमंडलीय एयरोसोल
  • सकारात्मक दबाव जैसे कि अत्यधिक हरित गृह गैसें पृथ्वी को गर्म करती हैं जबकि नकारात्मक दबाव, जैसे कि अधिकांश एयरोसोल के प्रभाव तथा ज्वालामुखीय विस्फोट, वास्तव में पृथ्वी को ठंडा करते हैं |
  • वायुमंडलीय एयरोसोल में ज्वालामुखीय धूल कण, जीवाश्म ईंधनों के दहन से उत्पन्न कालिख, वनों के दहन से उत्पन्न कण तथा खनिज चूर्ण शामिल हैं |
  • इस तरह के दबावों के परिणाम औसत वैश्विक तापमान में परिवर्तन के रूप में व्यक्त किये जाते हैं, तथा वह रूपांतरण कारक जो तापमान परिवर्तन के लिए दबाव बनाते हैं, वह पृथ्वी के जलवायु तंत्र की संवेदनशीलता हैं |

Forcing

  • Altering the Energy Balance-Radiative forcing- its defined as the power of a process to alter the climate, the change in the Earth’s energy balance due to that process.
  • Natural forcings- It includes changes in the amount of energy emitted by the sun, very slow variations in Earth’s orbit, and volcanic eruptions
  • Human-Induced forcings- It includes greenhouse gas and aerosol emissions from burning fossil fuels and modifications of the land surface, such as deforestation.

दबाव-

  • ऊर्जा संतुलन में परिवर्तन : विकिरणशील दबाव : यह जलवायु परिवर्तित करने वाली प्रक्रिया की शक्ति के रूप में परिभाषित किया जाता है, पृथ्वी के ऊर्जा संतुलन में बदलाव उसी प्रक्रिया की वजह से होते हैं |
  • प्राकृतिक दबाव : इसमें सूर्य के द्वारा उत्सर्जित ऊर्जा की मात्रा में बदलाव, पृथ्वी के अक्ष में बहुत धीमे बदलाव, तथा ज्वालामुखीय उद्गार  समाविष्ट हैं |
  • मानव प्रेरित दबाव : इसमें हरित गृह गैस तथा जीवाश्म ईंधनों के दहन से होने वाले एरोसोल उत्सर्जन एवं भूमि उपयोग में परिवर्तन, जैसे कि निर्वनीकरण शामिल हैं |

Global Warming Potential-

  • It refers to the total contribution to global warming resulting from the emission of one unit of that gas relative to one unit of the reference gas, carbon dioxide, which is assigned a value of one.
  • There are three key factors that determine the GWP value of a GHG- the gases absorption of infrared radiation, where along the electromagnetic spectrum the gas absorbs radiation and atmospheric lifetime of a gas.
  • We typically only use GWP values for gases that have a long atmospheric lifetime. Because only these gases last long enough in the atmosphere to mix Evenly and spread throughout the atmosphere to form a relatively uniform concentration.
  • Indirect radiative forcing occurs when chemical transformations involving the original gas produce a gas that is/are also a GHG, or when a gas influences other radiatively important processes such as the atmospheric lifetimes of other gases.

Carbon dioxide serves as the baseline with GWP 1.

  • The values of GWP are directly proportional to the warming caused by that gas.
  • Example- methane’s 100 year GWP is 21, which means it will cause 21 times as much warming as an equivalent mass of carbon dioxide over a 100 year time period.
  • CH4 emitted today lasts for only 12 years in the atmosphere, on average. However, on a pound-for-pound basis, CH4 absorbs more energy than CO2, making its GWP higher.
  • Chloro fluoro carbons(CFCs), hydro fluoro carbons (HFCs), perfluoro carbons (PFCs), and sulphur hexafluoride (SF6) are called high-GWP gases because, For a given amount of mass, they trap substantially more heat than CO2 .

RECEDING GLACIERS- A SYMPTOM OF GLOBAL CLIMATE CHANGE

  • In the Glacier National Park 150 years ago there were 147 glaciers and this number is now reduced to 37 and scientists predict that they are likely to melt by 2030
  • Glaciers all across the Himalayas and Alps are retreating and disappearing every year.

Impact of glacial retreat-

  • Effects on tourism and social impact
  • Unreliable snowfall
  • Environmental effects- glacial retreat can cause a rise in natural hazards such as flooding, rockslides and avalanches
  • Rising sea and water levels
  • World’s leading scientists predict that global warming may pose serious threat to national and global economy and the environment.

