Conservation Efforts Ecology Content : UPSC IAS Online Exam Preparation

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Project Tiger-

  • It is the most famous wildlife conservation project of India launched in 1973 to protect the diminishing population of Indian tigers
  • Main aim was to create a safe haven and ideal environment conditions for the survival and growth of tigers and its prey to ensure the maintenance of a viable population of this wonderful animal in the country.
  • Following steps are taken-
  • National ban was imposed on tiger hunting in 1970
  • Wildlife protection act came into force in 1972
  • Project tiger was launched in 1973
  • And various tiger reserves were created in the country based on a ‘core- buffer’ strategy.

Objective-

  • To ensure maintenance of available population of tigers in India for scientific, economic, aesthetic,  cultural and ecological value
  • To preserve, for all times, the areas of such biological importance as a national heritage for the benefit, education and enjoyment of the people.
  • In the initial phase of project only 9 tiger reserves were established in different

States during the period of 1973-74 by the joint effort of central and state governments namely-

Manas(Assam), Palamau(Bihar), Similipal(orrisa), corbett(U.P), kanha (M.P), Melghat(Maharashtra), bandipur (karnataka), Ranthambhore (Rajasthan), Sunderbans(West Bengal)

  • At present the number has grown to 28 reserves in 2006 with a total tiger population of over 1000 tigers from a mere 268 in 9 reserves in 1972.
  • The various tiger reserves were created in the country based on core- buffer strategy-

Core area- the cored areas are freed of all human activities. It has the legal status of a national park or wildlife sanctuary. It is kept free of biotic disturbances and forestry operations like collection of minor forest produce, grazing, and other human disturbances are not allowed within.

Buffer areas- the buffer area are subjected to conservation-oriented land use. It comprises forest and non- forest land. It is a multi-purpose use area with twin objective of providing habitat supplement to spillover population of wild animals from core conservation unit and to provide site specific Co-developmental inputs to surrounding villages for relieving their impact on core area.

बाघ परियोजना-

  • यह भारत की सर्वाधिक प्रसिद्ध वन्यजीव संरक्षण परियोजना है जिसकी शुरुआत 1973 में भारतीय बाघों की गिरती जनसंख्या को संरक्षित करने के लिए की गयी थी |
  • इसका मुख्य लक्ष्य बाघों तथा इसके शिकारों  की उत्तरजीविता तथा उनकी वृद्धि के लिए संरक्षित ठिकानों तथा आदर्श वातावरण का निर्माण करना था  ताकि देश में इस अद्भुत जानवर की जीवक्षम जनसंख्या बनी रहे |
  • निम्नलिखित कदम उठाये गए हैं :
  • बाघों के शिकार पर 1970 में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया |
  • वर्ष 1972 में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम लागू हुआ |
  • बाघ परियोजना की शुरुआत वर्ष 1973 में की गयी |
  • तथा देश में क्रोड-बफर क्षेत्र रणनीति के आधार पर  विभिन्न बाघ आगारों का निर्माण किया गया |

उद्देश्य :

  • वैज्ञानिक, आर्थिक, सौन्दर्यात्मक, सांस्कृतिक तथा पारिस्थितिक मूल्यों के लिए भारत में बाघों की शेष जनसंख्या का रख – रखाव सुनिश्चित करना |
  • इस तरह के जैविक महत्त्व के क्षेत्रों को लोगों के मनोरंजन, शिक्षा तथा लाभ के लिए राष्ट्रीय धरोहर के रूप में हर बार के लिए संरक्षित करना |
  • इस परियोजना के आरंभिक चरण में विभिन्न राज्यों में वर्ष 1973-74 के दौरान राज्यों तथा केंद्र सरकारों के संयुक्त प्रयासों से केवल 9 बाघ आगारों की स्थापना की गयी थी | इन बाघ आगारों के नाम निम्नलिखित हैं :
  • मानस (असम ), पलामू (बिहार ), सिमिलीपाल (उड़ीसा), कॉर्बेट (उत्तर प्रदेश ) , मेलघाट (महाराष्ट्र), बन्दीपुर (कर्नाटक ) , रणन्थभोर ( राजस्थान ) सुंदरबन (पश्चिम बंगाल )
    • वर्तमान में वर्ष 2006 तक इनकी संख्या 28 आगारों तक पँहुच गयी है जहाँ 1000 से अधिक संख्या में बाघ पाए जाते हैं जिनकी 1972 में 9 आगारों में संख्या मात्र 268 थी |
    • विभिन्न बाघ आगारों का निर्माण देश में क्रोड-बफर रणनीति के आधार पर किया गया है –

