Sources of Ancient History of Haryana | HCS Online Preparation

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Sources of Ancient Period of Haryana

  • Haryana is located between 27°39 to 30°55 north latitude and 74.28 ° to 77°36 east longitude. The hills of Shivalik in the north of this region, the mountains of Aravali and the dry region of Rajasthan in the south and the Ghaggar river forms its western boundary.
  • The river Yamuna determines the eastern boundary of this region and separates it from Uttar Pradesh.

We can divide the sources of history of Haryana into three parts.
1. Sources of History of Ancient Haryana
2. Source of History of Medieval Haryana
3. Sources of History of Modern Haryana

  1. Sources of History of Ancient Haryana: Sources that can be used in the history of ancient Haryana can also be divided into two parts-
    (i) Literary sources,
    (ii) Archaeological sources

(i) Literary Source: There are many types of literary material which sheds light on our ancient history, which we can broadly divided into two parts:
Indian source and
Foreign source.

(ii) Archaeological Sources: Haryana area is rich in archaeological material. By doing survey, there are many regions that are from the earliest to the medieval period. Some places have archaeological excavations like Mitchal, Sugh, Dhaulpur, Bhagwanpura, Raja Karna Fort, Baalu, Sis Wal, Agroha, Banvali, Rakhi Cadhi etc.

Coins: Coins were found from different parts of Haryana state. These are all important sources of political, social and economic history of Haryana.

हरियाणा के इतिहास के स्रोत

  • हरियाणा प्रदेश 27.39° से 30.55 उत्तरी अक्षांश और 74.28° से 77.36° पूर्व रेखांश के मध्य स्थित  है। इसके उत्तर में शिवालिक की पहाड़ियाँ इसके दक्षिण में अरावली की पहाड़ियों और राजस्थान का मरू प्रदेश हैं ,घग्गर नदी इसकी पश्चिमी सीमा बनाती है।
  • यमुना नदी इस प्रदेश की पूर्वी सीमा निर्धारित करती है तथा इसको उत्तर प्रदेश से अलग करती है।

हम हरियाणा के इतिहास के स्रोतों को तीन भागों में बांट सकते हैं।

  1. प्राचीन हरियाणा के इतिहास के स्रोत
  2. मध्यकालीन हरियाणा के इतिहास के स्रोत
  3. आधुनिक हरियाणा के इतिहास के स्रोत
  1. प्राचीन हरियाणा के इतिहास के स्रोतः प्राचीन हरियाणा के इतिहास के निर्माण में काम आने वाले स्रोतों को भी दो भागों में बांटा जा सकता है-

(i) साहित्यिक स्रोत,

(ii) पुरातात्विक स्रोत

(i) साहित्यिक स्रोतः हमारे प्राचीन इतिहास पर प्रकाश डालने वाली साहित्यिक सामग्री कई प्रकार की है जिसको मोटे तौर पर हम दो भागों में बांट सकते हैं:

  • भारतीय स्रोत और
  • विदेशी स्रोत।

(ii) पुरातात्विक स्रोतः हरियाणा क्षेत्र पुरातात्विक सामग्री के संबंध में बहुत की समृद्ध है। सर्वेक्षण करके इस क्षेत्र से अनेक पुरा स्थल जो आदिकाल से लेकर, मध्यकाल के है, सामने आए हैं। कुछ स्थानों पर पुरातात्विक उत्खनन भी हुए हैं जिनमें मिताचल, सुघ, धौलपुर, भगवानपुरा, राजा कर्ण का किला, बालू, सीस वाल, अग्रोहा, बनावली, राखी गढ़ी आदि शामिल हैं ।

सिक्केः हरियाणा प्रदेश के विभिन्न इलाकों से हमें सिक्के तथा सिक्के ढालने के सांचे मिले हैं। ये सभी हरियाणा के राजनैतिक, सामाजिक व आर्थिक इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत है।

Source of History of Medieval Haryana: Before 1966, Haryana was not a separate political entity. So no efforts were made to source its history.

  • But since Haryana emerged as a separate political entity, the discovery and research work of various sources of work started to create its medieval history.

