Ecology Acts & Policies Exam notes | IAS 2018 / Civil Services Exam

Ecology Acts & Policies Exam notes | IAS 2018 / Civil Services Exam

Ecology Acts & Policies Exam notes | IAS 2018 / Civil Services Exam

Ecology Acts & Policies Exam notes | IAS 2018 / Civil Services Exam

Ecology Acts & Policies Exam notes | IAS 2018 / Civil Services Exam

ACTS & POLICIES

WILD LIFE PROTECTION ACT 1972 :-

  • India is the first country in the world to have made provisions for the protection and conservation of environment in its constitution.
  • On  5th june 1972, environment was first discussed as an item of international agenda in the U.N. conference of  human Environment in Stockholm and thereafter, 5th june is celebrated all over the world as world Environment Day.
  • Soon after the stockholm conference, our country took substantive legislative steps for environmental protection.

Article -48 (A) of the constitution provides :-

  • The state shall endeavour to protect and improve the environment and to safeguard forest and wildlife of the country.”

Article 51-A (g) provides :-

  • It shall be duty of every citizen of India to protect and improve the natural environment including forests, lakes, rivers and wildlife and to have compassion for living creatures.”
  • Thus our constitution includes environment protection and conservation as one of our fundamental duties.
  • Some of the important Acts passed by the Government of India are discussed here.

NATIONAL FOREST POLICY 1988

  • The principal aim of National Forest policy, 1988 is to ensure environmental stability and maintenance of ecological balance including atmospheric equilibrium which are vital for sustenance of all life forms, human, animal and plant.

Objectives:

  • Conserving the natural heritage of the country by preserving the remaining natural forests with the vast variety of flora and fauna, which represent the remarkable biological diversity and genetic resources of the country.

BIOLOGICAL DIVERSITY ACT, 2002

  • The Biological Diversity Act 2002 was born out of India’s attempt to realize the objectives enshrined in the United Nations Convention on Biological Diversity (CBD) 1992 which recognizes the sovereign rights of states to use their own biological resources.
  • An act to provide for conservation of biological diversity, sustainable sharing of the benefits arising out of the use of biological resources, knowledge etc.

GREEN HIGHWAYS (PLANTATION, TRANSPLANTATION, BEAUTIFICATION & MAINTENANCE) POLICY-2015

  • India has a total 46.99 lakh kms of road length,, out of which over 96214 kms are national Highways, accounting 2% of total road length. The highways carry about 40% of the traffic load. The ministry has decided to develop all of existing national highways and 40,000 kms of additional roads in the next few years as Green Highways.
  • The vision is to develop eco-friendly national highways with participation of the community, farmers, NGOs, private sector, institutions, government agencies and the forest department.
  • The objective is to reduce the impacts of air pollution and dust as trees and shrubs along the highways act as natural sink for air pollutants and arrest soil erosion at the embankment slopes.
  • Plants along highway median strips and along the edges reduce the glare of oncoming vehicles which sometimes becomes cause of accidents.

अधिनियम एवं नीतियां

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 :

  • भारत विश्व का पहला देश है जिसने अपने संविधान में पर्यावरण के अनुरक्षण तथा संरक्षण के लिए प्रावधानों का निर्माण किया है |
  • 5 जून 1972 को, स्टॉकहोम में संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित मानव पर्यावरण सम्मेलन में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय कार्यसूची के विषय के  रूप में पर्यावरण पर चर्चा की गयी थी तथा उसके बाद से 5 जून को पूरी दुनिया में विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया जाता है |
  • स्टॉकहोम सम्मेलन के बाद जल्द ही हमारे देश में पर्यावरण संरक्षण के लिए स्वतंत्र वैधानिक कदम उठाये गए  |

संविधान का अनुच्छेद – 48 (A) में कहा गया है कि –

  • “राष्ट्र पर्यावरण की सुरक्षा तथा सुधार करने और देश के वनों एवं वन्यजीवों की रक्षा करने का प्रयास करेगा” |

अनुच्छेद 51 (G) में उल्लिखित है :

  • प्राकृतिक पर्यावरण, जिसमें वन, झीलें, नदियाँ, तथा वन्यजीव शामिल हैं, की रक्षा करना तथा सजीव जीवों के लिए दया का भाव रखना भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्त्तव्य होगा |
  • इस तरह हमारा संविधान पर्यावरण संरक्षण तथा अनुरक्षण को हमारे मौलिक कर्तव्यों के रूप में शामिल कर्ता है |
  • भारत सरकार के द्वारा पारित किये गए कुछ अधिनियमों की नीचे चर्चा की गयी है |

