Best HCS Study Content 2018 | Prelims & Mains Exam | IAS | UPSC

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Quit India Movement, Rajagopalachari Formula, Desai-Liaquat Pact and Wavell Plan

Quit India Movement

  • After Cripps departure, Gandhi framed a resolution calling for British withdrawal and a non-violent non-cooperation movement against any Japanese invasion.
  • The CWC meeting at Wardha (July 14, 1942) accepted the idea of a struggle.

Why Start a Struggle Now

The reasons were several:

  • The failure of the Cripps Mission to solve the constitutional deadlock exposed Britain’s unchanged attitude on constitutional advance.
  • There was popular discontent because of rising prices and shortage of rice, salt, etc.
  • News of reverses’ suffered by the British in South-East Asia and an imminent British collapse enhanced popular willingness to give expression to discontent.

AICC Meeting: Gowalia Tank, Bombay (August 8, 1942):

The Quit India Resolution was ratified and the meeting resolved to :

  • Demand an immediate end to British rule in India.
  • Declare commitment of free India to defend itself against all types of Fascism and imperialism.
  • Form a provisional Government of India after British withdrawal.

Gandhi’s General Instructions to Different Sections:

  • Government servants: Do not resign but declare your allegiance to the Congress.
  • Soldiers: Do not leave the Army but do not fire on compatriots.
  • Students: If confident, leave studies.
  • Peasants: If zamindars are anti-government, pay mutually agreed rent, and if zamindars are pro-government, do not pay rent.

Spread of the Movement

  • Gandhi had carefully built the tempo through individual civil disobedience movements, organisational revamping and a consistent propaganda campaign.
  • The Government, however, was in no mood to either negotiate with the Congress or wait for the movement to be formally launched.
  • In the early hours of August 9, in a single sweep, all the top leaders, of the Congress were arrested and taken to unknown destinations.

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भारत छोड़ो आन्दोलन

  • क्रिप्स के जाने  के बाद, गांधी ने ब्रिटिश प्रस्ताव वापस लेने और किसी भी जापानी आक्रमण के खिलाफ एक अहिंसक असहयोग आंदोलन के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया।
  • वर्धा में कांग्रेस कार्यकारिणी  की बैठक (14 जुलाई, 1942) ने आन्दोलन के प्रस्ताव को पास किया |

इस समय आन्दोलन क्यों प्रारंभ करना

इसके कई सारे कारण थे :-

  • संवैधानिक गतिरोध को हल करने के लिए क्रिप्स मिशन की विफलता ने संवैधानिक सुधर पर ब्रिटेन के अपरिवर्तित रुख को स्पष्ट कर दिया |
  • बढ़ती कीमतों व चावल, नमक इत्यादि की कमी के कारण असंतोष गहराता जा रहा था |
  • दक्षिण पूर्व एशिया में ब्रिटेन की पराजय तथा शक्तिशाली ब्रिटेन के पतन के समाचार ने असंतोष को व्यक्त करने की इच्छाशक्ति भारतीयों में जगाई

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक : गोवलिया टैंक, बॉम्बे (8 अगस्त, 1942) :

इस बैठक में अंग्रेजों भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित किया गया तथा घोषणा की गई कि :

  • भारत में ब्रिटिश शासन के तत्काल अंत की मांग |
  • घोषणा की गई कि स्वतंत्र भारत सभी प्रकार की फासीवाद व साम्राज्यवाद से स्वयं की रक्षा करेगा
  • अंग्रेजों  की वापसी के बाद कुछ समय के लिए एक अस्थायी सरकार की स्थापना |

विभिन्न वर्गों को गाँधी के सामान्य निर्देश :

  • सरकारी सेवक : इस्तीफा न दे, लेकिन कांग्रेस के प्रति अपनी राजभक्ति घोषित कर दें |
  • सैनिक : सेना को न छोड़े लेकिन भारतीयों एवं अपने सहयोगियों  पर गोली भी न चलाये |
  • विद्यार्थी : यदि आत्मविश्वास हो तभी पढाई छोड़े
  • किसान : यदि जमींदार सरकार विरोधी हो तो आपसी सहमती से  तय किराया दें, और यदि जमींदार सरकार समर्थक हो तो किराये का भुगतान न करे |

आन्दोलन का प्रसार

  • गाँधी सविनय अवज्ञा आंदोलन, संगठनात्मक सुधार और एक निरंतर प्रचार अभियान के माध्यम से आन्दोलन का निर्माण कर चुके थे |
  • सरकार हालाँकि किसी भी तरह से या तो कांग्रेस के साथ बातचीत करने के मूड में नहीं थी और न ही आन्दोलन के औपचारिक रूप से शुरू होने के इन्तेजार करने के |
  • 9 अगस्त शुरूआती घंटों में एक बार में ही कांग्रेस के समस्त बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें अज्ञात ठिकानों पर ले जाया गया |

Quit India Movement

Tamluk (Midnapore)

  • From December 1942 to September 1944
  • Undertook cyclone relief work, sanctioned grants to schools, supplied paddy from the rich to the poor,

Satara

  • Mid-1943 to 1945
  • Named “Prati Sarkar”
  • Organised under leaders like Y.B. Chavan, Nana Patil, etc.

Extent of Mass Participation

The participation was on many levels.

  • Youth: Especially the students of schools and colleges, remained in the forefront.
  • Women: Especially school and college girls, actively participated, and included Aruna Asaf Ali, Sucheta Kripalani and Usha Mehta.
  • Workers: went on strikes and faced repression.

Government Repression

  • Although martial law was not applied, the repression was severe.
  • Agitating crowds were lathi-charged, tear-gassed and fired Upon.
  • The ‘number of those killed is estimated at 10,000.
  • The press was muzzled.