क्रोड क्षेत्र : क्रोड क्षेत्र सभी मानव गतिविधियों से मुक्त होते हैं | इसे राष्ट्रीय उद्यान अथवा वन्यजीव अभ्यारण्य का वैधानिक दर्जा प्राप्त है |  इसे बायोटिक व्यवधानों से तथा वानिकी क्रियाओं,जैसे वन उत्पादों के संग्रहण, चारण, आदि से मुक्त रखा जाता है | साथ ही इसके भीतर मानव व्यवधानों की अनुमति नहीं होती है |

बफर क्षेत्र : बफर क्षेत्र को संरक्षण उन्मुख भूमि उपयोग के अधीन रखा जाता है | इसमें वनीय तथा गैर-वनीय भूमि सम्मिलित होती है | यह  एक बहुउद्देश्यीय उपयोगों वाला क्षेत्र होता है जिसके दो उद्देश्य होते हैं : क्रोड संरक्षण इकाई वाले वन्यजीवों की अधिनीत जनसंख्या को वास स्थल प्रदान करना तथा क्रोड क्षेत्र पर उनके प्रभाव से मुक्त होने हेतु आसपास के गाँवों को सह-विकास सहयोग प्रदान करना |

National Tiger Conservation Authority-

  • In 2005, the National Tiger Conservation Authority was established in following a recommendation of the Tiger Task force, constituted by the Prime Minister of India for reorganized management of Project Tiger and the Tiger reserves of India
  • For this purpose, the wildlife act, 1972 was amended to provide for Constituting of the National Tiger conservation authority responsible for implementation of the Project Tiger Plan to protect endangered tigers.

NTCA main points-

  • Chairman of the national tiger conservation authority is Minister for environment and forests.

Power and functions of NTCA-

  • Approves the reserve specific tiger conservation plan prepared by the state government.
  • Assess various aspects of sustainable ecosystem and prevents any unsustainable land use such as mining,Industry, and other projects within the tiger reserves.
  • Ensures compliance of standards for tourism activities and guidelines for project tiger in the buffer and core area of tiger reserves
  • Provide measures for addressing conflicts of men and wild animal and emphasize on co-existence in forest area outside the National Parks, sanctuaries or tiger reserve.
  • Provide information on protection measures including future conservation plan, estimation of population of tiger and its natural prey species, status of habitats, disease Surveillance, mortality survey, patrolling, reports on unexpected happenings, and such other management aspects as it may deem fit.
  • Approve, coordinate research and monitoring on tiger, co-predators, prey habitat related ecological and socio-economic parameters and their evaluation.
  • Ensure that area linking tiger reserves, protected area with another protected area or tiger reserve are not diverted for ecologically unsustainable uses, except in public interest and with the approval of the National Board for Wildlife and on the advice of the Tiger Conservation authority.
  • Facilitate and support the tiger reserve management in the state for biodiversity conservation through eco-development and people’s participation and to support similar initiatives in adjoining areas consistent with the central and state laws
  • Ensure critical support including scientific, information technology and legal support for better implementation of the tiger conservation plan.
  • Facilitate ongoing capacity building program for skill development of officers and staff of tiger reserves.
  • Perform such other functions as may be necessary to carry out the purposes of Wildlife(Protection) Act, 1972 with regard to conservation of tigers and their habitat
  • Laying down annual audit before parliament. 