राष्ट्रीय वन नीति 1988

  • राष्ट्रीय वन नीति, 1988 का प्रमुख उद्देश्य पर्यावरणीय स्थिरता और पारिस्थितिक संतुलन के रख-रखाव को सुनिश्चित करना है जिसमें वायुमंडलीय संतुलन भी शामिल है जो सभी जीवन स्वरूपों, मानव, पशु और पौधों के जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

उद्देश्य :

  • पादप तथा पशुओं की विशाल विविधता वाले बचे हुए प्राकृतिक वनों की रक्षा करके देश के प्राकृतिक धरोहर की रक्षा करना | ये वन देश की असाधारण जैविक विविधता तथा आनुवांशिक संसाधनों का प्रतिनिधित्व करते हैं |   

जैविक विविधता अधिनियम, 2002

  • जैव विविधता अधिनियम 2002 की उत्पत्ति जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (सीबीडी ) 1992,   जो अपने स्वयं के जैविक संसाधनों का उपयोग करने हेतु राज्यों के सार्वभौम अधिकार को स्वीकार करता है,   के उद्देश्यों ,को पूरा करने के भारत के प्रयासों की वजह से हुई है |
  • जैव विविधता के संरक्षण तथा जैविक संसाधनों के प्रयोग, ज्ञान आदि से होने वाले लाभों के सतत् साझाकरण की व्यवस्था करने वाला अधिनियम|

Ecology Acts

हरित राजमार्ग (पौधारोपण, प्रतिरोपण, सौन्दर्यीकरण तथा रख-रखाव ) नीति -2015

  • भारत में कुल 46.99 लाख किमी लम्बी  सड़कें हैं जिनमें 92214 किमी के राजमार्ग हैं जिनकी कुल सड़क लम्बाई में 2 प्रतिशत की हिस्सेदारी है | ये राजमार्ग लगभग 40 प्रतिशत यातायात का भार उठाते हैं | मंत्रालय ने सभी मौजूदा उच्च्मार्गों को तथा 40000 किमी की अतिरिक्त सड़कों को अगले कुछ वर्षों में हरित राजमार्ग के रूप में  विकसित करने का निर्णय लिया है |
  • इसका लक्ष्य समुदाय, किसानों, गैर-सरकारी संगठनों, निजी क्षेत्र, संस्थानों, सरकारी एजेंसियों, तथा वन विभाग के सहयोग के माध्यम से पर्यावरण अनुकूल राष्ट्रीय उच्चमार्गो के विकास करना है |
  • इसका उद्देश्य वायु प्रदूषण तथा धूल के प्रभावों को कम करना है क्योंकि राजमार्गों  के किनारे के वृक्ष तथा झाडियाँ वायु प्रदूषकों  के लिए प्राकृतिक सिंक के रूप में कार्य करते हैं तथा तटबंधीय ढलान पर मृदा अपरदन को रोकते हैं|
  • राजमार्गों  के बीच की पट्टियों  तथा किनारों पर लगे पौधे आने वाले वाहनों की चौंधाने वाली चमक को कम कर देते हैं जो कभी कभी दुर्घटनाओं की वजह बनती है |

COASTAL REGULATION ZONE, 2011

  • In the 1991 Notification, the CRZ area was classified as CRZ-I (ecological sensitive), CRZ-II (built-up area), CRZ-III (Rural area) and CRZ-IV (water seas).
  • In the 2011 notification, the above classification is retained. The only change is the inclusion of CRZ-IV, which includes the water areas upto the territorial waters and the tidal influenced water bodies.

ISLAND PROTECTION ZONE NOTIFICATION, 2011

Why is a separate Island Protection Zone Notification, 2011 required?

  • There are about 500 islands in Andaman & Nicobar and about 30 in Lakshadweep. These two groups of oceanic islands are home to some of the country’s most thriving biodiversity hotspots.
  • The A&N islands are known for their terrestrial and marine biodiversity including forest area which covers 85% of the A&N geographical areas. These islands are so small that in most of the cases, the 500m Coastal Regulation Zone regulations overlap.