Evaluation of movement:

  • Main storm centres of the movement were eastern UP, Bihar, Midnapore, Maharashtra, Karnataka.
  • The movement established the truth that it was no longer possible to rule India without the wishes of Indians.
  • The element of spontaneity was higher than before.

भारत छोडो आन्दोलन

तामलुक (मिदनापुर)

  • दिसम्बर 1942 से सितम्बर 1944 तक
  • चक्रवात राहत कार्य किया, विद्यालयों को अनुदान प्रदान किया, अमीरों से निर्धनों को अनाज दिया |

सतारा

  • 1943 के मध्य से 1945 तक |
  • इसे “प्रति सरकार” का नाम दिया गया  
  • वाई. बी. चवन, नाना पाटिल इत्यादि जैसे नेताओं के नेतृत्व में संगठित |

आन्दोलन में जनता की भागीदारी

भागीदारी कई स्तर पर थे :

  • युवा :  विशेषकर विद्यालयों व विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा, जो हमेशा सबसे आगे थे |
  • महिलाएं : विशेषकर विद्यालयों व विश्वविद्यालयों की लडकियां जिन्होंने सक्रियता से भाग लिया और इसमें अरुणा असफ अली, सुचेता कृपलानी और उषा मेहता शामिल थीं |
  • श्रमिक : हड़ताल किया व दमन का सामना किया |

सरकारी दमन

  • हालाँकि मार्शल लॉ लागू नहीं किया गया था लेकिन फिर भी दमन गंभीर था |
  • उत्तेजित भीड़ पर लाठीचार्ज किया गया, आंसू गैस और गोलीबारी  की गई |
  • मारे गए लोगों की संख्या अनुमानतः 10,000 के करीब थी |
  • प्रेस को प्रतिबंधित कर दिया गया |

आन्दोलन का मूल्यांकन  :

  • आन्दोलन के मुख्य प्रभावी केंद्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार, मिदनापुर, महाराष्ट्र, कर्नाटक थे
  • आन्दोलन ने इस सत्य को जगजाहिर कर दिया कि बिना भारतीयों की इच्छा के भारत पर राज करना संभव नहीं था |
  • पूर्ववर्ती आंदोलनों की तुलना में इस बार स्वत: स्फूर्तता का तत्व कहीं अधिक था |

Famine of 1943:

  • The worst-affected areas were south-west Bengal comprising the Tamluk-Contai-Diamond Harbour region, Dacca, Faridpur, Tippera and Noakhali.
  • Around 1.5 to 3 million people perished in this basically man-made famine, the epidemics (malaria, cholera, smallpox), malnutrition and starvation.

The fundamental causes of the famine :

  • The need to feed a vast Army diverted foodstuffs.
  • Rice imports from Burma and South-East Asia had been stopped.
  • The famine got aggravated by gross mismanagement and deliberate profiteering

Rajagopalachari Formula :

  • Meanwhile, efforts were on to solve the ongoing constitutional crisis, and some individuals also tried to come up with constitutional proposals.
  • C. Rajagopalachari, the veteran Congress leader, prepared a formula for Congress-League cooperation.
  • It was a tacit acceptance of the League’s demand for Pakistan.

The main points in CR Plan were:

  • Muslim League to endorse Congress demand for independence.
  • League to cooperate with Congress in forming a provisional government at centre.
  • After the end of the war, the entire population of Muslim majority areas in the North-West and North-East India to decide by a plebiscite, whether or not to form a separate sovereign state.

1943 का अकाल :

  • सबसे अधिक बुरी तरह प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में दक्षिण-पश्चिमी बंगाल था जिसमें तामलुक-कांती-हीरा हारबर क्षेत्र, ढाका, फरीदपुर, टिप्पेर और नोआखाली शामिल थे |
  • लगभग 15 से 30 लाख लोग इस मानव निर्मित भीषण  अकाल व महामारी (मलेरिया, कॉलरा, चेचक), कुपोषण व भुखमरी के चपेट में आ गए |

अकाल के मूल कारण :

  • एक विशाल सेना के भोजन की जरुरत ने खाद्य पदार्थों में कमी ला दी |
  • बर्मा व दक्षिण-पूर्व एशिया से चवाल का आयात रोक दिया गया था |
  • कुप्रबंधन व जानबूझकर की गई मुनाफाखोरी के कारण यह अकाल और ज्यादा भीषण हो गया |

राजगोपालाचारी योजना :

  • इसी बीच, तत्कालीन संवैधानिक संकट का समाधान करने के लिए कई प्रयास किये जा रहे थे, कुछ व्यक्ति इस संवैधानिक संकट से पार पाने की कोशिश कर रहे थे |
  • दिग्गज कोंग्रेस नेता सी. राजगोपालाचारी ने कांग्रेस एवं  लीग के बीच समझौते के  लिए एक योजना बनाई |
  • यह योजना अप्रत्यक्ष रूप से पृथक पाकिस्तान की अवधारणा का समर्थन करती थी |

इस योजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार थे :-

  • मुस्लिम लीग ,भारतीय स्वतंत्रता  की मांग का समर्थन करें|
  • केंद्र में एक अंतरिम सरकार बनाने में लीग कांग्रेस कांग्रेस का साथ दे|
  • युद्ध समाप्ति के पश्चात् भारत के उत्तर-पश्चिम व उत्तर-पूर्व के उन क्षेत्रों में जहाँ मुसलमान बहुसंख्यक थे, वहा जनमत द्वारा यह निश्चित करना था कि एक अलग संप्रभु राज्य का निर्माण होना है या नहीं |

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