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण :

  • वर्ष 2005 में, टाइगर टास्क फ़ोर्स की सिफारिशों पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना की गयी थी | इसका गठन भारत के प्रधानमंत्री के द्वारा बाघ परियोजना तथा भारत के बाघ आगारों के पुनर्गठित प्रबंधन के लिए की गयी थी |
  • इस प्रयोजन के लिए, वन्यजीव अधिनियम,   1 9 72 में, लुप्तप्राय बाघों की रक्षा हेतु  बाघ परियोजना की योजना के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के गठन की व्यवस्था करने के लिए संशोधन किया गया |

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के मुख्य बिंदु :

  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण का अध्यक्ष पर्यावरण एवं वन मंत्री होता है |

एनटीसीए(राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ) की शक्तियाँ तथा कार्य :

  • राज्य सरकार के द्वारा तैयार की गयी  विशिष्ट रूप से आगार के सम्बन्ध में बाघ संरक्षण  योजना को मंजूरी देता है |
  • सतत पारिस्थितिकी तंत्र के विभिन्न पहलुओं का आकलन करता है तथा भूमि के किसी भी अरक्षणीय इस्तेमाल जैसे कि खनन, उद्योग तथा बाघ आगारों के भीतर अन्य परियोजनाओं पर रोक लगाता है |
  • पर्यटन गतिविधियों के मानदंडों तथा बाघ आगारों के क्रोड तथा बुफेर क्षेत्रों में बाघ परियोजना के दिशा-निर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित करता है |
  • मनुष्य तथा जंगली जानवरों के संघर्ष को कम करने के लिए उपाय प्रदान करता है तथा राष्ट्रीय उद्यानों, अभ्यारण्यों, अथवा बाघ आगारों के बाहरी क्षेत्रों में सह-अस्तित्व पर बल देता है |
  • संरक्षण उपायों पर सूचनाएँ प्रदान करता है जिनमें भावी संरक्षण योजना, बाघों तथा इसकी शिकार प्रजातियों की जनसंख्या  का अनुमान, प्राकृतिक वास स्थलों की स्थिति,रोग निगरानी, मृत्यु दर सर्वेक्षण, गश्ती, अनपेक्षित घटनाओं पर रिपोर्ट्स, तथा इस प्रकार के अन्य प्रबंधन पहलू शामिल हैं, जिनकी सूचना प्रदान करना यह ठीक समझता है |
  • बाघ, सह-शिकारी, शिकार, तथा प्राकृतिक वास स्थलों से सम्बंधित पारिस्थितिक एवं सामाजिक-आर्थिक मापदंडों तथा उनके मूल्यांकन पर अनुसंधान तथा निगरानी को मंजूरी देता है |
  • यह सुनिश्चित करता है कि सार्वजनिक हित के  तथा वन्यजीव राष्ट्रीय बोर्ड की अनुमति के साथ एवं संरक्षण प्राधिकरण की सलाह के अतिरिक्त बाघ आगार, संरक्षित क्षेत्र को अन्य संरक्षित क्षेत्रों अथवा बाघ आगारों से जोड़ने वाले क्षेत्र पारिस्थितिक रूप से अरक्षणीय उपयोगों के लिए मोडें ना जाएँ |
  • जैव विविधता के लिए, पारिस्थितिक अनुकूल विकास तथा लोगों की सहभागिता के माध्यम से  केंद्र तथा राज्य के कानूनों के अनुरूप , राज्य तथा उसके आसपास के क्षेत्रों में बाघ आगार प्रबंधन को सुगम बनाना तथा सहायता करना |
  • बाघ संरक्षण योजना के बेहतर कार्यान्वयन के लिए वैज्ञानिक, सूचना प्रौद्योगिकी और कानूनी सहायता सहित महत्वपूर्ण सहायता सुनिश्चित करना |
  • बाघ आगारों के अधिकारियों तथा कर्मचारियों के कौशल विकास के लिए वर्तमान में जारी क्षमता निर्माण कार्यक्रम को सुगम बनाना |
  • ऐसे अन्य कार्यों को करना जो बाघों तथा उनके प्राकृतिक वास स्थलों के सम्बन्ध में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के उद्देश्यों को पूरा करने में आवश्यक हो सकते हैं |
  • वार्षिक अंकेक्षण को संसद में रखना | 

2010 Assessment Methodology-

  • The three phases of tiger estimation procedure are as follows-

Phase 1: field data collected at the beat-level (i.e the primary patrolling unit) by trained personnel using a standardised protocol.