HAZARDOUS WASTE MANAGEMENT RULES, 2016

  • Hazardous waste means any waste, which by reason of characteristics, such as physical, chemical, biological, reactive, toxic, flammable, explosive or corrosive, causes danger to health, or environment.
  • It comprises the waste generated during the manufacturing processes of the commercial products such as industries involved in petroleum refining, production of pharmaceuticals, petroleum, paint, aluminium, electronic products etc.

CONSTRUCTION AND DEMOLITION WASTE MANAGEMENT RULES, 2016

The salient features are:

Applies to everyone who generates construction and demolition waste.

Duties of waste generators

  • Every waste generator shall segregate construction and demolition waste and deposit at collection centre or handover it to the authorised processing facilities
  • Shall ensure that there is no littering or deposition so as to prevent obstruction to the traffic or the public or drains.

BIO-MEDICAL WASTE MANAGEMENT RULES, 2016

  • Biomedical waste comprises human & animal anatomical waste, treatment apparatus like needles, syringes and other materials used in health care facilities in the process of treatment and research.
  • This waste generated during diagnosis, treatment or immunisation in hospitals, nursing homes, pathological laboratories, blood bank, etc.
  • Total bio-medical waste generation in the country is 484 TPD from 1,68,869 healthcare facilities (HCF), out of which 447 TPD is treated.

तटीय विनियमन क्षेत्र 2011

  • 1991 की अधिसूचना में , तटीय विनियमन क्षेत्रों (CRZ ) को तटीय विनियमन क्षेत्र- I – (पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील),  तटीय विनियमन क्षेत्र- II ( निर्मित क्षेत्र ) तटीय विनियमन क्षेत्र – III (ग्रामीण क्षेत्र ), तथा तटीय विनियमन क्षेत्र – IV ( समुद्री जल ) में वर्गीकृत किया गया था |
  • 2011 की अधिसूचना में उपरोक्त वर्गीकरण को रहने दिया गया है | एकमात्र परिवर्तन तटीय विनियमन क्षेत्र-IV में समावेश है जिसमें सीमान्त सागरों तक जलीय क्षेत्रों एवं ज्वार प्रभावित जल निकायों को शामिल किया  गया है |

द्वीप संरक्षण क्षेत्र अधिसूचना 2011

एक पृथक द्वीप संरक्षण क्षेत्र अधिसूचना, 2011 की आवश्यकता क्यों है ?

  • अंडमान तथा निकोबार में लगभग 500 द्वीप हैं तथा लक्षद्वीप में लगभग 30 द्वीप हैं | समुद्री द्वीपों के ये दो समूह देश के कुछ सबसे अधिक संपन्न जैव विविधता हॉटस्पॉट्स के घर हैं |
  • अंडमान तथा निकोबार द्वीपों को उनकी स्थलीय तथा समुद्री जैव विविधता के लिए जाना जाता है जिसमें वह वन क्षेत्र भी शामिल है जो अंडमान एवं निकोबार द्वीपों  के 85 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्रों पर फैला है | ये द्वीप इतने छोटे हैं कि अधिकांश मामलों में 500 मी का तटीय विनियमन क्षेत्र अधिव्यापन करता है |

खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016

  • खतरनाक अपशिष्ट यानी कोई भी वैसा अपशिष्ट जो अपनी विशेषताओं जैसे की भौतिक, रासायनिक, जैविक विशेषताओं, क्रियाशीलता, विषाक्तता, ज्वलनशीलता, विस्फोटक, या संक्षारण की विशेषताओं के कारण स्वास्थ्य, अथवा पर्यावरण के लिए खतरे की वजह बनता है |
  • इसमें व्यापारिक उत्पादों जैसे कि पेट्रोलियम शोधन, दवाओं के उत्पादन, पेट्रोलियम, पेंट, एल्युमीनियम, विद्युत उत्पादों आदि के उत्पादन में संलग्न उद्योगों  की विनिर्माण प्रक्रिया के दौरान निर्मित अपशिष्ट सम्मिलित है |

निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016

मुख्य विशेषताएँ हैं :

यह हर उस व्यक्ति पर लागू होता है जो निर्माण तथा विध्वंस से संबंधित अपशिष्ट का उत्पादन करता है |

अपशिष्ट उत्पादको के कर्त्तव्य :

