Best HCS Study Notes | Online Preparation for UPSC | IAS Exam- 2018

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INA, Upsurges (1945-46), Cabinet mission

Indian National Army

The Indian National army

  • The idea first conceived by Mohan Singh (an Indian officer of the British Indian Army), in Malaya.
  • He decided not to join the retreating British Army and instead turned to the Japanese for help.

October 1943:

  • He set up a Provisional Indian Government with headquarters at Rangoon and Singapore.
  • This Provisional Government was recognised by the Axis powers.
  • Recruits were trained and funds collected for the INA.

July 1944:

  • Subhash Bose asked for Gandhi’s blessings for “India’s last war of independence”.
  • One INA battalion commanded by Shah Nawaz was allowed to accompany the Japanese Army to the Indo-Burma front and participate in the Imphal campaign.
  • But the discriminatory treatment by the Japanese, which included being denied rations and arms and being made to do menial work for the Japanese units, completely demoralised the INA units.

Post-War National Upsurge-June 1945 to February 1946

Two basic strands of national upsurge can be identified during the last two years of British rule:

  1. Tortuous negotiations involving the Government, Congress and Muslim League, increasingly accompanied by communal violence and culminating in freedom and the partition.
  2. Sporadic, localised and often extremely militant and united mass action by workers, peasants and states’ peoples which took the form of a countrywide strike wave.

Why a Change in Government’s Attitude

  • The end of the War resulted in a change in balance of global power.
  • UK was no More a power while the USA and USSR emerged as superpowers, both of which favoured freedom for India.
  • The new Labour Government was more sympathetic to Indian demands.

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आज़ाद हिन्द फौज :

  • इस योजना पर सबसे पहले मोहन सिंह (ब्रिटिश इंडियन आर्मी में भारतीय अफसर ) ने मलाया में विचार किया था |
  • उन्होंने साम्राज्यवादी ब्रिटिश सेना में सेवा करने के स्थान पर जापानी सेवा की सहायता से अंग्रेजों को भारत से निष्कासित करने का निश्चय किया|

अक्टूबर 1943:

  • उन्होंने एक अल्पकालीन भारतीय सरकार की स्थापना की जिसका मुख्यालय रंगून तथा सिंगापुर में था |
  • इस अस्थायी सरकार को धुरी राष्ट्रों के द्वारा मान्यता दी गयी थी |
  • रंगरूट प्रशिक्षित थे तथा आज़ाद हिन्द फौज के लिए धन इकठ्ठा करते थे |

जुलाई 1944 :

  • सुभाष बोस ने “स्वतंत्रता के लिए भारत के आखिरी युद्ध” के लिए गाँधी जी से आशीर्वाद माँगा |  
  • इंडो-बर्मा युद्धस्थल पर शाह नवाज़ के नेतृत्व में आजाद हिन्द फौज के एक बटालियन को जापानी सेना का साथ देने तथा इम्फाल अभियान में भाग लेने की अनुमति दी गयी |
  • किन्तु जापानियों द्वारा भेदभाव पूर्ण व्यवहार, जिसमें रसद तथा हथियारों से वंचित रखना तथा जापानी सेना की तुलना में निम्न स्तरीय  कार्य करवाना शामिल था | इन कृत्यों से आजाद हिन्द फौज के सैनिकों का मनोबल गिरा

युद्ध के बाद की राष्ट्रीय  – जून 1945 से फरवरी 1946 :

पिछले दो वर्षों के ब्रिटिश शासन के दौरान राष्ट्रीय विप्लव के संबंध में दो आधारभूत कारकों का विश्लेषण किया जा सकता है |

  1. सरकार, कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग तीनों ही  कुटिल समझौते करने में सलंग्न रहे | इससे सांप्रदायिक दंगों को बढ़ावा मिला जिसकी चरम परिणिति स्वतंत्रता तथा देश के विभाजन के रूप में सामने आई |
  2. मजदूरों, किसानों तथा राज्यों के लोगों के द्वारा छिटपुट, स्थानीय तथा अक्सर अति उग्र एवं एकीकृत सामूहिक अभियान चलाये गए जिन्होंने  एक देशव्यापी आन्दोलन का विकराल रूप धारण कर लिया |

सरकार की रुख में बदलाव क्यों ?

  • युद्ध की समाप्ति का परिणाम विश्व शक्ति के संतुलन में परिवर्तन के रूप में हुआ |
  • ब्रिटेन अब शक्तिशाली नहीं रहा था जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका तथा सोवियत संघ महा शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में उभरे , तथा ये दोनों ही भारत की आज़ादी के पक्ष में थे |
  • नयी लेबर सरकार  भारतीय माँगो के प्रति अधिक सहानुभूतिपूर्ण थी |

Congress election Campaign

Methods adopted during campaign:

  • Glorification of martyrs and condemnation of officials
  • Relief funds were collected for sufferers
  • The officials responsible for causing pain were condemned

INA prisoners

Congress Support for INA Prisoners

  • At the first post-war Congress session in September 1945 at Bombay, a strong resolution was adopted declaring Congress support for the INA cause.
  • Defence of INA prisoners in the court was organised by Bhulabhai Desai, Tej Bahadur Sapru, Kailash Nath Katju, Nehru and Asaf Ali.