Historical and literary works: These creations can also be divided into two parts. Works of non-Haryanvi writers and works of Haryanvi authors

  • In the first category of books, the oldest book is of Alberuni is ‘Tehkikaate Hind’. This book is of Mahmud Ghajnavi’s time. In addition to the attack on Mahmud on Thanesar, there is also information about the then social life of Haryana.
  • ‘Tarikhe Subutagin’ gives us a description of the victory of Mahmud’s nephew, Masood, in the year 1038 AD when he defeated Hansi.
  • Nizami’s book ‘Tajul Masir’ gives us the details about the invasions of Mahmoud Gauri. In this book, the author gives important details of Tarain’s second war, while there is no mention of the first war.
  • In his book Tabaqat-i-Nasiri, The writer Minhaz has mentioned the word ‘Haryana’ for the first time. Apart from this, the book also mentions the social and economic life of Haryana as well as discussion of political events.
  • In the time of Tughlaq, an African traveller Ibn Batuta came to India. He left a lot of information in his book ‘Kitabhul Rahla’. In this, the political, religious, and economic status of the Hansi, Hisar and Sirsa regions has also been mentioned.
  • According to Ibn Batuta, there was a red rice in the Sirsa region which had a special demand in Delhi.
  • Details about the History of Akbar’s time are found in  Abul Fazal’s ‘Akbarnama’ and Ain-i-Akbari. And Bada’uni text ‘Muntakhab-ut-Tawarikh’ has details about Haryana’s political, administrative, social and economic history.
  • Maulana Azad’s text Darbar-i-Akbari has details about the second battle of Panipat fought by Hemu.

मध्यकालीन हरियाणा के इतिहास के स्रोतः सन् 1966 से पहले हरियाणा प्रदेश एक पृथक राजनैतिक इकाई नहीं था। इसलिए इसके इतिहास की रचना के लिए स्रोतों का कोई प्रयास नहीं किया गया।

  • लेकिन जबसे हरियाणा एक पृथक राजनैतिक इकाई के रूप में उभर कर आया तबसे इसके मध्यकालीन इतिहास का निर्माण करने के लिए काम में आने वाले विभिन्न स्रोतों की खोज और शोध कार्य आरंभ हुआ।

ऐतिहासिक व साहित्यिक कृतियांः इन कृतियों को भी दो भागों में विभाजित किया जा सकता है। गैर हरियाणवी लेखकों की कृतियां और हरियाणवी लेखकों की कृतियां।

  • प्रथम वर्ग की पुस्तकों में सबसे प्राचीन अलबेरुनी की पुस्तक ‘तहकीकाते हिंद’ है। यह ग्रंथ महमूद गजनवी के समय का है। इसमें महमूद के थानेसर पर आक्रमण के अतिरिक्त हरियाणा के तत्कालीन सामाजिक जीवन के बारे में भी जानकारी मिलती है।
  • बहावी की पुस्तक ‘तारीखे सुबुक्तगीन’ से हमें महमूद के भतीजे मासूद द्वारा 1038 ई० में हाँसी विजय का वर्णन मिलता है।
  • निजामी के ग्रंथ ‘ताजुल मासिर’ में महमूद गौरी के आक्रमणों का विवरण मिलता है। इस पुस्तक में लेखक तराईन के दूसरे युद्ध का महत्वपूर्ण ब्यौरा देता है जबकि प्रथम युद्ध का कोई जिक्र नहीं करता।
  • मिन्हाज की पुस्तक “तबकाते-नासिरी” में लेखक ने सबसे पहले हरियाणा शब्द का उपयोग किया है। इसके अलावा इस पुस्तक में राजनीतिक घटनाओं की चर्चा के साथ-साथ हरियाणा के सामाजिक व आर्थिक जीवन का भी उल्लेख मिलता है।
  • तुगलकों के समय में एक अफ्रीकी यात्री इब्न बतुता भारत आया। उसने बहुमुल्य जानकारी अपने ग्रंथ ‘किताबुल रहला’ के रूप में छोड़ी। इस में हाँसी, हिसार व सिरसा क्षेत्र के राजनैतिक उल्लेख के साथ-साथ सामाजिक, धार्मिक व आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख किया गया है।
  • इब्न बतुता के अनुसार सिरसा क्षेत्र में इस समय लाल रंग का चावल होता था जिसकी दिल्ली में विशेष मांग थी।
  • अकबर के समय के इतिहास की जानकारी अबुल फजल के ‘अकबरनामा’ और ‘आईने अकबरी’ व बदायूंनी के ग्रंथ “मुंतखुब-उल-त्वारिख” में हरियाणा के राजनीतिक, प्रशासनिक, सामाजिक व आर्थिक इतिहास की जानकारी मिलती है।
  • मौलाना आजाद के ग्रंथ ‘दरबारे अकबरी’ में हेमु द्वारा लड़ी गई पानीपत की दूसरी लड़ाई का सुंदर वर्णन किया गया है।