Sequence of Events/घटनाक्रम-

  • यह संदर्भ गैस, कार्बन डाइऑक्साइड,  जिसे एक का मान दिया गया है, की एक ईकाई के सापेक्ष उस गैस की एक ईकाई से होने वाले उत्सर्जन के फलस्वरूप वैश्विक तापन में कुल योगदान को संदर्भित करता है |
  • तीन मुख्य कारक हैं जो जी.एच.जी के जी.डब्ल्यू.पी मान को निर्धारित करते हैं – अवरक्त विकिरण का गैसीय अवशोषण, जहाँ विद्युतचुम्बकीय वर्णक्रम के साथ गैस विकिरण को अवशोषित करती है तथा गैस का वायुमंडलीय जीवनकाल |
  • हमलोग आम तौर पर जी.डब्ल्यू..पी  मान का उपयोग केवल उन गैसों के लिए करते हैं जिनका वायुमंडलीय जीवनकाल काफी लम्बा होता है | क्योंकि केवल ये गैसें ही वायुमंडल में इतने लम्बे समय तक बनी रहती हैं कि अपेक्षाकृत एकरूप सांद्रता का निर्माण करने के लिए पूरे वायुमंडल में बराबर रूप से मिश्रित हो जाएँ तथा फ़ैल जाएँ |
  • अप्रत्यक्ष विकिरणशील दबाव तब उत्पन्न होता है जब मूल गैस के समावेश  वाले रासायनिक परिवर्तन एक ऐसी गैस का उत्पादन करते हैं जो जी.एच.जी हो , अथवा जब कोई गैस अन्य विकिरणशील महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं जैसे कि अन्य गैसों के वायुमंडलीय जीवनकाल, को प्रभावित करती है |

कार्बन डाइऑक्साइड जी.डब्ल्यू.पी 1 के साथ आधार के रूप में कार्य करती है |

  • जी.डब्ल्यू.पी के मान उस गैस के द्वारा होने वाले तापन के सीधे आनुपातिक होते हैं |
  • उदाहरण : मीथेन के 100 वर्षों की जी.डब्ल्यू.पी 21 है, इसका अर्थ यह है कि यह 100 वर्षों की समय अवधि में कार्बन डाइऑक्साइड के समान द्रव्यमान के द्वारा होने वाले तापन से 21 गुणा अधिक तापन की वजह बनेगी |
  • आज उत्सर्जित हुई मीथेन औसतन  केवल 12 वर्षों तक वायुमंडल में रहती है| लेकिन पौंड फॉर पौंड के आधार पर, मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड से अधिक ऊर्जा अवशोषित करती है जिससे इसका जी.डब्ल्यू.पी अधिक हो जाता है
  • क्लोरो फ्लुरो कार्बन, हाइड्रो फ्लुरो कार्बन, परफ्लुरोकार्बन, तथा हेक्साफ्लोराइड को उच्च जी.डब्ल्यू.पी वाली गैसें कहा जाता है क्योंकि द्रव्यमान की एक दी हुई मात्रा के लिए, वे कार्बन डाइऑक्साइड से अधिक ऊष्मा अवशोषित करती हैं |

पिघलते हिमनद- वैश्विक जलवायु परिवर्तन का एक लक्षण :

  • हिमनद राष्ट्रीय उद्यान में 150 वर्ष पूर्व, कुल 147 हिमनद थे और अब यह संख्या कम होकर 37 हो गयी है तथा वैज्ञानिक ये अनुमान लगाते हैं कि वे संभवतः वर्ष 2030 तक पिघल जायेंगे |
  • पूरे हिमालय तथा पर्वत की चोटियों पर  फैले हिमनद प्रत्येक वर्ष कम हो रहे हैं तथा लुप्त होते जा रहे हैं |

हिमनदों के कम होने के प्रभाव :

  • पर्यटन पर प्रभाव तथा सामाजिक प्रभाव |
  • अविश्वसनीय हिमपात
  • पर्यावरणीय प्रभाव : हिमनदों के पिघलने से प्राकृतिक आपदाओं जैसे कि बाढ़, चट्टान स्खलन, तथा हिमस्खलन में वृद्धि हो सकती है |
  • समुद्र तथा जल स्तर में वृद्धि
  • दुनिया के अग्रणी वैज्ञानिक यह अनुमान लगाते हैं कि वैश्विक तापन से राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था एवं पर्यावरण पर गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं |

 

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