Those who supported the INA cause

  • Congress, Muslim League, Communist Party, Unionists, Akalis, Justice Party, Ahrars in Rawalpindi, Rashtriya Swayamsevak Sangh, Hindu Mahasabha and the Sikh League.
  • Britain realised the political significance of the INA issue.

Three Upsurges -Winter of 1945-46

  • November 21, 1945: In Calcutta over the INA trials.
  • February 11, 1946: In Calcutta against the seven-year sentence to INA officer Rashid Ali.
  • February 18, 1946: In Bombay, strike by the Royal Indian Navy Ratings.

कांग्रेस का चुनावी अभियान

अभियान के दौरान अपनाई गयी पद्धतियाँ :

  • शहीदों की प्रशंसा तथा अधिकारियों की निंदा |
  • पीड़ितों के लिए राहत निधि जुटाई गयी |
  • दमन लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों की निंदा की गयी |

आजाद हिंद फ़ौज के बंदी

आजाद हिन्द फ़ौज के युद्धबंदियों को कांग्रेस का समर्थन

  • युद्ध के बाद सितम्बर 1945 में कांग्रेस के बॉम्बे अधिवेशन में, आज़ाद हिन्द फ़ौज के कैदियों का  समर्थन करने के लिए एक सशक्त प्रस्ताव पारित किया गया |
  • अदालत में, आज़ाद हिन्द फ़ौज के युद्धबंदियों के बचाव में भोलाभाई देसाई, तेज बहादुर सप्रू, कैलाश नाथ काटजू, नेहरु तथा असफ अली के द्वारा पैरवी  की गयी |

वे जिन्होंने आज़ाद हिन्द फ़ौज का समर्थन किया –

  • कांग्रेस, मुस्लिम लीग, साम्यवादी पार्टी, संघवादी, अकाली, जस्टिस पार्टी, रावलपिंडी के अहरार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, हिन्दू महासभा, तथा सिख लीग |
  • ब्रिटेन ने आज़ाद हिन्द फ़ौज मुद्दे के राजनीतिक महत्व को महसूस किया |

1945-46 की सर्दियाँ में तीन  विद्रोह :

  • 21 नवम्बर 1945 : कलकत्ता में ,आजाद हिन्द फ़ौज पर मुकदमे के विरुद्ध  |
  • 11 फरवरी 1946 :कलकत्ता में, आज़ाद हिन्द फ़ौज के अधिकारी राशिद अली  को सात वर्षों की सजा सुनाये के विरुद्ध |
  • 18 फरवरी 1946 : बॉम्बे में, भारतीय जल सेना के नाविकों द्वारा हड़ताल |

The Cabinet Mission

  • The Attlee Government announced in February 1946 the decision to send a high-powered mission of three British Cabinet members to find out ways and means for a negotiated, peaceful transfer of power to India.

Members were:

  • Pethick Lawrence (Secretary of State for India)
  • Stafford Cripps (President of the Board of Trade)

Why British Withdrawal Seemed Imminent Now?

  • The success of nationalist forces in the struggle for hegemony was fairly evident by the end of the War.
  • Nationalism had penetrated into hitherto untouched sections and areas.
  • There was a demonstration among the bureaucracy and the loyalist sections, because the paucity of ICS recruits and a policy of Indianisation had ended the British domination of the ICS as early as the First World War and by 1939, there existed British-Indian parity.

On the Eve of Cabinet Mission Plan

The Congress demanded:

  • Power be transferred to one centre .
  • Autonomy to Muslim-majority provinces

कैबिनेट मिशन :

  • ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एटली ने वार्तापूर्ण तथा शांतिपूर्ण तरीके से भारत को सत्ता हस्तांतरित करने के तरीकों तथा माध्यमों का पता लगाने के लिए  ब्रिटिश मंत्रिमंडल के तीन सदस्यों के उच्च-स्तरीय शिष्टमंडल को भारत भेजने की घोषणा की |

ये सदस्य थे :

  • पेथिक लौरेंस ( भारत के राज्य सचिव )
  • स्टैफोर्ड क्रिप्स ( व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष )

अंग्रेजों की वापसी अब अपरिहार्य क्यों प्रतीत हो रही थी ?

  • आजादी के संघर्ष में राष्ट्रवादी ताकतों की सफलता से उनकी विजय निर्णायक स्थिति में पँहुच चुकी थी  
  • अब तक अछूते रहे वर्गों तथा क्षेत्रों में भी राष्ट्रवाद प्रवेश कर चुका था |
  • अधिकारी वर्ग तथा सरकार भक्त वर्ग के बीच असंतोष था , क्योंकि भारतीय सिविल सेवा की भर्तियों में कमी एवं भारतीयकरण की नीति ने प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत से  भारतीय सिविल सेवा में ब्रिटिश प्रभुत्व का अंत कर दिया था तथा 1939 तक इसमें ब्रिटिश तथा भारतीयों की समान संख्या थी |

कैबिनेट मिशन योजना की पूर्व संध्या पर :

कांग्रेस ने माँग की कि  :

  • वह सत्ता का हस्तांतरण केवल  एककृत केंद्र में ही स्वीकार करेगी  
  • मुस्लिम बहुल प्रांतो को स्वायत्तता |

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