Phase 2: Analysis of habitat status of tiger in Forests using satellite data.

Phase 3: Camera trapping was the primary method  used, where individual tigers were identified from photographs based on their unique stripe patterns. This information was analysed using a well established scientific framework. Camera trapping was carried out by teams of wildlife biologists and local forest personnel.

  • The All India Tiger estimation exercise is one of the most crucial components of our national tiger conservation efforts.

Since 2006, this monitoring exercise is Being undertaken every four years.

  • Based on the tiger numbers recorded in sampled sites, an estimate for other contiguous tiger-occupied landscapes, was made.
  • Additional information like tiger signs, prey availability, habitat conditions and human disturbance was used.
  • Thus, the final estimates provide a comprehensive and statistically robust result for the whole country.

New findings of 2010 National Tiger Assessment-

  1. Most tiger source sites continue to maintain viable tiger populations
  2. Evidence of new area populated by Tigers eg. Kuno-Palpur Wildlife sanctuary and Shivpuri National park in Madhya Pradesh.
  3. New methodology for estimating population in Sunderbans. 

2010 में किये गए आकलन की क्रियाविधि :

  • बाघ आकलन प्रक्रिया के तीन चरण निम्नलिखित हैं :

प्रथम चरण : एक मानकीकृत प्रोटोकॉल का उपयोग करते हुए प्रशिक्षित कर्मियों के द्वारा  गश्त के स्तर (अर्थात् प्राथमिक गश्त ईकाई ) पर संगृहीत फील्ड डाटा |

द्वितीय चरण : सेटेलाईट डाटा का उपयोग करते  हुए वनों में बाघ के प्राकृतिक वास स्थलों का विश्लेषण |

तृतीय चरण : कैमरा प्रपाशन, इस्तेमाल की जाने वाली मुख्य विधि थी, जिसमें बाघों को उनकी अद्वितीय धारी प्रारूपों के आधार पर तस्वीरों के माध्यम से चिन्हित किया गया था | इस जानकारी का विश्लेषण सुव्यवस्थित वैज्ञानिक ढाँचे का इस्तेमाल करते  हुए किया जाता था | कैमरा प्रपाशन को वन्यजीव जीव विज्ञानियों तथा स्थानीय वन कर्मियों के समूह के द्वारा अंजाम दिया जाता था |

  • अखिल भारतीय बाघ आकलन का अभ्यास हमारे बाघ संरक्षण के प्रयासों के महत्वपूर्ण घटकों में से एक है |
  • 2006 से, यह निगरानी कार्य प्रत्येक चार वर्षों के अन्तराल पर किया जा रहा है |
  • चयनित स्थलों पर बाघों की अभिलेखित संख्या के आधार पर, समीप के बाघ-अधिवासित भू-दृश्यों के लिए अनुमान लगाए जाते थे |
  • बाघ के चिन्ह, शिकार की उपलब्धता, वास स्थलों की स्थितियाँ , तथा मानव व्यवधान जैसी अतिरिक्त सूचनाओं का उपयोग किया जाता था |
  • इस प्रकार , अंतिम अनुमान पूरे देश के लिए एक व्यापक तथा सांख्यिकी रूप  से ठोस परिणाम प्रदान करते हैं |

राष्ट्रीय बाघ आकलन 2010  के नए जांच निष्कर्ष :

  1. बाघों के उद्गम वाले अधिकांश स्थलों में बाघों की जीवक्षम आबादियों का अनुरक्षण जारी है |
  2. बाघों के द्वारा वासित नए क्षेत्रों के प्रमाण | उदाहरण : कूनो पालपूर वन्यजीव अभ्यारण्य तथा मध्य प्रदेश का शिवपुरी राष्ट्रीय उद्यान |
  3. सुंदरवन में आबादी का अनुमान लगाने की नयी पद्धति |

 

 

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