Constitution Indian Polity Study Content for UPSC / IAS Exam

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Historical Background of our Constitution / हमारे संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

There are certain events in the British rule that laid down the legal framework for the organisation and functioning of government in British India. These events have greatly influenced our constitution./ब्रिटिश शासन में कुछ घटनाएं ऐसी थीं, जिनके कारण ब्रिटिश शासित भारत में सरकार और प्रशासन की विधिक रुपरेखा निर्मित की गयी | इन घटनाओं ने हमारे संविधान पर गहरा प्रभाव छोड़ा |

The Company Rule (1753-1858)/कंपनी का शासन ( 1753-1858 ) :

  • Regulating Act of 1773/1773 का रेगुलेटिंग एक्ट
  • Pitt’s India Act of 1784/1784 का पिट्स इंडिया एक्ट
  • Charter Act of 1833/1833 का चार्टर एक्ट
  • Charter Act of 1853 / 1853 का चार्टर एक्ट

The Crown Rule (1858-1947)/ताज का शासन ( 1858-1947 ) :

  • Government of India Act of 1858/1858 का भारत शासन अधिनियम
  • Indian Council Act of 1861, 1892 and 1909/1861, 1892 और 1909 का भारत परिषद् अधिनियम
  • Government of India Act of 1919/1919 का भारत शासन अधिनियम
  • Government of India Act of 1935/1935 का भारत शासन अधिनियम
  • Indian Independence Act of 1947 / भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947

Regulating Act of 1773 / 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट

The Company Rule/कंपनी शासन :

 Regulating Act of 1773/1773 का रेगुलेटिंग एक्ट :

It laid the foundation of central administration in India./इसके द्वारा भारत में केन्द्रीय प्रशासन की नींव रखी गयी

Features of the Act/अधिनियम की विशेषताएं :

  • It designated the Governor of Bengal as the Governor-General of Bengal and created an executive council of 4 members to assist him./इस अधिनियम द्वारा बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर जनरल पद नाम दिया गया और उसकी सहायता के लिए एक चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद् का गठन किया गया |
  • It made the Governors of Bombay and Madras presidencies subordinate to the Governor-General of Bengal./इसके द्वारा मद्रास एवं बम्बई के गवर्नर, बंगाल के गवर्नर जनरल के अधीन हो गए |
  • It provided for the establishment of a Supreme Court at Calcutta comprising 1 Chief Justice and 3 other judges./इसके अंतर्गत कलकत्ता में एक उच्चतम न्यायालय की स्थापना की गई  जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश और 3 अन्य न्यायधीश थे |
  • It prohibited the servants of the Company from engaging in any private trade or accepting bribes or presents./इसके तहत कंपनी के कर्मचारियों को निजी व्यापार करने और भारतीय लोगों से उपहार और रिश्वत लेना प्रतिबंधित कर दिया गया |
  • It strengthened the control of British Government over the company by requiring the Court of Directors (governing body of the company) to report on its revenue, civil, and military affairs in India./इस अधिनियम के द्वारा कोर्ट ऑफ़ डाईरेक्टर्स ( कंपनी की गवर्निंग बॉडी ) के माध्यम से कंपनी पर ब्रिटिश सरकार का नियंत्रण सशक्त हो गया | इसे भारत में इसके राजस्व, नागरिक और सैन्य मामलों की जानकारी ब्रिटिश सरकार को देना आवश्यक हो गया |

Pitt’s India Act of 1784 / 1784 का पिट्स इंडिया एक्ट :

  • It distinguished between the commercial and political functions of the Company./इसने कंपनी के राजनैतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक-पृथक कर दिया |
  • It allowed the Court of Directors to manage the commercial affairs and created a new body called Board of Control to manage the political affairs. It established a system of double government./इसने निदेशक मंडल को कंपनी के व्यापारिक मामलों के अधीक्षण की अनुमति दे दी और राजनैतिक मामलों के प्रबंधन के लिए नियंत्रण बोर्ड का गठन किया | इसने द्वैध शासन की व्यवस्था का शुभारम्भ कर दिया |
  • It empowered the Board of Control to supervise and direct all operations of the civil and military government or revenues of the “British possessions in India”./नियंत्रण बोर्ड को यह शक्ति थी कि वह “ब्रिटिश नियंत्रित भारत में” सभी नागरिक, सैन्य सरकार व राजस्व गतिविधियों का अधीक्षण एवं नियंत्रण करे |

Charter Act of 1833/1833 का चार्टर एक्ट :

This Act was the final step towards centralisation in British India./ब्रिटिश भारत के केन्द्रीयकरण की दिशा में यह अधिनियम निर्णायक कदम था |

Features of the Act/अधिनियम की विशेषताएं :