  • प्रत्येक अपशिष्ट उत्पादक निर्माण तथा अपशिष्ट से संबंधित अपशिष्ट को पृथक करेगा तथा इसे संग्रहण केंद्र में जमा करेगा या अधिकृत प्रसंस्करण संस्थानों को सौंपेगा |
  • वह सुनिश्चित करेगा कि थोड़ा भी कूड़ा-करकट या निक्षेप शेष नहीं हो ताकि आम लोगों को कोई दिक्कत ना हो एवं यातायात अथवा जल निकासी की समस्या ना हो |

जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016

  • जैव चिकित्सा अपशिष्ट पदार्थों में मानव एवं पशुओं के संरचनात्मक अपशिष्ट, उपचार एवं उपकरण अपशिष्ट जैसे कि सुई, सीरिज़, तथा उपचार एवं अनुसंधान की प्रक्रिया में स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों में इस्तेमाल की जाने वाली अन्य सामग्रियाँ |
  • अस्पतालों, नर्सिंग होम,  रोग निदान संबंधी प्रयोगशालाओं, ब्लड बैंक, आदि में रोग निदान, उपचार अथवा प्रतिरक्षा  के दौरान निर्मित अपशिष्ट |
  • इस देश में कुल जैव चिकित्सा अपशिष्ट निर्माण की मात्रा 484 TPD है जो 1,68,869 स्वास्थ देखभाल संस्थानों से निकलती है, तथा जिसमें से 447 TPD का उपचार किया जाता है |

E-WASTE MANAGEMENT RULES, 2016

  • 17 lakh tonnes of E-waste is generated every year, with an annual increase of 5% of generation of E-waste.
  • For the first time, the rules will bring the producers under Extended Producer Responsibility (EPR), along with targets. The producers have been made responsible for collection of E-waste and for its exchange

Salient features-

  • Manufacturer, dealer, refurbisher and Producer Responsibility Organization (PRO) have been introduced as additional stakeholders in the rules.
  • The applicability of the rules has been extended to components, consumables, spares and parts of EEE in addition to equipment as listed in Schedule I.
  • Compact Fluorescent Lamp (CFL) and other mercury containing lamp brought under the purview of rules.

WETLANDS (CONSERVATION AND MANAGEMENT) RULES 2010

  • The Ministry of Environment and Forests has notified the Wetlands (Conservation and management) Rules 2010 in order to ensure that there is no further degradation of wetlands
  • The rules specify activities which are harmful to wetlands such as industrialization, construction, dumping of untreated waste and  prohibit these activities in the wetlands.
  • Under the rules, wetlands have been classified for better management and easier identification.

NATIONAL GREEN TRIBUNAL (NGT)

  • The preamble of the act provides for the establishment of a National Green Tribunal for the effective and expeditious disposal of cases relating to environmental protection, conservation of forests and other natural resources, including enforcement of any legal right relating to environment and giving relief and compensation for damages to persons and property and for matters connected therewith or incidental thereto (The National Green Tribunal Act, 2010).
  • With the establishment of NGT, India has joined the distinguished league of countries that have a dedicated adjudicatory forum to address environmental disputes.
  • India is third country in the world to full fledged green tribunal followed by new Zealand and Australia.
  • The specialized architecture of the NGT will facilitate fast track resolution of environmental cases and provide a boost to the implementation of many sustainable development measures.
  • NGT is mandated to dispose the cases within six months of their appeals.

THE OZONE DEPLETING SUBSTANCES RULES

  • The Ozone Depleting Substances (Regulation and Control) Rules, 2000 under the Environment (Protection) Act, in July 2000.
  • These rules set the deadlines for phasing out of various ODSs, besides regulating production, trade, import and export of ODSs and the product containing ODS.
  • The Ozone Depleting Substances (Regulation and control) Rule, 2000 were amended in 2001, 2003, 2004 and 2005 to facilitate implementation of ODS phase-out at enterprises in various sectors.
  • These rules prohibit the use of CFCs in manufacturing various products beyond 1st January 2003.
  • Except in metered dose inhaler and for other medical purpose.