Published Content :

  • Newspapers and Journals : In the last phase of 19th century in Haryana, some newspapers began to publish. These include Rifa-e-aam that was published by Pandit Deen Dayal. “Khair Sandesh” was published in 1899 from Ambala but unfortunately it is not fully available.
  • Jat Gazette in 1916 and ‘Haryana Tilak’ in 1923 were published from Rohtak. Both were weekly newspapers  .
  • They contain very important content related to Haryana’s history. “The Tribune”, ‘Civil and Military Gazette’ also contain important information related to Haryana.
  • Three Government Journals – Haryana Journal of Education, Sapt Sindhu, and Jana Sahitya also highlight on history of Haryana.
  • Government Report – Haryana was a part of Punjab till 1966 AD. So, the government reports were published by Punjab Government.
  • These include Punjab and Ministration Report, Session Report, and Land Settlement Report. Apart from these, Punjab Board of Economic Inquiries has published Economic, Social surveys of many villages.

Different Scholars have given diffrent names to Haryana:

  • Dr. Buddha Prakash – Abhirayana
  • Yadunath Sarkar – Hariyal
  • In the Mahapuran composed by Pushpdant – Haryana
  • Dr. H.R Gupta – Aryana means home of Aryans.

प्रकाशित सामग्री :

  • समाचार पत्र एवं पत्रिकाएं: हरियाणा में 19वीं सदी के अंतिम चरण में कुछ समाचार पत्र निकलने शुरू हुए इनमें “रिफाए आम” झज्जर से जिस पं० दीन दयालु ने निकाला “खैर संदेश 1899 में अंबाला से प्रकाशित हुआ लेकिन दुर्भाग्य ये पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं है।
  • ‘जाट गजट’ 1916 ई० में तथा ‘हरियाणा तिलक’ 1923 ई० में रोहतक से प्रकाशित हुए थे। दोनों अखबार साप्ताहिक थे।
  • इनमें हरियाणा के इतिहास से संबंधित काफी महत्वपूर्ण सामग्री मिलती है। ‘द ट्रिब्यून’, ‘सिविल एण्ड मिलिट्री गजट’ में भी हरियाणा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां हैं।
  • तीन सरकारी पत्रिकाएं- ‘हरियाणा जनरल आफ ऐजूकेशन’, ‘सप्त सिंधु’ और ‘जन साहित्य’ से भी हरियाणा के आधुनिक इतिहास पर महत्वपूर्ण प्रकाश पड़ता है।
  • सरकारी रिपोर्ट- हरियाणा 1966 ई० तक पंजाब राज्य का एक भाग था अतः सरकारी रिपोर्ट पंजाब सरकार द्वारा प्रकाशित है।
  • इनमें पंजाब एण्ड मिनिस्ट्रेशन रिपोर्ट, सेसन रिपोर्ट, भूमि बंदोबस्त रिपोर्ट तथा पंजाब बोर्ड आफ इक्नोमिक इनक्वायरी में काफी गांवों का आर्थिक, सामाजिक सर्वेक्षण छपा है

अलग-अलग विद्वानों ने हरियाणा को अलग-अलग नाम दिए हैं

  • डॉक्टर बुद्ध प्रकाश  – अभिरयाणा
  • यदुनाथ सरकार  – हरियाल
  • पुष्पदंत द्वारा रचित महापुराण में  – हरियाणा
  • डॉक्टर एच आर गुप्ता – आर्यना अर्थात आर्यों का घर

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