  • It made the Governor-General of Bengal as the Governor-General of India and vested in him all civil and military powers. It created a Government of India having authority over the entire territorial area possessed by the British in India./इसने बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बना दिया जिसमें सभी नागरिक और सैन्य शक्तियां निहित थीं | इसने एक ऐसी सरकार का निर्माण किया, जिसका ब्रिटिश कब्जे वाले सम्पूर्ण भारतीय क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण था |
  • It deprived the governor of Bombay and Madras of their legislative powers./इसने बम्बई और मद्रास के गवर्नरों को विधायिका सम्बन्धी शक्ति से वंचित कर दिया |
  • It ended the activities of the East India Company as a commercial body, which became a purely administrative body./इसने ईस्ट इंडिया कंपनी की एक व्यापारिक निकाय के रूप में की जाने वाली गतिविधियों को समाप्त कर दिया | अब यह विशुद्ध रूप से प्रशासनिक निकाय बन गया |
  • It attempted to introduce a system of open competition for selection of civil servants and stated that Indians should not be debarred from holding any office under the Company. But this provision  was opposed by the Court of Directors./इसने सिविल सेवकों के चयन के लिए खुली प्रतियोगिता का आयोजन शुरू करने का प्रयास किया जिसमें यह कहा गया कि कंपनी में भारतीयों को किसी पद से वंचित नहीं किया जायेगा | लेकिन निदेशक मंडल के विरोध के कारण इस प्रावधान को समाप्त कर दिया गया |

Charter Act of 1853/1853 का चार्टर एक्ट :

  • It separated the legislative and executive functions of the Governor-General’s council. It provided for addition of 6 new members to the council, called legislative councillors. It established separate Governor-General’s legislative council, known as the Indian (Central) Legislative Council./इसने गवर्नर-जनरल की परिषद् के विधायी एवं प्रशासनिक कार्यों को अलग कर दिया | इसके तहत परिषद् में छह नए पार्षद और जोड़े गए, जिन्हें विधान पार्षद कहा गया | इसने गवर्नर जनरल के लिए नई विधान परिषद् का गठन किया, जिसे भारतीय ( केन्द्रीय) विधान परिषद् कहा गया |
  • It introduced an open competition system of selection and recruitment of civil servants./इसने सिविल सेवकों की भर्ती एवं चयन हेतु खुली प्रतियोगिता व्यवस्था का शुभारम्भ किया |
  • It extended the Company’s rule and allowed it to retain the possession of Indian territories on trust for the British Crown. But it did not specify any time period indicating that the Company’s rule could be terminated anytime by the Parliament./इसने कंपनी के शासन को विस्तारित कर दिया और भारतीय क्षेत्र को इंग्लैंड राजशाही के विश्वास के तहत कब्जे में रखने का अधिकार दिया | इसमें किसी निश्चित समय सीमा का निर्धारण नहीं किया गया जिससे यह स्पष्ट था कि संसद द्वारा कंपनी का शासन किसी भी समय समाप्त किया जा सकता था |
  • It introduced local representation in the Indian Legislative Council. Of the 6 new legislative members, 4 members were appointed by the local governments of Madras, Bombay, Bengal and Agra./इसने भारतीय ( केन्द्रीय ) विधान परिषद् में स्थानीय प्रतिनिधित्व प्रारंभ किया | परिषद् के छह नए सदस्यों में से, चार का चुनाव बंगाल, मद्रास, बम्बई और आगरा की स्थानीय प्रांतीय सरकारों द्वारा किया जाना था |

Government of India Act of 1858  /1858 का भारतीय शासन अधिनियम :-

The Crown Rule/ताज शासन :

Government of India Act of 1858/1858 का भारतीय शासन अधिनियम :

It abolished the East India Company, and transferred the powers to the British Crown./इसने ईस्ट इंडिया कंपनी को समाप्त कर दिया समस्त शक्तियां ब्रिटिश राजशाही को हस्तांतरित कर दी |

Features of the Act/अधिनियम की विशेषताएं :

  • The designation of Governor-General of India was changed to Viceroy of India. He was the direct representative of the British Crown in India./भारत का गवर्नर-जनरल पद बदलकर भारत का वायसराय कर दिया गया | वह भारत में ब्रिटिश ताज का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि बन गया |
  • It ended the system of double government by abolishing the Board of Control and Court of Directors./इसने नियंत्रण बोर्ड और निदेशक मंडल समाप्त कर शासन की द्वैध शासन प्रणाली समाप्त कर दी |
  • It created a new office, Secretary of State for India, vested with complete authority over Indian administration. He was a member of British Cabinet and was responsible ultimately to the British Parliament./इसने एक नए पद भारत का राज्य सचिव का सृजन किया जिसमें भारतीय प्रशासन पर सम्पूर्ण नियंत्रण की शक्ति निहित थी | वह ब्रिटिश कैबिनेट का सदस्य था और अंततः ब्रिटिश संसद के प्रति उत्तरदायी था |
  • It established an advisory body of 15 member Council of India to assist Secretary of State (Chairman of Council) for India./भारत सचिव ( परिषद् का अध्यक्ष ) की सहायता के लिए 15 सदस्यीय भारतीय परिषद् सलाहकार समिति का गठन किया गया |