ई-वेस्ट (इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट ) प्रबंधन नियम, 2016

  • प्रतिवर्ष 17 लाख टन ई-वेस्ट का उत्पादन होता है जिसमें प्रतिवर्ष ई-वेस्ट के उत्पादन में  5 प्रतिशत की वृद्धि हो जाती है |
  • पहली बार, ये नियम उत्पादकों को लक्ष्यों के साथ ही उत्पादकों की विस्तारित जवाबदेही (EPR ) के अंतर्गत लायेंगे | ई-वेस्ट के आदान-प्रदान के लिए इसके संग्रहण हेतु उत्पादकों को जवाबदेह बनाया गया है |

मुख्य विशेषताएँ :

  • निर्माता, विक्रेता, नवीकरण करने वाला, तथा उत्पादक जवाबदेही संगठन का परिचय अतिरिक्त हितधारकों के रूप में करवाया गया है |
  • अनुसूची I में सूचीबद्ध उपकरणों के अतिरिक्त इन नियमों की प्रयोज्यता अवयवों , उपभोग्य वस्तुओं, पुर्जों तथा EEE के भागों  तक विस्तारित की गयी है |
  • कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लैंप ( सीएफएल ) तथा लैंप वाली अन्य मर्करी को इन नियमों की परिधि में लाया गया है |

आर्द्र्भूमि (संरक्षण तथा प्रबंधन ) नियम 2010 :

  • वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने आर्द्र्भूमि (संरक्षण तथा प्रबंधन ) नियम 2010 को अधिसूचित किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आर्द्र्भूमियों का भविष्य में पतन ना हो |
  • ये नियम आर्द्र्भूमियों के लिए हानिकारक गतिविधियों जैसे कि औद्योगीकरण, निर्माण, अनुपचारित अपशिष्ट का निपटान आदि को निर्दिष्ट करते हैं तथा इन गतिविधियों को रोकने की वकालत करते हैं |
  • इन नियमों के अंतर्गत बेहतर प्रबंधन तथा सुगम पहचान के लिए आर्द्र्भूमियों को वर्गीकृत किया गया है |

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी )

  • इस अधिनियम की प्रस्तावना के द्वारा पर्यावरण संरक्षण, वन तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों के प्रभावी एवं त्वरित निपटान हेतु एक राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की स्थापना की गयी है | इन मामलों में  पर्यावरण से संबंधित किसी भी वैधानिक अधिकार को लागू करना तथा व्यक्तियों एवं संपत्तियों को हुए नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति एवं राहत प्रदान करना तथा इससे जुड़े मामले अथवा अन्य आकस्मिक मामले शामिल हैं | (राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण अधिनियम, 2010 )
  • राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की स्थापना के साथ ही भारत उन देशों के विशिष्ट संघ में शामिल हो गया है जिनके पास पर्यावरणीय विवादों का निपटारा करने के लिए समर्पित अधिनिर्णय न्यायाधिकरण है |
  • भारत, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड के बाद दुनिया का तीसरा देश है जहां एक पूर्ण रूप से विकसित हरित प्राधिकरण है
  • एनजीटी की विशेष संरचना पर्यावरणीय मामलों के तीव्र निबटान को सुगम बनाएगी तथा विभिन्न सतत विकास उपायों के  क्रियान्वयन को प्रोत्साहन प्रदान करेगी |
  • एनजीटी के लिए मामलों की अपील के छः महीनों के भीतर उनका निपटारा करना अनिवार्य है |

ओजोन अवक्षयकारी पदार्थ नियम

  • पर्यावरण (संरक्षण )अधिनियम के अंतर्गत  ओजोन अवक्षयकारी पदार्थ (विनियमन और नियंत्रण ) नियम, 2000 |
  • ये नियम ओजोन अवक्षयकारी पदार्थों तथा ओजोन अवक्षयकारी पदार्थ युक्त उत्पादों के उत्पादन, व्यापार, आयात और निर्यात को विनियमित करने के अतिरिक्त विभिन्न ओजोन अवक्षयकारी पदार्थों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने हेतु समयसीमा का निर्धारण करते हैं |
  • ओजोन अवक्षयकारी पदार्थ (विनियमन एवं नियंत्रण ) नियम,  2000 में वर्ष 2001, 2003, 2004 एवं वर्ष 2005 में संशोधन किये गए थे ताकि विभिन्न क्षेत्रों के उद्यमों से ओजोन अवक्षयकारी पदार्थों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के कार्य को सुगम बनाया जा सके |
  • ये नियम 1 जनवरी 2003 के बाद से विभिन्न उत्पादों के निर्माण में सीएफसी  के प्रयोग को प्रतिबंधित करते हैं |
  • मीटर डोज इन्हेलर तथा अन्य चिकित्सा संबंधी उद्देश्यों के अतिरिक्त  |

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