Indian Council Act of 1861  /1861 का भारतीय परिषद् अधिनियम –

  • It associated Indians with the law making process. The viceroy could nominate some Indians as non-official members of his expanded council./इसने कानून बनाने की प्रक्रिया में भारतीय प्रतिनिधियों को शामिल किया | वायसराय कुछ भारतीयों को विस्तारित परिषद् में गैर-सरकारी सदस्य के रूप में मनोनीत कर सकता था |
  • It initiated the process of decentralisation by restoring the legislative powers to the Bombay and Madras Presidencies./इसने बम्बई और मद्रास प्रेसिडेंसियों को विधायी शक्तियां पुनः देकर विकेन्द्रीयकरण की शुरुआत की |
  • It also provided for the establishment of new legislative councils for Bengal, North Western Frontier Province and Punjab./इसने बंगाल, उत्तर-पश्चिम सीमा प्रान्त और पंजाब में नए विधान परिषदों का गठन किया |
  • It empowered the Viceroy to make rules and orders for the convenient transaction of business in the council. It also gave recognition to portfolio system./इसने वायसराय को परिषद् में कार्य सञ्चालन के लिए नियम और आदेश बनाने की शक्तियां प्रदान की | इसने पोर्टफोलियो प्रणाली  को भी मान्यता दी |
  • It empowered the Viceroy to issue ordinances, without the concurrence of legislative council, during an emergency. The life of such ordinance was 6 months./इसने वायसराय को आपातकाल में बिना परिषद् की मान्यता के अध्यादेश जारी करने के लिए अधिकृत किया | ऐसे अध्यादेशों की अवधि मात्र छह माह होती थी |

Indian Council Act of 1892  / 1892 का भारतीय परिषद् अधिनियम  

  • It increased the number of additional (non-official) members in the central and provincial legislative councils, but maintained official majority in them./इसने केन्द्रीय और प्रांतीय परिषदों में अतिरिक्त (गैर-सरकारी) सदस्यों की संख्या को बढाया, हालाँकि बहुमत सरकारी सदस्यों का ही रहता था |
  • It increased the functions of legislative council and gave them the power of discussing the budget and addressing questions to the executive./इसने विधान परिषद् के कार्यों में वृद्धि कर उन्हें बजट पर बहस करने कार्यपालिका के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए अधिकृत किया |

 

It provided for the nomination of some non-official members of the/इसने कुछ गैर-सरकारी सदस्यों को मनोनीत करने के लिए प्रावधान किया :

 

 

 

Central Legislative Council by the viceroy on the recommendation of the provincial legislative councils and the Bengal Chamber of Commerce./प्रांतीय विधान परिषद् और बंगाल चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के सिफारिश पर केन्द्रीय विधान परिषद् के लिए वायसराय को यह शक्ति प्राप्त थी  |

Provincial Legislative councils by the Governors on the recommendation of the district boards, municipalities, universities, trade associations, zamindars and chambers./प्रांतीय विधान परिषद् में जिला परिषद्, नगरपालिका, विश्वविद्यालय, व्यापर संघ, जमींदार और चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स की सिफारिशों पर गवर्नर को यह शक्ति प्राप्त थी |

Indian Council Act of 1909  / 1909 का भारतीय परिषद् अधिनियम  –

  • It is also known as Morley-Minto Reforms. It increased the size of the legislative councils, both central (from 16 to 60) and provincial (not uniform)./यह मोर्ले-मिंटो सुधार के भी नाम से जाना जाता है | इसने विधान परिषदों के आकार में काफी वृद्धि की, केन्द्रीय ( 16 से बढ़कर 60 ) और प्रांतीय ( एक समान ) थे |
  • It retained official majority in the Central Legislative Council but allowed the provincial legislative councils to have non-official majority./इसने केन्द्रीय परिषद् में सरकारी बहुमत को बनाए रखा लेकिन प्रांतीय परिषद् में गैर-सरकारी सदस्यों के बहुमत की अनुमति थी |
  • It enlarged the deliberative functions of the legislative councils at both the levels. Members were allowed to ask supplementary questions, move resolution on the budget etc./इसने दोनों स्तर पर विधान परिषद् के चर्चा कार्यों का दायरा बढ़ाया | सदस्यों को अनुपूरक प्रश्न पूछने, बजट पर संकल्प रखने इत्यादि की अनुमति थी |
  • It provided for the association of Indians with the executive Councils of the Viceroy and Governors./इसने भारतीयों को वायसराय और गवर्नर की कार्यपरिषद के साथ संघ बनाने का प्रावधान किया |
  • It introduced a system of communal representation for Muslims by accepting the concept of ‘separate electorate’./इसने “पृथक निर्वाचन” के आधार पर मुस्लिमों के लिए सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व का प्रावधान किया |
  • It provided for the separate representation of presidency corporations, chamber of commerce, universities and zamindars./इसने प्रेसीडेंसी कारपोरेशन, चैम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स, विश्वविद्यालयों और जमींदारों के लिए अलग प्रतिनिधित्व का प्रावधान भी किया |

 

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